CISF

PV Sindhu and Satwiksairaj Rankireddy-Chirag Shetty set to compete at the Japan Open 2026 badminton tournament in Tokyo.
Japan Open 2026: पीवी सिंधु और सात्विक-चिराग पर रहेंगी नजरें, वर्ल्ड चैंपियनशिप से पहले भारत के लिए अहम टूर्नामेंट

भारत के शीर्ष बैडमिंटन खिलाड़ी Japan Open 2026 में अपनी चुनौती पेश करने के लिए तैयार हैं। टोक्यो में मंगलवार से शुरू हो रहे BWF Super 750 टूर्नामेंट में पीवी सिंधु, लक्ष्य सेन और स्टार पुरुष युगल जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी-चिराग शेट्टी भारतीय अभियान की अगुवाई करेंगे। अगले महीने होने वाली BWF World Championships से पहले यह प्रतियोगिता खिलाड़ियों के लिए तैयारी का महत्वपूर्ण मंच मानी जा रही है। चोट के बाद वापसी करेंगे सात्विक-चिराग भारतीय पुरुष युगल की स्टार जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी करीब दो महीने बाद प्रतिस्पर्धी बैडमिंटन में वापसी कर रही है। इंडोनेशिया ओपन के दौरान सात्विक के कंधे की चोट बढ़ने के कारण दोनों खिलाड़ियों को लगातार चार अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट से बाहर रहना पड़ा था। अब फिट होकर लौट रही यह जोड़ी टोक्यो में अपनी लय हासिल करने की कोशिश करेगी। विश्व रैंकिंग में चौथे स्थान पर मौजूद यह जोड़ी तीसरी वरीयता के साथ टूर्नामेंट में उतरेगी। मई में सिंगापुर ओपन जीतकर दोनों ने दो साल से चला आ रहा खिताबी सूखा भी समाप्त किया था। सिंधु से फिर पदक की उम्मीद दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु भी जापान ओपन में वापसी कर रही हैं। पिछले महीने ऑस्ट्रेलियन ओपन में उन्होंने सेमीफाइनल तक का सफर तय किया था, जहां उन्हें जापान की अकाने यामागुची के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। महिला एकल में सिंधु के साथ युवा खिलाड़ी उन्नति हुड्डा भी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। लक्ष्य सेन और आयुष शेट्टी पर भी नजर पुरुष एकल वर्ग में भारत की उम्मीदें लक्ष्य सेन और युवा शटलर आयुष शेट्टी पर टिकी होंगी। लक्ष्य सेन इंडोनेशिया ओपन के बाद पहली बार कोर्ट पर उतरेंगे और बेहतर प्रदर्शन के साथ वर्ल्ड चैंपियनशिप से पहले आत्मविश्वास हासिल करना चाहेंगे। जापान ओपन का खिताब अब तक नहीं जीत पाया भारत भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कई विश्व स्तरीय बैडमिंटन खिलाड़ी दिए हैं, लेकिन अब तक Japan Open का खिताब भारतीय खिलाड़ियों की पहुंच से दूर रहा है। इस बार अनुभवी खिलाड़ियों और युवा प्रतिभाओं के संतुलित संयोजन के साथ भारतीय टीम इस इंतजार को खत्म करने की कोशिश करेगी। Japan Open 2026 में भारत की पूरी टीम पुरुष एकल लक्ष्य सेन आयुष शेट्टी पुरुष युगल सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी / चिराग शेट्टी एमआर अर्जुन / हरिहरन अम्मासकरुनन महिला एकल पीवी सिंधु उन्नति हुड्डा महिला युगल कोई भारतीय जोड़ी शामिल नहीं मिश्रित युगल ध्रुव कपिला / तनिषा क्रास्टो रोहन कपूर / रुथविका शिवानी गड्डे भारत में कहां देखें लाइव मुकाबले? भारत में बैडमिंटन प्रशंसक BWF TV के आधिकारिक YouTube चैनल पर Japan Open 2026 के मुकाबलों की लाइव स्ट्रीमिंग देख सकते हैं। फिलहाल भारत में इस टूर्नामेंट के टीवी प्रसारण की घोषणा किसी ब्रॉडकास्टर ने नहीं की है। वर्ल्ड चैंपियनशिप से पहले बड़ा मौका Japan Open 2026 भारतीय खिलाड़ियों के लिए सिर्फ एक सुपर 750 टूर्नामेंट नहीं, बल्कि अगले महीने होने वाली विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप से पहले अपनी फॉर्म और रणनीति को परखने का सुनहरा अवसर भी है। ऐसे में सभी की नजरें सिंधु, लक्ष्य सेन और सात्विक-चिराग के प्रदर्शन पर रहेंगी।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
Police and security personnel near a CISF camp in Jhargram after two labourers were injured in an alleged accidental firing by a CISF jawan.
झाड़ग्राम में CISF जवान की बंदूक से चली गोली, दो मजदूर गंभीर घायल, जांच शुरू

