मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) आज अपनी द्विमासिक बैठक के फैसले का ऐलान करेगी। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा मौद्रिक नीति का फैसला पेश करेंगे। बाजार की सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि केंद्रीय बैंक रेपो रेट में कोई बदलाव करता है या उसे मौजूदा स्तर पर बरकरार रखता है।
जून की पिछली MPC बैठक में RBI ने रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा था। इस बार भी अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों के बीच दर को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने की उम्मीद मजबूत है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, 72 में से 68 अर्थशास्त्रियों ने दरों में बदलाव नहीं होने का अनुमान जताया है।
फिलहाल बाजार का फोकस केवल रेपो रेट पर नहीं है, बल्कि RBI के महंगाई और आर्थिक विकास के अनुमान तथा आगे की मौद्रिक नीति को लेकर गवर्नर के संकेतों पर भी रहेगा।
मौद्रिक नीति के फैसले में महंगाई और आर्थिक विकास दोनों महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। हाल के महीनों में महंगाई के मोर्चे पर स्थिति में सुधार के संकेत मिले हैं, जबकि घरेलू आर्थिक गतिविधियां भी मजबूत बनी हुई हैं। ऐसे में RBI के सामने विकास को समर्थन देने और महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखने के बीच संतुलन कायम रखने की चुनौती है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और मानसून से जुड़े जोखिमों पर भी केंद्रीय बैंक की नजर रहेगी।
अगर RBI रेपो रेट में बदलाव करता है तो इसका असर बैंकों की उधारी लागत पर पड़ सकता है। खासतौर पर रेपो रेट से जुड़े होम लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की ब्याज दरों और EMI पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। वहीं, दरों को स्थिर रखने पर तत्काल EMI में बदलाव की संभावना कम रहेगी।
अब सभी की नजर RBI के आधिकारिक फैसले और गवर्नर संजय मल्होत्रा के बयान पर है। इससे आने वाले महीनों में ब्याज दरों की दिशा और बाजार की चाल को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। ऑनलाइन साइबर फ्रॉड और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे मामलों पर सख्ती दिखाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को म्यूल अकाउंट्स और साइबर अपराध से जुड़े बैंक खातों से निपटने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने RBI को यह SOP चार सप्ताह के भीतर तैयार कर प्रसारित करने को कहा है। म्यूल अकाउंट्स पर बनेगी एक समान प्रक्रिया म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खातों को कहा जाता है जिनका इस्तेमाल साइबर अपराध से हासिल रकम को प्राप्त करने, आगे भेजने या उसकी पहचान छिपाने के लिए किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट का निर्देश ऐसे खातों की पहचान और उनसे जुड़े मामलों में बैंकों तथा जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। डिजिटल अरेस्ट मामलों पर भी सुप्रीम कोर्ट सख्त सुप्रीम कोर्ट ने साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों से निपटने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट का जोर साइबर अपराध की शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई, पीड़ितों की मदद और ठगी की रकम की जल्द रिकवरी पर है। बैंकों और जांच एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर कोर्ट के निर्देशों का उद्देश्य साइबर ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजकर छिपाने की प्रक्रिया पर रोक लगाना है। इसके लिए बैंकिंग सिस्टम, पुलिस और साइबर अपराध से जुड़ी एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने और कार्रवाई की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के इस कदम से साइबर फ्रॉड के मामलों में संदिग्ध खातों की पहचान, रकम को रोकने और पीड़ितों तक धन वापस पहुंचाने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने की उम्मीद है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय रेलवे ने जुलाई 2026 में माल ढुलाई के क्षेत्र में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। रेलवे ने इस महीने 141.3 मिलियन टन माल की ढुलाई की, जो पिछले साल जुलाई की तुलना में करीब 9 प्रतिशत अधिक है। माल ढुलाई बढ़ने