राजस्थान रॉयल्स

Vaibhav Suryavanshi
वैभव सूर्यवंशी को मिली पहली टीम इंडिया जर्सी, भावुक हुए 15 वर्षीय स्टार बोले- 'इस एहसास को शब्दों में बयां नहीं कर सकता'

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे बेबी बॉस के नाम से मशहूर वैभव सूर्यवंशी के लिए 23 जून का दिन बेहद खास रहा। महज 15 साल की उम्र में उन्हें पहली बार टीम इंडिया की आधिकारिक जर्सी मिली। जर्सी मिलने के बाद वैभव सूर्यवंशी भावुक हो गए और कहा कि यह उनके क्रिकेट करियर का सबसे बड़ा पल है। अब माना जा रहा है कि आयरलैंड के खिलाफ होने वाली टी20 सीरीज में उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिल सकता है।   IPL 2026 के शानदार प्रदर्शन का मिला इनाम   वैभव सूर्यवंशी ने IPL 2026 में शानदार बल्लेबाजी से सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए उन्होंने कई विस्फोटक पारियां खेलीं और पूरे सीजन में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से क्रिकेट विशेषज्ञों को प्रभावित किया। उनके लगातार बेहतरीन प्रदर्शन के बाद ही चयनकर्ताओं ने उन्हें भारतीय टी20 टीम में जगह दी।   जर्सी पहनकर हुए भावुक   BCCI द्वारा साझा किए गए वीडियो में वैभव पहली बार टीम इंडिया की जर्सी हाथ में लेते और पहनते हुए नजर आए। इस दौरान उन्होंने कहा, "यह मेरे जीवन का सबसे बड़ा सपना था। इस एहसास को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।" उनकी भावुक प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और क्रिकेट प्रशंसक उन्हें बधाई दे रहे हैं।   आयरलैंड दौरे पर हो सकता है डेब्यू   रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैभव सूर्यवंशी को आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने का मौका मिल सकता है। अगर ऐसा होता है तो वह भारतीय क्रिकेट के सबसे युवा टी20 अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों में शामिल हो जाएंगे।   रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन से बनाई पहचान   हाल ही में भारत-ए की ओर से खेलते हुए वैभव ने श्रीलंका-ए के खिलाफ त्रिकोणीय सीरीज के फाइनल में सिर्फ 29 गेंदों में 94 रन की विस्फोटक पारी खेली थी। उनकी इस पारी ने क्रिकेट जगत में तहलका मचा दिया और चयनकर्ताओं का भरोसा और मजबूत किया।   भारतीय क्रिकेट का नया सितारा   क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि वैभव सूर्यवंशी आने वाले वर्षों में भारतीय क्रिकेट के बड़े सितारों में शामिल हो सकते हैं। उनकी निडर बल्लेबाजी, तेज रन बनाने की क्षमता और बड़े मैचों में प्रदर्शन करने का आत्मविश्वास उन्हें बाकी युवा खिलाड़ियों से अलग बनाता है। टीम इंडिया के प्रशंसकों की नजर अब उनके संभावित अंतरराष्ट्रीय डेब्यू पर टिकी हुई है।

abhishek singh जून 25, 2026 0
Kumar Sangakkara praises Vaibhav Sooryavanshi after his record-breaking IPL 2026 season for Rajasthan Royals
वैभव सूर्यवंशी को जल्द मिलेगा टीम इंडिया का बुलावा? कुमार संगकारा ने दिया बड़ा बयान

