चांद से टकराएगा SpaceX का भटका रॉकेट, 8,690 किमी/घंटे की रफ्तार से होगा टकराव
वॉशिंगटन, एजेंसियां। SpaceX के Falcon 9 रॉकेट का करीब चार टन वजनी इस्तेमाल किया हुआ ऊपरी चरण बुधवार, 5 अगस्त 2026 को चंद्रमा की सतह से टकराने वाला है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह टक्कर अनियोजित होगी और इससे चांद की सतह पर नया गड्ढा बन सकता है। इस घटना से पृथ्वी को किसी तरह का खतरा नहीं है।
वैज्ञानिक गणनाओं के अनुसार रॉकेट का यह हिस्सा लगभग 8,690 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चंद्रमा से टकराएगा। टक्कर चंद्रमा के पश्चिमी हिस्से में स्थित Einstein Crater के पास होने का अनुमान है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इससे चंद्र सतह पर धूल और मलबे का बड़ा गुबार उठ सकता है।
यह Falcon 9 का ऊपरी चरण जनवरी 2025 में लॉन्च किए गए एक मिशन का हिस्सा था। मिशन के दौरान इस रॉकेट ने चंद्रमा की ओर जाने वाले Firefly Aerospace के Blue Ghost सहित चंद्र मिशनों को आगे बढ़ाने में मदद की थी। मिशन पूरा होने के बाद यह हिस्सा अंतरिक्ष में रह गया और बाद में चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव में आकर टक्कर के रास्ते पर पहुंच गया।
NASA और अन्य वैज्ञानिक इस घटना को करीब से ट्रैक कर रहे हैं। NASA के मुताबिक ग्राउंड-आधारित दूरबीनों और अंतरिक्ष आधारित उपकरणों की मदद से टक्कर को देखने की कोशिश की जाएगी। वैज्ञानिकों को इससे चंद्रमा की सतह पर प्रभाव, धूल के गुबार और अंतरिक्ष में छोड़े गए रॉकेट के हिस्सों की निगरानी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
यह घटना अंतरिक्ष में बढ़ते स्पेस जंक की समस्या को भी उजागर करती है। भविष्य में चंद्रमा पर मानव मिशन और स्थायी ढांचे विकसित होने के साथ ऐसे अनियंत्रित प्रभावों को रोकना और अंतरिक्ष मलबे की बेहतर निगरानी करना और भी महत्वपूर्ण हो जाएगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
चांद से टकराएगा SpaceX का भटका रॉकेट, 8,690 किमी/घंटे की रफ्तार से होगा टकराव वॉशिंगटन, एजेंसियां। SpaceX के Falcon 9 रॉकेट का करीब चार टन वजनी इस्तेमाल किया हुआ ऊपरी चरण बुधवार, 5 अगस्त 2026 को चंद्रमा की सतह से टकराने वाला है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह टक्कर अनियोजित होगी और इससे चांद की सतह पर नया गड्ढा बन सकता है। इस घटना से पृथ्वी को किसी तरह का खतरा नहीं है। करीब 8,690 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से टकराएगा वैज्ञानिक गणनाओं के अनुसार रॉकेट का यह हिस्सा लगभग 8,690 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चंद्रमा से टकराएगा। टक्कर चंद्रमा के पश्चिमी हिस्से में स्थित Einstein Crater के पास होने का अनुमान है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इससे चंद्र सतह पर धूल और मलबे का बड़ा गुबार उठ सकता है। 2025 के चंद्र मिशन से जुड़ा है रॉकेट यह Falcon 9 का ऊपरी चरण जनवरी 2025 में लॉन्च किए गए एक मिशन का हिस्सा था। मिशन के दौरान इस रॉकेट ने चंद्रमा की ओर जाने वाले Firefly Aerospace के Blue Ghost सहित चंद्र मिशनों को आगे बढ़ाने में मदद की थी। मिशन पूरा होने के बाद यह हिस्सा अंतरिक्ष में रह गया और बाद में चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव में आकर टक्कर के रास्ते पर पहुंच गया। NASA की वैज्ञानिकों पर नजर NASA और अन्य वैज्ञानिक इस घटना को करीब से ट्रैक कर रहे हैं। NASA के मुताबिक ग्राउंड-आधारित दूरबीनों और अंतरिक्ष आधारित उपकरणों की मदद से टक्कर को देखने की कोशिश की जाएगी। वैज्ञानिकों को इससे चंद्रमा की सतह पर प्रभाव, धूल के गुबार और अंतरिक्ष में छोड़े गए रॉकेट के हिस्सों की निगरानी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। यह घटना अंतरिक्ष में बढ़ते स्पेस जंक की समस्या को भी उजागर करती है। भविष्य में चंद्रमा पर मानव मिशन और स्थायी ढांचे विकसित होने के साथ ऐसे अनियंत्रित प्रभावों को रोकना और अंतरिक्ष मलबे की बेहतर निगरानी करना और भी महत्वपूर्ण हो जाएगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों के लिए Amazon और Flipkart पर एक बार फिर कई कैटेगरी के प्रोडक्ट्स पर आकर्षक ऑफर देखने को मिल रहे हैं। स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, होम अप्लायंसेज और रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजों पर डिस्काउंट के साथ बैंक ऑफर और एक्सचेंज बेनिफिट भी उपलब्ध हैं। हालांकि, हर प्रोडक्ट पर 50 प्रतिशत से ज्यादा की छूट नहीं है और ऑफर मॉडल, बैंक कार्ड तथा स्टॉक के हिसाब से अलग-अलग हो सकते हैं। स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स पर खास नजर सेल के दौरान स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी, लैपटॉप, ईयरबड्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स