Share Market

गाजा अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट के ₹550 करोड़ IPO की खबर
गाजा अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट का ₹550 करोड़ का IPO खुला, निवेशकों के लिए 21 अगस्त तक मौका

मुंबई, एजेंसियां। गाजा अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड (Gaja Alternative Asset Management), जो Gaja Capital ब्रांड के तहत कारोबार करती है, का ₹550 करोड़ का आईपीओ आज 19 अगस्त 2026 को सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया। यह आईपीओ 21 अगस्त तक खुला रहेगा। कंपनी ने शेयर का प्राइस बैंड ₹152 से ₹160 प्रति शेयर तय किया है।   ₹550 करोड़ का है पूरा इश्यू   गाजा अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट के आईपीओ में ₹450 करोड़ का फ्रेश इश्यू और करीब ₹100 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है। कंपनी ने आईपीओ खुलने से पहले एंकर निवेशकों से ₹165 करोड़ जुटाए हैं।   93 शेयरों का है एक लॉट   आईपीओ में निवेश के लिए 93 शेयरों का लॉट तय किया गया है। ऊपरी प्राइस बैंड ₹160 के हिसाब से खुदरा निवेशक को एक लॉट के लिए ₹14,880 का निवेश करना होगा। खुदरा निवेशकों के लिए नेट इश्यू का 35%, गैर-संस्थागत निवेशकों के लिए 15% और योग्य संस्थागत खरीदारों के लिए 50% हिस्सा आरक्षित है।   फंड का इस्तेमाल कहां होगा   कंपनी फ्रेश इश्यू से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल मौजूदा और नए फंड में निवेश संबंधी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने, ब्रिज लोन चुकाने और सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए करेगी। गाजा अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट भारत-केंद्रित फंडों का निवेश प्रबंधन करती है और वैकल्पिक निवेश फंड (AIF) तथा विदेशी फंडों को सलाह भी देती है।   26 अगस्त को शेयर बाजार में लिस्टिंग   आईपीओ की बोली प्रक्रिया 21 अगस्त को समाप्त होगी। शेयरों का आवंटन 24 अगस्त को होने की उम्मीद है और सफल निवेशकों के डीमैट खाते में शेयर 25 अगस्त को क्रेडिट किए जा सकते हैं। कंपनी के शेयरों की BSE और NSE पर लिस्टिंग 26 अगस्त 2026 को प्रस्तावित है। नोट: ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) केवल अनौपचारिक संकेतक है और लिस्टिंग प्राइस की गारंटी नहीं देता।

ranjan kumar tiwari अगस्त 19, 2026 0
Stock Market
Stock Market: शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत, सेंसेक्स 250 अंक से ज्यादा टूटा; निफ्टी 24,300 के नीचे

मुंबई, एजेंसियां। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 91 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने का असर मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत पर साफ दिखाई दिया। कारोबार खुलते ही सेंसेक्स करीब 250 अंक नीचे चला गया, जबकि निफ्टी 24,300 के स्तर से नीचे आ गया   निफ्टी और सेंसेक्स में गिरावट   सुबह 9:15 बजे निफ्टी 50 करीब 0.26% गिरकर 24,223.85 पर था। वहीं बीएसई सेंसेक्स 0.40% टूटकर 77,418.97 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में 16 प्रमुख सेक्टरों में से 11 में गिरावट देखी गई। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक भी करीब 0.1% नीचे रहे।   IT शेयरों पर ज्यादा दबाव   शुरुआती कारोबार में IT शेयरों में बिकवाली ज्यादा देखने को मिली। Infosys और HCL Technologies समेत प्रमुख IT शेयरों पर दबाव रहा। बाजार में निवेशकों का रुख सतर्क है और ऊंचे कच्चे तेल के साथ वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव बाजार की धारणा को प्रभावित कर रहा है।   कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंता   अमेरिका-ईरान युद्धविराम की अवधि समाप्त होने और नए समझौते की संभावना कमजोर पड़ने से ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर के पार पहुंच गया है। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई, चालू खाते और रुपये पर दबाव बढ़ने की चिंता है।   आज बाजार के लिए अहम स्तर   तकनीकी तौर पर 24,200 के आसपास निफ्टी का अहम सपोर्ट माना जा रहा है। इसके नीचे लगातार कारोबार होने पर 24,050 के आसपास अगला सपोर्ट देखा जा सकता है, जबकि ऊपर की तरफ 24,360-24,400 क्षेत्र तत्काल प्रतिरोध बन सकता है।

anjali kumari अगस्त 18, 2026 0
शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी की कमजोर शुरुआत
Stock Market: क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल से टूटा बाजार, सेंसेक्स 100 अंक नीचे खुला; निफ्टी भी फिसला

मुंबई, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतें करीब 89 डॉलर प्रति बैरल पहुंचने से सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 100 अंक से ज्यादा नीचे खुला, जबकि निफ्टी भी लाल निशान में रहा।   सेंसेक्स 100 अंक से ज्यादा गिरा     सोमवार को बीएसई सेंसेक्स 100 से अधिक अंक यानी 0.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,892.92 के स्तर पर खुला। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 करीब 22.55 अंक यानी 0.09 प्रतिशत गिरकर 24,343.45 पर पहुंच गया।   बड़े बैंकिंग शेयरों और आईटी कंपनियों में कमजोरी ने बाजार पर दबाव बढ़ाया। निवेशकों ने वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए कारोबार में सतर्क रुख अपनाया।   इन सेक्टर्स में दिखी ज्यादा कमजोरी     शुरुआती कारोबार में निफ्टी मिडस्मॉल फाइनेंशियल सर्विसेज करीब 0.98 प्रतिशत टूटकर सबसे ज्यादा दबाव में रहा। इसके अलावा निफ्टी पीएसयू बैंक और एफएमसीजी इंडेक्स में भी करीब 0.9 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई।   रियल्टी, सीमेंट, आईटी, एनर्जी और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में भी कमजोरी रही। हालांकि, निफ्टी केमिकल्स में 0.48 प्रतिशत और निफ्टी मिडस्मॉल हेल्थकेयर में 0.45 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली।   क्रूड ऑयल 89 डॉलर के आसपास     अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। क्रूड करीब 89 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, तेल की ऊंची कीमतें और भू-राजनीतिक अनिश्चितता भारतीय बाजार में तेजी की राह में बड़ी बाधा बन सकती है।     24,000-24,600 के दायरे में रह सकता है निफ्टी     बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, भू-राजनीतिक स्थिति में बड़ा सुधार नहीं होने तक निफ्टी 24,000 से 24,600 के दायरे में कारोबार कर सकता है।   तकनीकी स्तर पर 24,329 से 24,240 का क्षेत्र निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट माना जा रहा है। वहीं ऊपर की ओर 24,540 से 24,666 के स्तर पर मजबूत रेजिस्टेंस है। अगर निफ्टी 24,170 के नीचे फिसलता है तो इसमें और गिरावट आ सकती है और यह 23,575 के स्तर तक जा सकता है।   निवेशकों की नजर अब वैश्विक संकेतों पर     विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों को जल्दबाजी से बचते हुए बाजार के वैश्विक संकेतों पर नजर रखनी चाहिए। साथ ही मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मजबूत तिमाही नतीजों वाले चुनिंदा शेयरों में अवसर तलाशे जा सकते हैं।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
गजा कैपिटल के ₹550 करोड़ IPO की जानकारी
गजा कैपिटल का ₹550 करोड़ IPO 19 अगस्त से खुलेगा, प्राइस बैंड ₹152-160 तय

