Bengal political news

Abhishek Banerjee speaks to media after police search at his Kolkata residence as Mamata Banerjee arrives
अभिषेक बनर्जी के घर तड़के पुलिस की छापेमारी, ममता बनर्जी पहुंचीं; बोले- “क्या मैंने कुछ छिपाया है?”

बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल, अभिषेक बनर्जी के आवास पर घंटों चली तलाशी पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को उस समय हलचल मच गई जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के कोलकाता स्थित आवास पर पुलिस ने कई घंटों तक तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई के बाद टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी भी तुरंत अपने भतीजे के घर पहुंचीं, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया। सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई अभिषेक बनर्जी के करीबी सहयोगी और निजी सहायक माने जाने वाले सुमित रॉय से जुड़े एक मामले के सिलसिले में की गई। सुबह 3 बजे शुरू हुई कार्रवाई जानकारी के मुताबिक, शनिवार तड़के करीब 3 बजे पश्चिम मेदिनीपुर के शालबनी थाना की टीम कोलकाता पुलिस और केंद्रीय बलों की मौजूदगी में अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पहुंची। पुलिसकर्मियों ने घर के विभिन्न हिस्सों की जांच की और करीब चार घंटे से अधिक समय तक तलाशी अभियान जारी रखा। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई थी और घर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। तलाशी के बाद अभिषेक बनर्जी का पलटवार तलाशी पूरी होने के बाद मीडिया से बातचीत में अभिषेक बनर्जी ने जांच एजेंसियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कुछ छिपाया गया होता तो एजेंसियां खुद बता सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने घर का ताला तोड़कर प्रवेश किया और सभी कमरों की जांच की। साथ ही उन्होंने यह भी खारिज कर दिया कि उनके सहयोगी को घर में छिपाकर रखा गया था। ममता बनर्जी की अचानक एंट्री तलाशी अभियान की खबर फैलते ही टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी सीधे अभिषेक बनर्जी के आवास पहुंचीं। बताया जा रहा है कि उन्होंने कुछ समय तक वहां मौजूद रहकर स्थिति की जानकारी ली। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी की यह त्वरित प्रतिक्रिया इस मामले की संवेदनशीलता और पार्टी के भीतर इसके राजनीतिक प्रभाव को दर्शाती है। टीएमसी ने बताया राजनीतिक बदले की कार्रवाई घटना के बाद तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया। पार्टी ने आरोप लगाया कि विपक्षी ताकतें जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर टीएमसी नेताओं को निशाना बना रही हैं। सीआईडी जांच और कानूनी दबाव भी जारी यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अभिषेक बनर्जी हाल ही में विधानसभा हस्ताक्षर जालसाजी मामले में सीआईडी के समक्ष कई घंटों तक पूछताछ का सामना कर चुके हैं। इस मामले में उन्हें अदालत से अंतरिम राहत मिली हुई है, लेकिन जांच अभी भी जारी है। सीआईडी अधिकारियों ने उन्हें आगे की पूछताछ के लिए फिर से बुलाने के संकेत दिए हैं। मदन मित्रा पर भी ईडी की कार्रवाई इसी बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने टीएमसी विधायक मदन मित्रा से जुड़े कई ठिकानों पर भी छापेमारी की। यह कार्रवाई कथित नगर निकाय भर्ती घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ी बताई जा रही है। जांच एजेंसियों का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं और रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच की जा रही है। पार्टी के भीतर भी बढ़ रहा दबाव टीएमसी पहले से ही आंतरिक मतभेदों और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। हाल के दिनों में पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा अभिषेक बनर्जी पर सार्वजनिक टिप्पणी किए जाने के बाद संगठन के भीतर असहज स्थिति बनी हुई है। हालांकि बाद में दोनों नेताओं ने विवाद को कम करने की कोशिश की, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी पर कानूनी और राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। आगे क्या? अभिषेक बनर्जी के घर पर हुई तलाशी, ईडी की समानांतर कार्रवाई और जारी जांचों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।  

surbhi जून 13, 2026 0
Shrabanti Bengal politics
टॉलीवुड अभिनेत्री श्राबंती ने खोले बंगाल की राजनीति के अंदरूनी राज

