हैदराबाद, एजेंसियां। OpenAI में संगठनात्मक बदलावों का दौर जारी है। कंपनी ने अपनी Preparedness टीम को भंग कर दिया है, जो शक्तिशाली AI मॉडल्स से जुड़े गंभीर जोखिमों का आकलन और उन्हें कम करने के उपायों पर काम करती थी। टीम की जिम्मेदारियां अब कंपनी की मौजूदा रिसर्च और विशेषज्ञ टीमों में बांटी जा रही हैं। क्या करती थी Preparedness टीम? OpenAI ने 2023 में Preparedness टीम बनाई थी। इसका मुख्य काम साइबर सुरक्षा, जैविक खतरों, खतरनाक क्षमताओं और भविष्य के अत्यधिक सक्षम AI सिस्टम से जुड़े जोखिमों का मूल्यांकन करना था। कंपनी के आधिकारिक Preparedness Framework में भी इन जोखिमों की निगरानी और उनके लिए सुरक्षा उपाय विकसित करने को टीम की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल किया गया था। अब टीम को अलग इकाई के रूप में जारी रखने के बजाय उसकी जिम्मेदारियां दूसरी टीमों में स्थानांतरित की जा रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारियों को नौकरी से निकालने के बजाय उन्हें साइबर और बायो जैसे विशेष क्षेत्रों में काम करने वाली टीमों में भेजा गया है। दो साल में कई सेफ्टी यूनिट्स में बदलाव Preparedness टीम का खत्म होना OpenAI में सेफ्टी स्ट्रक्चर में हुए कई बदलावों की कड़ी का हिस्सा है। इससे पहले कंपनी की Superalignment और AGI Readiness जैसी टीमों में भी बदलाव या विघटन हो चुका है। जुलाई में OpenAI के Head of Safety Systems Johannes Heidecke के कंपनी छोड़ने की खबर भी सामने आई थी। उस समय कंपनी ने सेफ्टी टीमों को रिसर्च संगठन के तहत लाने का फैसला किया था। OpenAI का कहना है कि सेफ्टी को रिसर्च और मॉडल डेवलपमेंट के साथ ज्यादा करीब से जोड़ने से सुरक्षा संबंधी विशेषज्ञता मॉडल, प्रोडक्ट और लॉन्च से जुड़े फैसलों में पहले ही शामिल हो सकेगी। कई बड़े अधिकारियों के इस्तीफे से भी चर्चा तेज कंपनी में सेफ्टी और संगठनात्मक बदलावों के बीच कई वरिष्ठ अधिकारियों के जाने से भी हलचल बढ़ी है। Chief Futurist Joshua Achiam, Head of Safety Systems Johannes Heidecke और Ethics Head Chloé Bakalar समेत कई वरिष्ठ अधिकारी कंपनी से अलग हो चुके हैं। इसके अलावा वरिष्ठ अधिकारी Brad Lightcap ने भी कंपनी छोड़कर नया वेंचर शुरू करने का फैसला किया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब OpenAI अपने कारोबार के विस्तार और संभावित IPO की तैयारियों पर भी ध्यान दे रही है। Hugging Face मामले के बाद भी बढ़ी चिंता OpenAI के मॉडल से जुड़े एक सुरक्षा परीक्षण के दौरान Hugging Face से संबंधित घटना ने भी AI सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज कर दी थी। OpenAI ने खुद कहा था कि वह बाहरी विशेषज्ञों के साथ इस घटना की समीक्षा कर रहा है और मॉडल के व्यवहार का स्वतंत्र आकलन भी कराया जा रहा है। IPO की तैयारियों के बीच बदलाव OpenAI में ये संगठनात्मक बदलाव ऐसे समय हो रहे हैं जब कंपनी संभावित IPO की दिशा में आगे बढ़ रही है। Financial Times के मुताबिक, कंपनी के अंदर नेतृत्व स्तर पर बदलाव और कई वरिष्ठ अधिकारियों के जाने के बीच IPO को लेकर तैयारियां तेज हैं। कंपनी ने हाल में कर्मचारियों के शेयरों की करीब 7 अरब डॉलर की टेंडर ऑफर के जरिए खरीद भी पूरी की, जिससे लगभग 852 अरब डॉलर का वैल्यूएशन सामने आया। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सेफ्टी टीमों को अलग इकाइयों के बजाय रिसर्च और अन्य विभागों में शामिल करने से AI सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा। OpenAI का कहना है कि सुरक्षा को मॉडल डेवलपमेंट में और पहले शामिल करना इस बदलाव का उद्देश्य है, जबकि आलोचकों की चिंता है कि स्वतंत्र सेफ्टी निगरानी कमजोर हो सकती है।
