AIIMS

एम्स में फैकल्टी और डॉक्टरों के खाली पदों को लेकर संसद में जानकारी
देश के कई AIIMS में फैकल्टी की भारी कमी, संसद में सरकार ने बताया- हजारों पद अब भी खाली

राज्यसभा में स्वास्थ्य मंत्रालय ने दी जानकारी   नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने संसद में बताया है कि देश के विभिन्न AIIMS संस्थानों में फैकल्टी के हजारों पद अब भी रिक्त हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, कई नए और पुराने AIIMS में स्वीकृत पदों के मुकाबले बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति अभी तक नहीं हो सकी है। सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया लगातार जारी है और रिक्त पदों को चरणबद्ध तरीके से भरा जा रहा है।   नए AIIMS में ज्यादा रिक्तियां   संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, नए स्थापित AIIMS संस्थानों में फैकल्टी की कमी अधिक है। उदाहरण के तौर पर AIIMS मदुरै में करीब 74% फैकल्टी पद खाली हैं। वहीं कई अन्य संस्थानों में भी प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पद लंबे समय से रिक्त हैं, जिससे चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा है।   सरकार ने भर्ती प्रक्रिया तेज करने का दिया भरोसा   स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि रिक्त पदों को भरने के लिए नियमित भर्ती अभियान चलाए जा रहे हैं। AIIMS में फैकल्टी और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किए जा रहे हैं और चयन प्रक्रिया को तेज किया गया है। सरकार का दावा है कि नए संस्थानों के विस्तार के साथ मानव संसाधन भी बढ़ाया जाएगा।   स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा असर   विशेषज्ञों का मानना है कि फैकल्टी की कमी का असर मेडिकल छात्रों की पढ़ाई, शोध कार्य और मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है। संसदीय समिति ने भी पहले डॉक्टरों पर बढ़ते कार्यभार और रिक्त पदों को जल्द भरने की जरूरत पर जोर दिया था।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 29, 2026 0
Sonam Wangchuk receiving treatment at Safdarjung Hospital during hunger strike
अनशन के 24वें दिन भी अस्पताल में सोनम वांगचुक, ब्लड शुगर-पोटैशियम कम; डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में इलाज

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल मंगलवार को 24वें दिन में पहुंच गई। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है, लेकिन डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि उनकी सेहत पर लगातार नजर रखना जरूरी है। लंबे समय तक भोजन नहीं करने और शरीर में पानी की कमी के कारण मेडिकल टीम उनकी नियमित जांच कर रही है। क्या है सोनम वांगचुक का ताजा हेल्थ अपडेट? डॉक्टरों के मुताबिक सोनम वांगचुक की स्थिति फिलहाल स्थिर है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। ब्लड शुगर सामान्य से कम बना हुआ है, जिससे कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम बना हुआ है। जांच में पोटैशियम का स्तर 3.2 mEq/L पाया गया है, जो सामान्य सीमा से कम है। खून की जांच में एनीमिया के लक्षण मिले हैं। सफेद रक्त कोशिकाओं (WBC) की संख्या भी कम पाई गई है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे उपवास के कारण शरीर में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) की स्थिति बनी हुई है, इसलिए उनकी लगातार निगरानी की जा रही है। इलाज कैसे चल रहा है? डॉक्टरों की सलाह पर सोनम वांगचुक फिलहाल ORS और पोटैशियम सप्लीमेंट ले रहे हैं। मेडिकल टीम ने उन्हें शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी दूर करने के लिए IV फ्लूइड और ग्लूकोज लेने की सलाह दी है, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। सफदरजंग अस्पताल और AIIMS के विशेषज्ञ डॉक्टरों की संयुक्त टीम उनकी स्वास्थ्य स्थिति की लगातार समीक्षा कर रही है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जरूरत के अनुसार सभी चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। 28 जून से जारी है भूख हड़ताल सोनम वांगचुक 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। वह केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी उन्होंने अपना अनशन समाप्त नहीं किया है। 18 जुलाई को बिगड़ी थी तबीयत लगातार तीन सप्ताह तक भूख हड़ताल करने के बाद 18 जुलाई को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल लेकर गई, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज शुरू किया गया। अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी वांगचुक ने आंदोलन जारी रखने की इच्छा जताई थी। उन्होंने CJP के 'संसद चलो मार्च' में शामिल होने के लिए अस्पताल से डिस्चार्ज करने की भी मांग की थी, लेकिन डॉक्टरों ने स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें अस्पताल में ही रहने की सलाह दी। एक नजर में पूरा हेल्थ अपडेट अनशन का आज: 24वां दिन अस्पताल: सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली हालत: फिलहाल स्थिर ब्लड शुगर: सामान्य से कम पोटैशियम: 3.2 mEq/L एनीमिया: जांच में पुष्टि WBC: सामान्य से कम क्या ले रहे हैं: ORS और पोटैशियम की दवा क्या लेने से इनकार किया: IV फ्लूइड और ग्लूकोज इलाज: सफदरजंग और AIIMS के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम की निगरानी में डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल वांगचुक की स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन लंबे समय तक जारी भूख हड़ताल के कारण किसी भी तरह की चिकित्सीय जटिलता से बचने के लिए 24 घंटे निगरानी और नियमित मेडिकल जांच बेहद जरूरी है।  

kalpana जुलाई 21, 2026 0
Lalu Yadav Health Update
लालू प्रसाद की तबीयत बिगड़ी, बेहतर इलाज के लिए आज दिल्ली एम्स जाएंगे राजद सुप्रीमो

