Reserve Bank of India

Reserve Bank of India
RBI का बयान— बेहतर लिक्विडिटी से बैंकिंग सिस्टम में क्रेडिट ग्रोथ को मिल रहा मजबूत समर्थन

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कहा है कि बैंकिंग प्रणाली में बेहतर होती लिक्विडिटी (नकदी उपलब्धता) के कारण ऋण वितरण (क्रेडिट ग्रोथ) को मजबूत समर्थन मिल रहा है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, पर्याप्त नकदी, मजबूत जमा आधार और बेहतर वित्तीय परिस्थितियों की वजह से बैंक उद्योग, कृषि, एमएसएमई और खुदरा क्षेत्र को अधिक ऋण उपलब्ध करा पा रहे हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल रही है।   बैंकों की ऋण देने की क्षमता में हुआ सुधार   आरबीआई के अनुसार, हाल के महीनों में बैंकिंग प्रणाली में नकदी की स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है। इससे बैंकों के पास कर्ज देने की क्षमता बढ़ी है और वे विभिन्न क्षेत्रों की वित्तीय जरूरतों को आसानी से पूरा कर पा रहे हैं। केंद्रीय बैंक का मानना है कि मजबूत लिक्विडिटी आर्थिक विकास को गति देने में अहम भूमिका निभा रही है।   उद्योग और खुदरा ऋण में बनी हुई है तेजी   आरबीआई ने कहा कि उद्योग, आवास, वाहन, व्यक्तिगत ऋण और एमएसएमई सेक्टर में ऋण की मांग बनी हुई है। बेहतर वित्तीय माहौल के कारण बैंक इन क्षेत्रों में लगातार कर्ज उपलब्ध करा रहे हैं। इससे निवेश, उपभोग और उत्पादन गतिविधियों को भी समर्थन मिल रहा है।   जमा में वृद्धि से मिली मजबूती   केंद्रीय बैंक के मुताबिक, बैंकों में जमा (डिपॉजिट) बढ़ने से भी लिक्विडिटी की स्थिति मजबूत हुई है। पर्याप्त जमा होने से बैंकों को कम लागत पर संसाधन उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे वे प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर ऋण देने में सक्षम हैं।   महंगाई और वित्तीय स्थिरता पर भी रहेगी नजर   आरबीआई ने स्पष्ट किया कि वह लिक्विडिटी बनाए रखने के साथ-साथ महंगाई, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और वित्तीय स्थिरता पर लगातार नजर रखे हुए है। आवश्यकता पड़ने पर नकदी प्रबंधन के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे, ताकि बैंकिंग प्रणाली संतुलित बनी रहे।   अर्थव्यवस्था को मिल सकता है लाभ   विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त लिक्विडिटी बनी रहती है और ऋण वितरण की रफ्तार मजबूत रहती है, तो इसका सकारात्मक असर निवेश, रोजगार, औद्योगिक उत्पादन और देश की आर्थिक वृद्धि पर देखने को मिल सकता है। यही वजह है कि आरबीआई बैंकिंग क्षेत्र में नकदी की स्थिति और क्रेडिट ग्रोथ पर लगातार निगरानी बनाए हुए है।

abhishek singh जुलाई 23, 2026 0
Reserve Bank of India
RBI के विशेष फॉरेक्स उपायों से 20.7 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह, रुपये को सहारा देने की कोशिश तेज

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी मुद्रा (Forex) बाजार में तरलता बढ़ाने के लिए उठाए गए विशेष कदमों का सकारात्मक असर देखने को मिला है। केंद्रीय बैंक ने जानकारी दी है कि उसके हालिया फॉरेक्स उपायों के जरिए अब तक 20.7 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह हुआ है। इन कदमों का उद्देश्य विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखना और रुपये पर बढ़ते दबाव को कम करना है।   विशेष फॉरेक्स योजनाओं से बढ़ा विदेशी मुद्रा प्रवाह   RBI ने विदेशी निवेश आकर्षित करने और बैंकिंग प्रणाली में डॉलर की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कई विशेष उपाय लागू किए थे। इनमें विदेशी मुद्रा जमा योजनाओं और बैंकों के लिए विशेष प्रोत्साहन शामिल रहे, जिनके चलते विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ा है।   रुपये को मिली मजबूती   केंद्रीय बैंक का मानना है कि इन उपायों से विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की उपलब्धता बेहतर हुई है। इससे रुपये पर दबाव कम करने और विनिमय दर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद मिली है।   वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच राहत   विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता के बावजूद RBI के कदमों ने भारतीय विदेशी मुद्रा बाजार को सहारा दिया है।   आगे भी स्थिति पर RBI की नजर   RBI ने संकेत दिया है कि वह विदेशी मुद्रा बाजार की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। यदि जरूरत पड़ी तो रुपये की स्थिरता और वित्तीय बाजारों में संतुलन बनाए रखने के लिए आगे भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

abhishek singh जुलाई 21, 2026 0
Rajeev Kumar HDFC Bank
HDFC बैंक के नए पार्ट-टाइम चेयरमैन बने राजीव कुमार, RBI से मिली मंजूरी

मुंबई, एजेंसियां। देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC Bank को नया पार्ट-टाइम चेयरमैन मिल गया है। बैंक ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने राजीव कुमार की पार्ट-टाइम चेयरमैन के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। उनका कार्यकाल 15 जुलाई 2026 से अगले तीन वर्षों तक रहेगा।   पूर्व वित्तीय सेवा सचिव रह चुके हैं राजीव कुमार   राजीव कुमार केंद्र सरकार में वित्तीय सेवा सचिव रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं। बैंकिंग, वित्तीय सुधार और प्रशासन में उनके लंबे अनुभव को HDFC Bank के लिए अहम माना जा रहा है।   RBI की मंजूरी के बाद संभाली जिम्मेदारी   HDFC Bank ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में कहा कि RBI की मंजूरी मिलने के बाद राजीव कुमार ने 15 जुलाई से अपना कार्यभार संभाल लिया है। उनकी नियुक्ति बैंक के कॉर्पोरेट गवर्नेंस और रणनीतिक नेतृत्व को और मजबूत करेगी।   बैंकिंग सेक्टर की रहेगी नजर   विशेषज्ञों का मानना है कि राजीव कुमार के अनुभव का लाभ HDFC Bank को भविष्य की रणनीतियों, नियामकीय अनुपालन और डिजिटल बैंकिंग विस्तार में मिल सकता है। उनकी नियुक्ति को बैंकिंग सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।   निवेशकों के लिए अहम घटनाक्रम   देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल HDFC Bank में शीर्ष स्तर पर हुए इस बदलाव पर निवेशकों और बाजार की नजर रहेगी। आने वाले समय में बैंक की कारोबारी रणनीति और विकास योजनाओं पर इसके असर को लेकर भी चर्चा तेज है।

abhishek singh जुलाई 16, 2026 0
RBI Data Governance Draft
RBI के डेटा गवर्नेंस ड्राफ्ट पर बैंकिंग सेक्टर की नजर, बैंकों में 'डेटा ओनर' और 'डेटा स्टुअर्ड' नियुक्ति का प्रस्ताव