मुंबई, एजेंसियां। वैकल्पिक परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी गजा अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट, जो गजा कैपिटल ब्रांड के तहत कारोबार करती है, अपना ₹550 करोड़ का आईपीओ लेकर आ रही है। कंपनी ने आईपीओ का प्राइस बैंड ₹152 से ₹160 प्रति शेयर तय किया है। सार्वजनिक निर्गम के लिए सब्सक्रिप्शन 19 अगस्त 2026 से शुरू होगा और 21 अगस्त को बंद होगा। ₹450 करोड़ का फ्रेश इश्यू आईपीओ में ₹450 करोड़ का फ्रेश इश्यू शामिल है। इसके अलावा मौजूदा शेयरधारक करीब ₹100 करोड़ के शेयर ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेचेंगे। इस तरह आईपीओ का कुल आकार लगभग ₹550 करोड़ है। 19 से 21 अगस्त तक खुलेगा आईपीओ गजा कैपिटल का आईपीओ 19 अगस्त को खुलेगा और 21 अगस्त को बंद होगा। एंकर निवेशकों के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया 18 अगस्त को होगी। कंपनी के शेयरों की BSE और NSE पर 26 अगस्त को लिस्टिंग प्रस्तावित है। गजा कैपिटल के लिए क्यों अहम है आईपीओ? यह आईपीओ भारतीय पूंजी बाजार में एक खास कदम माना जा रहा है, क्योंकि गजा कैपिटल भारत की प्रमुख घरेलू वैकल्पिक निवेश प्रबंधन कंपनियों में शामिल है। कंपनी के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक गोपाल जैन के मुताबिक, सार्वजनिक बाजार में प्रवेश से कंपनी के कारोबार में पारदर्शिता और संस्थागत स्वरूप को बढ़ावा मिल सकता है
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की नई स्टडी में एंकर निवेशकों के शेयर बेचने के व्यवहार को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। SEBI ने 13 अगस्त 2026 को मेनबोर्ड IPO में एंकर निवेशकों के बाहर निकलने के पैटर्न पर अध्ययन जारी किया। रिपोर्ट के मुताबिक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) एंकर निवेशकों में सबसे तेजी से अपनी हिस्सेदारी बेचने वालों में रहे। 30 दिन की लॉक-इन अवधि के बाद बढ़ती है बिकवाली SEBI की स्टडी में अप्रैल 2022 से अक्टूबर 2025 के बीच सूचीबद्ध 242 मेनबोर्ड IPO का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि एंकर निवेशकों की 30 दिन की लॉक-इन अवधि खत्म होने के आसपास शेयरों की बिक्री बढ़ जाती है। इस दौरान भारी बिकवाली का असर कई IPO शेयरों की कीमतों पर भी देखा गया। FPI सबसे ज्यादा शेयर बेचने वाले एंकर निवेशक अध्ययन के मुताबिक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने म्यूचुअल फंड की तुलना में एंकर निवेश के शेयर अधिक तेजी से बेचे। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि छोटे आकार के IPO में एंकर निवेशकों की निकासी और बिक्री की तीव्रता ज्यादा रही। निवेशकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है SEBI की स्टडी? एंकर निवेशक आमतौर पर IPO खुलने से पहले बड़े संस्थागत निवेश के जरिए कंपनी में भरोसे का संकेत देते हैं। लेकिन लॉक-इन अवधि समाप्त होने के बाद यदि बड़ी मात्रा में शेयर बाजार में बिकने लगते हैं, तो इससे शेयर की कीमत पर दबाव बन सकता है। SEBI की स्टडी इसी जोखिम को समझने में निवेशकों के लिए उपयोगी है। SEBI ने एंकर आवंटन व्यवस्था में किए हैं बदलाव SEBI की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, एंकर निवेशक आवंटन व्यवस्था में बदलाव का उद्देश्य IPO में दीर्घकालिक संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना रहा है।
मुंबई, एजेंसियां। ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म Shiprocket का IPO आज, 12 अगस्त 2026, को सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है। कंपनी ने शेयर का प्राइस बैंड ₹92 से ₹97 प्रति शेयर तय किया है। निवेशक इस इश्यू में 14 अगस्त तक बोली लगा सकेंगे। ₹1,617 करोड़ से ज्यादा का है IPO Shiprocket IPO का कुल आकार करीब ₹1,617.5 करोड़ है। इसमें लगभग ₹885.5 करोड़ का फ्रेश इश्यू और करीब ₹732 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है। कंपनी ने IPO खुलने से पहले एंकर निवेशकों से करीब ₹727.41 