वॉशिंगटन, एजेंसियां। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने चेतावनी दी है कि वित्तीय क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से बढ़ता उपयोग जहां बैंकिंग और भुगतान सेवाओं को अधिक कुशल बना रहा है, वहीं इससे साइबर सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता के लिए नए जोखिम भी पैदा हो रहे हैं। आईएमएफ ने कहा कि यदि AI से जुड़े जोखिमों के लिए समय रहते प्रभावी नियामकीय ढांचा नहीं बनाया गया, तो भविष्य में इसका असर पूरे वैश्विक वित्तीय तंत्र पर पड़ सकता है। बैंकिंग और भुगतान प्रणाली पर बढ़ सकता है खतरा आईएमएफ की रिपोर्ट के अनुसार, AI की मदद से साइबर हमलावर पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से सुरक्षा कमजोरियों का पता लगा सकते हैं और बड़े पैमाने पर हमले कर सकते हैं। बैंक, भुगतान नेटवर्क, क्लाउड सेवाएं और साझा डिजिटल अवसंरचना ऐसे हमलों से सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। संस्था ने आगाह किया कि यदि एक ही तकनीकी प्लेटफॉर्म पर निर्भर कई वित्तीय संस्थानों पर एक साथ हमला हुआ, तो यह वित्तीय स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। वैश्विक सहयोग और कड़े नियमन पर जोर आईएमएफ ने सरकारों, केंद्रीय बैंकों और वित्तीय नियामकों से AI आधारित जोखिमों के लिए स्पष्ट नियम बनाने, साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने और सार्वजनिक-निजी सहयोग बढ़ाने की अपील की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि AI के लाभ तभी सुरक्षित रहेंगे, जब इसके साथ मजबूत निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित नियमन भी विकसित किया जाए।
बेंगलुरु, एजेंसियां। दिग्गज टेक कंपनी Google ने कर्नाटक की Visvesvaraya Technological University (VTU) के साथ एक महत्वपूर्ण साझेदारी की है। इस समझौते का उद्देश्य इंजीनियरिंग छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और आधुनिक डिजिटल तकनीकों में प्रशिक्षण देना है, ताकि वे भविष्य की टेक्नोलॉजी जरूरतों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें। छात्रों को मिलेगा AI आधारित प्रशिक्षण इस साझेदारी के तहत VTU से जुड़े इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों को Google के विशेषज्ञों द्वारा AI से जुड़े कोर्स, ट्रेनिंग मॉड्यूल और इंडस्ट्री आधारित प्रोजेक्ट्स का अवसर मिल सकता है। इससे छात्रों को केवल किताबी ज्ञान के बजाय वास्तविक दुनिया में AI के उपयोग को समझने में मदद मिलेगी। रोजगार के लिए बढ़ेगी छात्रों की तैयारी Google और VTU की यह पहल छात्रों में AI, डेटा साइंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों की क्षमता विकसित करने पर केंद्रित है। इससे इंजीनियरिंग छात्रों के लिए टेक सेक्टर में रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है। भारत में AI स्किल डेवलपमेंट पर जोर देश में AI विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ रही है। केंद्र सरकार और बड़ी टेक कंपनियां भी युवाओं को नई तकनीकों में प्रशिक्षित करने पर जोर दे रही हैं। Google की यह पहल भारत में AI टैलेंट तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। यूनिवर्सिटी और इंडस्ट्री के बीच बढ़ेगा सहयोग VTU के साथ इस साझेदारी से शिक्षा संस्थानों और टेक इंडस्ट्री के बीच सहयोग मजबूत होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम छात्रों को इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार कौशल विकसित करने में मदद करेंगे और भारत को AI क्षेत्र में आगे बढ़ाने में योगदान देंगे।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते दौर में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां भारत को AI डेवलपमेंट, रिसर्च, डेटा सेंटर और टैलेंट के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देख रही हैं। देश में बढ़ते डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़ी संख्या में टेक विशेषज्ञों की मौजूदगी ने भारत को वैश्विक AI इकोसिस्टम में अहम स्थान दिलाया है। AI टैलेंट में भारत की मजबूत स्थिति भारत में बड़ी संख्या में इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट और सॉफ्टवेयर विशेषज्ञ मौजूद हैं, जो AI आधारित प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। यही कारण है कि कई वैश्विक कंपनियां भारत में अपने AI रिसर्च और डेवलपमेंट सेंटर का विस्तार कर रही हैं। बड़ी टेक कंपनियों का बढ़ा निवेश Google, Microsoft, Amazon और अन्य वैश्विक टेक कंपनियां भारत में क्लाउड कंप्यूटिंग, AI प्लेटफॉर्म और डेटा सेंटर से जुड़े क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रही हैं। कंपनियां भारत को सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि AI इनोवेशन और डेवलपमेंट के प्रमुख केंद्र के रूप में देख रही हैं। सरकार का AI मिशन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भारत सरकार भी AI क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही है। IndiaAI मिशन के तहत AI रिसर्च, कंप्यूटिंग क्षमता, स्टार्टअप और कौशल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। स्टार्टअप सेक्टर में AI का विस्तार भारत में AI आधारित स्टार्टअप्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हेल्थकेयर, शिक्षा, कृषि, फाइनेंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में AI तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत AI इनोवेशन के बड़े केंद्रों में शामिल हो सकता है। चुनौतियां भी बनी हुई हैं हालांकि AI क्षेत्र में भारत के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं, जिनमें हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग संसाधन, डेटा सुरक्षा और कुशल AI प्रोफेशनल्स की जरूरत शामिल है। इन क्षेत्रों में तेजी से सुधार के साथ भारत वैश्विक AI प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। टेक दिग्गज Google ने भारत में शिक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 'ATL Saathi' AI प्लेटफॉर्म का विस्तार करने की घोषणा की है। इस पहल के तहत देशभर के शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल लर्निंग टूल्स का बेहतर प्रशिक्षण और उपयोग उपलब्ध कराया जाएगा। शिक्षकों को मिलेगा AI का प्रशिक्षण