WhatsApp

Smartphone home screen showing WhatsApp widget used to send voice messages without opening the app.
बिना ऑनलाइन आए भेज सकेंगे WhatsApp मैसेज, किसी को नहीं लगेगी भनक, जानें सेटअप का आसान तरीका

Send WhatsApp Message Without Showing Online: WhatsApp अपने यूजर्स के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए लगातार नए फीचर्स पर काम कर रहा है। अब कंपनी एक ऐसा खास विजेट लाने की तैयारी कर रही है, जिसकी मदद से यूजर्स ऐप खोले बिना ही सीधे फोन की होम स्क्रीन से ऑडियो मैसेज भेज सकेंगे। इससे दूसरे लोगों को यह भी पता नहीं चलेगा कि आप WhatsApp पर ऑनलाइन थे या नहीं। WhatsApp ला रहा है नया ऑडियो मैसेज विजेट लोकप्रिय फीचर ट्रैकर WABetaInfo की रिपोर्ट के मुताबिक, WhatsApp एंड्रॉयड यूजर्स के लिए एक नया वॉइस मैसेज विजेट टेस्ट कर रहा है। यह फीचर फिलहाल एंड्रॉयड बीटा वर्जन 2.26.24.2 में देखा गया है। इस विजेट की मदद से यूजर्स सीधे होम स्क्रीन से ऑडियो मैसेज रिकॉर्ड कर अपने कॉन्टैक्ट्स को भेज सकेंगे। इसके लिए WhatsApp ऐप खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्या होता है विजेट? विजेट किसी ऐप का छोटा शॉर्टकट होता है, जिसे फोन की होम स्क्रीन पर लगाया जा सकता है। इसके जरिए ऐप खोले बिना ही कुछ खास काम किए जा सकते हैं। WhatsApp का नया ऑडियो विजेट भी इसी तरह काम करेगा और यूजर्स को तेजी से वॉइस मैसेज भेजने की सुविधा देगा। कैसे काम करेगा नया फीचर? होम स्क्रीन पर WhatsApp ऑडियो विजेट सेट करना होगा। विजेट में दिए गए "Tap to Record" विकल्प पर टैप करना होगा। ऑडियो रिकॉर्ड करने के बाद उस कॉन्टैक्ट को चुनना होगा, जिसे मैसेज भेजना है। पूरा काम WhatsApp ऐप खोले बिना ही हो जाएगा। अन्य कॉन्टैक्ट्स को यह पता नहीं चलेगा कि आप ऑनलाइन थे या नहीं। एक साथ कई लोगों को भी ऑडियो मैसेज भेजने की सुविधा मिल सकती है। विजेट का डिजाइन कैसा होगा? रिपोर्ट के अनुसार, इस विजेट का डिफॉल्ट साइज 3×1 होगा। हालांकि यूजर्स अपनी जरूरत के अनुसार इसका आकार छोटा या बड़ा भी कर सकेंगे। इसका इंटरफेस काफी सरल रखा गया है ताकि कोई भी आसानी से इसका इस्तेमाल कर सके। अभी बिना WhatsApp खोले ऐसे पढ़ें मैसेज हालांकि ऑडियो मैसेज वाला नया फीचर अभी टेस्टिंग स्टेज में है, लेकिन एंड्रॉयड यूजर्स फिलहाल WhatsApp मैसेज विजेट का इस्तेमाल करके बिना ऐप खोले मैसेज पढ़ सकते हैं। ऐसे करें सेटअप: फोन की होम स्क्रीन पर खाली जगह को कुछ सेकंड दबाकर रखें। Widgets ऑप्शन पर जाएं। WhatsApp के विजेट्स में जाकर 4×2 साइज का विजेट चुनें। इसे होम स्क्रीन पर सेट कर लें। जरूरत के अनुसार इसका आकार छोटा या बड़ा कर सकते हैं। इसके बाद आने वाले WhatsApp मैसेज सीधे होम स्क्रीन पर दिखाई देंगे। इस तरह आप बिना WhatsApp खोले और बिना ऑनलाइन दिखे मैसेज पढ़ सकते हैं। कब मिलेगा नया फीचर? फिलहाल यह फीचर बीटा टेस्टिंग में है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में इसे सभी एंड्रॉयड यूजर्स के लिए जारी किया जा सकता है। इसके बाद WhatsApp का इस्तेमाल पहले से ज्यादा आसान और प्राइवेट हो जाएगा।  

surbhi जून 18, 2026 0
Whatsapp Account Hacked
WhatsApp Account Hack हुआ है या नहीं, कैसे पता करें?