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) और अन्य विनियमित संस्थाओं के लिए डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क का ड्राफ्ट जारी किया है। इसका उद्देश्य वित्तीय संस्थानों में डेटा की गुणवत्ता, सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है। RBI ने इस मसौदे पर 17 अगस्त 2026 तक हितधारकों से सुझाव मांगे हैं।   'डेटा ओनर' और 'डेटा स्टुअर्ड' की होगी नियुक्ति   ड्राफ्ट के अनुसार, प्रत्येक डेटा डोमेन के लिए एक डेटा ओनर नियुक्त किया जाएगा, जो उस डेटा की गुणवत्ता, वर्गीकरण और सही उपयोग के लिए जवाबदेह होगा। वहीं डेटा स्टुअर्ड और डेटा कस्टोडियन डेटा के प्रबंधन, एक्सेस कंट्रोल और सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।   बोर्ड स्तर पर बनेगी डेटा गवर्नेंस समिति   RBI ने प्रस्ताव दिया है कि सभी विनियमित संस्थाएं बोर्ड स्तर पर डेटा गवर्नेंस कमेटी गठित करें या किसी मौजूदा बोर्ड समिति को इसकी जिम्मेदारी दें। यह समिति डेटा नीति, जोखिम प्रबंधन, गोपनीयता और अनुपालन की निगरानी करेगी।   थर्ड-पार्टी डेटा शेयरिंग पर सख्त नियम   ड्राफ्ट में कहा गया है कि यदि कोई बैंक या NBFC किसी तीसरे पक्ष के साथ डेटा साझा करता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित वित्तीय संस्था की होगी। ग्राहक डेटा केवल निर्धारित उद्देश्य, आवश्यक अनुमति और "Need-to-Know" आधार पर ही साझा किया जा सकेगा।   DPDP कानून के अनुरूप होगा फ्रेमवर्क   RBI ने स्पष्ट किया है कि डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क को डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम, 2023 और उससे जुड़े नियमों के अनुरूप तैयार करना होगा। साथ ही, डेटा की गुणवत्ता, ट्रेसबिलिटी और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित ऑडिट और वार्षिक समीक्षा भी अनिवार्य होगी।   17 अगस्त तक मांगे गए सुझाव   RBI ने इस मसौदे पर बैंकों, NBFC, उद्योग संगठनों और आम लोगों से 17 अगस्त 2026 तक सुझाव आमंत्रित किए हैं। सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे, जो पूरे बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में डेटा प्रबंधन के नए मानक तय कर सकते हैं।

abhishek singh जुलाई 16, 2026 0
IDBI Bank
IDBI बैंक डील को मिली रफ्तार, 53 हजार करोड़ रुपये के सौदे में फेयरफैक्स सबसे आगे

नई दिल्ली, एजेंसियां। IDBI बैंक के रणनीतिक विनिवेश की प्रक्रिया एक बार फिर तेज हो गई है। ताजा मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कनाडा की निवेश कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की संयुक्त 60.72% हिस्सेदारी खरीदने की दौड़ में सबसे आगे है। यह प्रस्तावित सौदा करीब 53 हजार करोड़ रुपये (5.5 अरब डॉलर) का बताया जा रहा है।   सरकार और LIC बेचेंगे अपनी हिस्सेदारी   सरकार और LIC मिलकर IDBI बैंक में अपनी 60.72% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फेयरफैक्स ने अपनी बोली बढ़ाकर 81 रुपये प्रति शेयर कर दी है, जिसके बाद वह अन्य दावेदारों से आगे निकल गई है।   अभी मिलनी हैं कई नियामकीय मंजूरियां   हालांकि, यह सौदा अभी अंतिम रूप से पूरा नहीं हुआ है। इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) समेत अन्य नियामकीय संस्थाओं की मंजूरी आवश्यक होगी। IDBI बैंक ने भी स्पष्ट किया है कि उसे अभी तक इस लेनदेन के पूरा होने की कोई आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है।   पहले अटक गई थी विनिवेश प्रक्रिया   IDBI बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया 2022 में शुरू हुई थी, लेकिन मार्च 2026 में प्राप्त शुरुआती बोलियां सरकार की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी थीं। इसके बाद संशोधित बोलियां आमंत्रित की गईं। नई बोली मिलने के बाद विनिवेश प्रक्रिया ने फिर गति पकड़ ली है और अगले कुछ सप्ताह में इस पर महत्वपूर्ण फैसला लिया जा सकता है।   शेयर बाजार में दिखा सकारात्मक असर   डील से जुड़ी खबर सामने आने के बाद IDBI बैंक के शेयरों में तेजी देखने को मिली। निवेशकों ने इस संभावित रणनीतिक निवेश का सकारात्मक स्वागत किया, जिससे बैंक के शेयरों में करीब 3 प्रतिशत तक उछाल दर्ज किया गया।   भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के लिए होगा बड़ा कदम   यदि यह सौदा पूरा होता है, तो यह भारतीय बैंकिंग इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश माना जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सरकार के विनिवेश कार्यक्रम को मजबूती मिलेगी, बैंक की कार्यकुशलता बढ़ेगी और विदेशी निवेशकों का भारतीय बैंकिंग क्षेत्र पर भरोसा और मजबूत होगा।

abhishek singh जुलाई 15, 2026 0
Nirmala Sitharaman
विदेशी मुद्रा जुटाने पर मंथन, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी सरकारी बैंकों के प्रमुखों के साथ अहम बैठक

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 13 जुलाई को देश के सभी सरकारी बैंकों (पीएसबी) और आईडीबीआई बैंक के प्रमुखों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक करेंगी। बैठक का मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा के प्रवाह को बढ़ाना, बैंकों द्वारा विदेशी मुद्रा जमा (एफसीएनआर-बी) जुटाने की प्रगति की समीक्षा करना और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा हाल में घोषित रियायती उपायों के प्रभाव का आकलन करना है। सरकार का लक्ष्य प्रवासी भारतीयों और विदेशी निवेशकों को भारत में निवेश के लिए अधिक आकर्षित करना है।   तीन प्रमुख मुद्दों पर रहेगा फोकस बैठक में विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (FCNR-B) खातों में जमा राशि बढ़ाने, सरकारी बैंकों द्वारा विदेशों से पूंजी जुटाने के लिए जारी किए जाने वाले विदेशी बॉन्ड तथा भारतीय कंपनियों और सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा बाहरी वाणिज्यिक उधार (ECB) की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इन तीनों माध्यमों से देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा।   आरबीआई की रियायतों की होगी समीक्षा पिछले महीने आरबीआई ने 30 सितंबर तक के लिए कई राहत उपाय लागू किए थे। इनमें 3 से 5 वर्ष की अवधि वाले नए एफसीएनआर (बी) जमा पर ब्याज दर की अधिकतम सीमा को अस्थायी रूप से हटाना शामिल है, जिससे बैंक विदेशी जमाकर्ताओं को अधिक आकर्षक ब्याज दर की पेशकश कर सकते हैं। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा विनिमय जोखिम कम करने के लिए बैंकों और सरकारी कंपनियों को रियायती दर पर फॉरेक्स स्वैप सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।   विदेशी निवेश में तेजी की उम्मीद बैंकिंग क्षेत्र के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, नई रियायतों के बाद 3 जुलाई तक एफसीएनआर (बी) जमा के माध्यम से करीब 3 से 4 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जुटाई जा चुकी है। बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि विशेष रूप से खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों की भागीदारी बढ़ने से आने वाले महीनों में यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ सकता है। अनुमान है कि इन उपायों से भविष्य में 40 से 50 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त विदेशी निवेश आकर्षित किया जा सकता है, जिससे भारतीय रुपये को मजबूती मिलने के साथ-साथ देश की विदेशी मुद्रा स्थिति भी और सुदृढ़ होगी।

abhishek singh जुलाई 11, 2026 0
A cup of black coffee beside coffee beans, highlighting research linking regular coffee consumption with improved liver health.
दिन में 5 कप कॉफी पीना लिवर के लिए फायदेमंद? नए अध्ययन में सामने आए चौंकाने वाले नतीजे

