रांची। भारतीय पासपोर्ट को लेकर विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के बयान के बाद देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने केंद्र सरकार से सवाल किया है कि यदि पासपोर्ट केवल यात्रा (ट्रैवल) दस्तावेज है और नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं है, तो विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में इसे सबसे पहले स्वीकार किए जाने वाले दस्तावेजों में क्यों शामिल किया गया है। JMM ने सोशल मीडिया पर उठाए सवाल जेएमएम ने सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्र सरकार पर विरोधाभासी रुख अपनाने का आरोप लगाया। पार्टी ने कहा कि एक ओर विदेश मंत्रालय पासपोर्ट को केवल ट्रैवल डॉक्यूमेंट बता रहा है, वहीं दूसरी ओर SIR प्रक्रिया में इसे नागरिकता संबंधी प्रमुख दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जा रहा है। पार्टी ने सरकार से इस मुद्दे पर स्पष्टता देने की मांग की है। कांग्रेस और विपक्ष ने भी घेरा इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत और राजद नेता रोहिणी आचार्य ने भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो पासपोर्ट जारी करने से पहले होने वाली पुलिस सत्यापन और दस्तावेजों की जांच का औचित्य क्या है। साथ ही उन्होंने पूछा कि आखिर भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए कौन-सा दस्तावेज अंतिम रूप से मान्य माना जाएगा। विदेश मंत्रालय ने क्या कहा? पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है, लेकिन यह भारतीय नागरिकता का अंतिम कानूनी प्रमाण नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, किसी व्यक्ति की नागरिकता का अंतिम निर्धारण संबंधित कानूनों और वैधानिक दस्तावेजों के आधार पर किया जाता है। नागरिकता का अंतिम प्रमाण क्या है? कानूनी विशेषज्ञों और पूर्व न्यायिक फैसलों के अनुसार, पासपोर्ट, आधार कार्ड या वोटर आईडी अपने-आप में नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं हैं। भारतीय नागरिकता का निर्धारण मुख्य रूप से नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत जन्म, वंश, पंजीकरण, प्राकृतिककरण, जन्म प्रमाणपत्र, नागरिकता प्रमाणपत्र तथा अन्य वैधानिक दस्तावेजों के आधार पर किया जाता है। इसी मुद्दे को लेकर अब राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है।
रांची। दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मिलने वाला पद्मभूषण सम्मान पत्नी रूपी सोरेन और बहू कल्पना सोरेन ग्रहण करेंगी। ये जानकारी झामुमो को केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने दी। दिशोम गुरु शिबू सोरेन को यह नागरिक सम्मान सार्वजनिक जीवन में उनके लंबे सार्थक योगदान और झारखंड राज्य के गठन में ऐतिहासिक भूमिका निभाने के लिए दिया जा रहा है। 4 अगस्त 2025 को हुआ था निधन बता दें कि 4 अगस्त 2025 को लंबी बीमारी के बाद शिबू सोरेन का निधन हो गया था। वह लगातार 8 बार लोकसभा सांसद रहे और यूपीए सरकार में कोयला मंत्री के रूप में भी काम किया। जब उनका निधन हुआ वह राज्यसभा सांसद थे। झारखंड के लोगों का शिबू सोरेन से भावनात्मक जुड़ाव झारखंड के लोगों का शिबू सोरेन से भावनात्मक जुड़ाव है और इस वजह से उनको दिशोम गुरु कहा जाता है। शिबू सोरेन ने महाजनी और साहूकारी व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष से सार्वजनिक जीवन में कदम रखा। उन्होंने आदिवासियों को शिक्षित करने के लिए रात्रि पाठशालाओं का संचालन किया। शराबबंदी के खिलाफ अभियान चलाया। वह ना केवल एक राजनेता थे बल्कि सामाजिक सुधारक भी थे। भारत रत्न देने की है मांग जब शिबू सोरेन का निधन हुआ तो झारखंड मुक्ति मोर्चा समेत अन्य पार्टी के नेताओं ने उनके लिए भारत रत्न की मांग की। उनके मोरहाबादी स्थित सरकारी आवास को म्यूजियम में तब्दील करने की मांग उठी। धुर्वा में उनका स्मृति स्थल बनाया जा रहा है। केंद्र सरकार ने गुरुजी को भारत रत्न देने पर तो सहमति नहीं दी, लेकिन पद्म भूषण से सम्मानित करने का फैसला किया।
