केंद्र सरकार

छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक की मांग करते जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू
Sridhar Vembu का सुझाव- छोटे बच्चों के लिए भारत में सोशल मीडिया पर लगे रोक, बोले- किताबें पढ़ें और बाहर खेलें

नई दिल्ली, एजेंसियां। Zoho Corporation के सह-संस्थापक Sridhar Vembu ने छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भारत को भी कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभावों से बचाने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए।   फ्रांस के फैसले का दिया उदाहरण   श्रीधर वेम्बू ने यह बयान फ्रांस द्वारा 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध लगाने की पहल के संदर्भ में दिया। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों को ज्यादा समय स्क्रीन पर बिताने के बजाय किताबें पढ़ने, खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों में समय देना चाहिए।   बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत को लेकर चिंता   वेम्बू का कहना है कि कम उम्र में सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों के विकास पर असर डाल सकता है। लगातार स्क्रीन टाइम से ध्यान केंद्रित करने की क्षमता, सामाजिक व्यवहार और शारीरिक गतिविधियों पर प्रभाव पड़ने की चिंता जताई जाती रही है। उन्होंने बच्चों के लिए ऐसा माहौल बनाने की जरूरत बताई, जहां वे तकनीक का संतुलित इस्तेमाल करें और वास्तविक जीवन की गतिविधियों से जुड़े रहें।   भारत में सोशल मीडिया बैन पर पहले भी हुई है चर्चा   भारत में बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है। विशेषज्ञों का एक वर्ग उम्र सीमा और पैरेंटल कंट्रोल जैसे उपायों की बात करता है, जबकि कुछ लोग पूरी तरह प्रतिबंध के बजाय डिजिटल शिक्षा और सुरक्षित ऑनलाइन वातावरण बनाने पर जोर देते हैं।   सोशल मीडिया कंपनियों पर बढ़ रही जिम्मेदारी   दुनियाभर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से बच्चों की सुरक्षा के लिए उम्र सत्यापन, कंटेंट नियंत्रण और बेहतर सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग बढ़ रही है। कई देशों में बच्चों के ऑनलाइन अधिकारों और सुरक्षा को लेकर नए नियमों पर चर्चा चल रही है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 25, 2026 0
देश में 3 समर्पित केमिकल पार्क स्थापित करने के लिए ₹3,030 करोड़ की भव्य रसायन योजना को केंद्र सरकार की मंजूरी
देश में बनेंगे 3 केमिकल पार्क, केंद्र सरकार ने ₹3,030 करोड़ की योजना को दी मंजूरी

