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Study AI in Canada: Top Universities & Careers

Canada में AI की पढ़ाई: टॉप यूनिवर्सिटी, शानदार करियर और हाई डिमांड - जानिए कहां लें एडमिशन

surbhi अप्रैल 11, 2026 0
Students studying artificial intelligence at a Canadian university with modern campus and technology labs.
Study Artificial Intelligence in Canada

आज के दौर में Artificial Intelligence (AI) सबसे तेजी से बढ़ते करियर विकल्पों में से एक बन चुका है। खासकर Canada में AI प्रोफेशनल्स की भारी मांग है, जहां कंपनियां स्किल्ड उम्मीदवारों को आकर्षक सैलरी और बेहतरीन करियर अवसर दे रही हैं।

लेबर मार्केट रिपोर्ट्स के अनुसार, आने वाले वर्षों में हेल्थकेयर, फाइनेंस और टेक सेक्टर में AI विशेषज्ञों की हजारों नौकरियों की जरूरत होगी। ऐसे में भारतीय छात्रों के लिए कनाडा में AI की पढ़ाई करना एक शानदार अवसर साबित हो सकता है।

QS Ranking के अनुसार कनाडा की टॉप AI यूनिवर्सिटीज

QS World University Rankings 2026 के अनुसार, कनाडा में कई यूनिवर्सिटीज AI एजुकेशन के लिए दुनिया की टॉप संस्थानों में शामिल हैं:

  • University of Toronto (टॉप-20 में शामिल)
  • University of British Columbia
  • University of Waterloo
  • McGill University
  • Université de Montréal
  • Simon Fraser University
  • University of Alberta

ये सभी संस्थान वैश्विक टॉप-100 में शामिल हैं और AI रिसर्च व इनोवेशन के लिए जाने जाते हैं।

क्यों है Canada AI स्टडी के लिए बेस्ट?

  • AI और Machine Learning में मजबूत रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर
  • ग्लोबल टेक कंपनियों की मौजूदगी
  • पढ़ाई के बाद वर्क परमिट और जॉब के अवसर
  • इंडस्ट्री-ओरिएंटेड कोर्स और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग

AI में कौन-कौन से करियर ऑप्शन?

AI की पढ़ाई करने के बाद आप इन हाई-डिमांड रोल्स में करियर बना सकते हैं:

  • Machine Learning Engineer
  • Data Scientist
  • AI Ethics & Policy Consultant
  • Robotics Specialist
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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आज के दौर में Artificial Intelligence (AI) सबसे तेजी से बढ़ते करियर विकल्पों में से एक बन चुका है। खासकर Canada में AI प्रोफेशनल्स की भारी मांग है, जहां कंपनियां स्किल्ड उम्मीदवारों को आकर्षक सैलरी और बेहतरीन करियर अवसर दे रही हैं। लेबर मार्केट रिपोर्ट्स के अनुसार, आने वाले वर्षों में हेल्थकेयर, फाइनेंस और टेक सेक्टर में AI विशेषज्ञों की हजारों नौकरियों की जरूरत होगी। ऐसे में भारतीय छात्रों के लिए कनाडा में AI की पढ़ाई करना एक शानदार अवसर साबित हो सकता है। QS Ranking के अनुसार कनाडा की टॉप AI यूनिवर्सिटीज QS World University Rankings 2026 के अनुसार, कनाडा में कई यूनिवर्सिटीज AI एजुकेशन के लिए दुनिया की टॉप संस्थानों में शामिल हैं: University of Toronto (टॉप-20 में शामिल) University of British Columbia University of Waterloo McGill University Université de Montréal Simon Fraser University University of Alberta ये सभी संस्थान वैश्विक टॉप-100 में शामिल हैं और AI रिसर्च व इनोवेशन के लिए जाने जाते हैं। क्यों है Canada AI स्टडी के लिए बेस्ट? AI और Machine Learning में मजबूत रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर ग्लोबल टेक कंपनियों की मौजूदगी पढ़ाई के बाद वर्क परमिट और जॉब के अवसर इंडस्ट्री-ओरिएंटेड कोर्स और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग AI में कौन-कौन से करियर ऑप्शन? AI की पढ़ाई करने के बाद आप इन हाई-डिमांड रोल्स में करियर बना सकते हैं: Machine Learning Engineer Data Scientist AI Ethics & Policy Consultant Robotics Specialist

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केमिकल और फार्मा में करियर का सपना? जानें ICT मुंबई एडमिशन, कटऑफ और प्लेसमेंट की पूरी डिटेल

