JEE Main 2026

Students discussing BTech college options after securing around 1 lakh rank in JEE Main.
JEE Main में 1 लाख रैंक पर कौन सा कॉलेज मिल सकता है? जानें बेस्ट BTech ऑप्शंस

Best BTech College: जेईई मेन में करीब 1 लाख रैंक (लगभग 93 परसेंटाइल) हासिल करने वाले छात्रों के मन में अक्सर यह सवाल होता है कि क्या उन्हें अच्छा इंजीनियरिंग कॉलेज मिलेगा। भले ही इस रैंक पर टॉप NITs में Computer Science Engineering (CSE) मिलना मुश्किल हो, लेकिन देश में कई सरकारी और निजी संस्थान ऐसे हैं जहां अच्छी ब्रांच और बेहतर प्लेसमेंट के अवसर उपलब्ध हैं। CSAB राउंड में बढ़ जाते हैं मौके अगर आपकी रैंक लगभग 1 लाख है, तो JoSAA के सामान्य राउंड्स के बाद होने वाले CSAB Special Rounds पर नजर रखना जरूरी है। कई सीटें खाली रहने के कारण इन राउंड्स में बेहतर कॉलेज और ब्रांच मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इन NITs में मिल सकती हैं कोर ब्रांच होम स्टेट कोटा का लाभ मिलने पर कुछ NITs में एडमिशन की संभावना बनती है। इनमें शामिल हैं— NIT Hamirpur NIT Jalandhar NIT Raipur वहीं, निम्न NITs में Civil, Mechanical और Electrical जैसी कोर ब्रांच मिलने के अवसर रहते हैं— NIT Agartala NIT Nagaland NIT Mizoram NIT Sikkim GFTI संस्थान भी हैं शानदार विकल्प Government Funded Technical Institutes (GFTIs) कम फीस और संतोषजनक प्लेसमेंट के कारण अच्छे विकल्प माने जाते हैं। इन संस्थानों पर विचार किया जा सकता है— SLIET Longowal – Mechanical और Chemical Engineering Assam University Silchar – Electronics और Agriculture Engineering Tezpur University Gurukula Kangri University स्टेट काउंसलिंग से भी मिल सकते हैं अच्छे कॉलेज राज्य स्तरीय काउंसलिंग में कई प्रतिष्ठित सरकारी कॉलेज उपलब्ध होते हैं। उत्तर प्रदेश (UPTAC) IET Lucknow HBTU Kanpur हरियाणा YMCA Faridabad UIET Kurukshetra मध्य प्रदेश SGSITS Indore इन कॉलेजों में कई बार कोर ब्रांच या IT एवं Electronics जैसी शाखाओं में प्रवेश मिल जाता है। प्राइवेट यूनिवर्सिटीज भी हैं अच्छा विकल्प यदि आपकी प्राथमिकता CSE, IT या नई स्पेशलाइजेशन ब्रांच हैं, तो ये संस्थान बेहतर विकल्प हो सकते हैं— SRM University Chennai KIIT Bhubaneswar Thapar Institute of Engineering and Technology, Patiala LNMIIT Jaipur इन संस्थानों में 1 लाख रैंक पर भी CSE से संबंधित कुछ स्पेशलाइज्ड कोर्स या अन्य कंप्यूटर आधारित शाखाओं में प्रवेश मिलने की संभावना रहती है।  

surbhi जून 6, 2026 0
Students checking JoSAA 2026 opening and closing ranks for IIT and NIT admissions
JoSAA Opening Closing Rank 2026: किस रैंक पर मिलेगा कौन सा IIT और NIT? समझें पूरा काउंसलिंग ट्रेंड

