नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों ने दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींचा है। खासकर West Bengal में Narendra Modi के नेतृत्व वाली Bharatiya Janata Party की जीत को अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने ऐतिहासिक बताया है। कई विदेशी मीडिया संस्थानों ने इसे Mamata Banerjee के 15 साल पुराने शासन के अंत के रूप में पेश किया। ब्रिटिश और अमेरिकी मीडिया की प्रतिक्रिया ब्रिटेन के BBC ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि बीजेपी ने भारत के सबसे कठिन राजनीतिक क्षेत्रों में से एक को जीत लिया है, जो प्रधानमंत्री मोदी की बड़ी उपलब्धियों में गिनी जाएगी। वहीं The Guardian ने इसे भारतीय राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत बताया। अमेरिका के The New York Times ने इस जीत को “ऐतिहासिक” करार देते हुए कहा कि बीजेपी ने विपक्ष के मजबूत गढ़ को तोड़ दिया है। वहीं The Washington Post ने विश्लेषण किया कि इस जीत से मोदी की राजनीतिक स्थिति और मजबूत होगी। पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी चर्चा पाकिस्तान के प्रमुख अखबार Dawn ने भी इस जीत को प्रमुखता से कवर किया। रिपोर्ट में कहा गया कि बंगाल जैसे राज्य में जीत 2029 के आम चुनाव से पहले मोदी की स्थिति को और सशक्त करेगी। वहीं बांग्लादेश के Dhaka Tribune ने भी इन नतीजों को अहम बताते हुए तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन और नई राजनीतिक ताकतों के उभार पर जोर दिया। तमिलनाडु में विजय की एंट्री बनी सुर्खियां Tamil Nadu में अभिनेता से नेता बने Thalapathy Vijay की पार्टी की जीत को विदेशी मीडिया ने “सबसे बड़ा सरप्राइज” बताया। दो साल पहले बनी उनकी पार्टी ने दिग्गज दलों को पीछे छोड़कर सत्ता हासिल कर ली। कुल मिलाकर, भारतीय चुनाव नतीजों ने वैश्विक स्तर पर राजनीतिक विश्लेषण को नई दिशा दी है। बंगाल में बीजेपी की जीत और तमिलनाडु में नए नेतृत्व का उभार अंतरराष्ट्रीय मीडिया के लिए खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना के बीच हिंसा की खबरें आ रही हैं। आसनसोल और बांकुरा में बीजेपी और टीएमसी समर्थकों के बीच झड़प हो गई। देखते ही देखते हालात बिगड़ने लगे और स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। बताया जा रहा है कि मतगणना के शुरुआती रुझानों के बीच अलग-अलग दलों के समर्थक बड़ी संख्या में केंद्रों के बाहर जमा थे। इसी दौरान नारेबाजी को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। पहले कहासुनी हुई, फिर मामला धक्का-मुक्की और झड़प तक पहुंच गया। हालात बिगड़ते ही पुलिस का एक्शन स्थिति हाथ से निकलती देख मौके पर मौजूद पुलिस और सुरक्षाबलों ने तुरंत मोर्चा संभाला। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया गया और लाठीचार्ज किया गया। इसके बाद इलाके में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना के बाद प्रशासन ने दोनों जगहों पर सुरक्षा और सख्त कर दी है। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, ताकि किसी तरह की और गड़बड़ी न हो। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। मतगणना जारी, प्रशासन सतर्क इन घटनाओं के बावजूद राज्यभर में मतगणना का काम जारी है। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है और हर संवेदनशील इलाके पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में मंगलवार को जबरदस्त मतदान देखने को मिला। राज्य की 142 सीटों पर सुबह से ही मतदान प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें 1,448 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई। शाम 5 बजे तक चुनाव आयोग के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार करीब 89.99 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो बेहद अधिक माना जा रहा है।चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए 2,300 से अधिक अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी। हालांकि, कुछ इलाकों से टीएमसी और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प और तनाव की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे कुछ समय के लिए मतदान प्रभावित हुआ। अंतिम घंटे में भी जारी रहा मतदान निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि अंतिम मतदान प्रतिशत में थोड़ा बदलाव संभव है, क्योंकि कई बूथों पर शाम 5 बजे के बाद भी कतार में खड़े मतदाताओं ने अपने वोट डाले। प्रशासन ने सभी जगहों पर शांतिपूर्ण मतदान का दावा किया है, जबकि संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात रहे। ममता बनर्जी का बड़ा दावा, दो-तिहाई बहुमत से सरकार बनाने का भरोसा मतदान के बीच मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने बड़ा राजनीतिक बयान दिया। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से दावा किया कि भाजपा राज्य में हार की कगार पर है और तृणमूल कांग्रेस दो-तिहाई बहुमत के साथ फिर से सरकार बनाएगी। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण में बुधवार को 142 सीटों पर मतदान जारी है। शुरुआती 5 घंटों के भीतर करीब 45% मतदान दर्ज किया गया, जो मतदाताओं के उत्साह को दर्शाता है। इस चरण में 7 जिलों की सीटों पर 1448 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिनका फैसला 3.22 करोड़ से अधिक मतदाता करेंगे। सुरक्षा के कड़े इंतजाम चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। लगभग 2,300 से अधिक पैरा मिलिट्री फोर्स की कंपनियां तैनात की गई हैं, जबकि 300 से ज्यादा ऑब्जर्वर निगरानी कर रहे हैं। संवेदनशील इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। भवानीपुर में हाई-प्रोफाइल मुकाबला इस चरण की सबसे चर्चित सीट भवानीपुर है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मैदान में हैं। यह क्षेत्र तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता है, लेकिन भाजपा भी यहां अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। इस सीट पर मुकाबला राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। बीजेपी उम्मीदवार पर हमला, बढ़ा तनाव दक्षिण 24 परगना जिले में एक गंभीर घटना सामने आई है, जहां बीजेपी उम्मीदवार पर कथित रूप से जानलेवा हमला किया गया। इस घटना के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया है और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। चुनाव आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट तलब की है। 2021 के मुकाबले कड़ी टक्कर इन 142 सीटों पर 2021 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 123 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि बीजेपी को सिर्फ 18 सीटें मिली थीं। इस बार बीजेपी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद में है, जबकि टीएमसी अपने गढ़ को बचाने की कोशिश कर रही है। नतीजों पर टिकी नजर दूसरा चरण राज्य की सत्ता की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस चरण का प्रदर्शन ही यह तय करेगा कि राज्य में सत्ता किसके हाथ में जाएगी।