शिक्षा

NEET UG 2026 काउंसलिंग का शेड्यूल जारी, 5 अगस्त से शुरू होगा रजिस्ट्रेशन

abhishek singh अगस्त 2, 2026 0
NEET UG 2026 Counselling
NEET UG 2026 Counselling starts from 5th August

नई दिल्ली, एजेंसियां। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने NEET UG 2026 काउंसलिंग का आधिकारिक कार्यक्रम जारी कर दिया है। इसके तहत MBBS, BDS और BSc नर्सिंग में दाखिले के लिए राउंड-1 का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 5 अगस्त 2026 से शुरू होगा। काउंसलिंग 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा (AIQ) समेत MCC के दायरे में आने वाली सीटों के लिए आयोजित की जाएगी।

 

5 अगस्त से शुरू होगा रजिस्ट्रेशन

 

NEET UG 2026 में सफल उम्मीदवार 5 अगस्त से MCC की ऑनलाइन काउंसलिंग प्रक्रिया में रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। राउंड-1 के लिए रजिस्ट्रेशन और शुल्क भुगतान की अंतिम समय सीमा 12 अगस्त दोपहर 3 बजे तक निर्धारित की गई है। सीट मैट्रिक्स से जुड़ी जानकारी 4 अगस्त को जारी की जाएगी। इसके बाद उम्मीदवार उपलब्ध सीटों के अनुसार अपनी पसंद के कॉलेज और पाठ्यक्रम चुन सकेंगे।

 

MBBS, BDS और BSc नर्सिंग में मिलेगा दाखिला

 

MCC की काउंसलिंग के माध्यम से योग्य उम्मीदवारों को MBBS, BDS और BSc नर्सिंग पाठ्यक्रमों में दाखिले का अवसर मिलेगा। सीट आवंटन उम्मीदवार की NEET रैंक, पसंद, श्रेणी और उपलब्ध सीटों के आधार पर किया जाएगा। उम्मीदवारों को रजिस्ट्रेशन के बाद कॉलेज और पाठ्यक्रम की पसंद सावधानी से भरनी होगी। निर्धारित समय सीमा के भीतर विकल्प लॉक करना भी जरूरी होगा।

 

राज्य कोटे की काउंसलिंग अलग से होगी

 

MCC की काउंसलिंग में मुख्य रूप से 15 प्रतिशत AIQ सीटों और MCC के अंतर्गत आने वाली अन्य सीटों को शामिल किया जाता है। वहीं राज्य कोटे की सीटों पर दाखिले के लिए उम्मीदवारों को संबंधित राज्य की काउंसलिंग अथॉरिटी के पोर्टल पर अलग से आवेदन करना होगा। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे रजिस्ट्रेशन से पहले MCC की ओर से जारी सूचना और पात्रता नियमों को ध्यान से पढ़ें तथा जरूरी दस्तावेज तैयार रखें।

 

आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होगा पूरा कार्यक्रम

 

NEET UG 2026 काउंसलिंग से संबंधित रजिस्ट्रेशन, सीट मैट्रिक्स, चॉइस फिलिंग और सीट अलॉटमेंट की जानकारी MCC की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध होगी। उम्मीदवारों को अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना समय पर रजिस्ट्रेशन पूरा करने की सलाह दी गई है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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IIT जोधपुर ने लॉन्च किया 4 साल का BS प्रोग्राम, JEE के बिना मिलेगा दाखिला

जोधपुर, एजेंसियां। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) जोधपुर ने BS in Management and Technology नाम से नया चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम शुरू किया है। इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि इसमें दाखिले के लिए JEE की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, उम्मीदवारों को संस्थान की प्रवेश प्रक्रिया के तहत क्वालिफायर टेस्ट देना होगा।   मैनेजमेंट और टेक्नोलॉजी की होगी पढ़ाई   यह कार्यक्रम मैनेजमेंट, टेक्नोलॉजी और सामाजिक विज्ञान को एक साथ जोड़कर तैयार किया गया है। चार साल के दौरान छात्रों को अर्थशास्त्र, मार्केटिंग, कंप्यूटिंग, अकाउंटिंग, सांख्यिकी और उद्यमिता जैसे विषयों की पढ़ाई कराई जाएगी। कार्यक्रम में कुल 141 क्रेडिट और 47 पाठ्यक्रम हैं, जिन्हें आठ सेमेस्टर में पूरा करना होगा।   12वीं पास उम्मीदवार कर सकते हैं आवेदन   इस पाठ्यक्रम के लिए किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं या समकक्ष परीक्षा पास होना जरूरी है। उम्मीदवार किसी भी स्ट्रीम से आवेदन कर सकते हैं। सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक, जबकि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक निर्धारित हैं।   JEE की जरूरत नहीं, क्वालिफायर टेस्ट जरूरी   IIT जोधपुर के इस कार्यक्रम में प्रवेश के लिए JEE अनिवार्य नहीं है। उम्मीदवारों को आवेदन के बाद संस्थान की ओर से आयोजित क्वालिफायर टेस्ट की प्रक्रिया से गुजरना होगा। चयनित उम्मीदवारों के लिए काउंसलिंग के बाद प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जाएगी।   चार साल में मिलेगी BS डिग्री   कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से भी पूरा किया जा सकता है। पहले साल के बाद बिजनेस फंडामेंटल्स में प्रमाणपत्र, दूसरे साल के बाद मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा और तीसरे साल के बाद तीन वर्षीय BS डिग्री का विकल्प है। चार साल पूरा करने पर BS in Management and Technology की डिग्री मिलेगी। कार्यक्रम की कुल चार वर्षीय फीस ₹5.60 लाख है, जबकि आवेदन के लिए ₹999 का प्रवेश परीक्षा शुल्क अलग से निर्धारित है।