आईपीएल 2026 में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से सभी को प्रभावित करने वाले युवा बल्लेबाज Vaibhav Sooryavanshi को जल्द ही भारतीय टीम में मौका मिल सकता है। ऐसा मानना है राजस्थान रॉयल्स के मुख्य कोच Kumar Sangakkara का, जिन्होंने टीम के क्वालिफायर-2 से बाहर होने के बाद वैभव की जमकर सराहना की। गुजरात टाइटंस के खिलाफ हार के साथ राजस्थान रॉयल्स का आईपीएल 2026 का सफर खत्म हो गया, लेकिन 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने पूरे सीजन में ऐसा प्रदर्शन किया जिसने क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। "बहुत जल्द मिलेगा इंटरनेशनल कॉल-अप" संगकारा ने मैच के बाद कहा कि वैभव ने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों के खिलाफ जिस तरह बल्लेबाजी की है, उससे साफ है कि वह किसी भी स्तर की चुनौती के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, "वैभव ने इस सीजन में जो कुछ दिखाया है, उसे देखते हुए मुझे लगता है कि वह किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। मुझे पूरा विश्वास है कि उसे बहुत जल्द भारतीय टीम से बुलावा मिलेगा।" संगकारा के मुताबिक वैभव ने सिर्फ रन ही नहीं बनाए, बल्कि ओपनिंग साझेदारी की जिम्मेदारी भी शानदार तरीके से निभाई और पूरे सीजन परिपक्वता के साथ बल्लेबाजी की। रिकॉर्डतोड़ सीजन ने बढ़ाई दावेदारी Vaibhav Sooryavanshi ने आईपीएल 2026 में 16 पारियों में 776 रन बनाए। उनका स्ट्राइक रेट 237.30 रहा, जो टूर्नामेंट के इतिहास के सबसे बेहतरीन स्ट्राइक रेट्स में शामिल है। उनके कुल 776 रनों में से 684 रन सिर्फ चौकों और छक्कों से आए, जो उनकी आक्रामक बल्लेबाजी का प्रमाण है। क्वालिफायर-2 में भी उन्होंने 47 गेंदों में 96 रन की शानदार पारी खेली, हालांकि टीम को जीत नहीं दिला सके। वैभव की तैयारी से प्रभावित हैं संगकारा संगकारा ने बताया कि राजस्थान रॉयल्स का कोचिंग स्टाफ वैभव के दिमाग पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालता। उन्होंने कहा कि युवा बल्लेबाज टीम मीटिंग्स में सक्रिय रूप से हिस्सा लेते हैं, गेंदबाजों की वीडियो स्टडी करते हैं और हर मैच से पहले गहन तैयारी करते हैं। संगकारा ने कहा, "हम उनके दिमाग में अनावश्यक बातें नहीं भरना चाहते। वह साफ सोच के साथ बल्लेबाजी करते हैं और वही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।" मुश्किल हालात में भी राजस्थान ने किया कमाल आईपीएल 2026 के दौरान राजस्थान रॉयल्स को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। टीम के अहम खिलाड़ी Sam Curran चोट के कारण पूरे सीजन से बाहर रहे, जबकि Riyan Parag और Ravindra Jadeja भी सीजन के अंतिम चरण में फिटनेस समस्याओं से जूझते रहे। इसके बावजूद राजस्थान ने प्लेऑफ तक का सफर तय किया। संगकारा ने युवा गेंदबाजों Yash Raj Punja और Brijesh Sharma के प्रदर्शन की भी सराहना की। रियान पराग की कप्तानी को बताया शानदार राजस्थान रॉयल्स के कप्तान Riyan Parag ने पहली बार पूरे सीजन टीम की कमान संभाली। संगकारा ने उनकी कप्तानी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने दबाव के बावजूद टीम को बेहतरीन तरीके से संभाला और मैदान पर अच्छे फैसले लिए। उन्होंने कहा, "रियान का पहला पूरा कप्तानी सीजन शानदार रहा। वह लगातार सीख रहे हैं और अगले सीजन में और बेहतर होकर लौटेंगे।" नौवें स्थान से प्लेऑफ तक का सफर पिछले सीजन राजस्थान रॉयल्स अंक तालिका में नौवें स्थान पर रही थी, लेकिन इस बार टीम ने सभी उम्मीदों को पीछे छोड़ते हुए प्लेऑफ में जगह बनाई। संगकारा का मानना है कि टीम ने कठिन परिस्थितियों में भी जिस जज्बे के साथ खेला, वह भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा, "शायद टूर्नामेंट शुरू होने से पहले किसी ने नहीं सोचा था कि हम प्लेऑफ तक पहुंचेंगे। लेकिन मेहनत, विश्वास और टीम भावना ने इसे संभव बनाया।" हालांकि राजस्थान फाइनल में जगह नहीं बना सकी, लेकिन वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा सितारे ने फ्रेंचाइजी और भारतीय क्रिकेट दोनों के भविष्य को लेकर उम्मीदें जरूर बढ़ा दी हैं।  

surbhi मई 30, 2026 0
Vaibhav Suryavanshi sitting emotional in the dugout after Rajasthan Royals' IPL 2026 playoff defeat
डगआउट के कोने में सिमटे वैभव सूर्यवंशी, हार के बाद छलक पड़े आंसू

