सौरव गांगुली

Sourav Ganguli
'दादा' का 54वां जन्मदिन आज: भारतीय क्रिकेट को नई दिशा देने वाले सौरव गांगुली को दुनिया भर से शुभकामनाएं

कोलकाता, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में शामिल सौरव गांगुली आज अपना 54वां जन्मदिन मना रहे हैं। 'दादा' और 'प्रिंस ऑफ कोलकाता' के नाम से मशहूर गांगुली को क्रिकेट जगत, पूर्व खिलाड़ियों और लाखों प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। अपने बेखौफ नेतृत्व और आक्रामक कप्तानी के दम पर उन्होंने भारतीय क्रिकेट को नई पहचान दिलाई और टीम इंडिया को विदेशी सरज़मीं पर जीतना सिखाया।    ऐसा रहा सौरव गांगुली का क्रिकेट करियर   सौरव गांगुली का जन्म 8 जुलाई 1972 को कोलकाता में हुआ था। उन्होंने 1996 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स टेस्ट में शतक लगाकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में यादगार शुरुआत की। गांगुली ने भारत के लिए 113 टेस्ट मैचों में 7,212 रन बनाए, जिसमें 16 शतक शामिल हैं। वहीं 311 वनडे मैचों में उन्होंने 11,363 रन बनाए और 22 शतक जड़े। वह वनडे क्रिकेट में भारत के सबसे सफल बल्लेबाजों में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में कई अहम मौकों पर गेंदबाजी करते हुए वनडे में 100 विकेट भी हासिल किए।    कप्तानी में बदली टीम इंडिया की तस्वीर   वर्ष 2000 से 2005 तक कप्तान रहे गांगुली ने भारतीय टीम को नई आक्रामक पहचान दी। उनकी कप्तानी में भारत ने 2002 आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीती और 2003 विश्व कप के फाइनल तक का सफर तय किया। उन्होंने एमएस धोनी, युवराज सिंह, वीरेंद्र सहवाग, हरभजन सिंह, जहीर खान और इरफान पठान जैसे कई खिलाड़ियों को मौका देकर भारतीय क्रिकेट की मजबूत नींव तैयार की।    परिवार और निजी जीवन   सौरव गांगुली की पत्नी डोना गांगुली प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना हैं। दोनों ने वर्ष 1997 में विवाह किया था। उनकी एक बेटी सना गांगुली हैं, जिन्होंने विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त की है। क्रिकेट से संन्यास के बाद गांगुली ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अध्यक्ष के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भारतीय क्रिकेट के प्रशासनिक सुधारों में योगदान दिया।    बर्थडे पर मिला खास तोहफा   गांगुली के जन्मदिन के अवसर पर उनकी बहुप्रतीक्षित बायोपिक 'दादा: द सौरव गांगुली स्टोरी' का फर्स्ट लुक भी जारी किया गया। फिल्म में राजकुमार राव सौरव गांगुली की भूमिका निभा रहे हैं और यह फिल्म 14 मई 2027 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

abhishek singh जुलाई 8, 2026 0
Devotee reciting Hanuman Chalisa before Lord Hanuman idol with a lit diya during prayer.
हनुमान चालीसा का पाठ क्यों माना जाता है संकटमोचन का उपाय? जानिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसके प्रमुख लाभ

हिंदू धर्म में हनुमान चालीसा को सबसे लोकप्रिय और पूजनीय स्तोत्रों में से एक माना जाता है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित यह चालीसा भगवान हनुमान की महिमा का वर्णन करती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और विश्वास के साथ हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करने से व्यक्ति को मानसिक शक्ति, सकारात्मक ऊर्जा और कठिन परिस्थितियों का सामना करने का साहस मिलता है। हालांकि, इन लाभों का आधार धार्मिक आस्था और परंपराएं हैं, इनके समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। 1. मानसिक तनाव और भय कम करने की मान्यता धार्मिक मान्यता है कि नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करने से मन शांत होता है और भय, चिंता तथा नकारात्मक विचारों से राहत मिलती है। कई श्रद्धालु इसे आत्मविश्वास बढ़ाने और मानसिक संतुलन बनाए रखने का माध्यम मानते हैं। 2. सकारात्मक ऊर्जा का संचार मान्यता है कि हनुमान चालीसा की 40 चौपाइयों का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से घर और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे व्यक्ति का मन आध्यात्मिक रूप से मजबूत होता है और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है। 3. ग्रह दोषों से राहत की धार्मिक मान्यता ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में शनि, मंगल या अन्य ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाव बताए जाते हैं, उन्हें नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं। 4. संकट और बाधाओं से रक्षा भगवान हनुमान को 'संकटमोचन' कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से हनुमान चालीसा का पाठ करने पर जीवन की कठिनाइयों, बाधाओं और भय से मुक्ति मिलने में सहायता मिलती है। यही कारण है कि अनेक श्रद्धालु इसे अपनी दैनिक पूजा का हिस्सा बनाते हैं। हनुमान चालीसा पाठ की पारंपरिक विधि धार्मिक परंपराओं के अनुसार, मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है। पाठ से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें, भगवान हनुमान के समक्ष दीपक और धूप जलाएं तथा भगवान श्रीराम का स्मरण करने के बाद श्रद्धापूर्वक चालीसा का पाठ करें। आस्था का विषय हनुमान चालीसा का पाठ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्यक्ति को आध्यात्मिक शक्ति और मनोबल प्रदान करता है। हालांकि, इसके प्रभाव व्यक्तिगत विश्वास और धार्मिक आस्था पर आधारित माने जाते हैं।  

