रांची। वित्तीय वर्ष 2025-26 समाप्त होने के साथ ही झारखंड सरकार के खर्च और राजस्व संग्रह को लेकर कई अहम बातें सामने आई हैं। जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार अपने कुल बजट का केवल 80 फीसदी ही खर्च कर पाई, जबकि लगभग 29 हजार करोड़ रुपये सरेंडर करने पड़े। वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन सरकारी खजाने से करीब 3,616 करोड़ रुपये निकाले गए, जबकि पूरे मार्च महीने में लगभग 19 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए। खर्च में कमी, केंद्र पर जिम्मेदारी वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि योजना मद की लगभग 80 प्रतिशत राशि खर्च की गई है। उनका दावा है कि यदि केंद्र सरकार से समय पर सहयोग मिलता, तो सरकार बजट के अनुरूप और बेहतर खर्च कर सकती थी। उन्होंने बताया कि राज्य को करीब 13,000 करोड़ रुपये अनुदान और टैक्स हिस्सेदारी के रूप में नहीं मिले, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ा। बीजेपी ने सरकार को घेरा बजट के अनुरूप खर्च नहीं होने पर विपक्षी दल भाजपा ने सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा ने कहा कि राज्य सरकार भारी-भरकम बजट बनाकर जनता को भ्रमित करती है, लेकिन जमीन पर खर्च और विकास कार्यों में गंभीर कमी दिखती है। उनका आरोप है कि केंद्र से मिली राशि भी राज्य सरकार पूरी तरह खर्च नहीं कर पा रही है। कुछ विभागों ने किया बेहतर प्रदर्शन हालांकि, राजस्व वसूली के मामले में कुछ विभागों ने अच्छा प्रदर्शन किया। खान विभाग ने रिकॉर्ड 18,508 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया, जिसमें 7,454.30 करोड़ रुपये सेस और 11,054.27 करोड़ रुपये रॉयल्टी से प्राप्त हुए। उत्पाद विभाग ने शराब से 4,020 करोड़ रुपये कमाए, जो लक्ष्य से 135 करोड़ अधिक है। वहीं, परिवहन विभाग ने 2,196.66 करोड़ रुपये की वसूली की। बड़ा बजट, अधूरा खर्च राज्य सरकार ने 2025-26 के लिए 1.45 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। इसमें महिला एवं बाल विकास और मैया सम्मान योजना पर सबसे अधिक आवंटन किया गया था, लेकिन खर्च में कमी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
रांची। राजधानी रांची के रातू इलाके में एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ, जिसमें झारखंड पुलिस की महिला कांस्टेबल रंजीता एक्का की मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब वह हाईकोर्ट में ड्यूटी के लिए घर से निकली थीं। हादसे का विवरण जानकारी के अनुसार, रांची के रातू थाना क्षेत्र के हाजी चौक पर स्कूटी सवार रंजीता अचानक डिसबैलेंस होकर सड़क पर गिर गईं। इसी दौरान एक अज्ञात वाहन ने उन्हें कुचल दिया और चालक मौके से फरार हो गया। गंभीर चोट लगने के कारण उन्हें तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस और परिवार की प्रतिक्रिया रांची पुलिस ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। रातू थाना प्रभारी आदिकान्त महतो ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और जल्द ही जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी। मृतक कांस्टेबल सिमडेगा जिला बल की थीं और वर्तमान में झारखंड हाईकोर्ट में डेपुटेशन पर तैनात थीं। पति की भी दुखद मौत सूत्रों के अनुसार, रंजीता के पति भी झारखंड पुलिस में थे और उनकी मौत भी एक सड़क हादसे में ही हो गई थी। पति की मृत्यु के बाद अनुकंपा के आधार पर रंजीता को पुलिस में कांस्टेबल का पद मिला था। अब रंजीता की मौत ने उनके परिवार पर एक बार फिर गहरा सदमा डाल दिया है। नतीजा रांची में इस दुखद घटना ने न केवल उनके परिवार को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि पुलिस विभाग को भी स्तब्ध कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि सड़क सुरक्षा और वाहन चालकों की जिम्मेदारी को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