मुंबई, एजेंसियां। वैकल्पिक परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी गजा अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट, जो गजा कैपिटल ब्रांड के तहत कारोबार करती है, अपना ₹550 करोड़ का आईपीओ लेकर आ रही है। कंपनी ने आईपीओ का प्राइस बैंड ₹152 से ₹160 प्रति शेयर तय किया है। सार्वजनिक निर्गम के लिए सब्सक्रिप्शन 19 अगस्त 2026 से शुरू होगा और 21 अगस्त को बंद होगा।   ₹450 करोड़ का फ्रेश इश्यू   आईपीओ में ₹450 करोड़ का फ्रेश इश्यू शामिल है। इसके अलावा मौजूदा शेयरधारक करीब ₹100 करोड़ के शेयर ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेचेंगे। इस तरह आईपीओ का कुल आकार लगभग ₹550 करोड़ है।   19 से 21 अगस्त तक खुलेगा आईपीओ   गजा कैपिटल का आईपीओ 19 अगस्त को खुलेगा और 21 अगस्त को बंद होगा। एंकर निवेशकों के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया 18 अगस्त को होगी। कंपनी के शेयरों की BSE और NSE पर 26 अगस्त को लिस्टिंग प्रस्तावित है।   गजा कैपिटल के लिए क्यों अहम है आईपीओ?   यह आईपीओ भारतीय पूंजी बाजार में एक खास कदम माना जा रहा है, क्योंकि गजा कैपिटल भारत की प्रमुख घरेलू वैकल्पिक निवेश प्रबंधन कंपनियों में शामिल है। कंपनी के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक गोपाल जैन के मुताबिक, सार्वजनिक बाजार में प्रवेश से कंपनी के कारोबार में पारदर्शिता और संस्थागत स्वरूप को बढ़ावा मिल सकता है

ranjan kumar tiwari अगस्त 14, 2026 0
SEBI की स्टडी में एंकर निवेशकों और FPI की IPO बिक्री का विश्लेषण
एंकर निवेशकों पर SEBI का बड़ा खुलासा, विदेशी निवेशक IPO शेयर जल्दी बेचने में सबसे आगे

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की नई स्टडी में एंकर निवेशकों के शेयर बेचने के व्यवहार को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। SEBI ने 13 अगस्त 2026 को मेनबोर्ड IPO में एंकर निवेशकों के बाहर निकलने के पैटर्न पर अध्ययन जारी किया। रिपोर्ट के मुताबिक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) एंकर निवेशकों में सबसे तेजी से अपनी हिस्सेदारी बेचने वालों में रहे।   30 दिन की लॉक-इन अवधि के बाद बढ़ती है बिकवाली     SEBI की स्टडी में अप्रैल 2022 से अक्टूबर 2025 के बीच सूचीबद्ध 242 मेनबोर्ड IPO का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि एंकर निवेशकों की 30 दिन की लॉक-इन अवधि खत्म होने के आसपास शेयरों की बिक्री बढ़ जाती है। इस दौरान भारी बिकवाली का असर कई IPO शेयरों की कीमतों पर भी देखा गया।     FPI सबसे ज्यादा शेयर बेचने वाले एंकर निवेशक     अध्ययन के मुताबिक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने म्यूचुअल फंड की तुलना में एंकर निवेश के शेयर अधिक तेजी से बेचे। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि छोटे आकार के IPO में एंकर निवेशकों की निकासी और बिक्री की तीव्रता ज्यादा रही।     निवेशकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है SEBI की स्टडी?     एंकर निवेशक आमतौर पर IPO खुलने से पहले बड़े संस्थागत निवेश के जरिए कंपनी में भरोसे का संकेत देते हैं। लेकिन लॉक-इन अवधि समाप्त होने के बाद यदि बड़ी मात्रा में शेयर बाजार में बिकने लगते हैं, तो इससे शेयर की कीमत पर दबाव बन सकता है। SEBI की स्टडी इसी जोखिम को समझने में निवेशकों के लिए उपयोगी है।     SEBI ने एंकर आवंटन व्यवस्था में किए हैं बदलाव     SEBI की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, एंकर निवेशक आवंटन व्यवस्था में बदलाव का उद्देश्य IPO में दीर्घकालिक संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना रहा है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 14, 2026 0
Stock Market Today
शेयर बाजार में आज फिर दबाव, सेंसेक्स 300 अंक तक टूटा; निफ्टी 24,350 के नीचे

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 को कारोबार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 300 अंक नीचे चला गया, जबकि निफ्टी 50 24,350 के स्तर से नीचे आ गया। वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेत, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और निवेशकों की सतर्कता का असर घरेलू बाजार पर दिखाई दिया।   सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव   गुरुवार के कारोबार में भी बाजार में स्पष्ट दिशा नहीं थी। सेंसेक्स 113.61 अंक चढ़कर 78,079.96 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 50 40.10 अंक गिरकर 24,395.85 पर बंद हुआ। शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में दोनों प्रमुख सूचकांकों पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया और सेंसेक्स में करीब 300 अंकों की गिरावट देखने को मिली।   पश्चिम एशिया तनाव और कच्चा तेल बना चिंता   निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी हुई है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से भारत के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर पड़ने की आशंका बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही है।   इन शेयरों पर रहेगी नजर   आज Tata Motors Passenger Vehicles, LG Electronics India, Honasa Consumer, Welspun Living, KRBL, Indigo Paints, Piramal Pharma, UltraTech Cement और Urban Company समेत कई शेयरों में कॉरपोरेट अपडेट और तिमाही नतीजों के कारण गतिविधि देखने को मिल सकती है।   बाजार की आगे की दिशा   विशेषज्ञों के मुताबिक, फिलहाल निफ्टी में 24,200-24,700 के दायरे पर नजर रहेगी। वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल और भू-राजनीतिक घटनाक्रम आने वाले सत्रों में बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक रह सकते हैं। 

anjali kumari अगस्त 14, 2026 0
SEBI की नई क्लोजिंग ऑक्शन व्यवस्था और चेयरमैन तुहिन कांता पांडेय
SEBI की नई क्लोजिंग ऑक्शन व्यवस्था पर उठे सवाल, चेयरमैन बोले- अब तक हेरफेर के सबूत नहीं

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में SEBI की नई क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) व्यवस्था को लेकर शुरुआती दिनों में उठे सवालों के बीच बाजार नियामक ने स्पष्ट किया है कि उसे अब तक इस व्यवस्था में किसी तरह की हेरफेर के सबूत नहीं मिले हैं। SEBI चेयरमैन तुहिन कांता पांडेय ने कहा कि नियामक नई व्यवस्था की लगातार निगरानी कर रहा है।   3 अगस्त से लागू हुई नई व्यवस्था   SEBI ने 3 अगस्त 2026 से F&O में शामिल शेयरों के लिए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन लागू किया है। इससे पहले शेयरों का क्लोजिंग प्राइस नियमित कारोबार के आखिरी 30 मिनट के VWAP यानी वॉल्यूम-वेटेड औसत मूल्य के आधार पर तय होता था। नई व्यवस्था में खरीद और बिक्री के ऑर्डर को एक साथ मिलाकर अधिकतम कारोबार संभव कराने वाली कीमत को क्लोजिंग प्राइस बनाया जाता है।   20 मिनट की ऑक्शन प्रक्रिया से तय होगा क्लोजिंग प्राइस   नई व्यवस्था में F&O वाले शेयरों का नियमित कारोबार दोपहर 3:15 बजे समाप्त होता है। इसके बाद क्लोजिंग ऑक्शन प्रक्रिया शुरू होती है और ऑर्डर के आधार पर संतुलन कीमत तय की जाती है। इसका उद्देश्य शेयर के अंतिम भाव की बेहतर और अधिक पारदर्शी कीमत खोज करना है।   शुरुआती दिनों में निफ्टी की चाल से बढ़ी चिंता   नई व्यवस्था लागू होने के शुरुआती दिनों में क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान कुछ शेयरों और इंडेक्स में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इससे बाजार में संभावित हेरफेर को लेकर सवाल उठे। SEBI चेयरमैन ने कहा कि शुरुआती दिनों में कम भागीदारी और सावधानी से ट्रेडिंग के कारण कुछ असामान्य अंतर दिखाई दे सकते हैं, लेकिन अब तक नियामक को हेरफेर का कोई प्रमाण नहीं मिला है।   म्यूचुअल फंड की भागीदारी बढ़ी   SEBI के अनुसार, नई व्यवस्था के पहले दिन क्लोजिंग ऑक्शन में म्यूचुअल फंड की भागीदारी करीब 5-6% थी, जो बाद में बढ़कर लगभग 20-25% हो गई। SEBI का मानना है कि जैसे-जैसे बाजार के प्रतिभागी नई प्रणाली के अभ्यस्त होंगे, इसमें भागीदारी और बढ़ सकती है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 13, 2026 0
Stock Market
Stock Market: शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 200 अंक से ज्यादा टूटा; निफ्टी 24,400 के नीचे