JEE Main और JEE Advanced 2026 के परिणाम जारी होने के बाद अब लाखों छात्रों की नजर JoSAA काउंसलिंग पर टिकी हुई है। हर अभ्यर्थी यह जानना चाहता है कि उसकी रैंक के आधार पर कौन सा IIT, NIT या पसंदीदा ब्रांच मिलने की संभावना है। कॉलेज चयन के दौरान सबसे महत्वपूर्ण भूमिका Opening Rank और Closing Rank निभाती हैं। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर छात्र अपने लिए बेहतर विकल्प तय करते हैं। आइए समझते हैं कि JoSAA Opening Closing Rank 2026 का ट्रेंड क्या संकेत देता है और आपकी रैंक पर कौन से संस्थान मिल सकते हैं। क्या होती है Opening और Closing Rank? JoSAA काउंसलिंग में किसी कॉलेज और ब्रांच के लिए जिस सर्वोच्च रैंक वाले उम्मीदवार को पहली सीट आवंटित होती है, उसे Opening Rank कहा जाता है। वहीं, जिस अंतिम रैंक तक सीटें भर जाती हैं और प्रवेश प्रक्रिया बंद हो जाती है, उसे Closing Rank कहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कॉलेज चुनते समय छात्रों को पिछले वर्षों की Closing Rank को सबसे महत्वपूर्ण मानक के रूप में देखना चाहिए। यदि आपकी रैंक पिछले वर्ष की क्लोजिंग रैंक के आसपास या उससे बेहतर है, तो प्रवेश मिलने की संभावना मजबूत मानी जाती है। IITs में एडमिशन: कितनी रैंक पर कौन सा मौका? IITs में प्रवेश पूरी तरह JEE Advanced की ऑल इंडिया रैंक (AIR) पर आधारित होता है। टॉप IITs में कंप्यूटर साइंस IIT Bombay, IIT Delhi, IIT Madras, IIT Kanpur और IIT Kharagpur जैसे शीर्ष संस्थानों में कंप्यूटर साइंस शाखा पाने के लिए सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को आमतौर पर टॉप 400 रैंक के भीतर रहना पड़ता है। विशेष रूप से IIT Bombay में CSE की क्लोजिंग रैंक अक्सर 60-70 के आसपास ही समाप्त हो जाती है। कोर इंजीनियरिंग ब्रांच मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और सिविल जैसी प्रमुख शाखाओं के लिए शीर्ष IITs में सामान्यतः 1000 से 4500 रैंक के बीच अवसर बनते हैं। नए IITs में बेहतर अवसर IIT Bhilai, IIT Jammu, IIT Dharwad और IIT Goa जैसे नए IITs में 5000 से 10000 रैंक वाले छात्रों के लिए कंप्यूटर साइंस सहित कई लोकप्रिय शाखाओं में प्रवेश की संभावना बनी रहती है। NITs में प्रवेश के लिए कितनी रैंक चाहिए? NITs, IIITs और GFTIs में प्रवेश JEE Main की Common Rank List (CRL) के आधार पर होता है। साथ ही NITs में 50 प्रतिशत सीटें होम स्टेट उम्मीदवारों के लिए आरक्षित रहती हैं, जिससे संबंधित राज्य के छात्रों को अतिरिक्त लाभ मिलता है। Tier-1 NITs NIT Tiruchirappalli, NIT Surathkal और NIT Warangal जैसे शीर्ष NITs में: CSE के लिए रैंक लगभग 1500 से 4500 के भीतर होनी चाहिए। सिविल और मैकेनिकल जैसी कोर शाखाओं के लिए 25,000 से 30,000 तक की रैंक सुरक्षित मानी जाती है। Tier-2 NITs MNIT Jaipur, MNNIT Allahabad, NIT Calicut और NIT Rourkela में: CSE के लिए 5000 से 11,500 रैंक तक अवसर बन सकते हैं। कोर ब्रांचेज के लिए 35,000 से 50,000 तक की रैंक पर भी प्रवेश संभव है। नए और Tier-3 NITs NIT Patna, NIT Raipur, NIT Jalandhar और NIT Agartala में: CSE के लिए 12,000 से 22,000 तक रैंक पर अवसर मिल सकते हैं। सिविल और मैकेनिकल जैसी शाखाओं में 60,000 से 1 लाख या उससे अधिक रैंक तक प्रवेश के अवसर देखे जाते हैं। कैटेगरी और फीमेल कोटा का बड़ा असर JoSAA काउंसलिंग में OBC-NCL, EWS, SC और ST वर्ग के उम्मीदवारों को उनकी संबंधित कैटेगरी रैंक के आधार पर सीटें आवंटित की जाती हैं। इससे क्लोजिंग रैंक सामान्य वर्ग की तुलना में काफी आगे तक जाती है। इसके अलावा, छात्राओं के लिए उपलब्ध Female Supernumerary Seats भी बड़ा लाभ देती हैं। इस व्यवस्था के तहत कई बार लड़कियों को समान संस्थान और शाखा में सामान्य सीटों की तुलना में अधिक रैंक पर भी प्रवेश मिल जाता है। कॉलेज चुनते समय रखें इन बातों का ध्यान केवल कॉलेज नहीं, ब्रांच को भी प्राथमिकता दें। पिछले वर्षों की क्लोजिंग रैंक जरूर देखें। होम स्टेट कोटे का लाभ समझें। सभी काउंसलिंग राउंड में विकल्प भरें। मॉक अलॉटमेंट के आधार पर अपनी चॉइस लिस्ट अपडेट करें।