साउथ सुपरस्टार थलापति विजय 22 जून 2026 को अपना 52वां जन्मदिन मना रहे हैं। सक्रिय फिल्मी करियर से संन्यास की घोषणा के बाद यह उनका पहला जन्मदिन है, जिसे लेकर फैंस के बीच खास उत्साह देखने को मिल रहा है। इस खास मौके पर निर्देशक एटली ने सोशल मीडिया पर विजय के लिए एक भावुक संदेश साझा किया। एटली ने खास तस्वीर के साथ दी जन्मदिन की शुभकामनाएं निर्देशक एटली ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर थलापति विजय के साथ एक पुरानी और खास तस्वीर साझा की। तस्वीर में दोनों ब्लैक आउटफिट में नजर आ रहे हैं और एटली सुपरस्टार को गले लगाते दिखाई दे रहे हैं। फोटो के साथ एटली ने बेहद संक्षिप्त लेकिन दिल छू लेने वाला संदेश लिखा, "Happy Birthday Anna." एटली की इस पोस्ट पर फैंस ने भी जमकर प्यार बरसाया और अपने पसंदीदा स्टार को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। विजय और एटली की सुपरहिट जोड़ी थलापति विजय और एटली ने अब तक तीन सफल फिल्मों में साथ काम किया है और उनकी जोड़ी को तमिल सिनेमा की सबसे सफल निर्देशक-अभिनेता जोड़ियों में गिना जाता है। 'थेरी' से हुई थी शुरुआत साल 2016 में रिलीज हुई 'थेरी' दोनों की पहली फिल्म थी। इस एक्शन ड्रामा में विजय के साथ सामंथा रुथ प्रभु और एमी जैक्सन नजर आई थीं। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई थी। 'मर्सल' ने बनाई नई पहचान इसके बाद दोनों ने 'मर्सल' में साथ काम किया। फिल्म में विजय ने एक डॉक्टर और जादूगर की दोहरी जिंदगी को पर्दे पर शानदार अंदाज में पेश किया। फिल्म में एस.जे. सूर्या, काजल अग्रवाल, सामंथा और नित्या मेनन भी अहम भूमिकाओं में थीं। 'बिगिल' ने भी जीता दिल विजय और एटली की तीसरी फिल्म 'बिगिल' थी, जो एक स्पोर्ट्स एक्शन ड्रामा थी और दर्शकों को काफी पसंद आई। 'जना नायकन' होगी विजय की आखिरी फिल्म थलापति विजय जल्द ही अपनी अंतिम फिल्म 'जना नायकन' में दिखाई देंगे। एच. विनोथ के निर्देशन में बन रही इस फिल्म में बॉबी देओल, पूजा हेगड़े और ममिता बैजू भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म की रिलीज पहले पोंगल 2026 के लिए तय थी, लेकिन बाद में इसे आगे बढ़ा दिया गया। एटली की अगली फिल्म में दिखेंगे अल्लू अर्जुन वहीं, निर्देशक एटली इन दिनों अपनी आगामी फिल्म 'राका' पर काम कर रहे हैं। इस बड़े बजट की फिल्म में अल्लू अर्जुन मुख्य भूमिका में हैं, जबकि दीपिका पादुकोण भी अहम किरदार निभा रही हैं। फिल्म का फर्स्ट लुक पहले ही दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ा चुका है।
रांची। झारखंड से राज्यसभा सांसद निर्वाचित होने के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेता बैद्यनाथ राम सोमवार को अपने परिवार के साथ रांची जिले के तमाड़ स्थित प्रसिद्ध मां सोलहभुजी दिउड़ी मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना कर माता का आशीर्वाद लिया। इस दौरान उन्होंने झारखंड की सुख-समृद्धि, शांति, विकास और जनकल्याण की कामना की। 'जनता की सेवा करने की शक्ति मिले' पूजा के बाद मीडिया से बातचीत में बैद्यनाथ राम ने कहा कि मां दिउड़ी उनकी गहरी आस्था का केंद्र हैं और वह समय-समय पर यहां दर्शन के लिए आते रहे हैं। राज्यसभा चुनाव में जीत के बाद सबसे पहले मां के दरबार में पहुंचकर उन्होंने आशीर्वाद लिया है। उन्होंने कहा कि उनकी प्रार्थना है कि उन्हें जनता की सेवा करने की शक्ति मिले और वे अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन कर सकें। बैद्यनाथ राम ने कहा कि पार्टी नेतृत्व और जनता ने उन पर जो विश्वास जताया है, उस पर खरा उतरना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्यसभा में झारखंड के विकास, जनहित और राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को पूरी मजबूती के साथ उठाएंगे। विधायक विकास कुमार मुंडा भी रहे मौजूद इस अवसर पर तमाड़ विधायक विकास कुमार मुंडा भी बैद्यनाथ राम के साथ मंदिर पहुंचे। उनके साथ झामुमो के कई पदाधिकारी, कार्यकर्ता और समर्थक भी मौजूद रहे। सभी ने नवनिर्वाचित सांसद को जीत की बधाई दी और मां सोलहभुजी का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर परिसर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम राज्यसभा सांसद के आगमन को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। बुंडू डीएसपी ओम प्रकाश के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात रहा, जबकि तमाड़ थाना प्रभारी दुलाल कुमार महतो ने सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की। प्रशासन की देखरेख में दर्शन और पूजा-अर्चना शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।
