बिहार

बिहार में शराब तस्करी का नया तरीका, दुल्हनों की आड़ में चल रहा था खेल

abhishek singh जून 18, 2026 0
Liquor smuggling
Bihar Liquor smuggling

मुजफ्फरपुर, एजेंसियां।  बिहार में शराबबंदी कानून के बावजूद तस्कर नए-नए तरीकों से अवैध कारोबार को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं। इसी कड़ी में मुजफ्फरपुर उत्पाद विभाग ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने पुलिस की नजरों से बचने के लिए दुल्हनों की आड़ में शराब तस्करी का तरीका अपनाया था। इस मामले में हरियाणा के दो नवविवाहित जोड़ों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

 

लग्जरी कार में छिपाकर लाई जा रही थी शराब


गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हरियाणा के रोहतक निवासी सोनू, अजीत, राखी और दीपक के रूप में हुई है। ये सभी लग्जरी कार में भारी मात्रा में विदेशी शराब की खेप लेकर बिहार पहुंचे थे। तस्करों ने सोच रखा था कि शादीशुदा जोड़ों के साथ सफर करने पर किसी को उन पर शक नहीं होगा, लेकिन उनकी यह चालाकी काम नहीं आई।

 

नाकेबंदी में पकड़ा गया गिरोह


उत्पाद विभाग को लंबे समय से इस गिरोह की गतिविधियों की सूचना मिल रही थी। सूचना के आधार पर टीम ने रेवा पुल के पास छपरा बॉर्डर से गुजर रही संदिग्ध कार को रोका। तलाशी के दौरान वाहन से करीब 5 लाख रुपये मूल्य की विदेशी शराब बरामद की गई। इसके बाद चारों आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया।

 

पूछताछ में हुआ बड़े नेटवर्क का खुलासा


पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे इससे पहले भी इसी तरीके से शराब की तस्करी कर चुके हैं। उत्पाद विभाग का कहना है कि इस गिरफ्तारी से अंतरराज्यीय शराब तस्करी नेटवर्क के बड़े खुलासे की संभावना है। पुलिस अब उन स्थानीय सप्लायरों और मददगारों की तलाश में जुट गई है, जो इस पूरे नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।

 

जांच में जुटा प्रशासन, बॉर्डर पर बढ़ाई गई निगरानी


गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। उत्पाद विभाग ने बॉर्डर इलाकों में निगरानी और सख्त कर दी है। संदिग्ध वाहनों की जांच तेज कर दी गई है ताकि शराब तस्करी के इस नए और चालाक तरीके पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

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Danapur - Patna
दानापुर-पटना के बीच तीसरी-चौथी रेल लाइन का काम तेज, 22 नई ट्रेनों के संचालन का रास्ता होगा साफ

पटना, एजेंसियां। बिहार में रेल यातायात को बेहतर बनाने के लिए दानापुर-फतुहा रेलखंड पर मल्टीट्रैकिंग परियोजना को गति दी जा रही है। करीब ₹976 करोड़ की इस परियोजना के तहत दानापुर और पटना के बीच तीसरी-चौथी रेल लाइन समेत महत्वपूर्ण हिस्सों में अतिरिक्त ट्रैक विकसित किए जाएंगे। रेलवे के अनुसार, इससे व्यस्त रेल कॉरिडोर पर ट्रेनों के संचालन की क्षमता बढ़ेगी और नई ट्रेनों के परिचालन का रास्ता खुलेगा।   29 किलोमीटर रेलखंड पर बढ़ेगी क्षमता   परियोजना के तहत दानापुर से फतुहा के बीच करीब 29 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर मल्टीट्रैकिंग का काम किया जाना है। यह पटना क्षेत्र के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल है, जहां मौजूदा ट्रैक पर यात्री और मालगाड़ियों का दबाव रहता है। अतिरिक्त लाइन बनने से ट्रेनों को एक-दूसरे के पीछे चलाने की मजबूरी कम होगी और परिचालन को अधिक सुचारु बनाने में मदद मिलेगी।   22 नई ट्रेनों के संचालन की योजना   रेलवे की योजना इस अतिरिक्त क्षमता का इस्तेमाल कर 22 नई ट्रेनों के संचालन की है। नई ट्रेनों के चलने से पटना और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को आवागमन के अधिक विकल्प मिलने की उम्मीद है। नई लाइनें तैयार होने के बाद मौजूदा ट्रेनों की समयपालन क्षमता में भी सुधार होने की संभावना है।   दानापुर-पटना के साथ दूसरे हिस्सों को भी फायदा   यह परियोजना केवल दानापुर-पटना हिस्से तक सीमित नहीं है। दानापुर-फतुहा मल्टीट्रैकिंग योजना को व्यापक रेल क्षमता विस्तार से जोड़ा गया है। इसके साथ पटना क्षेत्र में अन्य रेल खंडों पर भी अतिरिक्त ट्रैक विकसित करने की योजना है। वहीं, व्यापक डीडीयू-झाझा तीसरी-चौथी लाइन परियोजना के तहत लगभग 198.05 किलोमीटर के दानापुर-डीडीयू हिस्से को भी विशेष रेलवे परियोजना के रूप में अधिसूचित किया जा चुका है।   पटना रेल कॉरिडोर पर घटेगा ट्रेनों का दबाव   अतिरिक्त रेल लाइनें बनने से पटना के आसपास के व्यस्त रेल कॉरिडोर में परिचालन क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। इससे यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों के संचालन को भी बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जा सकेगा।   परियोजना पूरी होने के बाद पटना, दानापुर, फतुहा और आसपास के रेल यात्रियों को इसका सीधा लाभ मिलने की संभावना है। रेलवे की कोशिश है कि बढ़ती यात्री संख्या और भविष्य की ट्रेनों की जरूरत के अनुरूप रेल नेटवर्क की क्षमता पहले से तैयार की जाए।