पर कंपनियां और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अलग-अलग तरह के डिस्काउंट दे रहे हैं। कुछ पुराने मॉडल और चुनिंदा प्रोडक्ट्स पर कीमत में बड़ी कटौती देखने को मिल सकती है। इसके अलावा बैंक कार्ड से भुगतान करने पर अतिरिक्त छूट और कुछ उत्पादों पर एक्सचेंज ऑफर भी मिल सकता है। इसलिए किसी प्रोडक्ट को खरीदने से पहले उसकी वास्तविक कीमत और सभी ऑफर्स को जांचना जरूरी है। आधे से भी कम कीमत वाले ऑफर में सावधानी जरूरी कई बार सेल में किसी सामान की कीमत सामान्य बाजार मूल्य की तुलना में काफी कम दिखाई देती है। लेकिन ग्राहकों को केवल डिस्काउंट प्रतिशत देखकर खरीदारी नहीं करनी चाहिए। MRP, पिछले बिक्री मूल्य, बैंक डिस्काउंट, डिलीवरी चार्ज और एक्सचेंज शर्तों को भी देखना जरूरी है। खास तौर पर “50% से ज्यादा छूट” वाले ऑफर में यह जांचना बेहतर है कि डिस्काउंट वास्तव में किस कीमत पर लागू हो रहा है और क्या इसके लिए कोई अतिरिक्त शर्त है। खरीदारी से पहले इन बातों का रखें ध्यान Amazon और Flipkart पर सेल के दौरान ऑफर तेजी से बदल सकते हैं। कुछ प्रोडक्ट्स पर सीमित स्टॉक होने के कारण कीमत कुछ समय बाद बढ़ भी सकती है। वहीं बैंक ऑफर के लिए निर्धारित कार्ड, न्यूनतम खरीद राशि या अन्य शर्तें लागू हो सकती हैं। इसलिए खरीदारी से पहले रेटिंग और रिव्यू, विक्रेता की जानकारी, वारंटी, रिटर्न पॉलिसी और अंतिम भुगतान राशि जरूर जांचें। इससे आकर्षक दिखने वाले ऑफर में अनावश्यक खर्च से बचा जा सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में करियर के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं और Samsung Innovation Campus (SIC) युवाओं को भविष्य की तकनीकी नौकरियों के लिए तैयार करने में अहम भूमिका निभा रहा है। खास तौर पर युवा महिलाओं की तकनीकी भागीदारी बढ़ाने पर भी कार्यक्रम का जोर है। सैमसंग के अनुसार, भारत में SIC कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी करीब 48 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। AI और नई तकनीकों की मिल रही ट्रेनिंग Samsung Innovation Campus युवाओं को AI, IoT, Big Data और Coding & Programming जैसी तकनीकों में प्रशिक्षण देता है। कार्यक्रम में तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ सॉफ्ट स्किल्स पर भी ध्यान दिया जाता है, जिससे छात्रों को नौकरी के लिए अधिक तैयार बनाया जा सके। सैमसंग ने भारत में यह कार्यक्रम 2022 में शुरू किया था। इसका उद्देश्य युवाओं को आधुनिक तकनीकी कौशल उपलब्ध कराना और उन्हें तेजी से बदलते डिजिटल रोजगार बाजार के लिए तैयार करना है। महाराष्ट्र में 1,000 छात्रों को मिला प्रशिक्षण महाराष्ट्र में Samsung Innovation Campus के तहत 1,000 छात्रों को AI और Coding & Programming में प्रशिक्षण देकर प्रमाणित किया गया है। इनमें सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय, पिंपरी चिंचवड़ विश्वविद्यालय, डी.वाई. पाटिल विश्वविद्यालय के रामराव आदिक इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और अंजुमन-ए-इस्लाम के कालेसर टेक्निकल कैंपस के छात्र शामिल रहे। सैमसंग के मुताबिक, इस कार्यक्रम का मकसद छात्रों को सिर्फ सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें वास्तविक समस्याओं पर काम करने और तकनीकी समाधान तैयार करने का अनुभव भी देना है। युवा महिलाओं के लिए बढ़ रही AI में भागीदारी SIC में महिलाओं की करीब 48 प्रतिशत राष्ट्रीय भागीदारी यह संकेत देती है कि तकनीकी और AI आधारित क्षेत्रों में युवा महिलाओं की रुचि बढ़ रही है। प्रशिक्षण के जरिए छात्राओं को AI और अन्य उभरती तकनीकों में कौशल हासिल करने के साथ अपने करियर की दिशा मजबूत करने का अवसर मिल रहा है। सैमसंग का कहना है कि तकनीकी शिक्षा तक समान पहुंच उपलब्ध कराना एक समावेशी डिजिटल इकोसिस्टम तैयार करने के लिए जरूरी है। इसी दिशा में कार्यक्रम के तहत छात्राओं को तकनीकी कौशल के साथ आत्मविश्वास और रोजगार योग्य क्षमताएं विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। 2026 में भी तेजी से बढ़ रहा कार्यक्रम Samsung Innovation Campus का विस्तार देश के कई राज्यों में जारी है। 2026 में सैमसंग ने कई शैक्षणिक संस्थानों के साथ कार्यक्रम का विस्तार किया है। कंपनी के अनुसार, 2025 में देशभर में 20,000 युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य हासिल किया गया था। AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को नई तकनीकी नौकरियों के लिए तैयार करने में मदद कर सकते हैं। खासकर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भारत के AI और डिजिटल टेक्नोलॉजी क्षेत्र में अधिक विविध और समावेशी कार्यबल तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।