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव के बाद टॉलीवुड अभिनेत्री श्राबंती चटर्जी ने बड़ा खुलासा किया है। कभी भारतीय जनता पार्टी छोड़कर All India Trinamool Congress (TMC) के मंचों पर नजर आने वाली श्राबंती ने अब कहा है कि कलाकारों पर सत्ता पक्ष का दबाव रहता था, जिसके कारण उन्हें मजबूरी में टीएमसी के कार्यक्रमों में शामिल होना पड़ता था।   कलाकारों पर दबाव होने का दावा श्राबंती चटर्जी ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले कलाकारों को कई बार राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार समझौता करना पड़ता है। उन्होंने स्वीकार किया कि उस समय सत्ता पक्ष का दबाव इतना अधिक था कि उन्हें कई आयोजनों में जाना पड़ा। अभिनेत्री ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत और Suvendu Adhikari के मुख्यमंत्री बनने पर खुशी जाहिर की।   ‘अभया’ को न्याय मिलने की उम्मीद अभिनेत्री ने आरजी कर केस की पीड़िता ‘अभया’ का जिक्र करते हुए कहा कि सत्ता परिवर्तन की खबर सुनते ही उन्हें सबसे पहले उसकी मां का चेहरा याद आया। एक मां होने के नाते वह चाहती हैं कि राज्य में ऐसी सरकार हो जो महिलाओं को सुरक्षा और पीड़ितों को न्याय दिला सके। उन्होंने कहा कि अगर यह बदलाव बंगाल के हित में है तो वह इसका समर्थन करती हैं।   पार्थ चटर्जी पर साधा निशाना श्राबंती ने 2021 विधानसभा चुनाव की अपनी हार को याद करते हुए कहा कि उन्होंने बेहाला पश्चिम सीट से चुनाव लड़ा था, जहां उन्हें Partha Chatterjee से हार का सामना करना पड़ा। बाद में जब पार्थ चटर्जी के घर से भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए, तब उन्हें काफी अफसोस हुआ। उन्होंने कहा कि काश जनता पहले सच्चाई समझ पाती।   भाजपा में वापसी की अटकलें तेज श्राबंती के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या वह एक बार फिर भाजपा में सक्रिय राजनीति कर सकती हैं। हालांकि उन्होंने इस पर सीधे तौर पर कोई जवाब नहीं दिया।

Unknown मई 12, 2026 0
Sujit Singh arrested
बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत अवैध भर्ती मामले में गिरफ्तार, ED की कार्रवाई

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और TMC नेता सुजीत बोस को नगर निगम भर्ती घोटाले में ईडी ने गिरफ्तार कर लिया है। सुजीत अपने बेटे समुद्र बोस के साथ सोमवार सुबह करीब 10:30 बजे ED ऑफिस पहुंचे थे। उनसे करीब 10 घंटे पूछताछ की गई, फिर देर रात उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 150 लोगों को अवैध बहाल कराने का आरोप सुजीत बोस पर 2014-2018 के बीच साउथ दमदम नगर निगम में करीब 150 लोगों की अवैध भर्ती कराने का आरोप है। कहा जाता है कि सुजीत ने इसके बदले पैसे और फ्लैट लिए थे। सुजीत उस वक्त दमदम नगर पालिका के उपाध्यक्ष थे। इस बार चुनाव हार गये हैं सुजीत बिधाननगर से तीन बार के विधायक रहे सुजीत बोस हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के शरदवत मुखर्जी से 37,000 से अधिक वोटों के अंतर से हार गए थे। 11 दिन में दो बार पूछताछ, फिर गिरफ्तारी सुजीत बोस को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ED के कई नोटिस मिले। जिनमें से एक 6 अप्रैल को मिला था। इसी दिन नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे। उन्होंने पहले कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और चुनाव प्रचार में अपनी व्यस्तता का हवाला देते हुए ED के सामने पेश होने से छूट मांगी थी। चुनावों के बाद बोस 1 मई को CGO कॉम्प्लेक्स में ED अधिकारियों के सामने पेश हुए। 11 दिन बाद दोबारा पेशी में सुजीत को अरेस्ट कर लिया गया। छापेमारी भी हो चुकी कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देशों पर CBI की तरफ से FIR दर्ज किए जाने के बाद ED ने 2 जनवरी 2024 और अक्टूबर 2025 में सुजीत बोस के ठिकानों पर छापेमारी भी की थी।

Unknown मई 12, 2026 0
West Bengal new government
पश्चिम बंगाल में नई सरकार की तैयारी: 9 मई को शपथ ग्रहण समारोह