रोजाना कॉफी पीने वालों में गंभीर लिवर रोगों का खतरा कम पाया गया अगर आप रोजाना कॉफी पीते हैं, तो यह आदत सिर्फ आपको तरोताजा ही नहीं रखती, बल्कि आपके लिवर की सेहत के लिए भी फायदेमंद हो सकती है। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में दावा किया गया है कि नियमित रूप से कॉफी का सेवन करने वाले लोगों में लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों का जोखिम कम देखा गया। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इन नतीजों के आधार पर हर किसी को अचानक ज्यादा कॉफी पीना शुरू नहीं कर देना चाहिए। करीब साढ़े तीन लाख लोगों पर किया गया अध्ययन यह शोध मेडिकल जर्नल Clinical Gastroenterology and Hepatology में प्रकाशित हुआ है। इसमें ब्रिटेन के यूके बायोबैंक (UK Biobank) के लगभग 3.55 लाख वयस्कों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का 10 वर्षों से अधिक समय तक विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों की कॉफी पीने की आदत, लिवर की स्कैन रिपोर्ट, रक्त जांच और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का अध्ययन किया। इसके बाद कॉफी के सेवन और लिवर स्वास्थ्य के बीच महत्वपूर्ण संबंध सामने आए। 5 या उससे अधिक कप कॉफी पीने वालों को मिला सबसे ज्यादा लाभ अध्ययन के अनुसार, जो लोग प्रतिदिन 5 या उससे अधिक कप कॉफी पीते थे, उनमें लिवर संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा उल्लेखनीय रूप से कम पाया गया। शोध में सामने आए प्रमुख निष्कर्ष: लिवर सिरोसिस का खतरा 32% तक कम लिवर कैंसर का जोखिम 47% तक घटा लिवर संबंधी कारणों से मृत्यु का खतरा 42% कम हालांकि, रोजाना 1 से 2 कप कॉफी पीने वालों में भी कुछ हद तक सकारात्मक प्रभाव देखा गया। कैफीन नहीं, कॉफी के प्राकृतिक तत्व भी हैं असरदार शोध की एक दिलचस्प बात यह रही कि कैफीनयुक्त (Regular) और डिकैफ (Decaffeinated) दोनों तरह की कॉफी पीने वालों में लगभग समान लाभ देखने को मिले। इससे वैज्ञानिकों का मानना है कि केवल कैफीन ही नहीं, बल्कि कॉफी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, पॉलीफेनॉल और अन्य प्राकृतिक यौगिक भी लिवर को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। कैसे पहुंचाती है कॉफी लिवर को फायदा? विशेषज्ञों के अनुसार कॉफी में मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर में सूजन कम करने, कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से बचाने और लिवर में अतिरिक्त वसा जमा होने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। यही कारण है कि लंबे समय में लिवर को होने वाले नुकसान का जोखिम कम हो सकता है। ज्यादा चीनी मिलाने से घट सकते हैं फायदे शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि कॉफी में अधिक मात्रा में चीनी, आर्टिफिशियल स्वीटनर या अत्यधिक प्रोसेस्ड क्रीमर मिलाने से लिवर को मिलने वाले कुछ फायदे कम हो सकते हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि यदि कॉफी पीनी हो तो कम या बिना चीनी वाली कॉफी बेहतर विकल्प हो सकती है। क्या अब सभी लोगों को 5 कप कॉफी पीनी चाहिए? इस अध्ययन के बावजूद वैज्ञानिकों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। यह शोध केवल कॉफी और बेहतर लिवर स्वास्थ्य के बीच संबंध दिखाता है, लेकिन यह साबित नहीं करता कि कॉफी सीधे लिवर रोगों को रोकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान, शराब का सेवन, वजन, खानपान और जीवनशैली जैसे कई अन्य कारक भी लिवर की सेहत को प्रभावित करते हैं। अधिक कॉफी पीने के हो सकते हैं नुकसान हर व्यक्ति का शरीर कैफीन को अलग-अलग तरीके से सहन करता है। जरूरत से ज्यादा कॉफी पीने पर कुछ लोगों में ये समस्याएं हो सकती हैं— बेचैनी और घबराहट नींद में बाधा दिल की धड़कन तेज होना पेट संबंधी परेशानियां गर्भवती महिलाओं और कुछ विशेष स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही कैफीन का सेवन करना चाहिए। क्या कहता है यह अध्ययन? यह शोध संकेत देता है कि नियमित और संतुलित मात्रा में कॉफी पीना लिवर की सेहत के लिए लाभकारी हो सकता है। हालांकि, केवल कॉफी के भरोसे स्वस्थ रहने की बजाय संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी उतना ही जरूरी है।  

surbhi जुलाई 11, 2026 0
Rajeev Kumar
HDFC Bank के नए चेयरमैन बने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार, RBI की मंजूरी का इंतजार

मुंबई, एजेंसियां। देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC Bank के बोर्ड ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को पार्ट-टाइम (गैर-कार्यकारी) चेयरमैन नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। हालांकि उनका कार्यभार संभालना अभी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अंतिम मंजूरी पर निर्भर करेगा।   चार साल के लिए स्वतंत्र निदेशक भी नियुक्त   बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया कि 30 जून 2026 से राजीव कुमार को चार वर्ष के लिए अतिरिक्त स्वतंत्र निदेशक (Independent Director) नियुक्त किया गया है। वहीं, चेयरमैन के रूप में उनका कार्यकाल तीन वर्ष का होगा, जो RBI की मंजूरी मिलने की तारीख से प्रभावी होगा।   अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद मिली जिम्मेदारी   यह नियुक्ति पूर्व चेयरमैन Atanu Chakraborty के मार्च 2026 में अचानक इस्तीफा देने के बाद हुई है। उनके इस्तीफे के बाद बैंक में नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। इस दौरान Keki Mistry अंतरिम चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।   बैंकिंग सुधारों का लंबा अनुभव   राजीव कुमार 1984 बैच के पूर्व IAS अधिकारी हैं। वे वित्त सचिव, वित्तीय सेवा विभाग के सचिव और बाद में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त रह चुके हैं। बैंकिंग क्षेत्र में सुधार और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पुनर्गठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।   निवेशकों की नजर आगे के फैसलों पर   विश्लेषकों का मानना है कि राजीव कुमार की नियुक्ति से HDFC Bank में नेतृत्व को स्थिरता मिलेगी। अब निवेशकों की नजर RBI की मंजूरी और बैंक के MD एवं CEO Sashidhar Jagdishan के कार्यकाल बढ़ाने के फैसले पर रहेगी।

abhishek singh जून 30, 2026 0
RBI AI Guidelines
RBI ने बैंकों के लिए AI पर सख्त नियमों का प्रस्ताव रखा, ग्राहकों की सुरक्षा और पारदर्शिता पर रहेगा जोर

