पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में आने वाले समय में मजबूत तेजी देखने को मिल सकती है। घरेलू ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal Financial Services का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां रक्षा क्षेत्र के लिए सकारात्मक हैं और इससे डिफेंस कंपनियों के शेयरों में करीब 38% तक की बढ़त संभव है।
ब्रोकरेज के अनुसार, मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण कई देश अपनी सुरक्षा और सैन्य तैयारियों को मजबूत करने पर ज्यादा खर्च कर सकते हैं। इससे मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्टम, सर्विलांस टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसे उपकरणों की मांग बढ़ने की संभावना है।
रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा क्षेत्र की कई प्रमुख कंपनियों में निवेशकों को अच्छा रिटर्न मिल सकता है।
इसके अलावा Bharat Dynamics Limited, Solar Industries India और Zen Technologies जैसी कंपनियों को भी मजबूत ऑर्डर और बढ़ती मांग से फायदा मिलने की उम्मीद है।
विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर रक्षा बजट में बढ़ोतरी हो सकती है। वित्त वर्ष 2025 में मिडिल ईस्ट का वैश्विक हथियार आयात में करीब 26% हिस्सा था और आगे इसमें और वृद्धि होने की संभावना है।
इससे भारतीय रक्षा कंपनियों के लिए नए निर्यात अवसर खुल सकते हैं।
सरकार ने बजट में रक्षा क्षेत्र के पूंजीगत खर्च को बढ़ाकर करीब ₹2.2 लाख करोड़ कर दिया है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 18% अधिक है।
सरकार की ओर से अब तक करीब ₹7 लाख करोड़ से अधिक के Acceptance of Necessity (AoN) प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिससे आने वाले दो से ढाई साल में रक्षा कंपनियों को बड़े ऑर्डर मिलने की संभावना है।
सरकार ने नई Defence Acquisition Procedure 2026 लागू की है, जिसका उद्देश्य देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना और तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है।
नई नीति में ‘Buy (Indian–IDDM)’ श्रेणी के तहत स्थानीय सामग्री की अनिवार्यता 50% से बढ़ाकर 60% कर दी गई है। इससे घरेलू कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद है।
रक्षा क्षेत्र की कंपनियों को लगातार बड़े ऑर्डर मिल रहे हैं।
वहीं निजी क्षेत्र की Astra Microwave Products को FY26 की तीसरी तिमाही में करीब ₹290 करोड़ के नए ऑर्डर मिले हैं, जबकि Zen Technologies को ₹600 करोड़ के अनुबंध हासिल हुए हैं।
भारत कई महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों और सेंसर के लिए Israel पर काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में अगर मिडिल ईस्ट में संघर्ष लंबा चलता है तो सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है और रक्षा परियोजनाओं की समयसीमा पर असर पड़ सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और डॉलर इंडेक्स में मजबूती के कारण घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार में सोना-चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे कारोबारी दिन बड़ी गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मंगलवार को सोना करीब एक प्रतिशत और चांदी दो प्रतिशत से अधिक टूट गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल कीमती धातुओं पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बना हुआ है, हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह खरीदारी का अवसर भी हो सकता है। एमसीएक्स पर सोना और चांदी में तेज गिरावट एमसीएक्स पर अगस्त वायदा सोना सुबह मामूली कमजोरी के साथ 1,46,566 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला, लेकिन दिन में बिकवाली बढ़ने से यह करीब 1,566 रुपये गिरकर 1,45,351 रुपये के इंट्राडे लो तक पहुंच गया। वहीं सितंबर वायदा चांदी 1,999 रुपये की गिरावट के साथ 2,34,100 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुली और कारोबार के दौरान 5,296 रुपये यानी 2.24 प्रतिशत टूटकर 2,30,803 रुपये प्रति किलोग्राम तक फिसल गई। वैश्विक बाजार और विशेषज्ञों की राय अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कमजोरी का असर देखने को मिला। कॉमेक्स पर सोना 4,141 डॉलर प्रति औंस और चांदी 61.41 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती रही। कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार, सोने के लिए 1,45,000 रुपये का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। यदि यह 1,46,500 से 