कैलिफोर्निया, एजेंसियां। WhatsApp अपने करोड़ों यूजर्स के लिए एक बड़ा फीचर लाने की तैयारी में है। अब यूजर्स बिना किसी अलग ऐप को डाउनलोड किए सीधे वेब ब्राउज़र के जरिए भी वॉयस और वीडियो कॉल कर सकेंगे। ब्राउज़र से ही होगी कॉलिंग नई सुविधा आने के बाद यूजर्स Chrome, Edge, Safari और अन्य समर्थित वेब ब्राउज़र के जरिए WhatsApp Web पर लॉग इन करके सीधे ऑडियो और वीडियो कॉल कर सकेंगे। इसके लिए अलग से डेस्कटॉप एप्लिकेशन इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं होगी। यह फीचर खासतौर पर ऑफिस और लैपटॉप इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए काफी उपयोगी माना जा रहा है। बीटा टेस्टिंग में दिखा नया फीचर WhatsApp के नए फीचर्स पर नजर रखने वाली रिपोर्ट्स के अनुसार, इस फीचर की टेस्टिंग वेब संस्करण पर शुरू हो चुकी है। कुछ बीटा यूजर्स को चैट विंडो में वॉयस और वीडियो कॉल के नए बटन दिखाई दिए हैं। सफल परीक्षण के बाद इसे सभी यूजर्स के लिए चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा। एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन रहेगा बरकरार कंपनी के अनुसार, वेब ब्राउज़र के जरिए होने वाली वॉयस और वीडियो कॉल में भी एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन की सुरक्षा मिलेगी। यानी कॉल के दौरान होने वाली बातचीत पूरी तरह सुरक्षित रहेगी और उसे कोई तीसरा पक्ष नहीं देख या सुन सकेगा। Zoom और Google Meet को मिलेगी चुनौती विशेषज्ञों का मानना है कि WhatsApp Web पर वॉयस और वीडियो कॉलिंग फीचर आने के बाद Zoom, Google Meet और Microsoft Teams जैसे प्लेटफॉर्म को कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल सकती है। करोड़ों सक्रिय यूजर्स वाला WhatsApp इस नए फीचर के जरिए वेब-आधारित संचार सेवाओं में अपनी मौजूदगी और मजबूत करने की तैयारी में है।
हैदराबाद, एजेंसियां। WhatsApp ने अपने यूजर्स के लिए PDF शेयरिंग अनुभव को और आसान बनाने के लिए Adobe Acrobat के साथ साझेदारी में नया फीचर लॉन्च किया है। अब यूजर्स किसी भी PDF फाइल को डाउनलोड किए बिना सीधे WhatsApp चैट के भीतर ही खोलकर पढ़ सकेंगे। इसके साथ ही हाइलाइट, अंडरलाइन और स्ट्राइकथ्रू जैसे बेसिक एडिटिंग टूल्स का भी इस्तेमाल कर सकेंगे। फिलहाल यह सुविधा WhatsApp Web और Windows डेस्कटॉप ऐप पर वैश्विक स्तर पर उपलब्ध है। नए अपडेट की खास बात यह है कि पासवर्ड-प्रोटेक्टेड PDF फाइल्स भी सीधे चैट में खोली जा सकेंगी। वहीं, एडवांस एडिटिंग के लिए "Edit in Acrobat" विकल्प दिया गया है, जिसके जरिए डॉक्यूमेंट Adobe Acrobat Web में खुल जाएगा। वहां टेक्स्ट और इमेज एडिट करने, फाइल को Word या JPG में बदलने, कंप्रेस करने, मर्ज करने और डिजिटल साइन जैसी सुविधाएं मिलेंगी। हालांकि, इनमें से अधिकांश प्रीमियम फीचर्स के लिए Acrobat Pro सब्सक्रिप्शन आवश्यक होगा। इसके अलावा WhatsApp ने iPad पर सीधे अकाउंट साइन-अप, Apple CarPlay और Android Auto के लिए बेहतर सपोर्ट तथा Apple Music और Spotify से सीधे WhatsApp Status पर गाने शेयर करने जैसे नए फीचर्स भी रोलआउट किए हैं। इन अपडेट्स का उद्देश्य यूजर्स को अधिक सुविधाजनक और बेहतर डिजिटल अनुभव उपलब्ध कराना है।
नई दिल्ली: अगर आप WhatsApp Web या WhatsApp Desktop का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। साइबर सुरक्षा एजेंसी CyberDost (I4C) ने व्हाट्सऐप यूजर्स को एक नए और खतरनाक साइबर स्कैम को लेकर चेतावनी जारी की है। इस नए फ्रॉड में हैकर्स फर्जी डॉक्यूमेंट, फोटो या जरूरी फाइल का झांसा देकर ऐसी फाइलें भेज रहे हैं, जिन्हें खोलते ही आपका सिस्टम और व्हाट्सऐप सेशन साइबर अपराधियों के नियंत्रण में जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह हमला खासतौर पर उन लोगों को निशाना बना रहा है जो लैपटॉप या कंप्यूटर पर WhatsApp Web या Desktop App का उपयोग करते हैं। क्या है नया WhatsApp Scam? साइबर अपराधी अनजान नंबरों से यूजर्स को PDF, फोटो, इनवॉइस, रिज्यूमे, ऑफिस डॉक्यूमेंट या अन्य जरूरी फाइल का नाम देकर .exe और .dll जैसी एक्सिक्यूटेबल फाइलें भेज रहे हैं। पहली नजर में ये फाइलें सामान्य डॉक्यूमेंट जैसी दिखाई देती हैं, लेकिन इन्हें डाउनलोड कर ओपन करते ही इनमें मौजूद खतरनाक कोड एक्टिव हो जाता है। इसके बाद हमलावर आपके सिस्टम और WhatsApp सेशन तक पहुंच बना सकते हैं। कैसे काम करता है यह साइबर फ्रॉड? स्कैमर्स बेहद चालाकी से यूजर्स को फंसाते हैं। अनजान नंबर से फर्जी डॉक्यूमेंट या फोटो भेजते हैं। फाइल का नाम इस तरह रखा जाता है कि वह असली लगे। फाइल डाउनलोड और ओपन करते ही सिस्टम में मैलवेयर एक्टिव हो सकता है। इसके बाद हमलावर WhatsApp Web या Desktop Session पर कब्जा करने की कोशिश करते हैं। चैट हिस्ट्री, फोटो, वीडियो, डॉक्यूमेंट और कॉन्टैक्ट लिस्ट तक पहुंच बनाई जा सकती है। कई मामलों में अपराधी आपके अकाउंट से आपके दोस्तों और रिश्तेदारों को मैसेज भेजकर पैसों की ठगी भी करते हैं। किन फाइलों से सबसे ज्यादा खतरा? Cyber सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक इन फाइल एक्सटेंशन से विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। .exe .dll .zip .bat यदि किसी फाइल का नाम document.pdf.exe या photo.jpg.exe जैसा दिखाई दे, तो उसे बिल्कुल भी डाउनलोड या ओपन न करें। कई बार फाइल का असली एक्सटेंशन छिपा होता है, जिससे यूजर धोखा खा जाता है। खुद को ऐसे रखें सुरक्षित साइबर हमलों से बचने के लिए इन बातों का हमेशा ध्यान रखें। किसी भी अनजान नंबर से आई फाइल डाउनलोड न करें। फाइल का पूरा नाम और एक्सटेंशन जरूर जांचें। WhatsApp के Linked Devices सेक्शन को नियमित रूप से चेक करें। कोई अनजान डिवाइस दिखाई दे तो तुरंत Log Out करें। अपने WhatsApp पर Two-Step Verification (2FA) हमेशा चालू रखें। कंप्यूटर और एंटीवायरस को नियमित रूप से अपडेट रखें। संदिग्ध फाइल मिलने पर उसे तुरंत डिलीट करें और भेजने वाले नंबर को ब्लॉक करें। अगर ठगी का शिकार हो जाएं तो क्या करें? यदि आपको लगता है कि आपका WhatsApp या सिस्टम हैक हो गया है, तो तुरंत कार्रवाई करें। सभी Linked Devices से लॉग आउट करें। WhatsApp का Two-Step Verification सक्रिय करें। अपने महत्वपूर्ण पासवर्ड बदलें। तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें। cybercrime.