गौतम गंभीर

Gautam Gambhir
गौतम गंभीर की कोचिंग पर फिर उठे सवाल, पूर्व क्रिकेटरों ने टीम इंडिया के प्रदर्शन पर जताई चिंता

नई दिल्ली, एजेंसियां। इंग्लैंड दौरे पर टीम इंडिया के प्रदर्शन को लेकर मुख्य कोच गौतम गंभीर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। टी20 सीरीज में निराशाजनक नतीजों के बाद कई पूर्व क्रिकेटरों ने टीम चयन, रणनीति और खिलाड़ियों के उपयोग पर सवाल उठाए हैं। हालांकि वनडे सीरीज में भारत ने पहला वनडे जीत लिया है, लेकिन टीम प्रबंधन को लेकर बहस अभी भी जारी है।   मोहम्मद कैफ ने टीम मैनेजमेंट पर साधा निशाना   पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने टीम प्रबंधन की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने "इतना भ्रमित टीम मैनेजमेंट पहले कभी नहीं देखा।" कैफ ने खास तौर पर युवा खिलाड़ियों के उपयोग और टीम चयन पर सवाल उठाए।   एमएसके प्रसाद ने संजू सैमसन के चयन पर उठाए सवाल   पूर्व मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद ने संजू सैमसन को बार-बार बाहर किए जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि टीम प्रबंधन को चयन में स्पष्टता रखनी चाहिए और खिलाड़ियों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि गौतम गंभीर को अपनी योजनाओं को लागू करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।   संजय मांजरेकर ने बताई असली समस्या   पूर्व बल्लेबाज संजय मांजरेकर ने कहा कि केवल कोच या कप्तान को बदलना समाधान नहीं है। उनके अनुसार भारतीय टीम की समस्याएं इससे कहीं गहरी हैं और पूरे सिस्टम की समीक्षा की जरूरत है।   पहले वनडे की जीत के बाद भी जारी बहस   भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ पहला वनडे जीतकर सीरीज में 1 - 0 की बढ़त बना ली है, लेकिन क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि टीम के प्रदर्शन का सही आकलन पूरी सीरीज समाप्त होने के बाद ही किया जा सकेगा। ऐसे में आगामी मुकाबलों पर सभी की नजर रहेगी।

abhishek singh जुलाई 16, 2026 0
Ryan ten Doeschate
टीम इंडिया के कोचिंग स्टाफ में बड़ा बदलाव संभव, रयान टेन डोशेट के भविष्य पर सस्पेंस

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम के सहायक कोच रयान टेन डोशेट के इंग्लैंड दौरे के बाद अपने पद से अलग होने की खबरें सामने आई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनका दो साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है और वह इसे आगे बढ़ाने के इच्छुक नहीं हैं।   पारिवारिक कारणों से छोड़ सकते हैं जिम्मेदारी   रिपोर्ट्स के मुताबिक, रयान टेन डोशेट लगातार अंतरराष्ट्रीय दौरों और व्यस्त कार्यक्रम के कारण अपने परिवार को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं। उनकी पत्नी और तीन बच्चे लंदन में रहते हैं, इसलिए वह ऐसा पद चाहते हैं जिसमें यात्रा कम करनी पड़े। इसी वजह से उन्होंने टीम इंडिया के साथ अपना कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है।   गौतम गंभीर की टीम को लग सकता है झटका   रयान टेन डोशेट को मुख्य कोच गौतम गंभीर की पसंद पर जुलाई 2024 में भारतीय टीम के सहायक कोच के रूप में नियुक्त किया गया था। यदि वह पद छोड़ते हैं, तो यह गंभीर के कोचिंग स्टाफ के लिए बड़ा झटका माना जाएगा। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि गेंदबाजी कोच मॉर्ने मोर्कल के भविष्य को लेकर भी चर्चा चल रही है।   BCCI जल्द ले सकता है अंतिम फैसला   बीसीसीआई फिलहाल सपोर्ट स्टाफ में संभावित बदलावों पर विचार कर रहा है। इंग्लैंड वनडे सीरीज समाप्त होने के बाद बोर्ड नए कोचिंग संयोजन पर फैसला ले सकता है। हालांकि, अभी तक बीसीसीआई या रयान टेन डोशेट की ओर से आधिकारिक इस्तीफे की घोषणा नहीं की गई है।

abhishek singh जुलाई 15, 2026 0
Team India Coaching
टीम इंडिया के कोचिंग स्टाफ में हो सकता है बड़ा बदलाव, इंग्लैंड दौरे के बाद BCCI करेगी समीक्षा