रांची। आजकल के डिजिटल ज़माने में WhatsApp सिर्फ chatting app नहीं, बल्कि personal chats, photos, documents और banking OTP तक का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में अगर आपका WhatsApp account hack हो जाए, तो privacy और security दोनों खतरे में पड़ सकती हैं। सवाल यह है कि WhatsApp hack हुआ है या नहीं, इसका पता कैसे लगाएं? आइए आसान भाषा में इसे समझते हैं। WhatsApp Account Hack होने के क्या संकेत हैं? 1. Unknown Devices Logged In दिखना अगर WhatsApp Web या linked devices में कोई अनजान device दिखाई दे, तो यह एक warning sign हो सकता है। 2. OTP Message बिना वजह आना अगर बार-बार आपको verification code या OTP message आ रहे हैं, तो इससे यह पता चलता है कि कोई आपका account access करने की कोशिश कर रहा है। 3. Messages अपने आप Read या Send होना अगर आपने message नहीं भेजा लेकिन chat में activity दिख रही है, तो account compromise हो सकता है। 4. अचानक Logout हो जाना WhatsApp अगर बार-बार logout हो रहा है या re-login मांग रहा है, तो सावधानी बरतने की जरूरत है। 5. Unknown Status या Profile Changes Profile photo, about section या status अपने आप बदलना suspicious activity का एक संकेत हो सकता है। WhatsApp Account Hack हुआ है तो क्या करें? तुरंत सभी linked devices logout करें Two-step verification ON करें WhatsApp PIN सेट करें Password और email security check करें Suspicious apps uninstall करें Account access वापस पाने के लिए re-verify करें Linked Devices कैसे Check करें? WhatsApp खोलें → Settings → Linked Devices → Unknown devices remove करें। Two-Step Verification क्यों जरूरी है? यह extra security layer जोड़ता है, जिससे सिर्फ OTP मिलने से account access करना मुश्किल हो जाता है। WhatsApp Account को Hack होने से कैसे बचायें ? OTP किसी  अंजान व्यक्ति से share न करें Unknown links पर click न करें Fake APK files install न करें Public Wi-Fi पर login करने से बचे   App को regularly update करें

Unknown जून 4, 2026 0
WhatsApp introduces Incognito Chat feature for secure and private AI conversations with disappearing messages
WhatsApp का नया Incognito Chat फीचर: अब AI चैट्स होंगी ज्यादा प्राइवेट और सुरक्षित

Meta Platforms ने WhatsApp यूजर्स के लिए एक नया प्राइवेसी फीचर पेश किया है, जिसका नाम Incognito Chat रखा गया है। इस फीचर का उद्देश्य यूजर्स को Meta AI के साथ ज्यादा सुरक्षित और निजी बातचीत का अनुभव देना है। कंपनी के CEO Mark Zuckerberg ने हाल ही में इस फीचर की घोषणा की। Meta का दावा है कि यह नया मोड AI चैट्स को पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित बनाएगा और बातचीत खत्म होते ही मैसेज अपने आप गायब हो जाएंगे। चैट खत्म होते ही डिलीट हो जाएंगे मैसेज Meta के अनुसार, Incognito Chat में की गई बातचीत सामान्य क्लाउड सर्वर पर प्रोसेस नहीं होगी। इसके बजाय, इसे एक सिक्योर और एन्क्रिप्टेड सिस्टम के जरिए संभाला जाएगा। कंपनी का कहना है कि न तो Meta और न ही कोई बाहरी व्यक्ति इन चैट्स को पढ़ सकेगा। सबसे अहम बात यह है कि AI से हुई बातचीत सेशन खत्म होते ही अपने आप डिलीट हो जाएगी और सर्वर पर स्टोर नहीं होगी। यह फीचर उन यूजर्स के लिए खास माना जा रहा है जो AI चैट्स के दौरान अपनी निजी जानकारी को लेकर चिंतित रहते हैं। क्या है Private Processing टेक्नोलॉजी? Meta ने बताया कि Incognito Chat फीचर उसकी Private Processing टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इस तकनीक को पिछले साल WhatsApp के AI फीचर्स के साथ पेश किया गया था। इस सिस्टम में यूजर्स की रिक्वेस्ट सामान्य सर्वर पर प्रोसेस होने के बजाय Trusted Execution Environments (TEE) नाम के एन्क्रिप्टेड और आइसोलेटेड सिस्टम में प्रोसेस होती है। इसका फायदा यह है कि किसी भी थर्ड पार्टी को यूजर डेटा तक पहुंच नहीं मिल पाती और चैट की गोपनीयता बनी रहती है। Meta का दावा है कि यह फीचर दूसरे AI प्लेटफॉर्म्स से अलग है, क्योंकि कई AI सेवाएं यूजर्स की बातचीत को लंबे समय तक स्टोर करके रखती हैं। किन यूजर्स को मिलेगा यह फीचर? कंपनी के मुताबिक, Incognito Chat फीचर को फिलहाल धीरे-धीरे Android और iOS यूजर्स के लिए रोलआउट किया जा रहा है। इस फीचर का इस्तेमाल करने के लिए यूजर्स को अपना WhatsApp ऐप लेटेस्ट वर्जन में अपडेट करना होगा। हालांकि शुरुआती चरण में यह सुविधा केवल चुनिंदा अकाउंट्स पर उपलब्ध होगी। Meta ने यह भी कहा है कि फीचर की उपलब्धता यूजर के क्षेत्र और अकाउंट टाइप के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। जिन यूजर्स को यह अपडेट मिलेगा, उन्हें Meta AI के साथ प्राइवेट बातचीत के लिए अलग विकल्प दिखाई देगा। सुरक्षा को लेकर Meta का दावा Meta का कहना है कि उसकी Private Processing टेक्नोलॉजी की जांच कई स्वतंत्र साइबर सिक्योरिटी कंपनियों ने की है। इनमें NCC Group और Trail of Bits जैसी कंपनियां शामिल हैं। कंपनी के मुताबिक, इन सुरक्षा परीक्षणों में यह पाया गया कि सिस्टम यूजर्स की प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा के लिए मजबूत सिक्योरिटी मानकों का पालन करता है।  

