फाइनेंस

Avaada Group को ₹12,800 करोड़ का लोन स्वीकृत, गुजरात और महाराष्ट्र में हरित ऊर्जा परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार

ranjan kumar tiwari जुलाई 31, 2026 0
अवाडा ग्रुप को सौर एवं ग्रीन एनर्जी परियोजनाओं के लिए ₹12,800 करोड़ का लोन स्वीकृत
Avaada Group Green Energy Loan SBI REC

SBI, Canara Bank और REC के नेतृत्व में देश के सबसे बड़े ग्रीन एनर्जी फाइनेंसिंग सौदों में शामिल डील

 

मुंबई, एजेंसियां। अक्षय ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Avaada Group को ₹12,800 करोड़ (करीब 1.3 अरब डॉलर) का टर्म लोन स्वीकृत हुआ है। यह वित्तपोषण भारतीय स्टेट बैंक (SBI), केनरा बैंक (Canara Bank) और Rural Electrification Corporation (REC) के नेतृत्व में उपलब्ध कराया गया है। इसे वर्ष 2026 के सबसे बड़े नवीकरणीय ऊर्जा वित्तपोषण सौदों में से एक माना जा रहा है।

 

गुजरात और महाराष्ट्र की परियोजनाओं पर होगा निवेश

 

कंपनी ने बताया कि यह राशि गुजरात और महाराष्ट्र में सौर एवं अन्य नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के विकास में लगाई जाएगी। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद कंपनी की स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और देश के ग्रीन एनर्जी लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।

 

ग्रीन एनर्जी सेक्टर में निवेशकों का बढ़ता भरोसा

 

Avaada Group के चेयरमैन विनीत मित्तल ने कहा कि यह फंडिंग भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं पर बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि कंपनी बड़े पैमाने पर सौर, पवन और हाइब्रिड ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार पर काम कर रही है।

 

भारत के ऊर्जा संक्रमण को मिलेगा बल

 

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। Avaada को मिला यह वित्तपोषण देश में हरित ऊर्जा अवसंरचना के विस्तार और निजी निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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लगातार तीसरे दिन शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 166 अंक चढ़ा; निफ्टी 24,350 के ऊपर बंद

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में बढ़त दर्ज की। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत, विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी और कई बड़ी कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों के दम पर निवेशकों का भरोसा मजबूत रहा। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 166 अंक चढ़कर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 24,350 के ऊपर बंद होने में सफल रहा।   बैंकिंग और ऑटो शेयरों में रही सबसे ज्यादा खरीदारी   दिनभर के कारोबार में बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और ऑटो सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे दिग्गज शेयरों ने बाजार को मजबूती दी। हालांकि आईटी और एफएमसीजी सेक्टर के कुछ शेयरों में सीमित दबाव बना रहा, लेकिन व्यापक बाजार का रुख सकारात्मक रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों ने भी बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया।   विदेशी निवेशकों की वापसी से बढ़ा बाजार का भरोसा   बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई के दौरान विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में वापसी और कंपनियों के उम्मीद से बेहतर तिमाही नतीजों ने बाजार को मजबूती दी है। जुलाई में विदेशी निवेशकों ने फिर से भारतीय शेयरों में निवेश बढ़ाया, जिससे बाजार की धारणा सकारात्मक बनी रही।   अगले सप्ताह इन संकेतकों पर रहेगी निवेशकों की नजर   विश्लेषकों के अनुसार अगले सप्ताह प्रमुख कंपनियों के तिमाही नतीजे, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, वैश्विक बाजारों का रुख और कच्चे तेल की कीमतें भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करेंगी। यदि वैश्विक संकेत अनुकूल बने रहे तो बाजार में तेजी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है।

abhishek singh जुलाई 31, 2026 0
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महिंद्रा लास्ट माइल मोबिलिटी ने जुटाए ₹322 करोड़, यूनिकॉर्न बनी कंपनी

