Chirag Shetty

PV Sindhu and Satwiksairaj Rankireddy-Chirag Shetty set to compete at the Japan Open 2026 badminton tournament in Tokyo.
Japan Open 2026: पीवी सिंधु और सात्विक-चिराग पर रहेंगी नजरें, वर्ल्ड चैंपियनशिप से पहले भारत के लिए अहम टूर्नामेंट

भारत के शीर्ष बैडमिंटन खिलाड़ी Japan Open 2026 में अपनी चुनौती पेश करने के लिए तैयार हैं। टोक्यो में मंगलवार से शुरू हो रहे BWF Super 750 टूर्नामेंट में पीवी सिंधु, लक्ष्य सेन और स्टार पुरुष युगल जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी-चिराग शेट्टी भारतीय अभियान की अगुवाई करेंगे। अगले महीने होने वाली BWF World Championships से पहले यह प्रतियोगिता खिलाड़ियों के लिए तैयारी का महत्वपूर्ण मंच मानी जा रही है। चोट के बाद वापसी करेंगे सात्विक-चिराग भारतीय पुरुष युगल की स्टार जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी करीब दो महीने बाद प्रतिस्पर्धी बैडमिंटन में वापसी कर रही है। इंडोनेशिया ओपन के दौरान सात्विक के कंधे की चोट बढ़ने के कारण दोनों खिलाड़ियों को लगातार चार अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट से बाहर रहना पड़ा था। अब फिट होकर लौट रही यह जोड़ी टोक्यो में अपनी लय हासिल करने की कोशिश करेगी। विश्व रैंकिंग में चौथे स्थान पर मौजूद यह जोड़ी तीसरी वरीयता के साथ टूर्नामेंट में उतरेगी। मई में सिंगापुर ओपन जीतकर दोनों ने दो साल से चला आ रहा खिताबी सूखा भी समाप्त किया था। सिंधु से फिर पदक की उम्मीद दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु भी जापान ओपन में वापसी कर रही हैं। पिछले महीने ऑस्ट्रेलियन ओपन में उन्होंने सेमीफाइनल तक का सफर तय किया था, जहां उन्हें जापान की अकाने यामागुची के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। महिला एकल में सिंधु के साथ युवा खिलाड़ी उन्नति हुड्डा भी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। लक्ष्य सेन और आयुष शेट्टी पर भी नजर पुरुष एकल वर्ग में भारत की उम्मीदें लक्ष्य सेन और युवा शटलर आयुष शेट्टी पर टिकी होंगी। लक्ष्य सेन इंडोनेशिया ओपन के बाद पहली बार कोर्ट पर उतरेंगे और बेहतर प्रदर्शन के साथ वर्ल्ड चैंपियनशिप से पहले आत्मविश्वास हासिल करना चाहेंगे। जापान ओपन का खिताब अब तक नहीं जीत पाया भारत भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कई विश्व स्तरीय बैडमिंटन खिलाड़ी दिए हैं, लेकिन अब तक Japan Open का खिताब भारतीय खिलाड़ियों की पहुंच से दूर रहा है। इस बार अनुभवी खिलाड़ियों और युवा प्रतिभाओं के संतुलित संयोजन के साथ भारतीय टीम इस इंतजार को खत्म करने की कोशिश करेगी। Japan Open 2026 में भारत की पूरी टीम पुरुष एकल लक्ष्य सेन आयुष शेट्टी पुरुष युगल सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी / चिराग शेट्टी एमआर अर्जुन / हरिहरन अम्मासकरुनन महिला एकल पीवी सिंधु उन्नति हुड्डा महिला युगल कोई भारतीय जोड़ी शामिल नहीं मिश्रित युगल ध्रुव कपिला / तनिषा क्रास्टो रोहन कपूर / रुथविका शिवानी गड्डे भारत में कहां देखें लाइव मुकाबले? भारत में बैडमिंटन प्रशंसक BWF TV के आधिकारिक YouTube चैनल पर Japan Open 2026 के मुकाबलों की लाइव स्ट्रीमिंग देख सकते हैं। फिलहाल भारत में इस टूर्नामेंट के टीवी प्रसारण की घोषणा किसी ब्रॉडकास्टर ने नहीं की है। वर्ल्ड चैंपियनशिप से पहले बड़ा मौका Japan Open 2026 भारतीय खिलाड़ियों के लिए सिर्फ एक सुपर 750 टूर्नामेंट नहीं, बल्कि अगले महीने होने वाली विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप से पहले अपनी फॉर्म और रणनीति को परखने का सुनहरा अवसर भी है। ऐसे में सभी की नजरें सिंधु, लक्ष्य सेन और सात्विक-चिराग के प्रदर्शन पर रहेंगी।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
Police and security personnel near a CISF camp in Jhargram after two labourers were injured in an alleged accidental firing by a CISF jawan.
झाड़ग्राम में CISF जवान की बंदूक से चली गोली, दो मजदूर गंभीर घायल, जांच शुरू

झाड़ग्राम: पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम जिले में सीआईएसएफ (CISF) कैंप के पास एक जवान की बंदूक से कथित तौर पर दुर्घटनावश गोली चलने से दो मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए कोलकाता रेफर किया गया है। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। काम से लौटते समय हुआ हादसा यह घटना झाड़ग्राम जिले के बिनपुर थाना क्षेत्र के बेतकुंदरी इलाके में स्थित दहिजुड़ी सीआईएसएफ कैंप के पास हुई। पुलिस के अनुसार, घायल मजदूरों की पहचान शुभदीप घोष और अमित मंडल के रूप में हुई है। दोनों बीरभूम जिले के दुबराजपुर थाना क्षेत्र के रामचंद्रपुर गांव के निवासी हैं और बिनपुर-1 ब्लॉक की एक बालू खदान में मजदूरी करते हैं। बताया गया कि दोनों मजदूर काम खत्म कर अपने ठिकाने लौट रहे थे, तभी यह हादसा हुआ। पूछताछ के दौरान चली गोली स्थानीय लोगों के अनुसार, सीआईएसएफ कैंप के पास ड्यूटी पर तैनात जवानों ने मजदूरों से पूछताछ शुरू की। इसी दौरान एक जवान की बंदूक से कथित तौर पर दुर्घटनावश गोली चल गई, जिसकी चपेट में दोनों मजदूर आ गए। गोली चलने की आवाज सुनते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, जिससे कुछ देर के लिए इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दोनों मजदूरों की हालत गंभीर हादसे में शुभदीप घोष के सीने के पिछले हिस्से और बाएं पैर में गोली लगी, जबकि अमित मंडल के बाएं पैर में गोली लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को तुरंत झाड़ग्राम गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए दोनों को कोलकाता रेफर कर दिया। पुलिस ने शुरू की जांच झाड़ग्राम के पुलिस अधीक्षक मानव सिंगला ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सीआईएसएफ के एक जवान की बंदूक से दुर्घटनावश गोली चली थी। हालांकि घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही हुई या नहीं, इसकी विस्तृत जांच की जा रही है। स्थिति सामान्य, जांच जारी पुलिस के अनुसार, घटना के बाद हालात पूरी तरह सामान्य हैं और क्षेत्र में किसी प्रकार का तनाव नहीं है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गोली चलने के पीछे केवल दुर्घटना थी या सुरक्षा मानकों में किसी तरह की चूक हुई थी।  

Deepshikha जुलाई 14, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

India vs England Series
स्पोर्ट्स

इंग्लैंड से सीरीज हार के बाद टीम इंडिया का होगा प्रदर्शन रिव्यू, BCCI करेगा खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का मूल्यांकन

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0