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 13 अगस्त 2026 को कारोबार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 200 अंक से ज्यादा फिसल गया, जबकि निफ्टी 50, 24,400 के स्तर से नीचे कारोबार करता नजर आया। बाजार में लगातार दूसरे दिन दबाव देखने को मिला।   सेंसेक्स और निफ्टी में दबाव   सुबह के कारोबार में सेंसेक्स करीब 200 अंक से ज्यादा गिरकर 77,800 के आसपास पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 करीब 24,350 के स्तर तक फिसला। शुरुआती कारोबार में निफ्टी में लगभग 0.3% की गिरावट दर्ज की गई।   14 में से 16 सेक्टरों में गिरावट   बाजार में बिकवाली व्यापक रही। शुरुआती कारोबार में 16 प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स में से 14 लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। हालांकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट अपेक्षाकृत सीमित रही।   कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव का असर   निवेशकों की चिंता का प्रमुख कारण मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव तथा शांति वार्ता में प्रगति की कमी ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया। कच्चे तेल की कीमतों को लेकर भी निवेशक सतर्क हैं।   आज एक्सपायरी से बढ़ सकती है हलचल   गुरुवार को निफ्टी की साप्ताहिक डेरिवेटिव एक्सपायरी भी है। ऐसे में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की संभावना है। निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी हुई है।

anjali kumari अगस्त 13, 2026 0
Stock Market
Stock Market: शेयर बाजार में हल्की तेजी, सेंसेक्स 178 अंक चढ़ा; निफ्टी 24,600 के पार

नई दिल्ली, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को शुरुआती कारोबार में हल्की तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। बेहतर पहली तिमाही के नतीजों, मजबूत घरेलू मांग और विदेशी निवेशकों की खरीदारी से बाजार को सहारा मिला। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार पर दबाव बनाए रखा।   सेंसेक्स 78,676 के स्तर तक पहुंचा   शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 177.81 अंक यानी 0.22 फीसदी चढ़कर 78,676 के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी करीब 50 अंक यानी 0.20 फीसदी की बढ़त के साथ 24,620 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।   फार्मा और आईटी शेयरों में खरीदारी   सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी फार्मा 0.72 फीसदी की बढ़त के साथ मजबूत प्रदर्शन करने वाला प्रमुख सूचकांक रहा। हेल्थकेयर इंडेक्स में भी तेजी रही। वहीं, निफ्टी आईटी 0.53 फीसदी और मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम इंडेक्स 0.58 फीसदी चढ़ा।   इसके अलावा निजी बैंक, ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और रियल्टी शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। दूसरी ओर, निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.27 फीसदी और पीएसयू बैंक इंडेक्स 0.21 फीसदी नीचे रहा।   बेहतर तिमाही नतीजों से निवेशकों का भरोसा मजबूत   बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, कंपनियों के पहली तिमाही के उम्मीद से बेहतर नतीजों और मजबूत घरेलू मांग ने बाजार की धारणा को सकारात्मक बनाए रखा है। कमाई के सीजन में कई कंपनियों ने अनुमान से बेहतर आय वृद्धि दर्ज की है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।   FII की खरीदारी से भी बाजार को सहारा   विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी भी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, जुलाई में विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध खरीदार रहे और अगस्त में भी खरीदारी का रुख देखने को मिला है।   कच्चे तेल की कीमतों में तेजी चिंता   हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। शुरुआती कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड 1 फीसदी से अधिक बढ़कर 84.73 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 1.59 फीसदी चढ़कर 79.43 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है, इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी का असर बाजार और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

anjali kumari अगस्त 10, 2026 0
Nazara Technologies के Preferential Issue की घोषणा
Nazara Technologies जुटाएगी ₹733.5 करोड़, ₹306 प्रति शेयर के भाव पर Preferential Issue को मंजूरी

मुंबई, एजेंसियां। गेमिंग कंपनी Nazara Technologies ने कारोबार के विस्तार और विकास योजनाओं के लिए बड़ी पूंजी जुटाने का फैसला किया है। कंपनी के बोर्ड ने करीब ₹733.5 करोड़ का Preferential Issue मंजूर किया है। इसके तहत कंपनी ₹306 प्रति शेयर के भाव पर नए इक्विटी शेयर जारी करेगी।   2.39 करोड़ से ज्यादा शेयर जारी होंगे     कंपनी के बोर्ड ने अधिकतम 2,39,70,676 इक्विटी शेयर जारी करने को मंजूरी दी है। इन शेयरों का इश्यू प्राइस ₹306 प्रति शेयर रखा गया है। इस पूरी प्रक्रिया से कंपनी को करीब ₹733.5 करोड़ की नई पूंजी मिलने की उम्मीद है।   कंपनी की ओर से यह पूंजी जुटाने का कदम ऐसे समय में आया है जब Nazara अपने गेमिंग और डिजिटल मनोरंजन कारोबार को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है।   नई पूंजी का इस्तेमाल विस्तार में     Preferential Issue से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल कंपनी की विकास और विस्तार योजनाओं को मजबूत करने में किया जा सकता है। कंपनी गेमिंग, डिजिटल मनोरंजन और इससे जुड़े कारोबार में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए निवेश कर रही है। बाजार के लिए यह फंडरेजिंग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे कंपनी को अपने विस्तार के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन मिलेंगे।     निवेशकों की नजर शेयर पर     Nazara Technologies के इस फैसले पर शेयर बाजार के निवेशकों की नजर बनी हुई है। Preferential Issue से कंपनी में नई पूंजी आने के साथ-साथ नए निवेशकों और रणनीतिक भागीदारों की हिस्सेदारी बढ़ सकती है।   हालांकि, Preferential Issue के कारण शेयरों की संख्या बढ़ने से मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी में संभावित dilution का पहलू भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। इसलिए बाजार कंपनी की पूंजी जुटाने की योजना और उसके इस्तेमाल के परिणामों पर नजर रखेगा।

ranjan kumar tiwari अगस्त 7, 2026 0
LIC headquarters and stock market visuals highlighting India's largest government stake sale through OFS.
LIC OFS: सरकार ने चुपचाप जुटाए ₹31,522 करोड़, देश के सबसे बड़े OFS से बाजार भी रह गया हैरान

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC में 6.5% हिस्सेदारी बेचकर ₹31,522 करोड़ जुटा लिए हैं। यह भारत के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा ऑफर फॉर सेल (OFS) रहा। खास बात यह रही कि पूरी प्रक्रिया को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया गया, जिससे बाजार में पहले से कोई हलचल नहीं हुई और शेयर की कीमत पर भी बड़ा दबाव नहीं पड़ा। सरकार को पहले से ही LIC में अपनी हिस्सेदारी घटाकर सार्वजनिक शेयरधारिता (Public Shareholding) बढ़ानी थी। सेबी के नियमों के अनुसार मई 2027 तक LIC में कम से कम 10% पब्लिक शेयरहोल्डिंग सुनिश्चित करनी है। इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने अंतिम समय तक OFS की लॉन्च तारीख को पूरी तरह गोपनीय रखा। इसका उद्देश्य यह था कि बड़े ट्रेडर्स और निवेशक पहले से पोजीशन लेकर शेयर की कीमत में गिरावट न ला सकें। यही रणनीति सरकार के लिए फायदेमंद साबित हुई और शुरुआती योजना से कहीं अधिक शेयर बेचने में सफलता मिली। बाजार को नहीं लगी भनक सूत्रों के मुताबिक, इस डील से जुड़े निवेश बैंकों को भी अलग-अलग समय पर जानकारी दी गई। एक बैंक को तो स्टॉक एक्सचेंज में सूचना जारी होने से कुछ समय पहले ही बुलाकर बताया गया कि उसी शाम OFS लॉन्च किया जाएगा। केवल एक छोटी कोर टीम को पूरी योजना की जानकारी थी, जबकि बाकी सलाहकारों को बाजार बंद होने के बाद प्रक्रिया में शामिल किया गया। बिना फीस के काम करने को तैयार हुए बैंक इस डील की एक और खास बात यह रही कि सलाह देने वाले चारों निवेश बैंकों ने कोई एडवाइजरी फीस नहीं ली। बताया गया कि एक बैंक ने शुरुआत में मुफ्त में काम करने की पेशकश की, जिसके बाद बाकी बैंकों ने भी फीस छोड़ने का फैसला किया। सरकारी विनिवेश से जुड़ी डील में अक्सर बैंक बेहद कम या नाममात्र की फीस लेते हैं। सही समय का भी मिला फायदा बाजार को उम्मीद थी कि सरकार LIC के तिमाही नतीजों के बाद OFS लाएगी। लेकिन सरकार ने इससे पहले ही शेयर बिक्री शुरू कर दी। अधिकारियों का मानना था कि निवेशकों को असमंजस में रखने से शेयर की कीमत स्थिर रहेगी और बेहतर प्रतिक्रिया मिलेगी। छोटे ऑफर से शुरू हुई बड़ी डील सरकार ने शुरुआत में केवल 2.5% हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई थी, जबकि अच्छी मांग मिलने पर अतिरिक्त 4% हिस्सेदारी बेचने का विकल्प रखा गया। यह रणनीति सफल रही। संस्थागत निवेशकों के लिए खुला हिस्सा 3.32 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसके बाद सरकार ने अतिरिक्त शेयर भी जारी कर दिए। रिटेल निवेशकों की ओर से भी अच्छी भागीदारी देखने को मिली और कुल OFS करीब 1.2 गुना सब्सक्राइब हुआ। इस बिक्री के बाद LIC में पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़कर 10% हो जाएगी, जिससे सेबी की निर्धारित शर्त पूरी हो जाएगी।  

surbhi अगस्त 6, 2026 0
LIC OFS में सरकार की हिस्सेदारी बिक्री से जुड़ी जानकारी
LIC OFS: सरकार बेचेगी 6.5% तक हिस्सेदारी, ₹382 प्रति शेयर तय फ्लोर प्राइस

