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One Battle After Another Wins Best Picture at Oscars 2026

ऑस्कर 2026: ‘वन बैटल आफ्टर अनदर’ बनी बेस्ट पिक्चर, माइकल बी. जॉर्डन और जेसी बकले ने जीता बड़ा सम्मान

surbhi मार्च 16, 2026 0
Oscars 2026 winners Michael B. Jordan and Jessie Buckley celebrate as One Battle After Another wins Best Picture.
Oscars 2026 Best Picture and Acting Winners

 

दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म पुरस्कारों में से एक Academy Awards 2026 (98वां ऑस्कर) का भव्य आयोजन अमेरिका के लॉस एंजिल्स स्थित डॉल्बी थिएटर में किया गया। इस साल समारोह की मेजबानी मशहूर कॉमेडियन Conan O'Brien ने की।

इस बार ऑस्कर में कई बड़ी फिल्मों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला, लेकिन आखिरकार One Battle After Another ने बेस्ट पिक्चर का अवॉर्ड अपने नाम कर लिया।

 

माइकल बी. जॉर्डन बने बेस्ट एक्टर

फिल्म Sinners में शानदार अभिनय के लिए Michael B. Jordan को बेस्ट लीड एक्टर का ऑस्कर मिला। वहीं अभिनेत्री Jessie Buckley ने अपनी दमदार परफॉर्मेंस के दम पर बेस्ट एक्ट्रेस का खिताब जीता।

 

अन्य प्रमुख विजेता

  • Sentimental Value - बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म
     
  • Golden - बेस्ट ओरिजिनल सॉन्ग

 

ऑस्कर में भारत की मौजूदगी

इस साल ऑस्कर मंच पर भारत की मौजूदगी भी चर्चा में रही। ग्लोबल स्टार Priyanka Chopra Jonas इस बार समारोह में प्रेजेंटर के तौर पर नजर आईं और उन्होंने Robert Downey Jr. और Anne Hathaway जैसे सितारों के साथ मंच साझा किया।

वहीं भारतीय मूल की फिल्म निर्माता Geeta Gandbhir ने भी इतिहास रचा। उन्हें एक ही साल में दो अलग-अलग डॉक्यूमेंट्री प्रोजेक्ट्स के लिए नॉमिनेशन मिले-

  • The Perfect Neighbor (बेस्ट डॉक्यूमेंट्री फीचर)
     
  • The Devil Is Busy (बेस्ट डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट)
     

हालांकि भारत की आधिकारिक एंट्री Homebound अंतिम नॉमिनेशन में जगह नहीं बना सकी, लेकिन भारतीय फिल्मों Kantara: A Legend – Chapter 1, Tanvi The Great और Mahavatar Narasimha ने ‘बेस्ट पिक्चर’ की एलिजिबिलिटी सूची में जगह बनाकर वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

ऑस्कर 2026 का रेड कार्पेट समारोह भारतीय समयानुसार सुबह 3:30 बजे शुरू हुआ, जबकि अवॉर्ड सेरेमनी 4:30 बजे से लाइव स्ट्रीम हुई।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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‘धुरंधर 2’ की सफलता के बीच Ranveer Singh का स्टाइलिश अंदाज, फैंस बोले-रियल लाइफ में भी जसकीरत रंगी जैसे लग रहे

इन दिनों Ranveer Singh अपनी फिल्म Dhurandhar 2 की जबरदस्त सफलता को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म में उनके दमदार किरदार ‘हमजा अली मज़ारी’ को दर्शकों से खूब सराहना मिल रही है। इसी बीच रणवीर पहली बार पब्लिक इवेंट में नजर आए, जहां उनका नया लुक सोशल मीडिया पर छा गया। हाल ही में मुंबई के Nita Mukesh Ambani Cultural Centre (NMACC) की तीसरी एनिवर्सरी के मौके पर रणवीर सिंह स्टेज पर दिखाई दिए। इस दौरान उनका कॉन्फिडेंट अंदाज और हल्की मुस्कान ने फैंस का दिल जीत लिया। चॉकलेटी लुक में छाए रणवीर इवेंट में रणवीर सिंह अपने ऑन-स्क्रीन किरदार से अलग एक क्लीन और क्लासी लुक में नजर आए। बंद गला सूट छोटा हेयरकट क्लीन शेव उनका यह ट्रांसफॉर्मेशन इतना असरदार था कि सोशल मीडिया पर फैंस ने उन्हें “रियल लाइफ जसकीरत रंगी” तक कह दिया। कई यूजर्स ने उन्हें “अब तक का बेस्ट लुक” बताया। प्रमोशन से दूरी, फिर भी सुपरहिट दिलचस्प बात यह रही कि Ranveer Singh ने ‘धुरंधर’ और इसके सीक्वल के प्रमोशन से लगभग दूरी बनाए रखी। इसके बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है, जो उनके स्टारडम और फिल्म की मजबूत कहानी को दर्शाता है। फैंस के रिएक्शन सोशल मीडिया पर रणवीर के इस लुक और अंदाज की जमकर तारीफ हो रही है: “बॉलीवुड का असली धुरंधर” “रणवीर इस वक्त अपने बेस्ट फॉर्म में हैं” “इनके आगे बाकी स्टार्स फीके लगते हैं” इवेंट में जुटे सितारे इस खास मौके पर Salman Khan, Kiara Advani, Ananya Panday, Sidharth Malhotra और Jackie Shroff समेत कई बड़े सितारे शामिल हुए। फिल्म की कहानी और स्टारकास्ट Dhurandhar 2 एक हाई-ऑक्टेन थ्रिलर है, जो कंधार विमान अपहरण, 2001 संसद हमला और 26/11 मुंबई हमलों जैसी घटनाओं से प्रेरित है। फिल्म में भारत की खुफिया एजेंसियों की कार्रवाई और आतंकवाद के खिलाफ मिशन को दिखाया गया है। फिल्म का निर्देशन Aditya Dhar ने किया है। इसमें Arjun Rampal, R. Madhavan और अन्य कलाकार भी अहम भूमिकाओं में हैं।  