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत के केमिकल सेक्टर को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में तीन समर्पित केमिकल पार्क (Chemical Parks) स्थापित करने के लिए ₹3,030 करोड़ की "BHAVYA-Rasayan" योजना को मंजूरी दी है। इन पार्कों का उद्देश्य घरेलू केमिकल उत्पादन बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।   हर केमिकल पार्क को मिल सकती है ₹1,000 करोड़ तक की सहायता   सरकार की योजना के तहत प्रत्येक केमिकल पार्क के लिए केंद्र की ओर से अधिकतम ₹1,000 करोड़ तक की वित्तीय सहायता दी जा सकती है। इन पार्कों को आधुनिक सुविधाओं और तैयार औद्योगिक ढांचे (Plug-and-Play Infrastructure) के साथ विकसित किया जाएगा।   रसायन उद्योग को मिलेगा बड़ा बढ़ावा   केमिकल पार्क में कंपनियों को साझा सुविधाएं, पर्यावरण प्रबंधन व्यवस्था, लॉजिस्टिक सुविधा और अन्य जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे छोटी और बड़ी दोनों तरह की कंपनियों को उत्पादन शुरू करने में आसानी होगी।   आयात कम करने और आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर   भारत रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर लगातार काम कर रहा है। नए केमिकल पार्क बनने से घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा और कई जरूरी रसायनों के लिए विदेशी निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।   हजारों रोजगार के अवसर बनने की उम्मीद   सरकार का अनुमान है कि इन औद्योगिक पार्कों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे केमिकल मैन्युफैक्चरिंग, फार्मा, प्लास्टिक, पेंट, टेक्सटाइल और अन्य संबंधित उद्योगों को भी फायदा मिलेगा।   राज्यों के चयन की प्रक्रिया से स्थापित होंगे पार्क   इन केमिकल पार्कों को राज्यों के साथ मिलकर विकसित किया जाएगा। चयन प्रक्रिया के आधार पर राज्यों को अवसर दिया जाएगा, जहां बेहतर औद्योगिक माहौल और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 25, 2026 0
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और परीक्षा प्रणाली पर निशाना साधते लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी
राहुल गांधी का दावा- धर्मेंद्र प्रधान को दूसरे मंत्रालय भेजने की तैयारी, बोले- शिक्षा मंत्रालय में बदलाव से नहीं छिपेगी जिम्मेदारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि सरकार उन्हें शिक्षा मंत्रालय से हटाकर किसी दूसरे मंत्रालय में भेजने की तैयारी कर रही है, लेकिन इससे छात्रों के सवाल और परीक्षा व्यवस्था की खामियां खत्म नहीं होंगी। राहुल गांधी ने कहा कि केवल मंत्रालय बदलने से जिम्मेदारी तय नहीं होगी, बल्कि छात्रों को न्याय और परीक्षा प्रणाली में सुधार चाहिए।   "मंत्रालय बदलना समाधान नहीं"   राहुल गांधी ने कहा कि देश के लाखों छात्रों का भविष्य प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार असली मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए बदलाव की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।   NEET और पेपर लीक मुद्दे पर सरकार को घेरा   राहुल गांधी लगातार NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार पर हमला कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं युवाओं के विश्वास को कमजोर करती हैं और सरकार को इस पर ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज सुनने के बजाय प्रदर्शन करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है।   शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई   कांग्रेस नेता ने इससे पहले भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। उनका कहना है कि परीक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी लेने के लिए शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। वहीं सरकार की ओर से विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया गया है और परीक्षा सुधारों को लेकर उठाए गए कदमों का हवाला दिया गया है।   राजनीतिक हलचल बढ़ी   राहुल गांधी के इस बयान के बाद केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। शिक्षा मंत्रालय में संभावित बदलाव को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है।   हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक धर्मेंद्र प्रधान को किसी दूसरे मंत्रालय में भेजने को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 25, 2026 0
Rahul Gandhi
छात्र प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी का केंद्र पर हमला, बोले- लोकतांत्रिक आवाज को दबाया जा रहा है

नई दिल्ली, एजेंसियां। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्र संगठनों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ सख्ती बरती जा रही है और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं और छात्रों को अपनी मांग रखने का पूरा अधिकार है।   सोशल मीडिया पर सरकार को घेरा   राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए कहा कि छात्रों पर बल प्रयोग और हिरासत जैसी घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं। उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनने और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की।   पेपर लीक और परीक्षा सुधार का उठाया मुद्दा   कांग्रेस नेता ने कहा कि छात्र लंबे समय से पेपर लीक, परीक्षा में अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार, इन मुद्दों का समाधान करने के बजाय प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों पर सरकार को संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए।   सरकार का पक्ष भी आया सामने   केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। प्रशासन के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है तथा कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की गई है।   राजनीतिक बहस हुई तेज   राहुल गांधी के बयान के बाद छात्र आंदोलन और परीक्षा सुधार का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। विपक्ष सरकार पर छात्रों की आवाज अनसुनी करने का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।

abhishek singh जुलाई 25, 2026 0
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में प्रशासनिक फेरबदल के तहत 47 अधिकारियों को हटाए जाने की खबर
NTA में बड़ा फेरबदल, 47 अधिकारियों को हटाया गया; परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों की शुरुआत

