रेपो रेट

RBI Governor Sanjay Malhotra announcing MPC decision with repo rate unchanged at 5.25 percent
RBI MPC Decision: रेपो रेट में नहीं हुआ बदलाव, EMI रहेगी पहले जैसी; जानें RBI गवर्नर ने क्या कहा

देशभर के करोड़ों होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन धारकों के लिए राहत भरी खबर है। Reserve Bank of India (RBI) ने अपनी ताजा मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) बैठक में रेपो रेट को अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है। RBI गवर्नर Sanjay Malhotra ने शुक्रवार को इसकी घोषणा करते हुए बताया कि रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रहेगा। इस फैसले का सीधा मतलब है कि फिलहाल आपकी मासिक EMI में कोई बदलाव नहीं होगा और नए लोन लेने वालों को भी ब्याज दरों में तत्काल राहत या अतिरिक्त बोझ का सामना नहीं करना पड़ेगा। आपकी EMI पर क्या होगा असर? चूंकि RBI ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है, इसलिए अधिकांश फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI फिलहाल पहले जैसी ही बनी रहेगी। जो लोग नया लोन लेने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए भी ब्याज दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। बैंकों की लेंडिंग रेट्स भी फिलहाल मौजूदा स्तर पर रहने की संभावना है। RBI ने ब्याज दरों में बदलाव क्यों नहीं किया? RBI का यह फैसला वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और रुपये पर दबाव जैसे कारकों को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने सतर्क रुख अपनाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि RBI फिलहाल महंगाई को नियंत्रित रखने और आर्थिक विकास को समर्थन देने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। प्रमुख नीतिगत दरें MPC बैठक के बाद निम्नलिखित दरें यथावत रखी गई हैं: रेपो रेट: 5.25% स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF): 5.00% मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF): 5.50% बैंक रेट: 5.50% पॉलिसी स्टांस: न्यूट्रल महंगाई पर RBI की क्या राय है? RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत में खुदरा महंगाई अभी भी RBI के निर्धारित लक्ष्य के भीतर बनी हुई है। हालांकि केंद्रीय बैंक ने संकेत दिया है कि वित्त वर्ष के दौरान तीसरी तिमाही में महंगाई कुछ बढ़ सकती है और ऊपरी सहनशीलता सीमा के करीब पहुंचने की संभावना है। इसलिए RBI भविष्य के जोखिमों पर नजर बनाए हुए है। आखिर क्या होता है रेपो रेट? रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक कर्ज उपलब्ध कराता है। जब रेपो रेट बढ़ता है, तो बैंकों के लिए फंड जुटाना महंगा हो जाता है। इसके बाद बैंक ग्राहकों के लिए लोन की ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं। वहीं रेपो रेट घटने पर होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन सस्ते होने की संभावना बढ़ जाती है। इसी वजह से RBI की प्रत्येक MPC बैठक पर आम लोगों, निवेशकों और बैंकिंग सेक्टर की विशेष नजर रहती है। आम लोगों के लिए क्या मायने हैं? इस बार के फैसले से स्पष्ट है कि फिलहाल न तो लोन महंगे हुए हैं और न ही सस्ते। जिन लोगों की EMI चल रही है, उन्हें मौजूदा किस्तों के साथ ही भुगतान जारी रखना होगा। वहीं नए उधारकर्ताओं के लिए भी ब्याज दरों में किसी तत्काल बदलाव की संभावना नहीं है।  

surbhi जून 5, 2026 0
RBI Governor announcing MPC policy decision amid expectations of unchanged repo rate and stable loan EMIs
RBI MPC Meeting: आज तय होगी आपकी EMI की दिशा, रेपो रेट पर क्या हो सकता है फैसला?

देशभर के करोड़ों होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन धारकों की नजर आज भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक के नतीजों पर टिकी हुई है। RBI गवर्नर Sanjay Malhotra आज सुबह 10 बजे मौद्रिक नीति की घोषणा करेंगे, जबकि दोपहर 12 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए फैसलों की विस्तृत जानकारी देंगे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और घरेलू महंगाई के जोखिमों को देखते हुए RBI फिलहाल रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं कर सकता। ऐसे में लोन की EMI में तत्काल राहत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है। क्या रेपो रेट 5.25% पर ही रहेगा? अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, RBI इस बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रख सकता है। पिछली MPC बैठक में भी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। इसके साथ ही: स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5.00% पर रह सकती है। मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट 5.50% पर बरकरार रहने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि RBI फिलहाल महंगाई को नियंत्रण में रखते हुए आर्थिक विकास को समर्थन देने के बीच संतुलन बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। महंगाई को लेकर क्यों बढ़ी चिंता? हालांकि खुदरा महंगाई दर फिलहाल 3.48 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है, लेकिन कई ऐसे कारक हैं जो आने वाले महीनों में कीमतों पर दबाव बढ़ा सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं: पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव कच्चे तेल की कीमतों में संभावित तेजी रुपये में कमजोरी मानसून से जुड़ी अनिश्चितताएं विशेषज्ञों का मानना है कि इन परिस्थितियों को देखते हुए RBI भविष्य की महंगाई को लेकर सतर्क रुख बनाए रख सकता है। अर्थव्यवस्था की स्थिति कैसी है? वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है। मजबूत बैंकिंग प्रणाली, डिजिटल वित्तीय सेवाओं का विस्तार और घरेलू मांग देश की आर्थिक गतिविधियों को समर्थन दे रहे हैं। RBI के पिछले अनुमानों के अनुसार: FY26 में GDP वृद्धि दर 7.6% रहने का अनुमान है। FY27 में GDP ग्रोथ 6.9% रहने की संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक विकास और महंगाई दोनों को ध्यान में रखते हुए RBI संतुलित नीति अपनाने की कोशिश करेगा। आज किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर? मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान निवेशकों और आम लोगों की नजरें सिर्फ रेपो रेट पर ही नहीं, बल्कि RBI के भविष्य के संकेतों पर भी रहेंगी। खास तौर पर इन मुद्दों पर ध्यान रहेगा: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर RBI का दृष्टिकोण रुपये की कमजोरी से निपटने की रणनीति पश्चिम एशिया में तनाव का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव महंगाई और विकास दर को लेकर संशोधित अनुमान आने वाले महीनों के लिए केंद्रीय बैंक का रुख EMI पर क्या होगा असर? यदि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया जाता है, तो अधिकांश फ्लोटिंग रेट लोन की EMI फिलहाल जस की तस रह सकती है। हालांकि बैंकों की आंतरिक नीतियों और फंडिंग लागत के आधार पर कुछ मामलों में मामूली बदलाव संभव हैं। आज की MPC बैठक का फैसला आने वाले महीनों में ब्याज दरों की दिशा तय करने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

surbhi जून 5, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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