नई दिल्ली: 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद अधिकांश छात्रों और उनके अभिभावकों के सामने सबसे बड़ा सवाल होता है कि आगे कौन-सा कोर्स चुना जाए, जिससे बेहतर करियर और अच्छी नौकरी के अवसर मिल सकें। पहले जहां अधिकांश छात्र इंजीनियरिंग, मेडिकल या सामान्य ग्रेजुएशन को ही प्राथमिकता देते थे, वहीं अब बदलते समय के साथ रोजगार का बाजार भी तेजी से बदल रहा है। बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में हेल्थकेयर, आईटी, कृषि, हॉस्पिटैलिटी और स्किल-बेस्ड इंडस्ट्री का तेजी से विस्तार हो रहा है। ऐसे में कई ऐसे प्रोफेशनल कोर्स सामने आए हैं, जिनकी मांग लगातार बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में इनमें रोजगार की संभावनाएं भी मजबूत मानी जा रही हैं। अगर आपने 12वीं पास कर ली है और अपने भविष्य को लेकर सही फैसला लेना चाहते हैं, तो ये कोर्स आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं। 1. पैरामेडिकल कोर्स: हेल्थ सेक्टर में बढ़ रही मांग देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ प्रशिक्षित पैरामेडिकल प्रोफेशनल्स की जरूरत लगातार बढ़ रही है। बिहार और झारखंड में भी नए अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और डायग्नोस्टिक सेंटर खुलने से इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़े हैं। 12वीं (साइंस) के बाद छात्र इन कोर्सों का चयन कर सकते हैं— DMLT (डिप्लोमा इन मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी) एक्स-रे टेक्नोलॉजी रेडियोलॉजी ऑपरेशन थिएटर टेक्निशियन फिजियोथेरेपी इन कोर्सों के बाद सरकारी अस्पतालों के अलावा निजी अस्पतालों, लैब और डायग्नोस्टिक सेंटरों में नौकरी के अच्छे अवसर मिलते हैं। 2. आईटी और कंप्यूटर कोर्स: डिजिटल दुनिया में बढ़ रहे अवसर डिजिटल इंडिया, ऑनलाइन सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग के कारण आईटी सेक्टर लगातार विस्तार कर रहा है। अगर आपकी रुचि कंप्यूटर और टेक्नोलॉजी में है, तो ये कोर्स आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकते हैं— BCA डेटा एनालिटिक्स साइबर सिक्योरिटी वेब डेवलपमेंट सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट क्लाउड कंप्यूटिंग इन क्षेत्रों में देश के साथ-साथ विदेशों में भी रोजगार के अवसर मौजूद हैं। इसके अलावा फ्रीलांसिंग और वर्क फ्रॉम होम जैसी संभावनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। 3. एग्रीकल्चर और फूड टेक्नोलॉजी: कृषि आधारित राज्यों में बेहतर भविष्य बिहार और झारखंड मुख्य रूप से कृषि प्रधान राज्य हैं। ऐसे में कृषि और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े प्रोफेशनल्स की मांग लगातार बढ़ रही है। इस क्षेत्र में छात्र निम्नलिखित कोर्स कर सकते हैं— B.Sc Agriculture फूड टेक्नोलॉजी डेयरी टेक्नोलॉजी हॉर्टिकल्चर इन कोर्सों के बाद सरकारी विभागों, कृषि अनुसंधान संस्थानों, फूड प्रोसेसिंग कंपनियों और एग्री-बिजनेस सेक्टर में करियर बनाया जा सकता है। 4. होटल मैनेजमेंट और टूरिज्म: सर्विस सेक्टर में बढ़ते अवसर पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी उद्योग लगातार विकसित हो रहा है। होटल, एयरलाइन, ट्रैवल एजेंसी, रिसॉर्ट और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री में प्रशिक्षित युवाओं की मांग बनी रहती है। 12वीं के बाद छात्र इन क्षेत्रों में करियर बना सकते हैं— होटल मैनेजमेंट ट्रैवल एंड टूरिज्म फूड प्रोडक्शन हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट इस क्षेत्र में देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं। 