अगर आप केमिकल, टेक्नोलॉजी या फार्मा सेक्टर में करियर बनाने की योजना बना रहे हैं, तो Institute of Chemical Technology Mumbai (ICT मुंबई) आपके लिए एक शानदार विकल्प हो सकता है। देश के शीर्ष संस्थानों में शामिल यह संस्थान अपने मजबूत अकादमिक ढांचे, इंडस्ट्री कनेक्शन और शानदार प्लेसमेंट के लिए जाना जाता है। पहले University Department of Chemical Technology के नाम से जाना जाने वाला ICT मुंबई, आज केमिकल और फार्मा एजुकेशन में एक प्रतिष्ठित नाम बन चुका है। National Institutional Ranking Framework 2025 रैंकिंग में इसे फार्मेसी कैटेगरी में 6वां स्थान मिला है। कोर्सेस की पूरी जानकारी ICT मुंबई में कई प्रोफेशनल और रिसर्च आधारित कोर्स उपलब्ध हैं: BTech (Chemical Engineering, Food Technology, Polymer Engineering) BPharma MTech MPharma PhD प्रोग्राम योग्यता (Eligibility Criteria) 12वीं पास (Physics, Chemistry, Maths या Biology के साथ) न्यूनतम 50–60% अंक एंट्रेंस एग्जाम में अच्छा स्कोर एडमिशन प्रोसेस ICT मुंबई में एडमिशन एंट्रेंस एग्जाम के आधार पर होता है: BTech और BPharma के लिए JEE Main जरूरी महाराष्ट्र के छात्रों के लिए MHT CET के जरिए 70% सीटें भरी जाती हैं MTech के लिए GATE स्कोर मान्य फार्मा कोर्स के लिए GPAT आवश्यक MHT CET अनुमानित कटऑफ (जनरल कैटेगरी) ICT मुंबई में एडमिशन के लिए बहुत हाई कटऑफ जाती है: Pharmaceuticals Chemistry & Technology: 99.73 – 99.65 Food Engineering: 99.53 – 99.29 Chemical Engineering: 99.47 – 99.39 Polymer & Surface Engineering: 99.02 – 98.56 Oleo Chemicals & Surfactants: 98.58 – 98.49 Surface Coating Technology: 98.27 – 97.77 Dyestuff & Intermediates: 98.37 – 97.55 Fibers & Textiles Processing: 96.94 – 96.96 यह कटऑफ दिखाती है कि यहां एडमिशन पाना काफी प्रतिस्पर्धी है। प्लेसमेंट और करियर अवसर ICT मुंबई का प्लेसमेंट रिकॉर्ड बेहद मजबूत है, खासकर केमिकल और फार्मा ब्रांच में। यहां कई बड़ी कंपनियां कैंपस प्लेसमेंट के लिए आती हैं: Reliance Industries BASF Indian Oil Corporation BPCL Cipla Sun Pharma Hindustan Unilever इसके अलावा, छात्रों के लिए इंडस्ट्री वर्कशॉप, ट्रेनिंग और प्रैक्टिकल एक्सपोजर भी दिया जाता है, जिससे उनकी जॉब रेडीनेस बेहतर होती है।  

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CBSE Maths Syllabus 2026: बढ़ेगा कॉन्सेप्ट या बढ़ेगा प्रेशर?

CBSE ने क्लास 9वीं के मैथ्स सिलेबस में बड़ा बदलाव किया है। 2026-27 सत्र से अब 12 की जगह 15 चैप्टर पढ़ाए जाएंगे, और 2027 की परीक्षा इसी नए पैटर्न पर होगी। क्या बदला है सिलेबस में? नए सिलेबस में कई अहम टॉपिक्स जोड़े गए हैं: नंबर सिस्टम सिक्वेंसेस और प्रोग्रेशन अरिथमेटिक आइडेंटिटीज यूक्लिड ज्योमेट्री एक्सिओम और पोस्टुलेट ट्राएंगल कांग्रुएंस थ्योरम क्वाड्रिलेटरल और मेंसुरेशन कुल मिलाकर अब स्टूडेंट्स को ज्यादा गहराई और विविधता के साथ मैथ्स पढ़ना होगा। बदलाव का मकसद क्या है? यह बदलाव NEP 2020 (नई शिक्षा नीति) के तहत किया गया है, जिसमें फोकस है: रटने की बजाय समझने पर जोर लॉजिकल और क्रिटिकल थिंकिंग बढ़ाना प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स को मजबूत करना मैथ्स को रियल लाइफ से जोड़ना भारतीय गणितज्ञ भी सिलेबस में अब स्टूडेंट्स पढ़ेंगे: आर्यभट्ट ब्रह्मगुप्त बौधायन इससे छात्रों को गणित में भारत के योगदान और इतिहास की जानकारी मिलेगी। एग्जाम और मार्किंग में बदलाव 80 मार्क्स: लिखित परीक्षा 20 मार्क्स: इंटरनल असेसमेंट 10 मार्क्स: पेन-पेपर टेस्ट 10 मार्क्स: प्रोजेक्ट, पोर्टफोलियो, लैब एक्टिविटी फायदा या दबाव? फायदे: कॉन्सेप्ट क्लियर होंगे रियल लाइफ एप्लिकेशन समझ आएगा प्रतियोगी परीक्षाओं में मदद चुनौतियां: सिलेबस बढ़ने से स्टडी लोड बढ़ सकता है कमजोर बेस वाले छात्रों को ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी

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