चाईबासा। झारखंड के चाईबासा जिले में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा मामला मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बरकुंडिया गांव के तुरामडीह टोला का है, जहां बीती रात एक जंगली हाथी ने हमला कर 56 वर्षीय महिला पुजारी चांदो देवी की जान ले ली। इस हमले में उनके साथ मौजूद एक अन्य पुजारी लखन कुदादा गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका अस्पताल में इलाज जारी है। झोपड़ी में सो रही थीं चांदो देवी, अचानक टूट पड़ा हाथी जानकारी के अनुसार, तांतनगर प्रखंड के कुम्बराम गांव की रहने वाली चांदो देवी पूजा-पाठ करती थीं। सोमवार रात वह बरकुंडिया गांव की एक मंदिरनुमा झोपड़ी में भोजन करने के बाद सो रही थीं। इसी दौरान जंगल की ओर से आया एक जंगली हाथी अचानक झोपड़ी तक पहुंच गया और उसने चांदो देवी को सूंड से उठाकर जमीन पर पटक दिया। हमला इतना खतरनाक था कि उनकी हालत मौके पर ही गंभीर हो गई। साथी पुजारी ने भागकर बचाई जान, ग्रामीणों ने मशाल से खदेड़ा घटना के समय वहां मौजूद लखन कुदादा पर भी हाथी ने हमला किया, लेकिन वह किसी तरह भागकर झाड़ियों में छिप गए और अपनी जान बचाई। हाथी के हमले के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने टॉर्च, मशाल और शोर-शराबे की मदद से हाथी को खदेड़ने की कोशिश की, जिसके बाद वह वहां से भागा। अस्पताल पहुंचने से पहले मौत, इलाके में दहशत घटना के बाद ग्रामीणों ने चांदो देवी और घायल पुजारी को सदर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन रास्ते में ही चांदो देवी की मौत हो गई। मंगलवार सुबह वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और हाथी को जंगल की ओर खदेड़ा। विभाग ने पीड़ित परिवार को मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। तीन महीने में 25 मौतें, गांवों में डर का माहौल पश्चिमी सिंहभूम जिले में हाथियों के हमले की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पिछले तीन महीनों में 25 लोगों की मौत हो चुकी है। जंगलों के सिमटने और हाथियों के गांवों की ओर बढ़ने से मानव-हाथी संघर्ष गंभीर होता जा रहा है। इस घटना के बाद आसपास के गांवों में भारी दहशत है और लोग रात भर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं।
रांची। झारखंड पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों से अंगरक्षकों का ब्योरा मांगा है। सभी जिलों के एसपी को 24 घंटे में जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। नागरिकों और अन्य खास लोगों को दिये गए अंगरक्षकों का पूरा ब्योरा देने को कहा गया है। इसे लेकर डीजीपी कार्यालय से आधिकारिक पत्र जारी किया गया है। सभी एसएसपी और एसपी को भेजा गया निर्देशः यह आदेश सभी SSP और SP को भेजा गया है। पत्र में साफ कहा गया है कि जिलों में जिन विशिष्ट और अति-विशिष्ट लोगों को अंगरक्षक दिए गए हैं, उनकी पूरी जानकारी तुरंत उपलब्ध कराई जाए। क्या-क्या जानकारी देनी होगीः पुलिस मुख्यालय ने इसके लिए एक तय फॉर्मेट भी जारी किया है, जिसमें अधिकारियों को विस्तार से जानकारी देनी होगी। इसमें यह बताना होगा कि किस व्यक्ति को अंगरक्षक दिया गया है, कितने अंगरक्षक तैनात हैं, उनकी तैनाती कब से है, उनके पास कौन-कौन से हथियार हैं और किस आदेश के तहत यह सुरक्षा दी गई है। यानी वीआईपी सुरक्षा से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी एक साथ मांगी गई है। 