करोड़ जुटाए हैं। रिटेल निवेशकों के लिए कितना पैसा चाहिए? IPO में न्यूनतम लॉट 154 शेयरों का है। ऊपरी प्राइस बैंड ₹97 के हिसाब से एक लॉट के लिए न्यूनतम निवेश करीब ₹14,938 होगा। कंपनी के शेयरों की BSE और NSE पर लिस्टिंग प्रस्तावित है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक लिस्टिंग 19 अगस्त को होने की संभावना है। IPO से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल Shiprocket फ्रेश इश्यू से जुटाई रकम का इस्तेमाल मुख्य रूप से टेक्नोलॉजी और प्लेटफॉर्म के विस्तार, कर्ज चुकाने तथा सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए करेगी। कंपनी का कारोबार खास तौर पर ई-कॉमर्स कारोबारियों, MSME और D2C ब्रांड्स को लॉजिस्टिक्स एवं अन्य डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। निवेशकों के लिए अहम बात Shiprocket का कारोबार तेजी से बढ़ा है और FY26 में कंपनी की आय करीब ₹2,077 करोड़ रही, लेकिन कंपनी अभी भी शुद्ध घाटे में है। इसलिए IPO में निवेश करने वालों को कंपनी की ग्रोथ के साथ-साथ मुनाफे में आने की क्षमता और जोखिमों को भी ध्यान में रखना चाहिए।
मुंबई, एजेंसियां। गोवा स्थित मेडिकल डायग्नोस्टिक्स कंपनी Molbio Diagnostics के IPO को निवेशकों की ओर से मजबूत प्रतिक्रिया मिली है। मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को बोली के दूसरे दिन के अंत तक इश्यू 3.11 गुना सब्सक्राइब हो चुका था। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, 81.58 लाख शेयरों के मुकाबले 2.53 करोड़ से ज्यादा शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। ₹940 करोड़ का है IPO Molbio Diagnostics का IPO करीब ₹939.70 करोड़ का है। कंपनी ने शेयरों का प्राइस बैंड ₹768 से ₹807 प्रति शेयर तय किया है। IPO 10 अगस्त को खुला है और 12 अगस्त 2026 को बंद होगा। कंपनी इस इश्यू के जरिए करीब ₹200 करोड़ का फ्रेश इश्यू जारी कर रही है, जबकि बाकी हिस्सा ऑफर फॉर सेल के जरिए है। QIB, NII और रिटेल निवेशकों की अच्छी भागीदारी 11 अगस्त शाम तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, QIB हिस्सा करीब 1.39 गुना, NII हिस्सा 5.21 गुना और रिटेल हिस्सा करीब 3.18 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इससे पता चलता है कि खासकर गैर-संस्थागत और रिटेल निवेशकों की दिलचस्पी मजबूत रही। निवेशक न्यूनतम 18 शेयरों के एक लॉट के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से एक लॉट के लिए करीब ₹14,526 की जरूरत होगी। 12 अगस्त को आखिरी मौका Molbio Diagnostics IPO में निवेश के लिए आज 12 अगस्त आखिरी दिन है। उपलब्ध कार्यक्रम के मुताबिक अलॉटमेंट 13 अगस्त को और शेयरों की BSE तथा NSE पर संभावित लिस्टिंग 17 अगस्त 2026 को हो सकती है। कंपनी Truenat जैसे पोर्टेबल मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स प्लेटफॉर्म के लिए जानी जाती है। IPO में आवेदन करने से पहले निवेशकों को कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, वैल्यूएशन और बाजार जोखिमों का आकलन करना चाहिए।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 9 कंपनियों के प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) को मंजूरी दे दी है। अलग-अलग क्षेत्रों में कारोबार करने वाली इन कंपनियों के IPO को मंजूरी मिलने से भारतीय प्राइमरी मार्केट में गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है। मंजूरी पाने वाली कंपनियों में इंजीनियरिंग, ट्रैवल टेक्नोलॉजी, गेमिंग, ड्रोन, पेपर, रिन्यूएबल एनर्जी और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं। इन 9 कंपनियों को मिली मंजूरी SEBI से IPO की मंजूरी पाने वाली कंपनियों में PlaySimple Games, Garuda Aerospace, Rediff.com India, Jakson Green, Laxyo, Expression 360 Services India, SNVA Traveltech, Adroit