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कानपुर, एजेंसियां। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर ने Advanced Data Science and Machine Learning for Business Analytics नाम से छह महीने का ऑनलाइन प्रमाणपत्र कार्यक्रम शुरू किया है। यह पाठ्यक्रम खास तौर पर डेटा साइंस, मशीन लर्निंग और एआई आधारित विश्लेषण की जानकारी हासिल करने के इच्छुक विद्यार्थियों और कामकाजी पेशेवरों के लिए तैयार किया गया है। कार्यक्रम की शुरुआत 3 अक्टूबर 2026 से होगी।   छह महीने का ऑनलाइन कार्यक्रम   IIT कानपुर का यह पाठ्यक्रम पूरी तरह ऑनलाइन होगा और इसमें 60 घंटे की पढ़ाई शामिल है। सप्ताहांत में प्रशिक्षक के साथ लाइव कक्षाएं आयोजित की जाएंगी। कार्यक्रम के दौरान डेटा साइंस और मशीन लर्निंग के साथ बिजनेस एनालिटिक्स से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।   डेटा साइंस और मशीन लर्निंग पर फोकस   पाठ्यक्रम में डेटा आधारित निर्णय लेने, मशीन लर्निंग और उन्नत विश्लेषण से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य ऐसे पेशेवर तैयार करना है, जो तकनीकी ज्ञान को कारोबारी रणनीति और वास्तविक समस्याओं के समाधान के साथ जोड़ सकें।   प्रवेश के लिए क्या है योग्यता   IIT कानपुर के अनुसार, आवेदन के लिए किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से स्नातक डिग्री में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक जरूरी हैं। तीन वर्ष या उससे अधिक संबंधित कार्य अनुभव वाले उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम अंक की सीमा 40 प्रतिशत तक हो सकती है। प्रोग्राम में शामिल होने के लिए बुनियादी कंप्यूटर ज्ञान और स्कूली स्तर की गणित को पर्याप्त बताया गया है।   फीस और आवेदन की जानकारी   कार्यक्रम की आवेदन फीस ₹1,000 + 18 प्रतिशत GST है, जबकि कार्यक्रम की फीस ₹85,000 + 18 प्रतिशत GST निर्धारित है। GST सहित कुल कार्यक्रम शुल्क ₹1,00,300 है, जिसे दो किस्तों में जमा किया जा सकता है। प्रवेश के लिए आवेदन 15 सितंबर 2026 तक किए जा सकते हैं और कक्षाएं 3 अक्टूबर से शुरू होंगी।   इस पाठ्यक्रम के जरिए IIT कानपुर ने डेटा साइंस और मशीन लर्निंग जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में कामकाजी पेशेवरों और अन्य योग्य उम्मीदवारों के लिए ऑनलाइन कौशल-विकास का अवसर बढ़ाया है।

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BPSC 70th rank holder Aastha Damele shares her five-year journey, study strategy and success story
BPSC Success Story: "मैं रोज रात को अगले दिन की पढ़ाई का प्लान बनाती थी", जानिए कैसे आस्था दमेले बनीं BPSC अफसर