24 घंटे की सख्त समय सीमाः इस आदेश की खास बात यह है कि जानकारी देने के लिए सिर्फ 24 घंटे का समय दिया गया है। यानी सभी जिलों को तुरंत अपने-अपने स्तर पर डेटा जुटाकर पुलिस मुख्यालय को भेजना होगा। क्यों मांगी गई यह रिपोर्टः हालांकि पत्र में सीधे वजह नहीं बताई गई है, लेकिन माना जा रहा है कि वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और पारदर्शिता लाने के लिए यह कदम उठाया गया है। अक्सर यह सवाल उठता रहा है कि किन लोगों को किस आधार पर सुरक्षा दी जाती है और कितने पुलिसकर्मी इसमें लगे रहते हैं। ऐसे में यह रिपोर्ट आगे की नीति तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। पुलिस मुख्यालय की नजर अब वीआईपी सुरक्षा परः इस आदेश से साफ संकेत मिल रहे हैं कि पुलिस मुख्यालय अब वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर है। आने वाले समय में इसमें बदलाव या सख्ती भी देखने को मिल सकती है।
रांची। झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को गति देने के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में सरकार ने खजाना खोल दिया है। राज्य के 4345 पंचायतों को विकास कार्यों के लिए बड़ी राशि उपलब्ध कराई गई है। 15वें वित्त आयोग के तहत केंद्र सरकार से झारखंड को इस वर्ष के अंत तक करीब 2254 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं, जो राज्य गठन के बाद अब तक की सबसे अधिक राशि है। इस राशि के आधार पर देखा जाए तो प्रत्येक पंचायत को औसतन करीब 51 लाख 80 हजार रुपये मिलेंगे। पहली बार पंचायतों को अनुदानः खास बात यह है कि राज्य वित्त आयोग की ओर से भी पहली बार पंचायतों को अनुदान दिया गया है, जो ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। पिछले वर्षों के मुकाबले ज्यादा राशि मिलीः ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह के अनुसार, इस राशि को प्राप्त करने के लिए केंद्र सरकार के साथ लंबी प्रक्रिया, लगातार पत्राचार और उच्चस्तरीय बैठकों से गुजरना पड़ा। इसके बाद ही यह संभव हो सका। पिछले वर्षों के मुकाबले इस बार राशि में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में 624.50 करोड़, 2022-23 में 1271 करोड़, 2023-24 में 1300 करोड़, 2024-25 में 653.50 करोड़ और अब 2025-26 में यह बढ़कर 2254 करोड़ रुपये हो गई है।
धनबाद। झारखंड के धनबाद जिले के कतरास के सोनारडीह ओपी क्षेत्र अंतर्गत टंडाबार बस्ती में भू-धंसान हुआ है। इसमें दो घर जमींदोज हो गये, जबकि 3 लोगों की जान चली गई। बताया जा रहा है कि अवैध खनन के कारण यह भू-धंसान हुआ। 3 शव बरामदः इस दर्दनाक भू-धंसान हादसे के बाद चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन में तीन लोगों के शव मलबे से बरामद किए गए। यह अभियान देर रात करीब ढाई से तीन बजे तक जारी रहा। मलबे से जिन लोगों के शव निकाले गए, उनकी पहचान मनोहर उरांव, उनकी बेटी गीता देवी और सरिता देवी के रूप में हुई है। हादसे में मनोहर उरांव का घर पूरी तरह धंस हो गया, जिसके नीचे दबकर तीनों की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, घटना के समय मनोहर उरांव अपनी बेटी गीता देवी के साथ घर में मौजूद थे। उसी दौरान किसी काम से सरिता देवी उनके घर आई हुई थीं। अचानक हुए भू-धंसान ने तीनों को संभलने का मौका तक नहीं दिया और वे मलबे के नीचे दब गए। पत्नी घर में नहीं थीः मृतक की पत्नी छोटू देवी ने बताया कि हादसे के समय वह घर पर नहीं थीं और पड़ोस में गई हुई थीं। उनके अनुसार, पति, बेटी और सरिता घर के अंदर ही थे, जो इस दुर्घटना की चपेट में आ गए। रेस्क्यू टीम ने काफी मशक्कत के बाद तीनों के शव बाहर निकाले। लोगों में आक्रोशः वहीं, सरिता देवी की बेटी ने भी बताया कि उनकी मां मनोहर उरांव के घर गई थीं और उसी दौरान यह हादसा हो गया। काफी देर बाद रात में रेस्क्यू अभियान चलाकर शवों को बाहर निकाला जा सका। घटना के बाद परिजनों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया होता, तो शायद तीनों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