लाइटरॉक के नेतृत्व में हुआ निवेश, कंपनी का मूल्यांकन ₹10,822 करोड़ पहुंचा; इलेक्ट्रिक लास्ट माइल मोबिलिटी विस्तार को मिलेगी रफ्तार   मुंबई, एजेंसियां। महिंद्रा समूह की इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहन इकाई महिंद्रा लास्ट माइल मोबिलिटी लिमिटेड (MLMML) ने फंडिंग राउंड में ₹322 करोड़ जुटाए हैं। इस निवेश का नेतृत्व वैश्विक इम्पैक्ट निवेशक Lightrock ने किया। इस निवेश के बाद कंपनी का मूल्यांकन ₹10,822 करोड़ (करीब 1.3 अरब डॉलर) पहुंच गया है, जिससे यह आधिकारिक तौर पर यूनिकॉर्न बन गई है।   इलेक्ट्रिक मोबिलिटी विस्तार पर होगा निवेश   कंपनी ने बताया कि जुटाई गई पूंजी का उपयोग इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर और लास्ट माइल मोबिलिटी कारोबार के विस्तार, नए उत्पादों के विकास, अनुसंधान एवं विकास और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में किया जाएगा। महिंद्रा की योजना देशभर में इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों की पहुंच को और मजबूत करने की है।   निवेशकों का बढ़ा भरोसा   महिंद्रा लास्ट माइल मोबिलिटी भारत के इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहन बाजार में अग्रणी कंपनियों में शामिल है। कंपनी पहले से ही इलेक्ट्रिक तीन-पहिया वाहनों के सेगमेंट में मजबूत पकड़ रखती है। नए निवेश को निवेशकों के बढ़ते भरोसे और भारत में स्वच्छ परिवहन की बढ़ती संभावनाओं का संकेत माना जा रहा है।   महिंद्रा समूह के लिए बड़ी उपलब्धि   महिंद्रा समूह के लिए यह फंडिंग एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। कंपनी का कहना है कि यह निवेश भारत में हरित परिवहन (Green Mobility) को बढ़ावा देने और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम को मजबूत करने में मदद करेगा।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 31, 2026 0
भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन तेजी और सेंसेक्स-निफ्टी में बढ़त का प्रतीकात्मक चित्र

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Zepto ने फिलहाल टाला IPO, प्री-IPO फंडिंग से ₹1,000 करोड़ जुटाने की तैयारी

वैल्यूएशन पर निवेशकों से सहमति नहीं बनने के बाद कंपनी का फैसला, मौजूदा निवेशकों से नई पूंजी जुटाने पर फोकस   बेंगलुरु, एजेंसियां। क्विक कॉमर्स कंपनी Zepto ने फिलहाल अपना IPO (Initial Public Offering) टालने का फैसला किया है। कंपनी अब शेयर बाजार में उतरने से पहले प्री-IPO फंडिंग के जरिए करीब ₹1,000 करोड़ जुटाने की तैयारी कर रही है। कंपनी का यह फैसला ऐसे समय आया है जब IPO की वैल्यूएशन को लेकर घरेलू म्यूचुअल फंड और संस्थागत निवेशकों के साथ सहमति नहीं बन सकी।   वैल्यूएशन बना सबसे बड़ा मुद्दा   सूत्रों के मुताबिक, Zepto अपने IPO के लिए जिस वैल्यूएशन की उम्मीद कर रही थी, उसे लेकर कई बड़े निवेशकों ने आपत्ति जताई। निवेशकों का मानना था कि मौजूदा बाजार परिस्थितियों में कंपनी का मूल्यांकन अधिक है। इसी वजह से कंपनी ने फिलहाल IPO प्रक्रिया को रोककर पहले अतिरिक्त पूंजी जुटाने का रास्ता चुना।   मौजूदा निवेशकों से जुटाएगी नई पूंजी   रिपोर्ट के अनुसार, Zepto करीब ₹1,000 करोड़ की प्री-IPO फंडिंग अपने मौजूदा निवेशकों से जुटा सकती है। यह फंड कंपनी के विस्तार, नए डार्क स्टोर खोलने, तकनीक को मजबूत करने और परिचालन क्षमता बढ़ाने में इस्तेमाल किया जाएगा।   IPO की योजना पूरी तरह रद्द नहीं   कंपनी ने IPO की योजना रद्द नहीं की है, बल्कि उसे फिलहाल टाला है। बाजार की परिस्थितियां अनुकूल होने और वैल्यूएशन पर सहमति बनने के बाद Zepto दोबारा शेयर बाजार में उतरने की तैयारी कर सकती है।   क्विक कॉमर्स सेक्टर में प्रतिस्पर्धा तेज   Zepto की प्रतिस्पर्धा Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और Flipkart Minutes जैसी कंपनियों से है। ऐसे में कंपनी फिलहाल अपने कारोबार और वित्तीय स्थिति को और मजबूत करने पर जोर दे रही है, ताकि भविष्य में सफल IPO लाया जा सके।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 31, 2026 0
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