घरेलू शेयर बाजार में आज जबरदस्त तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स 2700 अंक से ज्यादा उछल गया, वहीं निफ्टी 800 अंक चढ़कर नई ऊंचाई के करीब पहुंच गया। बाजार खुलते ही खरीदारी की ऐसी लहर आई कि निवेशकों की संपत्ति में ₹13 लाख करोड़ से ज्यादा का इजाफा हो गया। बाजार का ताजा हाल सेंसेक्स: +2716 अंक (3.64%) ➝ 77,332 के करीब निफ्टी 50: +797 अंक (3.45%) ➝ 23,921 के करीब मार्केट कैप: ₹13.74 लाख करोड़ की बढ़त हर सेक्टर में तेजी, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी जोरदार खरीदारी क्यों आई बाजार में इतनी बड़ी तेजी? 1. ईरान-अमेरिका सीजफायर डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ 2 हफ्ते के संघर्ष विराम पर सहमति जताई इससे ग्लोबल टेंशन कम हुआ और एशियाई बाजारों में तेजी आई 2. कच्चे तेल में भारी गिरावट WTI क्रूड में करीब 19% गिरावट ब्रेंट क्रूड में 16% तक की कमी भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह बड़ी राहत है, जिससे बाजार में पॉजिटिव सेंटिमेंट बना। 3. RBI MPC फैसले का इंतजार निवेशकों को उम्मीद है कि RBI कोई सपोर्टिव पॉलिसी ला सकता है इसी उम्मीद में बाजार में पहले से खरीदारी बढ़ी निवेशकों को कितना फायदा? 7 अप्रैल: मार्केट कैप ➝ ₹4.29 लाख करोड़ करोड़ 8 अप्रैल: मार्केट कैप ➝ ₹4.43 लाख करोड़ करोड़ यानी सिर्फ एक दिन में ₹13.74 लाख करोड़ का फायदा मार्केट ब्रेड्थ (Market Breadth) कुल शेयर ट्रेड: 2679 तेजी वाले शेयर: 2408 गिरावट वाले: 178 36 शेयर: 1 साल के हाई पर 123 शेयर: अपर सर्किट में सेंसेक्स के सभी 30 शेयर ग्रीन जोन में
इंडिगो की पैरेंट कंपनी InterGlobe Aviation के शेयरों में 8 अप्रैल को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। कारोबार के दौरान शेयर 11% तक उछल गया, जो पिछले करीब 4 सालों की सबसे बड़ी इंट्राडे बढ़त है। पिछले 6 कारोबारी दिनों में से 5 दिन शेयर हरे निशान में रहा है और इस दौरान यह करीब 20% तक चढ़ चुका है, जिससे निवेशकों में जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। तेजी की 3 बड़ी वजहें 1. AERA का बड़ा फैसला एयरपोर्ट इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (AERA) ने: लैंडिंग और पार्किंग चार्ज में 25% कटौती की यह राहत 3 महीने के लिए लागू होगी इससे एयरलाइन कंपनियों का ऑपरेटिंग कॉस्ट घटेगा, जो सीधे मुनाफे को बढ़ाएगा। 2. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम की खबर के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 15% गिरावट ब्रेंट क्रूड $95 प्रति बैरल से नीचे एयरलाइन सेक्टर के लिए यह बेहद पॉजिटिव है, क्योंकि फ्यूल उनकी लागत का बड़ा हिस्सा होता है। 3.फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का असर इंडिगो ने 2 अप्रैल से: घरेलू और अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ाया अब यात्रियों को ₹275 से ₹950 तक अतिरिक्त देना होगा इससे कंपनी की कमाई (Revenue) बढ़ने की उम्मीद है। नए CEO से बढ़ा भरोसा कंपनी ने William Walsh को नया CEO नियुक्त किया वे पहले British Airways के CEO रह चुके हैं साथ ही IATA के डायरेक्टर जनरल भी रहे हैं उनके अनुभव से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। शेयर का हाल इंट्राडे हाई: ₹4,744 (+11.1%) सुबह ट्रेड: करीब ₹4,673 (+9.5%) पिछले 6 दिनों में: +20.3% उछाल हालांकि 2026 में अब तक: करीब 8.3% गिरावट
मुंबई, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर की घोषणा का असर भारतीय शेयर बाजार पर जोरदार तरीके से देखने को मिला। बुधवार के शुरुआती कारोबार में निवेशकों का भरोसा लौटता नजर आया और बाजार ने तेज रफ्तार पकड़ ली। सेंसेक्स 2700 अंकों से अधिक उछल गया, जबकि निफ्टी 815 अंक की बढ़त के साथ 23,900 के ऊपर पहुंच गया। रुपये में भी मजबूती भू-राजनीतिक तनाव कम होने का असर सिर्फ शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहा। भारतीय मुद्रा रुपया भी 50 पैसे मजबूत होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.56 पर पहुंच गया। माना जा रहा है कि तनाव कम होने से वैश्विक निवेशकों की चिंता कुछ हद तक घटी है, जिससे उभरते बाजारों को राहत मिली है। किन शेयरों में दिखी सबसे ज्यादा तेजी सेंसेक्स की 30 प्रमुख कंपनियों में इंटरग्लोब एविएशन के शेयरों में सबसे ज्यादा करीब 10 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा लार्सन एंड टुब्रो, बजाज फाइनेंस, अदानी पोर्ट्स, बजाज फिनसर्व और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे दिग्गज शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। हालांकि, टेक महिंद्रा इस तेजी के माहौल में पिछड़ने वाला प्रमुख शेयर रहा। कच्चे तेल में गिरावट से बाजार को राहत विशेषज्ञों का मानना है कि सीजफायर की खबर से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देश को राहत मिली। ब्रेंट क्रूड गिरकर 94.80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इससे महंगाई और आयात बिल को लेकर बाजार की चिंता कुछ कम हुई है। निवेशकों की नजर अब RBI पर आज बाजार की नजर आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसले पर भी टिकी रहेगी। माना जा रहा है कि वैश्विक राहत और घरेलू नीतिगत संकेत मिलकर बाजार की अगली दिशा तय करेंगे।