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद भाजपा अब सरकार गठन की तैयारियों में जुट गई है। पार्टी की ओर से घोषणा की गई है कि नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को Kolkata के प्रतिष्ठित Brigade Parade Ground में सुबह 10 बजे आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है।   बड़े नेताओं की मौजूदगी, भव्य आयोजन की तैयारी सूत्रों के अनुसार, इस शपथ समारोह में प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री और एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हो सकते हैं। कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं। बताया जा रहा है कि नए मुख्यमंत्री के साथ करीब दो दर्जन मंत्री भी शपथ ले सकते हैं।   चुनाव परिणाम ने बदली सत्ता की तस्वीर हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, जबकि सत्तारूढ़ All India Trinamool Congress को सिर्फ 80 सीटों पर संतोष करना पड़ा। इस जीत के साथ राज्य में तृणमूल कांग्रेस के 15 साल लंबे शासन का अंत हो गया है।   टैगोर जयंती के दिन शपथ दिलचस्प बात यह है कि शपथ ग्रहण समारोह का दिन Rabindranath Tagore की जयंती के आसपास रखा गया है। इसे सांस्कृतिक और राजनीतिक संदेश देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।   मुख्यमंत्री चयन पर नजर मुख्यमंत्री पद के लिए विधायक दल की बैठक जल्द होने वाली है। इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। माना जा रहा है कि जल्द ही नए मुख्यमंत्री के नाम की औपचारिक घोषणा भी हो जाएगी।

Unknown मई 6, 2026 0
Bengal new government
बंगाल में नई सरकार का रास्ता साफ, EC ने जारी की अहम अधिसूचना

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब नई सरकार के गठन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। Election Commission of India (निर्वाचन आयोग) ने राज्य में नई विधानसभा के गठन के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। यह अधिसूचना राज्यपाल को भेजी गई है, जिसके साथ ही चुनाव प्रक्रिया को आधिकारिक रूप से पूर्ण माना जा रहा है।   संवैधानिक प्रक्रिया का अहम चरण पूरा निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद अधिसूचना जारी करना एक महत्वपूर्ण संवैधानिक कदम है। इसके साथ ही आयोग की भूमिका इस चुनाव प्रक्रिया में पूरी हो गई है और अब सरकार गठन की आगे की कार्रवाई शुरू हो सकती है। आने वाले दिनों में निर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण और नई सरकार का गठन किया जाएगा।   निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव का दावा आयोग ने कहा कि मतदान से लेकर मतगणना तक पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई गई। अधिकारियों के मुताबिक सभी नियमों और प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया गया, ताकि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे।   भाजपा की ऐतिहासिक जीत, बदला सत्ता का समीकरण इस बार के चुनाव में Bharatiya Janata Party (भाजपा) ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। इस जीत के साथ ही Trinamool Congress (टीएमसी) का करीब 15 वर्षों से चला आ रहा शासन समाप्त हो गया है।   अब आगे क्या? अधिसूचना जारी होने के बाद अब राज्यपाल नई सरकार बनाने के लिए बहुमत दल को आमंत्रित करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री पद की शपथ और मंत्रिमंडल का गठन होगा। इस तरह पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

Unknown मई 6, 2026 0
Bengal bulldozer controversy
बंगाल में सियासी बवाल: TMC ने BJP पर दफ्तर पर बुलडोजर चलाने का लगाया आरोप

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक तनाव थमता नजर नहीं आ रहा है। टीएमसी ने आरोप लगाया है कि बीजेपी के समर्थकों ने कोलकाता के न्यू मार्केट इलाके में बुलडोजर चलाकर तोड़फोड़ की और पार्टी कार्यालय को निशाना बनाया। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया गया है, जिसने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।   वीडियो में क्या दिखा और क्या हैं आरोप टीएमसी द्वारा साझा किए गए वीडियो में एक बुलडोजर भीड़ के बीच दुकान तोड़ता नजर आता है। आसपास मौजूद लोग नारेबाजी करते और शोर-शराबा करते दिख रहे हैं। टीएमसी का दावा है कि बीजेपी समर्थकों ने न सिर्फ दुकानों को नुकसान पहुंचाया, बल्कि पार्टी के स्थानीय दफ्तर पर भी हमला किया। पार्टी ने इस घटना को “खुली गुंडागर्दी” करार दिया है।   ‘परिवर्तन’ बनाम ‘बुलडोजर’: टीएमसी का तंज टीएमसी ने बीजेपी के चुनावी नारे “परिवर्तन” पर तंज कसते हुए कहा कि अब यह बदलाव “बुलडोजर” के रूप में दिखाई दे रहा है। पार्टी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि चुनाव से पहले बीजेपी “भय खत्म, भरोसा शुरू” की बात कर रही थी, लेकिन अब हालात उलट हो गए हैं—“भरोसा खत्म और बुलडोजर शुरू”।   केंद्र और सुरक्षा बलों पर सवाल टीएमसी ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं को खुली छूट दी गई है। साथ ही, केंद्रीय बलों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। पार्टी का कहना है कि सुरक्षा बल मूकदर्शक बने रहे और समय पर हस्तक्षेप नहीं किया।   पहले भी हो चुकी हैं हिंसक घटनाएं राज्य में हाल के दिनों में राजनीतिक हिंसा की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें अलग-अलग जिलों में आगजनी और कार्यकर्ताओं की मौत की खबरें शामिल हैं। इन घटनाओं ने बंगाल की राजनीति को और संवेदनशील बना दिया है।