रामगढ़। झारखंड के रामगढ़ जिले के रजरप्पा थाना क्षेत्र में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। 3 युवकों ने इस घटना को अंजाम दिया। तीनों को ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद परिजनों ने थाना में आवेदन देकर मामला दर्ज कराया, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। सुनसान जगह पर वारदातः जानकारी के अनुसार, 30 मार्च की शाम बारलोंग इलाके के एक सुनसान स्थान पर इस वारदात को अंजाम दिया गया। पीड़िता के साथ तीन युवकों ने जबरदस्ती की। घटना के बाद युवती ने अपने परिजनों को पूरी बात बताई, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। 24 घंटे के अंदर तीनों आरोपी गिरफ्तारः मामला सामने आते ही रजरप्पा थाना पुलिस हरकत में आ गई। थाना प्रभारी कृष्ण कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई और चितरपुर इलाके में छापेमारी कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों को पूछताछ के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। कौन हैं आरोपीः पुलिस ने जिन तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान अयान अनवर (निवासी रहमत नगर, लाइनपार, चितरपुर), मो. तौफिक (निवासी ईदगाह मोहल्ला, चितरपुर) और मो. असफाक (निवासी एलबी रोड, चितरपुर) के रूप में हुई है।
रांची। प्रवर्तन निदेशालय (ED) में बड़े स्तर पर हुए तबादलों के बीच झारखंड से जुड़ा एक अहम बदलाव सामने आया है। ईडी रांची जोनल ऑफिस में अब प्रभाकर प्रभात को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, अब तक रांची में ज्वाइंट डायरेक्टर के पद पर तैनात अजय लुहाच का तबादला रायपुर कर दिया गया है। इस संबंध में एजेंसी की ओर से आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। रायपुर से रांची पहुंचे प्रभाकर प्रभात ईडी के ताजा ट्रांसफर ऑर्डर के तहत कई राज्यों में अधिकारियों की पोस्टिंग बदली गई है। इसी क्रम में प्रभाकर प्रभात को रायपुर से रांची भेजा गया है। उन्हें अब रांची जोनल ऑफिस का नया ज्वाइंट डायरेक्टर बनाया गया है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब झारखंड में ईडी की कई जांचें और कार्रवाई लगातार सुर्खियों में रही हैं। ऐसे में उनकी तैनाती को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अजय लुहाच अब संभालेंगे रायपुर की जिम्मेदारी रांची में लंबे समय से जिम्मेदारी संभाल रहे अजय लुहाच अब रायपुर जोनल ऑफिस में अपनी नई भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही उन्हें पणजी जोनल ऑफिस की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई है। इससे साफ है कि एजेंसी ने उनके अनुभव को ध्यान में रखते हुए उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। देशभर में कई अधिकारियों के तबादले ईडी के इस व्यापक आदेश में कई अन्य अधिकारियों के भी तबादले किए गए हैं। अवनीश तिवारी को पणजी से चंडीगढ़, राकेश कुमार सुमन को कोच्चि से लखनऊ, और मयंक पांडे को गुवाहाटी से मुंबई भेजा गया है। वहीं राज कुमार को लखनऊ से मुख्यालय बुलाया गया है और माधुर डी. सिंह को मुख्यालय से गुरुग्राम भेजा गया है। झारखंड में जांच पर पड़ सकता है असर तबादलों के साथ कुछ अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है, जिससे एजेंसी ने अपने ढांचे को और मजबूत करने की कोशिश की है। रांची में नए ज्वाइंट डायरेक्टर की तैनाती को झारखंड के संदर्भ में खास माना जा रहा है। राज्य में चल रही कई हाई-प्रोफाइल जांचों के बीच यह बदलाव आने वाले समय में ईडी की कार्रवाई और जांच की दिशा तय कर सकता है।