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए 47 अधिकारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। यह कार्रवाई NEET-UG पेपर लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं के बाद परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में NTA की कार्यप्रणाली में और भी बड़े सुधार किए जाएंगे।   47 अधिकारियों पर गिरी गाज, कुछ पर होगी कानूनी कार्रवाई   सरकारी सूत्रों के अनुसार, हटाए गए 47 अधिकारियों में से कुछ के खिलाफ कानूनी और आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और आंतरिक जांच के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान की गई है। सरकार का कहना है कि परीक्षा में लापरवाही या अनियमितता के लिए किसी भी स्तर पर जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।   NTA में होगी विशेषज्ञ अधिकारियों की नई नियुक्ति   सुधार प्रक्रिया के तहत NTA में 4 जनरल मैनेजर (General Managers) और 16 यंग प्रोफेशनल्स (Young Professionals) की भर्ती की जाएगी। इन नियुक्तियों में साइबर सुरक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक, परीक्षा केंद्र संचालन और असेसमेंट रिसर्च जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।   आउटसोर्सिंग और परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था में भी होंगे बदलाव   सरकार NTA की आउटसोर्सिंग व्यवस्था, परीक्षा केंद्रों की निगरानी और प्रश्नपत्रों की सुरक्षा प्रणाली की भी समीक्षा कर रही है। नई तकनीकों, डिजिटल मॉनिटरिंग और कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल के जरिए परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाएगा।   छात्रों का भरोसा बहाल करना सरकार की प्राथमिकता   केंद्र सरकार का कहना है कि इन सुधारों का उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करना और छात्रों का विश्वास मजबूत करना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार का अभियान आगे भी जारी रहेगा और भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त प्रशासनिक एवं कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 25, 2026 0
परीक्षा सुधारों को लेकर केंद्र सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच तीसरे दौर की बैठक
परीक्षा सुधारों पर सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच आज तीसरे दौर की वार्ता, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अब भी गतिरोध

नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच आज तीसरे दौर की वार्ता होगी। इससे पहले हुई दो बैठकों में कई मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई है, लेकिन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अब भी दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी है।   इन मांगों पर बनी सिद्धांततः सहमति   सरकार ने छात्र प्रतिनिधियों की कुछ मांगों पर सिद्धांततः सहमति (In-Principle Approval) जताई है। इनमें प्रदर्शन के दौरान दर्ज मामलों (FIR) की समीक्षा और उन्हें वापस लेने पर विचार, प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने पर चर्चा तथा परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों पर संवाद जारी रखने का आश्वासन शामिल है। सरकार ने इन मुद्दों पर आगे की प्रक्रिया जारी रखने की बात कही है।   इस मांग पर अब भी नहीं बनी सहमति   वार्ता में सबसे बड़ा गतिरोध केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर बना हुआ है। छात्र प्रतिनिधियों का कहना है कि पेपर लीक मामलों की नैतिक जिम्मेदारी तय करते हुए शिक्षा मंत्री को पद छोड़ना चाहिए, जबकि सरकार ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया है और इस पर निर्णय के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। यही मुद्दा बातचीत में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।   परीक्षा सुधारों पर रहेगा फोकस   आज की बैठक में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा मजबूत करने, डिजिटल निगरानी बढ़ाने और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कानूनी एवं प्रशासनिक सुधारों पर भी चर्चा होने की संभावना है।   बैठक के नतीजों पर छात्रों की नजर   देशभर के लाखों छात्र और अभ्यर्थी इस बैठक के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच शेष मुद्दों पर भी सहमति बनती है, तो परीक्षा सुधारों और नई नीतियों को लागू करने की दिशा में सरकार आगे बढ़ सकती है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 25, 2026 0
प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक रोकने और धांधली पर सख्त कार्रवाई के लिए कैबिनेट द्वारा नए विधेयक के मसौदे को मंजूरी
पेपर लीक पर केंद्र सरकार सख्त, फास्ट-ट्रैक अदालतों और कड़ी सजा वाले नए विधेयक के मसौदे को कैबिनेट की मंजूरी