Google के अनुसार, प्लेटफॉर्म के जरिए शिक्षकों को AI आधारित कंटेंट तैयार करने, स्मार्ट क्लासरूम चलाने और छात्रों के लिए इंटरैक्टिव लर्निंग अनुभव विकसित करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे डिजिटल शिक्षा को नई गति मिलने की उम्मीद है। क्लाउड और AI टूल्स हुए अपग्रेड कंपनी ने 'ATL Saathi' में कई नए AI फीचर्स और Google Cloud आधारित सेवाएं जोड़ी हैं। इनकी मदद से शिक्षक लेसन प्लान तैयार करने, क्विज़ बनाने, असाइनमेंट तैयार करने और छात्रों की प्रगति का बेहतर विश्लेषण कर सकेंगे। अटल टिंकरिंग लैब्स को मिलेगा फायदा यह पहल अटल इनोवेशन मिशन (AIM) के तहत संचालित अटल टिंकरिंग लैब्स (ATL) से जुड़े स्कूलों को विशेष रूप से लाभ पहुंचाएगी। Google का लक्ष्य छात्रों में AI, रोबोटिक्स, कोडिंग और नवाचार से जुड़ी कौशल विकसित करना है। डिजिटल शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित शिक्षा प्लेटफॉर्म के विस्तार से भारत के स्कूलों में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा। इससे शिक्षकों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और छात्रों को आधुनिक तकनीकों के साथ सीखने का अवसर मिलेगा। नई शिक्षा नीति के अनुरूप पहल Google ने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के उद्देश्यों के अनुरूप है और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से छात्रों को AI एवं डिजिटल स्किल्स से लैस करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
नई दिल्ली: घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी दिन भी मजबूती देखने को मिली। एशियाई बाजारों में कमजोरी के बावजूद भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में खुला। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 250 अंक से अधिक उछल गया, जबकि एनएसई का निफ्टी 50 इंडेक्स 24,150 के स्तर के ऊपर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी मामूली मजबूती के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में बाजार की स्थिति सुबह करीब 9:24 बजे तक बीएसई सेंसेक्स 242.70 अंक (0.31%) की बढ़त के साथ 77,428.13 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 50 62.35 अंक (0.26%) की तेजी के साथ 24,140.85 अंक पर पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में भी बाजार सकारात्मक रुख के साथ बंद हुआ था। उस दिन सेंसेक्स 130.49 अंक और निफ्टी 26.45 अंक की बढ़त दर्ज करने में सफल रहा था। रुपये में भी मामूली मजबूती शेयर बाजार की तेजी के बीच भारतीय मुद्रा में भी हल्की मजबूती देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1 पैसे मजबूत होकर 96.24 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। सेंसेक्स के इन शेयरों में रही सबसे ज्यादा तेजी 30 शेयरों वाले सेंसेक्स में शुरुआती कारोबार के दौरान 20 कंपनियों के शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। सबसे ज्यादा तेजी एचसीएल टेक में देखने को मिली, जिसके शेयर करीब 2.6% तक उछल गए। इसके अलावा महिंद्रा एंड महिंद्रा, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, टाइटन, मारुति सुजुकी, टीसीएस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एशियन पेंट्स और ट्रेंट जैसे शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इन शेयरों पर रहा दबाव दूसरी ओर बैंकिंग और कुछ अन्य सेक्टर के शेयरों में हल्की कमजोरी दर्ज की गई। एक्सिस बैंक, अडानी पोर्ट्स, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), आईसीआईसीआई बैंक, सन फार्मा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) और एनटीपीसी के शेयर शुरुआती कारोबार में लाल निशान में कारोबार करते दिखे। निफ्टी में आईटी शेयरों का दबदबा निफ्टी 50 इंडेक्स में एचसीएल टेक, मारुति सुजुकी और विप्रो सबसे अधिक बढ़त वाले शेयर रहे। सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी आईटी और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में सबसे अच्छी तेजी देखने को मिली। वहीं, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर दबाव में रहा और इसमें सबसे ज्यादा कमजोरी दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बढ़त ब्रॉडर मार्केट की बात करें तो निवेशकों का रुझान मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सकारात्मक रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में करीब 0.02% जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.34% की बढ़त दर्ज की गई। निवेशकों की नजर आगे किन बातों पर रहेगी? विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों, वैश्विक बाजारों के रुख, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और रुपये की चाल पर बनी रहेगी। यदि आईटी और ऑटो सेक्टर में खरीदारी जारी रहती है तो बाजार को आगे भी मजबूती मिल सकती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्र में रुचि रखने वाले छात्रों और पेशेवरों के लिए नया ऑनलाइन कार्यक्रम 'एप्लाइड क्वांटम कंप्यूटिंग एंड AI' शुरू किया है। इस कोर्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें प्रवेश के लिए JEE स्कोर की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे अधिक से अधिक इच्छुक उम्मीदवार आवेदन कर सकेंगे। क्वांटम कंप्यूटिंग और AI पर रहेगा फोकस इस कार्यक्रम में क्वांटम थ्योरी, क्वांटम एल्गोरिदम, मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग और क्वांटम कंप्यूटिंग व AI के संयुक्त उपयोग जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। कोर्स का उद्देश्य प्रतिभागियों को भविष्य की उभरती तकनीकों में व्यावहारिक और उद्योग आधारित ज्ञान उपलब्ध कराना है। पूरी तरह ऑनलाइन होगी पढ़ाई IIT दिल्ली के अनुसार, यह कार्यक्रम पूरी तरह ऑनलाइन संचालित किया जाएगा। इससे देशभर के छात्र और कामकाजी पेशेवर बिना किसी स्थान संबंधी बाधा के इस कोर्स का हिस्सा बन सकेंगे। 