गिरिडीह। जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साइबर थाना पुलिस ने देर रात छापेमारी कर देवघर जिले के मारगोमुंडा थाना क्षेत्र के बनसिम्मी गांव निवासी अमजद अंसारी और रजाउल अंसारी को पकड़ा, जिन्हें बाद में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इनपुट के आधार पर बनी टीम, मौके पर दबिश साइबर डीएसपी आबिद खान के अनुसार, प्रतिबिंब पोर्टल के माध्यम से एसपी डॉ. बिमल कुमार को सूचना मिली थी कि गांडेय थाना क्षेत्र के खंभाटांड़ इलाके में साइबर ठगी की गतिविधियां चल रही हैं। सूचना की पुष्टि के बाद साइबर थाना प्रभारी दीपेश कुमार के नेतृत्व में टीम गठित कर बताए गए स्थान पर छापेमारी की गई, जहां आरोपी मोबाइल के जरिए ठगी करते पकड़े गए। फर्जी ई-चालान और ई-केवाइसी लिंक से करते थे ठगी पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी सोशल मीडिया के जरिए लोगों को फर्जी लिंक भेजते थे। ये लिंक आरटीओ ई-चालान, चालान चेक और बैंक केवाईसी अपडेट के नाम पर तैयार किए जाते थे। लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल में मॉलवेयर इंस्टॉल हो जाता था, जिससे ठगों को बैंकिंग और निजी जानकारी तक पहुंच मिल जाती थी। इसके बाद वे खातों से पैसे निकाल लेते थे। पकड़ से बचने के लिए बदलते थे लोकेशन जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग जिलों के सीमावर्ती इलाकों में ठगी करते थे। वे जानबूझकर अपने गृह जिले से बाहर सक्रिय रहते थे, ताकि पुलिस की पकड़ से बच सकें। मोबाइल, सिम और बाइक बरामद छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से छह मोबाइल फोन, चार सिम कार्ड और एक बाइक बरामद की है। बरामद उपकरणों की जांच कर ठगी के अन्य मामलों के साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। कार्रवाई में शामिल रही पुलिस टीम इस कार्रवाई में साइबर थाना प्रभारी दीपेश कुमार के साथ एसआई पुनीत कुमार गौतम, गुंजन कुमार, एएसआई संजय मुखियार, सशस्त्र बल के जवान और गांडेय थाना के चौकीदार शामिल
गिरिडीह। जिले के गिरिडीह-पचंबा मुख्य मार्ग पर शुक्रवार देर रात एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया, जब बाइक सवार को बचाने के प्रयास में सब्जियों से लदा एक पिकअप वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया। यह घटना अंबेडकर चौक के पास हुई। हादसे में राहत की बात यह रही कि वाहन चालक पूरी तरह सक्षित बच गया, लेकिन पिकअप में लदी बड़ी मात्रा में सब्जियां सड़क पर बिखर गईं, जिससे कुछ समय के लिए यातायात बाधित हो गया। टाटा से बेगूसराय जा रहा था पिकअप मिली जानकारी के अनुसार, पिकअप वाहन टाटा से सब्जियां लादकर गिरिडीह के रास्ते बेगूसराय जा रहा था। रात करीब 2 बजे, जब वाहन अंबेडकर चौक के पास पहुंचा, तभी सामने अचानक एक बाइक सवार आ गया। चालक ने टक्कर से बचने के लिए तेजी से वाहन मोड़ा, लेकिन इसी दौरान वाहन का संतुलन बिगड़ गया और पिकअप सड़क पर पलट गया। सड़क पर फैल गई सब्जियां, लगा जाम पिकअप पलटते ही उसमें लदी सब्जियां सड़क पर बिखर गईं, जिससे मुख्य सड़क पर कुछ समय के लिए आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया। हालांकि देर रात होने के कारण सड़क पर वाहनों की आवाजाही कम थी, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका टल गई। अगर यह घटना व्यस्त समय में होती, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। स्थानीय लोगों और पुलिस ने संभाला मोर्चा हादसे के बाद आसपास मौजूद दुकानदारों और राहगीरों ने मौके पर पहुंचकर चालक को सुरक्षित बाहर निकाला और सड़क पर फैली सब्जियों को हटाने में मदद की। सूचना मिलते ही नगर थाना की पेट्रोलिंग टीम भी घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने चालक से पूछताछ की और स्थानीय लोगों के सहयोग से पिकअप वाहन को सड़क किनारे हटवाया। इसके बाद धीरे-धीरे यातायात सामान्य हो सका। चालक सुरक्षित, वाहन और माल को नुकसान इस हादसे में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। हालांकि, वाहन को क्षति पहुंची है और सड़क पर गिरने से सब्जियों का भी काफी नुकसान हुआ है। पुलिस मामले की जानकारी जुटाकर आगे की कार्रवाई में लगी हुई है।