Industries India और Naini Papers शामिल हैं। इन कंपनियों के सार्वजनिक निर्गम से निवेशकों को अलग-अलग क्षेत्रों की कंपनियों में निवेश का विकल्प मिल सकता है। हालांकि IPO की अंतिम तारीख, इश्यू प्राइस और लॉट साइज जैसी जानकारी संबंधित कंपनियों के आगे के दस्तावेजों और घोषणाओं में स्पष्ट होगी। प्राइमरी मार्केट में बढ़ी गतिविधि एक साथ नौ कंपनियों को IPO की मंजूरी मिलना भारतीय प्राइमरी मार्केट के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। बाजार में IPO गतिविधियों में तेजी आने के बीच SEBI की मंजूरी से कंपनियों के लिए पूंजी जुटाने का रास्ता साफ हुआ है। इन कंपनियों का लक्ष्य IPO के जरिए जुटाई गई पूंजी का इस्तेमाल कारोबार विस्तार, नई परियोजनाओं, कर्ज कम करने और अन्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए किया जा सकता है। वास्तविक उपयोग कंपनी-दर-कंपनी अलग होगा। निवेशकों की बढ़ेगी नजर IPO की मंजूरी मिलने के बाद अब निवेशकों की नजर इन कंपनियों के DRHP/RHP, इश्यू साइज, वैल्यूएशन, वित्तीय प्रदर्शन और IPO की कीमत पर रहेगी। SEBI की मंजूरी का अर्थ यह नहीं है कि IPO में निवेश करना निश्चित रूप से लाभदायक होगा। निवेशकों के लिए कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार से जुड़े जोखिम और IPO का मूल्यांकन समझना जरूरी होगा। कब आएंगे IPO? SEBI की मंजूरी के बाद कंपनियां बाजार की परिस्थितियों और अपनी तैयारी के अनुसार IPO की लॉन्चिंग की तारीख तय कर सकती हैं। इसलिए अभी सभी नौ IPO की सदस्यता तारीख घोषित होना जरूरी नहीं है। आने वाले दिनों में कंपनियों की ओर से IPO का आकार, प्राइस बैंड, लॉट साइज और सब्सक्रिप्शन की तारीखों से जुड़ी जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स और डिजिटल कॉमर्स प्लेटफॉर्म Shiprocket ने अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ की कीमत और तारीखों का ऐलान कर दिया है। कंपनी का सार्वजनिक निर्गम 12 अगस्त 2026 को खुलेगा और 14 अगस्त तक निवेशक इसमें बोली लगा सकेंगे। IPO के लिए प्रति शेयर ₹92 से ₹97 का प्राइस बैंड तय किया गया है और इश्यू का कुल आकार करीब ₹1,618 करोड़ है। ₹885.50 करोड़ का फ्रेश इश्यू Shiprocket के IPO में करीब ₹885.50 करोड़ का फ्रेश इश्यू शामिल है। इसके अलावा मौजूदा शेयरधारक करीब ₹731.99 करोड़ के शेयरों की ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बिक्री करेंगे। इस तरह कुल इश्यू साइज करीब ₹1,618 करोड़ बैठता है। कंपनी IPO से जुटाई गई पूंजी का इस्तेमाल अपने कारोबार और तकनीकी एवं लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने तथा डिजिटल कॉमर्स क्षेत्र में विस्तार के लिए करने की योजना बना रही है। 12 अगस्त से शुरू होगी बोली निवेशक Shiprocket IPO के लिए 12 से 14 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद 17 अगस्त को शेयर आवंटन प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। शेयरों की डीमैट खाते में क्रेडिट और रिफंड की प्रक्रिया 18 अगस्त को हो सकती है। कंपनी के शेयरों की 19 अगस्त 2026 को NSE और BSE पर लिस्टिंग प्रस्तावित है। ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स में मजबूत स्थिति Shiprocket ई-कॉमर्स कारोबारियों को लॉजिस्टिक्स, शिपिंग और ऑर्डर मैनेजमेंट जैसी सेवाएं उपलब्ध कराने वाला प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म है। कंपनी का कारोबार भारत में तेजी से बढ़ते ऑनलाइन कॉमर्स और डिजिटल व्यापार से जुड़ा हुआ है। IPO के जरिए बाजार में उतरने का फैसला ऐसे समय हुआ है जब भारत में ऑनलाइन खरीदारी और छोटे एवं मध्यम कारोबारियों के लिए डिजिटल बिक्री का विस्तार जारी है। कंपनी की लिस्टिंग से निवेशकों को इस तेजी से बढ़ते क्षेत्र में निवेश का नया विकल्प मिल सकता है। निवेशकों की नजर अब सब्सक्रिप्शन पर ₹92-97 के प्राइस बैंड के साथ Shiprocket IPO को लेकर निवेशकों की नजर अब इश्यू के सब्सक्रिप्शन आंकड़ों पर होगी। IPO में निवेश करने वालों को कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, मूल्यांकन, कारोबार की वृद्धि और जोखिमों को समझकर ही फैसला लेना चाहिए।