15 अक्टूबर तक कर सकेंगे आवेदन इस कोर्स के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 15 अक्टूबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। पात्रता, फीस और अन्य जानकारी संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है। AI स्किल्स की बढ़ती मांग को मिलेगा बढ़ावा विशेषज्ञों का मानना है कि AI और क्वांटम कंप्यूटिंग आने वाले वर्षों में सबसे तेजी से बढ़ने वाले तकनीकी क्षेत्रों में शामिल होंगे। ऐसे में IIT दिल्ली का यह नया कार्यक्रम छात्रों और पेशेवरों को भविष्य की तकनीकी जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनी OpenAI के पहले उपभोक्ता हार्डवेयर डिवाइस को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी अपने पहले AI गैजेट के रूप में एक स्क्रीन-फ्री स्मार्ट स्पीकर लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। यह डिवाइस पारंपरिक स्मार्ट स्पीकर से अलग होगा और ChatGPT की मदद से अधिक प्राकृतिक और इंसानों जैसी बातचीत करने में सक्षम होगा। कैमरा और सेंसर से होगा लैस रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस AI डिवाइस में कैमरा और कई सेंसर दिए जाएंगे, जो आसपास के माहौल को समझने में मदद करेंगे। डिवाइस यूजर के संदर्भ के अनुसार जवाब देने, स्मार्ट होम डिवाइस नियंत्रित करने, मैसेज भेजने, मीडिया चलाने और अन्य AI आधारित कार्य करने में सक्षम होगा। जॉनी आइव की टीम कर रही है डिजाइन इस प्रोजेक्ट पर Apple के पूर्व मुख्य डिजाइनर जॉनी आइव की टीम काम कर रही है। OpenAI ने पिछले वर्ष उनकी AI हार्डवेयर कंपनी io का अधिग्रहण किया था। इसके बाद से कंपनी उपभोक्ता AI हार्डवेयर विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। 2027 में लॉन्च होने की संभावना ब्लूमबर्ग और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, OpenAI इस डिवाइस को 2027 में बाजार में उतार सकती है। हालांकि कंपनी ने अब तक इसके डिजाइन, कीमत या लॉन्च डेट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। AI हार्डवेयर बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा यदि यह डिवाइस लॉन्च होती है, तो OpenAI सीधे AI हार्डवेयर बाजार में कदम रखेगी और Amazon Echo, Google Nest जैसे स्मार्ट स्पीकर के साथ नई प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। कंपनी का लक्ष्य ऐसा AI डिवाइस तैयार करना है, जो स्मार्टफोन पर निर्भरता कम करते हुए अधिक स्वाभाविक और सहज उपयोग का अनुभव दे सके।
मुंबई, एजेंसियां। देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में बड़ा दांव खेलते हुए 8,900 AI इंजीनियरों की नई टीम बनाने का ऐलान किया है। कंपनी का उद्देश्य एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए AI आधारित समाधान तैयार करना और वैश्विक स्तर पर OpenAI, Microsoft, Amazon तथा Anthropic जैसी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करना है। AI इंजीनियर सीधे ग्राहकों के साथ करेंगे काम TCS के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के. कृतिवासन ने बताया कि नई टीम में शामिल इंजीनियर केवल सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे सीधे ग्राहकों के साथ मिलकर उनकी जरूरत के मुताबिक AI समाधान विकसित करेंगे। कंपनी इन्हें "Forward Deployed Engineers" के रूप में तैयार कर रही है, ताकि AI प्रोजेक्ट्स को तेजी से लागू किया जा सके। AI कारोबार को नई ऊंचाई देने की रणनीति कंपनी का कहना है कि आने वाले वर्षों में AI सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ेगी। इसी को देखते हुए TCS बड़े पैमाने पर अपने कर्मचारियों को AI, मशीन लर्निंग और जनरेटिव AI तकनीकों में प्रशिक्षित कर रही है। कंपनी पहले ही लाखों कर्मचारियों को AI से जुड़ी स्किल्स की ट्रेनिंग दे चुकी है और अब विशेषज्ञ इंजीनियरों की अलग टीम तैयार की जा रही है। वैश्विक AI बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा विशेषज्ञों का मानना है कि TCS का यह कदम भारतीय आईटी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। AI तकनीक में बढ़ते निवेश के साथ भारतीय कंपनियां अब केवल आउटसोर्सिंग तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि वैश्विक AI नवाचार और एंटरप्राइज समाधान के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी कर रही हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत सरकार ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों और सरकारी विभागों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर नई सलाह जारी की है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करने वाली इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) और संबंधित एजेंसियों ने साइबर सुरक्षा से जुड़े कार्यों में OpenAI, Anthropic और अन्य विदेशी AI मॉडल के उपयोग में सावधानी बरतने को कहा है। सरकार का जोर स्वदेशी AI समाधान विकसित करने पर है। संवेदनशील डेटा की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता सरकार ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील सरकारी डेटा से जुड़े कार्यों में विदेशी AI मॉडल का उपयोग करने से पहले विस्तृत सुरक्षा मूल्यांकन किया जाना चाहिए। मंत्रालयों को निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी AI टूल का इस्तेमाल करते समय डेटा गोपनीयता, साइबर सुरक्षा और भारतीय कानूनों का पूरा पालन सुनिश्चित करें। स्वदेशी AI मॉडल को मिलेगा बढ़ावा सरकार का मानना है कि भारत को लंबे समय में घरेलू AI मॉडल और तकनीकों पर अधिक निर्भर होना चाहिए। इसी दिशा में IndiaAI Mission के तहत भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स को उन्नत AI मॉडल विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे डेटा देश के भीतर सुरक्षित रहेगा और विदेशी प्लेटफॉर्म पर निर्भरता कम होगी। AI के जिम्मेदार उपयोग पर जोर विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार AI तकनीक का विरोध नहीं कर रही है, बल्कि उसका सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना चाहती है। आने वाले समय में AI से जुड़े स्पष्ट दिशा-निर्देश और सुरक्षा मानक जारी किए जा सकते हैं, ताकि सरकारी संस्थानों में AI का उपयोग सुरक्षित और प्रभावी ढंग से किया जा सके।