Unknown मई 6, 2026 0
Bengal Elections
Bengal Elections: बेहाला में शाह ने कहा - अगर भाजपा  सत्ता में आती है तो, चुनाव बाद भी तैनात रहेंगे सेंट्रल फोर्सेज

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के प्रचार के अंतिम दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता के बेहाला में भव्य रोड शो और जनसभा के दौरान बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने मतदाताओं को सुरक्षा का भरोसा दिलाते हुए घोषणा की कि यदि भाजपा  सत्ता में आती है, तो चुनाव परिणाम के बाद भी सात दिनों तक केंद्रीय सुरक्षा बल राज्य में तैनात रहेंगे।   मतदाताओं को सुरक्षा का भरोसा अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि बंगाल में चुनाव के दौरान और उसके बाद किसी भी प्रकार की हिंसा को रोकने के लिए यह कदम उठाया जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे 29 अप्रैल को बिना किसी डर के मतदान करें और लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करें। शाह ने स्पष्ट कहा कि “किसी भी गुंडे से डरने की जरूरत नहीं है।”   चुनाव आयोग की तैयारियों का जिक्र   गृह मंत्री ने यह भी कहा कि Election Commission of India ने मतदान को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। इसके बावजूद भाजपा सरकार बनने की स्थिति में अतिरिक्त सुरक्षा के तौर पर केंद्रीय बलों की तैनाती जारी रखी जाएगी।   रोड शो में उमड़ा जनसैलाब कोलकाता का बेहाला क्षेत्र रोड शो के दौरान पूरी तरह राजनीतिक रंग में रंगा नजर आया। सड़कों पर भारी संख्या में भाजपा समर्थक जुटे और ‘जय श्रीराम’ व ‘भारत माता की जय’ के नारों से माहौल गूंज उठा। अमित शाह खुले वाहन में सवार होकर लोगों का अभिवादन करते नजर आए।   सियासी रणनीति का हिस्सा विशेषज्ञों के अनुसार, चुनाव बाद हिंसा (पोस्ट-पोल वायलेंस) का मुद्दा बंगाल की राजनीति में अहम रहा है। ऐसे में केंद्रीय बलों की सात दिनों तक तैनाती का वादा मतदाताओं में विश्वास बढ़ाने और मतदान प्रतिशत बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

Unknown अप्रैल 27, 2026 0
Bengal Elections
बंगाल चुनाव : “वोट नहीं, पहचान की लड़ाई है ” – मुर्शिदाबाद के लोगों का दर्दनाक सच

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव इस बार सिर्फ विकास या वादों का मुद्दा नहीं, बल्कि कुछ लोगों के लिए अपनी पहचान साबित करने की लड़ाई बन गया है। Murshidabad जिले के छह लोगों की कहानी इस सच्चाई को उजागर करती है, जिन्हें पिछले साल कथित तौर पर बांग्लादेशी बताकर सीमा पार भेज दिया गया था।   वोट नहीं, पहचान की पुष्टि मिनारुल शेख जैसे लोग इस बार वोट सिर्फ सरकार चुनने के लिए नहीं, बल्कि यह साबित करने के लिए कर रहे हैं कि वे भारतीय नागरिक हैं। आठ महीने की लंबी कानूनी प्रक्रिया और कई सुनवाई के बाद उन्हें फिर से वोटर स्लिप मिली। उनका कहना है कि यह वोट उनके सम्मान और पहचान का जवाब है।    डर और संघर्ष की कहानी मुर्शिदाबाद के इन परिवारों के लिए यह चुनाव भावनात्मक और दर्दभरा है। महाराष्ट्र में काम करने गए इन लोगों को पकड़ा गया और बांग्लादेशी करार देकर सीमा पार भेज दिया गया। बाद में पुलिस जांच में उनकी नागरिकता साबित हुई और उन्हें वापस लाया गया, लेकिन उस घटना का डर आज भी कायम है।   राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप इस मुद्दे ने चुनावी माहौल को भी गरमा दिया है। Trinamool Congress (TMC) ने इसे केंद्र सरकार की नीतियों से जोड़ते हुए आलोचना की है, जबकि Bharatiya Janata Party (BJP) ने आरोपों को खारिज किया है और घुसपैठ को बड़ा मुद्दा बताया है।   वोटर लिस्ट पर भी सवाल स्थानीय लोगों में डर इस वजह से भी बढ़ा है क्योंकि जिले से लाखों नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। कई परिवारों को आशंका है कि उनके साथ भी ऐसा हो सकता है, जिससे उनकी नागरिकता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

Unknown अप्रैल 13, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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