मुंबई, एजेंसियां। देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए AI और मशीन लर्निंग (ML) से जुड़े नए ड्राफ्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनका उद्देश्य डिजिटल बैंकिंग को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।   AI मॉडल पर होगी सख्त निगरानी   प्रस्तावित नियमों के अनुसार, हर बैंक को AI और ML मॉडल के उपयोग के लिए एक मजबूत रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क तैयार करना होगा। इस फ्रेमवर्क को बैंक के बोर्ड से मंजूरी लेनी होगी और समय-समय पर इसकी समीक्षा भी करनी होगी।   ग्राहक से जुड़े फैसलों में जरूरी होगी मानवीय निगरानी   RBI ने स्पष्ट किया है कि यदि AI किसी ग्राहक से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेता है, जैसे लोन मंजूरी या जोखिम मूल्यांकन, तो उस प्रक्रिया में मानवीय निगरानी भी अनिवार्य होगी। केवल AI के आधार पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सकेगा।   जनरेटिव AI के लिए अतिरिक्त सुरक्षा   ड्राफ्ट में कहा गया है कि ग्राहक से सीधे संवाद करने वाले Generative AI सिस्टम के लिए अतिरिक्त साइबर सुरक्षा उपाय अपनाने होंगे। इससे डेटा लीक, गलत जानकारी और साइबर हमलों के जोखिम को कम किया जा सकेगा।   थर्ड-पार्टी AI सिस्टम की भी होगी जांच   अगर कोई बैंक किसी बाहरी कंपनी का AI मॉडल इस्तेमाल करता है, तब भी उसकी स्वतंत्र जांच करानी होगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि AI सिस्टम सुरक्षित और विश्वसनीय तरीके से काम कर रहा है।   24 जुलाई तक मांगे गए सुझाव   RBI ने इन ड्राफ्ट दिशानिर्देशों पर बैंकों, विशेषज्ञों और आम लोगों से 24 जुलाई 2026 तक सुझाव मांगे हैं। सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम नियम जारी किए जाएंगे।

abhishek singh जून 26, 2026 0
Reserve Bank of India headquarters with gold bars and foreign exchange reserve charts showing a sharp decline.
Forex Watch: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में फिर बड़ी गिरावट, सोने के रिजर्व की वैल्यू में भारी कमी

मुंबई: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) में एक बार फिर बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 12 जून 2026 को समाप्त सप्ताह के दौरान देश के विदेशी मुद्रा भंडार में लगभग 9.985 अरब डॉलर की कमी आई है। इससे पहले वाले सप्ताह में भी भंडार में 711 मिलियन डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी। इस ताजा गिरावट की सबसे बड़ी वजह सोने की कीमतों में आई कमजोरी मानी जा रही है, जिससे आरबीआई के गोल्ड रिजर्व के मूल्य पर सीधा असर पड़ा। विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 671.62 अरब डॉलर पर पहुंचा आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, भारी गिरावट के बाद भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 671.625 अरब डॉलर रह गया है। गौरतलब है कि 27 फरवरी 2026 को देश का विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचा था। इसके बाद से इसमें उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। विदेशी मुद्रा आस्तियों (FCA) में हुई बढ़ोतरी हालांकि कुल भंडार में गिरावट के बीच एक सकारात्मक पहलू भी देखने को मिला। समीक्षा सप्ताह के दौरान भारत की फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) में 846 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद FCA का कुल आकार बढ़कर 544.290 अरब डॉलर हो गया है। विदेशी मुद्रा आस्तियां कुल विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं और इनमें डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी अन्य प्रमुख मुद्राओं में होने वाले उतार-चढ़ाव का भी प्रभाव शामिल होता है। गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में 10.75 अरब डॉलर की गिरावट बीते सप्ताह सोने की कीमतों में आई गिरावट का सीधा असर आरबीआई के स्वर्ण भंडार पर पड़ा। गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में 10.754 अरब डॉलर की कमी आई। अब देश के गोल्ड रिजर्व का मूल्य घटकर 100.112 अरब डॉलर रह गया है। मार्च 2026 के अंत तक आरबीआई के पास कुल 880.52 टन सोना मौजूद था। देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगभग 16.7 प्रतिशत है, इसलिए इसकी कीमतों में बदलाव का सीधा असर कुल रिजर्व पर पड़ता है। SDR और IMF रिजर्व में भी मामूली गिरावट आरबीआई के मुताबिक: विशेष आहरण अधिकार (SDR) में 66 मिलियन डॉलर की कमी आई। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास रखे भारत के रिजर्व में 11 मिलियन डॉलर की गिरावट दर्ज की गई। फिलहाल IMF के पास भारत का रिजर्व 4.815 अरब डॉलर है। क्या है विदेशी मुद्रा भंडार? विदेशी मुद्रा भंडार किसी देश की आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। इसका उपयोग आयात भुगतान, मुद्रा स्थिरता बनाए रखने और वैश्विक आर्थिक झटकों से निपटने के लिए किया जाता है।  

surbhi जून 20, 2026 0
Governor The Silent Saviour
मनोज बाजपेयी की 'गवर्नर' को मिला शानदार रिस्पॉन्स, X पर फैंस बोले- देसी धुरंधर

मुंबई, एजेंसियां। मनोज बाजपेयी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' सिनेमाघरों में रिलीज होते ही दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। वास्तविक घटनाओं से प्रेरित यह राजनीतिक और वित्तीय थ्रिलर भारत के 1990 के दशक के आर्थिक संकट और उससे देश को उबारने में भारतीय रिजर्व बैंक के तत्कालीन गवर्नर की भूमिका को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर फिल्म को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।   मनोज बाजपेयी की दमदार एक्टिंग ने जीता दिल फिल्म में मनोज बाजपेयी के अभिनय की दर्शक खुलकर सराहना कर रहे हैं। एक यूजर ने फिल्म को "देसी धुरंधर" बताते हुए लिखा कि मनोज बाजपेयी ने अपने शानदार प्रदर्शन से किरदार में जान डाल दी है। कई दर्शकों का कहना है कि यह फिल्म इतिहास, नेतृत्व और एक गुमनाम नायक की प्रेरणादायक कहानी को प्रभावशाली तरीके से सामने लाती है। वहीं कुछ लोगों ने निर्देशक चिन्मय डी. मंडलेकर और निर्माता विपुल अमृतलाल शाह की विषय चयन की भी प्रशंसा की है।   मार्केटिंग पर उठे सवाल जहां फिल्म की कहानी और अभिनय को सराहा जा रहा है, वहीं कुछ दर्शकों ने इसकी मार्केटिंग रणनीति पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर कई प्रतिक्रियाओं में कहा गया कि बेहतर प्रचार-प्रसार नहीं होने की वजह से फिल्म को रिलीज से पहले वह चर्चा नहीं मिल सकी, जिसकी वह हकदार थी। हालांकि दर्शकों का मानना है कि मजबूत कंटेंट के दम पर फिल्म अपनी पहचान बनाने में सफल हो सकती है।   कम चर्चित नायक की कहानी पर आधारित है फिल्म 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर एस. वेंकिटारमनन के जीवन और 1990 के आर्थिक संकट के दौरान उनके नेतृत्व पर आधारित है। फिल्म में मनोज बाजपेयी के साथ अदा शर्मा, मधु और नौशाद मोहम्मद कुंजू भी अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म का निर्माण विपुल अमृतलाल शाह ने किया है। दर्शकों का मानना है कि यह सिर्फ एक राजनीतिक थ्रिलर नहीं, बल्कि भारत के आर्थिक इतिहास के एक महत्वपूर्ण और कम चर्चित अध्याय को समझने का अवसर भी है।

abhishek singh जून 12, 2026 0
Sensex Nifty Falls
गिरावट के साथ बंद हुआ शेयर बाजार

