शिक्षा

धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षकों से 'प्रशस्त' ऐप के जरिए बच्चों में दिव्यांगता की पहचान करने की अपील की

ranjan kumar tiwari जुलाई 23, 2026 0
शिक्षकों से 'प्रशस्त' ऐप के जरिए दिव्यांग बच्चों की पहचान की अपील करते धर्मेंद्र प्रधान
Dharmendra Pradhan PRASHAST App Disability Identification Schools

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने देशभर के शिक्षकों से अपील की है कि वे स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में संभावित दिव्यांगता और विशेष जरूरतों की पहचान के लिए 'प्रशस्त' (PRASHAST) ऐप का इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा कि समय रहते बच्चों की जरूरतों को पहचानने से उन्हें बेहतर शिक्षा, सहायता और समान अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

 

शिक्षकों की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण

 

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि शिक्षक बच्चों के व्यवहार, सीखने की क्षमता और शारीरिक गतिविधियों को सबसे करीब से देखते हैं। इसलिए वे प्रारंभिक स्तर पर किसी भी तरह की सीखने संबंधी कठिनाई या दिव्यांगता के संकेतों को पहचानने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

 

उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे प्रशस्त ऐप के माध्यम से बच्चों की स्क्रीनिंग करें और जरूरत पड़ने पर उन्हें उचित विशेषज्ञ सहायता से जोड़ें।

 

क्या है प्रशस्त ऐप

 

'प्रशस्त' ऐप शिक्षा मंत्रालय की ओर से शुरू किया गया एक डिजिटल टूल है, जिसका उद्देश्य स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में दिव्यांगता की प्रारंभिक पहचान करना है। इसके माध्यम से शिक्षक बच्चों में विभिन्न प्रकार की विशेष जरूरतों के संकेतों को दर्ज कर सकते हैं और आगे की सहायता के लिए जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं।

 

यह ऐप समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

दिव्यांग बच्चों को बेहतर शिक्षा देने पर जोर

 

शिक्षा मंत्री ने कहा कि हर बच्चे को उसकी क्षमता के अनुसार सीखने का अवसर मिलना चाहिए। दिव्यांग बच्चों को सामान्य बच्चों के साथ समान शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।

 

उन्होंने कहा कि प्रारंभिक पहचान होने से बच्चों को सही समय पर विशेष प्रशिक्षण, सहायक उपकरण और आवश्यक शैक्षणिक सहयोग मिल सकता है।

 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लक्ष्यों से जुड़ा कदम

 

प्रशस्त ऐप का उपयोग राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत समावेशी और समान शिक्षा के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में देखा जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा केवल किसी शारीरिक या सीखने संबंधी कठिनाई के कारण शिक्षा से पीछे न रह जाए।

 

स्कूलों में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर जोर

 

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का उपयोग लगातार बढ़ाया जा रहा है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, ऐप और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधान शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और बच्चों के अनुकूल बनाने में मदद कर रहे हैं।

 

उन्होंने शिक्षकों से तकनीक का उपयोग कर बच्चों की जरूरतों को समझने और उन्हें बेहतर शैक्षणिक माहौल देने की अपील की।

 