1,47,000 रुपये के रेजिस्टेंस जोन को पार करता है, तो कीमतें 1,48,000 रुपये तक पहुंच सकती हैं। वहीं चांदी के लिए 2,32,000 रुपये के नीचे बंद होना और कमजोरी का संकेत माना जा रहा है। प्रमुख शहरों में बदले दाम, कच्चा तेल चढ़ा इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, स्थानीय टैक्स और मेकिंग चार्ज के कारण अलग-अलग शहरों में 22 और 24 कैरेट सोने तथा चांदी की खुदरा कीमतों में मामूली अंतर देखा जा रहा है। दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही। ब्रेंट क्रूड करीब एक प्रतिशत बढ़कर 72.77 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 69.32 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक संकेतों और डॉलर की चाल आने वाले दिनों में सोना-चांदी की कीमतों की दिशा तय करेगी।
टाटा समूह की रिटेल कंपनी Trent Ltd के शेयरों में मंगलवार को शुरुआती कारोबार के दौरान तेज गिरावट देखने को मिली। कंपनी के पहली तिमाही (Q1) के बिजनेस अपडेट के बाद निवेशकों की निराशा साफ नजर आई, जिसके चलते शेयर करीब 10% टूटकर 3,010 रुपये के इंट्राडे लो तक पहुंच गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ रिकवरी आई और शेयर लगभग 3,052 रुपये के स्तर पर कारोबार करता दिखा। क्यों टूटा Trent का शेयर? शेयर में गिरावट की सबसे बड़ी वजह कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ रही। जून तिमाही में Trent की स्टैंडअलोन आय में 19% सालाना वृद्धि दर्ज की गई, जो बाजार और विश्लेषकों की उम्मीदों से कम रही। विशेषज्ञों के अनुसार, कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ लगातार पांचवीं तिमाही 20% से नीचे रही है। इससे यह चिंता बढ़ी है कि क्या Trent की तेज विकास दर अब धीमी पड़ रही है। स्टोर विस्तार भी उम्मीद से कमजोर कंपनी ने जून तिमाही के दौरान कुल 20 नए स्टोर खोले। इनमें: 1 Westside स्टोर 19 Zudio स्टोर विश्लेषकों का मानना है कि Westside स्टोरों की धीमी बढ़ोतरी और राजस्व प्रति वर्ग फुट (Revenue Per Square Foot) में अपेक्षित सुधार न होना निवेशकों की चिंता का कारण बना। ब्रोकरेज हाउस की क्या है राय? Q1 अपडेट के बाद अलग-अलग ब्रोकरेज फर्मों ने Trent को लेकर अपनी राय जारी की है। Macquarie ने 'Outperform' रेटिंग बरकरार रखते हुए ₹3,600 का लक्ष्य मूल्य दिया, लेकिन समान स्टोर बिक्री (Same-Store Sales Growth) में नरमी की आशंका जताई। Morgan Stanley ने 'Overweight' रेटिंग और ₹3,151 का टारगेट बनाए रखा। फर्म का कहना है कि रेवेन्यू ग्रोथ उसके अनुमान से कम रही है, जिससे निकट अवधि में शेयर पर दबाव रह सकता है। Bernstein ने भी 'Outperform' रेटिंग और ₹3,500 का लक्ष्य रखा, लेकिन शेयर में अल्पकालिक नकारात्मक प्रतिक्रिया की संभावना जताई। Citi सबसे ज्यादा सतर्क नजर आया। उसने 'Sell' रेटिंग के साथ ₹2,733 का लक्ष्य मूल्य बरकरार रखा। फर्म ने बढ़ती प्रतिस्पर्धा, कमजोर राजस्व प्रति वर्ग फुट और टियर-2 एवं टियर-3 शहरों में विस्तार से जुड़ी चुनौतियों को प्रमुख जोखिम बताया। निवेशकों की नजर आगे की रणनीति पर बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में Trent के लिए समान स्टोर बिक्री, नए स्टोरों का प्रदर्शन और उपभोक्ता मांग में सुधार अहम भूमिका निभाएंगे। यदि शहरी खपत में मजबूती आती है तो कंपनी की विकास दर दोबारा तेज हो सकती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। पेप्सिको की सबसे बड़ी फ्रेंचाइज़ी कंपनियों में शामिल वरुण बेवरेजेज लिमिटेड ने पूर्वी अफ्रीका में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाई VBL Industries (Kenya) Limited ने देवयानी फूड इंडस्ट्रीज़ (केन्या) के वैल्यू-ऐडेड डेयरी बेवरेज, जूस और पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर कारोबार का 32 मिलियन डॉलर (करीब ₹305 करोड़) में अधिग्रहण करने का ऐलान किया है। यह सौदा 1 अगस्त 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। पूर्वी अफ्रीका में बढ़ेगी कंपनी की पकड़ कंपनी के अनुसार, इस अधिग्रहण से केन्या और पूरे पूर्वी अफ्रीकी क्षेत्र में उसकी उत्पादन क्षमता और वितरण नेटवर्क को मजबूती मिलेगी। अधिग्रहित कारोबार में 52 एकड़ में फैली आधुनिक विनिर्माण इकाई भी शामिल है, जहां डेयरी पेय, जूस और पैकेज्ड पानी का उत्पादन होता है। कार्बोनेटेड ड्रिंक्स का भी होगा विस्तार वरुण बेवरेजेज ने कहा कि इस अधिग्रहण के बाद कंपनी केन्या में अपने कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक पोर्टफोलियो का भी विस्तार करेगी। इससे अफ्रीकी बाजार में कंपनी की दीर्घकालिक विकास रणनीति को नई गति मिलने की उम्मीद है।