पटना, एजेंसियां। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए शनिवार को नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ले जाया जाएगा। शुक्रवार शाम ब्लड प्रेशर में अचानक उतार-चढ़ाव की शिकायत के बाद उन्हें पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उनका विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया।   राजद सांसद और लालू प्रसाद यादव राजद सांसद और लालू प्रसाद यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती ने बताया कि आईजीआईएमएस में चिकित्सकों की टीम ने सभी जरूरी जांचें कीं। इलाज के बाद उनकी स्थिति सामान्य और स्थिर पाई गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। फिलहाल डॉक्टरों ने उन्हें घर पर निगरानी में रहने की सलाह दी है। हालांकि, उनके पुराने स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड और विशेषज्ञ उपचार को ध्यान में रखते हुए आगे की चिकित्सा के लिए उन्हें शनिवार को एम्स, नई दिल्ली ले जाया जाएगा।   मीसा भारती ने कहा मीसा भारती ने कहा कि लालू प्रसाद पहले से ही एम्स दिल्ली के विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में इलाज कराते रहे हैं। ऐसे में डॉक्टरों की सलाह पर वहीं आगे की जांच और उपचार कराया जाएगा। उन्होंने समर्थकों और शुभचिंतकों से चिंता न करने की अपील करते हुए कहा कि फिलहाल उनकी हालत स्थिर है। इस दौरान मीसा भारती ने पटना के कौटिल्य नगर स्थित नए आवास के आसपास की सफाई व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इलाके में स्वच्छता की स्थिति संतोषजनक नहीं है, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस मुद्दे को उठाने पर लोग राजनीतिक अर्थ निकाल सकते हैं।   गौरतलब है कि करीब दो दशक तक 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास में रहने के बाद हाल ही में लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी अपने निजी आवास, कौटिल्य नगर में शिफ्ट हुए हैं। अब उनके स्वास्थ्य पर पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की नजर बनी हुई है।

abhishek singh जुलाई 18, 2026 0
Teejan Bai
छत्तीसगढ़ की लोक कलाकार तीजन बाई का निधन, लोककला जगत में शोक की लहर

रायपुर, एजेंसियां। पद्म विभूषण से सम्मानित और पंडवानी लोकगायन की विश्वप्रसिद्ध कलाकार तीजन बाई का रविवार तड़के रायपुर स्थित एम्स में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 70 वर्ष की थीं और पिछले कई सप्ताह से उपचाराधीन थीं। उनके निधन से देशभर के कला एवं संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई।   पंडवानी को दिलाई वैश्विक पहचान   तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककला पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। महाभारत की कथाओं को अपनी दमदार शैली, अभिनय और गायन के माध्यम से प्रस्तुत कर उन्होंने इस लोककला को नई पहचान दिलाई। उन्होंने भारत के साथ-साथ यूरोप, एशिया और कई अन्य देशों में भी अपनी प्रस्तुतियां देकर भारतीय लोक संस्कृति का गौरव बढ़ाया।   पद्म विभूषण सहित कई बड़े सम्मान   अपने लंबे कलात्मक जीवन में तीजन बाई को पद्म श्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और अनेक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया। कम उम्र में सामाजिक विरोध का सामना करने के बावजूद उन्होंने पंडवानी की परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और महिला कलाकारों के लिए नई राह बनाई।   प्रधानमंत्री मोदी समेत कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे "कला और संस्कृति जगत की अपूरणीय क्षति" बताया। विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, कलाकारों और सांस्कृतिक संस्थानों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और भारतीय लोककला में उनके योगदान को हमेशा याद रखने की बात कही।

abhishek singh जुलाई 5, 2026 0
An illustration of the proposed six-lane tunnel linking Dwarka Expressway with Nelson Mandela Road in South Delhi, aimed at easing traffic across Delhi-NCR.
दिल्ली-NCR को बड़ी सौगात: द्वारका एक्सप्रेसवे से वसंत कुंज तक बनेगी 6-लेन टनल, कैबिनेट ने दी मंजूरी