ज्वेलरी सेक्टर की प्रमुख कंपनी Kalyan Jewellers India Ltd के शेयर में मंगलवार सुबह शुरुआती कारोबार में जोरदार तेजी देखने को मिली। कंपनी के मजबूत Q4 बिज़नेस अपडेट के बाद स्टॉक में करीब 3% तक की उछाल आई, हालांकि बाद में यह बढ़त कुछ कम हो गई। शुरुआती तेजी, फिर हल्की गिरावट शेयर ने इंट्राडे में ₹435 का हाई छुआ बाद में यह ₹425.5 पर ट्रेड करता दिखा (लगभग 1.3% की बढ़त) पिछले बंद भाव ₹420 के मुकाबले यह बढ़त दर्ज की गई Q4 में दमदार प्रदर्शन कंपनी के मार्च तिमाही (Q4) के आंकड़े काफी मजबूत रहे: भारत में रेवेन्यू ~64% YoY बढ़ा Same-store sales में 45% से ज्यादा की ग्रोथ यह दर्शाता है कि ज्वेलरी की मांग मजबूत बनी हुई है इंटरनेशनल बिजनेस भी मजबूत इंटरनेशनल रेवेन्यू ~45% बढ़ा वेस्ट एशिया बिजनेस में 39% की ग्रोथ कुल रेवेन्यू में ~11% योगदान हालांकि कंपनी ने यह भी बताया कि वेस्ट एशिया में जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण मार्च के शुरुआती हफ्तों में ग्राहकों की संख्या प्रभावित हुई। विस्तार और ई-कॉमर्स ग्रोथ भारत में 28 नए शोरूम (नेट 24) खोले 14 Candere आउटलेट्स लॉन्च Candere ने 360% से ज्यादा YoY ग्रोथ दर्ज की सेक्टर को मिला सपोर्ट हाल ही में सोना-चांदी के बेस इंपोर्ट प्राइस में कमी से ज्वेलरी कंपनियों को फायदा मिला है, जिससे मार्जिन बेहतर होने की उम्मीद है। इसी वजह से पूरे सेक्टर में तेजी का माहौल है। एक साल का प्रदर्शन अभी भी कमजोर Kalyan Jewellers का शेयर पिछले 1 साल में ~13.6% गिरा जबकि Nifty 50 करीब 3.6% बढ़ा
Trent Ltd के शेयरों में सोमवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। कंपनी के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के बाद शेयर करीब 7 प्रतिशत तक उछल गया, जिससे निवेशकों का भरोसा एक बार फिर मजबूत हुआ है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर ट्रेडिंग के दौरान Trent का शेयर 6.8 प्रतिशत बढ़कर इंट्राडे हाई 3,791.90 रुपये तक पहुंच गया। दिन की शुरुआत भी पॉजिटिव रही, जहां स्टॉक 2.37 प्रतिशत की बढ़त के साथ ओपन हुआ। खास बात यह है कि पिछले तीन ट्रेडिंग सेशंस में यह स्टॉक लगभग 14 प्रतिशत तक चढ़ चुका है। मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ बना तेजी का कारण कंपनी के मार्च तिमाही (Q4FY26) के नतीजों ने बाजार को चौंकाया। स्टैंडअलोन रेवेन्यू 20% बढ़कर 4,937 करोड़ रुपये पहुंचा पिछले साल इसी अवधि में यह 4,106 करोड़ रुपये था पूरे वित्त वर्ष में कंपनी की आय 18% बढ़ी सिर्फ इतना ही नहीं, मर्चेंडाइज सेल्स (अन्य ऑपरेटिंग इनकम को छोड़कर) भी तिमाही में 21% और पूरे साल में 19% बढ़ी है। टैक्स कट और कंज्यूमर डिमांड का असर सितंबर में हुए टैक्स कट्स का सीधा असर कंज्यूमर स्पेंडिंग पर देखने को मिला है। लोगों के पास अधिक डिस्पोजेबल इनकम होने से रिटेल सेक्टर को फायदा मिला, जिसका असर Trent के प्रदर्शन में साफ दिखा। तेजी से बढ़ रहा स्टोर नेटवर्क Trent लगातार अपने नेटवर्क का विस्तार कर रहा है। मार्च 2026 तक कुल स्टोर: 1,286 एक साल पहले: 1,043 स्टोर कंपनी अब छोटे शहरों और कस्बों में विस्तार पर फोकस कर रही है, जहां तेजी से बढ़ती मांग को कैश करने की योजना है। Zudio और Westside की बढ़ती लोकप्रियता Trent के लोकप्रिय ब्रांड Zudio और Westside खासकर युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। यही वजह है कि कंपनी का फोकस अब मेट्रो शहरों के साथ-साथ टियर-2 और टियर-3 शहरों पर भी है।
नई दिल्ली: सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Rail Vikas Nigam Limited (RVNL) को भले ही ₹242.49 करोड़ का नया ऑर्डर मिला हो, लेकिन शेयर बाजार में इसका असर उल्टा देखने को मिला। सोमवार, 6 अप्रैल को शुरुआती कारोबार में कंपनी के शेयरों में 2% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। क्या है नया ऑर्डर? कंपनी को South Central Railway से Letter of Acceptance (LoA) प्राप्त हुआ है। इस प्रोजेक्ट के तहत ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन सिस्टम को अपग्रेड किया जाएगा। मौजूदा 1x25 kV सिस्टम को 2x25 kV AT फीडिंग सिस्टम में बदला जाएगा फीडर और अर्थिंग से जुड़े कार्य भी शामिल हैं प्रोजेक्ट ओंगोल से गुडूर सेक्शन (विजयवाड़ा डिवीजन) में किया जाएगा कुल कवरेज: 154 RKM / 462 TKM समयसीमा: 24 महीने पहले भी मिला था बड़ा कॉन्ट्रैक्ट मार्च 2026 में भी RVNL को National Mineral Development Corporation (NMDC) से ₹95.27 करोड़ का ऑर्डर मिला था, जिसमें छत्तीसगढ़ स्थित सुविधाओं के रिफर्बिशमेंट और मेंटेनेंस का काम शामिल है। फिर भी शेयर क्यों गिरा? नए ऑर्डर के बावजूद शेयर में गिरावट निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण हो सकते हैं: पिछले तीन महीनों में शेयर करीब 28% गिर चुका है मुनाफावसूली (Profit Booking) का दबाव बाजार की समग्र कमजोरी और निवेशकों की सतर्कता शेयर का हाल पिछला बंद भाव: ₹262.60 (+5.19%) 52-हफ्ते का उच्चतम स्तर: ₹448 (20 मई 2025) 52-हफ्ते का न्यूनतम स्तर: ₹248.25 (30 मार्च 2026) वर्तमान स्तर: हाई से करीब 41.77% नीचे स्पष्ट है कि कंपनी को लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं, लेकिन शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हुआ है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव, खासकर ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया है। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिख रहा है, जहां हालिया हफ्तों में 8 से 10 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, इस गिरावट के बीच कई ब्रोकरेज फर्म्स इसे एक बड़ा निवेश अवसर मान रही हैं और करीब 80 ऐसे शेयरों की पहचान की गई है जिन्हें ‘वैल्यू बाय’ माना जा रहा है। क्यों गिरा बाजार? बाजार में गिरावट के पीछे कई अहम कारण हैं: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भू-राजनीतिक तनाव कंपनियों की कमाई पर दबाव निवेशकों की बढ़ती अनिश्चितता Kotak Equities के मुताबिक, बाजार फिलहाल इस बात को लेकर चिंतित है कि युद्ध लंबा खिंचेगा या यह सिर्फ अल्पकालिक झटका है। इन सेक्टर्स में दिख रहा है मौका ब्रोकरेज हाउसों ने जिन सेक्टर्स को सबसे ज्यादा संभावनाओं वाला बताया है, उनमें शामिल हैं: कंजम्प्शन डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग इन सेक्टर्स के कई मजबूत फंडामेंटल वाले शेयर गिरावट के बाद आकर्षक वैल्यूएशन पर उपलब्ध हैं। टॉप ब्रोकरेज की पसंदीदा कंपनियां विभिन्न ब्रोकरेज फर्म्स ने जिन प्रमुख शेयरों को चुना है, उनमें शामिल हैं: Kotak Equities की पसंद DLF Godrej Consumer Products Info Edge Coforge Dixon Technologies Motilal Oswal की पसंद Bharti Airtel State Bank of India ICICI Bank Infosys Limited Tata Steel Elara Securities की पसंद HDFC Bank Larsen & Toubro Maruti Suzuki Apollo Hospitals Axis Securities की पसंद Bajaj Finance Kotak Mahindra Bank Avenue Supermarts Nestlé India UBS (Global) की पसंद Reliance Industries NTPC Limited Sun Pharmaceutical Industries Adani Ports क्यों बन रहा है निवेश का मौका? ब्रोकरेज फर्म्स के अनुसार, मौजूदा गिरावट ने बाजार में आकर्षक एंट्री पॉइंट बना दिया है: Nifty 50 लगभग 17.7x फॉरवर्ड P/E पर ट्रेड कर रहा है वैल्यूएशन लंबे समय के औसत से नीचे आ गया है उभरते बाजारों के मुकाबले प्रीमियम कम हुआ है एक्सपर्ट की राय Emkay Global ने दिसंबर 2026 तक निफ्टी का लक्ष्य 29,000 रखा है और FY27 में करीब 15% अर्निंग्स ग्रोथ का अनुमान जताया है। हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की कीमतें अभी भी सबसे बड़ा जोखिम बनी हुई हैं। अगर युद्ध लंबा चलता है, तो महंगाई और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है।
फार्मा सेक्टर की प्रमुख कंपनी Lupin Limited के शेयरों में 2 अप्रैल को शुरुआती कारोबार में करीब 2–2.5% की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट ऐसे समय आई जब कंपनी ने अपनी सहायक इकाई के जरिए फिलीपींस की कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने का ऐलान किया है। Multicare Pharma में 43.38% हिस्सेदारी खरीदेगी कंपनी कंपनी की नीदरलैंड्स स्थित पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी Nanomi B.V. ने Multicare Pharmaceuticals Philippines Inc. (MPPI) में 43.38% हिस्सेदारी खरीदने के लिए समझौता किया है। कुल 1,17,94,497 शेयर खरीदे जाएंगे डील की वैल्यू लगभग 39.6 मिलियन डॉलर तक हो सकती है यह अधिग्रहण मई 2026 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है यह कदम Lupin के इंटरनेशनल बिजनेस विस्तार की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। VISUfarma का अधिग्रहण पूरा एक अन्य अपडेट में कंपनी ने बताया कि Nanomi B.V. ने VISUfarma B.V. का पूर्ण अधिग्रहण पूरा कर लिया है। 1 अप्रैल 2026 से VISUfarma और उसकी सभी सब्सिडियरी Nanomi की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाइयां बन गई हैं USFDA से मिली मंजूरी, पाइपलाइन मजबूत हाल ही में कंपनी को US Food and Drug Administration (USFDA) से दो दवाओं के लिए अस्थायी मंजूरी मिली- Sugammadex Injection Pitolisant Tablets Pitolisant टैबलेट्स का उत्पादन नागपुर स्थित प्लांट में किया जाएगा, जिससे कंपनी की प्रोडक्ट पाइपलाइन और मजबूत होगी। शेयर प्रदर्शन और बाजार स्थिति पिछले कारोबारी सत्र में Lupin का शेयर ₹2,273.60 पर बंद हुआ, जो ₹39.10 (1.69%) की गिरावट दर्शाता है। 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर: ₹2,376 52 हफ्ते का निचला स्तर: ₹1,774 वर्तमान स्तर: हाई से 4.31% नीचे, लो से 28.16% ऊपर कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹1.04 लाख करोड़ है। गिरावट के पीछे क्या कारण? विशेषज्ञों का मानना है कि- विदेशी अधिग्रहण पर शुरुआती लागत और अनिश्चितता निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली शॉर्ट टर्म में जोखिम की आशंका इन वजहों से शेयर में दबाव देखने को मिला है, हालांकि लॉन्ग टर्म में यह डील फायदेमंद साबित हो सकती है।
वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और अमेरिका-ईरान तनाव में संभावित कमी की उम्मीदों के बीच बुधवार को भारतीय शेयर बाजार ने शानदार शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में ही निफ्टी 50 ने 22,900 का अहम स्तर पार कर लिया, जबकि बीएसई सेंसेक्स करीब 2000 अंकों की मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा। सुबह 10:03 बजे के आसपास निफ्टी 50 599 अंकों यानी 2.69% की बढ़त के साथ 22,930.50 पर पहुंच गया। वहीं सेंसेक्स 1,988 अंकों की तेजी के साथ 73,935.73 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वैश्विक संकेतों का बड़ा असर बाजार में इस उछाल की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत हैं। ईरान के शीर्ष नेतृत्व की ओर से युद्ध समाप्त करने की इच्छा जताने और दोनों देशों के बीच बातचीत के संकेतों ने निवेशकों के मन से अनिश्चितता कम की है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट के रूप में भी दिख रहा है। एक्सपर्ट की राय Geojit Investments Limited के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वीके विजयकुमार के अनुसार, ईरानी राष्ट्रपति की ‘युद्ध समाप्त करने की तत्परता’ और विदेश मंत्री द्वारा अमेरिका के साथ संदेशों के आदान-प्रदान की पुष्टि इस ओर इशारा करती है कि तनाव जल्द कम हो सकता है। बाजार इस संभावित राहत को पहले ही आंकने लगा है। उन्होंने यह भी कहा कि मार्च सीरीज में बैंक निफ्टी में करीब 17% की भारी गिरावट आई थी, लेकिन अब इस सेक्टर में तेज रिकवरी की संभावना