Assam Elections

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असम चुनाव में झामुमो की एंट्री तेज, कल्पना सोरेन ने संभाली प्रचार की कमान

दिसपुर, एजेंसियां। असम विधानसभा चुनाव के बीच राजनीतिक हलचल तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने भी चुनावी मैदान में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने बुधवार को असम के चबुआ विधानसभा क्षेत्र में पहुंचकर पार्टी प्रत्याशी भूबेन मुरारी के समर्थन में जोरदार प्रचार अभियान चलाया। उनके दौरे ने इलाके में चुनावी माहौल को और गरमा दिया है।    कल्पना सोरेन और  जोबा माझी  प्रचार के दौरान कल्पना सोरेन के साथ सांसद जोबा माझी भी मौजूद रहीं। दोनों नेताओं ने चबुआ के चाय बागान क्षेत्रों का दौरा किया और वहां काम कर रहे मजदूरों से सीधे बातचीत की। इस दौरान उन्होंने मजदूरों की रोजमर्रा की परेशानियों को करीब से समझने की कोशिश की। मजदूरों ने भी खुलकर अपनी समस्याएं सामने रखीं। इनमें कम मजदूरी, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, खराब आवास व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं का अभाव जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।   कल्पना सोरेन ने कहा   कल्पना सोरेन ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि झामुमो सिर्फ चुनावी वादों की राजनीति नहीं करती, बल्कि जमीन से जुड़े मुद्दों को उठाने में विश्वास रखती है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे भूबेन मुरारी को भारी मतों से जीताकर विधानसभा भेजें, ताकि क्षेत्र के विकास और मजदूर वर्ग की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित हो सके।इस मौके पर झामुमो नेताओं ने यह भी साफ किया कि पार्टी असम में स्थानीय और जनजीवन से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है। खासकर चाय बागान मजदूरों, गरीब तबकों और वंचित समुदायों के अधिकारों को लेकर पार्टी अपनी मजबूत राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है। कल्पना सोरेन और जोबा माझी के इस दौरे से साफ है कि झामुमो असम चुनाव में भी ग्राउंड कनेक्ट बनाने की कोशिश में जुटी है। आने वाले दिनों में विभिन्न राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं के दौरे के साथ चुनाव प्रचार और तेज होने की संभावना है।

Anjali Kumari अप्रैल 1, 2026 0
Election strategy of BJP for Assam Kerala and West Bengal polls
तीन राज्यों में BJP का बड़ा चुनावी ब्लूप्रिंट: असम में गठबंधन, केरल में विस्तार और बंगाल में ‘क्लीन स्वीप’ का लक्ष्य

आगामी विधानसभा चुनावों से पहले Bharatiya Janata Party ने असम, केरल और पश्चिम बंगाल को लेकर अपनी व्यापक रणनीति तैयार कर ली है। राजधानी दिल्ली में हुई केंद्रीय चुनाव समिति की अहम बैठक में प्रधानमंत्री Narendra Modi, गृह मंत्री Amit Shah और रक्षा मंत्री Rajnath Singh समेत शीर्ष नेतृत्व ने इन राज्यों में चुनावी गणित और संभावनाओं पर विस्तार से मंथन किया। असम: गठबंधन के साथ चुनावी मैदान Assam में पार्टी ने सहयोगी दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। Asom Gana Parishad   Bodoland People's Front   इन दलों के साथ सीट शेयरिंग के जरिए चुनावी मजबूती बढ़ाने की रणनीति बनाई गई है। बताया जा रहा है कि 89 सीटों पर गहन चर्चा हुई है और जल्द ही उम्मीदवारों की सूची जारी की जा सकती है। इस रणनीति में मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की अहम भूमिका रही है। केरल: 100 सीटों पर बड़ा दांव Kerala में पार्टी ने इस बार आक्रामक रणनीति अपनाई है। 140 सदस्यीय विधानसभा में से 100 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का लक्ष्य रखा गया है। पहली सूची में ही कई बड़े नामों को टिकट दिया गया है: Rajeev Chandrasekhar – नेमोम सीट   George Kurian – कांजिराप्पिली सीट   गौरतलब है कि 2021 के चुनाव में पार्टी को यहां एक भी सीट नहीं मिली थी। ऐसे में यह रणनीति राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने और तीसरे विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश मानी जा रही है। बंगाल: पहली बार सत्ता में आने का लक्ष्य West Bengal में पार्टी ने इस बार ‘क्लीन स्वीप’ का लक्ष्य रखा है। बीजेपी 150 से अधिक सीटों पर मजबूत लड़ाई की तैयारी में है। पहले ही 144 सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की जा चुकी है, जिसमें प्रमुख चेहरे शामिल हैं: Suvendu Adhikari   Dilip Ghosh   राज्य की कुल 294 सीटों में मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है, क्योंकि सत्तारूढ़ दल All India Trinamool Congress भी 291 सीटों पर उम्मीदवार उतार चुका है। चुनावी टाइमलाइन और सियासी समीकरण Kerala में 9 अप्रैल को एक चरण में मतदान होना है। वहीं कांग्रेस और वाम दल भी अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ मैदान में उतर चुके हैं। बीजेपी का यह पूरा प्लान दर्शाता है कि पार्टी उन राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है, जहां अब तक उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली है। आने वाले चुनाव यह तय करेंगे कि यह रणनीति जमीन पर कितनी कारगर साबित होती है।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
Assam CM Himanta Biswa Sarma announcing ₹9000 Arunodoi scheme transfer to women beneficiaries before elections
असम में ‘बिहार मॉडल’ का दांव? चुनाव से पहले अरुणोदय योजना के तहत 40 लाख महिलाओं के खातों में ₹9,000 ट्रांसफर