Ardee Industries का IPO आज खुला, ₹426 करोड़ जुटाने की तैयारी; ₹50-53 तय हुआ प्राइस बैंड मुंबई, एजेंसियां। मेटल रिसाइक्लिंग और सर्कुलर इकोनॉमी क्षेत्र की कंपनी Ardee Industries का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) आज, 5 अगस्त 2026 को सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया। कंपनी इस इश्यू के जरिए करीब ₹425.87 करोड़ जुटाना चाहती है। IPO में शेयर का प्राइस बैंड ₹50 से ₹53 प्रति शेयर तय किया गया है। 7 अगस्त तक निवेश का मौका Ardee Industries का IPO 5 अगस्त से 7 अगस्त 2026 तक खुला रहेगा। इश्यू में करीब ₹320 करोड़ का फ्रेश इश्यू और लगभग ₹105.87 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है। कंपनी ने IPO से पहले एंकर निवेशकों से करीब ₹127.75 करोड़ जुटाए हैं। ₹53 प्रति शेयर है अपर प्राइस बैंड IPO के लिए प्रति शेयर ₹50 का फ्लोर प्राइस और ₹53 का अपर प्राइस बैंड रखा गया है। कंपनी का इश्यू मुख्य रूप से नए शेयर जारी करने और प्रमोटरों की ओर से शेयरों की बिक्री के संयोजन पर आधारित है। रकम का इस्तेमाल कहां होगा फ्रेश इश्यू से मिलने वाली राशि में से करीब ₹220 करोड़ कंपनी की अतिरिक्त वर्किंग कैपिटल जरूरतों के लिए इस्तेमाल किए जाने हैं। करीब ₹22 करोड़ कर्ज चुकाने में लगाए जाएंगे, जबकि बाकी रकम सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए इस्तेमाल होगी। Ardee Industries ऊर्जा भंडारण उत्पादों और नॉन-फेरस स्क्रैप के रिसाइक्लिंग एवं संसाधन रिकवरी कारोबार से जुड़ी है। कंपनी से जुड़े आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में उसका परिचालन राजस्व करीब ₹1,167.65 करोड़ और शुद्ध लाभ करीब ₹84.68 करोड़ रहा। IPO की लिस्टिंग 12 अगस्त 2026 को होने की संभावित तारीख बताई गई है।
मुंबई, एजेंसिया। केंद्र सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में अपनी हिस्सेदारी घटाने के लिए आज, 4 अगस्त 2026, ऑफर फॉर सेल (OFS) शुरू किया है। सरकार शुरुआती तौर पर 2% हिस्सेदारी बेच रही है और मांग के आधार पर अतिरिक्त 4.5% हिस्सेदारी बेचने का विकल्प रखा गया है। OFS का फ्लोर प्राइस ₹382 प्रति शेयर तय किया गया है. 6.5% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी पूरी तरह सब्सक्राइब होने पर सरकार 6.5% तक हिस्सेदारी बेच सकती है। इस बिक्री से करीब ₹31,410 करोड़ जुटने का अनुमान है। यह LIC की 2022 में शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद सरकार की पहली बड़ी हिस्सेदारी बिक्री होगी. पहले संस्थागत, फिर खुदरा निवेशकों के लिए मौका OFS का गैर-खुदरा हिस्सा 4 अगस्त को खुला है, जबकि खुदरा निवेशकों के लिए 5 अगस्त को बोली लगाने का अवसर रहेगा। सरकार का यह कदम LIC में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाने के नियामकीय लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण है. OFS की खबर से LIC शेयर में गिरावट सरकार की हिस्सेदारी बिक्री की घोषणा के बाद LIC के शेयर पर दबाव देखने को मिला। आज शुरुआती कारोबार में शेयर करीब 8.9% तक गिरकर लगभग चार महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। सुबह 9:41 बजे तक शेयर करीब 7.28% नीचे ₹397.30 के आसपास कारोबार कर रहा था. सरकार की हिस्सेदारी बिक्री से LIC में सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग 3.5% से बढ़कर 10% तक पहुंच सकती है। यह बिक्री बाजार के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार को मई 2027 तक न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी संबंधी नियामकीय आवश्यकता पूरी करनी है.