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समीक्षा और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार मामूली गिरावट के साथ बंद हुए। कारोबार के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन दिन के अंत तक प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। निवेशकों ने आरबीआई की नीतिगत घोषणाओं का आकलन करते हुए सतर्क रुख अपनाया। सेंसेक्स और निफ्टी में आई गिरावट नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 सूचकांक 49.85 अंक यानी 0.21 प्रतिशत गिरकर 23,366.70 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 116.67 अंक या 0.16 प्रतिशत फिसलकर 74,243.34 अंक पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में दोनों सूचकांकों ने बढ़त बनाई थी, लेकिन बाद में बिकवाली का दबाव बढ़ने से बाजार नीचे आ गया। रेपो रेट यथावत, RBI का रुख रहा तटस्थ आरबीआई की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया। केंद्रीय बैंक ने आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए अपना "तटस्थ" रुख कायम रखा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई फिलहाल ब्याज दरों में किसी बड़े बदलाव के बजाय आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता दे रहा है। तकनीकी स्तरों पर निफ्टी की नजर विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 23,450 से 23,550 का दायरा मजबूत प्रतिरोध क्षेत्र बना हुआ है। यदि सूचकांक इस स्तर को पार कर स्थिरता बनाए रखता है, तो 23,750 से 23,800 तक की तेजी संभव है। वहीं गिरावट की स्थिति में 23,250 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। आईटी और मेटल शेयरों में बिकवाली सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो आईटी और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.35 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.06 प्रतिशत कमजोर रहा। दूसरी ओर मीडिया सेक्टर ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए बढ़त दर्ज की। प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में हिंदाल्को, विप्रो और ट्रेंट शामिल रहे। रुपये में शानदार मजबूती शेयर बाजार की सुस्ती के बीच विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने मजबूत प्रदर्शन किया। डॉलर के मुकाबले रुपया 81 पैसे की तेजी के साथ 94.93 के स्तर पर बंद हुआ। यह मजबूती आरबीआई द्वारा विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने और फॉरेक्स लिक्विडिटी मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों के बाद देखने को मिली। विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की पहल आरबीआई ने अनिवासी भारतीयों (NRI) और प्रवासी भारतीय नागरिकों (OCI) के लिए इक्विटी निवेश सीमा बढ़ाने के साथ-साथ फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों का दायरा भी विस्तारित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन कदमों से विदेशी निवेश आकर्षित होगा और रुपये को आगे भी समर्थन मिल सकता है।

Unknown जून 5, 2026 0
Share Market
शेयर बाजार में हरियाली,  सेंसेक्स 74,500 के पार, निफ्टी 23,400 से ऊपर

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार आज शुक्रवार को मजबूत शुरुआत की। निवेशकों की खरीदारी और सकारात्मक वैश्विक संकेतों के बीच बीएसई सेंसेक्स तथा एनएसई निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ खुले। हालांकि बाजार की दिशा अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसले पर टिकी हुई है, जिसकी घोषणा सुबह 10 बजे होनी है। सेंसेक्स और निफ्टी की मजबूत शुरुआत सुबह 9:32 बजे तक सेंसेक्स 197.90 अंक यानी 0.26 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,557.91 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 51.41 अंक या 0.22 प्रतिशत चढ़कर 23,467.95 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी का 23,400 के ऊपर बने रहना बाजार की मजबूती का संकेत माना जा रहा है। इन्फोसिस और अदाणी पोर्ट्स बने बाजार के हीरो शुरुआती कारोबार में आईटी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। विशेष रूप से इन्फोसिस और अदाणी पोर्ट्स के शेयर लगभग 2-2 प्रतिशत तक उछले। इन बड़े शेयरों की तेजी ने बाजार को ऊपर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और निवेशकों का भरोसा मजबूत किया। निवेशकों की नजर RBI के फैसले पर विश्लेषकों का मानना है कि बाजार फिलहाल सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है क्योंकि निवेशक RBI के नीति निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। ब्याज दरों, महंगाई, आर्थिक वृद्धि और तरलता से जुड़े संकेत बाजार की आगे की दिशा तय करेंगे। यदि RBI की नीति बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहती है तो शेयर बाजार में और तेजी देखने को मिल सकती है। आगे क्या? आज का सबसे बड़ा ट्रिगर RBI की मौद्रिक नीति घोषणा है। निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक की टिप्पणी से आने वाले महीनों में अर्थव्यवस्था और ब्याज दरों की दिशा को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिलेंगे। ऐसे में दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

Unknown जून 5, 2026 0
Share Market
सपाट के साथ बंद हुआ शेयर बाजार

मुंबई, एजेंसियां। गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में दिनभर भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन कारोबार के अंत में प्रमुख सूचकांक लगभग सपाट स्तर पर बंद हुए। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली और आरबीआई की आगामी मौद्रिक नीति बैठक को लेकर निवेशकों में सतर्कता का माहौल बना रहा। कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स ने 74,544.24 अंक का उच्चतम और 73,807.30 अंक का न्यूनतम स्तर छुआ। दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स 13.84 अंक यानी 0.02 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 74,360.01 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी भी 10.95 अंक या 0.05 प्रतिशत चढ़कर 23,416.55 अंक पर बंद होने में सफल रहा। इन शेयरों ने संभाला बाजार सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में टाइटन, आईटीसी, टेक महिंद्रा, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), आईसीआईसीआई बैंक और इटरनल के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इन शेयरों ने बाजार को गिरावट से उबारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दूसरी ओर, इन्फोसिस, बजाज फिनसर्व, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचसीएल टेक और अदाणी पोर्ट्स जैसे शेयर दबाव में रहे और नुकसान के साथ बंद हुए। एफआईआई की बिकवाली बनी चिंता बाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव लगातार बना हुआ है। एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को एफआईआई ने 5,616.56 करोड़ रुपये मूल्य की इक्विटी की बिक्री की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। आरबीआई के फैसले पर टिकी निगाहें विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार ने निचले स्तरों से अच्छी रिकवरी दिखाई है, लेकिन निवेशकों की नजर अब शुक्रवार को आने वाले आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के फैसले पर है। यही फैसला आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय कर सकता है। फिलहाल निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और किसी बड़े संकेत का इंतजार कर रहे हैं।

Unknown जून 4, 2026 0
Gold bars and RBI emblem representing India's gold reserves and foreign exchange holdings
RBI ने 1.14 लाख करोड़ रुपये का सोना बेच दिया? सरकार ने बताया सच, जानिए पूरा मामला

हाल ही में एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि Reserve Bank of India (आरबीआई) ने चुपचाप 12 अरब डॉलर यानी लगभग 1.14 लाख करोड़ रुपये मूल्य का सोना बेच दिया है। रिपोर्ट में कहा गया था कि 22 मई 2026 को समाप्त हुए दो सप्ताह के दौरान यह बिक्री की गई। इस दावे के बाद आर्थिक और वित्तीय हलकों में चर्चा तेज हो गई, लेकिन अब सरकार ने इस पर स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। सरकार ने बताया दावा पूरी तरह गलत सरकार ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि आरबीआई द्वारा बड़े पैमाने पर सोना बेचने की खबर पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन है। सरकार के अनुसार, उपलब्ध आंकड़े इस दावे का समर्थन नहीं करते हैं। सरकार ने बताया कि देश के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ी है। सितंबर 2025 के अंत में यह हिस्सा 13.92 प्रतिशत था, जो 31 मार्च 2026 तक बढ़कर 16.70 प्रतिशत और 22 मई 2026 तक 16.85 प्रतिशत हो गया। यदि आरबीआई ने बड़ी मात्रा में सोना बेचा होता, तो सोने की हिस्सेदारी बढ़ने के बजाय घटती दिखाई देती। आरबीआई के पास कितना सोना है? आरबीआई के मासिक बुलेटिन के अनुसार, केंद्रीय बैंक के पास कुल 880.52 टन सोने का भंडार मौजूद है। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह भंडार अब भी बरकरार है और इसमें किसी बड़ी बिक्री का कोई संकेत नहीं मिलता। रिपोर्ट में क्या दावा किया गया था? रिपोर्ट में कहा गया था कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए आरबीआई ने अपने स्वर्ण भंडार का एक हिस्सा बेचा है। हालांकि सरकार और आरबीआई के उपलब्ध आंकड़ों ने इस दावे को खारिज कर दिया है। भारत का सोना कहां रखा जाता है? मार्च 2026 तक आरबीआई के पास मौजूद कुल 880.52 टन सोने में से लगभग 77 प्रतिशत सोना भारत में ही सुरक्षित रखा गया है। छह महीने पहले यह आंकड़ा करीब 66 प्रतिशत था। विदेशों में रखा गया भारतीय सोना मुख्य रूप से Bank of England और Bank for International Settlements जैसी संस्थाओं के पास सुरक्षित है।  

surbhi जून 3, 2026 0
RBI headquarters building as the central bank reports record gains from foreign exchange operations
RBI के लिए वरदान बनी रुपये की गिरावट! विदेशी मुद्रा कारोबार से हुई ₹1.69 लाख करोड़ की कमाई

