टेक्नोलॉजी

WhatsApp Messages Without Showing Online

बिना ऑनलाइन आए भेज सकेंगे WhatsApp मैसेज, किसी को नहीं लगेगी भनक, जानें सेटअप का आसान तरीका

surbhi जून 18, 2026 0
Smartphone home screen showing WhatsApp widget used to send voice messages without opening the app.
WhatsApp Voice Message Widget Feature

Send WhatsApp Message Without Showing Online: WhatsApp अपने यूजर्स के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए लगातार नए फीचर्स पर काम कर रहा है। अब कंपनी एक ऐसा खास विजेट लाने की तैयारी कर रही है, जिसकी मदद से यूजर्स ऐप खोले बिना ही सीधे फोन की होम स्क्रीन से ऑडियो मैसेज भेज सकेंगे। इससे दूसरे लोगों को यह भी पता नहीं चलेगा कि आप WhatsApp पर ऑनलाइन थे या नहीं।

WhatsApp ला रहा है नया ऑडियो मैसेज विजेट

लोकप्रिय फीचर ट्रैकर WABetaInfo की रिपोर्ट के मुताबिक, WhatsApp एंड्रॉयड यूजर्स के लिए एक नया वॉइस मैसेज विजेट टेस्ट कर रहा है। यह फीचर फिलहाल एंड्रॉयड बीटा वर्जन 2.26.24.2 में देखा गया है।

इस विजेट की मदद से यूजर्स सीधे होम स्क्रीन से ऑडियो मैसेज रिकॉर्ड कर अपने कॉन्टैक्ट्स को भेज सकेंगे। इसके लिए WhatsApp ऐप खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

क्या होता है विजेट?

विजेट किसी ऐप का छोटा शॉर्टकट होता है, जिसे फोन की होम स्क्रीन पर लगाया जा सकता है। इसके जरिए ऐप खोले बिना ही कुछ खास काम किए जा सकते हैं।

WhatsApp का नया ऑडियो विजेट भी इसी तरह काम करेगा और यूजर्स को तेजी से वॉइस मैसेज भेजने की सुविधा देगा।

कैसे काम करेगा नया फीचर?

  • होम स्क्रीन पर WhatsApp ऑडियो विजेट सेट करना होगा।
  • विजेट में दिए गए "Tap to Record" विकल्प पर टैप करना होगा।
  • ऑडियो रिकॉर्ड करने के बाद उस कॉन्टैक्ट को चुनना होगा, जिसे मैसेज भेजना है।
  • पूरा काम WhatsApp ऐप खोले बिना ही हो जाएगा।
  • अन्य कॉन्टैक्ट्स को यह पता नहीं चलेगा कि आप ऑनलाइन थे या नहीं।
  • एक साथ कई लोगों को भी ऑडियो मैसेज भेजने की सुविधा मिल सकती है।

विजेट का डिजाइन कैसा होगा?

रिपोर्ट के अनुसार, इस विजेट का डिफॉल्ट साइज 3×1 होगा। हालांकि यूजर्स अपनी जरूरत के अनुसार इसका आकार छोटा या बड़ा भी कर सकेंगे। इसका इंटरफेस काफी सरल रखा गया है ताकि कोई भी आसानी से इसका इस्तेमाल कर सके।

अभी बिना WhatsApp खोले ऐसे पढ़ें मैसेज

हालांकि ऑडियो मैसेज वाला नया फीचर अभी टेस्टिंग स्टेज में है, लेकिन एंड्रॉयड यूजर्स फिलहाल WhatsApp मैसेज विजेट का इस्तेमाल करके बिना ऐप खोले मैसेज पढ़ सकते हैं।

ऐसे करें सेटअप:

  1. फोन की होम स्क्रीन पर खाली जगह को कुछ सेकंड दबाकर रखें।
  2. Widgets ऑप्शन पर जाएं।
  3. WhatsApp के विजेट्स में जाकर 4×2 साइज का विजेट चुनें।
  4. इसे होम स्क्रीन पर सेट कर लें।
  5. जरूरत के अनुसार इसका आकार छोटा या बड़ा कर सकते हैं।
  6. इसके बाद आने वाले WhatsApp मैसेज सीधे होम स्क्रीन पर दिखाई देंगे।

इस तरह आप बिना WhatsApp खोले और बिना ऑनलाइन दिखे मैसेज पढ़ सकते हैं।

कब मिलेगा नया फीचर?