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी धांधली पर सख्ती बढ़ाते हुए बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ऐसे मामलों में कड़ी सजा और त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नए विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं की पारदर्शिता बनाए रखना तथा अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत करना है।   पेपर लीक मामलों की होगी फास्ट-ट्रैक सुनवाई   प्रस्तावित विधेयक के तहत पेपर लीक और संगठित परीक्षा घोटालों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों की व्यवस्था की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि ऐसे मामलों का निपटारा तीन महीने के भीतर किया जाए, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके।   10 साल तक की जेल और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान   विधेयक के मसौदे में संगठित तरीके से पेपर लीक कराने, परीक्षा में धांधली करने या इसमें शामिल गिरोहों के लिए अधिकतम 10 वर्ष के कठोर कारावास और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यह सजा व्यक्तियों के साथ-साथ संगठित नेटवर्क और संस्थानों पर भी लागू हो सकेगी, यदि उनकी संलिप्तता साबित होती है।   परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर   सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था के तहत परीक्षा संचालन, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और डिजिटल निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। इसके साथ ही परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही बढ़ाने तथा आधुनिक तकनीक के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।   युवाओं का भरोसा मजबूत करना सरकार का लक्ष्य   केंद्र सरकार का मानना है कि निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़ी है। नए विधेयक के संसद से पारित होने के बाद भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में अनियमितताओं पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा अभ्यर्थियों का विश्वास बहाल करने में मदद मिलने की उम्मीद है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 25, 2026 0
निर्यात आधारित ई-कॉमर्स में एफडीआई की मंजूरी पर केंद्र सरकार का फैसला
सरकार ने निर्यात आधारित ई-कॉमर्स में FDI को दी मंजूरी, भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की बड़ी पहल

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने विदेशी निवेश (FDI) नीति में बड़ा बदलाव करते हुए निर्यात के लिए इन्वेंट्री-आधारित ई-कॉमर्स मॉडल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दे दी है। हालांकि यह छूट केवल भारत में निर्मित या उत्पादित वस्तुओं के निर्यात तक सीमित रहेगी। घरेलू खुदरा ई-कॉमर्स के लिए मौजूदा नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह फैसला वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के डीपीआईआईटी (DPIIT) की नई अधिसूचना के तहत लागू किया गया है।   छोटे निर्यातकों और वैश्विक प्लेटफॉर्म को मिलेगा फायदा   नई नीति के तहत अब विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियां निर्यात के उद्देश्य से भारत में इन्वेंट्री रख सकेंगी और भारतीय उत्पादों को सीधे अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों तक पहुंचा सकेंगी। सरकार का मानना है कि इससे एमएसएमई, छोटे निर्माताओं, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी। साथ ही Amazon और Flipkart जैसी वैश्विक ई-कॉमर्स कंपनियों के जरिए भारत के निर्यात को भी गति मिलने की उम्मीद है।   घरेलू कारोबार पर नहीं पड़ेगा असर   सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह छूट केवल निर्यात-उन्मुख कारोबार के लिए है। घरेलू बाजार में इन्वेंट्री-आधारित ई-कॉमर्स में FDI पर पहले से लागू प्रतिबंध यथावत रहेंगे। सरकार का लक्ष्य भारतीय उत्पादों की वैश्विक हिस्सेदारी बढ़ाना और ई-कॉमर्स निर्यात को नई गति देना है। हालांकि खुदरा व्यापार से जुड़े कुछ संगठनों ने इस नीति के दुरुपयोग की आशंका जताते हुए प्रभावी निगरानी की मांग की है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 24, 2026 0
Amit Shah
गृह मंत्रालय की बड़ी कार्रवाई: पाकिस्तान के 17 और भारत के 6 नागरिक 'व्यक्तिगत आतंकवादी' घोषित

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत बड़ा कदम उठाते हुए 17 पाकिस्तान/पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सक्रिय व्यक्तियों और 6 भारतीय नागरिकों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की चौथी अनुसूची के तहत 'व्यक्तिगत आतंकवादी' घोषित कर दिया है। इस कार्रवाई के साथ केंद्र ने कुल 23 नए नाम आतंकियों की सूची में शामिल किए हैं।   लश्कर, जैश समेत कई आतंकी संगठनों से जुड़े हैं आरोपी   गृह मंत्रालय के अनुसार, घोषित किए गए सभी 23 व्यक्ति लश्कर-ए-तैयबा , जैश-ए-मोहम्मद और अन्य प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े हैं। इन पर भारत में आतंकी हमलों की साजिश, घुसपैठ, हथियारों की तस्करी, आतंकियों की भर्ती, फंडिंग और आतंकवादी नेटवर्क को संचालित करने जैसे गंभीर आरोप हैं। छह भारतीय नागरिक भी लंबे समय से पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में रहकर आतंकी गतिविधियों में शामिल बताए गए हैं।   UAPA के तहत मिलेगी सख्त कानूनी कार्रवाई की शक्ति   सरकार द्वारा किसी व्यक्ति को UAPA के तहत "व्यक्तिगत आतंकवादी" घोषित किए जाने के बाद उसकी संपत्ति जब्त करने, वित्तीय लेन-देन पर रोक लगाने और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज करने का रास्ता खुल जाता है। गृह मंत्रालय का कहना है कि यह कदम सीमा पार से संचालित आतंकी नेटवर्क पर शिकंजा कसने और भारत की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है।   आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश   केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार देश की सुरक्षा से समझौता नहीं करेगी और आतंकवाद से जुड़े हर नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्रालय के अनुसार, इस कार्रवाई का उद्देश्य आतंकी संगठनों को कानूनी, आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर कमजोर करना है।