मुंबई, एजेंसिया। केंद्र सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में अपनी हिस्सेदारी घटाने के लिए आज, 4 अगस्त 2026, ऑफर फॉर सेल (OFS) शुरू किया है। सरकार शुरुआती तौर पर 2% हिस्सेदारी बेच रही है और मांग के आधार पर अतिरिक्त 4.5% हिस्सेदारी बेचने का विकल्प रखा गया है। OFS का फ्लोर प्राइस ₹382 प्रति शेयर तय किया गया है.   6.5% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी     पूरी तरह सब्सक्राइब होने पर सरकार 6.5% तक हिस्सेदारी बेच सकती है। इस बिक्री से करीब ₹31,410 करोड़ जुटने का अनुमान है। यह LIC की 2022 में शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद सरकार की पहली बड़ी हिस्सेदारी बिक्री होगी.     पहले संस्थागत, फिर खुदरा निवेशकों के लिए मौका     OFS का गैर-खुदरा हिस्सा 4 अगस्त को खुला है, जबकि खुदरा निवेशकों के लिए 5 अगस्त को बोली लगाने का अवसर रहेगा। सरकार का यह कदम LIC में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाने के नियामकीय लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण है.     OFS की खबर से LIC शेयर में गिरावट     सरकार की हिस्सेदारी बिक्री की घोषणा के बाद LIC के शेयर पर दबाव देखने को मिला। आज शुरुआती कारोबार में शेयर करीब 8.9% तक गिरकर लगभग चार महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। सुबह 9:41 बजे तक शेयर करीब 7.28% नीचे ₹397.30 के आसपास कारोबार कर रहा था.   सरकार की हिस्सेदारी बिक्री से LIC में सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग 3.5% से बढ़कर 10% तक पहुंच सकती है। यह बिक्री बाजार के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार को मई 2027 तक न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी संबंधी नियामकीय आवश्यकता पूरी करनी है.

ranjan kumar tiwari अगस्त 4, 2026 0
LIC OFS 2026 offering shares at discounted price as government reduces stake in Life Insurance Corporation of India
LIC OFS: 10% सस्ते में मिल रहा LIC का शेयर, सरकार बेच रही 82.22 करोड़ से ज्यादा शेयर; आज से शुरू बिक्री

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में सरकार अपनी हिस्सेदारी कम करने जा रही है। सरकार मंगलवार से दो दिवसीय ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए LIC के 82.22 करोड़ से अधिक शेयर बेच रही है। इसके लिए 382 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया गया है। इस कीमत पर LIC के शेयर सोमवार के बंद भाव की तुलना में करीब 10 प्रतिशत की छूट पर उपलब्ध होंगे। सरकार की इस हिस्सेदारी बिक्री से सरकारी खजाने में करीब 31,000 करोड़ रुपये आने की उम्मीद है। सरकार बेच रही 6.5% हिस्सेदारी सरकार LIC में अपनी कुल 6.5 प्रतिशत तक हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है। इसमें शुरुआती तौर पर 2.5 प्रतिशत हिस्सेदारी और अतिरिक्त 4 प्रतिशत का ग्रीन शू विकल्प शामिल है। निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव अरुणीश चावला के मुताबिक, पूरी सदस्यता मिलने और तय फ्लोर प्राइस पर बिक्री होने की स्थिति में सरकार 82.22 करोड़ से अधिक शेयर बेच सकती है। इस पूरी बिक्री का मूल्य करीब 31,000 करोड़ रुपये बैठता है। पहले संस्थागत निवेशक, फिर आम निवेशकों की बारी LIC OFS की प्रक्रिया दो दिनों में पूरी होगी। मंगलवार: बिक्री संस्थागत निवेशकों के लिए खुलेगी। बुधवार: आम निवेशक भी OFS में बोली लगा सकेंगे। इस तरह खुदरा निवेशकों को भी बाजार भाव की तुलना में कम कीमत पर LIC के शेयर खरीदने का मौका मिल सकता है। हालांकि, OFS में शेयर मिलना बोली और उपलब्ध शेयरों पर निर्भर करेगा। 382 रुपये का फ्लोर प्राइस क्यों खास है? LIC OFS के लिए सरकार ने 382 रुपये प्रति शेयर का न्यूनतम मूल्य तय किया है। सोमवार के बंद भाव के मुकाबले यह करीब 10 प्रतिशत कम है। सोमवार को LIC का शेयर BSE पर लगभग 424.85 रुपये पर बंद हुआ था। वहीं, दिए गए आंकड़ों के मुताबिक LIC का 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर 468.30 रुपये और निचला स्तर 361 रुपये रहा है। इसका मतलब है कि OFS का फ्लोर प्राइस बाजार के मौजूदा भाव की तुलना में आकर्षक दिखाई दे रहा है, लेकिन केवल डिस्काउंट देखकर निवेश का फैसला करना उचित नहीं होगा। सरकार की हिस्सेदारी घटेगी इस OFS के बाद LIC में सरकार की हिस्सेदारी कम होगी। फिलहाल सरकार के पास कंपनी की करीब 96.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है। LIC को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद से न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता संबंधी नियमों को पूरा करना है। सेबी ने LIC को कम से कम 10 प्रतिशत सार्वजनिक शेयरधारिता हासिल करने के लिए 16 मई 2027 तक की समयसीमा दी थी। सरकार की मौजूदा हिस्सेदारी बिक्री इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। LIC का मार्केट कैप कितना है? सोमवार के बंद भाव के आधार पर LIC का बाजार पूंजीकरण करीब 5.37 लाख करोड़ रुपये था। कंपनी बाजार पूंजीकरण के लिहाज से देश की प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों में शामिल है। LIC के शेयर का प्रदर्शन निवेशकों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी देश के बीमा क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है और इसमें सरकार की बड़ी हिस्सेदारी है। निवेशकों को क्या समझना चाहिए? LIC OFS में करीब 10 प्रतिशत का डिस्काउंट निश्चित रूप से निवेशकों का ध्यान खींच सकता है। लेकिन शेयर बाजार में किसी भी निवेश का फैसला सिर्फ डिस्काउंट देखकर नहीं किया जाना चाहिए। निवेशकों को कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, वैल्यूएशन, बीमा कारोबार की स्थिति, भविष्य की वृद्धि और बाजार जोखिम को ध्यान में रखना चाहिए। OFS में शेयर मिलने की गारंटी भी नहीं होती, क्योंकि आवंटन मांग और उपलब्ध शेयरों पर निर्भर करता है।  

surbhi अगस्त 4, 2026 0
Vedanta share price falls despite strong quarterly results as brokerages set targets up to ₹333
Vedanta Share Price: शानदार तिमाही नतीजों के बाद भी फिसला वेदांता का शेयर, ब्रोकरेज ने बताया ₹333 तक पहुंचने का अनुमान