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में Meta ने एक नया इमेज जनरेशन मॉडल Muse Image पेश किया है। कंपनी का दावा है कि यह टूल केवल टेक्स्ट प्रॉम्प्ट के आधार पर कुछ ही सेकंड में बेहद वास्तविक (Realistic) तस्वीरें तैयार कर सकता है। इतना ही नहीं, यह मौजूदा तस्वीरों को एडिट करने और कई इमेज को मिलाकर नया विजुअल बनाने की भी क्षमता रखता है। हालांकि, इस नई तकनीक के साथ प्राइवेसी और यूजर डेटा के इस्तेमाल को लेकर नई बहस भी शुरू हो गई है। क्या है Meta का Muse Image? Muse Image एक AI आधारित इमेज जनरेशन मॉडल है, जो यूजर द्वारा दिए गए टेक्स्ट निर्देशों (Prompt) को समझकर नई तस्वीरें तैयार करता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई यूजर समुद्र किनारे बने आधुनिक घर की तस्वीर चाहता है, तो उसे केवल उसका विवरण लिखना होगा। इसके बाद AI उसी आधार पर नई इमेज तैयार कर देगा। इसकी खास बात यह है कि यह सिर्फ नई तस्वीरें ही नहीं बनाता, बल्कि कई रेफरेंस इमेज को मिलाकर नया डिजाइन तैयार करने और पहले से मौजूद तस्वीरों में बदलाव करने की सुविधा भी देता है। किन प्लेटफॉर्म पर मिलेगा यह फीचर? Meta ने Muse Image को अपने AI इकोसिस्टम का हिस्सा बनाना शुरू कर दिया है। फिलहाल यह फीचर Meta AI ऐप और वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जा रहा है। अमेरिका में इसे Instagram Stories के साथ भी जोड़ा गया है, जबकि कुछ देशों में WhatsApp पर इसकी सीमित सुविधा शुरू की गई है। कंपनी भविष्य में इसे Facebook और Marketplace जैसे अन्य प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध कराने की योजना बना रही है। अभी यूजर इस सुविधा का मुफ्त उपयोग कर सकते हैं, हालांकि भविष्य में सीमित उपयोग के बाद सब्सक्रिप्शन मॉडल लागू किया जा सकता है। क्यों बढ़ा प्राइवेसी को लेकर विवाद? Muse Image का सबसे चर्चित फीचर वह है, जिसमें किसी व्यक्ति के Instagram यूजरनेम के आधार पर उसकी सार्वजनिक (Public) प्रोफाइल पर मौजूद तस्वीरों से नई AI इमेज तैयार की जा सकती है। यही सुविधा अब विवाद का कारण बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की अनुमति के बिना उसकी सार्वजनिक तस्वीरों का इस्तेमाल AI इमेज बनाने में किया जाता है, तो इससे प्राइवेसी और डिजिटल पहचान से जुड़े गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं। क्या हो सकता है गलत इस्तेमाल? तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस तरह की सुविधा पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं रखा गया तो इसका गलत उपयोग भी संभव है। AI की मदद से तैयार होने वाली तस्वीरें अब पहले से कहीं अधिक वास्तविक दिखाई देती हैं। ऐसे में भविष्य में असली और AI से बनी तस्वीरों के बीच अंतर करना मुश्किल हो सकता है। इससे फर्जी तस्वीरें, गलत जानकारी और डिजिटल पहचान से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं। 'ऑप्ट-आउट' सिस्टम पर भी उठे सवाल Muse Image को लेकर एक और चिंता इसका ऑप्ट-आउट सिस्टम है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस व्यवस्था में यदि कोई यूजर नहीं चाहता कि उसका सार्वजनिक कंटेंट AI मॉडल के लिए इस्तेमाल हो, तो उसे स्वयं सेटिंग्स में जाकर यह विकल्प बंद करना होगा। ऐसे में कई लोगों को यह जानकारी भी नहीं होगी कि उनकी सार्वजनिक तस्वीरों का उपयोग AI प्रशिक्षण या इमेज जनरेशन के लिए किया जा सकता है। AI के साथ बढ़ रही जिम्मेदारी भी AI आधारित इमेज जनरेशन तकनीक क्रिएटिविटी के नए अवसर जरूर खोल रही है, लेकिन इसके साथ डेटा सुरक्षा, यूजर की सहमति और डिजिटल पहचान की सुरक्षा जैसे मुद्दे भी तेजी से महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि AI तकनीक के विस्तार के साथ कंपनियों को पारदर्शी नीतियां अपनानी होंगी, ताकि नई सुविधाओं का लाभ भी मिलता रहे और यूजर्स की निजता भी सुरक्षित रह सके।