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को शुरू हो गया है। इस चरण में 294 सीटों वाली विधानसभा की शेष 142 सीटों पर वोटिंग हो रही है। मतदान राज्य के छह जिलों में जारी है, जिनमें राजधानी कोलकाता भी शामिल है। निर्वाचन आयोग ने शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। कुल 1,448 उम्मीदवार है इस चरण में कुल 1,448 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर लगी है। लगभग 3.21 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। आयोग के अनुसार, इन 142 सीटों पर कुल 3,21,73,837 पंजीकृत मतदाता हैं, जिनमें पुरुष, महिला और थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। इस चरण में भवानीपुर जैसी हाई-प्रोफाइल सीटों पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं, जिससे चुनावी मुकाबला और भी रोचक हो गया है। विशेष मतदाता क्या है? विशेष मतदाताओं की बात करें तो 100 वर्ष या उससे अधिक आयु के 3,243 मतदाता, 85 वर्ष से अधिक उम्र के 1,96,801 वरिष्ठ नागरिक, 146 एनआरआई मतदाता और 39,961 सर्विस वोटर भी इस चरण में मतदान कर रहे हैं। सभी मतदाताओं को EPIC फोटो पहचान पत्र उपलब्ध कराया गया है ताकि मतदान प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के प्रचार के अंतिम दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता के बेहाला में भव्य रोड शो और जनसभा के दौरान बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने मतदाताओं को सुरक्षा का भरोसा दिलाते हुए घोषणा की कि यदि भाजपा सत्ता में आती है, तो चुनाव परिणाम के बाद भी सात दिनों तक केंद्रीय सुरक्षा बल राज्य में तैनात रहेंगे। मतदाताओं को सुरक्षा का भरोसा अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि बंगाल में चुनाव के दौरान और उसके बाद किसी भी प्रकार की हिंसा को रोकने के लिए यह कदम उठाया जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे 29 अप्रैल को बिना किसी डर के मतदान करें और लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करें। शाह ने स्पष्ट कहा कि “किसी भी गुंडे से डरने की जरूरत नहीं है।” चुनाव आयोग की तैयारियों का जिक्र गृह मंत्री ने यह भी कहा कि Election Commission of India ने मतदान को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। इसके बावजूद भाजपा सरकार बनने की स्थिति में अतिरिक्त सुरक्षा के तौर पर केंद्रीय बलों की तैनाती जारी रखी जाएगी। रोड शो में उमड़ा जनसैलाब कोलकाता का बेहाला क्षेत्र रोड शो के दौरान पूरी तरह राजनीतिक रंग में रंगा नजर आया। सड़कों पर भारी संख्या में भाजपा समर्थक जुटे और ‘जय श्रीराम’ व ‘भारत माता की जय’ के नारों से माहौल गूंज उठा। अमित शाह खुले वाहन में सवार होकर लोगों का अभिवादन करते नजर आए। सियासी रणनीति का हिस्सा विशेषज्ञों के अनुसार, चुनाव बाद हिंसा (पोस्ट-पोल वायलेंस) का मुद्दा बंगाल की राजनीति में अहम रहा है। ऐसे में केंद्रीय बलों की सात दिनों तक तैनाती का वादा मतदाताओं में विश्वास बढ़ाने और मतदान प्रतिशत बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
Narendra Modi के चुनावी दौरे के दौरान एक दिलचस्प और मानवीय पल सामने आया, जिसने राजनीति के बीच आम जिंदगी की झलक दिखा दी। West Bengal के जंगलमहल इलाके में जनसभा के बाद पीएम मोदी अचानक एक सड़क किनारे की दुकान पर रुक गए और वहां झालमुड़ी का आनंद लिया। इस घटना के बाद हर कोई जानना चाहता है–आखिर कौन हैं वो दुकानदार विक्रम साव? कौन हैं विक्रम साव? झालमुड़ी बेचने वाले विक्रम साव अचानक सुर्खियों में आ गए, जब प्रधानमंत्री उनकी दुकान पर पहुंचे। विक्रम साव मूल रूप से Gaya (बिहार) के रहने वाले हैं रोज़गार के लिए वे पश्चिम बंगाल के झारग्राम में आकर बस गए यहां वे सड़क किनारे एक छोटी सी दुकान चलाते हैं, जहां वे झालमुड़ी बेचते हैं स्थानीय लोगों के बीच उनकी दुकान पहले से ही काफी मशहूर बताई जाती है एक साधारण दुकानदार के लिए यह पल किसी सपने जैसा था, जिसे वह खुद भी यकीन नहीं कर पा रहे हैं। कैसे हुआ यह खास पल? घटना उस समय की है जब: पीएम मोदी की जनसभा खत्म हो चुकी थी उनका काफिला हेलीपैड की ओर जा रहा था अचानक Jhargram के कॉलेज मोड़ के पास काफिला रुक गया इसके बाद पीएम खुद कार से उतरे और सीधे विक्रम साव की दुकान