surbhi जुलाई 8, 2026 0
Raj Kumar Rao
राजकुमार राव बने 'दादा', सौरव गांगुली बायोपिक का फर्स्ट लुक जारी; रिलीज डेट का भी ऐलान

मुंबई, एजेंसियां। पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली के 54वें जन्मदिन के मौके पर निर्माताओं ने उनकी बहुप्रतीक्षित बायोपिक 'दादा: द सौरव गांगुली स्टोरी' का पहला पोस्टर जारी कर दिया। पोस्टर में राजकुमार राव सौरव गांगुली के प्रतिष्ठित लॉर्ड्स बालकनी सेलिब्रेशन वाले अंदाज में नजर आ रहे हैं, जहां उन्होंने 2002 नेटवेस्ट ट्रॉफी जीत के बाद अपनी टी-शर्ट लहराई थी। साथ ही फिल्म की रिलीज डेट 14 मई 2027 घोषित की गई है।   आइकॉनिक लुक ने बढ़ाया उत्साह   पोस्टर में राजकुमार राव का लुक सौरव गांगुली से काफी मिलता-जुलता दिखाई दे रहा है। फिल्म का टैगलाइन "He Didn't Just Play The Game, He Changed It" भी जारी किया गया है, जिसे फैंस सोशल मीडिया पर खूब पसंद कर रहे हैं।   क्रिकेट के 'दादा' की प्रेरणादायक कहानी   फिल्म में सौरव गांगुली के भारतीय क्रिकेट में योगदान, कप्तानी, टीम इंडिया को नई पहचान दिलाने और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत की आक्रामक छवि स्थापित करने की कहानी दिखाई जाएगी। फिल्म का निर्देशन Vikramaditya Motwane कर रहे हैं, जबकि मुख्य भूमिका में Rajkummar Rao नजर आएंगे।   फैंस में जबरदस्त उत्साह   फर्स्ट लुक सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर फैंस ने राजकुमार राव की जमकर तारीफ की। कई यूजर्स ने इसे साल 2027 की सबसे बहुप्रतीक्षित स्पोर्ट्स बायोपिक बताया और फिल्म की रिलीज का बेसब्री से इंतजार शुरू कर दिया है।