मुंबई, एजेंसियां। मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज के करीब ₹8,000 करोड़ से अधिक के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) को निवेशकों की ओर से मजबूत प्रतिक्रिया मिली है। कंपनी के IPO को बोली प्रक्रिया के दौरान पूरी तरह सब्सक्राइब कर लिया गया, जिससे भारतीय प्राथमिक बाजार में निवेशकों के मजबूत भरोसे का संकेत मिला है। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की इस बड़ी कंपनी के सार्वजनिक निर्गम पर संस्थागत और अन्य निवेशकों की नजर बनी हुई है। IPO को निवेशकों से मिली मजबूत प्रतिक्रिया मणिपाल हेल्थ के IPO में निवेशकों ने कंपनी के शेयर खरीदने में अच्छी दिलचस्पी दिखाई। अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में कंपनी की मजबूत मौजूदगी को देखते हुए बाजार विशेषज्ञों की नजर इस निर्गम पर बनी हुई है। कंपनी के व्यापक अस्पताल नेटवर्क और स्वास्थ्य सेवा कारोबार को निवेशकों के बीच सकारात्मक धारणा का प्रमुख कारण माना जा रहा है। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में बड़ी मौजूदगी मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज भारत की प्रमुख स्वास्थ्य सेवा कंपनियों में शामिल है और देश के कई शहरों में अस्पतालों का संचालन करती है। कंपनी की सेवाओं में अस्पताल, चिकित्सा उपचार और विभिन्न विशेषज्ञता वाले स्वास्थ्य सेवा केंद्र शामिल हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती मांग के बीच कंपनी का विस्तार निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। IPO बाजार में फिर बढ़ा भरोसा मणिपाल हेल्थ के IPO को मिली प्रतिक्रिया ऐसे समय में सामने आई है जब भारतीय प्राथमिक बाजार में बड़े सार्वजनिक निर्गमों को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, मजबूत कारोबार वाली कंपनियों के IPO में निवेशकों की भागीदारी बाजार में दीर्घकालिक निवेश के भरोसे को दर्शाती है। अब निवेशकों की नजर शेयर आवंटन और कंपनी की बाजार में सूचीबद्धता पर रहेगी।
बेंगलुरु, एजेंसियां। देश की प्रमुख अस्पताल श्रृंखला मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज का बहुप्रतीक्षित ₹9,275 करोड़ का प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) 29 जुलाई से निवेशकों के लिए खुलने जा रहा है। कंपनी ने IPO के लिए ₹560 से ₹590 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। यह वर्ष 2026 के सबसे बड़े हेल्थकेयर IPO में शामिल है और बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इसे संस्थागत और खुदरा निवेशकों से अच्छा प्रतिसाद मिलने की उम्मीद है। 29 से 31 जुलाई तक खुला रहेगा इश्यू कंपनी के अनुसार, एंकर निवेशकों के लिए बोली 28 जुलाई को खुलेगी, जबकि आम निवेशक 29 जुलाई से 31 जुलाई तक IPO में आवेदन कर सकेंगे। यह इश्यू ₹8,000 करोड़ के फ्रेश इश्यू और मौजूदा निवेशकों द्वारा ₹1,275 करोड़ के ऑफर फॉर सेल (OFS) का संयोजन है। कंपनी का अनुमानित मूल्यांकन ऊपरी प्राइस बैंड पर ₹77,600 करोड़ से अधिक बैठता है। कर्ज घटाने और विस्तार पर रहेगा फोकस मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज ने बताया कि IPO से जुटाई गई राशि का बड़ा हिस्सा कंपनी के कर्ज को कम करने और हाल में किए गए अस्पताल अधिग्रहणों के वित्तपोषण में इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा कंपनी अगले तीन से चार वर्षों में 2,400 से 3,000 नए बेड जोड़कर अपने अस्पताल नेटवर्क का विस्तार करने की योजना पर भी काम कर रही है। फिलहाल कंपनी देशभर में 49 अस्पतालों का संचालन करती है। निवेशकों की नजर लिस्टिंग पर बाजार विश्लेषकों का मानना है कि भारत में हेल्थकेयर सेवाओं की बढ़ती मांग और मणिपाल हेल्थ की मजबूत बाजार स्थिति को देखते हुए यह IPO निवेशकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। ग्रे मार्केट में भी इश्यू को सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, हालांकि अंतिम प्रदर्शन बाजार की परिस्थितियों और निवेशकों की भागीदारी पर निर्भर करेगा।