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पटना में गोबर को लेकर खूनी विवाद, बुजुर्ग की पीट-पीटकर हत्या; 7 लोग घायल

पटना, एजेंसियां। बिहार की राजधानी पटना में गोबर को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। घटना में एक बुजुर्ग व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, जबकि दोनों पक्षों के करीब 7 लोग घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।   गोबर को लेकर शुरू हुआ विवाद   बताया जा रहा है कि विवाद गोबर रखने और उसके इस्तेमाल को लेकर शुरू हुआ था। स्थानीय स्तर पर कहासुनी के बाद दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और लाठी-डंडों से मारपीट शुरू हो गई।   बुजुर्ग की पीट-पीटकर हत्या   मारपीट के दौरान एक बुजुर्ग व्यक्ति को गंभीर चोटें आईं। परिजन उन्हें इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।   7 लोग घायल, अस्पताल में इलाज   हिंसक झड़प में करीब 7 लोग घायल हुए हैं। घायलों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कुछ लोगों की हालत गंभीर होने की भी जानकारी सामने आई है। पुलिस घटनास्थल और अस्पताल में मौजूद लोगों से पूछताछ कर रही है।   पुलिस ने शुरू की कार्रवाई   घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। इलाके में किसी तरह का तनाव दोबारा न बढ़े, इसके लिए पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है।   गांव में तनाव, पुलिस की निगरानी बढ़ी   हत्या की घटना के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। किसी भी तरह की अफवाह या विवाद को बढ़ावा देने वाली गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।

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बिहार में मुखिया को मिलेंगे नए अधिकार, पंचायत के विकास कार्यों में बढ़ेगी भूमिका

पटना, एजेंसियां। बिहार में पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों को लेकर सरकार ने बड़ा बदलाव करने का आश्वासन दिया है। मुखिया और वार्ड सदस्यों को नई नियमावली के तहत अधिक अधिकार देने की बात कही गई है। सरकार के अनुसार, नए वित्तीय वर्ष से लागू होने वाली व्यवस्था में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका और शक्तियों को बढ़ाने पर विचार किया गया है।   मुखिया की शक्तियां बढ़ाने का आश्वासन   बिहार विधान परिषद में पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों का मुद्दा उठाया गया था। चर्चा के दौरान कहा गया कि मुखिया के पास वित्तीय अधिकार होने के बावजूद कई विकास कार्यों को सीधे कराने की पर्याप्त शक्ति नहीं है। यहां तक कि पंचायतों में सोलर लाइट लगाने जैसे कामों के लिए भी उन्हें दूसरे स्तर से निर्भर रहना पड़ता है। सरकार की ओर से कहा गया कि नई नियमावली में इन समस्याओं को दूर करने और मुखिया तथा वार्ड सदस्यों को अधिक अधिकार देने पर काम किया जाएगा।   वार्ड सदस्यों को भी मिलेंगे अधिकार   सिर्फ मुखिया ही नहीं, वार्ड सदस्यों की शक्तियां बढ़ाने की मांग भी सामने आई है। विधान परिषद में सदस्यों ने कहा कि वार्ड सदस्य जनता द्वारा चुने जाने के बावजूद उनके पास विकास कार्यों के लिए पर्याप्त वित्तीय अधिकार या अनुशंसा की शक्ति नहीं है। सरकार ने इस मांग पर भी सकारात्मक रुख दिखाते हुए नई व्यवस्था में आवश्यक बदलाव करने का आश्वासन दिया है।   ग्राम सभा के प्रस्ताव से होंगे विकास कार्य   पंचायती राज मंत्री ने स्पष्ट किया कि ग्राम सभा में आने वाले प्रस्तावों पर पंचायत स्तर पर कार्य किया जाता है और ग्राम पंचायत की बैठक में निर्णय बहुमत के आधार पर लिए जाते हैं। उन्होंने वार्ड सदस्यों से भी ग्राम सभा और पंचायत बैठकों में नियमित रूप से भाग लेने की अपील की। सरकार का कहना है कि पंचायत प्रतिनिधियों को अधिकार देने के साथ उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ेगी और विकास कार्यों में उनकी भागीदारी मजबूत होगी।   नई नियमावली में बदलाव पर नजर   सरकार ने नई नियमावली के जरिए मुखिया और वार्ड सदस्यों को अधिकार देने का आश्वासन दिया है। हालांकि किस अधिकार की सीमा कितनी होगी और कौन-कौन से काम सीधे पंचायत प्रतिनिधियों के स्तर से किए जा सकेंगे, इसकी विस्तृत जानकारी नियमावली के अंतिम स्वरूप से स्पष्ट होगी। इस बदलाव से पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं को लागू करने में तेजी आने और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका मजबूत होने की उम्मीद है।

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