गिरिडीह। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की गिरिडीह जिला कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक बुधवार को शहर के उत्सव उपवन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष संजय सिंह ने की। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान और मतदाता सूची सत्यापन को लेकर पार्टी की रणनीति तय करने के उद्देश्य से आयोजित इस बैठक में बड़ी संख्या में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। बैठक में झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू मुख्य रूप से उपस्थित रहे। भाजपा पर जनता को गुमराह करने का आरोप बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने भाजपा पर एसआईआर के नाम पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाने की साजिश रची जा रही है, इसलिए झामुमो कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर तक सक्रिय होने और गांव-गांव, घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने का आह्वान किया। सोनू ने कहा कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं कटना चाहिए। इसके लिए कार्यकर्ताओं को सतर्क रहकर लोगों को मतदाता सूची के महत्व और सत्यापन प्रक्रिया की जानकारी देनी होगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए हर नागरिक का मतदान अधिकार सुरक्षित रहना जरूरी है। शिविर लगाकर लोगों की मदद करने का निर्देश मंत्री ने सभी प्रखंड अध्यक्षों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में विशेष शिविर आयोजित करें और लोगों को आवश्यक फॉर्म भरने में सहायता प्रदान करें। उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान होने वाली हर गतिविधि पर नजर रखी जाए और लोगों को भ्रमित करने की किसी भी कोशिश का तथ्यों के आधार पर जवाब दिया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के नाम बने रहें, इसके लिए जमीनी स्तर पर सक्रियता और जागरूकता अभियान चलाना आवश्यक है। गरीबों और आदिवासियों का नाम नहीं कटने देंगे : संजय सिंह जिला अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि झामुमो कार्यकर्ता घर-घर जाकर मतदाता सूची का सत्यापन करेंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी गरीब, आदिवासी और जरूरतमंद व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए प्रत्येक बूथ पर निगरानी और सतर्कता जरूरी है। 14 जून को होगा कार्यकर्ता सम्मेलन बैठक में 14 जून को एक बड़े कार्यकर्ता सम्मेलन के आयोजन का निर्णय भी लिया गया। इस सम्मेलन में गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन मुख्य रूप से शामिल होंगी। वह कार्यकर्ताओं को पार्टी की नीतियों, संगठनात्मक मजबूती और आगामी चुनावी रणनीति को लेकर मार्गदर्शन देंगी। इसके अलावा बूथ लेवल एजेंटों को प्रशिक्षण देने तथा एसआईआर के दौरान फर्जी दावों और आपत्तियों पर विशेष नजर रखने की योजना भी बनाई गई। पार्टी ने इसे संगठन को मजबूत करने और मतदाता अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।
रांची। झारखंड में 2 सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव के लिए नामाकंन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने बैजनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने प्रणव झा पर फिर से भरोसा जताया है। वहीं, बीजेपी की बात करें तो गौरव वल्लभ ने भले ही नामांकन पर्चा खरीदा है, लेकिन अभी तक बीजेपी ने नाम की घोषणा नहीं की है। उधर परिमल नाथवाणी भी निदर्लीय मैदान में उतरने को तैयार हैं। उन्होंने नामांकन पर्चा दाखिल भी कर दिया है। 2 सीटों के लिए 3 उम्मीदवारों के उतरने से चुनाव का माहौल रोचक हो गया है। हालांकि कांग्रेस ने देर रात जेएमएम प्रमुख और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर काफी हद तक विवाद को सुलझा लिया है। माना जा रहा है कि गठबंधन में शामिल कांग्रेस के उम्मीदवार को जेएमएम का समर्थन मिल सकता है। उधर बीजेपी ने अभी तक पत्ता नहीं खोला है। लेकिन, परिमल नाथवाणी के नामांकन में बीजेपी नेताओं ने प्रस्तावक बन कर इशारा दे दिया है कि बीजेपी उनके साथ है। माना जा रहा है कि एनडीए के विधायक परिमल नाथवाणी को अपना समर्थन देने जा रहे हैं। इसके बावजूद भी उन्हें 4 विधायक जुटाने होंगे, क्योंकि एनडीए के पास 24 विधायक ही ही हैं और जीत के लिए 28 विधायकों की जरूरत होगी। जेकेएलएम विधायक जयराम महतो का समर्थन उन्हें मिल सकता