बेंगलुरु, एजेंसियां। डिजिटल पेमेंट कंपनी PhonePe ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का परिचालन राजस्व (Revenue from Operations) 11.5% बढ़कर ₹7,920.48 करोड़ हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹7,105.01 करोड़ था। हालांकि, बढ़ते खर्च और कुछ नियामकीय बदलावों के कारण कंपनी का शुद्ध घाटा (Net Loss) बढ़कर ₹2,791.59 करोड़ हो गया, जबकि FY25 में यह ₹1,727.41 करोड़ था। राजस्व बढ़ा, लेकिन खर्च भी तेजी से बढ़े PhonePe ने बताया कि डिजिटल भुगतान, वित्तीय सेवाओं और अन्य बिजनेस से आय में लगातार वृद्धि हुई है। इसके बावजूद कंपनी के कुल खर्च में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसका सीधा असर मुनाफे पर पड़ा। कंपनी ने कहा कि नए कारोबारों में निवेश, तकनीकी विस्तार और नियामकीय बदलावों के चलते लाभप्रदता पर दबाव बना रहा। IPO से पहले निवेशकों की नजर PhonePe इन दिनों अपने प्रस्तावित IPO (Initial Public Offering) की तैयारी में भी जुटी हुई है। कंपनी का कहना है कि वह लंबी अवधि की वृद्धि और डिजिटल वित्तीय सेवाओं के विस्तार पर फोकस बनाए रखेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्व में लगातार बढ़ोतरी कंपनी के कारोबार की मजबूती दिखाती है, लेकिन बढ़ता घाटा निवेशकों के लिए चिंता का विषय हो सकता है। आने वाले महीनों में कंपनी की लागत नियंत्रण रणनीति और लाभप्रदता सुधार के प्रयासों पर बाजार की नजर रहेगी।
मुंबई, एजेंसियां। देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी SBI Funds Management का ₹9,813 करोड़ का प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) निवेशकों के जबरदस्त उत्साह के साथ बंद हो गया। IPO को कुल करीब 42 गुना सब्सक्रिप्शन मिला, जिससे यह 2026 के सबसे बड़े और सबसे अधिक चर्चित IPO में शामिल हो गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत निवेशक भागीदारी कंपनी के बिजनेस मॉडल और म्यूचुअल फंड सेक्टर में बढ़ते भरोसे को दर्शाती है। हर श्रेणी के निवेशकों ने दिखाई मजबूत दिलचस्पी IPO को रिटेल, गैर-संस्थागत (NII) और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) सभी वर्गों से अच्छा समर्थन मिला। अंतिम दिन संस्थागत निवेशकों की ओर से भारी बोली लगने के कारण कुल सब्सक्रिप्शन में तेज़ उछाल दर्ज किया गया। भारत की सबसे बड़ी AMC में निवेश का मौका SBI Funds Management, SBI Mutual Fund का निवेश प्रबंधन करती है और लगभग ₹12.5 लाख करोड़ की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) के साथ देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी है। कंपनी का मजबूत वितरण नेटवर्क, बढ़ता निवेशक आधार और म्यूचुअल फंड उद्योग में नेतृत्व इसे निवेशकों के लिए आकर्षक बनाता है। 