आईपीएल 2026 के दूसरे क्वालिफायर में राजस्थान रॉयल्स का खिताब जीतने का सपना टूट गया। गुजरात टाइटंस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राजस्थान को 7 विकेट से हराकर फाइनल में प्रवेश कर लिया। इस हार के बाद सबसे भावुक दृश्य युवा बल्लेबाज Vaibhav Suryavanshi का रहा, जिनकी आंखों में टूर्नामेंट से बाहर होने का दर्द साफ दिखाई दिया। राजस्थान रॉयल्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 214 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया था। टीम की ओर से वैभव सूर्यवंशी ने 96 रनों की शानदार और आक्रामक पारी खेली। उनकी बल्लेबाजी ने राजस्थान को बड़े स्कोर तक पहुंचाया, लेकिन गेंदबाज इस लक्ष्य का बचाव नहीं कर सके। गुजरात टाइटंस ने 18.4 ओवर में सिर्फ 3 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया और फाइनल का टिकट कटाया। हार के बाद टूट गए वैभव सूर्यवंशी मैच समाप्त होते ही वैभव सूर्यवंशी बेहद निराश और भावुक नजर आए। मैदान पर उनकी हताशा साफ दिखाई दे रही थी। इस दौरान अनुभवी खिलाड़ी Ravindra Jadeja उन्हें समझाते और हौसला बढ़ाते हुए दिखाई दिए। हालांकि हार का दर्द इतना गहरा था कि वैभव खुद को संभाल नहीं सके। वे सीधे डगआउट की ओर लौट गए और अपनी कैप से चेहरा छिपाने की कोशिश करने लगे। कैमरों में कैद हुई उनकी नम आंखें और मायूस चेहरा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। क्रिकेट प्रशंसक इस तस्वीर को सीजन की सबसे भावुक तस्वीरों में से एक बता रहे हैं। 776 रन बनाकर भी नहीं दिला सके ट्रॉफी व्यक्तिगत प्रदर्शन के लिहाज से यह सीजन वैभव सूर्यवंशी के लिए किसी सपने से कम नहीं रहा। युवा बल्लेबाज ने 16 मैचों में 776 रन बनाकर ऑरेंज कैप अपने नाम की। पूरे टूर्नामेंट में उनकी बल्लेबाजी विपक्षी टीमों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी रही। लेकिन क्रिकेट एक टीम गेम है और शानदार व्यक्तिगत प्रदर्शन के बावजूद वे राजस्थान रॉयल्स को चैंपियन नहीं बना सके। यही बात हार के बाद उनके चेहरे पर साफ दिखाई दी। एक हफ्ते में चार बार टूटा दिल वैभव सूर्यवंशी के लिए पिछले कुछ दिन बेहद मुश्किल रहे। वे इस सीजन में तीन बार शतक के बेहद करीब पहुंचकर चूक गए। लखनऊ के खिलाफ 93 रन हैदराबाद के खिलाफ 97 रन गुजरात के खिलाफ 96 रन हर बार शतक से कुछ कदम दूर रुकना उनके लिए निराशाजनक रहा। इसके बाद गुजरात के खिलाफ नॉकआउट मुकाबले में टीम की हार ने इस दर्द को और बढ़ा दिया। रिकॉर्ड्स से भरा रहा सीजन हालांकि ट्रॉफी हाथ नहीं लगी, लेकिन वैभव सूर्यवंशी ने इस सीजन कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए। पूरे सीजन में 72 छक्के लगाए। सबसे कम उम्र में 700 से अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज बने। सिर्फ 440 गेंदों में 1000 आईपीएल रन पूरे कर सबसे तेज यह उपलब्धि हासिल करने वाले खिलाड़ी बने। 700 से अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाजों में 237 से ज्यादा स्ट्राइक रेट के साथ नया रिकॉर्ड बनाया। इन उपलब्धियों ने उन्हें आईपीएल 2026 के सबसे चर्चित खिलाड़ियों में शामिल कर दिया। तीसरी बार फाइनल में पहुंचा गुजरात दूसरी ओर Gujarat Titans ने आईपीएल इतिहास में तीसरी बार फाइनल में जगह बनाई है। टीम इससे पहले 2022 में अपने डेब्यू सीजन में खिताब जीत चुकी है, जबकि 2023 में फाइनल तक पहुंचकर उपविजेता रही थी। अब गुजरात एक बार फिर ट्रॉफी जीतने के इरादे से फाइनल में उतरेगी।  

surbhi मई 30, 2026 0
Riyan Parag reacts emotionally after Rajasthan Royals lose to Delhi Capitals in IPL thriller
RR vs DC: दिल्ली की दमदार जीत, हार के बाद भावुक हुए रियान पराग – “मिडिल ओवर्स में बेहतर गेंदबाजी कर सकते थे”