नई दिल्ली, एजेंसियां। इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद भारतीय क्रिकेट टीम के कोचिंग स्टाफ में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, BCCI इंग्लैंड दौरा खत्म होने के बाद सपोर्ट स्टाफ की व्यापक समीक्षा करेगी और कुछ अहम पदों पर नए चेहरे देखने को मिल सकते हैं।   सपोर्ट स्टाफ के कई सदस्यों का भविष्य अधर में   रिपोर्ट्स के अनुसार, असिस्टेंट कोच रयान टेन डोएशेट और फील्डिंग कोच टी. दिलीप के भविष्य पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। टी. दिलीप का कार्यकाल इंग्लैंड दौरे के साथ समाप्त हो रहा है और उन्हें विस्तार मिलने की संभावना कम बताई जा रही है। वहीं गेंदबाजी कोच मॉर्ने मॉर्केल को बनाए रखने के पक्ष में बोर्ड दिखाई दे रहा है।   गौतम गंभीर पर फिलहाल पूरा भरोसा   हालांकि टीम के हालिया प्रदर्शन को लेकर सवाल उठे हैं, लेकिन मुख्य कोच गौतम गंभीर की भूमिका को लेकर फिलहाल कोई बदलाव नहीं माना जा रहा। BCCI का फोकस सपोर्ट स्टाफ में सुधार कर टीम के प्रदर्शन को बेहतर बनाने पर है। बोर्ड का मानना है कि मुख्य कोच को अपनी योजनाओं को लागू करने के लिए और समय दिया जाना चाहिए।   नई जिम्मेदारियों पर भी हो रहा विचार   सूत्रों के मुताबिक, BCCI टीम के सपोर्ट स्टाफ को और मजबूत बनाने के लिए कुछ नई नियुक्तियों पर भी विचार कर रही है। हाल ही में सैराज बहुतुले को भारतीय टीम का स्पिन बॉलिंग कोच नियुक्त किया गया था और अब अन्य विभागों में भी बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा। बोर्ड इंग्लैंड दौरे के बाद प्रदर्शन रिपोर्ट के आधार पर अंतिम फैसला लेगा।

abhishek singh जुलाई 14, 2026 0
India head coach Gautam Gambhir watches as Team India struggles during the England T20 tour after a series of defeats.
इंग्लैंड दौरे पर टीम इंडिया की करारी हार के बाद सवालों में गौतम गंभीर, रणनीति और टीम चयन पर उठे बड़े सवाल

इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टी20 टीम का निराशाजनक प्रदर्शन अब टीम प्रबंधन और मुख्य कोच गौतम गंभीर को लेकर बहस का विषय बन गया है। लगातार खराब नतीजों के बाद क्रिकेट विशेषज्ञों और पूर्व खिलाड़ियों ने टीम की रणनीति, खिलाड़ियों की भूमिका और मैच परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने की क्षमता पर सवाल उठाए हैं। भारत को इस दौरे पर छह मुकाबलों में पांच हार का सामना करना पड़ा। इंग्लैंड के खिलाफ टी20 श्रृंखला में टीम पूरी तरह संघर्ष करती नजर आई और निर्णायक मुकाबलों में एकतरफा हार झेलनी पड़ी। इंग्लैंड में नहीं चला भारत का खेल दौरे की शुरुआत आयरलैंड के खिलाफ हार से हुई। इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ टीम की मुश्किलें और बढ़ गईं। ट्रेंट ब्रिज में भारत मात्र 76 रन पर सिमट गया, जो टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उसका दूसरा सबसे कम स्कोर है। इसके बाद ब्रिस्टल में इंग्लैंड ने 159 रनों का लक्ष्य केवल 13.5 ओवर में हासिल कर भारत को एक और करारी शिकस्त दी। रणनीति और तैयारी पर उठे सवाल पूरे दौरे में भारतीय बल्लेबाज लगभग एक जैसी रणनीति अपनाते रहे। स्विंग और सीम गेंदबाजी के सामने बल्लेबाजी क्रम लगातार दबाव में दिखा, लेकिन टीम अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव नहीं कर सकी। क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि विदेशी परिस्थितियों के अनुसार टीम की तैयारी और योजनाओं में कमी साफ दिखाई दी। टीम चयन भी चर्चा का विषय भारत की प्लेइंग इलेवन और बल्लेबाजी क्रम को लेकर भी कई सवाल उठे। शानदार रिकॉर्ड रखने वाले तिलक वर्मा को उनके पसंदीदा नंबर-3 की बजाय निचले क्रम में बल्लेबाजी कराई गई। शिवम दुबे की भूमिका पूरे दौरे में स्पष्ट नजर नहीं आई। बाएं हाथ के बल्लेबाजों को लगातार प्राथमिकता दिए जाने पर भी सवाल खड़े हुए। गेंदबाजी संयोजन लगभग हर मैच में बदलता रहा, जिससे टीम को स्थिरता नहीं मिल सकी। वॉशिंगटन सुंदर को लगातार मौके दिए जाने के फैसले पर भी चर्चा हुई। पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि किसी नई टीम के लिए स्पष्ट रणनीति और स्थिर संयोजन बेहद जरूरी होता है। श्रेयस अय्यर ने कहा- टीम बदलाव के दौर से गुजर रही है श्रृंखला के बाद कप्तान श्रेयस अय्यर ने कहा कि टीम अभी संक्रमण (Transition) के दौर में है और खिलाड़ियों को नई भूमिका में ढलने के लिए समय चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में टीम बेहतर प्रदर्शन करेगी और गलतियों से सीख लेकर मजबूत वापसी करेगी। गौतम गंभीर पर बढ़ा दबाव मुख्य कोच गौतम गंभीर की नियुक्ति के बाद यह पहला बड़ा विदेशी दौरा रहा, जिसमें टीम उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी। लगातार हार के बाद अब टीम प्रबंधन की रणनीति और कोचिंग फैसलों पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नए कोच और कप्तान को अपनी योजनाओं को लागू करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए। वहीं यह भी माना जा रहा है कि भविष्य में विदेशी परिस्थितियों के अनुसार बेहतर तैयारी और स्पष्ट रणनीति अपनाना टीम इंडिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। आने वाले महीनों में भारतीय टीम के प्रदर्शन पर सभी की नजरें रहेंगी कि क्या यह युवा टीम अपनी कमजोरियों को दूर कर मजबूत वापसी कर पाती है या नहीं।  

