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JoSAA 2026 Rank vs College Guide

JoSAA Opening Closing Rank 2026: किस रैंक पर मिलेगा कौन सा IIT और NIT? समझें पूरा काउंसलिंग ट्रेंड

surbhi जून 5, 2026 0
Students checking JoSAA 2026 opening and closing ranks for IIT and NIT admissions
JoSAA Opening Closing Rank 2026 IIT NIT Admission

JEE Main और JEE Advanced 2026 के परिणाम जारी होने के बाद अब लाखों छात्रों की नजर JoSAA काउंसलिंग पर टिकी हुई है। हर अभ्यर्थी यह जानना चाहता है कि उसकी रैंक के आधार पर कौन सा IIT, NIT या पसंदीदा ब्रांच मिलने की संभावना है।

कॉलेज चयन के दौरान सबसे महत्वपूर्ण भूमिका Opening Rank और Closing Rank निभाती हैं। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर छात्र अपने लिए बेहतर विकल्प तय करते हैं। आइए समझते हैं कि JoSAA Opening Closing Rank 2026 का ट्रेंड क्या संकेत देता है और आपकी रैंक पर कौन से संस्थान मिल सकते हैं।

क्या होती है Opening और Closing Rank?

JoSAA काउंसलिंग में किसी कॉलेज और ब्रांच के लिए जिस सर्वोच्च रैंक वाले उम्मीदवार को पहली सीट आवंटित होती है, उसे Opening Rank कहा जाता है।

वहीं, जिस अंतिम रैंक तक सीटें भर जाती हैं और प्रवेश प्रक्रिया बंद हो जाती है, उसे Closing Rank कहते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, कॉलेज चुनते समय छात्रों को पिछले वर्षों की Closing Rank को सबसे महत्वपूर्ण मानक के रूप में देखना चाहिए। यदि आपकी रैंक पिछले वर्ष की क्लोजिंग रैंक के आसपास या उससे बेहतर है, तो प्रवेश मिलने की संभावना मजबूत मानी जाती है।

IITs में एडमिशन: कितनी रैंक पर कौन सा मौका?

IITs में प्रवेश पूरी तरह JEE Advanced की ऑल इंडिया रैंक (AIR) पर आधारित होता है।

टॉप IITs में कंप्यूटर साइंस

IIT Bombay, IIT Delhi, IIT Madras, IIT Kanpur और IIT Kharagpur जैसे शीर्ष संस्थानों में कंप्यूटर साइंस शाखा पाने के लिए सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को आमतौर पर टॉप 400 रैंक के भीतर रहना पड़ता है।

विशेष रूप से IIT Bombay में CSE की क्लोजिंग रैंक अक्सर 60-70 के आसपास ही समाप्त हो जाती है।

कोर इंजीनियरिंग ब्रांच

मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और सिविल जैसी प्रमुख शाखाओं के लिए शीर्ष IITs में सामान्यतः 1000 से 4500 रैंक के बीच अवसर बनते हैं।

नए IITs में बेहतर अवसर

IIT Bhilai, IIT Jammu, IIT Dharwad और IIT Goa जैसे नए IITs में 5000 से 10000 रैंक वाले छात्रों के लिए कंप्यूटर साइंस सहित कई लोकप्रिय शाखाओं में प्रवेश की संभावना बनी रहती है।

NITs में प्रवेश के लिए कितनी रैंक चाहिए?

NITs, IIITs और GFTIs में प्रवेश JEE Main की Common Rank List (CRL) के आधार पर होता है।

साथ ही NITs में 50 प्रतिशत सीटें होम स्टेट उम्मीदवारों के लिए आरक्षित रहती हैं, जिससे संबंधित राज्य के छात्रों को अतिरिक्त लाभ मिलता है।

Tier-1 NITs

NIT Tiruchirappalli, NIT Surathkal और NIT Warangal जैसे शीर्ष NITs में:

  • CSE के लिए रैंक लगभग 1500 से 4500 के भीतर होनी चाहिए।
  • सिविल और मैकेनिकल जैसी कोर शाखाओं के लिए 25,000 से 30,000 तक की रैंक सुरक्षित मानी जाती है।