5. नर्सिंग और हेल्थकेयर: हमेशा बनी रहती है डिमांड हेल्थकेयर ऐसा क्षेत्र है जहां प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता कभी कम नहीं होती। छात्र इन कोर्सों का चयन कर सकते हैं— B.Sc Nursing GNM ANM बिहार और झारखंड में नए मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के खुलने से प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की मांग लगातार बढ़ रही है। सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में रोजगार की अच्छी संभावनाएं उपलब्ध हैं। 6. स्किल-बेस्ड और वोकेशनल कोर्स: कम समय में रोजगार की तैयारी हर छात्र लंबी अवधि की पढ़ाई नहीं करना चाहता। ऐसे छात्रों के लिए स्किल-बेस्ड और वोकेशनल कोर्स बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं— इलेक्ट्रिशियन फिटर वेल्डर ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी रेफ्रिजरेशन एवं एयर कंडीशनिंग सोलर टेक्नोलॉजी इलेक्ट्रॉनिक्स आईटीआई और अन्य व्यावसायिक संस्थानों के ये कोर्स कम समय में रोजगार योग्य कौशल प्रदान करते हैं और उद्योगों में इनकी अच्छी मांग रहती है। कोर्स चुनते समय किन बातों का रखें ध्यान? विशेषज्ञों के अनुसार केवल ट्रेंड देखकर कोर्स का चयन नहीं करना चाहिए। छात्रों को अपनी रुचि, योग्यता, भविष्य में रोजगार की संभावनाएं, कोर्स की गुणवत्ता और संस्थान की विश्वसनीयता को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए। सही कोर्स का चुनाव न केवल बेहतर नौकरी दिला सकता है, बल्कि लंबे समय में सफल करियर की मजबूत नींव भी बन सकता है।
12वीं के बाद करियर चुनना किसी भी छात्र के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण फैसला होता है। खासकर साइंस स्ट्रीम के छात्रों के सामने कई आकर्षक विकल्प होते हैं। इनमें फार्मेसी और बायोटेक्नोलॉजी दो ऐसे क्षेत्र हैं, जो पिछले कुछ वर्षों में तेजी से लोकप्रिय हुए हैं। दोनों ही फील्ड्स हेल्थकेयर, मेडिकल साइंस और टेक्नोलॉजी से जुड़ी हैं, लेकिन इनके काम करने का तरीका, करियर अवसर और भविष्य की दिशा अलग-अलग है। ऐसे में सही चुनाव आपके रुचि क्षेत्र, स्किल्स और भविष्य के लक्ष्य पर निर्भर करता है। फार्मेसी और बायोटेक्नोलॉजी में क्या है अंतर? फार्मेसी क्या है? Pharmacy दवाइयों के निर्माण, परीक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण और उनके सुरक्षित उपयोग से जुड़ा विज्ञान है। इस क्षेत्र में यह सिखाया जाता है कि दवाएं कैसे बनाई जाती हैं, उनका शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है और उन्हें मरीजों तक कैसे पहुंचाया जाता है। फार्मेसी का मुख्य फोकस दवा उद्योग और स्वास्थ्य सेवाओं पर होता है। बायोटेक्नोलॉजी क्या है? Biotechnology जीव विज्ञान और तकनीक का संयोजन है। इसमें जीवित कोशिकाओं, सूक्ष्मजीवों, डीएनए और जेनेटिक तकनीकों का उपयोग करके नए उत्पाद और समाधान विकसित किए जाते हैं। वैक्सीन निर्माण, जीन एडिटिंग, डीएनए परीक्षण, कृषि सुधार और कैंसर रिसर्च जैसे क्षेत्र बायोटेक्नोलॉजी का हिस्सा हैं। फार्मेसी क्यों चुनें? 1. जल्दी नौकरी के अवसर बी.फार्मा (B.Pharm) या डी.फार्मा (D.Pharm) करने के बाद छात्र अस्पतालों, दवा कंपनियों और हेल्थकेयर संस्थानों में नौकरी प्राप्त कर सकते हैं। 2. खुद का व्यवसाय शुरू करने का मौका फार्मेसी की पढ़ाई पूरी करने के बाद मेडिकल स्टोर या दवा वितरण व्यवसाय शुरू करने का अवसर भी मिलता है, जो इसे अन्य कई कोर्सों से अलग बनाता है। 3. सरकारी नौकरी के विकल्प इस क्षेत्र में ड्रग इंस्पेक्टर, सरकारी फार्मासिस्ट, क्वालिटी कंट्रोल ऑफिसर और रेगुलेटरी अफेयर्स विशेषज्ञ जैसी नौकरियों के अवसर उपलब्ध हैं। 