है। खासकर प्राइवेट बैंकिंग शेयर, जो गैर-आधारभूत कारणों से दबाव में थे, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर बन सकते हैं। टैक्स हार्वेस्टिंग और रिकवरी की उम्मीद 30 मार्च को टैक्स हार्वेस्टिंग के चलते कई सेक्टरों के शेयरों में तेज गिरावट देखी गई थी। अब इन्हीं शेयरों में रिकवरी की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे बाजार को और मजबूती मिल सकती है। ग्लोबल मार्केट्स का सपोर्ट मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में जोरदार तेजी दर्ज की गई, जिसका असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ा। वॉल स्ट्रीट की तेजी और मध्य-पूर्व तनाव में कमी की उम्मीदों ने निवेशकों के सेंटीमेंट को मजबूत किया है। सोने की कीमतों में भी उछाल देखने को मिला और यह लगभग दो हफ्तों के उच्च स्तर पर पहुंच गई। डॉलर में कमजोरी और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के बयान, जिसमें उन्होंने संकेत दिया कि ईरान के साथ तनाव जल्द कम हो सकता है, ने गोल्ड को सपोर्ट दिया। एफपीआई बनाम डीआईआई संस्थागत निवेशकों की बात करें तो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने सोमवार को 11,163 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 14,895 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया।
वित्त वर्ष 2025-26 भारतीय शेयर बाजार के लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। लंबे समय बाद ऐसा हुआ जब बाजार ने निवेशकों को निगेटिव रिटर्न दिया। पूरे साल बाजार में अस्थिरता बनी रही और खासतौर पर आखिरी तिमाही में तेज गिरावट देखने को मिली। बाजार क्यों गिरा? FY26 में बाजार पर कई बड़े फैक्टर्स का असर पड़ा: विदेशी निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली ऊंचे वैल्यूएशन, जिससे निवेशकों में डर बना रहा आईटी सेक्टर में दबाव, खासकर AI टेक्नोलॉजी के कारण मिडिल ईस्ट तनाव (अमेरिका-इजरायल-ईरान), जिससे ग्लोबल सेंटीमेंट कमजोर हुआ इन सभी कारणों से बाजार में लगातार दबाव बना रहा और निवेशकों का भरोसा डगमगाया। इंडेक्स का प्रदर्शन Sensex: -7% Nifty: -5% मार्च महीना सबसे ज्यादा खराब रहा: सेंसेक्स: -11.48% निफ्टी: -11.14% बैंक निफ्टी: -15.95% यानी साल का अंत सबसे ज्यादा नुकसान के साथ हुआ। गिरावट में भी चमके ये शेयर बाजार भले गिरा, लेकिन कुछ कंपनियों ने मजबूत प्रदर्शन किया: भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL): +35% (डिफेंस सेक्टर का बूम) Shriram Finance: +36% (NBFC सेक्टर की मजबूती) Hindalco: +34% (मेटल डिमांड का फायदा) Titan: +33% (ज्वेलरी और रिटेल ग्रोथ) SBI: +27% (बैंकिंग सेक्टर का सपोर्ट) इन स्टॉक्स ने साबित किया कि सही सेक्टर चुनना कितना जरूरी है। इन शेयरों ने किया निराश कुछ बड़े और भरोसेमंद माने जाने वाले स्टॉक्स भी गिरावट से नहीं बच पाए: TCS: -33% (AI के कारण IT सेक्टर पर दबाव) ITC: -29% (प्रॉफिट बुकिंग और स्लो ग्रोथ) IndiGo: -21% (कॉस्ट और ऑपरेशन प्रेशर) Trent: -40% (सबसे ज्यादा गिरावट, वैल्यूएशन करेक्शन) इससे साफ है कि बड़े नाम भी जोखिम से बाहर नहीं हैं। निवेशकों के लिए क्या सीख? सिर्फ बड़े ब्रांड देखकर निवेश करना सुरक्षित नहीं सेक्टर ट्रेंड और ग्लोबल फैक्टर्स समझना जरूरी गिरते बाजार में भी मौके होते हैं डायवर्सिफिकेशन सबसे जरूरी रणनीति है
मुंबई, एजेंसियां। मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध ने बाजार में उथल-पुथल मचा दी है। इसी बीच इस सप्ताह की शुरुआत में ही शेयर बाजार भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। BSE Sensex करीब 1,000 अंकों की गिरावट के साथ 72,850 के आसपास पहुंच गया, जबकि Nifty 50 भी लगभग 200 अंक फिसलकर 22,600 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। किन सेक्टर पर असर आज ऑटो, मेटल और बैंकिंग शेयरों में तेज बिकवाली देखी गई। निवेशकों ने जोखिम से दूरी बनाते हुए मुनाफावसूली की। गिरावट की बड़ी वजहे गिरावट की पहली वजह वैश्विक तनाव है, खासकर ईरान-इजराइल तनाव, जिसने सप्लाई चेन को प्रभावित किया। दूसरी वजह कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है, जो बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। तीसरा कारण विदेशी बाजारों से मिले कमजोर संकेत हैं। एशियाई बाजारों में असर जापान और दक्षिण कोरिया के बाजारों में भारी गिरावट रही, जबकि हांगकांग में हल्की तेजी और चीन में स्थिर कारोबार देखा गया। पिछले सत्र में अमेरिकी बाजार भी दबाव में बंद हुए, जिससे भारतीय बाजार पर नकारात्मक असर पड़ा। लगातार दूसरे सत्र में गिरावट से बाजार में सतर्कता बढ़ गई है और फिलहाल निवेशक वैश्विक संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं।
मुंबई, एजेंसियां। शुक्रवार को हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 926.92 अंक गिरकर 74,346.53 पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 280.95 अंक टूटकर 23,025.50 पर आ गया। बाजार में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब वैश्विक स्तर पर निवेशकों का रुख जोखिम से बचने वाला बना हुआ है। रुपया भी दबाव में शेयर बाजार की कमजोरी के साथ भारतीय मुद्रा पर भी दबाव दिखा। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 28 पैसे गिरकर 94.24 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। कमजोर रुपया और महंगा कच्चा तेल भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए चिंता बढ़ाने वाले संकेत हैं। गिरावट की बड़ी वजहें विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका-ईरान तनाव, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहना बाजार पर दबाव डाल रहा है। ब्रेंट क्रूड करीब 106.8 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। इससे मुद्रास्फीति, आयात लागत और कॉर्पोरेट मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। किन शेयरों पर सबसे ज्यादा असर सेंसेक्स की 30 कंपनियों में बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, रिलायंस इंडस्ट्रीज, बजाज फिनसर्व, एटर्नल और इंटरग्लोब एविएशन प्रमुख गिरावट वाले शेयर रहे। वहीं टीसीएस, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा और ट्रेंट बढ़त में रहे। वैश्विक संकेत भी कमजोर एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी कमजोर रहे, जबकि शंघाई और हांगकांग के बाजार हल्की मजबूती में थे। गुरुवार को अमेरिकी बाजारों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई थी। एफआईआई बनाम डीआईआई बाजार आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 1,805.37 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 5,429.78 करोड़ रुपये की खरीदारी की। कुल मिलाकर, बाजार में फिलहाल अस्थिरता और दबाव का माहौल बना हुआ है।
मुंबई, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार में बुधवार को मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत हुई। BSE Sensex शुरुआती कारोबार में 885.32 अंक चढ़कर 74,953.77 पर पहुंच गया, जबकि NSE Nifty 50 307.65 अंक की बढ़त के साथ 23,220.05 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। रुपये में गिरावट शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 पैसे कमजोर होकर 93.96 पर पहुंच गया। विशेषज्ञों की राय बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच बाजार में सतर्क आशावाद बना हुआ है। निवेशक फिलहाल भू-राजनीतिक हालात पर नजर बनाए हुए हैं, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। वैश्विक घटनाओं का असर मिडिल ईस्ट में तनाव, खासकर इज़राइल और ईरान के बीच जारी टकराव और अमेरिका की सैन्य गतिविधियों का असर भी बाजार पर पड़ रहा है। हालांकि संभावित युद्धविराम की उम्मीदों ने निवेशकों के भरोसे को कुछ सहारा दिया है। एशियाई बाजारों में तेजी एशियाई बाजारों में भी मजबूती देखने को मिली। जापान, सिंगापुर, हांगकांग, ताइवान और दक्षिण कोरिया के प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं। वहीं अमेरिकी बाजार मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुए। कच्चे तेल और सोने-चांदी का हाल ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरकर 99 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जिससे वैश्विक बाजारों को राहत मिली। वहीं सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखी गई—24 कैरेट सोना 3.37% उछलकर 1,43,600 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 4.82% बढ़कर 2,34,542 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई।
ब्रोकरेज फर्म Anand Rathi ने Amir Chand Jagdish Kumar Exports Ltd के IPO पर ‘Subscribe – Long Term’ की रेटिंग दी है। कंपनी प्रीमियम बासमती चावल के प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट के क्षेत्र में एक स्थापित नाम है और “Aeroplane” ब्रांड के तहत अपने उत्पादों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचती है। कंपनी क्या करती है? Amir Chand Jagdish Kumar Exports Ltd की स्थापना 2003 में हुई थी और यह कंपनी बासमती चावल की सोर्सिंग, प्रोसेसिंग, एजिंग, पैकेजिंग और डिस्ट्रीब्यूशन का काम करती है। कंपनी का बिजनेस मॉडल पूरी तरह इंटीग्रेटेड है, जिसमें धान की खरीद से लेकर मिलिंग, ग्रेडिंग और पैकेजिंग तक की प्रक्रिया इन-हाउस होती है। इससे क्वालिटी कंट्रोल और मार्जिन मैनेजमेंट में मदद मिलती है। मजबूत ब्रांड और ग्लोबल मौजूदगी “Aeroplane” ब्रांड के जरिए कंपनी ने भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी पहचान बनाई है। मिडिल ईस्ट, यूरोप और नॉर्थ अमेरिका में मजबूत उपस्थिति अंतरराष्ट्रीय बिजनेस मुख्यतः B2B मॉडल पर आधारित घरेलू बाजार में B2C सेगमेंट में ब्रांडेड चावल की बिक्री कंपनी अपने लंबे समय के ग्राहक संबंध और मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के जरिए एक्सपोर्ट बिजनेस को बढ़ा रही है। प्रोडक्ट पोर्टफोलियो कंपनी अलग-अलग कीमत और क्वालिटी के बासमती चावल की विस्तृत रेंज पेश करती है, जिससे यह अलग-अलग उपभोक्ता वर्गों को टारगेट कर पाती है। यह विविधता कंपनी को बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाए रखती है। ग्रोथ प्लान क्या है? कंपनी भारत में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए टियर-3 और टियर-4 शहरों पर फोकस कर रही है, जहां बढ़ती आय और ब्रांडेड खाद्य उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इससे घरेलू बाजार में कंपनी के विस्तार की अच्छी संभावनाएं नजर आती हैं। वैल्यूएशन और निवेश की राय Anand Rathi के अनुसार, IPO का वैल्यूएशन फिलहाल “फुली वैल्यूड” दिखाई देता है। हालांकि, कंपनी का मजबूत बिजनेस मॉडल, ब्रांड वैल्यू और एक्सपोर्ट ग्रोथ को देखते हुए लॉन्ग टर्म में अच्छे रिटर्न की संभावना है। इसी वजह से ब्रोकरेज ने निवेशकों को ‘Subscribe – Long Term’ की सलाह दी है। निवेशकों के लिए संकेत यह IPO उन निवेशकों के लिए उपयुक्त माना जा रहा है जो: लॉन्ग टर्म ग्रोथ की तलाश में हैं FMCG और एग्री-बेस्ड सेक्टर में एक्सपोजर चाहते हैं ब्रांडेड फूड सेगमेंट में निवेश करना चाहते हैं