surbhi मई 14, 2026 0
WhatsApp Companion Mode Setup on two phones
वॉट्सऐप का 'कंपैनियन मोड': एक ही नंबर से दो फोन पर चैटिंग, जानें इस छिपे हुए फीचर का सही इस्तेमाल

नई दिल्ली/एजेंसियां: मैसेजिंग की दुनिया में वॉट्सऐप का एक ऐसा फीचर है जिसे अक्सर लोग नया मान लेते हैं, जबकि यह काफी समय से प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। 'कंपैनियन मोड' नामक यह टूल यूजर्स को यह आजादी देता है कि वे अपने प्राथमिक स्मार्टफोन के अलावा एक अन्य मोबाइल फोन पर भी उसी नंबर से वॉट्सऐप अकाउंट सक्रिय कर सकें। यह उन लोगों के लिए एक सटीक समाधान है जो निजी और दफ्तर के काम के लिए अलग-अलग हैंडसेट इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अपनी चैट को हर जगह एक समान (सिंक्रोनाइज) रखना चाहते हैं। मल्टी-डिवाइस सपोर्ट की ताकत वॉट्सऐप का यह फीचर मूल रूप से इसके 'मल्टी-डिवाइस सपोर्ट' का विस्तार है। इसके माध्यम से उपयोगकर्ता मुख्य फोन के अतिरिक्त 4 अन्य डिवाइस को अपने खाते से जोड़ सकता है। इस तकनीकी व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि एक बार लिंक हो जाने के बाद, सेकेंडरी डिवाइस को काम करने के लिए मुख्य फोन के इंटरनेट से जुड़े रहने की अनिवार्यता नहीं होती। यदि आपका प्राइमरी फोन बंद भी है, तो भी आप दूसरे फोन से संदेश भेज और प्राप्त कर सकते हैं। स्टेप-बाय-स्टेप: दूसरे फोन पर कैसे करें सेटअप? इस छिपे हुए फीचर को एक्टिवेट करने की प्रक्रिया बेहद सरल है, बस आपको क्यूआर कोड (QR Code) का सही इस्तेमाल करना होगा: ऐप इंस्टॉलेशन: सबसे पहले अपने दूसरे फोन पर वॉट्सऐप का लेटेस्ट वर्जन इंस्टॉल करें। लिंक डिवाइस का चुनाव: ऐप ओपन करने पर जब मोबाइल नंबर मांगा जाए, तो वहां नंबर डालने के बजाय ऊपर दाईं ओर दिख रहे 'थ्री-डॉट्स' पर क्लिक करें। यहाँ आपको 'Link as Companion Device' का विकल्प मिलेगा। QR कोड स्कैनिंग: अब स्क्रीन पर एक क्यूआर कोड दिखाई देगा। इसके बाद अपने मुख्य (प्राइमरी) फोन के वॉट्सऐप में जाएं, सेटिंग्स में जाकर 'Linked Devices' चुनें और दूसरे फोन के कोड को स्कैन करें। चैट सिंकिंग: स्कैनिंग पूरी होते ही आपकी सभी पुरानी चैट्स दूसरे फोन पर लोड हो जाएंगी और आप उसे स्वतंत्र रूप से उपयोग कर पाएंगे। सुरक्षा और गोपनीयता के मानक चूंकि वॉट्सऐप अपनी सुरक्षा के लिए जाना जाता है, इसलिए कंपैनियन मोड में भी 'एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन' पूरी तरह सक्रिय रहता है। इसका अर्थ यह है कि आपकी बातचीत दोनों फोन पर पूरी तरह सुरक्षित और निजी रहती है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षा के लिहाज से यूजर्स को समय-समय पर अपने 'लिंक्ड डिवाइसेज' की सूची चेक करते रहना चाहिए ताकि कोई अनधिकृत एक्सेस न हो सके। यह फीचर उन प्रोफेशनल्स के लिए गेम-चेंजर है जो एक ही समय में लैपटॉप, टैबलेट और दो अलग-अलग फोन पर सक्रिय रहना चाहते हैं। हालांकि यह फीचर पुराना है, लेकिन इसकी उपयोगिता आज भी पहले जैसी ही बनी हुई है।

Unknown अप्रैल 15, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Abhishek Banerjee addressing media as he writes to Lok Sabha Speaker seeking recognition of TMC as a unified party.
राजनीति

टीएमसी के बागियों को रोकने की आखिरी कोशिश! अभिषेक बनर्जी ने ओम बिरला को लिखा पत्र, कहा- सदन में TMC को एकल पार्टी माना जाए

Deepshikha जून 15, 2026 0