abhishek singh जुलाई 5, 2026 0
Petrol Pump Rule
अब पेट्रोल पंप से नहीं खरीद सकेंगे ज्यादा तेल! सरकार ने लागू किए नए नियम

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की खरीद को लेकर नई गाइडलाइन जारी करते हुए बड़े औद्योगिक, व्यावसायिक और संस्थागत उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए आदेश के तहत ऐसे उपभोक्ता अब सामान्य पेट्रोल पंपों (रिटेल आउटलेट्स) से ईंधन नहीं खरीद सकेंगे। उन्हें अपनी आवश्यकता के अनुसार पेट्रोल और डीजल केवल अधिकृत बल्क सेल प्वाइंट्स (थोक बिक्री केंद्रों) से ही खरीदना होगा। यह व्यवस्था शुरुआती तौर पर 90 दिनों के लिए लागू की गई है।   मध्य-पूर्व संकट के बीच लिया गया फैसला सरकार का यह निर्णय ऐसे समय आया है जब मध्य-पूर्व में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी हुई है। आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ कम रखने के लिए सरकारी तेल कंपनियों ने खुदरा कीमतों में सीमित बढ़ोतरी की, जबकि थोक ग्राहकों के लिए ईंधन महंगा कर दिया गया। इसी वजह से कई बड़े उद्योग और संस्थान सस्ता ईंधन पाने के लिए पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में डीजल खरीदने लगे, जिससे कई क्षेत्रों में आम लोगों के लिए आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई।   200 लीटर से अधिक डीजल नहीं मिलेगा नई गाइडलाइन के अनुसार, किसी भी संदिग्ध ग्राहक या वाहन को एक पेट्रोल पंप से एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल ही दिया जाएगा। इससे अधिक मात्रा में ईंधन खरीदने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा डीजल की बिक्री केवल वाहन के मुख्य ईंधन टैंक या पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) से प्रमाणित कंटेनरों में ही की जाएगी।   नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल पंप से खरीदे गए डीजल को दोबारा मुनाफे के लिए बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों, संस्थानों या पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही राज्य सरकारों को जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।   जांच और जब्ती का अधिकार भी बढ़ाया गया नए निर्देशों के तहत अधिकृत अधिकारी, डीएसपी स्तर या उससे ऊपर के पुलिस अधिकारी तथा तेल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी पेट्रोल पंपों की जांच कर सकेंगे। यदि कहीं अनियमितता या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो वे ईंधन और संबंधित सामग्री जब्त करने की कार्रवाई भी कर सकेंगे। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना और कालाबाजारी पर रोक लगाना है।

abhishek singh जून 12, 2026 0
Petrol Pump News
बड़े ग्राहकों को अब 90 दिन तक पंप पर नहीं मिलेगा पेट्रोल