पावर सेक्टर की दिग्गज कंपनी Power Grid Corporation of India (PWGR) पर ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने अपनी सकारात्मक राय दोहराई है। कंपनी के मैनेजमेंट के साथ बिजनेस अपडेट के बाद ब्रोकरेज ने स्टॉक पर ‘BUY’ रेटिंग बनाए रखते हुए टारगेट प्राइस बढ़ाकर 348 रुपये कर दिया है, जो पहले 324 रुपये था। कैपेक्स और कैपिटलाइजेशन गाइडेंस में बढ़ोतरी Power Grid Corporation of India ने FY26 के लिए अपने कैपेक्स गाइडेंस को बढ़ाकर 350 अरब रुपये से ज्यादा कर दिया है, जो पहले 320 अरब रुपये था। वहीं, कैपिटलाइजेशन गाइडेंस भी 220 अरब रुपये से बढ़ाकर 250 अरब रुपये से अधिक कर दिया गया है। कंपनी ने FY27 और FY28 के लिए क्रमशः 370 अरब और 450 अरब रुपये से अधिक कैपेक्स का अनुमान बरकरार रखा है। आने वाले दो वर्षों में करीब 650 अरब रुपये तक कैपिटलाइजेशन की संभावना जताई गई है, जो नए प्रोजेक्ट्स मिलने से और बढ़ सकती है। मजबूत ऑर्डर बुक और बड़े अवसर ब्रोकरेज के अनुसार, कंपनी करीब 15 लाख करोड़ रुपये (INR 15 ट्रिलियन) के ट्रांसमिशन सेक्टर के बड़े अवसर का फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है। इससे हर साल 600-700 अरब रुपये का प्रोजेक्ट पाइपलाइन तैयार हो सकता है। यह मजबूत ऑर्डर बुक कंपनी की लंबी अवधि की ग्रोथ को सपोर्ट करती है। जमीन अधिग्रहण और ROW चुनौतियों में राहत कंपनी के लिए एक बड़ा सकारात्मक बदलाव यह है कि राइट ऑफ वे (ROW) से जुड़ी समस्याएं अब काफी हद तक कम हो गई हैं। सरकार द्वारा 30-60% तक मार्केट-लिंक्ड मुआवजा फ्रेमवर्क लागू करने से जमीन अधिग्रहण आसान हुआ है और विवादों में कमी आई है। साथ ही, कंपनी ने डेडिकेटेड ROW टीम्स और स्पेशलाइज्ड एक्सपर्टीज के जरिए प्रोजेक्ट एक्सीक्यूशन को और मजबूत किया है। ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार SPV (Special Purpose Vehicle) स्ट्रक्चर को भी सरल बनाया जा रहा है। 19 SPV को घटाकर 2 में समाहित किया गया है और आगे भी मर्जर की योजना है। इससे गवर्नेंस बेहतर होगी, कैपिटल एलोकेशन अधिक प्रभावी बनेगा और कंपनी की स्केलेबिलिटी बढ़ेगी। फाइनेंशियल आउटलुक और वैल्यूएशन Prabhudas Lilladher ने FY27 और FY28 के लिए EPS अनुमान में करीब 1% की बढ़ोतरी की है। स्टॉक को FY28 बुक वैल्यू के 2.8 गुना पर वैल्यू करते हुए 348 रुपये का टारगेट दिया गया है। साथ ही, FY27-28 के दौरान 3-4% का डिविडेंड यील्ड भी निवेशकों को आकर्षित कर सकता है। निवेशकों के लिए क्या है संकेत? ब्रोकरेज का मानना है कि Power Grid Corporation of India मजबूत ऑर्डर बुक, बढ़ते कैपेक्स और बेहतर एक्सीक्यूशन के दम पर आने वाले वर्षों में स्थिर ग्रोथ दिखा सकती है। ऐसे में यह स्टॉक मिड-टू-लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए आकर्षक बना हुआ है।
ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने Paradeep Phosphates Limited (PPL) पर कवरेज की शुरुआत करते हुए ‘Accumulate’ रेटिंग दी है और 120 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। यह वैल्यूएशन FY28 के अनुमानित EPS के 10 गुना पर आधारित है। ग्रोथ की मजबूत रणनीति रिपोर्ट के अनुसार, PPL भारत के केमिकल सेक्टर में इंपोर्ट सब्स्टीट्यूशन के बड़े अवसर का फायदा उठाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी बैकवर्ड इंटीग्रेशन, प्रोडक्ट मिक्स में सुधार और क्षमता विस्तार के जरिए अपनी स्थिति मजबूत कर रही है। कंपनी फॉस्फोरिक और सल्फ्यूरिक एसिड की क्षमता में क्रमशः 57% और 100% तक विस्तार कर रही है और FY29 तक पूरी तरह बैकवर्ड इंटीग्रेशन हासिल करने का लक्ष्य रखा है। प्रोडक्ट मिक्स में बदलाव, DAP पर निर्भरता कम Paradeep Phosphates Limited अब अपने पोर्टफोलियो को हाई-वैल्यू कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर्स की ओर शिफ्ट कर रही है। इससे DAP (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) पर निर्भरता कम होगी और मार्जिन में सुधार की संभावना बढ़ेगी। साथ ही, कंपनी अपनी कुल फर्टिलाइजर क्षमता को बढ़ाकर FY29 तक लगभग 5.0 मिलियन टन प्रति वर्ष (mmtpa) करने की योजना पर काम कर रही है। MCFL मर्जर से मिलेगा फायदा रिपोर्ट में कहा गया है कि MCFL (Mangalore Chemicals & Fertilizers Limited) के साथ प्रस्तावित मर्जर से कंपनी की दक्षिण भारत में मौजूदगी और मजबूत होगी। इससे डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और बाजार हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद है। शॉर्ट टर्म में दबाव, लेकिन लॉन्ग टर्म में तेजी हालांकि कच्चे माल की ऊंची कीमतें निकट भविष्य में मार्जिन पर दबाव डाल सकती हैं, लेकिन ब्रोकरेज का मानना है कि इंटीग्रेटेड ऑपरेशंस, बढ़ती क्षमता और मर्जर से मिलने वाले सिनर्जी लाभ कंपनी की आय को मध्यम अवधि में मजबूत बनाएंगे। वित्तीय अनुमान Prabhudas Lilladher के मुताबिक FY25 से FY28 के बीच: Revenue CAGR: ~10% EBITDA CAGR: ~18% PAT CAGR: ~23% वर्तमान बाजार मूल्य (CMP) पर स्टॉक FY28 के अनुमानित EPS के लगभग 9 गुना और EV/EBITDA के 6 गुना पर ट्रेड कर रहा है, जो इसे आकर्षक वैल्यूएशन पर रखता है। निवेशकों के लिए क्या संकेत? ब्रोकरेज का मानना है कि Paradeep Phosphates Limited में मौजूदा स्तर पर धीरे-धीरे निवेश (Accumulate) करना समझदारी हो सकती है, खासकर उन निवेशकों के लिए जो मिड-टू-लॉन्ग टर्म ग्रोथ की तलाश में हैं।