  असम: देश की राजनीति में हाल के वर्षों में महिलाओं को केंद्र में रखकर शुरू की गई कल्याणकारी योजनाएं चुनावी समीकरणों को प्रभावित करती रही हैं। कई राज्यों में ऐसी योजनाओं ने सरकारों की वापसी का रास्ता आसान किया है। इसी पृष्ठभूमि में असम में भी विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। असम सरकार ने मंगलवार को अरुणोदय (Arunodoi) योजना के तहत करीब 40 लाख लाभार्थियों के बैंक खातों में ₹9,000 की एकमुश्त सहायता राशि ट्रांसफर की। यह राज्य में अब तक की सबसे बड़ी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) पहलों में से एक मानी जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया के तहत करीब ₹3,600 करोड़ सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजे गए।   चुनाव से पहले बड़ा कदम, लेकिन सरकार का दावा-राजनीति से नहीं जुड़ा राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम बिहार के उस मॉडल से मिलता-जुलता है, जिसमें चुनाव से पहले महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता देकर सरकार ने बड़ा राजनीतिक संदेश दिया था। हालांकि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस योजना को चुनाव से जोड़ने से साफ इनकार किया है। गुवाहाटी के खानापाड़ा स्थित ज्योति-बिष्णु अंतर्राष्ट्रीय कला मंदिर ऑडिटोरियम से वर्चुअल कार्यक्रम के माध्यम से लाभार्थियों को यह राशि जारी करते हुए सरमा ने कहा कि अरुणोदय योजना कई वर्षों से चल रही है और इसका उद्देश्य केवल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मदद करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पहल चुनावी रणनीति नहीं बल्कि राज्य सरकार की दीर्घकालिक सामाजिक कल्याण नीति का हिस्सा है।   चार महीने की सहायता और बिहू बोनस शामिल सरकार द्वारा जारी की गई इस राशि में चार महीनों की वित्तीय सहायता के साथ-साथ महिलाओं के लिए दिया जाने वाला विशेष बिहू बोनस भी शामिल है। राज्य सरकार का कहना है कि त्योहारों के समय आर्थिक मदद से गरीब परिवारों को राहत मिलती है और उनकी जरूरतें पूरी करने में सहायता मिलती है।   किन लोगों को मिलता है योजना का लाभ मुख्यमंत्री सरमा के अनुसार, अरुणोदय योजना खासतौर पर समाज के कमजोर वर्गों की महिलाओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं- विधवा महिलाएं   तलाकशुदा या परित्यक्त महिलाएं   गंभीर बीमारियों से प्रभावित परिवार   आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद घर-परिवार   सरकार का कहना है कि लाभ केवल उन्हीं लोगों को दिया जाता है जो निर्धारित मानकों के आधार पर वास्तव में इसके पात्र हैं।   महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की पहल असम की वित्त मंत्री अजंता नियोग ने इस पहल को राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत लगभग 40 लाख परिवारों को सहायता मिल रही है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं। नियोग के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में राज्य सरकार ने गरीब परिवारों और महिलाओं के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं, जिनका उद्देश्य उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और समाज में उनका सम्मान बढ़ाना है।   लाभार्थियों में खुशी योजना के तहत राशि सीधे बैंक खातों में पहुंचने से लाभार्थियों में उत्साह देखा गया। सोनापुर की शिवानी बोरो डेका ने बताया कि ₹9,000 की सहायता मिलने से उन्हें काफी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि वह इस राशि का उपयोग परिवार की जरूरतों को पूरा करने में करेंगी। वहीं एक अन्य लाभार्थी राधिका मंडल ने कहा कि यह आर्थिक सहायता उनके लिए छोटा व्यवसाय शुरू करने और रोजगार के नए अवसर तलाशने में मददगार साबित हो सकती है।   राजनीतिक और सामाजिक असर पर नजर विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता देने वाली योजनाएं सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ राजनीतिक दृष्टि से भी प्रभावशाली साबित होती हैं। ऐसे में आने वाले विधानसभा चुनावों के संदर्भ में असम सरकार की इस पहल पर राजनीतिक विश्लेषकों और विपक्षी दलों की नजरें टिकी हुई हैं।  

surbhi मार्च 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Crowd chaos at Nalanda Sheetla Temple during religious event causing stampede-like situation and casualties
बिहार

नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

surbhi मार्च 31, 2026 0