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के एक हाई-स्कोरिंग मुकाबले में Delhi Capitals ने शानदार प्रदर्शन करते हुए Rajasthan Royals को 7 विकेट से हराकर जोरदार जीत दर्ज की। मुकाबला रोमांच से भरपूर रहा, लेकिन अंत में दिल्ली की मजबूत बल्लेबाजी ने राजस्थान के बड़े स्कोर को भी बौना साबित कर दिया। दिल्ली की आक्रामक शुरुआत ने तय किया मैच 225 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए दिल्ली को KL Rahul (75 रन) और Pathum Nissanka (62 रन) ने शानदार शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों की संयमित और आक्रामक पारी ने मैच का रुख शुरू में ही दिल्ली की ओर मोड़ दिया। टीम ने लक्ष्य को 5 गेंद शेष रहते हासिल कर लिया, जो उनकी बल्लेबाजी की मजबूती को दर्शाता है। रियान पराग की कप्तानी पारी गई बेकार इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करते हुए राजस्थान ने 6 विकेट के नुकसान पर 225 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया। कप्तान Riyan Parag ने शानदार 90 रन की पारी खेली, जबकि अंत में Donovan Ferreira ने सिर्फ 14 गेंदों में नाबाद 47 रन बनाकर टीम को बड़े स्कोर तक पहुंचाया। हार के बाद भावुक हुए पराग मैच के बाद रियान पराग काफी भावुक नजर आए। उनकी आंखें नम हो गईं और उन्होंने स्वीकार किया कि टीम मिडिल ओवर्स में बेहतर गेंदबाजी कर सकती थी। उन्होंने कहा, “मुझे लगा था कि यह एक अच्छा स्कोर है, करीब 200 का स्कोर पर्याप्त होता है, लेकिन हम उसे बचा नहीं सके।” चोट पर भी दिया अपडेट पराग मैच के दौरान हैमस्ट्रिंग चोट के कारण मैदान से बाहर चले गए थे। उन्होंने बताया कि चोट ज्यादा गंभीर नहीं है और वह एक हफ्ते के ब्रेक के बाद वापसी कर सकते हैं। आलोचकों को दिया जवाब अपनी पारी पर बोलते हुए पराग ने कहा कि उन्हें आलोचकों को जवाब देने की जरूरत नहीं है, लेकिन टीम की हार उन्हें सबसे ज्यादा खल रही है।  

surbhi मई 2, 2026 0
Vaibhav Suryavanshi batting against Jasprit Bumrah in IPL 2026 Guwahati match.
IPL 2026: वैभव सूर्यवंशी vs जसप्रीत बुमराह-गुवाहाटी में युवा जोश और अनुभव की सबसे बड़ी टक्कर

आईपीएल 2026 में आज राजस्थान रॉयल्स और मुंबई इंडियंस के बीच होने वाला मुकाबला खास बन गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह है 15 साल के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी और दुनिया के बेहतरीन गेंदबाजों में शामिल जसप्रीत बुमराह के बीच संभावित सीधी भिड़ंत। यह मुकाबला केवल दो टीमों के बीच नहीं, बल्कि आक्रामक बल्लेबाजी बनाम घातक गेंदबाजी की असली परीक्षा भी है। वैभव सूर्यवंशी: युवा सनसनी का तूफानी अंदाज महज 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 में अपनी बल्लेबाजी से सभी को चौंका दिया है। चेन्नई के खिलाफ 15 गेंदों में 50 रन गुजरात के खिलाफ तेज 31 रन कुल 9 मैचों में 335 रन स्ट्राइक रेट: 213 वैभव की खासियत है-तेज शुरुआत और मैच को पलट देने की क्षमता। उनकी आक्रामक शैली किसी भी गेंदबाज पर दबाव बना सकती है। जसप्रीत बुमराह: अनुभव और रणनीति का मास्टर दूसरी ओर, जसप्रीत बुमराह का नाम ही बल्लेबाजों के लिए चुनौती है। 147 मैचों में 183 विकेट इकॉनमी: 7.24 यॉर्कर और स्लो बॉल में महारत बुमराह की सबसे बड़ी ताकत है-स्थिति के अनुसार गेंदबाजी बदलने की कला। खासकर पावरप्ले और डेथ ओवरों में उनका प्रदर्शन मैच का रुख बदल सकता है। मुकाबले का विश्लेषण: किसका पलड़ा भारी? अगर वैभव शुरुआती ओवरों में टिक गए, तो वे बुमराह पर भी दबाव बना सकते हैं अगर बुमराह ने जल्दी विकेट ले लिया, तो मैच मुंबई की पकड़ में आ सकता है यह मुकाबला अनुभव बनाम युवा जोश की क्लासिक भिड़ंत है, जहां एक छोटी गलती भी खेल का नतीजा तय कर सकती है। हेड-टू-हेड रिकॉर्ड अब तक दोनों टीमों के बीच 31 मुकाबले खेले गए हैं: मुंबई इंडियंस: 16 जीत राजस्थान रॉयल्स: 14 जीत क्या होगा आज का परिणाम? क्रिकेट विशेषज्ञों के अनुसार, अगर बुमराह अपनी लय में रहे तो उन्हें रोकना मुश्किल होगा। लेकिन वैभव की निडर बल्लेबाजी उन्हें चौंका भी सकती है। यही इस मुकाबले को बेहद रोमांचक बनाता है।  

surbhi अप्रैल 7, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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