झाड़ग्राम: पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम जिले में सीआईएसएफ (CISF) कैंप के पास एक जवान की बंदूक से कथित तौर पर दुर्घटनावश गोली चलने से दो मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए कोलकाता रेफर किया गया है। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। काम से लौटते समय हुआ हादसा यह घटना झाड़ग्राम जिले के बिनपुर थाना क्षेत्र के बेतकुंदरी इलाके में स्थित दहिजुड़ी सीआईएसएफ कैंप के पास हुई। पुलिस के अनुसार, घायल मजदूरों की पहचान शुभदीप घोष और अमित मंडल के रूप में हुई है। दोनों बीरभूम जिले के दुबराजपुर थाना क्षेत्र के रामचंद्रपुर गांव के निवासी हैं और बिनपुर-1 ब्लॉक की एक बालू खदान में मजदूरी करते हैं। बताया गया कि दोनों मजदूर काम खत्म कर अपने ठिकाने लौट रहे थे, तभी यह हादसा हुआ। पूछताछ के दौरान चली गोली स्थानीय लोगों के अनुसार, सीआईएसएफ कैंप के पास ड्यूटी पर तैनात जवानों ने मजदूरों से पूछताछ शुरू की। इसी दौरान एक जवान की बंदूक से कथित तौर पर दुर्घटनावश गोली चल गई, जिसकी चपेट में दोनों मजदूर आ गए। गोली चलने की आवाज सुनते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, जिससे कुछ देर के लिए इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दोनों मजदूरों की हालत गंभीर हादसे में शुभदीप घोष के सीने के पिछले हिस्से और बाएं पैर में गोली लगी, जबकि अमित मंडल के बाएं पैर में गोली लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को तुरंत झाड़ग्राम गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए दोनों को कोलकाता रेफर कर दिया। पुलिस ने शुरू की जांच झाड़ग्राम के पुलिस अधीक्षक मानव सिंगला ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सीआईएसएफ के एक जवान की बंदूक से दुर्घटनावश गोली चली थी। हालांकि घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही हुई या नहीं, इसकी विस्तृत जांच की जा रही है। स्थिति सामान्य, जांच जारी पुलिस के अनुसार, घटना के बाद हालात पूरी तरह सामान्य हैं और क्षेत्र में किसी प्रकार का तनाव नहीं है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गोली चलने के पीछे केवल दुर्घटना थी या सुरक्षा मानकों में किसी तरह की चूक हुई थी।  

Deepshikha जुलाई 14, 2026 0
CISF personnel deployed at a coal mining site after receiving new powers to take action against illegal coal mining and coal theft under the MMDR Act.
कोयला चोरी पर सरकार का बड़ा एक्शन, CISF को मिले नए कानूनी अधिकार; अवैध खनन माफियाओं पर कसेगा शिकंजा