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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Top Olympiad Exams in India: आज के दौर में केवल स्कूल की पढ़ाई में अच्छे अंक हासिल करना ही सफलता की गारंटी नहीं है। बदलते शिक्षा परिदृश्य में छात्रों के लिए ऐसी प्रतियोगी परीक्षाओं का महत्व तेजी से बढ़ा है, जो उनकी कॉन्सेप्ट की समझ, तार्किक सोच और समस्या समाधान क्षमता को विकसित करें। ओलंपियाड परीक्षाएं (Olympiad Exams) इसी उद्देश्य को पूरा करती हैं। स्कूलों में अक्सर शिक्षकों द्वारा छात्रों को ओलंपियाड में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, क्योंकि ये परीक्षाएं केवल रटने की क्षमता नहीं, बल्कि Analytical Thinking, Logical Reasoning, Problem Solving Skills और Concept Clarity का मूल्यांकन करती हैं। इन परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्रों को मेडल, प्रमाणपत्र, स्कॉलरशिप और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल करने का अवसर मिलता है। अगर आपका बच्चा स्कूल में पढ़ता है या आप खुद छात्र हैं, तो इन पांच प्रमुख ओलंपियाड परीक्षाओं के बारे में जानकारी जरूर होनी चाहिए। 1. इंटरनेशनल मैथमेटिक्स ओलंपियाड (IMO) International Mathematics Olympiad (IMO) गणित में रुचि रखने वाले छात्रों के बीच सबसे लोकप्रिय ओलंपियाड परीक्षाओं में से एक है। स्कूल स्तर पर इसका आयोजन Science Olympiad Foundation (SOF) द्वारा किया जाता है। इसमें क्या परखा जाता है? गणितीय अवधारणाओं की समझ तार्किक सोच समस्या समाधान क्षमता स्पीड और एक्यूरेसी पात्रता: कक्षा 1 से 12 तक के छात्र आयु वर्ग: लगभग 6 से 18 वर्ष 2. नेशनल साइंस ओलंपियाड (NSO) National Science Olympiad (NSO) विज्ञान विषय में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षा है। इस परीक्षा में छात्रों की वैज्ञानिक सोच, विश्लेषण क्षमता और कॉन्सेप्ट आधारित समझ का मूल्यांकन किया जाता है। मुख्य विषय Physics Chemistry Biology Environmental Science Scientific Reasoning पात्रता: कक्षा 1 से 12 आयु वर्ग: 6–18 वर्ष 3. इंटरनेशनल इंग्लिश ओलंपियाड (IEO) अगर आप अंग्रेजी भाषा में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं, तो International English Olympiad (IEO) बेहतरीन विकल्प है। इसमें शामिल विषय Grammar Vocabulary Reading Comprehension Language Skills बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को प्रमाणपत्र, मेडल और पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। पात्रता: कक्षा 1 से 12 आयु वर्ग: 6–18 वर्ष 4. नेशनल साइबर ओलंपियाड (NCO) डिजिटल युग में तकनीकी ज्ञान का महत्व लगातार बढ़ रहा है। National Cyber Olympiad (NCO) छात्रों की कंप्यूटर, आईटी और साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी समझ का मूल्यांकन करता है। मुख्य विषय Computer Fundamentals Information Technology Cyber Security Logical Reasoning पात्रता: कक्षा 1 से 12 आयु वर्ग: 6–18 वर्ष 5. इंटरनेशनल जनरल नॉलेज ओलंपियाड (IGKO) सामान्य ज्ञान और करेंट अफेयर्स में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए International General Knowledge Olympiad (IGKO) एक शानदार विकल्प है। मुख्य विषय Current Affairs General Knowledge History Geography Environment Civics पात्रता: कक्षा 1 से 10 आयु वर्ग: लगभग 6–16 वर्ष ओलंपियाड की तैयारी कैसे करें? अगर आप बेहतर प्रदर्शन करना चाहते हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें— NCERT और स्कूल की किताबों से बेसिक कॉन्सेप्ट मजबूत करें। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र हल करें। नियमित मॉक टेस्ट दें। टाइम मैनेजमेंट का अभ्यास करें। रटने की बजाय कॉन्सेप्ट आधारित पढ़ाई करें। रोजाना 30–60 मिनट ओलंपियाड की तैयारी के लिए निर्धारित करें। क्या कॉलेज के छात्रों के लिए भी ओलंपियाड होते हैं? यहां बताए गए IMO, NSO, IEO, NCO और IGKO मुख्य रूप से कक्षा 1 से 12 तक के छात्रों के लिए आयोजित किए जाते हैं। वहीं कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर के विद्यार्थियों के लिए अलग प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं, जैसे— ACM ICPC ICPC Programming Contest National Innovation Challenges GATE आधारित प्रतियोगिताएं International Collegiate Competitions ओलंपियाड देने के फायदे कॉन्सेप्ट मजबूत होते हैं। तार्किक और विश्लेषणात्मक सोच विकसित होती है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी आसान होती है। मेडल, प्रमाणपत्र और स्कॉलरशिप पाने का अवसर मिलता है। आत्मविश्वास बढ़ता है। JEE, NEET, CLAT, NDA जैसी परीक्षाओं के लिए मजबूत आधार तैयार होता है। ध्यान रखें :- ओलंपियाड परीक्षा का उद्देश्य केवल रैंक हासिल करना नहीं, बल्कि छात्रों की सोचने, समझने और समस्याओं का समाधान करने की क्षमता को विकसित करना है। यदि छात्र स्कूल स्तर से ही इन परीक्षाओं की तैयारी शुरू करते हैं, तो भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर के लिए मजबूत नींव तैयार हो सकती है।

