शिक्षा

असम बोर्ड की बाढ़ प्रभावित छात्रों को बड़ी राहत, डुप्लीकेट दस्तावेज़ अब मुफ्त मिलेंगे

abhishek singh जुलाई 31, 2026 0
Assam  Board
Assam Board announces Free Academics Documents

बाढ़ में शैक्षणिक प्रमाणपत्र खोने वाले छात्रों से नहीं लिया जाएगा कोई शुल्क, पुलिस शिकायत की शर्त भी हटाई गई

 

गुवाहाटी, एजेंसियां। असम राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड (ASSEB) ने बाढ़ प्रभावित छात्रों के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है। हाल की बाढ़ में जिन छात्रों के मार्कशीट, पास सर्टिफिकेट और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज़ नष्ट या खो गए हैं, उन्हें अब डुप्लीकेट प्रमाणपत्र पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराए जाएंगे। बोर्ड ने इस विशेष राहत को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है।

 

पुलिस शिकायत की अनिवार्यता भी खत्म

 

बोर्ड ने छात्रों को राहत देते हुए डुप्लीकेट दस्तावेज़ जारी कराने के लिए एफआईआर या पुलिस शिकायत की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी है। छात्र अब बोर्ड के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। यह सुविधा फिलहाल बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित जिलों के विद्यार्थियों के लिए लागू की गई है।

 

इन दस्तावेज़ों पर मिलेगी राहत

 

यह विशेष व्यवस्था हाई स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट , असम हाई मदरसा परीक्षा और हायर सेकेंडरी से जुड़े विभिन्न शैक्षणिक प्रमाणपत्रों पर लागू होगी। बोर्ड का कहना है कि इसका उद्देश्य बाढ़ प्रभावित विद्यार्थियों की पढ़ाई और उच्च शिक्षा में किसी तरह की बाधा न आने देना है।

 

बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित

 

असम में हालिया बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित हुए हैं और कई परिवारों के घरों के साथ महत्वपूर्ण दस्तावेज़ भी नष्ट हो गए हैं। ऐसे में बोर्ड का यह फैसला हजारों विद्यार्थियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Abhishek Singh Abhishek123

शिक्षा

View more
Assam  Board
असम बोर्ड की बाढ़ प्रभावित छात्रों को बड़ी राहत, डुप्लीकेट दस्तावेज़ अब मुफ्त मिलेंगे

बाढ़ में शैक्षणिक प्रमाणपत्र खोने वाले छात्रों से नहीं लिया जाएगा कोई शुल्क, पुलिस शिकायत की शर्त भी हटाई गई   गुवाहाटी, एजेंसियां। असम राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड (ASSEB) ने बाढ़ प्रभावित छात्रों के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है। हाल की बाढ़ में जिन छात्रों के मार्कशीट, पास सर्टिफिकेट और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज़ नष्ट या खो गए हैं, उन्हें अब डुप्लीकेट प्रमाणपत्र पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराए जाएंगे। बोर्ड ने इस विशेष राहत को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है।   पुलिस शिकायत की अनिवार्यता भी खत्म   बोर्ड ने छात्रों को राहत देते हुए डुप्लीकेट दस्तावेज़ जारी कराने के लिए एफआईआर या पुलिस शिकायत की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी है। छात्र अब बोर्ड के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। यह सुविधा फिलहाल बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित जिलों के विद्यार्थियों के लिए लागू की गई है।   इन दस्तावेज़ों पर मिलेगी राहत   यह विशेष व्यवस्था हाई स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट , असम हाई मदरसा परीक्षा और हायर सेकेंडरी से जुड़े विभिन्न शैक्षणिक प्रमाणपत्रों पर लागू होगी। बोर्ड का कहना है कि इसका उद्देश्य बाढ़ प्रभावित विद्यार्थियों की पढ़ाई और उच्च शिक्षा में किसी तरह की बाधा न आने देना है।   बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित   असम में हालिया बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित हुए हैं और कई परिवारों के घरों के साथ महत्वपूर्ण दस्तावेज़ भी नष्ट हो गए हैं। ऐसे में बोर्ड का यह फैसला हजारों विद्यार्थियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

abhishek singh जुलाई 31, 2026 0
IIM Kozhikode

IIM कोझिकोड ने लॉन्च किया नया 'AI & Agentic AI' कोर्स, प्रोफेशनल्स को मिलेगी भविष्य की AI लीडरशिप ट्रेनिंग

Non-tech students exploring high salary IT careers without coding through UI UX, SEO, QA testing and business analysis.

Non-Tech Students के लिए IT में बंपर अवसर! बिना Coding वाली 5 हाई सैलरी जॉब्स, जानें सीखने के टॉप प्लेटफॉर्म

Medical students reviewing NEET UG 2026 counselling updates with new MCC online seat upgrade and resignation rules.