नई दिल्ली: अवैध कोयला खनन और कोयला चोरी पर सख्ती बढ़ाते हुए केंद्र सरकार ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को बड़े कानूनी अधिकार सौंप दिए हैं। अब CISF खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR Act) के तहत सीधे कार्रवाई कर सकेगी। सरकार का मानना है कि यह कदम "जीरो कोल लीकेज प्लान" को लागू करने में अहम साबित होगा। अब सीधे दर्ज कर सकेगी केस नए अधिकार मिलने के बाद CISF अवैध खनन, कोयला चोरी और तस्करी के मामलों में बिना किसी अन्य एजेंसी का इंतजार किए सीधे अदालत में मामला दर्ज करा सकेगी। इसके अलावा बल को संदिग्ध स्थानों पर छापेमारी, तलाशी और अवैध रूप से निकाले गए कोयले व अन्य खनिजों को जब्त करने का अधिकार भी मिल गया है। मशीनें और वाहन भी होंगे जब्त CISF अब अवैध खनन में इस्तेमाल होने वाले उपकरण, भारी मशीनें और परिवहन में उपयोग किए जा रहे वाहनों को मौके पर ही जब्त कर सकेगी। इससे कोयला चोरी और तस्करी के नेटवर्क पर सीधा असर पड़ने की उम्मीद है। अधिकारियों ने संभाली कमान नए अधिकार मिलने के बाद CISF के डीआईजी के. पी. सिंह आसनसोल के शीतलपुर स्थित CISF मुख्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने वरिष्ठ कमांडेंट राहुल सिंह गौतम और अधिकारियों के साथ बैठक कर नई व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) मुख्यालय पहुंचकर सीएमडी सतीश झा के साथ भी बैठक की और अवैध खनन रोकने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। हाई लेवल बैठक के बाद लिया गया फैसला यह निर्णय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद लागू किया जा रहा है। विशेष रूप से झारखंड के धनबाद और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती कोयला चोरी की घटनाओं को देखते हुए सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। 'जीरो कोल लीकेज प्लान' पर जोर सरकार ने संवेदनशील खनन क्षेत्रों में CISF की तैनाती बढ़ाने और क्विक रिस्पांस टीम (QRT) गठित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अवैध कोयला परिवहन रोकने के लिए GST अधिकारियों की मदद से प्रत्येक कोयला वाहन के ई-वे बिल का मौके पर सत्यापन भी किया जाएगा। माफियाओं पर होगी कड़ी कार्रवाई सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय संपदा की चोरी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। CISF को मिले नए कानूनी अधिकारों से अवैध खनन और कोयला तस्करी में शामिल माफियाओं के खिलाफ तेज और प्रभावी कार्रवाई संभव होगी।  

Deepshikha जुलाई 8, 2026 0
Smartphone displaying security warning after suspected cyber fraud drained money from a bank account.
फोन अपने आप फॉर्मेट, ऐप्स गायब और खाते से उड़ गए 95 हजार रुपये! CISF जवान के साथ हुआ चौंकाने वाला डिजिटल फ्रॉड

मुंबई में तैनात एक CISF कॉन्स्टेबल के साथ साइबर ठगी का ऐसा मामला सामने आया है जिसने साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है। आमतौर पर डिजिटल फ्रॉड के मामलों में फर्जी लिंक, ओटीपी शेयरिंग या स्क्रीन-शेयरिंग ऐप्स का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इस मामले में घटनाक्रम बिल्कुल अलग और अधिक चिंताजनक दिखाई देता है। रिपोर्ट के मुताबिक, 34 वर्षीय CISF जवान का स्मार्टफोन अचानक अपने आप रीसेट (फॉर्मेट) हो गया। फोन के रीस्टार्ट होने के बाद उसमें मौजूद सभी एप्लिकेशन गायब हो चुके थे। शुरुआत में इसे तकनीकी खराबी समझा गया, लेकिन जब जवान ने दोबारा फोन सेटअप कर जरूरी ऐप्स इंस्टॉल किए और बैंक बैलेंस चेक किया, तो उनके होश उड़ गए। उनके बैंक खाते से कुल 95,668 रुपये निकाले जा चुके थे। कैसे हुआ पूरा घटनाक्रम? मामले की जानकारी के अनुसार, जवान एक चीनी ब्रांड के स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहे थे। अचानक फोन फॉर्मेट हो गया और उसमें मौजूद सभी ऐप्स हट गए। इसके बाद उन्होंने फोन को दोबारा सेटअप किया और जरूरी एप्लिकेशन, जिनमें पेमेंट और बैंकिंग ऐप्स भी शामिल थे, फिर से डाउनलोड किए। जब उन्होंने अपने खाते का बैलेंस चेक किया, तब पता चला कि बड़ी रकम पहले ही ट्रांसफर की जा चुकी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उन्हें किसी संदिग्ध कॉल, लिंक, ओटीपी या बैंकिंग अलर्ट के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। जवान ने तुरंत उठाया यह कदम धोखाधड़ी का पता चलते ही CISF कॉन्स्टेबल ने बिना देर किए अपने बैंक से संपर्क कर खाते को ब्लॉक कराया। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और मामले की सूचना पुलिस को दी। समय रहते कार्रवाई करने से आगे होने वाले संभावित नुकसान को रोका जा सका। जांच में क्या सामने आया? पुलिस जांच में पता चला कि जिस खाते में रकम ट्रांसफर हुई, वह एक ऐसे मोबाइल नंबर से जुड़ा हुआ था जिसके बारे में पीड़ित को कोई जानकारी नहीं थी। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फोन का अचानक फॉर्मेट होना तकनीकी खराबी थी या किसी साइबर हमले का हिस्सा। जांच का फोकस इस बात पर है कि क्या किसी मैलवेयर, स्पाइवेयर या रिमोट एक्सेस तकनीक के जरिए फोन पर नियंत्रण हासिल किया गया था। क्यों बढ़ी चिंता? यह मामला इसलिए गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इसमें पारंपरिक साइबर फ्रॉड के संकेत नहीं मिले। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आजकल ऐसे एडवांस्ड मैलवेयर मौजूद हैं जो स्मार्टफोन को रिमोटली कंट्रोल कर सकते हैं, डेटा चुरा सकते हैं और बैंकिंग गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं। यदि फोन का फॉर्मेट होना किसी साइबर हमले का हिस्सा साबित होता है, तो यह डिजिटल ठगी का एक नया और बेहद खतरनाक तरीका हो सकता है। खुद को कैसे सुरक्षित रखें? फोन में इंस्टॉल सभी ऐप्स की नियमित जांच करें। केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही ऐप डाउनलोड करें। अनजान स्रोतों से APK फाइल इंस्टॉल न करें। फोन की परमिशन सेटिंग्स समय-समय पर चेक करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन 1930 से संपर्क करें। मोबाइल और बैंकिंग ऐप्स में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्रिय रखें। फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम और सुरक्षा अपडेट नियमित रूप से इंस्टॉल करें। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीके विकसित कर रहे हैं। ऐसे में केवल ओटीपी या लिंक से सावधान रहना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपने स्मार्टफोन की सुरक्षा पर भी लगातार नजर रखना बेहद जरूरी हो गया है।  