रांची। झारखंड अपनी पारंपरिक पहचान खनिज संपदा वाले राज्य से आगे बढ़कर सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। राज्य सरकार ने झारखंड विकास विजन 2050 के तहत रांची को आईटी और एआई हब के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इसका उद्देश्य राज्य को डिजिटल नवाचार, तकनीकी निवेश और रोजगार का नया केंद्र बनाना है। सरकार की योजना के अनुसार सरकार की योजना के अनुसार रांची में लगभग 100.97 एकड़ क्षेत्र में अत्याधुनिक आईटी पार्क विकसित किया जाएगा। साथ ही राज्य की अपनी एआई नीति लागू होगी, जिसके तहत स्टेट एआई क्लाउड तैयार किया जाएगा। यह प्लेटफॉर्म केंद्र सरकार के इंडिया एआई इकोसिस्टम के साथ समन्वय स्थापित कर डिजिटल सेवाओं को मजबूत करेगा। ड्राफ्ट एआई पॉलिसी 2026 में स्मार्ट माइनिंग, खनिज चोरी पर निगरानी, मौसम और मिट्टी के विश्लेषण, कृषि, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास तथा प्रशासनिक सेवाओं में एआई के व्यापक उपयोग का प्रस्ताव है। सरकार डिजिटल गवर्नेंस को एआई आधारित प्लेटफॉर्म से जोड़कर रियल-टाइम मॉनिटरिंग और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली विकसित करना चाहती है। इसके कार्यान्वयन की निगरानी के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित करने की भी योजना है। विशेषज्ञों का मानना हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस महत्वाकांक्षी योजना की सफलता केवल घोषणाओं पर नहीं, बल्कि मजबूत बुनियादी ढांचे, गुणवत्तापूर्ण इंटरनेट, निर्बाध बिजली, डेटा सेंटर, कुशल मानव संसाधन और पारदर्शी नीतियों पर निर्भर करेगी। सरकार निवेशकों को पूंजी निवेश पर रिम्बर्समेंट, स्टांप ड्यूटी में 100 प्रतिशत तक छूट और बिजली शुल्क में राहत जैसे प्रोत्साहन देने की तैयारी कर रही है। झारखंड के सामने पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बिहार जैसे पड़ोसी राज्यों से प्रतिस्पर्धा भी बड़ी चुनौती है। फिर भी टियर-2 शहरों की बढ़ती मांग, अपेक्षाकृत कम परिचालन लागत और नई औद्योगिक संभावनाएं रांची को भविष्य में आईटी निवेश का आकर्षक केंद्र बना सकती हैं, बशर्ते योजनाएं समयबद्ध और प्रभावी तरीके से जमीन पर उतरें।
मुंबई, एजेंसियां। देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC Bank ने ग्राहक सेवा को बेहतर बनाने के लिए बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। बैंक अब बैकएंड विभाग में काम करने वाले कई कर्मचारियों को धीरे-धीरे ग्राहक सेवा भूमिकाओं में तैनात करेगा। बैंक का कहना है कि नई तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बैकएंड का काम अधिक तेज और स्वचालित हो गया है, इसलिए कर्मचारियों को अब सीधे ग्राहकों की जरूरतें पूरी करने में लगाया जाएगा। तकनीक संभालेगी बैकएंड, कर्मचारी देंगे बेहतर सेवा HDFC बैंक के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ शशिधर जगदीशन ने वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि बैंक तकनीक आधारित दक्षता का लाभ उठाकर बैकएंड कर्मचारियों को ऐसी भूमिकाओं में भेज रहा है, जहां वे ग्राहकों के साथ सीधे जुड़ सकें। इससे शाखाओं और डिजिटल चैनलों पर ग्राहकों को तेज, व्यक्तिगत और बेहतर सेवा मिलने की उम्मीद है। AI से मजबूत होगी बैंकिंग व्यवस्था बैंक ने बताया कि वह साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी की पहचान और ग्राहक सेवा को बेहतर बनाने के लिए AI आधारित प्रणालियों का तेजी से विस्तार कर रहा है। HDFC Bank का स्वदेशी AI मॉडल 'Neev' डेटा विश्लेषण, जोखिम प्रबंधन और ग्राहक सहायता को अधिक स्मार्ट बनाने में मदद करेगा। बैंक का कहना है कि AI का उद्देश्य कर्मचारियों की जगह लेना नहीं, बल्कि उनकी कार्यक्षमता बढ़ाना है। छोटे शहरों और गांवों पर भी रहेगा फोकस HDFC बैंक ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के बावजूद वह छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी शाखाओं की मौजूदगी मजबूत बनाए रखेगा। बैंक का मानना है कि कई ग्राहक आज भी व्यक्तिगत सलाह और शाखा-आधारित सेवाओं को प्राथमिकता देते हैं, इसलिए तकनीक और मानवीय सेवा के बीच संतुलन बनाए रखा जाएगा।
कभी कॉर्पोरेट दुनिया में करियर ग्रोथ का सबसे बड़ा लक्ष्य मैनेजर बनना माना जाता था। लेकिन अब यह तस्वीर तेजी से बदल रही है। Microsoft की हालिया छंटनी के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मैनेजरों की जगह लेने जा रहा है? विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा नहीं है। कंपनियां मैनेजरों को खत्म नहीं कर रहीं, बल्कि अनावश्यक मैनेजमेंट लेयर कम करके नेतृत्व की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित कर रही हैं। Microsoft की छंटनी ने बढ़ाई चर्चा Microsoft ने हालिया जॉब कट्स के दौरान अपनी मैनेजमेंट लेयर को भी कम किया है। कंपनी AI पर बड़े स्तर पर निवेश कर रही है और संगठन को अधिक तेज, चुस्त (Agile) और प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है। यही रणनीति Amazon, Meta और Shopify जैसी कई बड़ी टेक कंपनियां भी अपना रही हैं। इस ट्रेंड को अब कॉर्पोरेट जगत में "Management Diet" कहा जा रहा है, जिसमें संगठन के भीतर गैर-जरूरी मैनेजमेंट स्तरों को हटाकर निर्णय प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है। AI नहीं, संगठनात्मक बदलाव है बड़ी वजह विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव केवल AI की वजह से नहीं हो रहा है। True Balance के चीफ ह्यूमन रिसोर्स ऑफिसर (CHRO) गौरव शर्मा का कहना है कि कंपनियां अब यह मूल्यांकन कर रही हैं कि कौन-सी मैनेजमेंट लेयर वास्तव में व्यवसाय को मूल्य दे रही है। यदि किसी स्तर की भूमिका केवल रिपोर्टिंग, समन्वय और प्रशासनिक कार्यों तक सीमित है, तो उसे अधिक प्रभावी तरीके से AI के जरिए संभाला जा सकता है। वहीं HireYou के CHRO अभिजीत घोष के मुताबिक कंपनियां अपने संगठन को अधिक तेज और लचीला बनाने के लिए संरचनात्मक बदलाव कर रही हैं। AI इस बदलाव को आसान बना रहा है क्योंकि अब कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां तकनीक संभाल सकती है। AI किन मैनेजमेंट कार्यों को संभाल रहा है? आज AI कई ऐसे कार्य तेजी से कर रहा है जो पहले मिडिल मैनेजर की जिम्मेदारी माने जाते थे। इनमें शामिल हैं: प्रदर्शन (Performance) की निगरानी प्रोजेक्ट की प्रगति पर नजर रखना मीटिंग का सारांश तैयार करना कर्मचारियों की शेड्यूलिंग संसाधनों का आवंटन ऑनबोर्डिंग और रिपोर्टिंग अनुपालन (Compliance) की निगरानी इन कार्यों के ऑटोमेट होने से मैनेजरों का समय बच रहा है और संगठन कम मैनेजमेंट लेयर के साथ भी प्रभावी ढंग से काम कर पा रहे हैं। AI नहीं कर सकता नेतृत्व की जगह विशेषज्ञ मानते हैं कि AI डेटा और प्रशासनिक