रांची। झारखंड में जल्द ही जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है, लेकिन इसके साथ ही इस मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है। देश में पहली बार डिजिटल माध्यम से जनगणना कराने की घोषणा की गई है, जिसे सरकार प्रशासनिक सुधार और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। वहीं विपक्षी दलों और क्षेत्रीय पार्टियों ने इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। खासकर सर्ना धर्म कोड को जनगणना में शामिल न किए जाने का मुद्दा फिर से गरमा गया है। दो चरणों में होगी जनगणना आगामी जनगणना दो चरणों में कराई जाएगी। पहले चरण में 1 से 15 मई 2026 तक स्व-गणना (Self Enumeration) की सुविधा दी जाएगी, जबकि 16 मई से 14 जून 2026 तक हाउस लिस्टिंग और मकान गणना का कार्य होगा। इसके बाद 2027 में पूर्ण जनगणना डिजिटल तरीके से पूरी की जाएगी। 33 सवालों के जवाब देना होगा अनिवार्य जनगणना में लोगों को कुल 33 सवालों के जवाब देने होंगे। इसमें केवल परिवार के सदस्यों की संख्या ही नहीं, बल्कि घर की बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी भी ली जाएगी। जैसे पानी का स्रोत, शौचालय, बिजली, रसोई ईंधन, कचरा निकासी, स्नानघर और रसोई की स्थिति। साथ ही स्मार्टफोन, इंटरनेट, लैपटॉप, टीवी, रेडियो और वाहन जैसी डिजिटल व भौतिक संपत्तियों की जानकारी भी दर्ज की जाएगी। पहली बार मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल से होगी एंट्री इस बार प्रगणक मोबाइल ऐप के जरिए सीधे स्मार्टफोन से डेटा भरेंगे। आम नागरिकों को भी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्वयं जानकारी दर्ज करने की सुविधा दी जाएगी। पोर्टल हिंदी और अंग्रेजी सहित 16 भाषाओं में उपलब्ध होगा। सफल पंजीकरण के बाद नागरिकों को एक स्व-गणना आईडी (SE ID) मिलेगी, जिसे बाद में प्रगणक के साथ साझा करना होगा। सर्ना धर्म कोड पर फिर छिड़ी बहस डिजिटल जनगणना के ऐलान के साथ ही झारखंड की राजनीति में सर्ना धर्म कोड का मुद्दा एक बार फिर उभर आया है। झामुमो ने इस बात पर नाराजगी जताई है कि जनगणना की रूपरेखा में सर्ना धर्म कोड का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। पार्टी का कहना है कि आदिवासी समाज की धार्मिक पहचान को अलग मान्यता दिए बिना जनगणना अधूरी मानी जाएगी। बीजेपी ने सराहा, झामुमो-कांग्रेस ने उठाए सवाल जहां भाजपा ने डिजिटल जनगणना को तेज, सटीक और पारदर्शी प्रक्रिया बताया है, वहीं कांग्रेस और झामुमो ने इसके राजनीतिक और सामाजिक प्रभावों पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि तकनीक के नाम पर लोगों को भ्रमित किया जा सकता है, जबकि झामुमो का मानना है कि सर्ना कोड की अनदेखी से आदिवासी समाज में असंतोष बढ़ेगा। 16 साल बाद हो रही जनगणना पर सबकी नजर झारखंड में यह जनगणना 16 साल बाद हो रही है, इसलिए इसके आंकड़ों और राजनीतिक असर पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। सरकार ने कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में यह सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक बहस का भी बड़ा मुद्दा बनने जा रही है।