surbhi जून 3, 2026 0
CAPF personnel deployed in West Bengal for law and order duties after elections under central government approval.
बंगाल में 20 जून तक तैनात रहेंगी CAPF की 500 कंपनियां, गृह मंत्रालय ने दी मंजूरी

पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) की 500 कंपनियां फिलहाल राज्य में तैनात रहेंगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने गृह मंत्रालय से 180 दिनों तक केंद्रीय बलों की तैनाती जारी रखने का आग्रह किया था। केंद्र सरकार ने फिलहाल 20 जून तक इसकी मंजूरी दी है। चुनाव के बाद भी तैनात रखे गए थे केंद्रीय बल विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद पश्चिम बंगाल में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीएपीएफ की 500 कंपनियों को राज्य में तैनात किया गया था। पिछले चुनावों के बाद हुई हिंसक घटनाओं को ध्यान में रखते हुए इस बार मतदान खत्म होने के बाद भी केंद्रीय बलों को नहीं हटाया गया था। गत सप्ताह राज्य की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के बाद गृह मंत्रालय ने इन बलों को चरणबद्ध तरीके से वापस बुलाने की प्रक्रिया शुरू की थी। पहले चरण में 100 कंपनियों यानी करीब 10 हजार जवानों को हटाने का आदेश जारी किया गया था। गृह मंत्रालय ने जारी किया नया आदेश केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी नए आदेश के अनुसार, अब 20 जून तक राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती जारी रहेगी। आदेश में कहा गया है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए विभिन्न बलों की कुल 500 कंपनियां पश्चिम बंगाल में मौजूद रहेंगी। इनमें: केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 200 कंपनियां सीमा सुरक्षा बल (BSF) की 150 कंपनियां केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की 50 कंपनियां भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की 50 कंपनियां सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 50 कंपनियां शामिल हैं। राज्य सरकार को करनी होगी व्यवस्थाएं गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि केंद्रीय बलों की तैनाती के दौरान ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक सपोर्ट और जवानों के ठहरने की व्यवस्था राज्य सरकार को करनी होगी। साथ ही बलों की सभी ऑपरेशनल जरूरतों का भी ध्यान रखने को कहा गया है। पहले चरण में हटनी थीं 100 कंपनियां गृह मंत्रालय ने पहले चरण में 100 कंपनियों को वापस बुलाने का फैसला लिया था। इनमें CRPF की 40, BSF की 30, CISF की 10, ITBP की 10 और SSB की 10 कंपनियां शामिल थीं। आदेश के मुताबिक 15 मई से इन कंपनियों को कानून व्यवस्था ड्यूटी से हटाया जाना था। सुरक्षा समीक्षा के बाद लिया गया फैसला राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हुई समीक्षा बैठक में पश्चिम बंगाल गृह विभाग और केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारी शामिल हुए थे। खुफिया एजेंसियों से भी विशेष रिपोर्ट मांगी गई थी। समीक्षा में बताया गया कि चुनाव के बाद फिलहाल राज्य में स्थिति शांतिपूर्ण है और बड़े राजनीतिक प्रदर्शन या हिंसा की घटनाएं नहीं हुई हैं। वहीं बांग्लादेश सीमा से लगने वाले इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। सीमा सुरक्षा बल घुसपैठ रोकने के लिए लगातार सतर्क है और कई इलाकों में फेंसिंग का काम भी शुरू किया जा रहा है।  