surbhi जून 5, 2026 0
JEE Main 2026
JEE Main 2026 का रिजल्ट जारी, वैष्णवी बनीं रांची की टॉपर

रांची। देश की प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE Main 2026 का परिणाम NTA ने जारी कर दिया है। इस बार सेशन-1 और सेशन-2 को मिलाकर कुल 16,04,854 छात्रों ने परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया था। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच 26 छात्रों ने 100 पर्सेंटाइल हासिल कर शीर्ष स्थान प्राप्त किया।   दक्षिण भारत का दबदबा बरकरार टॉप परफॉर्मर्स में दक्षिण भारत का दबदबा एक बार फिर देखने को मिला। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से 5-5 छात्रों ने 100 पर्सेंटाइल हासिल किया। वहीं राजस्थान के 4 छात्रों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। इससे साफ है कि इस बार भी दक्षिणी राज्यों के छात्रों ने बेहतरीन तैयारी का प्रदर्शन किया है।   रांची की वैष्णवी बनीं झारखंड टॉपर रांची  की वैष्णवी कुमारी ने 99.977 पर्सेंटाइल के साथ झारखंड में टॉप किया है। उनकी ऑल इंडिया रैंक 426 रही। खास बात यह है कि उन्होंने केवल पहले सेशन के आधार पर यह सफलता हासिल की और दूसरे सेशन में शामिल नहीं हुईं।   झारखंड के छात्रों का शानदार प्रदर्शन राज्य के अन्य छात्रों ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया। जमशेदपुर और धनबाद के कई छात्रों ने टॉप 10 में जगह बनाई, जिससे झारखंड की मजबूत उपस्थिति दर्ज हुई। यह परिणाम राज्य में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और तैयारी के स्तर को दर्शाता है।   कटऑफ और चयनित छात्रों का आंकड़ा इस वर्ष कुल 2,50,182 छात्रों को योग्य घोषित किया गया। सामान्य वर्ग की कटऑफ 93.41 पर्सेंटाइल रही, जबकि ईडब्ल्यूएस के लिए 82.41, ओबीसी के लिए 80.92, एससी के लिए 63.91 और एसटी के लिए 52.01 पर्सेंटाइल तय की गई।   कड़ी प्रतिस्पर्धा का संकेत 16 लाख से अधिक छात्रों में केवल 26 का 100 पर्सेंटाइल हासिल करना इस परीक्षा की कठिनाई और उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है। वहीं, झारखंड के छात्रों के प्रदर्शन ने राज्य का गौरव बढ़ाया है।

Unknown अप्रैल 21, 2026 0
Shubham Kumar from Bihar celebrates 100 percentile in both JEE Main 2026 sessions
JEE Main 2026: बिहार के शुभम कुमार ने रचा इतिहास, दोनों सेशन में 100 परसेंटाइल हासिल कर बने स्टार परफॉर्मर