से रेलवे के राजस्व में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जुलाई में माल ढुलाई का नया रिकॉर्ड रेल मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में भारतीय रेलवे ने 141.3 मिलियन टन माल का परिवहन किया। पिछले साल जुलाई में यह आंकड़ा करीब 129.7 मिलियन टन था। इस तरह सालाना आधार पर माल ढुलाई में लगभग 11.6 मिलियन टन की वृद्धि हुई। रेलवे की माल ढुलाई में कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, खाद्यान्न, उर्वरक और पेट्रोलियम उत्पादों समेत कई प्रमुख वस्तुएं शामिल हैं। माल ढुलाई से रेलवे की कमाई बढ़ी माल ढुलाई में वृद्धि का असर रेलवे की कमाई पर भी दिखाई दिया। जुलाई 2026 में माल ढुलाई से रेलवे ने लगभग ₹15,360 करोड़ का राजस्व अर्जित किया, जो पिछले साल के इसी महीने की तुलना में करीब 5 प्रतिशत अधिक है। रेलवे लगातार माल परिवहन को अधिक प्रतिस्पर्धी और सुविधाजनक बनाने पर काम कर रहा है, ताकि सड़क परिवहन की तुलना में अधिक माल रेल नेटवर्क के जरिए भेजा जा सके। कोयला और अन्य प्रमुख वस्तुओं की अहम भूमिका भारतीय रेलवे की कुल माल ढुलाई में कोयले की हिस्सेदारी सबसे महत्वपूर्ण बनी हुई है। बिजली संयंत्रों और औद्योगिक इकाइयों तक कोयला पहुंचाने में रेलवे की बड़ी भूमिका है। इसके अलावा लौह अयस्क, सीमेंट और खाद्यान्न जैसी वस्तुओं की ढुलाई भी रेलवे के माल कारोबार को मजबूत करती है। रेलवे के अनुसार, माल ढुलाई में यह वृद्धि देश की औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों में तेजी का भी संकेत देती है। माल परिवहन बढ़ाने पर रेलवे का फोकस रेलवे अपने माल ढुलाई कारोबार को बढ़ाने के लिए लॉजिस्टिक्स सेवाओं में सुधार, तेज परिवहन और बेहतर कनेक्टिविटी पर जोर दे रहा है। समर्पित माल गलियारों और नए लॉजिस्टिक्स समाधानों से मालगाड़ियों की गति और क्षमता बढ़ाने में मदद मिल रही है। जुलाई में 141.3 मिलियन टन माल ढुलाई का आंकड़ा रेलवे के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। आने वाले महीनों में भी रेलवे का लक्ष्य माल ढुलाई की मात्रा और इससे होने वाले राजस्व को और बढ़ाना है।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में 3 अगस्त 2026 से नया क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम (Closing Auction Session-CAS) लागू हो गया है। NSE और BSE पर यह बदलाव खास तौर पर उन शेयरों के क्लोजिंग प्राइस को निर्धारित करने के तरीके से जुड़ा है, जिनमें फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) कॉन्ट्रैक्ट उपलब्ध हैं। नए सिस्टम का उद्देश्य बाजार में बेहतर मूल्य खोज और पारदर्शिता बढ़ाना है। 3:15 बजे से शुरू होता है क्लोजिंग ऑक्शन नए CAS के तहत नियमित कारोबार के अंतिम चरण के बाद 3:15 बजे से क्लोजिंग ऑक्शन प्रक्रिया शुरू होती है। इसमें खरीद और बिक्री के ऑर्डर को मिलाकर एक ऐसा मूल्य निर्धारित किया जाता है, जिस पर अधिकतम कारोबार हो सके। पहले क्लोजिंग प्राइस निर्धारित करने में अंतिम 30 मिनट के कारोबार के वॉल्यूम-वेटेड औसत मूल्य (VWAP) की महत्वपूर्ण भूमिका होती थी। अब F&O शेयरों के लिए क्लोजिंग ऑक्शन के जरिए अंतिम मूल्य तय किया जाएगा। F&O कारोबार का समय भी बढ़ा SEBI के बदलाव के तहत इक्विटी डेरिवेटिव्स यानी F&O सेगमेंट का कारोबार 10 मिनट बढ़ाकर शाम 3:40 बजे तक कर दिया गया है। सामान्य इक्विटी बाजार का नियमित कारोबार समय 9:15 बजे से 3:30 बजे तक ही रहता है। पहले ही दिन Nifty में दिखी बड़ी हलचल नए सिस्टम के लागू होने के पहले दिन बाजार बंद होने से कुछ मिनट पहले Nifty में करीब 200 अंकों की तेज उछाल देखने को मिली। इससे कारोबारियों के बीच नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम को लेकर चर्चा और भ्रम की स्थिति बनी। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार NSE ने स्पष्ट किया कि Nifty का आधिकारिक क्लोजिंग स्तर सही था और कोई तकनीकी गड़बड़ी नहीं हुई। निवेशकों के लिए क्या बदलेगा? नए सिस्टम का उद्देश्य क्लोजिंग प्राइस को अधिक पारदर्शी और बाजार की वास्तविक मांग-आपूर्ति के अनुरूप बनाना है। इससे अंतिम समय में किसी शेयर के भाव को प्रभावित करने की कोशिशों पर अंकुश लगाने और बेहतर मूल्य खोज में मदद मिलने की उम्मीद है। निवेशकों और ट्रेडरों को अब खासकर F&O शेयरों में कारोबार करते समय 3:15 बजे के बाद की क्लोजिंग ऑक्शन प्रक्रिया को ध्यान में रखना होगा।