नई दिल्ली: अनिल अग्रवाल की मेटल और माइनिंग सेक्टर की दिग्गज कंपनी वेदांता लिमिटेड के शेयरों में शुक्रवार, 31 जुलाई को शुरुआती कारोबार में दबाव देखने को मिला। कंपनी के मजबूत तिमाही नतीजों के बावजूद शेयर एक समय एक फीसदी से अधिक गिरकर ₹263.20 के स्तर तक पहुंच गया। इससे निवेशकों के बीच सवाल उठने लगा कि आखिर शानदार प्रदर्शन के बाद भी शेयर में कमजोरी क्यों आई और आगे इसकी दिशा क्या हो सकती है। वेदांता ने गुरुवार को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए थे। आंकड़ों के मुताबिक कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 72 फीसदी बढ़कर ₹5,473 करोड़ हो गया। कंपनी के मुनाफे में यह तेज बढ़ोतरी उसके ऑपरेशनल प्रदर्शन में मजबूती को दिखाती है। EBITDA में 98 फीसदी की जोरदार बढ़ोतरी वेदांता का प्रदर्शन सिर्फ मुनाफे तक सीमित नहीं रहा। पहली तिमाही में कंपनी का EBITDA सालाना आधार पर करीब 98 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड ₹8,469 करोड़ पहुंच गया। कॉपर कारोबार को छोड़कर कंपनी का EBITDA मार्जिन भी 985 बेसिस पॉइंट्स की मजबूती के साथ 57 फीसदी हो गया। यह कंपनी की ऑपरेशनल दक्षता और बेहतर मार्जिन प्रोफाइल की ओर इशारा करता है। वहीं, कंपनी के ऑपरेशन से होने वाले रेवेन्यू में भी जोरदार वृद्धि हुई। पहली तिमाही में यह सालाना आधार पर 54 फीसदी बढ़कर ₹24,205 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹15,754 करोड़ था। मजबूत नतीजों के बावजूद शेयर क्यों फिसला? मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के बावजूद शेयर में शुरुआती गिरावट ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। पिछले कारोबारी सत्र में BSE पर वेदांता का शेयर ₹267.70 पर बंद हुआ था। शुक्रवार को यह ₹269 पर खुला, लेकिन शुरुआती कारोबार में बिकवाली के दबाव में ₹263.20 तक फिसल गया। बाजार में अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि मजबूत नतीजों की उम्मीद पहले से शेयर की कीमत में शामिल हो जाती है। ऐसे में वास्तविक नतीजे अच्छे होने के बावजूद निवेशकों की मुनाफावसूली या भविष्य की संभावनाओं को लेकर सावधानी शेयर पर दबाव डाल सकती है। ब्रोकरेज की नजर में ₹333 तक जा सकता है शेयर वेदांता के आगे के प्रदर्शन को लेकर ब्रोकरेज हाउस का रुख पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। नुवामा ने शेयर पर 'Buy' रेटिंग देते हुए ₹333 का टारगेट प्राइस दिया है। मौजूदा स्तरों के मुकाबले यह करीब 24 फीसदी की संभावित तेजी का संकेत देता है। दूसरी ओर, मोतीलाल ओसवाल ने वेदांता पर 'Neutral' रेटिंग बरकरार रखी है और ₹290 का टारगेट प्राइस तय किया है। मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक कंपनी का रेवेन्यू अनुमान के अनुरूप रहा। इसमें LME, प्रीमियम और फॉरेक्स से मिले फायदे का योगदान रहा है। निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है? वेदांता के तिमाही आंकड़े कंपनी की मजबूत कमाई और बेहतर मार्जिन की तस्वीर पेश करते हैं। हालांकि, शेयर बाजार में किसी भी स्टॉक का भविष्य सिर्फ एक तिमाही के नतीजों से तय नहीं होता। कमोडिटी कीमतों, वैश्विक बाजार की स्थिति, कंपनी के कर्ज, कैपिटल एक्सपेंडिचर और आने वाली तिमाहियों के प्रदर्शन जैसे कई कारक शेयर की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए ब्रोकरेज के टारगेट प्राइस को संभावित बाजार अनुमान के तौर पर देखना चाहिए, न कि निश्चित रिटर्न की गारंटी के रूप में। निवेशकों को किसी भी फैसले से पहले कंपनी के वित्तीय आंकड़ों और अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करना चाहिए।  

surbhi जुलाई 31, 2026 0
Rajesh Khanna Ashirwad
बॉम्बे हाईकोर्ट का राजेश खन्ना के बंगले 'आशीर्वाद' पर बड़ा आदेश, 'भूतिया' या 'मनहूस' बताने पर लगाई रोक

मौजूदा मालिक की याचिका पर अदालत ने मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म को दिए निर्देश, अगली सुनवाई 21 अगस्त को   मुंबई, एजेंसियां। बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिवंगत अभिनेता राजेश खन्ना के पूर्व बंगले 'आशीर्वाद' को लेकर महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने मीडिया संस्थानों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया को निर्देश दिया है कि वे इस संपत्ति को "भूतिया (Haunted)", "मनहूस (Cursed)", "अशुभ (Unlucky)" या "अपशकुनी (Ill-omened)" जैसे शब्दों से संबोधित न करें। अदालत ने माना कि ऐसी टिप्पणियां प्रथम दृष्टया मानहानिकारक हैं।   मौजूदा मालिक ने अदालत का दरवाजा खटखटाया   यह याचिका बंगले के वर्तमान मालिक शशि किरण शेट्टी ने दायर की थी। उन्होंने अदालत को बताया कि वर्षों से प्रकाशित समाचार, सोशल मीडिया पोस्ट और यूट्यूब वीडियो में संपत्ति को "मनहूस" और "भूतिया" बताया जा रहा है, जिससे उनके परिवार की प्रतिष्ठा और शांतिपूर्ण जीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि पुराना बंगला कई वर्ष पहले गिराकर उसी स्थान पर नया मकान बनाया गया, लेकिन उसका नाम 'आशीर्वाद' ही रखा गया।   अदालत ने क्या कहा   न्यायमूर्ति आरिफ एस. डॉक्टर ने 24 जुलाई को पारित अंतरिम आदेश में कहा कि इस प्रकार के विवरण प्रथम दृष्टया मानहानिकारक प्रतीत होते हैं और याचिकाकर्ता के गरिमा के साथ शांतिपूर्ण जीवन जीने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करते हैं। अदालत ने संबंधित सामग्री के प्रसार पर अंतरिम रोक लगाते हुए अगली सुनवाई 21 अगस्त 2026 तय की है।   'आशीर्वाद' का बॉलीवुड से खास रिश्ता   मुंबई के बांद्रा स्थित कार्टर रोड पर बना 'आशीर्वाद' कभी हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना का प्रतिष्ठित निवास था। इससे पहले यह अभिनेता राजेंद्र कुमार के पास था। वर्षों से इस बंगले को लेकर कई तरह की अफवाहें और कहानियां प्रचलित रही हैं, जिन पर अब अदालत ने सख्त रुख अपनाया है।

abhishek singh जुलाई 31, 2026 0
Gokul Agro Resources shares rise after strong quarterly results and diversified business drive multibagger returns
Multibagger Stock: 5 साल में 1,107% रिटर्न, 7% उछला शेयर; मजबूत नतीजों और बिजनेस डायवर्सिफिकेशन से मिली रफ्तार