abhishek singh जुलाई 8, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi addresses the Indian community in Jakarta, highlighting India-Indonesia ties and referring to the Bollywood film Kuch Kuch Hota Hai.
इंडोनेशिया में पीएम मोदी का फिल्मी अंदाज, बोले- भारत और इंडोनेशिया मिलें तो 'कुछ कुछ' नहीं, 'बहुत कुछ' होता है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित एक भव्य सामुदायिक कार्यक्रम में भारतीय प्रवासियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों को खास अंदाज में पेश करते हुए बॉलीवुड फिल्म 'कुछ कुछ होता है' का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि इंडोनेशिया में यह फिल्म बेहद लोकप्रिय है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "मैंने राष्ट्रपति प्रबोवो से भी कहा कि जब भारत और इंडोनेशिया साथ मिलकर आगे बढ़ते हैं, तो सिर्फ 'कुछ कुछ' नहीं, बल्कि 'बहुत कुछ' होता है।" उनके इस बयान पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने जोरदार तालियां बजाईं। सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलने पर जताया आभार प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किए जाने पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों और इंडोनेशिया में रहने वाले भारतीय समुदाय का सम्मान है। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार दोनों देशों के बीच मजबूत मित्रता, विश्वास और लंबे समय से चले आ रहे रिश्तों का प्रतीक है। राष्ट्रपति प्रबोवो के बयान का किया जिक्र पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि "उनमें भारत का DNA है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि यह डीएनए किसी प्रयोगशाला का नहीं, बल्कि दोनों देशों की साझा संस्कृति, सभ्यता, परंपरा और आपसी विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति प्रबोवो के इस बयान ने करोड़ों भारतीयों का दिल जीत लिया। भारत और इंडोनेशिया सिर्फ दोस्त नहीं, पड़ोसी भी प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से ही नहीं, बल्कि भौगोलिक रूप से भी बेहद करीब हैं। उन्होंने बताया कि भारत के ग्रेट निकोबार द्वीप और इंडोनेशिया के आचेह प्रांत के बीच केवल 150 किलोमीटर की दूरी है, जो दोनों देशों की निकटता को दर्शाती है। भारत की विकास यात्रा का भी किया जिक्र अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की तेज आर्थिक प्रगति और बुनियादी ढांचे के विकास का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि हाल ही में देश में शुरू हुई नई रिफाइनरी में इतना स्टील इस्तेमाल हुआ है कि उससे 40 एफिल टावर या 5 बुर्ज खलीफा बनाए जा सकते हैं। वहीं, इसमें लगी केबल की लंबाई इतनी है कि उससे पूरी पृथ्वी को दो बार लपेटा जा सकता है। पीएम ने कहा कि आज भारत रिफाइनिंग क्षमता के मामले में दुनिया के शीर्ष चार देशों में शामिल है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की भी दी जानकारी प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्र सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत मात्र 20 रुपये सालाना में 2 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे करीब 60 करोड़ लोग जुड़े हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना का भी उल्लेख करते हुए कहा कि रोजाना करीब डेढ़ रुपये के प्रीमियम पर जीवन बीमा की सुविधा मिल रही है, जो एक कप कॉफी की कीमत से भी कम है। भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिलेगी नई मजबूती प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, निवेश, पर्यटन और सांस्कृतिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों की साझेदारी आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास को नई गति मिलेगी।  

Deepshikha जुलाई 8, 2026 0
Virat Kohli Valuable Personality
कोहली भारत की सबसे वैल्युएबल पर्सनैलिटी, ब्रांड वैल्यू ₹3542 करोड़

शाहरुख दूसरे, प्रियंका तीसरे और अमिताभ 7वें नंबर पर मुंबई, एजेंसियां। दिग्गज क्रिकेटर विराट कोहली भारत की सबसे वैल्युएबल पर्सनैलिटी की लिस्ट में पहले स्थान पर हैं। उनकी ब्रांड वैल्यू 3,542 करोड़ रुपए है। शाहरुख खान दूसरे और प्रियंका चोपड़ा जोनस तीसरे पायदान पर हैं। फॉर्च्यून इंडिया और इंटरब्रांड ने देश की 25 सबसे वैल्युएबल सेलिब्रिटी पर रिसर्च की। इसमें टॉप 10 में 3 क्रिकेटर और 7 फिल्मी सेलिब्रटी हैं। टॉप-25 सेलिब्रिटीज में दीपिका, रश्मिका महिला सेलिब्रिटीज में प्रियंका चोपड़ा सबसे ऊपर रहीं। इसके अलावा दीपिका पादुकोण (11वां स्थान), रश्मिका मंदाना (17वां स्थान), कृति सेनन, भारतीय महिला क्रिकेटर स्मृति मंधाना और साउथ की एक्ट्रेस नयनतारा को जगह मिली है। वैल्युएबल पर्सन की सूची में दिलजीत दोसांझ, करन जौहर, सौरव गांगुली और विकी कौशल के भी नाम हैं। कैसे तय की गई ब्रांड वैल्यू इस अध्ययन में ब्रांड वैल्यू तय करने के लिए सेलिब्रिटीज की कमाई, फॉलोअर्स या बॉक्स ऑफिस पर सफलता से इतर कई अन्य बातों पर भी ध्यान दिया गया है। इनमें ब्रांड की ताकत को तय करने वाले पहलुओं जैसे- विशिष्टता, सामंजस्य, जुड़ाव, विश्वास, आत्मीयता और जिम्मेदारी पर भी गौर किया गया है, जो मिलकर उनकी फाइनल ब्रांड वैल्यू तय करते हैं।

Unknown जून 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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anjali kumari जुलाई 11, 2026 0