है, लेकिन इसके बावजूद भी उन्हें 3 विधायक जुटाने होंगे। इसका मतलब हुआ कि क्रॉस वोटिंग का ही सहारा लेना होगा। अगर क्रॉस वोटिंग होती है तो कांग्रेस के हाथ से सीट छिटक सकती है। यही से एक बार फिर रिसॉर्ट पालिटिक्स देखने को मिल सकती है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पहले ही अपने सारे विधायकों को रांची बुला लिया है और सभी को एकसाथ-एकजुट रहने का निर्देश दिया गया है। वहीं, बीजेपी जब नाथवाणी को समर्थन दे ही रही है, तो उसके विधायकों के छिटकने का सवाल ही नहीं है। ऐसे भी नाथवाणी ने सोमवार को बीजेपी विधायक नवीन जायसवाल के आवास पर पहुंच कर उनके साथ आगे की रणनीति तय की। कांग्रेस और राजद के विधायकों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। इसलिए दोनों ही दल अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटे हैं। राज्य के मंत्री और राजद नेता संजय प्रसाद यादव ने साफ किया कि वे सभी लालू प्रसाद यादव के शिष्य हैं, इसलिए गद्दारी तो उनके खून में ही नहीं है। यह भी संभव है कि जल्द ही कांग्रेस के विधायकों को एकजुट रखने के लिए उन्हें भी कहीं एकसाथ ही रखा जाये। क्योंकि, आज 8 जून है और चुनाव 18 जून को होना है। यानी, 10 अभी बाकी हैं और इस दौरान काफी कुछ देखने को मिल सकता है।
रांची। झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव से पहले इंडिया ब्लॉक के भीतर शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे और उम्मीदवार चयन को लेकर सहमति नहीं बन पाई है, जिससे गठबंधन में खींचतान तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने जहां अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है, वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा का कहना है कि यह फैसला बिना आपसी सहमति के लिया गया है, जिससे पार्टी के भीतर नाराजगी बढ़ी है। JMM दोनों राज्यसभा सीटों पर उतार सकती है प्रत्याशी वहीं JMM ने स्पष्ट कर दिया है कि वह दोनों राज्यसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार सकती है, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक समीकरण और अधिक जटिल हो सकते हैं। राजनीतिक समीकरणों के अनुसार, विधानसभा में झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास मजबूत बल संख्या है, जिससे एक सीट पर उसकी जीत लगभग पक्की मानी जा रही है। लेकिन दूसरी सीट को लेकर कांग्रेस और JMM के बीच सीधा टकराव देखा जा रहा है। इस पूरे विवाद के बीच सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर बातचीत और समाधान की कोशिशें जारी हैं, लेकिन फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है और टकराव के संकेत बने हुए हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि जल्द सहमति नहीं बनी तो इसका असर राज्यसभा चुनाव परिणाम और गठबंधन की एकजुटता पर भी पड़ सकता है। इस विवाद ने झारखंड की सियासत में नए राजनीतिक समीकरणों की अटकलों को भी जन्म दे दिया है।
रांची। पूर्व राज्यसभा सांसद परिमल नाथवाणी के रांची में होने की सूचना है। सूचना के मुताबिक विशेष विमान से परिमल नाथवाणी रांची आये हैं। हालांकि अब तक इसकी किसी ने पुष्टि नहीं की है। राज्यसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच उनके आने की सूचना ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। चर्चाओं के मुताबिक नाथवाणी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिल सकते हैं। हालांकि मुख्यमंत्री सचिवालय से भी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। नाथवाणी को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाये जाने की चर्चा है। बता दें कि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने एक उम्मीदवार की घोषणा कर दी है, जबकि दूसरे देर शाम तक होने की संभावना है।