रांची। राजधानी रांची में सरहुल पर्व के अवसर पर उत्साह और आस्था का अनोखा संगम देखने को मिला। इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी और विधायक कल्पना सोरेन के साथ करमटोली स्थित आदिवासी कॉलेज छात्रावास परिसर पहुंचे। यहां आयोजित सरहुल महोत्सव में उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना कर राज्य की सुख-समृद्धि की कामना की। पारंपरिक पूजा और सांस्कृतिक उत्सव महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री ने आदिवासी परंपराओं के अनुसार पूजा में भाग लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए, जहां मांदर की थाप और पारंपरिक गीतों ने माहौल को जीवंत बना दिया। सीएम खुद मांदर बजाते और लोगों के साथ उत्सव में शामिल होते नजर आए, जिससे कार्यक्रम में उत्साह और बढ़ गया। प्रकृति को बताया जीवन का आधार अपने संबोधन में हेमंत सोरेन ने कहा कि सरहुल केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव जीवन के गहरे संबंध को समझने का अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रकृति ही जीवन का आधार है सभी जीव-जंतुओं और मानव अस्तित्व की जड़ें प्रकृति से ही जुड़ी हैं। परंपराओं को आगे बढ़ाने की अपील मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे अपने पूर्वजों द्वारा दी गई समृद्ध परंपराओं को आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को भी इन सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना जरूरी है। आधुनिक जीवनशैली के बीच प्रकृति से जुड़ाव बनाए रखना समय की जरूरत है। प्रकृति संरक्षण का दिया संदेश सीएम ने कहा कि अगर प्रकृति सुरक्षित रहेगी, तभी मानव जीवन भी सुरक्षित रहेगा। उन्होंने लोगों से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने की अपील की। सरहुल जैसे पर्व समाज को एकजुट कर प्रकृति के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का संदेश देते हैं। शुभकामनाएं और सहभागिता इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी राज्यवासियों को सरहुल की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी भाग लिया और लोगों के सुख-शांति व समृद्धि की कामना की।
रांची। रांची नगर निगम में डिप्टी मेयर पद के चुनाव में वार्ड 31 के पार्षद नीरज कुमार ने जीत दर्ज की है। उन्हें कुल 39 वोट मिले, जिससे उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ दिया। इस जीत के साथ नीरज कुमार रांची के निर्वाचित डिप्टी मेयर बन गए हैं। चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई और परिणाम घोषित होते ही उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। विशेष रूप से यह परिणाम नगर निगम की राजनीति में अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे शहर की आगामी नीतियों और विकास कार्यों पर असर पड़ने की संभावना है।
रांची। रांची में आयोजित एक आशीर्वाद समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ हटिया विधायक नवीन जायसवाल के आवास पहुंचे। यह आयोजन विधायक की पुत्री माही जायसवाल के विवाह उपरांत रखा गया था। मुख्यमंत्री ने समारोह में शामिल होकर नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद दिया और उनके सुखद वैवाहिक जीवन की कामना की। परिवार से की मुलाकात इस दौरान हेमंत सोरेन ने विधायक नवीन जायसवाल और उनके परिवार से मुलाकात कर खुशी जाहिर की। कार्यक्रम में आत्मीयता और पारिवारिक अपनापन देखने को मिला। समारोह का माहौल सादगी, खुशी और गर्मजोशी से भरा रहा, जहां मौजूद सभी लोगों ने नवदंपति को दीं शुभकामनाएं।