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने दिल्ली-एनसीआर की ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एक बड़ी आधारभूत संरचना परियोजना को मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने द्वारका एक्सप्रेसवे को दक्षिण दिल्ली के वसंत कुंज स्थित नेल्सन मंडेला मार्ग से जोड़ने वाली 6-लेन सुरंग परियोजना को स्वीकृति दे दी है। इस परियोजना पर 6,969.67 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसे हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) के तहत पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग NH-148AE के तहत बनने वाली यह 8.1 किलोमीटर लंबी परियोजना दिल्ली के लंबे समय से लंबित बुनियादी ढांचा विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पश्चिम और दक्षिण दिल्ली के बीच सफर होगा आसान इस परियोजना के पूरा होने के बाद द्वारका, गुरुग्राम, पश्चिम दिल्ली, दक्षिण दिल्ली और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के बीच यात्रा अधिक तेज और जाम-मुक्त हो जाएगी। इससे यात्रियों का समय बचेगा और राजधानी के प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा। सदर्न रिज के नीचे बनेगी आधुनिक ट्विन-ट्यूब टनल परियोजना की मुख्य सड़क लगभग 6.3 किलोमीटर लंबी होगी, जिसमें 1.98 किलोमीटर हिस्सा Southern Ridge Forest के नीचे से गुजरेगा। यहां अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) की मदद से ट्विन-ट्यूब सुरंग बनाई जाएगी, जिससे सतह पर पर्यावरण और यातायात पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा। यह सुरंग शिवमूर्ति इंटरचेंज से शुरू होकर नेल्सन मंडेला मार्ग और महिपालपुर-छतरपुर रोड के जंक्शन के पास समाप्त होगी। एलिवेटेड कॉरिडोर से नोएडा और गाजियाबाद की कनेक्टिविटी बेहतर परियोजना के तहत AIIMS New Delhi से महिपालपुर तक एलिवेटेड कॉरिडोर विकसित करने की भी योजना है। यह कॉरिडोर बारापुला एलिवेटेड रोड से जुड़ेगा, जिससे पश्चिम और दक्षिण दिल्ली से पूर्वी दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद तक बिना रेड लाइट के यात्रा संभव हो सकेगी। इसके अलावा: महिपालपुर-छतरपुर जंक्शन पर 1.8 किमी लंबी एलिवेटेड सड़क बनेगी। छतरपुर-महिपालपुर मार्ग पर अतिरिक्त फ्लाईओवर तैयार होगा। छतरपुर की ओर जाने वाले वाहनों के लिए एलिवेटेड यू-टर्न बनाया जाएगा। इन सभी हिस्सों को मिलाकर परियोजना की कुल लंबाई 8.1 किलोमीटर होगी। रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे सरकार के अनुसार, इस परियोजना के निर्माण के दौरान बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होगा। अनुमान है कि निर्माण कार्य से लगभग: 7.54 लाख प्रत्यक्ष मानव-दिवस रोजगार, 9.80 लाख अप्रत्यक्ष मानव-दिवस रोजगार उत्पन्न होंगे। यानी कुल मिलाकर 17 लाख से अधिक मानव-दिवस रोजगार सृजित होने की संभावना है। यह परियोजना राजधानी में यातायात को सुगम बनाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, बेहतर कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को भी गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
AIIMS CRE 2026
AIIMS CRE Recruitment 2026: ग्रुप 'बी' और 'सी' के 1484 पदों पर भर्ती, 3 जुलाई तक करें आवेदन

नई दिल्ली,एजेंसियां। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने कॉमन रिक्रूटमेंट एग्जामिनेशन (CRE-5) 2026 के तहत ग्रुप 'बी' और ग्रुप 'सी' के विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस भर्ती अभियान के माध्यम से देशभर के विभिन्न AIIMS संस्थानों और अन्य केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में कुल 1484 रिक्त पद भरे जाएंगे।   3 जुलाई तक भरें आवेदन ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 13 जून 2026 से शुरू हो चुकी है और इच्छुक अभ्यर्थी 3 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि भी 3 जुलाई है, जबकि एनओसी जमा करने वाले उम्मीदवार 8 जुलाई तक दस्तावेज जमा कर सकेंगे। आवेदन की स्थिति 11 जुलाई को उपलब्ध होगी। कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) का आयोजन 25 से 27 जुलाई 2026 के बीच किया जाएगा।   कई पदों पर होगी नियुक्ति   भर्ती के तहत सीनियर और जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर, एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट, ऑफिस सुपरिटेंडेंट, एलडीसी, यूडीसी, जूनियर एवं असिस्टेंट इंजीनियर, डाइटीशियन, वार्डन, स्टोर कीपर, कैशियर और जूनियर अकाउंट्स ऑफिसर सहित कई पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।   योग्यता, आयु सीमा और शुल्क पदों के अनुसार 10वीं, 12वीं, डिप्लोमा, स्नातक और स्नातकोत्तर योग्यता निर्धारित की गई है। कुछ पदों के लिए संबंधित क्षेत्र का अनुभव भी आवश्यक है। न्यूनतम आयु 18 वर्ष है, जबकि अधिकतम आयु पद के अनुसार 21 से 50 वर्ष तक तय की गई है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी। सामान्य और ओबीसी वर्ग के लिए आवेदन शुल्क 3,000 रुपये, जबकि एससी, एसटी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए 2,400 रुपये निर्धारित किया गया है। दिव्यांग अभ्यर्थियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।   चयन प्रक्रिया उम्मीदवारों का चयन कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) और संबंधित पदों के लिए आयोजित स्किल टेस्ट के आधार पर किया जाएगा। अभ्यर्थियों को आवेदन से पहले आधिकारिक अधिसूचना ध्यानपूर्वक पढ़कर सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार रखने की सलाह दी गई है।

abhishek singh जून 16, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 30, 2026 0