शेयर बाजार में कुछ कंपनियां ऐसी होती हैं, जिन्होंने लंबी अवधि में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। FMCG और एग्री-प्रोसेसिंग सेक्टर की कंपनी गोकुल एग्रो रिसोर्सेज लिमिटेड भी ऐसे ही शेयरों में शामिल है। कंपनी के शेयर ने पिछले पांच वर्षों में करीब 1,107 फीसदी का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। वहीं, हालिया कारोबारी सत्र में भी शेयर में 7 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। कंपनी के हालिया तिमाही नतीजों में भी कारोबार की मजबूती नजर आई है। FY27 की पहली तिमाही में गोकुल एग्रो रिसोर्सेज का कंसोलिडेटेड ऑपरेशंस से रेवेन्यू सालाना आधार पर करीब 7 फीसदी बढ़कर 5,281.95 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 4,924.35 करोड़ रुपये था। कंपनी की कुल आय भी 7 फीसदी बढ़कर 5,295.01 करोड़ रुपये रही। शेयर में क्यों आई तेजी? गुरुवार के कारोबारी सत्र में गोकुल एग्रो रिसोर्सेज के शेयरों में 7 फीसदी से अधिक की तेजी दर्ज की गई। इससे पहले बुधवार को शेयर 223.20 रुपये पर बंद हुआ था। गुरुवार को यह 225.40 रुपये पर खुला और इंट्राडे कारोबार में करीब 238.58 रुपये तक पहुंच गया। यह कंपनी के 52-सप्ताह के 249.92 रुपये के उच्च स्तर के भी करीब रहा। हालिया तेजी के पीछे कंपनी के मजबूत तिमाही नतीजों को एक अहम वजह माना जा रहा है। इसके अलावा कंपनी का विविधीकृत कारोबार, ऑपरेशनल एफिशिएंसी और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स पर फोकस भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ाने वाले कारकों में शामिल हैं। प्रोडक्ट डायवर्सिफिकेशन से मिला फायदा गोकुल एग्रो रिसोर्सेज खाद्य तेल, अरंडी तेल और एग्री-प्रोसेसिंग से जुड़े कारोबार में सक्रिय है। कंपनी के मुताबिक, उसके प्रदर्शन को प्रोडक्ट डायवर्सिफिकेशन, बेहतर ऑपरेशनल दक्षता, वैल्यू-एडेड उत्पादों और एक्सपोर्ट कारोबार से फायदा मिला है। कंपनी का डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क 575 से अधिक है। इसके उत्पाद देश के 28 राज्यों में उपलब्ध हैं, जबकि कंपनी 33 देशों में अपने उत्पादों का निर्यात करती है। इस तरह घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कारोबार भी कंपनी की ग्रोथ रणनीति का अहम हिस्सा है। पहली तिमाही में 5,282 करोड़ रुपये का रेवेन्यू कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कनुभाई जे. ठक्कर के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी ने लगभग 5,282 करोड़ रुपये का रेवेन्यू, 217 करोड़ रुपये का EBITDA और 124 करोड़ रुपये का टैक्स-पश्चात मुनाफा दर्ज किया। कंपनी का कहना है कि मुनाफे में वृद्धि रेवेन्यू ग्रोथ से अधिक रही। इसके पीछे रणनीतिक सोर्सिंग, बेहतर ऑपरेशनल क्षमता, वैल्यू-एडेड उत्पादों और ज्यादा विविधीकृत बिजनेस मिक्स को प्रमुख कारण बताया गया है। 5 साल में 1,107 फीसदी का रिटर्न गोकुल एग्रो रिसोर्सेज के शेयर ने अलग-अलग अवधि में निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है। 1 सप्ताह: करीब 8.50 फीसदी 1 महीना: करीब 9.44 फीसदी 2026 में अब तक: करीब 27 फीसदी 1 साल: करीब 47 फीसदी 3 साल: करीब 292 फीसदी 5 साल: करीब 1,107 फीसदी यानी पांच साल की अवधि में शेयर ने करीब 11 गुना से ज्यादा रिटर्न दिया है। इसी वजह से इसे मल्टीबैगर स्टॉक के तौर पर देखा जा रहा है। क्या निवेशकों को खरीदना चाहिए? किसी शेयर का पिछला शानदार प्रदर्शन उसके भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं होता। गोकुल एग्रो रिसोर्सेज के मजबूत तिमाही आंकड़े और लंबी अवधि का रिटर्न जरूर आकर्षक हैं, लेकिन निवेशकों को कंपनी की वैल्यूएशन, कर्ज, मार्जिन, कमोडिटी कीमतों, एक्सपोर्ट कारोबार और भविष्य की कमाई की संभावनाओं का भी आकलन करना चाहिए।  

surbhi जुलाई 31, 2026 0
Aastha Spintex announces 1:1 bonus shares, giving one additional share for every existing share held
Bonus Share: 1:1 बोनस शेयर देगी आस्था स्पिनटेक्स, हर 1 शेयर पर मिलेगा 1 बोनस शेयर; रिकॉर्ड डेट का इंतजार

मुंबई: बोनस शेयर की घोषणा करने वाली कंपनियों पर निवेशकों की नजर रहती है। हाल ही में शेयर बाजार में लिस्ट हुई गुजरात की इंटीग्रेटेड कॉटन यार्न कंपनी आस्था स्पिनटेक्स लिमिटेड (NSE: AASTHA | BSE: 544808) ने भी अपने शेयरधारकों के लिए 1:1 बोनस इश्यू को मंजूरी दी है। इसके अलावा कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए फाइनल डिविडेंड देने की भी सिफारिश की है। हर 1 शेयर पर मिलेगा 1 बोनस शेयर कंपनी के निदेशक मंडल ने 1:1 बोनस इश्यू को मंजूरी दी है। इसका सीधा मतलब है कि रिकॉर्ड डेट पर पात्र शेयरधारकों के पास जितने इक्विटी शेयर होंगे, उतने ही अतिरिक्त बोनस शेयर उन्हें दिए जाएंगे। उदाहरण के लिए, अगर किसी निवेशक के पास रिकॉर्ड डेट पर कंपनी के 100 शेयर हैं, तो बोनस इश्यू के तहत उसे 100 अतिरिक्त शेयर मिल सकते हैं। यानी उसके शेयरों की संख्या बढ़कर 200 हो जाएगी। हालांकि, बोनस शेयर मिलने का अर्थ सीधे तौर पर निवेश की वैल्यू दोगुनी होना नहीं है। बोनस के बाद शेयर की कीमत में उसी अनुपात में एडजस्टमेंट होता है। इसलिए निवेशकों को केवल शेयरों की संख्या बढ़ने के बजाय कंपनी के कारोबार और फंडामेंटल पर भी ध्यान देना चाहिए। अधिकृत शेयर पूंजी भी बढ़ाई कंपनी ने बोनस इश्यू को लागू करने की प्रक्रिया के तहत अपनी अधिकृत शेयर पूंजी बढ़ाने को भी मंजूरी दी है। इसे ₹45 करोड़ से बढ़ाकर ₹100 करोड़ किया गया है। इसके साथ ही कंपनी ने अपने ब्रांड के तहत ग्रे फैब्रिक और अन्य वैल्यू-एडेड फैब्रिक उत्पादों सहित फॉरवर्ड-इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स के कारोबार में विस्तार की योजना को भी मंजूरी दी है। शेयरधारकों को डिविडेंड भी मिलेगा बोनस शेयर के अलावा आस्था स्पिनटेक्स के बोर्ड ने FY26 के लिए फाइनल डिविडेंड की भी सिफारिश की है। कंपनी ने ₹10 के फेस वैल्यू वाले प्रत्येक इक्विटी शेयर पर ₹0.10 के फाइनल डिविडेंड की सिफारिश की है। हालांकि, यह डिविडेंड तभी अंतिम रूप से मंजूर होगा जब आगामी Annual General Meeting यानी AGM में शेयरधारक इसे मंजूरी देंगे। रिकॉर्ड डेट कब है? बोनस शेयर और फाइनल डिविडेंड दोनों के लिए निवेशकों को फिलहाल रिकॉर्ड डेट का इंतजार करना होगा। कंपनी के मुताबिक बोनस इश्यू और डिविडेंड की पात्रता तय करने वाली रिकॉर्ड डेट की घोषणा आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद की जाएगी। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि रिकॉर्ड डेट पर किस तारीख तक शेयर खरीदना जरूरी होगा। निवेशकों को कंपनी की ओर से आने वाली आधिकारिक एक्सचेंज फाइलिंग का इंतजार करना चाहिए। बोनस शेयर का मतलब क्या होता है? बोनस शेयर कंपनी अपने मौजूदा पात्र शेयरधारकों को बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के देती है। 1:1 बोनस में निवेशक को उसके प्रत्येक एक मौजूदा शेयर के बदले एक अतिरिक्त शेयर मिलता है। लेकिन बोनस के बाद शेयर की कीमत आमतौर पर उसी अनुपात में समायोजित होती है। इसलिए बोनस इश्यू को केवल शेयरों की संख्या बढ़ने के रूप में देखना सही नहीं है। निवेशकों के लिए कंपनी की कमाई, कारोबार की संभावनाएं, वैल्यूएशन और भविष्य की ग्रोथ भी महत्वपूर्ण हैं। निवेशकों को क्या करना चाहिए? आस्था स्पिनटेक्स का 1:1 बोनस इश्यू निश्चित रूप से मौजूदा शेयरधारकों के लिए महत्वपूर्ण कॉरपोरेट एक्शन है। साथ ही फाइनल डिविडेंड की सिफारिश से भी निवेशकों का ध्यान इस स्टॉक की ओर गया है। हालांकि, केवल बोनस शेयर या डिविडेंड की घोषणा के आधार पर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। रिकॉर्ड डेट, बोनस के बाद शेयर प्राइस एडजस्टमेंट और कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन समेत सभी पहलुओं को देखकर ही कोई निवेश निर्णय लेना बेहतर है।  

surbhi जुलाई 30, 2026 0
Magnus Steel and Infra share surges over 1100 percent in less than a year amid repeated upper circuits
Upper Circuit Share: एक साल से कम में 1100% से ज्यादा रिटर्न, रोज लग रहा अपर सर्किट; जानिए इस स्टील स्टॉक में क्या है खास