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की बिक्री व्यवस्था में बदलाव किया है। इससे इंडस्ट्रियल, कमर्शियल और संस्थागत उपभोक्ता प्रभावित होंगे। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 11 जून को जारी आदेश में कहा है कि अब ऐसे बड़े उपभोक्ता सीधे रिटेल पेट्रोल पंपों से पेट्रोल और डीजल नहीं खरीद सकेंगे। उन्हें ईंधन की खरीद केवल अधिकृत बल्क सेल पॉइंट्स से करनी होगी।   सरकार द्वारा जारी “मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल (रिटेल आउटलेट्स के जरिए सप्लाई का अस्थायी नियमन) आदेश, 2026” के तहत यह व्यवस्था फिलहाल 90 दिनों के लिए लागू की गई है। आवश्यकता पड़ने पर इसकी अवधि आगे भी बढ़ाई जा सकती है।   कई राज्यों में असामान्य बिक्रीः पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार देश के कुछ हिस्सों में हाल के दिनों में पेट्रोल और डीजल की रिटेल बिक्री में असामान्य बढ़ोतरी देखी गई है। जांच में पता चला कि कई औद्योगिक, व्यावसायिक और संस्थागत उपभोक्ता बल्क और रिटेल कीमतों के बीच अंतर का फायदा उठाने के लिए पेट्रोल पंपों से ही बड़ी मात्रा में ईंधन खरीद रहे थे। मंत्रालय का कहना है कि इससे आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका पैदा हो गई थी। इसी को देखते हुए यह अस्थायी नियमन लागू किया गया है।   अंतरराष्ट्रीय हालात ठीक नही सरकार ने अपने आदेश में कहा है कि दुनिया के कुछ हिस्सों में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और संकट का असर अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम सप्लाई चेन, शिपिंग लॉजिस्टिक्स और पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता पर पड़ रहा है। इससे कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की लागत में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।   पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बाद कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद आम लोगों को राहत देने के लिए सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल पंपों पर खुदरा कीमतों को अपेक्षाकृत नियंत्रित रखा है। इसी कारण रिटेल और बल्क बिक्री की कीमतों में अंतर और बढ़ गया।

abhishek singh जून 12, 2026 0
Social activists submitting letter to Indian government over Women's Reservation Bill and delimitation concerns
महिला आरक्षण बिल: सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार को लिखी चिट्ठी, उठाए कई सवाल

देश में प्रस्तावित महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को लेकर करीब 500 सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिला संगठनों ने केंद्र सरकार को एक संयुक्त पत्र लिखा है। 495 हस्ताक्षरों वाले इस पत्र में संसद के विशेष सत्र और विधेयक की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। ‘जल्दबाज़ी में बुलाया गया विशेष सत्र’ पत्र में कहा गया है कि 16–18 अप्रैल 2026 के लिए बुलाया गया विशेष सत्र जल्दबाज़ी में आयोजित किया गया है। हस्ताक्षरकर्ताओं के अनुसार: कई राज्यों में चुनाव जारी हैं आचार संहिता लागू है ऐसे समय में महत्वपूर्ण विधेयक लाना उचित नहीं ‘पर्याप्त समय नहीं दिया गया’ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि: महिला समूहों और संगठनों को सुझाव देने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला व्यापक चर्चा और परामर्श के बिना बिल लाया जा रहा है ड्राफ्ट सार्वजनिक करने की मांग पत्र में सरकार से मांग की गई है कि: प्रस्तावित विधेयकों का ड्राफ्ट सार्वजनिक किया जाए सभी हितधारकों से सलाह-मशविरा किया जाए परिसीमन और जनगणना से अलग रखने की अपील हस्ताक्षरकर्ताओं ने सुझाव दिया कि: महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से अलग रखा जाए सत्र का फोकस केवल Nari Shakti Vandan Adhiniyam में आवश्यक संशोधनों तक सीमित हो निर्वाचन आयोग की भूमिका पर चिंता पत्र में Election Commission of India की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए, खासकर: आरक्षित सीटों की पहचान पारदर्शिता और प्रक्रिया को लेकर प्रमुख हस्ताक्षरकर्ता कौन? इस पत्र पर कई प्रमुख हस्तियों के हस्ताक्षर हैं, जिनमें शामिल हैं: Romila Thapar Nandini Sundar Yogendra Yadav Amu Joseph Anjana Prakash Kalpana Kannabiran क्या है मुद्दे की अहमियत? महिला आरक्षण बिल को देश की राजनीति में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है, लेकिन इस पत्र से साफ है कि: प्रक्रिया और समय को लेकर असहमति है पारदर्शिता और व्यापक चर्चा की मांग तेज हो गई है अब देखना होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और क्या इस बिल पर आगे व्यापक सहमति बन पाती है।  

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Prime Minister Narendra Modi announces fast-track courts and strict action against those involved in paper leak cases.
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PM मोदी का बड़ा ऐलान: पेपर लीक के दोषियों पर सख्ती, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा

kalpana जुलाई 23, 2026 0