मुंबई, एजेंसिया। केंद्र सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में अपनी हिस्सेदारी घटाने के लिए आज, 4 अगस्त 2026, ऑफर फॉर सेल (OFS) शुरू किया है। सरकार शुरुआती तौर पर 2% हिस्सेदारी बेच रही है और मांग के आधार पर अतिरिक्त 4.5% हिस्सेदारी बेचने का विकल्प रखा गया है। OFS का फ्लोर प्राइस ₹382 प्रति शेयर तय किया गया है.
पूरी तरह सब्सक्राइब होने पर सरकार 6.5% तक हिस्सेदारी बेच सकती है। इस बिक्री से करीब ₹31,410 करोड़ जुटने का अनुमान है। यह LIC की 2022 में शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद सरकार की पहली बड़ी हिस्सेदारी बिक्री होगी.
OFS का गैर-खुदरा हिस्सा 4 अगस्त को खुला है, जबकि खुदरा निवेशकों के लिए 5 अगस्त को बोली लगाने का अवसर रहेगा। सरकार का यह कदम LIC में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाने के नियामकीय लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण है.
सरकार की हिस्सेदारी बिक्री की घोषणा के बाद LIC के शेयर पर दबाव देखने को मिला। आज शुरुआती कारोबार में शेयर करीब 8.9% तक गिरकर लगभग चार महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। सुबह 9:41 बजे तक शेयर करीब 7.28% नीचे ₹397.30 के आसपास कारोबार कर रहा था.
सरकार की हिस्सेदारी बिक्री से LIC में सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग 3.5% से बढ़कर 10% तक पहुंच सकती है। यह बिक्री बाजार के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार को मई 2027 तक न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी संबंधी नियामकीय आवश्यकता पूरी करनी है.
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को चार कारोबारी सत्रों से जारी तेजी पर ब्रेक लग गया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों गिरावट के साथ बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स 210.73 अंक यानी 0.27 फीसदी गिरकर 78,428.95 पर, जबकि एनएसई निफ्टी 50 करीब 0.64 फीसदी की गिरावट के साथ 24,614.90 पर बंद हुआ। RBI की बैठक से पहले बाजार में दबाव बाजार में आज निवेशकों का रुख सतर्क रहा। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक चल रही है और बुधवार को RBI के नीतिगत फैसले का इंतजार है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और महंगाई को लेकर चिंता ने भी बाजार की धारणा प्रभावित की। IT और वित्तीय शेयरों में बिकवाली आज बाजार में ज्यादातर सेक्टर दबाव में रहे। IT और वित्तीय शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। रिपोर्ट के मुताबिक 16 प्रमुख सेक्टरों में से 15 में गिरावट रही। वहीं स्मॉलकैप शेयरों में मामूली मजबूती देखने को मिली, जबकि मिडकैप सूचकांक दबाव में रहा। नई क्लोजिंग ऑक्शन व्यवस्था का असर बाजार में उतार-चढ़ाव का एक अहम कारण नई क्लोजिंग ऑक्शन व्यवस्था (Closing Auction Session) भी रही। यह व्यवस्था 3 अगस्त से लागू हुई है। इसके तहत कुछ F&O शेयरों के क्लोजिंग मूल्य तय करने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के दूसरे दिन भी निफ्टी और सेंसेक्स के प्रदर्शन में असामान्य अंतर देखने को मिला।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs/FPIs) की वापसी के संकेत मजबूत हुए हैं। जुलाई 2026 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी में करीब ₹22,258 करोड़ का निवेश किया, जो लगभग 22 महीनों में सबसे मजबूत मासिक निवेश बताया जा रहा है। इससे बाजार में विदेशी पूंजी के दोबारा लौटने की उम्मीद बढ़ी है। लंबे समय की बिकवाली के बाद बदला रुख विदेशी निवेशकों की ओर से भारतीय शेयरों में खरीदारी ऐसे समय बढ़ी है, जब इससे पहले वे लगातार बिकवाली कर रहे थे। जुलाई के दौरान विदेशी पूंजी का रुख बदलना भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। SEBI के आंकड़ों के मुताबिक 2026 की शुरुआत में भी विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव काफी मजबूत था। मई में FPIs ने भारतीय प्रतिभूति बाजार से ₹29,484 करोड़ की शुद्ध निकासी की थी। इक्विटी में बढ़ा विदेशी निवेश जुलाई में विदेशी निवेशकों ने बॉन्ड की तुलना में भारतीय शेयर बाजार में ज्यादा रुचि दिखाई। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इक्विटी में करीब ₹22,258 करोड़ का निवेश हुआ, जबकि सरकारी बॉन्ड में निवेश पिछले महीने की तुलना में कम रहा। इससे संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशक भारतीय कंपनियों की कमाई और आर्थिक वृद्धि को लेकर फिर से सकारात्मक हो रहे हैं। बाजार के लिए क्या है इसका मतलब? FIIs की खरीदारी बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार में तरलता और निवेशकों का भरोसा मजबूत हो सकता है। विदेशी पूंजी का लगातार प्रवाह बना रहा तो इसका असर बड़े शेयरों के साथ-साथ व्यापक बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। हालांकि, वैश्विक बाजारों की दिशा, रुपये की चाल, कच्चे तेल की कीमत और भू-राजनीतिक परिस्थितियां आगे भी विदेशी निवेश के रुख को प्रभावित कर सकती हैं।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में आज शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स में तेजी देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स करीब 0.2% बढ़कर 78,762.54 के स्तर पर पहुंचा, जबकि निफ्टी 50 में शुरुआती गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स में बढ़त, निफ्टी पर दबाव आज के कारोबार में दोनों प्रमुख सूचकांकों की चाल अलग-अलग रही। सेंसेक्स बढ़त के साथ खुला, जबकि निफ्टी 50 करीब 0.67% गिरकर 24,607.90 पर आ गया। पिछले कारोबारी सत्र में निफ्टी में जोरदार तेजी आई थी। वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल पर नजर बाजार की दिशा पर अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों के संकेतों का असर बना हुआ है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों से भारतीय बाजार में मजबूत तेजी देखने को मिली थी। LIC के शेयर में तेज गिरावट आज LIC के शेयर में करीब 8% की गिरावट ने बाजार का ध्यान खींचा। सरकार की कंपनी में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचने की योजना की खबर के बाद LIC के शेयर पर दबाव बढ़ा।