देश की सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE Main 2026 के नतीजों में इस बार भी परिणामों में बिहार ने अपनी प्रतिभा का दमदार प्रदर्शन किया है। National Testing Agency (NTA) द्वारा जारी सेशन 2 के रिजल्ट में कुल 26 छात्रों ने 100 परसेंटाइल हासिल किया, जिनमें बिहार के Shubham Kumar का नाम खास तौर पर सुर्खियों में है। शुभम ने न सिर्फ सेशन 2 में, बल्कि सेशन 1 में भी 100 परसेंटाइल हासिल कर एक अनोखा रिकॉर्ड बना दिया है। वे दोनों सेशन में परफेक्ट स्कोर पाने वाले बिहार के इकलौते छात्र हैं। साधारण परिवार से निकलकर असाधारण उपलब्धि Shubham Kumar बिहार के गया जिले के नादरागंज इलाके के निवासी हैं। उनके पिता शिवकुमार एक हार्डवेयर दुकान चलाते हैं, जबकि उनकी मां कंचन देवी गृहिणी हैं। साधारण पृष्ठभूमि से आने के बावजूद शुभम ने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया है। उनकी बड़ी बहन प्रिय कुमारी IIT Patna से बीटेक कर रही हैं, जिससे घर में पहले से ही पढ़ाई का माहौल रहा। IIT बॉम्बे है सपना शुभम का अगला लक्ष्य IIT Bombay से कंप्यूटर साइंस में बीटेक करना है। IIT बॉम्बे का यह कोर्स हर साल टॉप रैंकर्स की पहली पसंद होता है, जहां से बेहतरीन प्लेसमेंट और ग्लोबल अवसर मिलते हैं। सेल्फ स्टडी से बनाई मजबूत नींव शुभम ने 10वीं तक बिना किसी ट्यूशन के सिर्फ सेल्फ स्टडी के दम पर पढ़ाई की। उन्होंने नजरथ अकैडमी से 10वीं और ब्रिटिश इंग्लिश स्कूल, गया से 12वीं पास की। इसके बाद बेहतर तैयारी के लिए वे कोटा गए, जहां उन्होंने जेईई की तैयारी को और धार दी। JEE Main 2026 कट-ऑफ (Session 2) General (UR): 93.4123549 EWS: 82.4164528 OBC: 80.9232583 SC: 63.9172792 ST: 52.0174712

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
Students checking JEE Main 2026 results online on laptop with exam stress and anticipation
JEE Main Session 2 Result 2026 आज जारी होने की संभावना, लाखों छात्रों का इंतजार खत्म–जानें Advanced की अहम तारीखें

देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में से एक JEE Main के सेशन 2 का रिजल्ट आज, 20 अप्रैल 2026 को जारी किया जा सकता है। National Testing Agency (NTA) किसी भी समय परिणाम घोषित कर सकता है, जिससे लाखों उम्मीदवारों का इंतजार खत्म होने वाला है। इस बार परीक्षा 2 अप्रैल से 9 अप्रैल 2026 के बीच आयोजित की गई थी, जबकि प्रोविजनल आंसर की 11 अप्रैल को जारी की गई थी। अब सभी की नजरें रिजल्ट पर टिकी हैं, जो आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध होगा। कहां और कैसे चेक करें रिजल्ट रिजल्ट जारी होते ही उम्मीदवार jeemain.nta.nic.in पर जाकर अपना स्कोरकार्ड देख सकते हैं। चेक करने के आसान स्टेप्स: ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं “JEE Main Session 2 Result 2026” लिंक पर क्लिक करें Application Number और Date of Birth दर्ज करें Submit पर क्लिक करें स्क्रीन पर रिजल्ट दिखाई देगा, इसे डाउनलोड और प्रिंट कर लें परीक्षा से जुड़े अहम अपडेट JEE Main Session 2 के लिए आवेदन प्रक्रिया 1 फरवरी से 25 फरवरी 2026 तक चली थी। परीक्षा शहर की जानकारी 22 मार्च को जारी हुई थी, जबकि एडमिट कार्ड परीक्षा से तीन दिन पहले उपलब्ध कराए गए थे। अब अगला लक्ष्य: JEE Advanced 2026 JEE Main में सफल उम्मीदवारों के लिए अगला कदम JEE Advanced है, जो देश के प्रतिष्ठित IITs में प्रवेश का रास्ता खोलता है। महत्वपूर्ण तारीखें: आवेदन शुरू: 23 अप्रैल 2026 आवेदन की अंतिम तिथि: 2 मई 2026 फीस जमा करने की आखिरी तारीख: 4 मई 2026 एडमिट कार्ड जारी: 11 मई 2026 परीक्षा तिथि: 17 मई 2026 रिजल्ट: 1 जून 2026 आगे की रणनीति क्या हो? जिन छात्रों का JEE Main में अच्छा स्कोर है, उनके लिए अब समय बेहद महत्वपूर्ण है। Advanced परीक्षा का स्तर अधिक चुनौतीपूर्ण होता है, इसलिए: कॉन्सेप्ट क्लियर रखें पिछले वर्षों के पेपर्स हल करें टाइम मैनेजमेंट पर ध्यान दें