surbhi जुलाई 10, 2026 0
Gambhir Laxman
वीवीएस लक्ष्मण जिम्बाब्वे दौरे और एशियन गेम्स में संभालेंगे टीम इंडिया की कमान, गौतम गंभीर को मिलेगा ब्रेक

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने आगामी जिम्बाब्वे दौरे और 2026 एशियन गेम्स के लिए अनुभवी बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण को भारतीय टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया है। टीम इंडिया के नियमित मुख्य कोच गौतम गंभीर इंग्लैंड दौरे के व्यस्त कार्यक्रम के बाद आराम करेंगे, इसलिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) के प्रमुख लक्ष्मण यह जिम्मेदारी संभालेंगे।   जिम्बाब्वे दौरे से लेकर एशियन गेम्स तक जिम्मेदारी   भारत की जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज 23, 25 और 27 जुलाई को हरारे में खेली जाएगी। इसके बाद लक्ष्मण एशियन गेम्स में भी भारतीय टीम के साथ रहेंगे। उनके साथ बल्लेबाजी कोच की भूमिका ऋषिकेश कानिटकर और गेंदबाजी कोच की भूमिका सुनील जोशी निभाएंगे।   बीसीसीआई ने अपनाया स्प्लिट-कोचिंग मॉडल   बीसीसीआई ने व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर को देखते हुए एक बार फिर स्प्लिट-कोचिंग मॉडल अपनाया है। एशियन गेम्स और भारत की वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज एक ही समय पर होने के कारण गौतम गंभीर सीनियर टीम के साथ रहेंगे, जबकि वीवीएस लक्ष्मण दूसरी भारतीय टीम की जिम्मेदारी संभालेंगे।   पहले भी निभा चुके हैं सफल भूमिका   यह पहली बार नहीं है जब वीवीएस लक्ष्मण भारतीय टीम के अंतरिम मुख्य कोच बने हैं। इससे पहले भी उन्होंने 2023 एशियन गेम्स और 2024 जिम्बाब्वे दौरे पर युवा भारतीय टीम का सफलतापूर्वक मार्गदर्शन किया था। बीसीसीआई को उम्मीद है कि उनके अनुभव का फायदा युवा खिलाड़ियों को मिलेगा।

abhishek singh जुलाई 8, 2026 0
Gautam Gambhir
साईं सुदर्शन को मिलेगा नंबर-3 पर मौका, श्रीलंका दौरे के लिए चार स्पिनर तैयार करेगा भारत: गौतम गंभीर

