नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चिप बनाने वाली दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में शामिल Nvidia ने भारत में अपने कर्मचारियों के लिए बड़ा तोहफा दिया है। कंपनी ने अपने लगभग 10,000 भारतीय कर्मचारियों में से अधिकांश को शेयर के रूप में आकर्षक बोनस प्रदान किया है, जिसकी कुल वैल्यू 5 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक बताई जा रही है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह बोनस एकमुश्त नहीं बल्कि अगले चार वर्षों में चरणबद्ध तरीके से कर्मचारियों को दिया जाएगा। यह “स्पेशल स्टॉक ग्रांट” कंपनी के सीईओ Jensen Huang की पहल का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत 2024 में की गई थी।
इस स्कीम के तहत कर्मचारियों को उनके मौजूदा Restricted Stock Units (RSU) का अतिरिक्त 25 प्रतिशत तक दिया जा रहा है। पहली किस्त 18 सितंबर 2024 को जारी की गई थी, और इसके बाद हर तिमाही 2028 तक भुगतान जारी रहेगा।
उदाहरण के तौर पर, एक मिड-लेवल कर्मचारी को 8 अतिरिक्त RSU मिले, जिनकी वैल्यू करीब 5.3 लाख रुपये है। यह उसकी पहले से मौजूद इक्विटी के अलावा है, जिससे उसकी कुल इक्विटी वैल्यू 1.2 करोड़ रुपये से भी अधिक हो गई।
Nvidia में कर्मचारियों की सैलरी का बड़ा हिस्सा अब स्टॉक बेस्ड पेमेंट पर निर्भर है। रिपोर्ट के मुताबिक:
AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच कंपनियां टॉप टैलेंट को बनाए रखने के लिए ऐसे बड़े स्टॉक अवॉर्ड दे रही हैं। Nvidia का यह कदम भारत में टेक टैलेंट को आकर्षित करने और बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली सर्राफा बाजार में सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल दर्ज किया गया। Silver की कीमत 4,300 रुपये बढ़कर 2.57 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई। वहीं Gold 800 रुपये की तेजी के साथ करीब 1.57 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे पहले चांदी 2.53 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। वैश्विक तनाव का बाजार पर असर सोना-चांदी की कीमतों में इस उछाल के पीछे प्रमुख कारण वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव है। विशेष रूप से United States और Iran के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर आकर्षित किया है। ऐसे माहौल में सोना और चांदी जैसे कीमती धातुओं की मांग बढ़ जाती है, जिससे कीमतों में तेजी आती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिला-जुला रुख हालांकि वैश्विक बाजार में सोने और चांदी के दाम में गिरावट देखने को मिली। हाजिर चांदी 1.35% गिरकर करीब 79.71 डॉलर प्रति औंस रही, जबकि सोना भी 0.52% गिरकर लगभग 4,805 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। विशेषज्ञों के अनुसार, डॉलर की मजबूती और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर दबाव बनाया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से बढ़ी चिंता Strait of Hormuz के आसपास बढ़ते तनाव ने ऊर्जा कीमतों और सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इससे वैश्विक बाजार में अस्थिरता बनी हुई है और निवेशकों का रुझान सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर बढ़ रहा है। आगे बाजार की दिशा क्या? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने-चांदी की कीमतें वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेंगी। खासकर अमेरिका-ईरान संबंध, कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी आर्थिक आंकड़े बाजार की दिशा तय करेंगे। यदि तनाव बढ़ता है, तो सोना-चांदी और महंगे हो सकते हैं, वहीं स्थिति सामान्य होने पर कीमतों में गिरावट भी संभव है।