सैन फ्रांसिस्को, एजेंसियां। Meta ने अपना नया AI इमेज जनरेशन मॉडल 'Muse Image' लॉन्च कर दिया है। यह मॉडल Meta AI में उपलब्ध होगा और यूजर्स को केवल टेक्स्ट प्रॉम्प्ट ही नहीं, बल्कि फोटो, स्केच और नोट्स के आधार पर भी नई AI तस्वीरें बनाने और एडिट करने की सुविधा देगा। कंपनी ने इसे अपने नए Meta Superintelligence Labs का पहला इमेज जनरेशन मॉडल बताया है। Instagram और WhatsApp से होगी शुरुआत Meta के अनुसार, Muse Image की मदद से यूजर्स Instagram Stories के लिए 30 से अधिक नए AI इफेक्ट्स का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके अलावा WhatsApp में Meta AI चैट के जरिए भी AI इमेज बनाई जा सकेगी। आने वाले महीनों में यह फीचर Facebook और Messenger पर भी उपलब्ध कराया जाएगा। AI से फोटो एडिट करना होगा और आसान नया मॉडल जटिल निर्देशों को समझने, कई तस्वीरों को मिलाकर नई इमेज तैयार करने और स्केच या ड्रॉइंग के जरिए इमेज एडिट करने में सक्षम है। Meta का दावा है कि यह मॉडल पहले की तुलना में अधिक सटीक, तेज और बेहतर गुणवत्ता वाली तस्वीरें तैयार करेगा। कंपनी ने Muse Video नाम के AI वीडियो मॉडल की शुरुआती झलक भी पेश की है। AI रेस में Google और OpenAI को चुनौती Muse Image के लॉन्च के साथ Meta ने AI इमेज जनरेशन की दौड़ में OpenAI और Google को सीधी चुनौती दी है। कंपनी का कहना है कि आने वाले समय में यह तकनीक क्रिएटर्स, विज्ञापनदाताओं और आम यूजर्स के लिए कंटेंट तैयार करने का तरीका पूरी तरह बदल सकती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp अपने यूजर्स के लिए एक नया और उपयोगी फीचर लाने की तैयारी कर रहा है। कंपनी इन दिनों 'ग्रीन डॉट' फीचर की टेस्टिंग कर रही है, जिसके जरिए यूजर्स बिना चैट खोले ही यह जान सकेंगे कि उनके कौन-से कॉन्टैक्ट उस समय ऑनलाइन और ऐप पर सक्रिय हैं। यह सुविधा पहले से ही Meta के अन्य प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम और मैसेंजर पर उपलब्ध है और अब जल्द ही WhatsApp में भी देखने को मिल सकती है। प्रोफाइल पर दिखेगा ऑनलाइन होने का संकेत रिपोर्ट्स के अनुसार, नया फीचर आने के बाद किसी कॉन्टैक्ट की प्रोफाइल फोटो या कॉन्टैक्ट इंफो पेज पर एक ग्रीन डॉट दिखाई देगा। यह संकेत देगा कि संबंधित व्यक्ति उस समय WhatsApp पर एक्टिव है। यदि ग्रीन डॉट दिखाई नहीं देता, तो इसका अर्थ होगा कि वह यूजर फिलहाल ऑनलाइन नहीं है। शुरुआती चरण में यह सुविधा कॉन्टैक्ट इंफो पेज तक सीमित रह सकती है, जबकि भविष्य में इसे चैट लिस्ट और कन्वर्सेशन स्क्रीन पर भी उपलब्ध कराया जा सकता है। प्राइवेसी से नहीं होगा समझौता WhatsApp ने इस फीचर के साथ यूजर्स की प्राइवेसी का भी ध्यान रखा है। ग्रीन डॉट उसी ऑनलाइन स्टेटस सेटिंग के आधार पर काम करेगा, जिसका उपयोग अभी किया जा रहा है। यदि किसी यूजर ने अपना ऑनलाइन स्टेटस छिपा रखा है, तो ग्रीन डॉट भी अन्य लोगों को दिखाई नहीं देगा। यानी यूजर्स के पास यह विकल्प पहले की तरह रहेगा कि वे अपनी ऑनलाइन मौजूदगी दिखाना चाहते हैं या नहीं। iPhone और Android दोनों पर मिलेगा फीचर यह फीचर सबसे पहले Android के बीटा वर्जन में देखा गया था और अब इसकी टेस्टिंग iPhone पर भी शुरू हो चुकी है। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ सप्ताह में इसे चरणबद्ध तरीके से रोलआउट किया जाएगा। हालांकि, WhatsApp की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक लॉन्च तारीख की घोषणा नहीं की गई है। नए फीचर से यूजर्स के लिए ऑनलाइन कॉन्टैक्ट की पहचान करना पहले से कहीं अधिक आसान और सुविधाजनक हो जाएगा।
नई दिल्ली: मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp के नए यूजरनेम फीचर को लेकर केंद्र सरकार ने अपनी चिंता जताई है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इस मामले में Meta को विस्तृत जवाब देने के लिए 9 जुलाई तक का समय दिया है। पहले कंपनी से 6 जुलाई तक जवाब मांगा गया था, लेकिन अब तीन दिन की अतिरिक्त मोहलत दी गई है। सरकार का कहना है कि मोबाइल नंबर की जगह यूजरनेम से पहचान होने की सुविधा का गलत इस्तेमाल साइबर अपराधी कर सकते हैं। ऐसे में इस फीचर के सुरक्षा पहलुओं और संभावित जोखिमों पर स्पष्ट जानकारी मांगी गई है। क्या है WhatsApp का नया यूजरनेम फीचर? WhatsApp अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसा फीचर ला रहा है, जिसके तहत यूजर अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना दूसरे लोगों से चैट कर सकेंगे। कंपनी के अनुसार— हर यूजर के लिए एक यूनिक यूजरनेम होगा। डिस्प्ले नेम और यूजरनेम अलग-अलग होंगे। डिस्प्ले नेम एक जैसा हो सकता है, लेकिन यूजरनेम प्रत्येक अकाउंट के लिए अलग होगा। इसका उद्देश्य यूजर्स की प्राइवेसी को बेहतर बनाना है। सरकार को क्यों है चिंता? MeitY का मानना है कि यदि मोबाइल नंबर दिखाई नहीं देगा तो इससे कानून-व्यवस्था और साइबर सुरक्षा से जुड़े नए खतरे पैदा हो सकते हैं। सरकार की प्रमुख चिंताएं हैं— अपराधी फर्जी यूजरनेम बनाकर लोगों को निशाना बना सकते हैं। किसी की पहचान छिपाकर धोखाधड़ी और साइबर अपराध को अंजाम देना आसान हो सकता है। फर्जी प्रोफाइल और तस्वीरों का दुरुपयोग बढ़ सकता है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए अपराधियों की पहचान करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। Meta से क्या जानकारी मांगी गई है? सरकार ने Meta से यूजरनेम फीचर के कई तकनीकी और सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। इनमें शामिल हैं— फीचर का तकनीकी ढांचा। यूजर की पहचान सत्यापित करने की प्रक्रिया। फर्जी अकाउंट और दुरुपयोग रोकने के उपाय। साइबर अपराध की स्थिति में जांच एजेंसियों को मिलने वाली सहायता। प्राइवेसी और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की व्यवस्था। फिलहाल फीचर लागू न करने की सलाह सरकार ने Meta से कहा है कि जब तक इस फीचर पर समीक्षा और आवश्यक चर्चा पूरी नहीं हो जाती, तब तक भारत में इसे व्यापक स्तर पर लागू करने से बचा जाए। सरकार पहले यह सुनिश्चित करना चाहती है कि नया फीचर उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता की रक्षा करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी प्रभावी समाधान उपलब्ध कराए। अब इस मामले में सभी की नजर Meta के जवाब पर है, जिसे कंपनी