मुंबई: शेयर बाजार में मल्टीबैगर रिटर्न देने वाले स्टॉक्स हमेशा निवेशकों का ध्यान खींचते हैं। ऐसा ही एक नाम Magnus Steel and Infra Ltd. (BSE: 517320) है, जिसके शेयर ने एक साल से भी कम अवधि में जबरदस्त तेजी दिखाई है। कंपनी के हालिया तिमाही नतीजों के बाद शेयर में लगातार अपर सर्किट देखने को मिला है। हालांकि, तेज रिटर्न की यह कहानी जितनी आकर्षक है, इसमें जोखिम भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यह एक माइक्रो-कैप शेयर है और इसके भाव में हाल के महीनों में काफी उतार-चढ़ाव भी देखा गया है। इसलिए सिर्फ पुराने रिटर्न के आधार पर निवेश का फैसला करना उचित नहीं होगा। Q1 नतीजों में दिखी तेज ग्रोथ Magnus Steel and Infra के बोर्ड ने 22 जुलाई को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी जून 2026 को समाप्त तिमाही के अनऑडिटेड स्टैंडअलोन नतीजे जारी किए। कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू Q1 FY27 में ₹7.30 करोड़ रहा, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह ₹1.95 करोड़ था। यानी सालाना आधार पर रेवेन्यू में करीब 274% की बढ़ोतरी हुई। मुनाफे के मोर्चे पर भी कंपनी ने मजबूत प्रदर्शन किया। जून तिमाही में प्री-टैक्स प्रॉफिट करीब ₹2.41 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹0.41 करोड़ था। यानी इसमें करीब 490% की सालाना वृद्धि दर्ज हुई। नतीजों के बाद शेयर में अपर सर्किट मजबूत तिमाही प्रदर्शन के बाद Magnus Steel and Infra के शेयर में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी। हालिया कारोबारी सत्रों में शेयर कई बार 5% के अपर सर्किट तक पहुंचा है। उपलब्ध बाजार आंकड़ों में भी Q1 नतीजों के बाद 5% अपर सर्किट दर्ज किया गया था। इस तरह की तेजी में यह समझना जरूरी है कि अपर सर्किट का मतलब केवल मजबूत मांग है, यह भविष्य में शेयर के बढ़ने की गारंटी नहीं देता। 1100% से ज्यादा रिटर्न का दावा रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक 8 सितंबर 2025 को शेयर की कीमत ₹5.14 थी, जो 30 जुलाई 2026 को ₹66.40 तक पहुंच गई। इस आधार पर शेयर में करीब 1191% का रिटर्न बनता है। लेकिन इस तेजी के बीच शेयर में बड़ी अस्थिरता भी रही है। बाजार आंकड़ों से पता चलता है कि स्टॉक ने हाल के महीनों में कई बार 5% की दैनिक चाल देखी है और इसका 52-सप्ताह का दायरा भी काफी व्यापक रहा है। यानी जिसने निचले स्तरों पर निवेश किया, उसके लिए रिटर्न शानदार रहा हो सकता है, लेकिन मौजूदा स्तर पर प्रवेश करने वाले निवेशक के लिए जोखिम का आकलन अलग होगा। कंपनी के कारोबार में भी हुआ बदलाव Magnus Steel and Infra ने हाल के वर्षों में अपने कारोबार में बदलाव किया है। कंपनी पहले Magnus Retail के नाम से जानी जाती थी और मई 2025 में इसका नाम बदलकर Magnus Steel and Infra किया गया। कंपनी अब स्टील और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कारोबार पर फोकस कर रही है। वित्त वर्ष 2026 में भी कंपनी के राजस्व में काफी तेज वृद्धि दर्ज की गई थी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार FY26 में ऑपरेटिंग रेवेन्यू करीब ₹225.8 मिलियन रहा, जबकि FY25 में यह करीब ₹31.88 मिलियन था। निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? Magnus Steel and Infra के तिमाही नतीजों में ग्रोथ जरूर नजर आ रही है, लेकिन शेयर बाजार में किसी भी स्टॉक के पिछले रिटर्न को भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं माना जा सकता। खासकर माइक्रो-कैप शेयरों में कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव, सीमित लिक्विडिटी और अचानक गिरावट का जोखिम ज्यादा हो सकता है। इसलिए निवेश से पहले कंपनी के कारोबार, कर्ज, कैश फ्लो, प्रमोटर होल्डिंग, वैल्यूएशन, ट्रेडिंग वॉल्यूम और आने वाली तिमाहियों के नतीजों का विश्लेषण करना जरूरी है।  

surbhi जुलाई 30, 2026 0
Indian stock market rallies as Sensex jumps 800 points and IT stocks lead early trading gains
Stock Market Opening: शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स 800 अंक उछला; IT शेयरों में फिर आया जोश

Share Market Opening, 29 July 2026: भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को कारोबार की शुरुआत मजबूत तेजी के साथ की। पिछले सत्र की मामूली कमजोरी के बाद आज शुरुआती कारोबार में खरीदारी का जोर दिखाई दिया। सेंसेक्स करीब 800 अंक उछल गया, जबकि निफ्टी 24,200 के स्तर के पार पहुंच गया। बाजार में सबसे ज्यादा मजबूती IT शेयरों में देखने को मिली। सुबह करीब 9:40 बजे BSE Sensex 777.71 अंक यानी 1.01% की बढ़त के साथ 77,543.63 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 218.85 अंक यानी 0.91% चढ़कर 24,204.20 पर पहुंच गया। घरेलू बाजार को वैश्विक संकेतों के साथ-साथ सेक्टरल खरीदारी से भी सपोर्ट मिला। हालांकि, पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बाजार के लिए एक अहम जोखिम बनी हुई है। IT शेयरों में जोरदार खरीदारी शुरुआती कारोबार में IT सेक्टर निवेशकों के पसंदीदा क्षेत्रों में रहा। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 24 शेयर बढ़त के साथ खुले। Infosys सबसे मजबूत शेयरों में रहा और शुरुआती कारोबार में इसमें करीब 3.5% की तेजी दिखी। इसके अलावा L&T, HUL, TCS, Tech Mahindra, Bharti Airtel और Bajaj Finance जैसे शेयरों में भी खरीदारी रही। करीब 9:30 बजे प्रमुख शेयरों की स्थिति: Infosys: +3.23% L&T: +2.90% HUL: +2.58% Bharti Airtel: +1.61% TCS: +1.54% HDFC Bank: +1.50% HCL Tech: +1.34% Tech Mahindra: +1.21% ITC: +1.12% M&M: +1.06% Bajaj Finance: +0.95% वहीं BEL, Indigo, Asian Paints, Power Grid, Trent और Titan जैसे कुछ शेयर दबाव में रहे। Nifty में भी खरीदारी का जोर Nifty 50 में Infosys, L&T और Eternal शुरुआती कारोबार में प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में रहे। ब्रॉडर मार्केट में भी सकारात्मक माहौल दिखा। Nifty Midcap करीब 0.54% और Nifty Smallcap करीब 0.66% ऊपर कारोबार कर रहे थे। सेक्टर की बात करें तो Nifty IT और Nifty Chemical ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि Nifty Realty और Nifty Oil & Gas कमजोर नजर आए। रुपये में भी शुरुआती मजबूती शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 12 पैसे मजबूत होकर 95.70 के स्तर पर खुला। हालांकि, मुद्रा बाजार और शेयर बाजार दोनों पर वैश्विक घटनाक्रमों का असर बना रह सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल चिंता का विषय बाजार की तेजी के बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बीच Brent crude की कीमत में करीब 5% की तेजी आई और यह लगभग $88 प्रति बैरल तक पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी रहने से भारत के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है। इसलिए बाजार की आगे की दिशा में तेल की कीमतें भी अहम भूमिका निभा सकती हैं। निवेशकों की नजर अब आगे के संकेतों पर बुधवार की शुरुआती तेजी से बाजार में सकारात्मक माहौल जरूर बना है, लेकिन वैश्विक बाजारों, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। IT शेयरों में मजबूत खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया है। अब देखना होगा कि शुरुआती तेजी कारोबार के दौरान कायम रहती है या बाजार ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली का सामना करता है।  

surbhi जुलाई 29, 2026 0
A-1 Limited penny stock under ₹6 hits upper circuit after strong Q1 FY27 results
Penny Stock: ₹6 से कम का शेयर, लगातार दूसरे दिन अपर सर्किट; Q1 नतीजों के बाद दिखी तेजी

