विधानसभा में 3568 करोड़ की अनुदान मांग मंजूर
झारखंड विधानसभा में शुक्रवार को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और महिला-बाल विकास विभाग से जुड़ी योजनाओं के लिए 3568.19 करोड़ रुपये की अनुदान मांग को मंजूरी दे दी गई। इस बजट का उद्देश्य सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के छात्रों को बेहतर शिक्षा और अवसर उपलब्ध कराना है।
चर्चा के दौरान सरकार की ओर से मंत्री Chamra Linda ने बताया कि झारखंड सरकार युवाओं को सिविल सेवा की तैयारी में मदद देने के लिए एक नई योजना शुरू करने जा रही है।
मंत्री चमरा लिंडा ने बताया कि सरकार राजधानी New Delhi में फ्लैट खरीदने की योजना बना रही है। इन फ्लैटों में झारखंड के चयनित छात्रों को रहने की सुविधा दी जाएगी और उन्हें IAS सहित अन्य सिविल सेवाओं की तैयारी के लिए कोचिंग कराई जाएगी।
सरकार का उद्देश्य है कि राज्य के आदिवासी, एससी, एसटी, अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्ग के प्रतिभाशाली छात्र बेहतर संसाधनों के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें।
सरकार की योजना के तहत अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए कमड़े क्षेत्र में पांच मंजिला कोचिंग संस्थान का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा ओबीसी छात्रों के लिए शहीद निर्मल महतो के नाम पर नगड़ा टोली में इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं JEE और NEET की तैयारी के लिए विशेष कोचिंग सेंटर शुरू किया जाएगा।
सरकार ने हर जिले में तीन मंजिला वृहद धुमकुड़िया बनाने की भी योजना बनाई है।
इससे युवाओं को पढ़ाई के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियों से भी जुड़ने का अवसर मिलेगा।
आदिवासी कल्याण विभाग की ओर से प्रत्येक प्रमंडल में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस अस्पताल भी स्थापित किए जाएंगे। इन अस्पतालों में MRI सहित कई आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
विधानसभा में इस बजट पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने कई मुद्दे उठाए। Neera Yadav ने मांग की कि राज्य के सभी जिलों में ओबीसी छात्रों के लिए छात्रावास बनाए जाएं और दिव्यांग व बुजुर्गों की पेंशन राशि को 1000 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये किया जाए।
वहीं विधायक Purnima Sahu ने आरोप लगाया कि सर्वजन पेंशन योजना के बजट में पिछले साल की तुलना में करीब 333 करोड़ रुपये की कटौती की गई है।
विपक्ष के नेता Babulal Marandi ने ट्राइबल छात्रावासों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई जगहों पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने कहा कि कई छात्रावासों में न तो सुरक्षा गार्ड हैं और न ही रसोइया, जिससे छात्रों को परेशानी होती है।
सरकार ने भरोसा दिलाया कि शिक्षा और कल्याण से जुड़ी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि राज्य के वंचित वर्गों को वास्तविक लाभ मिल सके।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
चाईबासा। चाईबासा के सरांडा जंगल में IED विस्फोट हुआ है। यह बम नक्सलियों द्वारा प्लांट किया गया। इसमें एक सीआरपीएफ जवान घायल हो गया है। घटना की जानकारी मिलते ही सुरक्षा बलों ने आसपास के इलाके को घेर लिया और घायल जवान को तुरंत बचाने की कार्रवाई शुरू कर दी। घायल जवान को गंभीर स्थिति में देखते हुए एयरलिफ्ट के जरिए रांची लाया जा रहा है, ताकि उसका बेहतर इलाज किया जा सके। सुरक्षा बल चला रहे चेकिंग अभियान क्षेत्र में तनाव के मद्देनजर सुरक्षाबलों ने सघन चेकिंग अभियान शुरू कर दिया है। सरांडा इलाके में पहले भी नक्सली और उग्रवादी गतिविधियों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
पलामू। झारखंड सरकार के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने पलामू जिले के ऐतिहासिक और लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहे बूढ़ापहाड़ इलाके का दौरा कर वहां चल रहे विकास कार्यों की जमीनी हकीकत का जायजा लिया। यह दौरा इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बाद वित्त मंत्री ऐसे दूसरे बड़े जनप्रतिनिधि हैं, जिन्होंने इस संवेदनशील इलाके तक पहुंचकर विकास की दिशा में पहल दिखाई है। बूढ़ापहाड़, जो कभी माओवादियों का गढ़ माना जाता था, अब धीरे-धीरे मुख्यधारा में लौटता नजर आ रहा है। विकास के लिए जमीनी निरीक्षण वित्त मंत्री ने इलाके में पहुंचकर सड़क, बुनियादी ढांचे और अन्य विकास योजनाओं की स्थिति का निरीक्षण किया। बूढ़ापहाड़ की चोटी तक पहुंचने के लिए उन्हें करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल सफर भी तय करना पड़ा, जिससे इलाके की भौगोलिक