कार्यों में मदद कर सकता है, लेकिन इंसानी नेतृत्व की जगह नहीं ले सकता। कर्मचारियों को प्रेरित करना, विवाद सुलझाना, कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेना, टीम का विश्वास जीतना और सकारात्मक कार्य संस्कृति बनाना ऐसे काम हैं जिनमें मानवीय समझ और अनुभव की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि भविष्य में प्रभावी नेतृत्व की अहमियत और बढ़ने वाली है। मैनेजर की भूमिका कैसे बदल रही है? अब भविष्य का मैनेजर केवल टीम की निगरानी करने वाला व्यक्ति नहीं होगा। नई भूमिका में मैनेजर को इन जिम्मेदारियों पर अधिक ध्यान देना होगा: कर्मचारियों का विकास और कोचिंग रणनीतिक निर्णय लेना नवाचार को बढ़ावा देना अलग-अलग टीमों के बीच बेहतर सहयोग स्थापित करना व्यवसायिक समस्याओं का समाधान करना जो मैनेजर केवल अनुमोदन, रिपोर्टिंग और रोजमर्रा की निगरानी तक सीमित रहेंगे, उनके लिए भविष्य अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। करियर ग्रोथ का नया मतलब विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में करियर की सफलता केवल मैनेजर बनने से तय नहीं होगी। युवा पेशेवरों को अब इन कौशलों पर ध्यान देना होगा: AI टूल्स की समझ किसी क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता समस्या समाधान क्षमता विभिन्न टीमों के साथ सहयोग लगातार नई तकनीकों को सीखने की आदत व्यवसायिक परिणामों की जिम्मेदारी लेना यानी भविष्य में पदनाम (Designation) से अधिक महत्व कौशल और प्रभाव (Impact) का होगा। क्या भारत में भी दिखेगा यही ट्रेंड? विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की कंपनियां भी धीरे-धीरे इसी दिशा में आगे बढ़ेंगी। डिजिटल-फर्स्ट कंपनियां अपेक्षाकृत तेजी से फ्लैट संगठनात्मक ढांचे को अपनाएंगी, जबकि बड़े पारंपरिक संगठनों में यह बदलाव धीरे-धीरे देखने को मिलेगा। हालांकि अंतिम लक्ष्य सभी का लगभग एक जैसा होगा—कम मैनेजमेंट लेयर, तेज निर्णय प्रक्रिया और अधिक प्रभावी नेतृत्व। बदलते दौर में नेतृत्व ही बनेगा सबसे बड़ी ताकत AI के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद कंपनियों को अच्छे नेताओं की आवश्यकता बनी रहेगी। फर्क सिर्फ इतना होगा कि भविष्य में वही मैनेजर सबसे अधिक सफल होंगे जो लोगों को प्रेरित कर सकें, भरोसा कायम रखें, कठिन फैसले लें और लगातार बदलते कारोबारी माहौल में अपनी टीम का सही मार्गदर्शन कर सकें।
पटना, एजेंसियां। बिहार के चर्चित यूट्यूबर और जन सुराज नेता मनीष कश्यप एक नए विवाद को लेकर सुर्खियों में हैं। उन्होंने दावा किया था कि उनकी नई टोयोटा इनोवा हाइक्रॉस में E20 पेट्रोल भरवाने के बाद इंजन में गंभीर खराबी आ गई। इस दावे का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद E20 ईंधन को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई। टोयोटा ने दावों को किया खारिज टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने वाहन की तकनीकी जांच के बाद कहा कि कार में आई खराबी E20 पेट्रोल की वजह से नहीं, बल्कि ईंधन में पानी/दूषित ईंधन होने के कारण हुई। कंपनी ने स्पष्ट किया कि इनोवा हाइक्रॉस E20 ईंधन के अनुरूप है। मनीष कश्यप के खिलाफ FIR दर्ज मामले के बाद टोयोटा ने मनीष कश्यप के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। कंपनी का आरोप है कि बिना तकनीकी पुष्टि के किए गए दावों से उसकी छवि को नुकसान पहुंचा है। रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। सरकार ने भी दी सफाई विवाद बढ़ने पर पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी बयान जारी कर कहा कि E20 पेट्रोल पूरी तरह परीक्षण के बाद लागू किया गया है और इससे संबंधित वायरल दावों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं मिला है। सरकार और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों ने लोगों से अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील की। सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस इस पूरे विवाद के बाद सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल, वाहन सुरक्षा और उपभोक्ता अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है। वहीं, मनीष कश्यप अपने दावों पर कायम हैं, जबकि टोयोटा और सरकार दोनों ने उनके आरोपों को तकनीकी जांच के आधार पर खारिज किया है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूल शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कंप्यूटेशनल थिंकिंग (CT) को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने नए शैक्षणिक सत्र के तहत AI आधारित मॉड्यूल और स्किल एजुकेशन के विस्तार पर जोर देते हुए स्कूलों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसका उद्देश्य छात्रों को भविष्य की तकनीकों और डिजिटल कौशल के लिए तैयार करना है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटेशनल थिंकिंग पर विशेष फोकस CBSE ने कक्षा 3 से 8 तक के लिए नया कंप्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पाठ्यक्रम लागू किया है। वहीं माध्यमिक स्तर पर भी AI और कंप्यूटेशनल थिंकिंग को मॉड्यूल के रूप में शामिल किया जा रहा है, ताकि छात्रों में तार्किक सोच, समस्या समाधान और डिजिटल साक्षरता विकसित हो सके। शिक्षकों को भी मिलेगा विशेष प्रशिक्षण बोर्ड ने 2026-27 सत्र के लिए शिक्षकों के प्रशिक्षण का मुख्य विषय "Computational Thinking and Understanding Artificial Intelligence" तय किया है। इसके तहत देशभर में कार्यशालाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे शिक्षक AI आधारित शिक्षण पद्धतियों को कक्षा में प्रभावी ढंग से लागू कर सकें। स्किल एजुकेशन को मिलेगा बढ़ावा CBSE ने स्किल एजुकेशन के तहत कई नए तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को भी बढ़ावा दिया है। इनमें Generative AI, Python, Internet of Things (IoT), 3D Printing, VLSI, DevSecOps जैसे आधुनिक विषय शामिल हैं, ताकि छात्र नई तकनीकों से जुड़ सकें। NEP 2020 के अनुरूप पहल बोर्ड के अनुसार यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और NCFSE 2023 के अनुरूप है। इसका उद्देश्य छात्रों में नवाचार, रचनात्मक सोच, तकनीकी समझ और AI के जिम्मेदार उपयोग की क्षमता विकसित करना है, जिससे वे भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।