रांची। झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले महागठबंधन में मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। कांग्रेस द्वारा बोकारो निवासी प्रणव झा को राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने दोनों सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने की मंशा जाहिर की है। इससे गठबंधन के भीतर राजनीतिक तनाव बढ़ गया है और आने वाले दिनों में सियासी समीकरण बदलने की संभावना जताई जा रही है। कांग्रेस के फैसले पर उठे सवाल कांग्रेस ने गुरुवार देर रात प्रणव झा को उम्मीदवार घोषित किया। इसके बाद पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह सवाल उठने लगे। राजनीतिक हलकों में प्रणव झा को "पैराशूट उम्मीदवार" बताया जा रहा है। उनका जन्म भले ही झारखंड में हुआ हो, लेकिन राज्य की सक्रिय राजनीति में उनकी भूमिका सीमित रही है। बताया जा रहा है कि उनके नाम पर अंतिम फैसला कांग्रेस आलाकमान ने लिया, जिससे प्रदेश कांग्रेस के कुछ नेताओं में नाराजगी है। फुरकान अंसारी ने जताई नाराजगी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और गोड्डा के पूर्व सांसद फुरकान अंसारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने संकेत दिया कि वर्षों तक पार्टी के लिए काम करने के बावजूद उनके नाम पर विचार नहीं किया गया। उनकी प्रतिक्रिया ने यह साफ कर दिया कि उम्मीदवार चयन को लेकर कांग्रेस के भीतर भी असंतोष मौजूद है। झामुमो की बैठक में दोनों सीटों पर दावा शुक्रवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास पर झामुमो की अहम बैठक हुई, जिसमें पार्टी के सांसद, विधायक, मंत्री और वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक के बाद नेताओं ने स्पष्ट किया कि झामुमो राज्यसभा की दोनों सीटों पर अपना दावा पेश करेगा। नेताओं का कहना है कि राज्य में झामुमो सबसे बड़ा दल है, इसलिए दोनों सीटों पर उसका स्वाभाविक अधिकार बनता है। हफीजुल हसन और बैद्यनाथ राम के बयान मंत्री हफीजुल हसन ने कहा कि पार्टी का रुख पहले से स्पष्ट है और दोनों सीटों पर झामुमो उम्मीदवार उतारना चाहता है। वहीं विधायक बैद्यनाथ राम ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सहमति के बिना उम्मीदवार घोषित कर दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी सांसदों और विधायकों ने दोनों सीटों पर झामुमो उम्मीदवार उतारने की इच्छा जताई है। हेमंत सोरेन के फैसले पर टिकी निगाहें राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस और झामुमो अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतारते हैं तो महागठबंधन की एकजुटता पर गंभीर सवाल खड़े होंगे। फिलहाल अंतिम निर्णय के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अधिकृत किया गया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि गठबंधन आपसी सहमति से समाधान निकालता है या राज्यसभा चुनाव में टकराव की स्थिति बनती है।
रांची/गोसाईंगांव,एजेंसियां। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) असम विधानसभा चुनाव 2026 में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। पार्टी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनकी पत्नी एवं गांडेय विधायक कल्पना सोरेन सहित कई वरिष्ठ नेता असम के विभिन्न हिस्सों में चुनावी सभाओं में शामिल हो रहे हैं।इसी कड़ी में कल्पना सोरेन ने गोसाईंगांव विधानसभा क्षेत्र से झामुमो प्रत्याशी फेड्रिक्सन हांसदा के समर्थन में जोरदार जनसभा को संबोधित किया। सभा में भारी भीड़ जुटी और लोगों ने उनकी एक झलक पाने के लिए उत्साह दिखाया। कल्पना सोरेन ने मंच से कहा कल्पना सोरेन ने मंच से कहा कि झामुमो असम के आदिवासी समुदाय के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह चुनाव सामान्य नहीं बल्कि इतिहास रचने वाला है और परिणाम सभी को हैरान कर देगा। उन्होंने चाय बागान मजदूरों के हक-अधिकार और उनकी समस्याओं के समाधान पर भी ध्यान आकर्षित किया। कल्पना का वादा विधायक ने विशेष रूप से टी-ट्राइब (चाय जनजाति) को जनजाति का दर्जा दिलाने का वादा किया। उन्होंने कहा कि झारखंड में चल रही जनकल्याणकारी योजनाओं को असम में भी लागू करने की कोशिश की जाएगी।सभा में सिंहभूम लोकसभा सांसद जोबा मांझी और झामुमो विधायक सोमेश चंद्र सोरेन ने भी फेड्रिक्सन हांसदा के लिए अधिक से अधिक वोट देने की अपील की। झामुमो असम में 21 सीटों पर प्रत्याशी उतारा है कल्पना सोरेन ने जनता के बीच सेल्फी ली और बच्चों को गोद में उठाते हुए लोगों के बीच अपनी लोकप्रियता दिखाई। झामुमो असम में 21 सीटों पर प्रत्याशी उतारकर आदिवासी और चाय बागान क्षेत्रों में अपना मजबूत आधार बनाने की कोशिश कर रहा है। पार्टी का दावा है कि चुनाव असम में रह रहे झारखंड मूल के लोगों के अधिकार सुनिश्चित करने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए महत्वपूर्ण है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।