Tier-2 NITs

MNIT Jaipur, MNNIT Allahabad, NIT Calicut और NIT Rourkela में:

  • CSE के लिए 5000 से 11,500 रैंक तक अवसर बन सकते हैं।
  • कोर ब्रांचेज के लिए 35,000 से 50,000 तक की रैंक पर भी प्रवेश संभव है।

नए और Tier-3 NITs

NIT Patna, NIT Raipur, NIT Jalandhar और NIT Agartala में:

  • CSE के लिए 12,000 से 22,000 तक रैंक पर अवसर मिल सकते हैं।
  • सिविल और मैकेनिकल जैसी शाखाओं में 60,000 से 1 लाख या उससे अधिक रैंक तक प्रवेश के अवसर देखे जाते हैं।

कैटेगरी और फीमेल कोटा का बड़ा असर

JoSAA काउंसलिंग में OBC-NCL, EWS, SC और ST वर्ग के उम्मीदवारों को उनकी संबंधित कैटेगरी रैंक के आधार पर सीटें आवंटित की जाती हैं। इससे क्लोजिंग रैंक सामान्य वर्ग की तुलना में काफी आगे तक जाती है।

इसके अलावा, छात्राओं के लिए उपलब्ध Female Supernumerary Seats भी बड़ा लाभ देती हैं। इस व्यवस्था के तहत कई बार लड़कियों को समान संस्थान और शाखा में सामान्य सीटों की तुलना में अधिक रैंक पर भी प्रवेश मिल जाता है।

कॉलेज चुनते समय रखें इन बातों का ध्यान

  • केवल कॉलेज नहीं, ब्रांच को भी प्राथमिकता दें।
  • पिछले वर्षों की क्लोजिंग रैंक जरूर देखें।
  • होम स्टेट कोटे का लाभ समझें।
  • सभी काउंसलिंग राउंड में विकल्प भरें।
  • मॉक अलॉटमेंट के आधार पर अपनी चॉइस लिस्ट अपडेट करें।
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। UGC-NET जून 2026 की अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र विषयों की परीक्षाएं रद्द कर दोबारा कराने के फैसले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब गलती परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी की है, तो उसकी कीमत छात्रों को क्यों चुकानी पड़ रही है।   तीन विषयों की परीक्षा दोबारा होगी     NTA ने UGC-NET जून 2026 के तीन विषयों की परीक्षाओं को रद्द कर दोबारा आयोजित कराने का फैसला किया है। इन विषयों में अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र शामिल हैं। विशेषज्ञ समिति की समीक्षा में प्रश्नपत्रों में तथ्यात्मक गलतियां, भाषा संबंधी खामियां, अनुवाद की त्रुटियां और पुराने प्रश्नों के दोहराए जाने जैसी समस्याएं सामने आईं।   इन तीनों विषयों की पुनर्परीक्षा 9 और 10 सितंबर 2026 को आयोजित की जाएगी। प्रभावित अभ्यर्थियों से दोबारा परीक्षा के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। बाकी 84 विषयों की परीक्षा पर इस फैसले का असर नहीं पड़ेगा।   राहुल गांधी ने NTA की जवाबदेही पर उठाए सवाल     राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और NTA को निशाने पर लेते हुए कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में हुई गलती का खामियाजा उन छात्रों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्होंने महीनों तक मेहनत की थी। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।   कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमला तेज कर दिया है। पार्टी नेताओं ने सवाल उठाया कि यदि प्रश्नपत्र में गंभीर गड़बड़ियां थीं तो उन्हें परीक्षा के तुरंत बाद क्यों नहीं पकड़ा गया और छात्रों को करीब दो महीने बाद दोबारा परीक्षा देने की स्थिति में क्यों पहुंचाया गया।   प्रश्नपत्रों में पुराने सवाल दोहराए जाने का मामला     UGC-NET विवाद में प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता और पुराने प्रश्नों के दोहराए जाने को लेकर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक समाजशास्त्र के प्रश्नपत्र में 150 में से 67 सवाल पहले पूछे गए प्रश्नों से हूबहू या बेहद मिलते-जुलते पाए गए। इसके अलावा कुछ प्रश्नों में नाम और अन्य तथ्यात्मक गलतियां भी सामने आईं।   मामले के बाद NTA की परीक्षा व्यवस्था में भी बड़े बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षा प्रणाली की समीक्षा शुरू की है और रिपोर्टों के अनुसार NTA में 50 से अधिक कर्मचारियों को हटाया गया है, जबकि परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नए विशेषज्ञों और वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई है।