गिरिडीह: झारखंड के जंगल एक बार फिर देश के खनिज मानचित्र पर चर्चा में हैं। गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड स्थित डुब्बा-आसनातरी जंगल में लिथियम के संभावित भंडार की खोज को लेकर बड़े स्तर पर वैज्ञानिक सर्वे जारी है। प्रारंभिक संकेतों के आधार पर विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस क्षेत्र की जमीन के नीचे न सिर्फ लिथियम, बल्कि अन्य बहुमूल्य खनिज भी मौजूद हो सकते हैं। इस खोज को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार के खान मंत्रालय ने भी सक्रिय भूमिका निभाई है। डिप्टी डायरेक्टर जनरल आसित साहा के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय टीम ने हाल ही में क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण किया। टीम ने जंगल के अलग-अलग हिस्सों से जुटाए गए नमूनों का विश्लेषण भी किया, जिससे संभावनाओं को और मजबूती मिली है। महीनों से जारी है वैज्ञानिक जांच भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के विशेषज्ञ पिछले कई महीनों से इस क्षेत्र में गहन अध्ययन कर रहे हैं। वन विभाग के सहयोग से चल रही इस संयुक्त जांच में विभिन्न स्थानों पर बोरिंग कर मिट्टी और चट्टानों के नमूने एकत्र किए गए हैं। करीब छह महीनों से जारी इस प्रक्रिया के बाद अब लिथियम की संभावनाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है, हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पहले भी मिल चुके हैं कीमती रत्न गौरतलब है कि करीब डेढ़ वर्ष पहले इसी इलाके के असुरहड्डी पहाड़ी क्षेत्र में अवैध खनन के दौरान पुखराज, गोमेद और त्रिमुल्ली जैसे बहुमूल्य रत्न मिले थे। इस घटना के बाद प्रशासन ने सख्ती दिखाई थी, लेकिन अब भी क्षेत्र में अवैध खनन गतिविधियों के सक्रिय होने की आशंका जताई जा रही है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम खनिज खोज के दौरान किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को रोकने के लिए इलाके में पुलिस बल की तैनाती की गई है। अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे सटीक परिणाम मिलने की उम्मीद है। क्यों अहम है लिथियम? लिथियम एक हल्की लेकिन अत्यंत उपयोगी धातु है, जिसका इस्तेमाल मोबाइल फोन, लैपटॉप और इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों में बड़े पैमाने पर होता है। इसके अलावा सोलर ऊर्जा आधारित उपकरणों में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में यदि गिरिडीह में लिथियम के भंडार की पुष्टि होती है, तो यह झारखंड ही नहीं, पूरे देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकता है।
गिरिडीह। गिरिडीह जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने ईद की खुशियों को मातम में बदल दिया। गिरिडीह-धनबाद पथ पर मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के बरवाडीह में तेज रफ्तार बस ने बाइक सवार मां-बेटे को कुचल दिया। इस हादसे में 40 वर्षीय महिला शेरुन की मौत हो गई, जबकि उनका 20 वर्षीय बेटा शाहिल गंभीर रूप से घायल हो गया। उसका इलाज अस्पताल में जारी है। कैसे हुआ हादसा जानकारी के अनुसार, शुक्रवार देर शाम शेरुन अपने बेटे शाहिल के साथ ईद की खरीदारी करने बाजार जा रही थीं। इसी दौरान गिरिडीह से धनबाद की ओर जा रही एक बस ने बरवाडीह स्थित बाल्टी कारखाना के पास विपरीत दिशा से आ रही उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तुरंत सदर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान महिला ने दम तोड़ दिया। हादसे के बाद हंगामा और जाम घटना से गुस्साए लोगों ने बस में तोड़फोड़ कर दी और सड़क जाम कर दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन भीड़ शांत नहीं हुई। हालात को देखते हुए प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाने का प्रयास किया। मंत्री की पहल से शांत हुआ मामला स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य के मंत्री सुदिव्य कुमार भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों और स्थानीय लोगों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया। बाद में थाना में बैठक आयोजित की गई, जिसके बाद लोगों ने जाम हटाने पर सहमति जताई। सुरक्षा और कार्रवाई की मांग इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण की मांग की है। वहीं पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आगे की कार्रवाई जारी है।
गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिले में शुक्रवार सुबह एक सवारी वाहन के अनियंत्रित होकर पलट जाने से स्कूली बच्चों में अफरा-तफरी मच गई। यह घटना तिसरी थाना क्षेत्र के तिसरी–पलमरुआ मुख्य मार्ग पर नैयाडीह मोड़ के पास हुई। मिली जानकारी के अनुसार सवारी वाहन में Arya Public School के बच्चे सवार थे। बताया जा रहा है कि सड़क पर गीली और फिसलन भरी मिट्टी होने के कारण तेज रफ्तार वाहन अचानक अनियंत्रित हो गया और सड़क किनारे गड्ढे में जाकर पलट गया। आधा दर्जन से अधिक बच्चे घायल हादसे में आधा दर्जन से अधिक बच्चों को चोटें आई हैं। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और आसपास के लोगों की भीड़ जुट गई। स्थानीय लोगों की मदद से घायल बच्चों को ऑटो के माध्यम से तिसरी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका प्राथमिक इलाज किया गया। पुलिस कर रही जांच घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वाहन तेज रफ्तार में था और सड़क की फिसलन के कारण यह दुर्घटना हुई। पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।