मुंबई, एजेंसियां। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। BSE Sensex करीब 1,556 अंक टूटकर 72,977 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि NSE Nifty भी लगभग 480 अंक गिरकर 22,634 पर आ गया। वहीं, भारतीय रुपया Indian Rupee अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.86 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे कमजोर स्तर है। विशेषज्ञों ने बताया विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक तनाव खासकर अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अल्टीमेटम ने बाजार में घबराहट बढ़ा दी है। निवेशक जोखिम भरे एसेट्स से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इसका असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखा—एशियाई और अमेरिकी बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
ईरान-अमेरिका तनाव का असर, शेयर बाजार में भारी बिकवाली; निवेशक डॉलर की ओर भागे हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। बाजार खुलते ही BSE Sensex करीब 1,556 अंक टूटकर 72,977 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि Nifty 50 भी लगभग 480 अंक फिसलकर 22,634 के स्तर पर आ गया। इसी के साथ भारतीय मुद्रा भी दबाव में आ गई और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर पहली बार 93.80 के पार पहुंच गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। निवेशकों में घबराहट, सेफ एसेट की ओर रुख बैंकिंग और बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा के अनुसार, मौजूदा हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं, जिससे निवेशकों में घबराहट साफ नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि निवेशक जोखिम वाले निवेश से पैसा निकालकर डॉलर जैसे सुरक्षित विकल्पों में लगा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिकी मनी मार्केट फंड्स का एसेट अंडर मैनेजमेंट 8 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है, जो इस “सेफ्टी फ्लाइट” को दर्शाता है। 48 घंटे के अल्टीमेटम से बढ़ा तनाव विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार में इस गिरावट की बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिए जाने से हालात और बिगड़ गए हैं। इस अल्टीमेटम में होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने की चेतावनी दी गई है, जो फिलहाल अपनी सामान्य क्षमता के बेहद कम स्तर पर चल रहा है। ऐसा नहीं होने पर ईरान के पावर ग्रिड पर कार्रवाई की बात कही गई है। कच्चे तेल में भारी उतार-चढ़ाव वैश्विक तनाव का असर कच्चे तेल के बाजार पर भी दिखा। Brent Crude करीब 112 डॉलर प्रति बैरल और WTI Crude Oil लगभग 98.50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता रहा। सप्लाई बाधित होने की आशंका और मांग घटने के डर से कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव बना हुआ है। तनाव के बीच सोना क्यों गिरा? आमतौर पर वैश्विक संकट के समय सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार उलटा रुझान देखने को मिला। सोने की कीमत करीब 2% गिर गई। विश्लेषकों का कहना है कि निवेशक मार्जिन कॉल के दबाव में अपने गोल्ड निवेश बेचकर शेयर बाजार में हुए नुकसान की भरपाई कर रहे हैं। एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली कमजोर वैश्विक संकेतों का असर एशियाई बाजारों पर भी साफ दिखा। जापान का Nikkei 225 4% से ज्यादा गिरा हांगकांग का Hang Seng Index 3% से ज्यादा टूटा दक्षिण कोरिया का KOSPI 6% से अधिक लुढ़का इसके अलावा सिंगापुर और ताइवान के बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बाजार भी दबाव में शुक्रवार को अमेरिकी बाजार भी कमजोरी के साथ बंद हुए थे। Dow Jones Industrial Average करीब 1% गिरा S&P 500 में 1.5% की गिरावट Nasdaq Composite लगभग 2% टूटा
हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के अरबों रुपये कुछ ही मिनटों में स्वाहा हो गए। वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच बाजार में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। सोमवार सुबह बाजार खुलते ही BSE Sensex 1,474.56 अंक यानी करीब 2% की गिरावट के साथ 73,058.40 पर आ गया। वहीं Nifty 50 भी 433.70 अंक (1.88%) टूटकर 22,680.80 के स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में ही बाजार पूरी तरह लाल निशान में डूबा नजर आया। क्यों आई बाजार में इतनी बड़ी गिरावट? इस भारी गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण मिडिल ईस्ट में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और डोनाल्ड ट्रम्प की कड़ी चेतावनी मानी जा रही है। ट्रम्प ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ खोलने को कहा है, अन्यथा ऊर्जा ठिकानों पर हमले की धमकी दी है। इस घटनाक्रम से वैश्विक सप्लाई चेन को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है-WTI Crude Oil $100 के करीब पहुंच गया, जबकि Brent Crude Oil $112.17 के पार चला गया। तेल की कीमतों में इस तेजी ने बाजार की घबराहट और बढ़ा दी। किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट? बाजार में आई इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर बड़े और दिग्गज शेयरों पर पड़ा। Hindalco Industries, Tata Steel, State Bank of India, Mahindra & Mahindra और HDFC Bank जैसे प्रमुख शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। हालांकि गिरावट के इस माहौल में Max Healthcare और ONGC जैसे कुछ शेयरों में मामूली बढ़त देखने को मिली। हर सेक्टर पर पड़ा असर इस गिरावट से कोई भी सेक्टर अछूता नहीं रहा। ऑटो, बैंकिंग, मेटल, मीडिया और PSU बैंक समेत सभी सेक्टोरल इंडेक्स 2% तक टूट गए। सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 2% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार में व्यापक कमजोरी का संकेत मिला। एशियाई बाजारों में भी ‘ब्लैक मंडे’ जैसा माहौल भारतीय बाजार के साथ-साथ एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट देखने को मिली। दक्षिण कोरिया का KOSPI 4.57% और जापान का Nikkei 4% से ज्यादा टूट गया। International Energy Agency के प्रमुख फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि दुनिया कई दशकों के सबसे बड़े ऊर्जा संकट की ओर बढ़ रही है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर हो सकता है।
भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार की भारी गिरावट के बाद शुक्रवार को आंशिक सुधार दिखाया। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से निवेशकों को राहत मिली और बाजार में खरीदारी का माहौल बना। सुबह कारोबार के दौरान Nifty50 करीब 1.05% बढ़कर 23,243 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि BSE Sensex 1% से ज्यादा चढ़कर 74,958 के आसपास कारोबार करता दिखा। तेल कीमतों में गिरावट से बाजार को सहारा मध्य पूर्व में जारी तनाव के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है। ब्रेंट क्रूड, जो गुरुवार को 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, अब घटकर करीब 107 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। इस गिरावट के पीछे यूरोपीय देशों और जापान द्वारा समुद्री मार्गों की सुरक्षा के प्रयास और अमेरिका द्वारा सप्लाई बढ़ाने के संकेत अहम माने जा रहे हैं। सभी सेक्टरों में दिखी तेजी शुक्रवार को बाजार में व्यापक खरीदारी देखने को मिली और सभी 16 प्रमुख सेक्टर हरे निशान में रहे। स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स में भी मजबूती रही, जहां क्रमशः 0.8% और 1.3% की बढ़त दर्ज की गई। PSU बैंक और मेटल शेयरों में उछाल पब्लिक सेक्टर बैंकिंग शेयरों में जोरदार वापसी देखने को मिली। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में 3.2% की तेजी आई, जबकि State Bank of India के शेयर करीब 3% चढ़े। मेटल सेक्टर में भी तेजी रही और इसमें करीब 2.2% की बढ़त दर्ज की गई। वहीं Tata Steel के शेयर लगभग 4% उछले, जिसका कारण ब्रोकरेज द्वारा टारगेट प्राइस बढ़ाना बताया जा रहा है। IT और अन्य सेक्टरों में भी सुधार आईटी सेक्टर में भी 1.7% की बढ़त देखी गई, जो गुरुवार की गिरावट के बाद रिकवरी का संकेत है। हालांकि, HDFC Bank के शेयरों पर दबाव बना रहा और इसमें और गिरावट दर्ज की गई। रुपया कमजोर, निवेशकों में सतर्कता इस बीच भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, जो बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की चाल फिलहाल मध्य पूर्व के घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। IPO की हलचल भी तेज इसी बीच SBI Funds Management ने IPO के लिए आवेदन किया है, जिसमें State Bank of India और Amundi अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचेंगे। यह कदम बाजार में नई हलचल पैदा कर सकता है। आगे कैसा रहेगा बाजार? विशेषज्ञों के मुताबिक, फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट आती है और वैश्विक तनाव कम होता है, तो बाजार में तेजी जारी रह सकती है। लेकिन निवेशकों को सतर्क रहकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार ने शानदार वापसी की। गुरुवार को भारी गिरावट के बाद आज बाजार हरे निशान में खुला। Nifty50 23,200 के ऊपर खुला, जबकि BSE Sensex में 700 अंकों से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में तेजी सुबह 9:16 बजे के आसपास निफ्टी 23,229 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो करीब 227 अंक यानी लगभग 1% की बढ़त है। वहीं सेंसेक्स 74,945 के स्तर पर पहुंच गया, जिसमें करीब 738 अंकों की तेजी दर्ज की गई। यह उछाल गुरुवार की 3% से ज्यादा गिरावट के बाद निवेशकों के लिए राहत भरी खबर है। बाजार में ‘उम्मीद बनाम डर’ का माहौल बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। एक तरफ वैश्विक तनाव और महंगाई की चिंता है, तो दूसरी तरफ राहत की उम्मीद भी दिख रही है। हाल के बयानों से संकेत मिला है कि पश्चिम एशिया में तनाव कुछ कम हो सकता है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी आई है। इसका सकारात्मक असर बाजार पर पड़ा है। किन सेक्टरों में दिखी मजबूती आज के कारोबार में खासकर बैंकिंग, फाइनेंशियल और ऑटो सेक्टर के शेयरों में तेजी देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि गुरुवार की गिरावट के बाद इन सेक्टरों में ‘बाउंस बैक’ की संभावना पहले से ही थी, जो अब दिखने लगी है। वैश्विक संकेतों का असर एशियाई बाजारों में भी आज तेजी का माहौल रहा, जिससे भारतीय बाजार को सपोर्ट मिला। वहीं कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी बाजारों में सुधार ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और मजबूत डॉलर के कारण वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी गुरुवार को विदेशी निवेशकों (FII) ने करीब 7,558 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे बाजार पर दबाव बना। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 3,864 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को कुछ हद तक संभाला। आगे क्या रहेगा ट्रेंड? विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अगर वैश्विक हालात स्थिर रहते हैं और कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं, तो बाजार में और सुधार देखने को मिल सकता है। लेकिन निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। कुल मिलाकर, शुक्रवार की शुरुआत ने यह संकेत जरूर दिया है कि गिरावट के बाद बाजार में रिकवरी की ताकत मौजूद है, लेकिन आगे का रास्ता अभी भी वैश्विक संकेतों पर निर्भर रहेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।