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लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश को देखते हुए कई जिलों में स्कूल बंद करने का फैसला लिया गया है। बहराइच और रायबरेली जिला प्रशासन ने कक्षा 1 से 8 तक के स्कूलों को बंद रखने का आदेश जारी किया है। यह फैसला बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। प्रदेश में मानसूनी बारिश का दौर लगातार जारी है। मौसम विभाग के अनुसार 19 से 23 अगस्त तक उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं 20 और 21 अगस्त को पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान है।   बहराइच और रायबरेली में स्कूल बंद   भारी बारिश और मौसम की स्थिति को देखते हुए बहराइच और रायबरेली में प्रशासन ने कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल बंद रखने का आदेश दिया है। प्रशासन ने खराब मौसम और जलभराव जैसी संभावित परिस्थितियों को देखते हुए यह कदम उठाया है।   प्रदेश में सामान्य से 20 फीसदी कम बारिश   क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक, 17 अगस्त तक उत्तर प्रदेश में 398.6 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में 496.3 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। इस लिहाज से प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 20 फीसदी कम बारिश हुई है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश की कमी 27 फीसदी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में करीब 8 फीसदी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में होने वाली बारिश से इस कमी में कुछ हद तक भरपाई हो सकती है।   इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट   मौसम विभाग ने आज चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, प्रतापगढ़, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, भदोही, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बाराबंकी, रामपुर, बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर समेत आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। प्रशासन और मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की अपील की है।

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जमशेदपुर में छात्रों को संबोधित करते आनंद कुमार
रटने से नहीं, इनोवेटिव सोच से मिलेगी सफलता, जमशेदपुर में छात्रों को आनंद कुमार ने दिया मंत्र

जमशेदपुर। ‘सुपर 30’ के संस्थापक और प्रसिद्ध गणितज्ञ आनंद कुमार ने छात्रों को सफलता का मंत्र देते हुए कहा कि केवल पढ़ाई को रटने से काम नहीं चलेगा। विद्यार्थियों को इनोवेटिव थिंकिंग विकसित करने के साथ समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता पर भी काम करना चाहिए। आनंद कुमार रविवार को एक्सएलआरआई के टाटा ऑडिटोरियम, जमशेदपुर में आयोजित अरका जैन विश्वविद्यालय के दो दिवसीय वार्षिक इंडक्शन समारोह ‘आरंभ-2026’ के उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से अपने अनुभव साझा किए और करियर, संघर्ष तथा कौशल विकास पर बात की।   रटने की आदत छोड़ने की दी सलाह     आनंद कुमार ने कहा कि विद्यार्थियों को रटने की आदत छोड़कर नए तरीके से सोचने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान खोजने की क्षमता भविष्य में छात्रों को आगे बढ़ने में मदद करेगी।   उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कोई भी काम करते समय यह सोच होनी चाहिए कि उसे और बेहतर तरीके से कैसे किया जा सकता है। उनके मुताबिक, सफलता केवल अच्छी नौकरी या बड़ा पैकेज हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि लगातार सीखते रहने और कुछ नया करने की सोच भी जरूरी है।   पेपर लीक से निराश न हों अभ्यर्थी     पेपर लीक की घटनाओं पर भी आनंद कुमार ने छात्रों से निराश नहीं होने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के कारण विद्यार्थियों को अपनी तैयारी और लक्ष्य से पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्हें उम्मीद है कि सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों से भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने में मदद मिलेगी।     सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां     ‘आरंभ-2026’ कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने छात्रों की प्रस्तुतियों की सराहना की। इस दौरान विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ अपनी रचनात्मकता और अन्य कौशल विकसित करने के लिए भी प्रेरित किया गया।  

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