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
Students appearing for JEE Main 2026 exam amid controversy over provisional answer key errors
JEE Main 2026 Answer Key विवाद: 300 से ज्यादा सवालों पर आपत्ति, शिक्षा मंत्रालय सख्त

  इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE Main 2026 को लेकर इस बार बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सेशन-2 की प्रोविजनल आंसर-की में भारी गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं, जहां 300 से अधिक सवालों के जवाबों को छात्रों ने चुनौती दी है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए Ministry of Education ने सख्त रुख अपनाया है और जांच के निर्देश दिए हैं। क्या है पूरा मामला? सूत्रों के अनुसार, 5 अप्रैल को हुई शिफ्ट-2 के केमिस्ट्री पेपर की आंसर-की में कई गलतियां पाई गईं। छात्रों ने बड़े पैमाने पर इन उत्तरों को चुनौती दी, जिसके बाद National Testing Agency (NTA) हरकत में आया। कुल 9 शिफ्ट में परीक्षा आयोजित हुई हर शिफ्ट में 75 सवाल कुल मिलाकर 675 सवालों की आंसर-की जारी हुई इनमें से लगभग आधे सवालों पर आपत्ति दर्ज की गई एक्सपर्ट कमेटी करेगी समीक्षा NTA ने एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया है, जो: सभी चैलेंज किए गए सवालों की समीक्षा करेगी सही जवाब तय करेगी और उसी आधार पर फाइनल आंसर-की जारी की जाएगी शिक्षा मंत्रालय ने साफ कहा है कि फाइनल आंसर-की में किसी भी तरह की गलती नहीं होनी चाहिए। हर साल क्यों उठता है विवाद? JEE Main में आंसर-की विवाद कोई नया मुद्दा नहीं है। हर साल: बड़ी संख्या में छात्र उत्तरों को चुनौती देते हैं कुछ सवाल ड्रॉप किए जाते हैं और कई बार आंसर-की में बदलाव भी होता है इस साल भी पहले सेशन में: मैथ्स के 2 सवाल फिजिक्स के 7 सवाल ड्रॉप किए गए थे, जबकि 5 उत्तरों में बदलाव किया गया था। रिजल्ट और आगे की प्रक्रिया JEE Main 2026 सेशन-2 का रिजल्ट 20 अप्रैल तक जारी हो सकता है इसके बाद JEE Advanced के लिए आवेदन शुरू होंगे रजिस्ट्रेशन: 23 अप्रैल से 2 मई तक परीक्षा तिथि: 17 मई 2026 JEE Main के फाइनल रिजल्ट के आधार पर लगभग 2.5 लाख उम्मीदवार JEE Advanced के लिए क्वालिफाई करेंगे।

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
JEE Main Session 2
JEE Main Session 2 की परीक्षा 2 अप्रैल से