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‘राकासा’ हॉरर-थ्रिलर फिल्म में डर और रोमांच का डबल धमाका

चेन्नई, एजेंसियां। नई साउथ की हॉरर-थ्रिलर फिल्म ‘राकासा’ 3 मार्च, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई और डर और थ्रिल का अनुभव चाहने वाले दर्शकों के लिए तैयार है। लगभग 120 मिनट लंबी यह फिल्म दर्शकों को रोमांच और डर के मिश्रण में बांधे रखती है। फिल्म का निर्देशन मनसा शर्मा ने किया है, जबकि इसे निहारिका कोनिडेला ने प्रोड्यूस किया है।   कहानी: अनजाने में जगाई गई बुरी शक्ति फिल्म की कहानी मुख्य पात्र ईरा बाबू (वीरू) के इर्द-गिर्द घूमती है। एक दशक बाद विदेश से लौटे ईरा बाबू प्यार की तलाश में गांव में नशे में शराब पीकर एक सुनसान और भूतिया किले में पूरी रात सो जाता है। इस दौरान वह अनजाने में उस बुरी शक्ति को जगाता है जिससे गांववाले लंबे समय से डरते आए हैं। जैसे-जैसे खतरा बढ़ता है, ईरा बाबू और गांव के लोगों की जिंदगी दांव पर लग जाती है। कहानी में किले से जुड़े रहस्य और ईरा के साहसिक प्रयास फिल्म में रोमांच का मुख्य केंद्र हैं।   कास्ट और प्रदर्शन फिल्म की मुख्य भूमिका में संगीत शोभन ने वीरू का किरदार निभाया है, जबकि नयन सारिका ने मुख्य भूमिका निभाई है। इसके अलावा गेटअप श्रीनु, आशीष विद्यार्थी, तनिकेला भरणी और ब्रह्माजी ने अहम भूमिकाएं निभाईं। फिल्म का संगीत भी कहानी के डरावने माहौल को और प्रभावशाली बनाता है।   दर्शकों के लिए अनुभव ‘राकासा’ में हॉरर और थ्रिल का संतुलन बेहद प्रभावशाली है। छोटे से सुनसान किले में रात बिताने, डरावनी शक्तियों और रहस्यमयी घटनाओं के मिश्रण ने फिल्म को सिनेमा प्रेमियों और हॉरर फिल्म दर्शकों के लिए देखने योग्य बना दिया है।

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रणबीर कपूर की ‘रामायण’ पर टीवी की सीता दीपिका चिखलिया का रिएक्शन, बोलीं – “फिल्म का इंतजार है”

रणबीर कपूर की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘रामायण’ का टीजर रिलीज होते ही चर्चा में आ गया है। टीजर में रणबीर कपूर भगवान राम के किरदार में नजर आए, जिसे फैंस के साथ-साथ कई सेलेब्स ने भी खूब पसंद किया है। अब इस पर रामानंद सागर की ‘रामायण’ की सीता, यानी एक्ट्रेस दीपिका चिखलिया ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। दीपिका चिखलिया को कैसा लगा टीजर? दीपिका चिखलिया ने फिल्म के टीजर की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें यह काफी भव्य और खूबसूरत लगा। इंडिया टुडे से बातचीत में उन्होंने कहा: “मैंने टीजर देखा और ये बहुत ग्रैंड है। बहुत रिच लग रहा है। उन्होंने बहुत अच्छे से बनाया है। अब मैं फिल्म का इंतजार कर रही हूं। ये बहुत खूबसूरत लग रहा है, इसमें कोई शक नहीं है।” उनके इस बयान के बाद फैंस के बीच फिल्म को लेकर एक्साइटमेंट और बढ़ गई है। फिल्म ‘रामायण’ की स्टार कास्ट डायरेक्टर नितेश तिवारी की इस फिल्म में बड़ी स्टारकास्ट देखने को मिलेगी: रणबीर कपूर – भगवान राम साई पल्लवी – माता सीता रवी दुबे – लक्ष्मण सनी देओल – हनुमान फिल्म को नमित मल्होत्रा प्रोड्यूस कर रहे हैं। कब रिलीज होगी फिल्म? ‘रामायण’ को दो पार्ट में रिलीज किया जाएगा: पहला पार्ट – दिवाली 2026 दूसरा पार्ट – दिवाली 2027 कौन हैं दीपिका चिखलिया? दीपिका चिखलिया 1980 के दशक में आए रामानंद सागर के ‘रामायण’ में माता सीता का किरदार निभाकर घर-घर में मशहूर हुईं। इस शो में अरुण गोविल भगवान राम बने थे आज भी लोग दीपिका को “सीता मां” के रूप में याद करते हैं इसके अलावा उन्होंने कई फिल्मों में भी काम किया है, जैसे: सुन मेरी लैला, चीख, घर का चिराग, रुपये दस करोड़, खुदाई, गालिब आदि।  

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