की ओर बढ़ गए। “भैया, मुझे झालमुड़ी खिलाओ” दुकान पर पहुंचते ही प्रधानमंत्री ने मुस्कुराते हुए कहा: “भैया, मुझे झालमुड़ी खिलाओ… कितने की देते हो?” दुकानदार ने जवाब दिया कि आप जितने का कहें। लेकिन पीएम मोदी ने insist करते हुए कहा कि कीमत बताइए। विक्रम ने कहा: 10 और 20 रुपये पीएम ने अपनी जेब से 10 रुपये निकालकर दिए और उसी कीमत की झालमुड़ी बनवाई दुकानदार पैसे लेने में हिचकिचा रहा था, लेकिन पीएम ने साफ कहा–“ऐसे नहीं चलेगा” और पैसे देकर ही सामान लिया। मजेदार बातचीत और हल्का माहौल झालमुड़ी बनाते समय दुकानदार ने पूछा: “क्या आप प्याज खाते हैं?” इस पर पीएम मोदी ने हंसते हुए जवाब दिया: “हां, प्याज-मिर्च खाता हूं… किसी का सिर नहीं।” यह सुनकर वहां मौजूद लोग ठहाके लगाने लगे और माहौल हल्का-फुल्का हो गया। बच्चों के साथ खास जुड़ाव जैसे ही लोगों को पता चला कि प्रधानमंत्री वहां हैं: महिलाओं और बच्चों की भीड़ जुट गई पीएम मोदी ने बच्चों के हाथों में खुद झालमुड़ी बांटी कई बच्चे आगे बढ़े तो उन्होंने सबको दिया वह दृश्य कुछ ऐसा था मानो कोई नेता नहीं, बल्कि परिवार का कोई सदस्य बच्चों के साथ वक्त बिता रहा हो। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पल इस घटना के बाद: तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए खुद Narendra Modi ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर तस्वीरें शेयर कीं उन्होंने लिखा कि व्यस्त चुनावी कार्यक्रम के बीच यह छोटा सा ब्रेक यादगार रहा क्यों खास है यह घटना? यह सिर्फ एक झालमुड़ी खाने का मामला नहीं है, बल्कि: यह आम लोगों से जुड़ाव का संदेश देता है चुनावी माहौल में एक सॉफ्ट इमेज पेश करता है छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों को राष्ट्रीय चर्चा में ले आता है विक्रम साव जैसे साधारण दुकानदार के लिए यह घटना उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा पल बन गई है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी मुकाबला तेज हो गया है। भाजपा ने महिलाओं को साधने के लिए ‘मातृशक्ति भरोसा कार्ड’ लॉन्च कर बड़ा दांव खेला है, जिसे सीधे तौर पर ममता बनर्जी सरकार की ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना की चुनौती माना जा रहा है। 3000 रुपये मासिक सहायता का वादा कोलकाता में बांग्ला नववर्ष ‘पोइला बोइसाख’ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में स्मृति ईरानी और सुवेंदु अधिकारी ने ‘मातृशक्ति भरोसा कार्ड’ का अनावरण किया। भाजपा ने वादा किया कि राज्य में उनकी सरकार बनने पर हर महिला को बिना भेदभाव के हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। मंच पर दिखी भाजपा की ‘नारी शक्ति’ इस कार्यक्रम में भाजपा के कई प्रमुख नेता और महिला मोर्चा की पदाधिकारी मौजूद रहीं। पार्टी ने इसे महिला सशक्तिकरण के बड़े अभियान के रूप में पेश किया। इसके साथ ही ‘लखपति दीदी’ और एमएसएमई योजनाओं के जरिए महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का भी वादा किया गया। ममता सरकार पर हमला स्मृति ईरानी ने राज्य की कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर टीएमसी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने ‘वन स्टॉप सेंटर’ और ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ के जरिए महिलाओं को न्याय दिलाने का काम किया है, जबकि बंगाल में अपराधियों को संरक्षण मिलता है। सांस्कृतिक मुद्दों पर भी जवाब टीएमसी द्वारा उठाए गए खान-पान और सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी ने कहा कि भाजपा बंगाल की परंपराओं, खासकर मछली खाने की संस्कृति का पूरा सम्मान करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। चुनावी मुकाबला होगा दिलचस्प भाजपा की इस नई योजना ने ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना को सीधी टक्कर दे दी है, जिसमें महिलाओं को 1500 रुपये तक की सहायता मिलती है। ऐसे में आने वाले दिनों में बंगाल की चुनावी जंग और भी रोचक और प्रतिस्पर्धी होने की संभावना है