भारतीय रुपये में आई कमजोरी और विदेशी मुद्रा बाजार में बढ़ी अस्थिरता ने आम लोगों और आयातकों की चिंता बढ़ाई, लेकिन यही स्थिति Reserve Bank of India (RBI) के लिए बड़ी कमाई का जरिया बन गई। वित्त वर्ष 2025-26 में आरबीआई ने विदेशी मुद्रा लेनदेन से रिकॉर्ड 1.69 लाख करोड़ रुपये का विनिमय लाभ अर्जित किया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में करीब 52 प्रतिशत अधिक है। केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में यह लाभ 1.11 लाख करोड़ रुपये था, जबकि एक साल बाद यह बढ़कर 1.69 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। रुपये को बचाने के लिए RBI ने बेचे रिकॉर्ड डॉलर पिछले वित्त वर्ष में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में करीब 9.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। रुपये पर बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने और बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए RBI ने बड़े पैमाने पर डॉलर बेचे। रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय बैंक ने स्पॉट मार्केट में रिकॉर्ड 53.13 अरब डॉलर की बिक्री की। यह डॉलर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार से निकाले गए थे। डॉलर की इस बिक्री से RBI को विनिमय दरों के अंतर के कारण बड़ा लाभ हुआ, जिसने उसकी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की। कैसे हुई RBI की कमाई? जब केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेचता है और डॉलर की कीमत रुपये के मुकाबले अधिक होती है, तो उसे विनिमय लाभ (Exchange Gain) प्राप्त होता है। सरल शब्दों में समझें तो: डॉलर महंगा हुआ। RBI ने अपने रिजर्व से डॉलर बेचे। बिक्री से अधिक रुपये प्राप्त हुए। इस अंतर ने RBI की आय बढ़ा दी। इसी वजह से विदेशी मुद्रा लेनदेन से RBI की आय बढ़कर ₹1.69 लाख करोड़ तक पहुंच गई। विदेशी स्रोतों से कुल आय 3.28 लाख करोड़ रुपये विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों, निवेश और अन्य विदेशी स्रोतों से RBI की कुल आय वित्त वर्ष 2025-26 में 27 प्रतिशत बढ़कर 3.28 लाख करोड़ रुपये हो गई। यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच RBI की विदेशी संपत्तियों ने मजबूत प्रदर्शन किया। सरकार को मिलेगा रिकॉर्ड सरप्लस RBI ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को 2.87 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड सरप्लस ट्रांसफर करने का फैसला किया है। यह राशि सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे राजकोषीय प्रबंधन, विकास योजनाओं और आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलेगा। RBI की बैलेंस शीट भी हुई मजबूत 31 मार्च 2026 तक RBI की कुल बैलेंस शीट का आकार बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15.72 लाख करोड़ रुपये अधिक है। परिसंपत्तियों में वृद्धि के प्रमुख कारण: घरेलू निवेश में 44.9% की बढ़ोतरी स्वर्ण भंडार में 63.8% की वृद्धि विदेशी निवेश में 7.9% की बढ़ोतरी RBI की कुल परिसंपत्तियों में: 29.1% घरेलू परिसंपत्तियां 70.9% विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, सोना और विदेशी वित्तीय संस्थानों को दिए गए ऋण शामिल हैं कुल आय में भी बड़ी छलांग वित्त वर्ष 2025-26 में RBI की कुल आय बढ़कर 4.3 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 26 प्रतिशत अधिक है। वहीं केंद्रीय बैंक का कुल अधिशेष (Surplus) बढ़कर 2,86,588 करोड़ रुपये हो गया, जो एक वर्ष पहले 2,68,590 करोड़ रुपये था। क्या है इसका अर्थ? रुपये की कमजोरी आम तौर पर अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती मानी जाती है क्योंकि इससे आयात महंगे हो जाते हैं। लेकिन जब केंद्रीय बैंक के पास विशाल विदेशी मुद्रा भंडार होता है, तो वह बाजार में हस्तक्षेप कर मुद्रा को स्थिर रखने के साथ-साथ विनिमय लाभ भी अर्जित कर सकता है। इस बार RBI ने रुपये को संभालने के लिए जो डॉलर बेचे, वही उसके लिए रिकॉर्ड कमाई का कारण बन गए।  

surbhi मई 30, 2026 0
RBI annual report highlights global risks to India’s economy amid rising oil and trade tensions
RBI की बड़ी चेतावनी: भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा अब विदेशों से

Reserve Bank of India की ताजा वार्षिक रिपोर्ट में भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक अहम संकेत दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार देश की आर्थिक स्थिति फिलहाल मजबूत बनी हुई है, लेकिन आने वाले समय में सबसे बड़ा खतरा घरेलू नहीं बल्कि वैश्विक परिस्थितियों से पैदा हो सकता है। रिजर्व बैंक ने साफ कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, बढ़ती तेल कीमतें, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता और सप्लाई चेन में बाधाएं भारत की विकास रफ्तार पर असर डाल सकती हैं। मजबूत अर्थव्यवस्था के बावजूद बढ़ी चिंता आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था अभी मजबूत उपभोक्ता मांग, सरकारी निवेश और स्वस्थ बैंकिंग सिस्टम के सहारे आगे बढ़ रही है। कॉरपोरेट और बैंकों की बैलेंस शीट पहले की तुलना में बेहतर स्थिति में हैं। इसके बावजूद केंद्रीय बैंक का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात तेजी से बदल रहे हैं और उनका सीधा असर भारत पर पड़ सकता है। पश्चिम एशिया का तनाव बना सबसे बड़ा जोखिम रिपोर्ट में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया गया है। आरबीआई के मुताबिक इस तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने वैश्विक विकास दर के अनुमान घटा दिए हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है या लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा। भारत जैसे देशों के लिए यह चिंता और अधिक गंभीर है क्योंकि देश कच्चे तेल के आयात पर काफी निर्भर है। महंगा तेल बढ़ा सकता है महंगाई आरबीआई ने चेतावनी दी है कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारत में महंगाई को फिर से बढ़ा सकती है। पेट्रोल-डीजल महंगे होने का असर केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ट्रांसपोर्ट, खाद्य पदार्थ, लॉजिस्टिक्स और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर भी पड़ता है। यानी पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाल सकता है। शिपिंग संकट से उद्योगों पर दबाव केंद्रीय बैंक ने वैश्विक शिपिंग रूट्स में आ रही बाधाओं को भी बड़ी चिंता बताया है। रिपोर्ट के अनुसार यदि समुद्री व्यापार प्रभावित होता है तो भारत में कच्चे माल और जरूरी उत्पादों की लागत बढ़ सकती है। भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन से जुड़ा हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, केमिकल और कई औद्योगिक उत्पाद विदेशों से आने वाले कच्चे माल पर निर्भर करते हैं। ऐसे में शिपिंग लागत बढ़ने का असर उत्पादन और कीमतों दोनों पर पड़ सकता है। वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता का असर आरबीआई ने यह भी कहा कि दुनिया में बढ़ता संरक्षणवाद और बदलती व्यापार नीतियां भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए चुनौती बन सकती हैं। भारत इस समय खुद को एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में यदि वैश्विक व्यापार धीमा पड़ता है तो इंजीनियरिंग, फार्मा और आईटी सेवाओं जैसे सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं। शेयर बाजार में बढ़ सकती है हलचल रिपोर्ट में शेयर बाजार को लेकर भी सावधानी जताई गई है। आरबीआई का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। खासतौर पर टेक्नोलॉजी सेक्टर के ऊंचे वैल्यूएशन में सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि आरबीआई ने किसी बड़े बाजार संकट की भविष्यवाणी नहीं की है, लेकिन निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह जरूर दी है। फिर भी भारत की ग्रोथ पर भरोसा कायम इन सभी चुनौतियों के बावजूद आरबीआई ने भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूत बताया है। रिपोर्ट के अनुसार सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च, निजी निवेश और नए व्यापार समझौते आने वाले वर्षों में विकास को समर्थन देंगे। केंद्रीय बैंक का मानना है कि भारत पहले की तुलना में कहीं ज्यादा मजबूत अर्थव्यवस्था बन चुका है, लेकिन अब देश की अर्थव्यवस्था वैश्विक घटनाओं से पहले से अधिक जुड़ चुकी है।  