सैन फ्रांसिस्को, एजेंसियां। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में बड़ी घोषणा करते हुए OpenAI ने अपनी नई GPT-5.6 मॉडल फैमिली लॉन्च कर दी है। इस नई श्रृंखला में Sol, Terra और Luna नाम के तीन अलग-अलग मॉडल शामिल हैं, जिन्हें अलग-अलग जरूरतों और उपयोगकर्ताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। कंपनी का कहना है कि नए मॉडल पहले की तुलना में अधिक तेज, सक्षम, सुरक्षित और किफायती हैं। तीन मॉडल, तीन अलग-अलग क्षमताएं OpenAI के अनुसार, GPT-5.6 Sol सबसे शक्तिशाली मॉडल है, जिसे जटिल कोडिंग, वैज्ञानिक शोध, साइबर सुरक्षा और गहन विश्लेषण जैसे कार्यों के लिए डिजाइन किया गया है। Terra रोजमर्रा के पेशेवर कार्यों के लिए संतुलित प्रदर्शन देता है, जबकि Luna सबसे तेज और कम लागत वाला मॉडल है, जो बड़े पैमाने पर उपयोग और तेज प्रतिक्रिया के लिए तैयार किया गया है। बेहतर प्रदर्शन और कम लागत का दावा कंपनी का दावा है कि GPT-5.6 फैमिली पहले की तुलना में कम टोकन खर्च कर बेहतर परिणाम देने में सक्षम है। खासतौर पर Sol मॉडल को सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, कंप्यूटर उपयोग, साइबर सुरक्षा और वैज्ञानिक कार्यों में उल्लेखनीय सुधार के साथ पेश किया गया है। Terra और Luna मॉडल भी कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाला प्रदर्शन देने के लिए विकसित किए गए हैं। सुरक्षा पर भी खास जोर OpenAI ने बताया कि GPT-5.6 Sol में अब तक का सबसे मजबूत सुरक्षा ढांचा जोड़ा गया है। मॉडल को कई सप्ताह तक रेड-टीमिंग और सुरक्षा परीक्षणों से गुजारा गया ताकि साइबर दुरुपयोग और अन्य जोखिमों को कम किया जा सके। फिलहाल चरणबद्ध तरीके से हो रहा रोलआउट OpenAI ने GPT-5.6 फैमिली का रोलआउट चरणबद्ध तरीके से शुरू किया है। शुरुआत में इसे ChatGPT, Codex और API के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है तथा आने वाले दिनों में इसका दायरा और बढ़ाया जाएगा। AI इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा होगी और तेज विशेषज्ञों का मानना है कि GPT-5.6 के लॉन्च के बाद OpenAI, Google, Anthropic और xAI जैसी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज होगी। नए मॉडल एंटरप्राइज, डेवलपर्स और रिसर्च सेक्टर के लिए AI क्षमताओं को एक नए स्तर पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
नई रिपोर्ट में सामने आया बड़ा बदलाव भारत की कार्य संस्कृति तेजी से बदल रही है। पहले जहां देर तक ऑफिस में रुकना, छुट्टी के बाद भी ईमेल का जवाब देना और जिम्मेदारियों से बढ़कर काम करना कर्मचारियों की प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जाता था, वहीं अब यह सोच बदलती दिखाई दे रही है। Great Place To Work India 2026 की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, देश की करीब 63 प्रतिशत कंपनियों ने पिछले एक वर्ष के दौरान कर्मचारियों की स्वैच्छिक अतिरिक्त मेहनत (Discretionary Effort) में कमी दर्ज की है। अध्ययन में शामिल 380 कंपनियों में से 240 संस्थानों ने इस गिरावट की पुष्टि की है, जबकि औसतन इसमें लगभग 5 प्रतिशत की कमी देखी गई। क्या है 'एफर्ट रिसेशन'? रिपोर्ट के अनुसार, एफर्ट रिसेशन का मतलब कर्मचारियों की उस इच्छा में कमी आना है, जिसके तहत वे अपनी तय जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर संगठन के लिए अतिरिक्त योगदान देते हैं। इसमें बिना कहे देर तक काम करना, अतिरिक्त जिम्मेदारी उठाना, किसी समस्या के समाधान के लिए स्वयं आगे आना या नौकरी के दायरे से बाहर जाकर सहयोग करना शामिल है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इसे कर्मचारियों की प्रतिबद्धता में कमी नहीं माना जाना चाहिए। आज के कर्मचारी अपनी ऊर्जा वहीं लगाना चाहते हैं जहां उन्हें सम्मान, सीखने का अवसर, करियर में विकास और अपने काम का स्पष्ट उद्देश्य दिखाई देता है। हर सेक्टर पर समान असर नहीं रिपोर्ट बताती है कि सभी उद्योगों में यह बदलाव समान नहीं है। रिटेल सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 88 प्रतिशत कंपनियों ने अतिरिक्त प्रयास में कमी दर्ज की। आईटी और प्रोफेशनल सर्विसेज में यह आंकड़ा 77 प्रतिशत रहा। कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट में 71 प्रतिशत कंपनियों ने गिरावट की जानकारी दी। फाइनेंशियल सर्विसेज में 62 प्रतिशत कंपनियां प्रभावित रहीं। वहीं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर सबसे बेहतर स्थिति में दिखाई दिया, जहां केवल 44 प्रतिशत कंपनियों ने ऐसी गिरावट दर्ज की। विशेषज्ञों के अनुसार जिन क्षेत्रों में कर्मचारियों का तेजी से बदलाव (High Attrition) होता है, वहां यह प्रभाव अधिक देखने को मिल रहा है। AI बदल रहा है मेहनत की परिभाषा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग ने भी कार्यस्थलों की सोच बदल दी है। जिन कामों में पहले कई दिन लग जाते थे, वे अब AI की मदद से कुछ ही मिनटों में पूरे हो रहे हैं। ऐसे में कंपनियां अब कर्मचारियों का मूल्यांकन केवल लंबे समय तक ऑफिस में बैठने से नहीं, बल्कि उनके द्वारा पैदा किए गए परिणाम, नई सोच और समस्या समाधान की क्षमता के आधार पर करने लगी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि AI के दौर में मेहनत का मतलब सिर्फ अधिक घंटे काम करना नहीं, बल्कि बेहतर निर्णय लेना, रचनात्मक सोच विकसित करना और ऐसी समस्याओं का समाधान करना है जिन्हें मशीनें नहीं कर सकतीं। Gen Z बदल रही है कार्य संस्कृति रिपोर्ट के मुताबिक भारत के कुल कार्यबल में Gen Z की हिस्सेदारी अब 26 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो वर्ष 2023 की तुलना में लगभग दोगुनी है। नई पीढ़ी के कर्मचारी लंबे समय तक ऑफिस में रहने को सफलता का पैमाना नहीं मानते। वे बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस, लचीले कार्य घंटे, मानसिक स्वास्थ्य, सीखने के अवसर, करियर ग्रोथ और सार्थक कार्य वातावरण को अधिक प्राथमिकता देते हैं। यही वजह है कि कंपनियों को अब अपनी पारंपरिक कार्य संस्कृति पर दोबारा विचार करना पड़ रहा है। कर्मचारियों को समझने में कंपनियों को हो रही चुनौती रिपोर्ट में शामिल कई मानव संसाधन (HR) प्रमुखों ने स्वीकार किया कि वे एक साथ दो बड़े बदलावों का सामना कर रहे हैं—AI का तेजी से बढ़ता प्रभाव और नई पीढ़ी की बदलती अपेक्षाएं। करीब आधे HR अधिकारियों