IIM Admission Through JEE Score: 12वीं के बाद सिर्फ IIT ही नहीं, अब JEE Main और JEE Advanced स्कोर के जरिए देश के कई IIM में मैनेजमेंट, डेटा साइंस, AI और डिजिटल बिजनेस जैसे अंडरग्रेजुएट कोर्स में भी दाखिला लिया जा सकता है।
हर साल लाखों छात्र JEE Main और JEE Advanced परीक्षा देते हैं। हालांकि, सभी छात्रों को IIT में सीट नहीं मिल पाती। ऐसे में निराश होने की जरूरत नहीं है। अगर आपका JEE स्कोर अच्छा है, तो उसी स्कोर के आधार पर देश के प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) के कुछ अंडरग्रेजुएट (UG) प्रोग्राम में भी प्रवेश पाने का अवसर मिल सकता है।
आज कई IIM 12वीं के बाद मैनेजमेंट, डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बिजनेस एनालिटिक्स और डिजिटल बिजनेस जैसे आधुनिक विषयों में बैचलर डिग्री प्रोग्राम ऑफर कर रहे हैं। इनमें कुछ कोर्स के लिए JEE Main या JEE Advanced स्कोर को प्रवेश प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है।
IIM लखनऊ
IIM मुंबई
IIM संबलपुर
IIM सिरमौर
इन UG प्रोग्राम के जरिए छात्र आगे चलकर इन क्षेत्रों में करियर बना सकते हैं—
हर IIM की प्रवेश प्रक्रिया, पात्रता, कटऑफ और चयन मानदंड अलग हो सकते हैं। इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित IIM की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर योग्यता, आवेदन तिथि और चयन प्रक्रिया की पूरी जानकारी जरूर जांच लें। कई संस्थानों में एडमिशन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा के आधार पर IIM अहमदाबाद, IIM बैंगलोर और IIM कोझिकोड प्रमुख संस्थानों में शामिल हैं। यदि आपका लक्ष्य प्रतिष्ठित मैनेजमेंट संस्थान से पढ़ाई करना है, तो JEE स्कोर आपके लिए एक नया अवसर साबित हो सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
GATE 2027 Exam Schedule: IIT Madras ने GATE 2027 परीक्षा का आधिकारिक शेड्यूल जारी कर दिया है। परीक्षा 6, 7, 14, 15, 20 और 21 फरवरी 2027 को दो शिफ्ट में आयोजित होगी। इस बार 5 साल बाद सिलेबस में बड़ा बदलाव किया गया है और Robotics & Automation का नया पेपर भी शामिल किया गया है। देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं में शामिल Graduate Aptitude Test in Engineering (GATE) 2027 का आधिकारिक शेड्यूल जारी कर दिया गया है। IIT Madras द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, परीक्षा फरवरी 2027 में छह दिनों तक आयोजित होगी। GATE स्कोर के जरिए देश के प्रमुख IIT, IISc, NIT और अन्य संस्थानों में M.Tech., M.E., M.S., Direct Ph.D. जैसे कार्यक्रमों में प्रवेश के साथ-साथ कई PSU (Public Sector Undertaking) कंपनियों में भर्ती का अवसर भी मिलता है। GATE 2027 परीक्षा तिथियां 6 फरवरी 2027 7 फरवरी 2027 14 फरवरी 2027 15 फरवरी 2027 20 फरवरी 2027 21 फरवरी 2027 परीक्षा सभी दिनों में दो शिफ्ट में आयोजित होगी— पहली शिफ्ट: सुबह 9:30 बजे से 12:30 बजे तक दूसरी शिफ्ट: दोपहर 2:30 बजे से 5:30 बजे तक इस बार क्या हैं बड़े बदलाव? 5 साल बाद बदला सिलेबस GATE 2027 में लगभग पांच साल बाद सभी टेस्ट पेपरों के सिलेबस में संशोधन किया गया है। इसलिए अभ्यर्थियों को नई परीक्षा संरचना के अनुसार अपनी तैयारी की रणनीति बनानी होगी।
रांची। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने NEET UG 2026 का परिणाम जारी कर दिया है। इस बार झारखंड के छात्रों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राज्य का गौरव बढ़ाया है। सुहर्ष कुमार गुप्ता ने 99.9771 पर्सेंटाइल के साथ ऑल इंडिया रैंक (AIR) 455 हासिल कर झारखंड के स्टेट टॉपर बनने का गौरव प्राप्त किया। वहीं रांची के ज्ञानेंद्र गर्व ने 99.96 पर्सेंटाइल और 655 अंक हासिल करते हुए AIR 676 प्राप्त की। ज्ञानेंद्र गर्व की इस उपलब्धि से उनके परिवार और शिक्षकों में खुशी की लहर है। उनके पिता मयंक भूषण गढ़वा में एसडीओ के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी मां कुमारी अंजली सरकारी शिक्षिका हैं। ज्ञानेंद्र ने अपनी दसवीं की पढ़ाई डीएवी कपिलदेव स्कूल, रांची से और बारहवीं की पढ़ाई जेवीएम श्यामली से पूरी की है। रांची के अन्य विद्यार्थियों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया रांची के अन्य विद्यार्थियों ने भी परीक्षा में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। अक्षत प्रेम ने 642 अंक के साथ AIR 2034, साकिब अहमद ने 640 अंक के साथ AIR 2282, मयंक कुमार ने AIR 3211 और सर्वजीत ने AIR 4271 हासिल की। इस वर्ष रांची से लगभग 10 हजार अभ्यर्थी NEET UG परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें कई छात्रों ने शानदार सफलता दर्ज की। इस बार NEET UG 2026 का परिणाम ऐसे समय आया है, जब पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा दोबारा आयोजित की गई थी। इसके बावजूद देशभर के लाखों अभ्यर्थियों ने परीक्षा में हिस्सा लिया। NTA के अनुसार, 11.21 लाख उम्मीदवार मेडिकल, डेंटल, आयुष और अन्य स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए क्वालिफाई हुए हैं। अब सफल अभ्यर्थी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए होने वाली काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड के छात्रों का यह प्रदर्शन राज्य में चिकित्सा शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता, बेहतर शैक्षणिक माहौल और लगातार मेहनत का सकारात्मक संकेत है।
IIT Delhi AI Certificate Course 2026: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए अच्छी खबर है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली ने Applied Quantum Computing and AI में नया 6.5 महीने का ऑनलाइन सर्टिफिकेट प्रोग्राम शुरू किया है। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें प्रवेश के लिए JEE स्कोर की आवश्यकता नहीं है। यह कोर्स उन प्रोफेशनल्स के लिए तैयार किया गया है जो नई तकनीकों में अपने कौशल को बेहतर बनाकर करियर में आगे बढ़ना चाहते हैं। IIT Delhi ने जारी किया आधिकारिक नोटिस IIT दिल्ली ने अपने नोटिस में बताया है कि Applied Quantum Computing and AI Certificate Programme को इंडस्ट्री की मौजूदा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इस कोर्स के माध्यम से प्रतिभागियों को क्वांटम कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकों से जुड़े व्यावहारिक ज्ञान के साथ उद्योग-उन्मुख स्किल्स भी सिखाई जाएंगी। आवेदन की अंतिम तिथि इच्छुक उम्मीदवार इस सर्टिफिकेट प्रोग्राम के लिए 15 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। 6.5 महीने का ऑनलाइन प्रोग्राम यह कोर्स पूरी तरह ऑनलाइन मोड में संचालित किया जाएगा, जिससे वर्किंग प्रोफेशनल्स अपनी नौकरी के साथ भी इसे आसानी से पूरा कर सकेंगे। इसके अलावा, प्रतिभागियों को IIT Delhi कैंपस विजिट का अवसर भी मिलेगा, जहां वे संस्थान के अकादमिक वातावरण और विशेषज्ञों के साथ सीखने का अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। किन लोगों के लिए है यह कोर्स? यह कार्यक्रम विशेष रूप से उन उम्मीदवारों के लिए डिजाइन किया गया है जो: AI और Quantum Computing में नई स्किल्स सीखना चाहते हैं। टेक्नोलॉजी सेक्टर में अपने करियर को आगे बढ़ाना चाहते हैं। इंडस्ट्री-ओरिएंटेड और एडवांस तकनीकी ज्ञान हासिल करना चाहते हैं। नौकरी के साथ ऑनलाइन सीखने का विकल्प चाहते हैं। आवेदन कैसे करें? उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करके आवेदन कर सकते हैं: IIT Delhi CEP के आधिकारिक पोर्टल पर जाएं। Applied Quantum Computing and AI Certificate Programme चुनें। ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें। आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। निर्धारित शुल्क का भुगतान कर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। कोर्स की मुख्य विशेषताएं संस्थान: IIT Delhi कोर्स: Applied Quantum Computing and AI अवधि: 6.5 महीने मोड: ऑनलाइन कैंपस इमर्शन का अवसर JEE स्कोर की आवश्यकता नहीं वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए विशेष रूप से डिजाइन आवेदन की अंतिम तिथि: 15 अक्टूबर 2026 AI और Quantum Computing आने वाले वर्षों की सबसे तेजी से बढ़ती तकनीकों में शामिल हैं। ऐसे में IIT Delhi का यह सर्टिफिकेट प्रोग्राम उन प्रोफेशनल्स के लिए एक बेहतरीन अवसर हो सकता है जो भविष्य की तकनीकों में विशेषज्ञता हासिल कर अपने करियर को नई दिशा देना चाहते हैं।