Penny Stock Under ₹6: शेयर बाजार में छोटे भाव वाले पेनी स्टॉक्स में अचानक तेजी अक्सर निवेशकों का ध्यान खींचती है। लॉजिस्टिक्स सेक्टर की कंपनी A-1 Limited का शेयर भी लगातार दूसरे कारोबारी दिन 5 फीसदी के अपर सर्किट में पहुंच गया। कंपनी ने हाल ही में वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें राजस्व और मुनाफे में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। खुलते ही अपर सर्किट में पहुंचा शेयर बीएसई पर A-1 Limited का शेयर मंगलवार को ₹5.71 पर बंद हुआ था। बुधवार सुबह यह करीब 5 फीसदी की तेजी के साथ ₹5.99 पर खुला और जल्द ही 5 फीसदी के अपर सर्किट पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान शेयर कुछ समय के लिए ₹5.98 तक आया, लेकिन फिर ₹5.99 के स्तर पर लौट गया। कंपनी के शेयर में 5 फीसदी की सर्किट लिमिट लागू है। एक साल में बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा प्रदर्शन इस पेनी स्टॉक का पिछले एक साल का प्रदर्शन काफी अस्थिर रहा है। कंपनी के शेयर का 52-हफ्ते का उच्च स्तर ₹70.41 है, जो नवंबर 2025 में दर्ज हुआ था। वहीं 52-हफ्ते का निचला स्तर ₹5 रहा, जो 5 जुलाई 2026 को दर्ज किया गया। हालिया अवधि में भी शेयर ने काफी उतार-चढ़ाव दिखाया है: 1 सप्ताह: 10 फीसदी से ज्यादा तेजी 1 महीना: करीब 22 फीसदी गिरावट 3 महीने: करीब 52 फीसदी गिरावट 6 महीने: करीब 85 फीसदी गिरावट 1 साल: करीब 65 फीसदी नकारात्मक रिटर्न इससे साफ है कि हाल की तेजी के बावजूद शेयर का लंबी अवधि का प्रदर्शन बेहद अस्थिर रहा है। Q1FY27 में कंपनी का प्रदर्शन कैसा रहा? A-1 Limited ने 30 जून 2026 को समाप्त पहली तिमाही के नतीजे जारी किए। कंपनी के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में सालाना आधार पर 170.5 फीसदी की वृद्धि हुई और यह बढ़कर ₹175.01 करोड़ हो गया। कंपनी का टैक्स के बाद मुनाफा यानी PAT भी तेजी से बढ़ा। पिछले साल की समान तिमाही में ₹0.60 करोड़ के मुकाबले इस बार PAT 429.3 फीसदी बढ़कर ₹3.16 करोड़ पहुंच गया। कंपनी का PAT मार्जिन भी 0.92 फीसदी से बढ़कर 1.81 फीसदी हो गया। क्या सिर्फ अपर सर्किट देखकर खरीदना सही है? पेनी स्टॉक्स में तेज उछाल देखकर निवेशकों का आकर्षित होना स्वाभाविक है, लेकिन ऐसे शेयरों में जोखिम भी काफी ज्यादा हो सकता है। A-1 Limited के मामले में भी हालिया अपर सर्किट को कंपनी के तिमाही नतीजों के साथ जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन पिछले एक साल में शेयर की भारी गिरावट और अस्थिरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। निवेशकों को केवल शेयर की कम कीमत या लगातार लग रहे अपर सर्किट के आधार पर फैसला लेने के बजाय कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, कारोबार, कर्ज, नकदी प्रवाह, वैल्यूएशन और भविष्य की संभावनाओं का स्वतंत्र विश्लेषण करना चाहिए।  

surbhi जुलाई 29, 2026 0
Stock market graph showing rising foreign portfolio investment in India following strong participation in the SBI Funds IPO.
SBI Funds IPO का दिखा बड़ा असर! जुलाई में FPI निवेश ₹42,000 करोड़ के करीब पहुंचा, विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में दमदार वापसी

लगातार चार महीनों तक भारतीय शेयर बाजार से दूरी बनाए रखने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) अब फिर से भारतीय बाजार की ओर लौटते नजर आ रहे हैं। जुलाई 2026 में विदेशी निवेशकों ने न केवल इक्विटी बाजार में शुद्ध खरीदारी (Net Buying) की, बल्कि डेट मार्केट में भी मजबूत निवेश जारी रखा। इसका नतीजा यह रहा कि जुलाई में सभी एसेट क्लास में कुल FPI निवेश बढ़कर करीब ₹41,796 करोड़ (लगभग 4.4 बिलियन डॉलर) पहुंच गया, जो इस साल का अब तक का सबसे बड़ा मासिक निवेश है। इस शानदार प्रदर्शन के पीछे SBI Funds के IPO को प्रमुख वजह माना जा रहा है, जिसमें विदेशी निवेशकों ने एंकर और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) दोनों श्रेणियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। चार महीने की बिकवाली के बाद बदला विदेशी निवेशकों का रुख मार्च से जून 2026 के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में लगातार भारी बिकवाली की थी। वैश्विक अनिश्चितताओं, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और जोखिम से बचने की रणनीति के चलते विदेशी फंड्स ने भारतीय बाजार से बड़ी रकम निकाली थी। हालांकि, जुलाई में तस्वीर बदलती दिखाई दी। 24 जुलाई 2026 तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार में करीब ₹14,946 करोड़ का शुद्ध निवेश किया। यह लगातार चार महीनों की बिकवाली के बाद निवेशकों के विश्वास में लौटती मजबूती का संकेत माना जा रहा है। जुलाई बना 2026 का सबसे मजबूत महीना डेट मार्केट में लगातार निवेश और इक्विटी में खरीदारी के चलते जुलाई विदेशी निवेश के लिहाज से इस वर्ष का सबसे बेहतर महीना बन गया। इससे पहले फरवरी 2026 में कुल FPI निवेश लगभग ₹37,804 करोड़ रहा था, लेकिन जुलाई में यह आंकड़ा बढ़कर करीब ₹41,796 करोड़ तक पहुंच गया, जिससे फरवरी का रिकॉर्ड भी टूट गया। विश्लेषकों का मानना है कि SBI Funds IPO में विदेशी संस्थागत निवेशकों की मजबूत भागीदारी ने इस बढ़त को और गति दी। शुरुआती महीनों में हुई थी भारी बिकवाली 2026 की शुरुआत विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में चुनौतीपूर्ण रही। मार्च से जून तक लगातार चार महीनों में बड़े पैमाने पर पूंजी निकाली गई। मासिक शुद्ध FPI इक्विटी निवेश इस प्रकार रहा: जनवरी: -₹35,962 करोड़ फरवरी: ₹22,615 करोड़ (शुद्ध निवेश) मार्च: -₹1,17,775 करोड़ अप्रैल: -₹60,847 करोड़ मई: -₹32,963 करोड़ जून: -₹49,340 करोड़ जुलाई (24 जुलाई तक): ₹14,946 करोड़ (शुद्ध निवेश) इन आंकड़ों से साफ है कि जुलाई में खरीदारी लौटने के बावजूद सालभर की भारी बिकवाली की पूरी भरपाई अभी नहीं हो सकी है। सालभर का घाटा अब भी बरकरार जुलाई में सुधार के बावजूद विदेशी निवेशकों का कुल वार्षिक निवेश अभी भी नकारात्मक बना हुआ है। अब तक 2026 में भारतीय इक्विटी बाजार से लगभग ₹2.59 लाख करोड़ का शुद्ध विदेशी निवेश बाहर जा चुका है। वहीं सभी एसेट क्लास को मिलाकर भी कुल FPI निवेश लगभग ₹1.7 लाख करोड़ के नेट आउटफ्लो में है। हालांकि, डेट मार्केट अपेक्षाकृत मजबूत बना हुआ है, जहां वर्ष 2026 में अब तक करीब 9.5 बिलियन डॉलर का विदेशी निवेश दर्ज किया गया है। आगे क्या रहेगा निवेशकों का फोकस? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में विदेशी निवेशकों का रुख वैश्विक ब्याज दरों, कच्चे तेल की कीमतों, भू-राजनीतिक घटनाक्रम, भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजों और घरेलू आर्थिक संकेतकों पर निर्भर करेगा। यदि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत प्रदर्शन जारी रखती है और वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं, तो आने वाले महीनों में विदेशी निवेश का प्रवाह और तेज हो सकता है।  

surbhi जुलाई 27, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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