फिलहाल यह फीचर बीटा टेस्टिंग में है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में इसे सभी एंड्रॉयड यूजर्स के लिए जारी किया जा सकता है। इसके बाद WhatsApp का इस्तेमाल पहले से ज्यादा आसान और प्राइवेट हो जाएगा।

 

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यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Smartphone displaying OTP messages and security alerts related to banking and social media accounts.
क्या आपका पुराना मोबाइल नंबर किसी और को मिल गया? बैंक OTP, ईमेल और सोशल मीडिया अकाउंट ऐसे रखें सुरक्षित

आज के डिजिटल दौर में मोबाइल नंबर सिर्फ कॉल करने का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह बैंकिंग, यूपीआई, ईमेल और सोशल मीडिया अकाउंट्स की सुरक्षा का अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में अगर आपने मोबाइल नंबर बदल लिया है, लेकिन अपने जरूरी अकाउंट्स में नया नंबर अपडेट नहीं किया, तो यह एक बड़ा सुरक्षा जोखिम बन सकता है। दरअसल, टेलीकॉम कंपनियां लंबे समय तक बंद पड़े नंबरों को स्थायी रूप से निष्क्रिय नहीं रखतीं। निर्धारित अवधि के बाद वही नंबर किसी नए ग्राहक को जारी कर दिया जाता है। ऐसे में आपका पुराना नंबर किसी और के पास पहुंच सकता है और इससे आपकी निजी जानकारी खतरे में पड़ सकती है। पुराना नंबर किसी और को मिलने पर क्या हो सकता है? अगर आपके बैंक खाते, ईमेल, यूपीआई ऐप या सोशल मीडिया प्रोफाइल अभी भी पुराने नंबर से जुड़े हुए हैं, तो नए नंबर धारक को आपके लिए आने वाले OTP, पासवर्ड रीसेट लिंक और अन्य महत्वपूर्ण संदेश प्राप्त हो सकते हैं। इससे कोई व्यक्ति आपके अकाउंट तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकता है और आपकी संवेदनशील जानकारी जोखिम में पड़ सकती है। टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन भी बन सकता है जोखिम अधिकांश लोग अकाउंट सुरक्षा के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) का इस्तेमाल करते हैं। इसमें लॉगिन के समय मोबाइल नंबर पर एक सुरक्षा कोड भेजा जाता है। लेकिन अगर वह नंबर अब आपके पास नहीं है और किसी दूसरे व्यक्ति को जारी हो चुका है, तो वही कोड उसके मोबाइल पर पहुंच सकता है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, केवल SMS आधारित सुरक्षा पर निर्भर रहना अब पहले जितना सुरक्षित नहीं माना जाता। अकाउंट हैकिंग का बढ़ रहा खतरा हर साल दुनिया भर में लाखों मोबाइल नंबर दोबारा जारी किए जाते हैं। ऐसे में पुराने नंबरों से जुड़े अकाउंट साइबर अपराधियों के लिए आसान लक्ष्य बन सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति के पास आपका पुराना नंबर पहुंच गया और उसने आपके ईमेल या सोशल मीडिया अकाउंट का पासवर्ड रीसेट करने की प्रक्रिया शुरू की, तो जरूरी सुरक्षा संदेश उसी के फोन पर जा सकते हैं। नंबर बदलने के बाद तुरंत करें ये काम यदि आपने हाल ही में नया मोबाइल नंबर लिया है, तो इन प्लेटफॉर्म पर तुरंत नंबर अपडेट करें— बैंक खाते और नेट बैंकिंग सेवाएं यूपीआई और डिजिटल पेमेंट ऐप्स ईमेल अकाउंट व्हाट्सऐप इंस्टाग्राम फेसबुक अन्य जरूरी ऑनलाइन सेवाएं ध्यान रखें कि केवल नया नंबर जोड़ना काफी नहीं है। पुराने नंबर को पूरी तरह हटाना भी जरूरी है। SMS OTP के बजाय अपनाएं सुरक्षित विकल्प साइबर विशेषज्ञ अब ऑथेंटिकेटर ऐप्स के इस्तेमाल की सलाह दे रहे हैं। ये ऐप मोबाइल नंबर पर निर्भर नहीं होते और डिवाइस के भीतर ही सुरक्षा कोड तैयार करते हैं। इसके साथ ही अकाउंट रिकवरी सेटिंग्स की भी जांच करनी चाहिए, क्योंकि कई बार पुराना नंबर बैकअप संपर्क के रूप में सेव रह जाता है। अभी जांच करना क्यों है जरूरी? मोबाइल नंबर का दोबारा आवंटन टेलीकॉम कंपनियों की सामान्य प्रक्रिया है और यह भविष्य में भी जारी रहेगी। इसलिए अगर आपने कभी नंबर बदला है, तो एक बार सभी महत्वपूर्ण अकाउंट्स की जांच जरूर करें। एक छोटी सी लापरवाही आपके बैंक खाते, निजी जानकारी और सोशल मीडिया प्रोफाइल की सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है।  

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