रांची। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की ओर से JEE Main के दूसरे सत्र की परीक्षा 2 अप्रैल से शुरू होने जा रही है। इसके एडमिट कार्ड भी जारी कर दिए गए हैं, जिन्हें छात्र NTA की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं। कब कौन सा पेपर JEE Main के शेड्यूल के अनुसार पेपर वन (बीई-बीटेक) 2, 4, 5, 6 और 8 अप्रैल को होगा। वहीं पेपर टूए (बीआर्क), पेपर टूबी (बी प्लानिंग) और दोनों का संयुक्त पेपर 7 अप्रैल को होगी।   13 भाषाओं  में परीक्षा छात्रों के लिए अच्छी बात यह है कि परीक्षा हिंदी, अंग्रेजी समेत कुल 13 क्षेत्रीय भाषाओं में ली जा रही है। इससे अलग-अलग राज्यों के छात्रों को अपनी भाषा में परीक्षा देने में आसानी होगी।   एनसीईआरटी से करें मजबूत तैयारी विशेषज्ञों का कहना है कि JEE Main का पूरा सिलेबस 11वीं और 12वीं की NCERT किताबों पर आधारित होता है। इसलिए छात्रों को सलाह दी गई है कि वे बेसिक्स मजबूत करने के लिए NCERT पर खास ध्यान दें।   बीई-बीटेक में 75 सवाल, 300 अंक का पेपर पेपर वन (बीई-बीटेक) तीन घंटे का होगा। इसमें फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स से कुल 75 सवाल पूछे जाएंगे। हर विषय से 25-25 प्रश्न होंगे। इनमें 20 बहुविकल्पीय और 5 संख्यात्मक सवाल होंगे। पूरा पेपर 300 अंकों का होगा और हर सही जवाब पर 4 अंक मिलेंगे।   बीआर्क और बी प्लानिंग का पैटर्न पेपर टूए (बीआर्क) में गणित, सामान्य योग्यता और ड्राइंग से कुल 77 प्रश्न पूछे जाएंगे। वहीं पेपर टूबी (बी प्लानिंग) में गणित, सामान्य योग्यता और प्लानिंग से 100 प्रश्न होंगे। ध्यान देने वाली बात यह है कि ड्राइंग को छोड़कर बाकी सभी पेपर कंप्यूटर आधारित होंगे।   ऑनलाइन होगी परीक्षा, समय का रखें खास ध्यान पूरी परीक्षा ऑनलाइन मोड में ली जाएगी, इसलिए छात्रों को समय प्रबंधन और स्क्रीन पर सवाल हल करने की आदत जरूरी है।

Unknown मार्च 31, 2026 0
JEE Main Session 2 admit card displayed on laptop screen with exam details and candidate login page
JEE Main Session 2 Admit Card 2026 OUT: एडमिट कार्ड जारी, यहां से करें डायरेक्ट डाउनलोड

JEE Main Session 2 Admit Card 2026: जेईई मेन सेशन 2 के उम्मीदवारों का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिया है। जो उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होने जा रहे हैं, वे आधिकारिक वेबसाइट jeemain.nta.nic.in पर जाकर अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। कब से शुरू होगी परीक्षा? JEE Main Session 2 की परीक्षा 2 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 9 अप्रैल 2026 तक आयोजित की जाएगी। इससे पहले NTA ने एग्जाम सिटी स्लिप जारी कर दी थी और अब एडमिट कार्ड भी उपलब्ध करा दिया गया है। ऐसे डाउनलोड करें एडमिट कार्ड सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट jeemain.nta.nic.in पर जाएं। होमपेज पर “JEE Main Session 2 Admit Card 2026” लिंक पर क्लिक करें। अपना Application Number, Date of Birth और Security Pin दर्ज करें। लॉगिन करते ही एडमिट कार्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा। इसे डाउनलोड करें और प्रिंटआउट निकाल लें। परीक्षा से पहले इन बातों का रखें ध्यान परीक्षा के दिन एडमिट कार्ड अनिवार्य है, इसके बिना एंट्री नहीं मिलेगी। साथ में एक वैध फोटो आईडी प्रूफ जरूर लेकर जाएं। एडमिट कार्ड में दी गई सभी डिटेल्स (नाम, सेंटर, तारीख) ध्यान से चेक करें। परीक्षा केंद्र पर समय से पहले पहुंचें। एडमिट कार्ड में दिए गए सभी दिशा-निर्देश (Guidelines) को ध्यान से पढ़ें।

surbhi मार्च 30, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0