को 9 जुलाई तक केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर प्रस्तावित और मौजूदा 'यूजरनेम फीचर' को लेकर सख्त रुख अपनाया है। WhatsApp को नोटिस जारी करने के बाद अब सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने Telegram और Signal को भी नोटिस भेजकर उनके यूजरनेम सिस्टम और उससे जुड़े सुरक्षा उपायों पर जवाब मांगा है। सरकार ने इन प्लेटफॉर्म्स से पूछा है कि यूजरनेम फीचर के जरिए होने वाली धोखाधड़ी, फर्जी पहचान (Impersonation) और साइबर अपराधों को रोकने के लिए उन्होंने क्या सुरक्षा इंतजाम किए हैं। Telegram और Signal से मांगा जवाब सरकार ने नोटिस में पूछा है कि दोनों प्लेटफॉर्म अपने यूजरनेम फीचर को जारी रखने के पक्ष में क्या तर्क देते हैं और यह फीचर उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किस तरह काम करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, Telegram को भेजे गए नोटिस में सरकार ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि उसे यूजरनेम फीचर बनाए रखने की अनुमति क्यों दी जानी चाहिए। गौरतलब है कि Telegram और Signal पर यूजरनेम फीचर पहले से उपलब्ध है, जिससे बिना मोबाइल नंबर साझा किए भी यूजर्स एक-दूसरे से संपर्क कर सकते हैं। WhatsApp को भी भेजा गया था नोटिस इससे पहले केंद्र सरकार ने Meta को नोटिस जारी कर WhatsApp के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर आपत्ति जताई थी। सरकार ने कहा था कि जब तक इस विषय पर विस्तृत चर्चा पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस फीचर को भारत में लॉन्च नहीं किया जाए। सरकार की चिंता है कि मोबाइल नंबर की जगह यूजरनेम आधारित पहचान से ऑनलाइन ठगी, फर्जी प्रोफाइल और पहचान छिपाकर अपराध करने के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है। आईटी नियमों के तहत मांगा जवाब सरकार ने Meta से यह भी पूछा है कि प्रस्तावित फीचर को लेकर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। नोटिस में कहा गया है कि यदि यह फीचर पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना लागू किया जाता है, तो इससे साइबर अपराध और ऑनलाइन फ्रॉड का खतरा बढ़ सकता है। WhatsApp ने किया फीचर का बचाव WhatsApp ने सरकार की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि प्रस्तावित यूजरनेम फीचर में उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। कंपनी का दावा है कि इसमें फर्जी पहचान, प्रतिरूपण (Impersonation) और ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने के लिए कई सुरक्षा उपाय पहले से शामिल किए गए हैं। भारत है सबसे बड़ा बाजार भारत WhatsApp के लिए दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में शामिल है। देश में WhatsApp के करीब 50 करोड़ उपयोगकर्ता हैं। वहीं, Telegram और Signal के भी लाखों सक्रिय यूजर्स हैं। ऐसे में सरकार का यह कदम डिजिटल सुरक्षा, ऑनलाइन पहचान और साइबर धोखाधड़ी को रोकने के प्रयासों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई दिल्ली: भारत सरकार द्वारा WhatsApp के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर रोक लगाए जाने के बाद स्वदेशी टेक कंपनी Zoho ने भी बड़ा फैसला लिया है। कंपनी के संस्थापक श्रीधर वेम्बु ने घोषणा की है कि उनका मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Arattai भी यूजरनेम आधारित अकाउंट फीचर को बंद करेगा। इस कदम के साथ Arattai सरकार के निर्देशों का समर्थन करने वाला पहला भारतीय मैसेजिंग ऐप बन गया है। श्रीधर वेम्बु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार के नए दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए Arattai में यूजरनेम आधारित अकाउंट की सुविधा समाप्त की जाएगी। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह बदलाव कब तक लागू होगा, लेकिन स्पष्ट किया कि कंपनी नियामकीय नियमों का पूरी तरह पालन करेगी। पहले से मौजूद था यूजरनेम फीचर Arattai में यूजरनेम के आधार पर अकाउंट बनाने और इस्तेमाल करने की सुविधा पहले से उपलब्ध थी। इस फीचर के जरिए यूजर बिना मोबाइल नंबर साझा किए दूसरे लोगों से जुड़ सकते थे। लेकिन अब कंपनी इसे चरणबद्ध तरीके से हटाने की तैयारी कर रही है। वेम्बु के इस फैसले को भारत सरकार की डिजिटल सुरक्षा और साइबर फ्रॉड रोकने की नीति के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। WhatsApp को सरकार ने क्यों रोका? हाल ही में Meta ने WhatsApp के लिए यूजरनेम फीचर पेश करने की घोषणा की थी। इस फीचर का उद्देश्य यूजर्स को अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना चैट करने की सुविधा देना था। कंपनी का दावा था कि इससे प्राइवेसी और सुरक्षा बेहतर होगी। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस फीचर को लेकर गंभीर सुरक्षा चिंताएं जताईं। सरकार का मानना है कि यदि यूजरनेम सिस्टम बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के लागू किया गया, तो साइबर अपराधी बैंक, सरकारी संस्थानों, कंपनियों और प्रसिद्ध हस्तियों के नाम से फर्जी यूजरनेम बनाकर लोगों को धोखा दे सकते हैं। इससे फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट, वित्तीय धोखाधड़ी और ऑनलाइन स्कैम जैसे मामलों में बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है। Meta से मांगी गई तकनीकी जानकारी रिपोर्ट्स के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Meta से इस फीचर की विस्तृत तकनीकी जानकारी मांगी है। इसमें यूजरनेम सिस्टम का आर्किटेक्चर, सुरक्षा व्यवस्था, पहचान सत्यापन और धोखाधड़ी रोकने के उपायों की जानकारी शामिल है। जब तक सरकार और Meta के बीच इस विषय पर चर्चा पूरी नहीं हो जाती और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान नहीं हो जाता, तब तक भारत में WhatsApp के यूजरनेम फीचर के रोलआउट पर रोक रहेगी। Meta ने क्या दी सफाई? Meta का कहना है कि उसने कई महत्वपूर्ण यूजरनेम पहले से ही सुरक्षित (Reserved) रखे हैं। इनमें सरकारी संस्थान, प्रमुख कंपनियां, मशहूर हस्तियां और Meta Verified अकाउंट शामिल हैं। यदि कोई सामान्य यूजर ऐसे नाम से यूजरनेम बनाने की कोशिश करता है, तो सिस्टम उसे बताएगा कि वह नाम उपलब्ध नहीं है। कंपनी का दावा है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य फर्जी अकाउंट और पहचान की चोरी को रोकना है। डिजिटल सुरक्षा पर बढ़ा फोकस WhatsApp और Arattai से जुड़े हालिया घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए सुरक्षा और पहचान सत्यापन से जुड़े नियम लगातार सख्त हो रहे हैं। सरकार चाहती है कि नए फीचर्स लॉन्च करने से पहले कंपनियां पर्याप्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करें, ताकि ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।
नई दिल्ली,एजेंसियां। केंद्र सरकार ने डिजिटल सुरक्षा और ऑनलाइन धोखाधड़ी को लेकर अपनी सख्ती बढ़ाते हुए WhatsApp के बाद अब Telegram और Signal को भी उनके यूजरनेम (Username) फीचर के संबंध में नोटिस जारी किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने दोनों प्लेटफॉर्म से इस फीचर से जुड़े सुरक्षा उपायों और संभावित जोखिमों पर विस्तृत जानकारी मांगी है। यूजरनेम फीचर पर सरकार की बढ़ी चिंता सरकार का कहना है कि यूजरनेम आधारित मैसेजिंग में मोबाइल नंबर छिपा रहता है, जिससे फर्जी पहचान , ऑनलाइन ठगी, फिशिंग और अन्य साइबर अपराधों का खतरा बढ़ सकता है। इसी कारण कंपनियों से पूछा गया है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए उन्होंने क्या सुरक्षा इंतजाम किए हैं। WhatsApp को पहले ही दिया जा चुका है निर्देश इससे पहले केंद्र सरकार ने Meta को निर्देश दिया था कि भारत में WhatsApp के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर का रोलआउट फिलहाल रोका जाए। साथ ही कंपनी से तीन दिनों के भीतर इस फीचर और इसके सुरक्षा उपायों पर विस्तृत जवाब मांगा गया था। Telegram और Signal से भी मांगी गई रिपोर्ट सरकारी सूत्रों के अनुसार, Telegram और Signal से भी पूछा गया है कि उनके प्लेटफॉर्म पर लंबे समय से मौजूद यूजरनेम फीचर का दुरुपयोग रोकने के लिए कौन-कौन से सुरक्षा उपाय लागू हैं। दोनों कंपनियों को इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है। डिजिटल सुरक्षा पर सरकार की नजर विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जवाबदेही बढ़ाने और साइबर अपराधों पर रोक लगाने की दिशा में सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। अब सभी की नजर कंपनियों की प्रतिक्रिया और सरकार के अगले कदम पर बनी हुई है।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने WhatsApp के प्रस्तावित 'यूजरनेम' फीचर को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने Meta को नोटिस जारी कर इस फीचर के रोलआउट पर सवाल उठाए हैं और तीन दिनों के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक उसके सभी सुरक्षा संबंधी सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तब तक भारत में यह फीचर लॉन्च नहीं किया जा सकेगा। नोटिस में क्या कहा गया? सरकार ने अपने नोटिस में कहा है कि WhatsApp का यूजरनेम फीचर ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी पहचान वाले साइबर अपराधों को बढ़ावा दे सकता है। नोटिस के अनुसार, यदि लोग केवल यूजरनेम के माध्यम से संपर्क कर सकेंगे, तो साइबर अपराधियों के लिए अपनी पहचान छिपाकर लोगों को निशाना बनाना अधिक आसान हो जाएगा। कानूनी कार्रवाई की चेतावनी सरकार ने मेटा से पूछा है कि जब कंपनी को इस फीचर से संभावित साइबर अपराधों का अंदेशा है, तो उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। मेटा को इस संबंध में लिखित और विस्तृत जवाब देने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। सरकार की प्रमुख चिंताएं सरकार ने नोटिस में कई संभावित जोखिमों का उल्लेख किया है। डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन स्कैम: सरकार का मानना है कि बिना फोन नंबर साझा किए केवल यूजरनेम के जरिए संपर्क की सुविधा मिलने पर साइबर अपराधियों के लिए लोगों तक पहुंचना आसान हो सकता है। फर्जी पहचान का खतरा: धोखेबाज किसी व्यक्ति, कंपनी या सरकारी संस्था से मिलते-जुलते यूजरनेम बनाकर लोगों को भ्रमित कर सकते हैं। सरकारी एजेंसियों की नकल: आशंका जताई गई है कि अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, बैंक या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर लोगों से ठगी कर सकते हैं। यूजरनेम फीचर क्या है? WhatsApp जिस फीचर पर काम कर रहा है, उसके तहत उपयोगकर्ता अपने मोबाइल नंबर के बजाय एक यूजरनेम के जरिए दूसरों से जुड़ सकेंगे। इससे फोन नंबर साझा किए बिना बातचीत करने का विकल्प मिलेगा। यह सुविधा पहले से कई अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। भारत सरकार का मानना है कि इस फीचर को लागू करने से पहले पर्याप्त सुरक्षा उपाय और पहचान सत्यापन की व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है। फिलहाल