कठिनाइयों का अंदाजा लगाया जा सकता है। दौरे के दौरान उन्होंने अधिकारियों से स्थानीय जरूरतों और अधूरे कार्यों की जानकारी ली। ‘सिर्फ पुलिस नहीं, विकास भी जरूरी’ दौरे के बाद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि वे ऐसे क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो लंबे समय तक नक्सली गतिविधियों के लिए संवेदनशील रहा है। उन्होंने साफ कहा कि केवल पुलिस बल के जरिए नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए विकास की मजबूत बुनियाद भी जरूरी है। उनके अनुसार, जब तक शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाएं गांव-गांव तक नहीं पहुंचेंगी, तब तक स्थायी बदलाव संभव नहीं होगा। जल्द बनेगा विकास का नया खाका वित्त मंत्री ने कहा कि बूढ़ापहाड़ क्षेत्र के समग्र विकास के लिए जल्द ही सभी विभागों के साथ एक समीक्षा बैठक की जाएगी। इसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा दिए गए टास्क की भी समीक्षा होगी और आगे के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि इलाके तक पहुंचने वाली सड़क का एक हिस्सा वन भूमि में आता है, जिसके कारण निर्माण में दिक्कतें हैं। फिर भी सरकार एक किलोमीटर आवश्यक सड़क निर्माण को प्राथमिकता देकर अनटायड फंड के जरिए समाधान निकालने का प्रयास करेगी। नक्सल गढ़ से विकास की ओर बढ़ता बूढ़ापहाड़ बता दें कि बूढ़ापहाड़ 90 के दशक से माओवादियों का बड़ा प्रशिक्षण केंद्र रहा है। सितंबर 2022 में यहां ‘ऑपरेशन ऑक्टोपस’ शुरू किया गया था, जिसके बाद इलाके में सुरक्षा और विकास दोनों मोर्चों पर तेजी आई। अब यह इलाका झारखंड के बदलते परिदृश्य की नई तस्वीर पेश कर रहा है।
रांची। झारखंड फिल्म फेस्टिवल 2026 का आयोजन रांची में 26 से 28 जून तक होगा। राज्यपाल संतोष गंगवार ने “चित्रपट झारखंड फिल्म फेस्टिवल 2026” के पोस्टर का विमोचन किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर, क्षेत्र प्रचारक रामनवमी जी, विभाग संपर्क प्रमुख भानु जालान, महानगर प्रचार प्रमुख स्निग्ध रंजन, चित्रपट झारखंड के अध्यक्ष नंद कुमार सिंह तथा कोषाध्यक्ष सुमित मित्तल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सरला बिरला स्कूल में होगा आयोजन चित्रपट झारखंड द्वारा यह फिल्म महोत्सव आगामी 26, 27 एवं 28 जून 2026 को सरला बिरला विश्वविद्यालय परिसर, टाटीसिल्वे, रांची में आयोजित किया जाएगा। झारखंड के युवा फिल्म निर्माताओं को अवसर इस फिल्म महोत्सव का मुख्य उद्देश्य झारखंड के युवा फिल्म निर्माताओं को अपनी रचनात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करना तथा क्षेत्रीय सिनेमा को प्रोत्साहित करना है। इसके माध्यम से झारखंड के फिल्मकार अपनी कला के जरिए राज्य की ऐतिहासिक, पौराणिक एवं सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत कर सकेंगे। साथ ही, यह आयोजन सामाजिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य भी करेगा। सिर्फ झारखंड के निर्माताओं को मौका इस फिल्म महोत्सव में केवल झारखंड राज्य के फिल्म निर्माता ही अपनी फिल्में जमा कर सकते हैं। प्रतियोगिता में फिल्मों की तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं— * लघु फिल्म (अधिकतम 20 मिनट) * वृत्तचित्र (अधिकतम 30 मिनट) * परिसर फिल्म (अधिकतम 15 मिनट; इसमें केवल लघु फिल्म ही मान्य होगी) *पंजीकरण शुल्क:* * लघु फिल्म – ₹500 * वृत्तचित्र – ₹500 * परिसर फिल्म – ₹250 विद्यार्थियों के लिए विशेष रियायत के तहत वे किसी भी श्रेणी में मात्र ₹250 शुल्क देकर अपनी फिल्म जमा कर सकते हैं। झारखंडी भाषाओं की फिल्मे झारखंड में बोली जाने वाली सभी भाषाओं में फिल्में स्वीकार की जाएंगी। हिंदी और अंग्रेजी के अतिरिक्त अन्य भाषाओं की फिल्मों के लिए हिंदी अथवा अंग्रेजी में उपशीर्षक अनिवार्य होगा। फिल्मों के 12 विषय निर्धारित 1. झारखंड का इतिहास 2. जनजातीय समाज 3. ग्राम विकास 4. महिला सशक्तिकरण 5. पर्यावरण 6. सामाजिक समरसता 7. युवा और नशामुक्ति 8. नागरिक कर्तव्य 9. खेल और प्रतिभा 10. पलायन 11. डिजिटल भारत / तकनीकी परिवर्तन 12. भ्रष्टाचार और पारदर्शिता 1 जुलाई 2023 के बाद निर्मित फिल्में मान्य आयोजन समिति द्वारा यह भी निर्धारित किया गया है कि केवल 1 जुलाई 2023 के बाद निर्मित फिल्में ही मान्य होंगी। फिल्म जमा करने की अंतिम तिथि रविवार, 7 जून 2026 निर्धारित की गई है, जबकि चयनित फिल्मों की सूची 15 जून 2026 को प्रकाशित की जाएगी। इस फिल्म महोत्सव में कुल ₹2,70,000 का नकद पुरस्कार रखा गया है। यह आयोजन झारखंड के युवाओं के लिए फिल्म निर्माण के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करने का एक सुनहरा अवसर प्रदान करेगा। यह जानकारी चित्रपट झारखंड के सदस्य नवीन सहाय ने दी।