surbhi मई 29, 2026 0
Economist Montek Singh Ahluwalia discussing RBI policy and Indian rupee exchange rate trends
रुपये को कमजोर होने देना सही फैसला था? पूर्व योजना आयोग उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने RBI का किया समर्थन

भारतीय रुपये में हाल के महीनों में आई कमजोरी को लेकर चल रही बहस के बीच वरिष्ठ अर्थशास्त्री और पूर्व योजना आयोग उपाध्यक्ष Montek Singh Ahluwalia ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के रुख का समर्थन किया है। उनका कहना है कि रुपये की विनिमय दर को बाजार की वास्तविक परिस्थितियों के अनुसार चलने देना चाहिए और हर हाल में उसे एक निश्चित स्तर पर बनाए रखने की कोशिश उचित नहीं होती। रुपये पर क्यों बढ़ा दबाव? पिछले कुछ महीनों में भारतीय रुपये पर कई वैश्विक और घरेलू कारणों से दबाव बढ़ा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई, जिससे भारत के आयात बिल और महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता ने भी रुपये को कमजोर किया। ‘रुपये का कमजोर होना लगभग तय था’ मोंटेक सिंह अहलूवालिया का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में रुपये पर दबाव आना स्वाभाविक था। उनके अनुसार, जब बाजार की परिस्थितियां प्रतिकूल हो जाएं तो विनिमय दर में कुछ गिरावट आने देना आर्थिक रूप से गलत नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक भारत चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) को विदेशी पूंजी निवेश के जरिए आसानी से संभालता रहा, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में पूंजी प्रवाह की गति धीमी पड़ने से स्थिति बदल गई है। ऐसे में केवल विदेशी मुद्रा भंडार खर्च कर रुपये को बचाने की रणनीति लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हो सकती। कमजोर रुपया निर्यात के लिए फायदेमंद अहलूवालिया ने यह भी कहा कि रुपये में नियंत्रित गिरावट का एक सकारात्मक पहलू भी है। इससे भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल सकता है। जब घरेलू मुद्रा कमजोर होती है तो विदेशों में भारतीय उत्पाद अपेक्षाकृत सस्ते हो जाते हैं, जिससे निर्यात बढ़ने की संभावना रहती है। उनका मानना है कि मध्यम अवधि में यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। RBI की रणनीति पर जारी है बहस हाल के समय में कई अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा तेज हुई है कि क्या RBI को रुपये की रक्षा के लिए आक्रामक हस्तक्षेप करना चाहिए या फिर बाजार को अपनी दिशा तय करने देनी चाहिए। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े वैश्विक झटकों के दौरान किसी विशेष विनिमय दर को बनाए रखने की कोशिश आर्थिक रूप से महंगी और अस्थिर साबित हो सकती है। भारतीय अर्थव्यवस्था की बड़ी चुनौतियां रुपये के मुद्दे पर बात करते हुए मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने भारतीय अर्थव्यवस्था की कुछ संरचनात्मक चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि निजी निवेश और निर्यात की धीमी रफ्तार कई वर्षों से चिंता का विषय रही है। उनके मुताबिक भारत को निवेश आकर्षित करने और आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए और अधिक सुधारों की जरूरत है। साथ ही वैश्विक निवेशकों को स्पष्ट और भरोसेमंद नीति संकेत देने होंगे। व्यापार समझौतों पर जोर अहलूवालिया ने सुझाव दिया कि भारत को एशियाई देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करना चाहिए। उनका मानना है कि वैश्विक व्यापार वृद्धि में एशिया की भूमिका लगातार बढ़ रही है और भारत को इसका लाभ उठाने के लिए नए व्यापार समझौतों और आर्थिक साझेदारियों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए निवेश संरक्षण से जुड़े ढांचों को मजबूत करना आवश्यक है। आगे क्या रहेगा रुपये की दिशा? हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आने और भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों के बीच रुपये में हल्की रिकवरी देखने को मिली है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में रुपये की चाल मुख्य रूप से इन कारकों पर निर्भर करेगी -  कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें विदेशी निवेश प्रवाह अमेरिकी ब्याज दरें पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति भारत की आर्थिक वृद्धि और निर्यात प्रदर्शन फिलहाल, मोंटेक सिंह अहलूवालिया का मानना है कि बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप रुपये को समायोजित होने देना एक व्यावहारिक और संतुलित आर्थिक नीति का हिस्सा है।  

surbhi मई 26, 2026 0
Reserve Bank of India headquarters image representing new banking capital and quarterly profit rules.
Reserve Bank of India का बड़ा फैसला, अब बैंक आसानी से तिमाही मुनाफे को बना सकेंगे पूंजी