मेटा की ओर से इस नोटिस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार के जवाब की समीक्षा के बाद ही भारत में WhatsApp के यूजरनेम फीचर के भविष्य पर फैसला लिया जाएगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप WhatsApp ने अपने यूजर्स के लिए कई नए फीचर्स शुरू कर दिए हैं। इन अपडेट्स का उद्देश्य चैटिंग को आसान बनाना, स्टोरेज मैनेजमेंट बेहतर करना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए यूजर एक्सपीरियंस को और स्मार्ट बनाना है। फोटो एडिट करना होगा आसान WhatsApp ने Meta AI आधारित नए फोटो एडिटिंग टूल पेश किए हैं। अब यूजर्स फोटो भेजने से पहले उसका बैकग्राउंड बदल सकेंगे, अनचाहे ऑब्जेक्ट हटा सकेंगे और AI की मदद से अलग-अलग स्टाइल भी उसमे लागू कर सकेंगे। iPhone पर एक ही ऐप में चलेंगे दो अकाउंट अब iPhone यूजर्स भी एक ही WhatsApp ऐप में दो अलग-अलग अकाउंट इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे पर्सनल और ऑफिस अकाउंट को अलग-अलग मैनेज करना आसान होगा। यह सुविधा पहले केवल Android यूजर्स के लिए उपलब्ध थी। चैट ट्रांसफर हुआ और आसान WhatsApp ने चैट ट्रांसफर फीचर को और बेहतर बनाया है। अब Android और iPhone के बीच चैट, फोटो और वीडियो ट्रांसफर करना पहले से ज्यादा आसान होगा, जिससे नया फोन लेने पर डेटा सुरक्षित तरीके से ट्रांसफर किया जा सकेगा। बड़े मीडिया फाइल्स आसानी से होंगे डिलीट नए अपडेट के बाद यूजर्स किसी चैट के बड़े मीडिया फाइल्स को अलग से खोजकर डिलीट कर सकेंगे। इससे बिना पूरी चैट हटाए फोन की स्टोरेज खाली की जा सकेगी। इमोजी टाइप करते ही मिलेंगे स्टिकर सुझाव अब चैटिंग के दौरान जैसे ही यूजर कोई इमोजी टाइप करेगा, WhatsApp उससे जुड़े स्टिकर अपने आप सुझाएगा। इससे चैटिंग पहले से ज्यादा मजेदार और तेज हो जाएगी। यूजरनेम फीचर की भी तैयारी रिपोर्ट्स के मुताबिक WhatsApp जल्द ही Username फीचर भी लॉन्च कर सकता है। इसके बाद यूजर्स बिना मोबाइल नंबर साझा किए भी एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। यह फीचर यूजर की प्राइवेसी को और मजबूत करेगा। चरणबद्ध तरीके से मिलेंगे अपडेट WhatsApp ने बताया है कि ये सभी फीचर्स एक साथ सभी यूजर्स को नहीं मिलेंगे। इन्हें Android और iPhone पर चरणबद्ध तरीके से रोलआउट किया जा रहा है। यदि आपके फोन में अभी यह अपडेट नहीं आया है, तो Google Play Store या Apple App Store से WhatsApp का लेटेस्ट वर्जन अपडेट करें।
नई दिल्ली: भारतीय स्टार्टअप जगत के चर्चित उद्यमी कुणाल शाह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। फिनटेक कंपनी CRED को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के बाद अब वह दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp की कमान संभालने जा रहे हैं। Meta ने उन्हें WhatsApp का नया ग्लोबल CEO नियुक्त किया है। इस नियुक्ति के साथ भारतीय उद्यमिता को वैश्विक स्तर पर एक बड़ी पहचान मिली है। हाल ही में कुणाल शाह ने CRED के CEO पद से हटने की घोषणा की थी। कंपनी की दैनिक जिम्मेदारियां अब मितेन संपत संभालेंगे, जबकि कुणाल शाह शेयरधारक और रणनीतिक भूमिका में जुड़े रहेंगे। कौन हैं कुणाल शाह? मुंबई में जन्मे कुणाल शाह एक गुजराती कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता फार्मास्युटिकल व्यवसाय से जुड़े थे। इंजीनियरिंग के बजाय उन्होंने मुंबई के विल्सन कॉलेज से फिलॉसफी में स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने NMIMS से MBA शुरू किया, लेकिन बीच में ही पढ़ाई छोड़कर उद्यमिता की राह चुन ली। उनका पहला बड़ा वेंचर PaisaBack था। इसके बाद वर्ष 2010 में उन्होंने FreeCharge की सह-स्थापना की। यह कंपनी इतनी सफल रही कि 2015 में Snapdeal ने इसे लगभग 2,800 करोड़ रुपये में खरीद लिया। कैसे बना CRED भारत का बड़ा फिनटेक ब्रांड? FreeCharge की सफलता के बाद कुणाल शाह ने 2018 में CRED की शुरुआत की। कंपनी का उद्देश्य समय पर क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान करने वाले ग्राहकों को रिवॉर्ड देना था। धीरे-धीरे CRED ने भुगतान, लोन, बीमा, वेल्थ मैनेजमेंट और क्रेडिट कार्ड सेवाओं तक अपना विस्तार किया। CRED से जुड़े प्रमुख आंकड़े विवरण आंकड़े स्थापना वर्ष 2018 यूजर्स 1.7 करोड़ से अधिक FY25 राजस्व ₹2,735 करोड़ वैल्यूएशन 4.5 अरब डॉलर Meta की हिस्सेदारी लगभग 20% Meta ने हाल ही में CRED में 90 करोड़ डॉलर (करीब 8,550 करोड़ रुपये) का निवेश भी किया है। WhatsApp में क्या होगी नई भूमिका? रिपोर्ट्स के अनुसार, कुणाल शाह WhatsApp के बिजनेस मॉडल को और मजबूत बनाने पर काम करेंगे। उनकी प्राथमिकता विज्ञापन, सब्सक्रिप्शन आधारित सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) फीचर्स के विस्तार पर होगी। वह मौजूदा प्रमुख विल कैथकार्ट की जगह लेंगे, जिन्होंने पिछले सात वर्षों में WhatsApp के यूजर बेस को दोगुने से भी अधिक बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी। कुणाल शाह का मानना है कि WhatsApp ने अब तक शानदार सफर तय किया है, लेकिन इसकी वास्तविक क्षमता अभी पूरी तरह सामने नहीं आई है। कितनी है कुणाल शाह की नेटवर्थ? विभिन्न रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2026 में कुणाल शाह की अनुमानित कुल संपत्ति करीब 15,000 करोड़ रुपये है। उनकी संपत्ति के प्रमुख स्रोत हैं: CRED में हिस्सेदारी FreeCharge की बिक्री से मिली पूंजी 200 से अधिक स्टार्टअप्स में एंजेल निवेश विभिन्न टेक कंपनियों में निवेश दिलचस्प बात यह है कि कुणाल शाह लंबे समय तक CRED से बेहद कम प्रतीकात्मक वेतन लेने के कारण भी चर्चा में रहे हैं। WhatsApp में उनकी नई भूमिका भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