4. स्थिर करियर दवाइयों की मांग हमेशा बनी रहती है, इसलिए फार्मेसी को अपेक्षाकृत सुरक्षित और स्थिर करियर विकल्प माना जाता है। बायोटेक्नोलॉजी क्यों चुनें? 1. भविष्य की तकनीकों से जुड़ा क्षेत्र जीनोमिक्स, पर्सनलाइज्ड मेडिसिन, बायोफार्मास्यूटिकल्स और कैंसर रिसर्च जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है, जिससे बायोटेक्नोलॉजी की मांग लगातार बढ़ रही है। 2. अंतरराष्ट्रीय अवसर अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन और अन्य विकसित देशों में बायोटेक्नोलॉजी विशेषज्ञों की भारी मांग है। रिसर्च और इनोवेशन आधारित करियर बनाने वालों के लिए यह क्षेत्र बेहतरीन माना जाता है। 3. कई उद्योगों में रोजगार बायोटेक्नोलॉजी केवल हेल्थकेयर तक सीमित नहीं है। इसमें कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, पर्यावरण संरक्षण, कॉस्मेटिक्स और बायोफ्यूल जैसे क्षेत्रों में भी अवसर मौजूद हैं। 4. रिसर्च में करियर यदि आपको प्रयोगशाला में काम करना, नई खोज करना और वैज्ञानिक अनुसंधान में रुचि है, तो यह क्षेत्र आपके लिए उपयुक्त हो सकता है। सैलरी और करियर ग्रोथ फार्मेसी में शुरुआती नौकरी अपेक्षाकृत जल्दी मिल सकती है और आय स्थिर रहती है। वहीं बायोटेक्नोलॉजी में शुरुआत में कुछ पदों पर वेतन कम हो सकता है, लेकिन उच्च शिक्षा और रिसर्च अनुभव के साथ कमाई की संभावनाएं काफी बढ़ जाती हैं। आपके लिए कौन-सा विकल्प बेहतर है? फार्मेसी चुनें यदि: आपको केमिस्ट्री और मेडिसिन में रुचि है। पढ़ाई के बाद जल्दी नौकरी चाहते हैं। खुद का मेडिकल स्टोर या बिजनेस शुरू करना चाहते हैं। स्थिर और सुरक्षित करियर की तलाश में हैं। बायोटेक्नोलॉजी चुनें यदि: आपको रिसर्च और लैब वर्क पसंद है। नई तकनीकों और वैज्ञानिक खोजों में रुचि है। आगे एमटेक, एमएस या पीएचडी करना चाहते हैं। विदेश में करियर बनाने का सपना देखते हैं।
आज के प्रतिस्पर्धी दौर में हर छात्र का लक्ष्य होता है कि पढ़ाई पूरी होते ही उसे एक सुरक्षित करियर और आकर्षक सैलरी मिले। ऐसे में बीटेक इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (BTech IT) एक ऐसा कोर्स बनकर उभरा है, जो युवाओं के लिए हाई पैकेज का मजबूत रास्ता तैयार कर रहा है। डिजिटल क्रांति के इस दौर में आईटी सेक्टर की तेजी से बढ़ती जरूरतों ने इस फील्ड को करियर के लिहाज से बेहद आकर्षक बना दिया है। क्या है BTech IT? BTech IT चार साल का अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम है, जिसमें छात्रों को कंप्यूटर सिस्टम, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, डेटा मैनेजमेंट, नेटवर्किंग और नई तकनीकों की गहराई से पढ़ाई कराई जाती है। यह कोर्स छात्रों को इंडस्ट्री-रेडी बनाता है, ताकि वे सीधे प्रोफेशनल दुनिया में कदम रख सकें। क्यों बढ़ रही है IT सेक्टर की मांग? आज लगभग हर क्षेत्र डिजिटल हो चुका है–चाहे बैंकिंग हो, एजुकेशन, हेल्थकेयर या ई-कॉमर्स। कंपनियों को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म को संभालने और सुरक्षित रखने के लिए स्किल्ड आईटी प्रोफेशनल्स की जरूरत है। इसके अलावा: स्टार्टअप कल्चर का तेजी से विस्तार ऑनलाइन सेवाओं का बढ़ता उपयोग डेटा और साइबर सिक्योरिटी की बढ़ती जरूरत इन सभी कारणों से IT सेक्टर में जॉब के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं, और यही वजह है कि BTech IT ग्रेजुएट्स को हाई पैकेज ऑफर किए जा रहे हैं। किन स्किल्स की होती है जरूरत? सिर्फ डिग्री हासिल करना ही काफी नहीं है। इस फील्ड में सफल होने के लिए कुछ अहम स्किल्स जरूरी हैं: प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (Python, Java आदि) लॉजिकल और एनालिटिकल थिंकिंग प्रॉब्लम सॉल्विंग क्षमता टीमवर्क और कम्युनिकेशन स्किल करियर ऑप्शन और सैलरी BTech IT के बाद छात्रों के पास कई आकर्षक करियर विकल्प होते हैं: सॉफ्टवेयर डेवलपर डेटा एनालिस्ट साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट वेब डेवलपर क्लाउड इंजीनियर फ्रेशर्स को शुरुआत में लगभग 4 से 8 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिल सकता है, जो अनुभव और स्किल्स के साथ तेजी से बढ़ता है। टॉप कंपनियों में अवसर आईटी सेक्टर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां देश और दुनिया की दिग्गज कंपनियों में काम करने का मौका मिलता है, जैसे TCS, Infosys, Wipro, Google और Microsoft। एडमिशन कैसे लें? BTech IT में दाखिला लेने के लिए छात्रों को एंट्रेंस एग्जाम पास करना होता है: नेशनल लेवल: JEE Main, JEE Advanced स्टेट लेवल: WBJEE, MHT CET, UPSEE योग्यता: 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स (PCM) के साथ 50% से 75% अंक (कॉलेज के अनुसार) जरूरी होते हैं।
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के रिजल्ट का इंतजार कर रहे लाखों स्टूडेंट्स इन दिनों तनाव में हैं। परीक्षा खत्म होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही होता है-नंबर कितने आएंगे और आगे क्या करना है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि रिजल्ट से पहले का समय बेहद अहम होता है, जिसे सही तरीके से इस्तेमाल कर भविष्य को बेहतर बनाया जा सकता है। रिजल्ट से पहले क्यों अहम है यह समय? अक्सर स्टूडेंट्स इस दौरान बेवजह चिंता में समय गंवा देते हैं, जबकि यही समय खुद को समझने और करियर की दिशा तय करने का सबसे अच्छा मौका होता है। अगर सही प्लानिंग की जाए तो आगे की पढ़ाई और करियर के लिए मजबूत नींव रखी जा सकती है। 1. अपने एग्जाम का करें सही आकलन रिजल्ट आने से पहले यह सोचें कि किस विषय में आपका प्रदर्शन अच्छा रहा और कहां सुधार की जरूरत है। इससे आगे की पढ़ाई का रास्ता साफ होगा। 2. करियर ऑप्शन की जानकारी जुटाएं रिजल्ट के बाद अक्सर स्टूडेंट्स कन्फ्यूज हो जाते हैं। इसलिए अभी से अलग-अलग कोर्स और करियर विकल्पों के बारे में जानकारी लेना शुरू करें, ताकि सही समय पर बेहतर निर्णय लिया जा सके। 3. समय का सही उपयोग करें खाली समय को बेकार गंवाने के बजाय किताबें पढ़ें, नई चीजें सीखें या अपने शौक को आगे बढ़ाएं। यह आपके व्यक्तित्व विकास में मदद करेगा। 4. आगे की पढ़ाई की करें प्लानिंग पहले से तय करें कि आपको किस फील्ड में जाना है-साइंस, कॉमर्स या आर्ट्स। इससे रिजल्ट आने के बाद जल्द और सही फैसला लेने में आसानी होगी। 5. कमजोर विषयों पर दें ध्यान अगर किसी विषय में कमजोरी महसूस हो रही है, तो अभी से उसे सुधारने की कोशिश शुरू कर दें। इससे आगे की पढ़ाई में आत्मविश्वास बढ़ेगा। 6. डिजिटल स्किल्स सीखें आज के दौर में कंप्यूटर और डिजिटल स्किल्स बेहद जरूरी हैं। रिजल्ट का इंतजार करते हुए बेसिक कंप्यूटर, टाइपिंग, या ऑनलाइन टूल्स सीखना फायदेमंद रहेगा। 7. अपने इंटरेस्ट को समझें हर स्टूडेंट की रुचि अलग होती है। इसलिए यह जरूरी है कि आप यह पहचानें कि आपको किस विषय या क्षेत्र में ज्यादा दिलचस्पी है। उसी के आधार पर करियर का चुनाव करें। टेंशन नहीं, प्लानिंग है जरूरी रिजल्ट को लेकर चिंता करना स्वाभाविक है, लेकिन यह समय घबराने का नहीं, बल्कि खुद को तैयार करने का है। सही दिशा में उठाए गए छोटे-छोटे कदम ही भविष्य में बड़ी सफलता दिला सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।