रांची। रांची में बढ़ते अपराध और गैंगस्टर गतिविधियों को लेकर झारखंड की राजनीति गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान और उसके गुर्गों द्वारा फैलाए जा रहे आतंक पर सरकार और पुलिस प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया है। सरकार और पुलिस पर लगाया ढुलमुल रवैये का आरोप मीडिया से बातचीत में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य में अपराधियों का मनोबल सरकार और पुलिस की “लुंज-पुंज व्यवस्था” के कारण बढ़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रिंस खान और उसके गुर्गे खुलेआम दहशत फैला रहे हैं, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि उन्हें कहीं न कहीं संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार ठोस कार्रवाई करे, तो अपराधियों को एक रात में भागने पर मजबूर किया जा सकता है। गुर्गों पर कार्रवाई की मांग मरांडी ने कहा कि भले ही प्रिंस खान देश से बाहर रहकर गैंग चला रहा हो, लेकिन उसके गुर्गे झारखंड में सक्रिय हैं। उन्होंने पुलिस को सख्त कार्रवाई करने की सलाह देते हुए कहा कि यदि 8-10 अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, तो बाकी अपराधियों में भी डर पैदा होगा और अपराध पर लगाम लगेगी। विधानसभा में भी गूंजा मामला प्रिंस खान गैंग का मुद्दा झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में भी उठ चुका है। नेता प्रतिपक्ष ने सदन में सरकार से इस पर जवाब मांगा और राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि गैंगस्टर विदेश में बैठकर अपने नेटवर्क के जरिए रंगदारी और अपराध का संचालन कर रहा है। हत्या और रंगदारी के मामलों का जिक्र मरांडी ने हाल के आपराधिक घटनाओं का हवाला देते हुए बताया कि रांची के टीटॉस होटल में गोलीबारी कर एक कर्मचारी की हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा बोकारो में एक शोरूम संचालक से रंगदारी मांगे जाने का मामला भी सामने आया है। इन घटनाओं से व्यापारियों और आम लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। कानून-व्यवस्था पर बढ़ी चिंता लगातार बढ़ती आपराधिक घटनाओं के बीच सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति और बिगड़ सकती है।
रांची। झारखंड में सरकारी परियोजनाओं की धीमी रफ्तार और लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। CAG (Comptroller and Auditor General of India) की रिपोर्ट में झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय के स्थायी भवन निर्माण को लेकर चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। खूंटी में बन रहे इस भवन पर अब तक 12.10 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन परियोजना अधूरी पड़ी है। निर्धारित समयसीमा के बावजूद अधूरा निर्माण बता दे विश्वविद्यालय का स्थायी परिसर जून 2018 में शुरू हुआ था और इसे मई 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन अभी तक निर्माण कार्य समय पर पूरा नहीं हो सका। जुलाई 2021 में काम पूरी तरह बंद हो गया और दिसंबर 2022 तक इसे स्थगित रखा गया। इसके बाद से परियोजना पर कोई प्रगति नहीं हुई है। वर्तमान में भवन अधूरा पड़ा है और उपयोग में नहीं आ पा रहा। अन्य परियोजनाओं में भी गड़बड़ी इतना ही नहीं CAG रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि झारखंड भवन निर्माण कारपोरेशन लिमिटेड की छह अन्य परियोजनाओं में भी कुल 13.32 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद काम अधूरा है। पिठौरिया स्थित सुतियांबे पहाड़ के विकास कार्य का उदाहरण देते हुए बताया गया कि अक्टूबर 2017 तक केवल 8 प्रतिशत काम पूरा हुआ, जबकि इस पर 2.16 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके थे। काम रुकने के पीछे प्रशासनिक कारण रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम के पुनर्मूल्यांकन का निर्देश दिया था। इसी कारण स्थायी परिसर के निर्माण को रोक दिया गया, ताकि विश्वविद्यालय की वास्तविक जरूरतों का आकलन किया जा सके। लेकिन संबंधित विभाग से आगे कोई स्पष्ट निर्देश नहीं मिलने के कारण काम आगे नहीं बढ़ सका। परिणामस्वरूप केवल 19 प्रतिशत निर्माण के बाद ही परियोजना ठप हो गई। अगस्त 2020 में ठेकेदार ने 58 प्रतिशत काम पूरा होने का दावा करते हुए भुगतान की मांग की। कारपोरेशन ने एक महीने में काम पूरा करने की शर्त पर बिल का भुगतान कर दिया। हालांकि, शर्त पूरी नहीं हुई, फिर भी ठेकेदार के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