Send WhatsApp Message Without Showing Online: WhatsApp अपने यूजर्स के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए लगातार नए फीचर्स पर काम कर रहा है। अब कंपनी एक ऐसा खास विजेट लाने की तैयारी कर रही है, जिसकी मदद से यूजर्स ऐप खोले बिना ही सीधे फोन की होम स्क्रीन से ऑडियो मैसेज भेज सकेंगे। इससे दूसरे लोगों को यह भी पता नहीं चलेगा कि आप WhatsApp पर ऑनलाइन थे या नहीं। WhatsApp ला रहा है नया ऑडियो मैसेज विजेट लोकप्रिय फीचर ट्रैकर WABetaInfo की रिपोर्ट के मुताबिक, WhatsApp एंड्रॉयड यूजर्स के लिए एक नया वॉइस मैसेज विजेट टेस्ट कर रहा है। यह फीचर फिलहाल एंड्रॉयड बीटा वर्जन 2.26.24.2 में देखा गया है। इस विजेट की मदद से यूजर्स सीधे होम स्क्रीन से ऑडियो मैसेज रिकॉर्ड कर अपने कॉन्टैक्ट्स को भेज सकेंगे। इसके लिए WhatsApp ऐप खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्या होता है विजेट? विजेट किसी ऐप का छोटा शॉर्टकट होता है, जिसे फोन की होम स्क्रीन पर लगाया जा सकता है। इसके जरिए ऐप खोले बिना ही कुछ खास काम किए जा सकते हैं। WhatsApp का नया ऑडियो विजेट भी इसी तरह काम करेगा और यूजर्स को तेजी से वॉइस मैसेज भेजने की सुविधा देगा। कैसे काम करेगा नया फीचर? होम स्क्रीन पर WhatsApp ऑडियो विजेट सेट करना होगा। विजेट में दिए गए "Tap to Record" विकल्प पर टैप करना होगा। ऑडियो रिकॉर्ड करने के बाद उस कॉन्टैक्ट को चुनना होगा, जिसे मैसेज भेजना है। पूरा काम WhatsApp ऐप खोले बिना ही हो जाएगा। अन्य कॉन्टैक्ट्स को यह पता नहीं चलेगा कि आप ऑनलाइन थे या नहीं। एक साथ कई लोगों को भी ऑडियो मैसेज भेजने की सुविधा मिल सकती है। विजेट का डिजाइन कैसा होगा? रिपोर्ट के अनुसार, इस विजेट का डिफॉल्ट साइज 3×1 होगा। हालांकि यूजर्स अपनी जरूरत के अनुसार इसका आकार छोटा या बड़ा भी कर सकेंगे। इसका इंटरफेस काफी सरल रखा गया है ताकि कोई भी आसानी से इसका इस्तेमाल कर सके। अभी बिना WhatsApp खोले ऐसे पढ़ें मैसेज हालांकि ऑडियो मैसेज वाला नया फीचर अभी टेस्टिंग स्टेज में है, लेकिन एंड्रॉयड यूजर्स फिलहाल WhatsApp मैसेज विजेट का इस्तेमाल करके बिना ऐप खोले मैसेज पढ़ सकते हैं। ऐसे करें सेटअप: फोन की होम स्क्रीन पर खाली जगह को कुछ सेकंड दबाकर रखें। Widgets ऑप्शन पर जाएं। WhatsApp के विजेट्स में जाकर 4×2 साइज का विजेट चुनें। इसे होम स्क्रीन पर सेट कर लें। जरूरत के अनुसार इसका आकार छोटा या बड़ा कर सकते हैं। इसके बाद आने वाले WhatsApp मैसेज सीधे होम स्क्रीन पर दिखाई देंगे। इस तरह आप बिना WhatsApp खोले और बिना ऑनलाइन दिखे मैसेज पढ़ सकते हैं। कब मिलेगा नया फीचर? फिलहाल यह फीचर बीटा टेस्टिंग में है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में इसे सभी एंड्रॉयड यूजर्स के लिए जारी किया जा सकता है। इसके बाद WhatsApp का इस्तेमाल पहले से ज्यादा आसान और प्राइवेट हो जाएगा।
रांची। आजकल के डिजिटल ज़माने में WhatsApp सिर्फ chatting app नहीं, बल्कि personal chats, photos, documents और banking OTP तक का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में अगर आपका WhatsApp account hack हो जाए, तो privacy और security दोनों खतरे में पड़ सकती हैं। सवाल यह है कि WhatsApp hack हुआ है या नहीं, इसका पता कैसे लगाएं? आइए आसान भाषा में इसे समझते हैं। WhatsApp Account Hack होने के क्या संकेत हैं? 1. Unknown Devices Logged In दिखना अगर WhatsApp Web या linked devices में कोई अनजान device दिखाई दे, तो यह एक warning sign हो सकता है। 2. OTP Message बिना वजह आना अगर बार-बार आपको verification code या OTP message आ रहे हैं, तो इससे यह पता चलता है कि कोई आपका account access करने की कोशिश कर रहा है। 3. Messages अपने आप Read या Send होना अगर आपने message नहीं भेजा लेकिन chat में activity दिख रही है, तो account compromise हो सकता है। 4. अचानक Logout हो जाना WhatsApp अगर बार-बार logout हो रहा है या re-login मांग रहा है, तो सावधानी बरतने की जरूरत है। 5. Unknown Status या Profile Changes Profile photo, about section या status अपने आप बदलना suspicious activity का एक संकेत हो सकता है। WhatsApp Account Hack हुआ है तो क्या करें? तुरंत सभी linked devices logout करें Two-step verification ON करें WhatsApp PIN सेट करें Password और email security check करें Suspicious apps uninstall करें Account access वापस पाने के लिए re-verify करें Linked Devices कैसे Check करें? WhatsApp खोलें → Settings → Linked Devices → Unknown devices remove करें। Two-Step Verification क्यों जरूरी है? यह extra security layer जोड़ता है, जिससे सिर्फ OTP मिलने से account access करना मुश्किल हो जाता है। WhatsApp Account को Hack होने से कैसे बचायें ? OTP किसी अंजान व्यक्ति से share न करें Unknown links पर click न करें Fake APK files install न करें Public Wi-Fi पर login करने से बचे App को regularly update करें