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बेंगलुरु, एजेंसियां। दिग्गज टेक कंपनी Google ने कर्नाटक की Visvesvaraya Technological University (VTU) के साथ एक महत्वपूर्ण साझेदारी की है। इस समझौते का उद्देश्य इंजीनियरिंग छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और आधुनिक डिजिटल तकनीकों में प्रशिक्षण देना है, ताकि वे भविष्य की टेक्नोलॉजी जरूरतों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।   छात्रों को मिलेगा AI आधारित प्रशिक्षण   इस साझेदारी के तहत VTU से जुड़े इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों को Google के विशेषज्ञों द्वारा AI से जुड़े कोर्स, ट्रेनिंग मॉड्यूल और इंडस्ट्री आधारित प्रोजेक्ट्स का अवसर मिल सकता है। इससे छात्रों को केवल किताबी ज्ञान के बजाय वास्तविक दुनिया में AI के उपयोग को समझने में मदद मिलेगी।   रोजगार के लिए बढ़ेगी छात्रों की तैयारी   Google और VTU की यह पहल छात्रों में AI, डेटा साइंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों की क्षमता विकसित करने पर केंद्रित है। इससे इंजीनियरिंग छात्रों के लिए टेक सेक्टर में रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।   भारत में AI स्किल डेवलपमेंट पर जोर   देश में AI विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ रही है। केंद्र सरकार और बड़ी टेक कंपनियां भी युवाओं को नई तकनीकों में प्रशिक्षित करने पर जोर दे रही हैं। Google की यह पहल भारत में AI टैलेंट तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।   यूनिवर्सिटी और इंडस्ट्री के बीच बढ़ेगा सहयोग   VTU के साथ इस साझेदारी से शिक्षा संस्थानों और टेक इंडस्ट्री के बीच सहयोग मजबूत होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम छात्रों को इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार कौशल विकसित करने में मदद करेंगे और भारत को AI क्षेत्र में आगे बढ़ाने में योगदान देंगे।

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Dharmendra Pradhan Statement
NEET विवाद पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा बयान, परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही बढ़ाने का दिया भरोसा

नई दिल्ली, एजेंसियां। NEET परीक्षा को लेकर जारी विवाद और छात्रों के विरोध के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के लिए व्यापक सुधारों पर काम कर रही है। उन्होंने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान भरोसा दिलाया कि छात्रों के हित सर्वोच्च प्राथमिकता हैं और परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।   परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने की तैयारी   धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि केंद्र सरकार ने विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर परीक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधार शुरू कर दिए हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में तकनीक के बेहतर उपयोग, निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई नए कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना को कम किया जा सके।   संसद में चर्चा के लिए सरकार तैयार   शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार संसद में NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वह सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने दे, ताकि छात्रों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हो सके और आवश्यक निर्णय लिए जा सकें।   छात्रों को दिया भरोसा   धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि सरकार निष्पक्ष और विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें मेहनत करने वाले छात्रों के साथ पूरा न्याय हो सके।

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