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव इस बार सिर्फ विकास या वादों का मुद्दा नहीं, बल्कि कुछ लोगों के लिए अपनी पहचान साबित करने की लड़ाई बन गया है। Murshidabad जिले के छह लोगों की कहानी इस सच्चाई को उजागर करती है, जिन्हें पिछले साल कथित तौर पर बांग्लादेशी बताकर सीमा पार भेज दिया गया था। वोट नहीं, पहचान की पुष्टि मिनारुल शेख जैसे लोग इस बार वोट सिर्फ सरकार चुनने के लिए नहीं, बल्कि यह साबित करने के लिए कर रहे हैं कि वे भारतीय नागरिक हैं। आठ महीने की लंबी कानूनी प्रक्रिया और कई सुनवाई के बाद उन्हें फिर से वोटर स्लिप मिली। उनका कहना है कि यह वोट उनके सम्मान और पहचान का जवाब है। डर और संघर्ष की कहानी मुर्शिदाबाद के इन परिवारों के लिए यह चुनाव भावनात्मक और दर्दभरा है। महाराष्ट्र में काम करने गए इन लोगों को पकड़ा गया और बांग्लादेशी करार देकर सीमा पार भेज दिया गया। बाद में पुलिस जांच में उनकी नागरिकता साबित हुई और उन्हें वापस लाया गया, लेकिन उस घटना का डर आज भी कायम है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप इस मुद्दे ने चुनावी माहौल को भी गरमा दिया है। Trinamool Congress (TMC) ने इसे केंद्र सरकार की नीतियों से जोड़ते हुए आलोचना की है, जबकि Bharatiya Janata Party (BJP) ने आरोपों को खारिज किया है और घुसपैठ को बड़ा मुद्दा बताया है। वोटर लिस्ट पर भी सवाल स्थानीय लोगों में डर इस वजह से भी बढ़ा है क्योंकि जिले से लाखों नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। कई परिवारों को आशंका है कि उनके साथ भी ऐसा हो सकता है, जिससे उनकी नागरिकता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
SIR in Bengal: पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान लाखों वोटरों के नाम हटाए जाने को लेकर राजनीति गरमा गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और बीजेपी आमने-सामने हैं। कितने नाम कटे? कुल मिलाकर करीब 91 लाख वोटरों के नाम हटने का दावा लेकिन चुनाव आयोग (EC) ने अभी तक आधिकारिक तौर पर धर्म के आधार पर डेटा जारी नहीं किया TMC का दावा क्या है? हटाए गए नामों में: 63% हिंदू 35% मुस्लिम TMC के अनुसार: पहले चरण में 58 लाख में से 44 लाख हिंदू दूसरे चरण में ज्यादातर नाम हिंदुओं के तीसरे चरण में मुस्लिम नाम ज्यादा, लेकिन कुल मिलाकर हिंदू ज्यादा प्रभावित TMC का आरोप: “घुसपैठियों को ढूंढने के नाम पर गरीब हिंदुओं को भी हटाया गया” BJP का जवाब BJP ने इन आंकड़ों को संदिग्ध बताया कहा: “चुनाव आयोग ने ऐसा कोई डेटा जारी नहीं किया” “TMC के पास ये आंकड़े आए कहां से?” असली विवाद क्या है? SIR का मकसद: वोटर लिस्ट को अपडेट और शुद्ध करना लेकिन आरोप: वैध वोटरों के नाम भी हटाए जा रहे हैं प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी मामला क्यों अहम है? बंगाल में चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में बदलाव का सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ सकता है इसलिए यह मुद्दा राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बन गया है।
कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का खुलकर समर्थन करते हुए बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। ममता को बताया “सुपर टाइगर” आईएएनएस से बातचीत में पप्पू यादव ने ममता बनर्जी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा: “बंगाल की संस्कृति की रक्षा करने वाली, बांग्ला की आवाज-एक ही शेरनी है, ममता दीदी। पूरा बंगाल और बंगाली भावनाएं उनके साथ हैं।” BJP पर तीखा हमला पप्पू यादव ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा: बीजेपी बंगाली संस्कृति, सभ्यता और परंपरा के खिलाफ रही है पार्टी बंगाल में कभी मजबूत स्थिति में नहीं रही “100 जन्म में भी बंगाल की जनता बीजेपी को स्वीकार नहीं करेगी” उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी की जीत रणनीति और साजिश पर आधारित होती है। चुनावी माहौल गर्म पश्चिम बंगाल में दो चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं बीजेपी राज्य में सत्ता में आने का दावा कर रही है वहीं क्षेत्रीय और विपक्षी दल ममता बनर्जी के पक्ष में माहौल बता रहे हैं BJP का पलटवार पप्पू यादव के बयान पर बीजेपी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने कहा: “सुपर टाइगर और शेरनी जैसे जुमलों से जनता प्रभावित नहीं होगी। जिनका खुद का जनाधार नहीं होता, वे दूसरों के सहारे राजनीति करते हैं।” उन्होंने पप्पू यादव के बयान को “हास्यास्पद” और सिर्फ सुर्खियों में रहने की कोशिश बताया।
कोलकाता/तिरुवनंतपुरम: विधानसभा चुनावों के बीच पश्चिम बंगाल और केरल में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। जहां एक ओर बंगाल में गृह मंत्री अमित शाह ने भवानीपुर में रोड शो कर चुनावी माहौल गरमा दिया, वहीं केरल में UDF ने अपना चुनावी मेनिफेस्टो जारी कर कई बड़े वादे किए हैं। भवानीपुर में अमित शाह का शक्ति प्रदर्शन गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कोलकाता के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में रोड शो किया। इस दौरान उनके साथ बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी भी मौजूद रहे, जो इसी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। रैली को संबोधित करते हुए शाह ने कहा: “इस बार बंगाल में बदलाव तय है। किसी को डरने की जरूरत नहीं है, वोटरों को कोई गुंडा नहीं रोक सकता।” उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी का लक्ष्य सिर्फ जीत नहीं, बल्कि “ममता बनर्जी को उनके ही गढ़ में हराना है।” भवानीपुर सीट पर सीधी टक्कर भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी भी चुनाव मैदान में हैं सुवेंदु अधिकारी को बीजेपी ने यहां से उतारा है ममता बनर्जी नंदीग्राम सीट से भी उम्मीदवार हैं इस सीट को लेकर मुकाबला बेहद हाई-प्रोफाइल माना जा रहा है। चुनावी माहौल तेज दोनों राज्यों में चुनावी सरगर्मी चरम पर है: बंगाल में बीजेपी और TMC के बीच सीधी टक्कर केरल में LDF बनाम UDF मुकाबला नेताओं के रोड शो, रैलियां और वादों के जरिए मतदाताओं को लुभाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया समीकरण उभरता दिख रहा है। तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित नेता हुमायूं कबीर ने असदुद्दीन ओवैसी के साथ हाथ मिलाकर आगामी विधानसभा चुनाव 2026 के लिए बड़ा राजनीतिक गठबंधन किया है। यह गठबंधन ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और हुमायूं कबीर की पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी के बीच हुआ है, जिसका उद्देश्य राज्य में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के खिलाफ तीसरा विकल्प खड़ा करना है। हैदराबाद से गठबंधन का ऐलान इस राजनीतिक गठबंधन की घोषणा हैदराबाद में एक सभा के दौरान ओवैसी ने की। उन्होंने कहा कि यह गठबंधन बंगाल में गरीबों, वंचितों और अल्पसंख्यकों के मुद्दों को मजबूती से उठाएगा। ओवैसी ने इसे “अन्याय और अभाव के खिलाफ संयुक्त लड़ाई” बताया। लंबे समय से सहयोगी की तलाश हुमायूं कबीर ने पिछले वर्ष 22 दिसंबर को अपनी पार्टी का गठन किया था और तब से ही वे एक मजबूत सहयोगी की तलाश में थे। उन्होंने वाम दलों और अन्य क्षेत्रीय दलों से भी संपर्क साधा, लेकिन बात नहीं बन पाई। आखिरकार AIMIM के साथ यह गठबंधन आकार ले