NEET Counselling 2026: MBBS एडमिशन के 3 बड़े नियम बदले, छात्रों को मिलेगी बड़ी राहत

Single-teacher School
देश के 1 लाख से ज्यादा स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक, नई रिपोर्ट ने शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में शिक्षक संकट बड़ी चुनौती, सरकार के सामने भर्ती और तैनाती का दबाव   नई दिल्ली, एजेंसियां। देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सामने आई एक नई रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के 1 लाख से ज्यादा स्कूलों में केवल एक शिक्षक कार्यरत है। इससे खासकर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।   छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर   रिपोर्ट में बताया गया है कि एकल शिक्षक वाले स्कूलों में शिक्षक को एक साथ कई कक्षाओं के छात्रों को पढ़ाने, प्रशासनिक काम संभालने और अन्य जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। इससे बच्चों को विषयवार शिक्षा देने में कठिनाई आती है और सीखने की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।   ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा गंभीर स्थिति   शिक्षक की कमी की समस्या सबसे ज्यादा ग्रामीण, पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों में देखने को मिल रही है। कई स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं होने के कारण एक ही शिक्षक को प्राथमिक से लेकर उच्च कक्षाओं तक की जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है।   शिक्षक भर्ती और तैनाती पर जोर   शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि केवल नई भर्तियां करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षकों की सही जगह पर तैनाती भी जरूरी है। सरकार की ओर से शिक्षक उपलब्धता बढ़ाने और स्कूलों में बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।   शिक्षा मंत्रालय के सामने बड़ी चुनौती   देश में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के लक्ष्यों को पूरा करना भी एक बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त शिक्षक, बेहतर प्रशिक्षण और मजबूत स्कूल ढांचा ही बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करा सकता है।

abhishek singh जुलाई 30, 2026 0
UGC का 1-वर्षीय PG कोर्स और 4 साल की UG डिग्री को लेकर फैसला

UGC का 1-वर्षीय PG कोर्स पर बड़ा फैसला, चार साल की UG डिग्री वालों को मिलेगा एक साल में मास्टर डिग्री का विकल्प

IIT मद्रास द्वारा GATE 2027 परीक्षा सिलेबस में संशोधन की सूचना

IIT मद्रास ने GATE 2027 का सिलेबस बदला, बायोटेक्नोलॉजी पेपर में बड़े बदलाव; नया पेपर भी जुड़ा

L. Khangte

JPSC भर्ती घोटाला: पूर्व चेयरमैन एल. ख्यांग्ते से 8 घंटे पूछताछ, 31 जुलाई को फिर होंगे CID के सामने पेश

JPSC PT Exam
JPSC PT परीक्षा जांच तेज, सफल 2204 अभ्यर्थियों की OMR शीट की होगी जांच; CID ने मांगी कार्बन कॉपी

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में कथित अनियमितताओं की जांच अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। मामले की जांच कर रही सीआईडी ने पीटी परीक्षा में सफल हुए सभी 2204 अभ्यर्थियों की OMR शीट का मिलान कराने का फैसला किया है। इसके लिए अभ्यर्थियों से उनकी OMR शीट की कार्बन कॉपी उपलब्ध कराने को कहा गया है।   CID ने जारी की सार्वजनिक अपील   सीआईडी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि अभ्यर्थियों के पास मौजूद OMR शीट की कार्बन कॉपी का मिलान JPSC कार्यालय से जब्त मूल OMR शीट से किया जाएगा। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि दोनों OMR शीट में किसी प्रकार की छेड़छाड़ या विसंगति तो नहीं हुई है।   30 जुलाई से 5 अगस्त तक भेजनी होगी OMR कॉपी   सीआईडी ने झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा-2025 (विज्ञापन संख्या-01/2026) के सभी सफल अभ्यर्थियों से 30 जुलाई से 5 अगस्त के बीच पेपर-1 और पेपर-2 की OMR शीट की कार्बन कॉपी भेजने का अनुरोध किया है। अभ्यर्थी OMR शीट की फोटो या PDF बनाकर व्हाट्सएप नंबर 9934309058 या complainjpsc-cid@jhpolice.gov.in पर भेज सकते हैं।   कार्बन कॉपी नहीं होने पर बताना होगा कारण   सीआईडी ने स्पष्ट किया है कि जिन अभ्यर्थियों के पास OMR शीट की कार्बन कॉपी उपलब्ध नहीं है, उन्हें अपना रोल नंबर भेजने के साथ इसकी अनुपलब्धता का स्पष्ट कारण भी व्हाट्सएप या ईमेल के माध्यम से बताना होगा। इससे जांच एजेंसी प्रत्येक मामले का अलग-अलग सत्यापन कर सकेगी।   विसंगति मिलने पर होगी पूछताछ   जांच एजेंसी का कहना है कि अभ्यर्थियों से प्राप्त कार्बन कॉपी का JPSC से जब्त मूल OMR शीट से मिलान किया जाएगा। यदि किसी भी अभ्यर्थी की OMR शीट में अंतर या छेड़छाड़ के संकेत मिलते हैं, तो संबंधित अभ्यर्थी को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। सीआईडी का मानना है कि इस प्रक्रिया से परीक्षा में कथित अनियमितताओं और संभावित फर्जीवाड़े की सच्चाई सामने लाने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।

abhishek singh जुलाई 30, 2026 0
Student checking NAAC accreditation grade of a college before taking admission in India.

कॉलेज में एडमिशन से पहले जरूर देखें NAAC ग्रेड! जानें A++, A और B ग्रेड का मतलब और क्यों है जरूरी

ISRO Scientist recruitment notification with engineer, space research concept, and career opportunity for GATE-qualified candidates.

बिना लिखित परीक्षा बनें ISRO Scientist, 92 पदों पर भर्ती; ₹1 लाख+ सैलरी

संसद में शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति को लेकर बीजेपी और कांग्रेस में बहस

बीजेपी-कांग्रेस में शिक्षा मंत्री को लेकर विवाद तेज, प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति पर संसद में घमासान

0 Comments

Top week

Smoke rises after reported airstrikes in Iraq as regional tensions escalate in West Asia
दुनिया

US-Saudi Strike: इराक में अमेरिका-सऊदी की संयुक्त कार्रवाई, 4 IRGC जवानों की मौत का दावा; पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव

kalpana जुलाई 30, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?