धनबाद। झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान गैंग के खिलाफ रांची और धनबाद पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। धनबाद में सोमवार सुबह पुलिस और गैंगस्टर प्रिंस खान गैंग के गुर्गों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें 3 अपराधी घायल हो गये। ये तीनों पुलिस के हत्थे चढ़ गये हैं। घायल तीनों आरोपियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। धनबाद में एनकाउंटरः धनबाद के पुटकी थाना क्षेत्र के भागाबांध ओपी इलाके में रांची और धनबाद पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के गिरोह के दो अपराधियों को पैर में गोली लगी है, जबकि एक अन्य भागने के क्रम में पैर टूटने से घायल हो गया। गिरफ्तार अपराधियों की पहचान कुबेर, विक्की डोम और अमन अफजल के रूप में हुई है, जिन्हें तत्काल इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। वर्चुअल नंबरों से मांग रहा रंगदारीः राजधानी रांची में प्रिंस खान के नाम पर वर्चुअल नंबरों से कॉल के जरिए मांगी जा रही रंगदारी और एक रेस्टोरेंट में गोलीबारी की घटना के बाद रांची और धनबाद पुलिस ने यह ऑपरेशन शुरू किया है। तकनीकी जांच में पता चला कि कुबेर नाम का बदमाश धनबाद में छिपकर रांची के व्यवसायियों को धमका रहा था। दो को लगी गोली, एक का पैर टूटाः सूचना की पुष्टि होते ही रांची और धनबाद पुलिस की विशेष टीम ने भागाबांध इलाके की घेराबंदी की। खुद को घिरा देख अपराधियों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी, जिसके बाद आत्मरक्षा में पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। इस मुठभेड़ में कुबेर और विक्की डोम को गोली लगी है, जबकि भागने की कोशिश में अमन अफजल का पैर टूट गया। होटल स्टाफ हत्याकांड का भी खुलासाः पुलिस सूत्रों का दावा है कि इन गिरफ्तारियों के साथ ही हाल में रांची के एयरपोर्ट क्षेत्र स्थित होटलकर्मी की हत्याकांड का भी खुलासा हो गया है। मुठभेड़ के बाद पूरा भागाबांध इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है। धनबाद के एसएसपी स्वयं मौके पर मौजूद हैं। पुलिस को पूछताछ के दौरान प्रिंस खान गिरोह के अगले मंसूबों और उनके मददगारों के बारे में कई अहम सुराग मिले हैं। फिलहाल पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है, ताकि गिरोह के किसी अन्य छिपे हुए सदस्यों को दबोचा जा सके। पुलिस अब अपराधियों के पास से बरामद मोबाइल और अन्य दस्तावेज के जरिए प्रिंस खान के अंतरराष्ट्रीय लिंक और स्थानीय नेटवर्क की बारीकी से जांच कर रही है। एक सप्ताह के अंदर दूसरी मुठभेड़ः बता दें कि धनबाद पुलिस और प्रिंस खान के गुर्गों के साथ एक सप्ताह में यह दूसरी बड़ी मुठभेड़ है। कुछ दिन पूर्व पुलिस ने धनबाद के भुईफोड़ स्थित फायरिंग जोन में प्रिंस खान के एक गुर्गे के साथ मुठभेड़ हुई थी। जिसमें पुलिस एनकाउंटर में एक गुर्गे को पैर में गोली लगी थी। दूसरा गुर्गा फरार हो गया था। जिसे बाद में कुछ घंटों के अंदर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था ।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।