देश की प्रमुख FMCG कंपनी Hindustan Unilever (HUL) को लेकर ICICI Securities ने सकारात्मक रुख अपनाया है। 20 अप्रैल 2026 को जारी अपनी ताज़ा रिसर्च रिपोर्ट में ब्रोकरेज हाउस ने HUL पर ‘BUY’ रेटिंग बरकरार रखते हुए शेयर का टारगेट प्राइस ₹2800 तय किया है, जो पहले ₹2700 था। महंगाई के दौर में HUL की मजबूत स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, FMCG सेक्टर में एक बार फिर कमोडिटी महंगाई के संकेत दिखाई दे रहे हैं। ऐसे माहौल में HUL जैसी बड़ी कंपनियां बेहतर स्थिति में रहती हैं क्योंकि उनके पास कीमतों में बढ़ोतरी (pricing power) करने की क्षमता होती है। ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो महंगाई के समय बड़ी कंपनियां कीमतों के जरिए ग्रोथ हासिल करती हैं, जिससे उनका रेवेन्यू मजबूत रहता है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कमोडिटी महंगाई और प्राइस हाइक के बीच समय अंतर होने के कारण निकट अवधि में मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है। लेकिन HUL के पास ऑपरेटिंग लीवरेज बढ़ाने के विकल्प मौजूद हैं, जैसे विज्ञापन खर्च में रणनीतिक कटौती। छोटे खिलाड़ियों पर दबाव, HUL को फायदा महंगाई का सबसे ज्यादा असर छोटे और क्षेत्रीय FMCG कंपनियों पर पड़ता है, जिससे उनकी यूनिट इकॉनॉमिक्स प्रभावित होती है। ऐसे में HUL जैसी बड़ी कंपनियों के लिए बाजार हिस्सेदारी (market share) बढ़ाने का मौका बनता है। किन बातों पर रहेगी नजर ICICI Securities ने कुछ प्रमुख संकेतकों पर ध्यान देने की सलाह दी है: उपभोक्ता मांग (consumer volume growth) कीमत बढ़ने के बाद मांग की लोच (demand elasticity) रिटेल स्तर पर प्राइस हाइक का असर ग्रोथ अनुमान और वैल्यूएशन ब्रोकरेज ने FY27 और FY28 के लिए EPS अनुमान में मामूली बदलाव किया है। रेवेन्यू CAGR: 10% EBITDA CAGR: 11% PAT CAGR: 10% (FY25–28E) टारगेट प्राइस ₹2800 पर HUL का वैल्यूएशन FY28 के अनुमानित EPS पर 49x P/E के आसपास बैठता है।
ब्रोकरेज फर्म ICICI Securities ने Yes Bank के शेयर पर ‘Hold’ रेटिंग बरकरार रखते हुए ₹21 का टारगेट प्राइस तय किया है। 19 अप्रैल 2026 की अपनी रिसर्च रिपोर्ट में ब्रोकरेज ने बैंक के ताजा नतीजों को मजबूत बताया, लेकिन भविष्य के जोखिमों को देखते हुए निवेशकों को फिलहाल होल्ड करने की सलाह दी है। Q4FY26 में दमदार प्रदर्शन Yes Bank ने चौथी तिमाही (Q4FY26) में बेहतर प्रदर्शन किया है। बैंक का शुद्ध मुनाफा (PAT) ₹10.7 अरब रहा, जो साल-दर-साल 45% की वृद्धि दर्शाता है। यह आंकड़ा अनुमान के अनुरूप रहा, लेकिन ₹3.4 अरब के कंटिजेंट प्रावधान को समायोजित करने पर प्रदर्शन और मजबूत नजर आता है। बैंक की नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) और CASA (Current Account Savings Account) में भी सुधार देखा गया है, जो बैंक की कोर ऑपरेटिंग मजबूती को दर्शाता है। एसेट क्वालिटी में सुधार, लेकिन जोखिम बरकरार रिपोर्ट के अनुसार, रिटेल स्लिपेज और SMA (Special Mention Accounts) में सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी यह स्तर लगभग 2.8% पर बना हुआ है, जो चिंता का विषय बना हुआ है। बैंक का RoA (Return on Assets) Q4 में 1% तक पहुंच गया, जबकि पूरे FY26 में यह 0.8% रहा। आगे चलकर FY27 में RoA के 1% के आसपास रहने का अनुमान है। NIM में बढ़त, RIDF का दबाव घटा Yes Bank ने सेक्टर में NIM पर दबाव के बावजूद बेहतर प्रदर्शन किया है। इसका एक बड़ा कारण RIDF (Rural Infrastructure Development Fund) का घटता प्रभाव है, जो अब कुल एसेट का करीब 6% रह गया है और FY27 तक 5% से नीचे आने की उम्मीद है। ब्रोकरेज का मानना है कि FY27-28 में NIM में और सुधार हो सकता है, हालांकि बढ़ते ऑपरेटिंग खर्च (opex) और SR (Security Receipts) रिकवरी में कमी इसका असर कम कर सकती है। कैपिटल पोजिशन मजबूत बैंक का CET-1 रेशियो 13.8% पर है, जो एक संतुलित और सुरक्षित पूंजी स्थिति को दर्शाता है। क्यों दी ‘Hold’ की सलाह? हालांकि बैंक के फंडामेंटल्स में सुधार दिख रहा है, लेकिन ICICI Securities ने टारगेट प्राइस को ₹24 से घटाकर ₹21 कर दिया है। इसके पीछे मुख्य कारण हैं: कोर प्रॉफिटेबिलिटी (PPOP) में और सुधार की जरूरत क्रेडिट कॉस्ट पर अनिश्चितता SR रिकवरी में संभावित गिरावट इसलिए ब्रोकरेज ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे अभी स्टॉक को होल्ड रखें और आगे के प्रदर्शन पर नजर बनाए रखें।