17 जुलाई को अलॉटमेंट, 21 जुलाई को होगी लिस्टिंग IPO के शेयरों का अलॉटमेंट 17 जुलाई को होने की संभावना है। सफल निवेशकों के डिमैट खातों में शेयर 20 जुलाई तक क्रेडिट किए जाएंगे, जबकि कंपनी के शेयर 21 जुलाई 2026 को BSE और NSE पर सूचीबद्ध होंगे। बाजार की नजर लिस्टिंग पर ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) और रिकॉर्ड सब्सक्रिप्शन को देखते हुए बाजार में इस IPO की मजबूत लिस्टिंग की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि लिस्टिंग प्रदर्शन बाजार की समग्र स्थिति और निवेशकों की धारणा पर भी निर्भर करेगा।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में आने वाले कारोबारी सत्रों के लिए निवेशकों की नजर अब विदेशी निवेशकों (FPI/FII) की गतिविधियों और नए IPO पर टिकी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेश का रुख और प्राथमिक बाजार में आने वाले नए इश्यू, दोनों ही बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। विदेशी निवेशकों की चाल पर रहेगी नजर जून महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार से बड़ी निकासी की थी, जबकि डेट मार्केट में निवेश जारी रहा। इसके बावजूद हाल के कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेतों में सुधार, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और रुपये की मजबूती से निवेशकों का भरोसा बाजार के प्रति बढ़ा है। अब बाजार इस बात पर नजर रखे हुए है कि विदेशी निवेशक फिर से भारतीय इक्विटी बाजार में खरीदारी बढ़ाते हैं या नहीं। IPO बाजार में भी बढ़ी हलचल प्राथमिक बाजार में भी गतिविधियां तेज हो रही हैं। Kusumgar समेत कई कंपनियों के IPO अगले सप्ताह खुलने वाले हैं, जबकि अन्य मेनबोर्ड और SME इश्यू भी निवेशकों के लिए उपलब्ध होंगे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत लिस्टिंग और अच्छी सब्सक्रिप्शन शेयर बाजार के सेंटीमेंट को और बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। वैश्विक संकेतों पर भी बाजार की नजर विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर इंडेक्स और वैश्विक बाजारों का रुख भी भारतीय शेयर बाजार को प्रभावित करेगा। यदि विदेशी निवेश में सुधार जारी रहता है और IPO बाजार से सकारात्मक संकेत मिलते हैं, तो आने वाले दिनों में बाजार में मजबूती देखने को मिल सकती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। डेनमार्क की प्रमुख बीयर कंपनी Carlsberg ने भारत में अपने कारोबार को शेयर बाजार में लिस्ट कराने की तैयारी शुरू कर दी है। कंपनी ने भारतीय बाजार नियामक SEBI के पास अपनी यूनिट के लिए गोपनीय रूप से IPO फाइलिंग की है। IPO का साइज 700 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित IPO का आकार लगभग 700 मिलियन डॉलर (करीब ₹6,000–6,600 करोड़) तक हो सकता है। यह पूरी तरह से Offer for Sale (OFS) आधारित होगा, जिसमें मौजूदा हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचा जाएगा। बड़े इन्वेस्टमेंट बैंक को मिली जिम्मेदारी इस IPO प्रक्रिया के लिए कंपनी ने प्रमुख ग्लोबल और घरेलू निवेश बैंकों को जिम्मेदारी दी है। इसमें Kotak Mahindra Capital, Citigroup और JP Morgan India शामिल हैं, जो इस इश्यू को मैनेज करेंगे। भारत के IPO बाजार में बढ़ेगी हलचल विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का तेजी से बढ़ता शेयर बाजार विदेशी कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। Carlsberg का यह कदम इसी ट्रेंड को और मजबूत करेगा। भारतीय बाजार में मजबूत स्थिति Carlsberg भारत में लंबे समय से सक्रिय है और देश के तेजी से बढ़ते पेय बाजार में इसकी मजबूत हिस्सेदारी मानी जाती है। IPO के बाद कंपनी की ब्रांड वैल्यू और विस्तार योजनाओं को और गति मिलने की उम्मीद है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।