Reserve Bank of India ने बैंकों को बड़ी राहत देते हुए पूंजी गणना से जुड़े नियमों को आसान बना दिया है। अब बैंक बिना किसी जटिल शर्त के अपनी तिमाही कमाई को मुख्य पूंजी यानी CET1 (Common Equity Tier 1) में शामिल कर सकेंगे। आरबीआई के इस फैसले से बैंकों के लिए अपनी पूंजीगत स्थिति मजबूत दिखाना और कैपिटल मैनेजमेंट करना पहले के मुकाबले काफी आसान हो जाएगा। क्या था पुराना नियम? अब तक बैंकों को अपनी तिमाही कमाई को CET1 पूंजी में शामिल करने के लिए एक अहम शर्त पूरी करनी होती थी। नियम के अनुसार, एनपीए (Non-Performing Assets) यानी फंसे हुए कर्ज के लिए की गई प्रोविजनिंग में पिछले चार तिमाहियों के औसत के मुकाबले 25 प्रतिशत से ज्यादा का बदलाव नहीं होना चाहिए था। अगर यह सीमा पार हो जाती थी, तो बैंक अपनी तिमाही कमाई को पूंजी में शामिल नहीं कर पाते थे। अब Reserve Bank of India ने इस 25% वाली शर्त को पूरी तरह खत्म कर दिया है। बैंकों को क्या होगा फायदा? इस बदलाव से बैंकों के लिए अपना Capital to Risk Weighted Assets Ratio (CRAR) बनाए रखना आसान होगा। CRAR यह बताता है कि किसी बैंक के पास संभावित नुकसान झेलने के लिए कितनी मजबूत पूंजी मौजूद है। अब बैंक हर तिमाही के मुनाफे को बिना किसी NPA-लिंक्ड बाधा के अपनी कोर कैपिटल में जोड़ सकेंगे। इससे उनकी बैलेंस शीट मजबूत दिखेगी और फंड मैनेजमेंट में भी आसानी होगी। किन बैंकों पर लागू होंगे नए नियम? Reserve Bank of India ने इस संबंध में तीन अलग-अलग निर्देश जारी किए हैं। ये नए नियम कमर्शियल बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों और पेमेंट बैंकों पर लागू होंगे। आरबीआई ने बताया कि यह फैसला 8 अप्रैल 2026 को जारी ड्राफ्ट प्रस्तावों और उस पर मिले सुझावों के बाद लिया गया है। आम लोगों और बैंकिंग सेक्टर पर क्या पड़ेगा असर? विशेषज्ञों के मुताबिक इस कदम से बैंकिंग सिस्टम ज्यादा व्यवस्थित और पारदर्शी बनेगा। जब बैंकों के लिए पूंजी की गणना आसान होती है, तो उन्हें लोन देने, बिजनेस विस्तार और जोखिम प्रबंधन में बेहतर स्पष्टता मिलती है। इससे बैंकिंग सेक्टर की स्थिरता मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।  

surbhi मई 9, 2026 0
RBI gold reserves being transported to India as central bank repatriates 104 tonnes from overseas vaults
Gold Back to India: विदेशों से 104 टन सोना वापस, रणनीतिक बदलाव के संकेत – क्या है असली वजह?

भारत ने अपने स्वर्ण भंडार को लेकर एक बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। Reserve Bank of India (RBI) ने पिछले छह महीनों में करीब 104 टन सोना विदेशों से वापस देश में मंगाया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ रही है। कितना सोना भारत में, कितना विदेश में? RBI की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के कुल 880.52 टन सोने में से अब लगभग 77% यानी करीब 680 टन सोना देश के भीतर सुरक्षित रखा गया है। वहीं, करीब 197.67 टन सोना अभी भी Bank of England और Bank for International Settlements (BIS) के पास रखा हुआ है। क्यों बदली रणनीति? पहले भारत सहित कई देश अपने सोने को लंदन और न्यूयॉर्क जैसे वैश्विक वित्तीय केंद्रों में रखते थे। इसके पीछे मुख्य कारण थे: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की खरीद-फरोख्त में आसानी वैश्विक लेनदेन में सुविधा विदेशी संस्थानों पर भरोसा लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। Russia-Ukraine War और अफगानिस्तान के विदेशी भंडार फ्रीज होने जैसी घटनाओं ने देशों को सतर्क कर दिया है। अब सोने को सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि रणनीतिक सुरक्षा (Strategic Asset) के रूप में देखा जा रहा है। क्या हैं प्रमुख जोखिम? विदेशों में रखी संपत्ति राजनीतिक कारणों से फ्रीज हो सकती है संकट के समय तुरंत उपयोग में लाना मुश्किल वैश्विक तनाव के कारण भरोसे में कमी विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ी हिस्सेदारी सोने की कीमतों में तेजी के चलते भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में इसकी अहमियत भी बढ़ी है: सितंबर 2025: 97.4 अरब डॉलर मार्च 2026: 115.4 अरब डॉलर हिस्सेदारी: 13.9% से बढ़कर 16.7% दुनिया में भी बढ़ रहा ट्रेंड भारत अकेला नहीं है, कई देश इसी राह पर चल रहे हैं: फ्रांस ने 129 टन सोना वापस मंगाया सर्बिया ने पूरा स्वर्ण भंडार देश में शिफ्ट किया जर्मनी भी अपने विदेशी भंडार की समीक्षा कर रहा है World Gold Council के अनुसार, 2025 तक 59% केंद्रीय बैंक अपना सोना अपने देश में रखना पसंद कर रहे हैं, जो 2020 में 50% था। क्या संकेत देता है यह कदम? भारत का यह कदम साफ तौर पर दर्शाता है कि बदलते वैश्विक माहौल में आर्थिक सुरक्षा और स्वायत्तता को प्राथमिकता दी जा रही है। यह सिर्फ एक वित्तीय निर्णय नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक सोच का हिस्सा है।  

surbhi मई 2, 2026 0
RBI cancels Paytm Payments Bank license, impacting banking services and customer accounts
बड़ा फैसला: Reserve Bank of India ने रद्द किया Paytm Payments Bank Limited का लाइसेंस, ग्राहकों के लिए क्या मायने?

भारतीय बैंकिंग सेक्टर में एक बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए Reserve Bank of India (RBI) ने Paytm Payments Bank Limited (PPBL) का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। यह फैसला 24 अप्रैल 2026 की शाम से प्रभावी हो गया, जिसके बाद बैंक की सभी बैंकिंग गतिविधियों पर पूर्ण रोक लग गई है। यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही नियामकीय जांच और बार-बार चेतावनियों के बावजूद सुधार न होने के चलते की गई है। RBI ने क्यों उठाया इतना बड़ा कदम? RBI के अनुसार, Paytm Payments Bank का संचालन जमाकर्ताओं के हित में नहीं पाया गया। बैंक निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करने में विफल रहा मैनेजमेंट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे बार-बार चेतावनी के बावजूद सुधार नहीं हुआ इसी आधार पर बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 की धारा 22(4) के तहत लाइसेंस रद्द करने का निर्णय लिया गया। अब बैंक का क्या होगा? लाइसेंस रद्द होने के बाद: बैंक किसी भी प्रकार की नई बैंकिंग सेवा नहीं दे सकेगा नए ग्राहक जोड़ना और ट्रांजैक्शन पूरी तरह बंद RBI अब बैंक को बंद (Winding Up) करने की प्रक्रिया शुरू करेगा इसके लिए हाईकोर्ट में आवेदन किया जाएगा सरल शब्दों में, बैंक अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। क्या ग्राहकों का पैसा सुरक्षित है? RBI ने ग्राहकों को राहत देते हुए कहा है कि: बैंक के पास पर्याप्त लिक्विडिटी मौजूद है सभी जमाकर्ताओं को उनका पैसा वापस किया जाएगा रिफंड प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी हालांकि, ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक अपडेट्स पर नजर बनाए रखें और निर्देशों का पालन करें। क्या यह फैसला अचानक लिया गया? यह कार्रवाई अचानक नहीं, बल्कि एक लंबी प्रक्रिया का परिणाम है: मार्च 2022: नए ग्राहक जोड़ने पर रोक जनवरी–फरवरी 2024: डिपॉजिट, वॉलेट टॉप-अप और क्रेडिट ट्रांजैक्शन पर प्रतिबंध लगातार चेतावनियों के बावजूद सुधार न होने पर अंतिम कार्रवाई ग्राहकों के लिए क्या करें? अपने खाते और बैलेंस की जानकारी नियमित रूप से जांचें RBI और बैंक की आधिकारिक घोषणाओं को फॉलो करें किसी भी अफवाह से बचें रिफंड प्रक्रिया शुरू होते ही आवश्यक कार्रवाई करें

surbhi अप्रैल 25, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0