ने माना कि वे अभी भी पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं कि युवा कर्मचारियों को सबसे अधिक क्या प्रेरित करता है। नेतृत्व और भरोसा बढ़ाते हैं अतिरिक्त योगदान रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह रहा कि कर्मचारियों की अतिरिक्त मेहनत का सबसे बड़ा आधार अच्छा नेतृत्व और विश्वास है। जिन कर्मचारियों को लगा कि उनके नेता उनकी परवाह करते हैं, उनमें स्वैच्छिक अतिरिक्त योगदान देने की संभावना लगभग 99 प्रतिशत रही। वहीं जहां ऐसा भरोसा नहीं था, वहां यह आंकड़ा घटकर 29 प्रतिशत रह गया। इसी तरह प्रेरणादायक नेतृत्व वाले संगठनों में भी कर्मचारियों का अतिरिक्त योगदान काफी अधिक देखा गया। काम का भविष्य बदल रहा है विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में सफल वही संस्थान होंगे जो कर्मचारियों को केवल अधिक काम करने के लिए नहीं कहेंगे, बल्कि उन्हें ऐसा माहौल देंगे जहां वे सम्मानित महसूस करें, सीख सकें और अपने करियर को आगे बढ़ा सकें। आज के दौर में कर्मचारी अतिरिक्त मेहनत करने से पीछे नहीं हट रहे हैं, बल्कि वे यह तय कर रहे हैं कि किस संगठन के लिए अपनी पूरी क्षमता से काम करना वास्तव में सार्थक है। क्यों है यह बदलाव महत्वपूर्ण? भारत की कॉर्पोरेट दुनिया एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। Gen Z की नई सोच, AI का बढ़ता प्रभाव और कर्मचारियों की बदलती प्राथमिकताएं कार्य संस्कृति को नया रूप दे रही हैं। ऐसे में कंपनियों के लिए चुनौती केवल बेहतर प्रतिभा को नियुक्त करना नहीं, बल्कि ऐसा कार्य वातावरण तैयार करना है जहां कर्मचारी स्वेच्छा से संगठन की सफलता में अतिरिक्त योगदान देना चाहें।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में हाई-टेक उद्योग को बढ़ावा देने की कोशिशों के बीच जापानी कंपनी Mitsubishi ने राज्य में सेमीकंडक्टर यूनिट स्थापित करने में रुचि दिखाई है। पश्चिम बंगाल के उद्योग मंत्री तपस रॉय ने बताया कि Mitsubishi के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार के साथ मुलाकात कर प्रस्तावित सेमीकंडक्टर परियोजना को लेकर अपनी इच्छा जताई है। Durgapur या Panagarh में मिल सकती है जमीन राज्य सरकार ने संभावित परियोजना के लिए दुर्गापुर या पानागढ़ में जमीन उपलब्ध कराने का विकल्प दिया है। Mitsubishi के अधिकारी जल्द ही दोबारा राज्य का दौरा कर परियोजना से जुड़ी आगे की बातचीत कर सकते हैं। Mitsubishi प्रतिनिधिमंडल ने की अहम बैठक Mitsubishi के प्रतिनिधियों ने पश्चिम बंगाल के उद्योग मंत्री तपस रॉय और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान राज्य में निवेश की संभावनाओं और सेमीकंडक्टर निर्माण से जुड़े अवसरों पर चर्चा हुई। सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में बंगाल का कदम सेमीकंडक्टर उद्योग को आधुनिक तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। पश्चिम बंगाल सरकार राज्य को पूर्वी भारत के बड़े निवेश केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। रोजगार और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को मिलेगा फायदा यदि यह परियोजना अंतिम रूप लेती है तो इससे राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन और तकनीकी क्षेत्र में नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे कुशल युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। अभी अंतिम मंजूरी बाकी हालांकि, अभी तक Mitsubishi की ओर से परियोजना को लेकर अंतिम निवेश घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल बातचीत शुरुआती चरण में है और जमीन, निवेश, तकनीकी जरूरतों सहित अन्य पहलुओं पर आगे फैसला लिया जाएगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। वैश्विक टेक उद्योग में एक बार फिर बड़ी छंटनी की खबर ने हलचल मचा दी है। दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने अपने करीब 4,800 कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का फैसला किया है। यह कंपनी की कुल वैश्विक कार्यबल का लगभग 2.1 प्रतिशत है। माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि यह कदम केवल लागत कम करने के लिए नहीं, बल्कि तेजी से बदलती टेक इंडस्ट्री और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित भविष्य की जरूरतों के अनुरूप संगठन को तैयार करने की रणनीति का हिस्सा है। HR हेड ने बताई छंटनी की वजह माइक्रोसॉफ्ट की मुख्य मानव संसाधन अधिकारी (HR Head) एमी कोलमैन ने कर्मचारियों को भेजे गए एक आंतरिक मेमो में कहा कि कंपनी अपने संसाधनों, निवेश और प्रतिभा को उन क्षेत्रों में केंद्रित करना चाहती है, जहां भविष्य में सबसे अधिक विकास की संभावना है। उनके अनुसार, AI, क्लाउड सेवाओं और नई तकनीकों में निवेश बढ़ाने के लिए संगठनात्मक ढांचे में बदलाव जरूरी हो गया था। AI निवेश के बीच बढ़ा दबाव हाल के महीनों में माइक्रोसॉफ्ट ने AI तकनीक और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश किया है। इसी के साथ खर्चों को नियंत्रित करने और संचालन को अधिक कुशल बनाने के लिए कंपनी ने यह कठिन फैसला लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में टेक कंपनियां पारंपरिक भूमिकाओं की जगह AI-केंद्रित नौकरियों पर अधिक ध्यान देंगी। शेयरों में गिरावट और पहले भी हुई थी कटौती कंपनी के शेयरों में वर्ष 2026 की पहली छमाही में करीब 23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले कुछ वर्षों का सबसे कमजोर प्रदर्शन माना जा रहा है। इससे पहले माइक्रोसॉफ्ट अमेरिका में हजारों कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (Voluntary Buyout) का प्रस्ताव भी दे चुकी है। गौरतलब है कि माइक्रोसॉफ्ट अकेली कंपनी नहीं है। इस वर्ष अमेजन, मेटा और अन्य बड़ी टेक कंपनियां भी AI निवेश और लागत नियंत्रण की रणनीति के तहत हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी हैं, जिससे वैश्विक टेक सेक्टर में रोजगार को लेकर चिंता बढ़ गई है।
वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका में रोजगार बाजार की रफ्तार लगातार धीमी होती नजर आ रही है। जून 2026 में देश में केवल 57 हजार नई नौकरियां जुड़ीं, जो बाजार की अपेक्षाओं से काफी कम हैं। ताजा रोजगार आंकड़ों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सेहत को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ऊंची महंगाई, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और व्यापार नीतियों के कारण कंपनियां नई भर्तियों को लेकर सतर्क हो गई हैं। ट्रेड और टैरिफ नीतियों का असर विशेषज्ञों के अनुसार, आयात शुल्क और व्यापार से जुड़ी नीतियों के कारण कई कंपनियों की लागत बढ़ी है। इससे निवेश और नई भर्ती की रफ्तार प्रभावित हुई है। विपक्षी दलों ने भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक और व्यापारिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि इन फैसलों का असर रोजगार बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। बेरोजगारी दर घटी, लेकिन तस्वीर पूरी तरह सकारात्मक नहीं जून में अमेरिका की बेरोजगारी दर 4.3 प्रतिशत से घटकर 4.2 प्रतिशत हो गई। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट पूरी तरह सकारात्मक संकेत नहीं है। बड़ी संख्या में लोगों ने नौकरी की तलाश ही छोड़ दी है, जिसके कारण वे आधिकारिक बेरोजगारों की सूची से बाहर हो गए। इसी वजह से बेरोजगारी दर कम दिखाई दे रही है। श्रम भागीदारी पांच साल के निचले स्तर पर लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट घटकर 61.5 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो पिछले पांच वर्षों का सबसे निचला स्तर है। वहीं 25 से 54 वर्ष आयु वर्ग की श्रम भागीदारी भी घटकर 83.3 प्रतिशत रह गई है। यह संकेत देता है कि रोजगार बाजार में सक्रिय लोगों की संख्या लगातार कम हो रही है। टेक सेक्टर में जारी है छंटनी जहां निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र में कुछ नई नौकरियां पैदा हुई हैं, वहीं टेक सेक्टर में छंटनी का दौर जारी है। मेटा, माइक्रोसॉफ्ट समेत कई कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में निवेश बढ़ाने के लिए कर्मचारियों की संख्या घटा रही हैं। कमजोर रोजगार आंकड़ों ने अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के सामने भी ब्याज दरों को लेकर नई चुनौती खड़ी कर दी है।
सैन फ्रांसिस्को, एजेंसियां। टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट ने एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए 'Microsoft Frontier Company' नाम से नई AI कंपनी लॉन्च करने की घोषणा की है। कंपनी इस पहल में शुरुआती चरण में 2.5 अरब डॉलर (लगभग 21,000 करोड़ रुपये) का निवेश करेगी। इसका उद्देश्य विभिन्न उद्योगों की कंपनियों को उनकी जरूरत के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समाधान अपनाने और उससे बेहतर व्यावसायिक परिणाम हासिल करने में मदद करना है। 6000 इंजीनियर और विशेषज्ञ देंगे सहायता माइक्रोसॉफ्ट ने बताया कि नई कंपनी के तहत 6,000 इंजीनियर और उद्योग विशेषज्ञ ग्राहकों के साथ सीधे काम करेंगे। ये टीमें कंपनियों की जरूरतों के अनुसार AI मॉडल चुनने, उन्हें लागू करने और उनके मौजूदा डेटा व सिस्टम के साथ एकीकृत करने में मदद करेंगी। सिर्फ Microsoft AI नहीं, अन्य मॉडल भी होंगे उपलब्ध माइक्रोसॉफ्ट की नई कंपनी केवल अपने AI टूल्स तक सीमित नहीं रहेगी। ग्राहक जरूरत के अनुसार OpenAI, Anthropic, ओपन-सोर्स और अन्य AI मॉडलों का भी उपयोग कर सकेंगे। कंपनी का कहना है कि उसका लक्ष्य ग्राहकों को सबसे उपयुक्त AI समाधान उपलब्ध कराना है। बड़ी कंपनियां होंगी शुरुआती ग्राहक माइक्रोसॉफ्ट ने बताया कि Unilever और Novo Nordisk जैसी वैश्विक कंपनियां इस नई पहल की शुरुआती ग्राहकों में शामिल होंगी। कंपनी का दावा है कि इससे AI लागू करने की लागत और समय दोनों कम होंगे तथा कंपनियों को निवेश पर बेहतर रिटर्न मिलेगा। एंटरप्राइज AI बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा विशेषज्ञों का मानना है कि Microsoft Frontier Company के लॉन्च से एंटरप्राइज AI सेवाओं के बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज होगी। माइक्रोसॉफ्ट का यह कदम उन कंपनियों को आकर्षित करने की कोशिश है जो अलग-अलग AI मॉडलों का इस्तेमाल कर अपने कारोबार में AI का अधिक प्रभावी उपयोग करना चाहती हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दुनिया की अग्रणी टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट एक बार फिर बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी नए वित्त वर्ष की शुरुआत में लगभग 5,000 कर्मचारियों की नौकरी खत्म कर सकती है। हालांकि माइक्रोसॉफ्ट ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि यह कदम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर बढ़ते निवेश और बिजनेस रीस्ट्रक्चरिंग का हिस्सा है। वर्तमान में कंपनी में दुनिया भर में करीब 2.2 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं और संभावित छंटनी कुल कर्मचारियों के 2.5 प्रतिशत से भी कम होगी। सेल्स, कंसल्टिंग और एक्सबॉक्स डिवीजन पर सबसे ज्यादा असर रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बार सबसे अधिक प्रभाव सेल्स, कंसल्टिंग और एक्सबॉक्स (गेमिंग) डिवीजन पर पड़ सकता है। विशेष रूप से एक्सबॉक्स कारोबार में नई नेतृत्व टीम के आने के बाद संगठनात्मक बदलाव तेज हुए हैं। कंपनी कई पुराने पदों को समाप्त कर टीमों का पुनर्गठन कर सकती है, ताकि कारोबार को नई रणनीति के अनुरूप ढाला जा सके। एआई निवेश के लिए घटाए जा रहे परिचालन खर्च विशेषज्ञों का मानना है कि माइक्रोसॉफ्ट पिछले कुछ वर्षों से ओपनएआई के साथ मिलकर एआई डेटा सेंटर, कोपायलट और अन्य जनरेटिव एआई तकनीकों पर अरबों डॉलर का निवेश कर रही है। इन परियोजनाओं पर बढ़ते खर्च को संतुलित करने के लिए कंपनी अन्य परिचालन लागत में कटौती कर रही है। जिन कार्यों को अब एआई और ऑटोमेशन के जरिए अधिक दक्षता से किया जा सकता है, वहां मानव संसाधन की आवश्यकता कम की जा रही है। पूरी टेक इंडस्ट्री में बदल रहा रोजगार का स्वरूप माइक्रोसॉफ्ट अकेली कंपनी नहीं है जो इस दिशा में कदम बढ़ा रही है। वर्ष 2026 में मेटा, अमेजन, ओरेकल और लिंक्डइन जैसी कई प्रमुख टेक कंपनियां भी कर्मचारियों की संख्या घटा चुकी हैं। उद्योग जगत का मानना है कि एआई के बढ़ते उपयोग से काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। भविष्य में कंपनियां कम कर्मचारियों और अधिक ऑटोमेशन के साथ काम करने की रणनीति अपना सकती हैं, जिससे तकनीकी क्षेत्र में रोजगार का स्वरूप लगातार बदलता दिखाई दे रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।