Meta Platforms ने WhatsApp यूजर्स के लिए एक नया प्राइवेसी फीचर पेश किया है, जिसका नाम Incognito Chat रखा गया है। इस फीचर का उद्देश्य यूजर्स को Meta AI के साथ ज्यादा सुरक्षित और निजी बातचीत का अनुभव देना है। कंपनी के CEO Mark Zuckerberg ने हाल ही में इस फीचर की घोषणा की। Meta का दावा है कि यह नया मोड AI चैट्स को पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित बनाएगा और बातचीत खत्म होते ही मैसेज अपने आप गायब हो जाएंगे। चैट खत्म होते ही डिलीट हो जाएंगे मैसेज Meta के अनुसार, Incognito Chat में की गई बातचीत सामान्य क्लाउड सर्वर पर प्रोसेस नहीं होगी। इसके बजाय, इसे एक सिक्योर और एन्क्रिप्टेड सिस्टम के जरिए संभाला जाएगा। कंपनी का कहना है कि न तो Meta और न ही कोई बाहरी व्यक्ति इन चैट्स को पढ़ सकेगा। सबसे अहम बात यह है कि AI से हुई बातचीत सेशन खत्म होते ही अपने आप डिलीट हो जाएगी और सर्वर पर स्टोर नहीं होगी। यह फीचर उन यूजर्स के लिए खास माना जा रहा है जो AI चैट्स के दौरान अपनी निजी जानकारी को लेकर चिंतित रहते हैं। क्या है Private Processing टेक्नोलॉजी? Meta ने बताया कि Incognito Chat फीचर उसकी Private Processing टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इस तकनीक को पिछले साल WhatsApp के AI फीचर्स के साथ पेश किया गया था। इस सिस्टम में यूजर्स की रिक्वेस्ट सामान्य सर्वर पर प्रोसेस होने के बजाय Trusted Execution Environments (TEE) नाम के एन्क्रिप्टेड और आइसोलेटेड सिस्टम में प्रोसेस होती है। इसका फायदा यह है कि किसी भी थर्ड पार्टी को यूजर डेटा तक पहुंच नहीं मिल पाती और चैट की गोपनीयता बनी रहती है। Meta का दावा है कि यह फीचर दूसरे AI प्लेटफॉर्म्स से अलग है, क्योंकि कई AI सेवाएं यूजर्स की बातचीत को लंबे समय तक स्टोर करके रखती हैं। किन यूजर्स को मिलेगा यह फीचर? कंपनी के मुताबिक, Incognito Chat फीचर को फिलहाल धीरे-धीरे Android और iOS यूजर्स के लिए रोलआउट किया जा रहा है। इस फीचर का इस्तेमाल करने के लिए यूजर्स को अपना WhatsApp ऐप लेटेस्ट वर्जन में अपडेट करना होगा। हालांकि शुरुआती चरण में यह सुविधा केवल चुनिंदा अकाउंट्स पर उपलब्ध होगी। Meta ने यह भी कहा है कि फीचर की उपलब्धता यूजर के क्षेत्र और अकाउंट टाइप के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। जिन यूजर्स को यह अपडेट मिलेगा, उन्हें Meta AI के साथ प्राइवेट बातचीत के लिए अलग विकल्प दिखाई देगा। सुरक्षा को लेकर Meta का दावा Meta का कहना है कि उसकी Private Processing टेक्नोलॉजी की जांच कई स्वतंत्र साइबर सिक्योरिटी कंपनियों ने की है। इनमें NCC Group और Trail of Bits जैसी कंपनियां शामिल हैं। कंपनी के मुताबिक, इन सुरक्षा परीक्षणों में यह पाया गया कि सिस्टम यूजर्स की प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा के लिए मजबूत सिक्योरिटी मानकों का पालन करता है।
नई दिल्ली/एजेंसियां: मैसेजिंग की दुनिया में वॉट्सऐप का एक ऐसा फीचर है जिसे अक्सर लोग नया मान लेते हैं, जबकि यह काफी समय से प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। 'कंपैनियन मोड' नामक यह टूल यूजर्स को यह आजादी देता है कि वे अपने प्राथमिक स्मार्टफोन के अलावा एक अन्य मोबाइल फोन पर भी उसी नंबर से वॉट्सऐप अकाउंट सक्रिय कर सकें। यह उन लोगों के लिए एक सटीक समाधान है जो निजी और दफ्तर के काम के लिए अलग-अलग हैंडसेट इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अपनी चैट को हर जगह एक समान (सिंक्रोनाइज) रखना चाहते हैं। मल्टी-डिवाइस सपोर्ट की ताकत वॉट्सऐप का यह फीचर मूल रूप से इसके 'मल्टी-डिवाइस सपोर्ट' का विस्तार है। इसके माध्यम से उपयोगकर्ता मुख्य फोन के अतिरिक्त 4 अन्य डिवाइस को अपने खाते से जोड़ सकता है। इस तकनीकी व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि एक बार लिंक हो जाने के बाद, सेकेंडरी डिवाइस को काम करने के लिए मुख्य फोन के इंटरनेट से जुड़े रहने की अनिवार्यता नहीं होती। यदि आपका प्राइमरी फोन बंद भी है, तो भी आप दूसरे फोन से संदेश भेज और प्राप्त कर सकते हैं। स्टेप-बाय-स्टेप: दूसरे फोन पर कैसे करें सेटअप? इस छिपे हुए फीचर को एक्टिवेट करने की प्रक्रिया बेहद सरल है, बस आपको क्यूआर कोड (QR Code) का सही इस्तेमाल करना होगा: ऐप इंस्टॉलेशन: सबसे पहले अपने दूसरे फोन पर वॉट्सऐप का लेटेस्ट वर्जन इंस्टॉल करें। लिंक डिवाइस का चुनाव: ऐप ओपन करने पर जब मोबाइल नंबर मांगा जाए, तो वहां नंबर डालने के बजाय ऊपर दाईं ओर दिख रहे 'थ्री-डॉट्स' पर क्लिक करें। यहाँ आपको 'Link as Companion Device' का विकल्प मिलेगा। QR कोड स्कैनिंग: अब स्क्रीन पर एक क्यूआर कोड दिखाई देगा। इसके बाद अपने मुख्य (प्राइमरी) फोन के वॉट्सऐप में जाएं, सेटिंग्स में जाकर 'Linked Devices' चुनें और दूसरे फोन के कोड को स्कैन करें। चैट सिंकिंग: स्कैनिंग पूरी होते ही आपकी सभी पुरानी चैट्स दूसरे फोन पर लोड हो जाएंगी और आप उसे स्वतंत्र रूप से उपयोग कर पाएंगे। सुरक्षा और गोपनीयता के मानक चूंकि वॉट्सऐप अपनी सुरक्षा के लिए जाना जाता है, इसलिए कंपैनियन मोड में भी 'एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन' पूरी तरह सक्रिय रहता है। इसका अर्थ यह है कि आपकी बातचीत दोनों फोन पर पूरी तरह सुरक्षित और निजी रहती है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षा के लिहाज से यूजर्स को समय-समय पर अपने 'लिंक्ड डिवाइसेज' की सूची चेक करते रहना चाहिए ताकि कोई अनधिकृत एक्सेस न हो सके। यह फीचर उन प्रोफेशनल्स के लिए गेम-चेंजर है जो एक ही समय में लैपटॉप, टैबलेट और दो अलग-अलग फोन पर सक्रिय रहना चाहते हैं। हालांकि यह फीचर पुराना है, लेकिन इसकी उपयोगिता आज भी पहले जैसी ही बनी हुई है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।