नई दिल्ली: सफलता अक्सर एक दिन में नहीं मिलती, बल्कि वर्षों की मेहनत, धैर्य और निरंतर प्रयास का परिणाम होती है। इसका ताजा उदाहरण हैं मध्य प्रदेश की आस्था दमेले, जिन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में 23वीं रैंक हासिल कर अफसर बनने का सपना पूरा किया। मध्य प्रदेश के पलेरा तहसील के एक छोटे से गांव से आने वाली आस्था की यह सफलता आसान नहीं थी। करीब पांच वर्षों के संघर्ष, कई असफलताओं और लगातार मेहनत के बाद उन्हें यह मुकाम मिला। हर रात अगले दिन की पढ़ाई का बनाती थीं प्लान आस्था ने बताया कि उनकी तैयारी की सबसे अहम रणनीति थी कि वे हर रात सोने से पहले अगले दिन की पढ़ाई का पूरा शेड्यूल लिखती थीं। इससे सुबह उठते ही उन्हें पता होता था कि दिनभर क्या पढ़ना है और समय का बेहतर उपयोग कैसे करना है। उनका मानना है कि एक स्पष्ट योजना पढ़ाई में अनुशासन बनाए रखने में मदद करती है। मेंटल हेल्थ को भी दिया बराबर महत्व आस्था का कहना है कि सिविल सेवा जैसी लंबी तैयारी में सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही जरूरी है। इसी वजह से वह नियमित रूप से मेडिटेशन करती थीं, जिससे तनाव कम होता था और पढ़ाई पर बेहतर फोकस बना रहता था। BPSC अभ्यर्थियों को दी खास सलाह आस्था के अनुसार, BPSC और अन्य सिविल सेवा परीक्षाओं में प्रीलिम्स केवल क्वालिफाइंग चरण होता है, इसलिए उम्मीदवारों को शुरुआत से ही मेन्स परीक्षा की तैयारी पर अधिक ध्यान देना चाहिए। उन्होंने अभ्यर्थियों को सलाह दी कि: सीमित स्टडी मटेरियल का चयन करें। उसी सामग्री का बार-बार रिवीजन करें। रोजाना उत्तर लेखन (Answer Writing) का अभ्यास करें। लगातार अभ्यास और रिवीजन को प्राथमिकता दें। उनका मानना है कि सफलता का सबसे मजबूत आधार कम स्रोत, ज्यादा रिवीजन और नियमित उत्तर लेखन है। छोटे गांव से शुरू हुआ सफर आस्था का बचपन मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव में बीता, जहां बेहतर शिक्षा की सुविधाएं सीमित थीं। उनकी मां ने शुरुआत से ही यह सुनिश्चित किया कि बेटी की पढ़ाई में कोई कमी न रहे। आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें छतरपुर भेजा गया, जहां उन्होंने 12वीं तक की शिक्षा पूरी की और हमेशा पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। UPSC था पहला सपना आस्था ने वर्ष 2021 में UPSC की तैयारी शुरू की। हालांकि उनका पहला लक्ष्य UPSC था, लेकिन उन्होंने साथ-साथ विभिन्न राज्यों की लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं भी देना जारी रखा। 21 परीक्षाएं दीं, फिर मिली सफलता आस्था की सफलता की सबसे प्रेरणादायक बात यह है कि उन्होंने करीब 21 प्रतियोगी परीक्षाएं दीं, जिनमें केवल 7 से 8 परीक्षाओं में ही सफलता मिली। दो बार UPPSC प्रीलिम्स भी क्लियर नहीं हो पाया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। हर असफलता से सीख लेते हुए तैयारी जारी रखी। आखिरकार BPSC 70वीं परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने 23वीं रैंक हासिल की। जब खुद पर होने लगा था शक लगातार पांच साल तक तैयारी के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब आस्था को अपनी क्षमता पर संदेह होने लगा था। लेकिन परिवार ने उनका मनोबल कभी टूटने नहीं दिया। उनके भाई हमेशा कहते थे, "तुम रोज पढ़ रही हो, यही तुम्हारी असली सफलता है।" वहीं उनके पिता की सीख— "मेहनत करो, फल की चिंता मत करो।" —ने उन्हें हर मुश्किल दौर में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। "परीक्षा जिंदगी का हिस्सा है, पूरी जिंदगी नहीं" आस्था का मानना है कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा को अपनी पूरी जिंदगी नहीं बना लेना चाहिए। उन्होंने अभ्यर्थियों को सलाह दी कि: अपनी मेहनत के छोटे-छोटे पड़ावों का जश्न मनाएं। खुद की तुलना दूसरों से न करें। प्रतियोगी परीक्षाओं से बाहर भी कुछ अच्छे दोस्त रखें। नकारात्मक माहौल और लोगों से दूरी बनाएं। खुद पर विश्वास बनाए रखें। आस्था का संदेश है कि अगर मेहनत ईमानदारी से लगातार की जाए, तो सफलता देर से जरूर मिलती है, लेकिन मिलती जरूर है।  

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