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच से पहले टीम संयोजन को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवा बल्लेबाज साईं सुदर्शन को टेस्ट क्रिकेट में नंबर-3 पर बल्लेबाजी करने का अवसर दिया जाएगा। गंभीर का मानना है कि सुदर्शन को अब तक इस क्रम पर पर्याप्त मौके नहीं मिले हैं और उनकी प्रतिभा को साबित करने के लिए निरंतर अवसर आवश्यक हैं। आईपीएल प्रदर्शन का मिलेगा फायदा गंभीर ने कहा कि साईं सुदर्शन शानदार फॉर्म में हैं और हाल ही में आईपीएल में 700 से अधिक रन बना चुके हैं। ऐसे में कुछ मैचों के आधार पर उनका मूल्यांकन करना उचित नहीं होगा। उन्होंने संकेत दिया कि अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट में सुदर्शन को प्राथमिकता मिल सकती है, जबकि देवदत्त पडिक्कल को इंतजार करना पड़ सकता है। श्रीलंका दौरे के लिए स्पिन आक्रमण की तैयारी भारतीय टीम प्रबंधन अगस्त में होने वाले श्रीलंका दौरे को ध्यान में रखते हुए स्पिन विभाग को मजबूत करने की योजना बना रहा है। गंभीर ने बताया कि टीम श्रीलंका में दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला के लिए चार स्पिनरों के साथ उतरने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि युवा स्पिनरों मानव सुथार और हर्ष दुबे के बीच प्रतिस्पर्धा है। दोनों गेंदबाजों की शैली अलग-अलग है और यह टेस्ट मैच टीम को चौथे स्पिनर के विकल्प को परखने का अवसर देगा। ऋषभ पंत को दिया समर्थन उप-कप्तानी से हटाए जाने के बावजूद गंभीर ने ऋषभ पंत का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि टीम पंत की आक्रामक बल्लेबाजी शैली में कोई बदलाव नहीं चाहती, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मैच की परिस्थितियों को समझना और उसके अनुसार खेलना भी उतना ही जरूरी है। भविष्य की टेस्ट योजनाओं पर फोकस गंभीर ने कहा कि अलग-अलग देशों में खेलने के लिए अलग रणनीति और तैयारी की जरूरत होती है। उन्होंने संकेत दिया कि भारतीय टीम आगामी विदेशी दौरों, विशेषकर श्रीलंका और न्यूजीलैंड जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपने टेस्ट संयोजन को मजबूत करने पर काम कर रही है।

Unknown जून 5, 2026 0
Gautam Gambhir legal action
कोच गौतम गंभीर ने AI-डीपफेक के गलत इस्तेमाल पर पहुंचे दिल्ली हाईकोर्ट

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने एआई तकनीक के दुरुपयोग के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए Delhi High Court का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने डिजिटल नकल, एआई-जनित डीपफे और बिना अनुमति उनके नाम, चेहरे और आवाज के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए सिविल मुकदमा दायर किया है।   सोशल मीडिया पर बढ़े फर्जी कंटेंट के मामले गंभीर की लीगल टीम के मुताबिक, 2025 के अंत से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उनके नाम से फर्जी वीडियो और कंटेंट तेजी से बढ़े हैं। Instagram, X, YouTube और Facebook जैसे प्लेटफॉर्म्स पर एआई तकनीक फेस स्वैपिंग और वॉइस क्लोनिंग की मदद से ऐसे वीडियो बनाए गए, जिनमें उन्हें ऐसे बयान देते हुए दिखाया गया जो उन्होंने कभी दिए ही नहीं। इनमें एक फर्जी इस्तीफे का वीडियो भी शामिल है, जिसे लाखों बार देखा गया और इससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई।   कई बड़ी कंपनियां भी केस में शामिल इस मामले में कुल 16 पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है। इसमें Amazon और Flipkart जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ-साथ Meta Platforms और Google जैसी बड़ी टेक कंपनियां भी शामिल हैं। इसके अलावा आईटी मंत्रालय और दूरसंचार विभाग को भी पक्षकार बनाया गया है ताकि कोर्ट के आदेशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।   2.5 करोड़ हर्जाना और स्थायी रोक की मांग गंभीर ने यह मुकदमा कॉपीराइट एक्ट 1957, ट्रेड मार्क्स एक्ट 1999 और कॉमर्शियल एक्ट 2015 के तहत दायर किया है। उन्होंने कोर्ट से 2.5 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है। साथ ही, सभी फर्जी अकाउंट्स और आपत्तिजनक कंटेंट को तुरंत हटाने तथा भविष्य में ऐसे किसी भी दुरुपयोग पर स्थायी रोक लगाने की अपील की है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी छवि और पहचान का गलत इस्तेमाल कर न सिर्फ गलत जानकारी फैलाई जा रही है, बल्कि इससे आर्थिक लाभ भी कमाया जा रहा है।   व्यक्तिगत नहीं, व्यापक मुद्दा गंभीर ने इस मामले को केवल व्यक्तिगत नुकसान नहीं, बल्कि सार्वजनिक हस्तियों के अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताया। उनका कहना है कि एआई के बढ़ते दौर में किसी की पहचान का दुरुपयोग एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है, जिस पर सख्त कानूनी नियंत्रण जरूरी है। 

Unknown मार्च 19, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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