पाया। सीट शेयरिंग पर नजर गठबंधन के बाद अब सबसे अहम सवाल सीट बंटवारे को लेकर है। हुमायूं कबीर पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि उनकी पार्टी 182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि लगभग 150 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम भी घोषित किए जा चुके हैं। बताया जा रहा है कि AIMIM और आम जनता उन्नयन पार्टी के बीच सीटों को लेकर बातचीत जारी है और जल्द ही अंतिम फार्मूला सामने आ सकता है। किन क्षेत्रों पर खास फोकस AIMIM ने पिछले कुछ वर्षों में मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत की है। ऐसे में यह गठबंधन इन क्षेत्रों में चुनावी समीकरण बदल सकता है। क्या बदलेगा चुनावी गणित? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह गठबंधन बंगाल में तीसरे मोर्चे की संभावनाओं को मजबूत कर सकता है, हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव चुनाव परिणामों में ही स्पष्ट होगा।
पश्चिम बंगाल की सियासत में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने 291 उम्मीदवारों की सूची जारी कर सभी को चौंका दिया है। इस सूची की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पार्टी ने 75 मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिए, जिससे साफ संकेत मिलता है कि TMC सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) से निपटने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रही है। भवानीपुर बना सबसे बड़ा रणक्षेत्र इस चुनाव का सबसे बड़ा मुकाबला भवानीपुर सीट पर देखने को मिलेगा, जहां ममता बनर्जी खुद चुनाव लड़ेंगी। उनके सामने होंगे भाजपा के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी, जिन्होंने 2021 में नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराया था। अब भवानीपुर में यह मुकाबला सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि “नंदीग्राम का हिसाब” माना जा रहा है। 75 विधायकों का टिकट कटा, क्यों लिया बड़ा जोखिम? TMC ने 135 मौजूदा विधायकों को दोबारा मौका दिया, लेकिन 75 को बाहर कर दिया। यह फैसला इन कारणों से अहम माना जा रहा है: सत्ता विरोधी माहौल को कम करना जमीनी स्तर पर सक्रिय नेताओं को मौका देना बूथ मैनेजमेंट को मजबूत करना यह साफ संदेश है कि अब “स्टार पावर” नहीं, बल्कि “ग्राउंड पावर” चुनाव जिताएगी। बड़े चेहरों की विदाई इस बार कई बड़े और चर्चित नामों का पत्ता कट गया, जिनमें शामिल हैं: पार्थ चटर्जी चिरंजीत चक्रवर्ती परेश पाल पार्टी ने साफ कर दिया है कि सिर्फ लोकप्रियता या ग्लैमर अब टिकट की गारंटी नहीं है। नए चेहरे और ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर जोर TMC ने इस बार संतुलित सामाजिक समीकरण (Social Engineering) पर खास ध्यान दिया है: महिलाएं: 52 उम्मीदवार SC/ST: 95 उम्मीदवार अल्पसंख्यक: 47 उम्मीदवार नए चेहरे: 72 नए उम्मीदवारों में ओलंपियन स्वप्ना बर्मन और पूर्व क्रिकेटर शिव शंकर पॉल जैसे नाम शामिल हैं। TMC की रणनीति: ‘ग्लैमर आउट, संगठन इन’ इस बार पार्टी ने साफ तौर पर रणनीति बदली है: ग्लैमर से दूरी: फिल्मी और चर्चित चेहरों को कम महत्व संगठन पर फोकस: बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को टिकट युवा नेतृत्व: नई पीढ़ी को मौका पार्टी का लक्ष्य इस चुनाव में 226+ सीटें जीतकर लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी करना है। क्या कहती है सियासी तस्वीर? भवानीपुर की सीट पर ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी की सीधी टक्कर इस चुनाव को हाई-वोल्टेज बना रही है। एक तरफ “दीदी” की प्रतिष्ठा दांव पर है, तो दूसरी ओर भाजपा इस सीट को जीतकर बंगाल की राजनीति में बड़ा संदेश देना चाहती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।