surbhi मई 21, 2026 0
Security personnel inspecting Lufthansa flight at Hyderabad airport after bomb threat alert
Bomb Threat: फ्रैंकफर्ट से हैदराबाद आ रही फ्लाइट में बम की धमकी, एयरपोर्ट पर मचा हड़कंप

Rajiv Gandhi International Airport पर शुक्रवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब जर्मनी के फ्रैंकफर्ट से आ रही एक अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट को बम से उड़ाने की धमकी मिली। धमकी मिलने के बाद एयरपोर्ट की सुरक्षा एजेंसियां तुरंत अलर्ट मोड में आ गईं और विमान की इमरजेंसी जांच शुरू कर दी गई। उड़ान के दौरान मिला धमकी भरा ईमेल जानकारी के मुताबिक, Lufthansa की फ्लाइट LH-754 फ्रैंकफर्ट से हैदराबाद आ रही थी। इसी दौरान एयरलाइन के कस्टमर सपोर्ट को एक ईमेल मिला, जिसमें दावा किया गया कि विमान में बम रखा गया है और शमशाबाद पहुंचने से पहले उसे उड़ा दिया जाएगा। धमकी मिलते ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल, CISF और एयरपोर्ट सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत विमान की निगरानी बढ़ा दी गई। सुरक्षित लैंडिंग के बाद आइसोलेशन बे में ले जाया गया विमान राहत की बात यह रही कि फ्लाइट सुरक्षित तरीके से हैदराबाद एयरपोर्ट पर उतर गई। लैंडिंग के तुरंत बाद विमान को आइसोलेशन बे में ले जाया गया, जहां सुरक्षा एजेंसियों और बम निरोधक दस्ते ने गहन जांच शुरू की। यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और उनकी भी सुरक्षा जांच की गई। शुरुआती जांच में किसी भी तरह की संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां अभी भी पूरे मामले की जांच कर रही हैं। ईमेल भेजने वाले की तलाश जारी अधिकारियों ने बताया कि धमकी भरा ईमेल किसने भेजा और उसका स्रोत क्या है, इसकी जांच साइबर और सुरक्षा एजेंसियों की मदद से की जा रही है। फिलहाल एयरपोर्ट पर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। एयरपोर्ट पर विदेशी करेंसी भी बरामद इसी बीच एयरपोर्ट से एक और बड़ा मामला सामने आया। सुरक्षा जांच के दौरान एक यात्री के पास से करीब 11.85 लाख रुपये मूल्य की विदेशी मुद्रा बरामद की गई। अधिकारियों के मुताबिक, यात्री की पहचान सैयद इस्माइल अली के रूप में हुई है, जो बैंकॉक जाने की तैयारी में था। बैगेज स्क्रीनिंग के दौरान CISF जवानों को उसके बैग में संदिग्ध विदेशी करेंसी दिखाई दी, जिसके बाद उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई। फिलहाल अधिकारियों ने पूरी विदेशी मुद्रा जब्त कर ली है और जांच की जा रही है कि इतनी बड़ी रकम कहां से लाई गई और उसे बैंकॉक क्यों ले जाया जा रहा था।  

surbhi मई 15, 2026 0
CISF jawan arrested in Asansol after alleged attempt to assault a minor girl
आसनसोल: मासूम से दरिंदगी की कोशिश में सुरक्षा बल का जवान गिरफ्तार, इलाके में भारी तनाव

पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्द्धमान जिले के आसनसोल से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने वाली एक शर्मनाक घटना सामने आई है। यहाँ केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के एक जवान को 10 साल की बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न के प्रयास के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। लालच देकर जाल में फंसाया यह घटना रविवार दोपहर की है, जब लाल बाजार इलाके के पास दो छोटी बच्चियां (उम्र 5 और 10 वर्ष) कच्चे आम चुनने के लिए सरकारी क्वार्टरों की ओर गई थीं। आरोपी जवान, जिसकी पहचान रमाकांत विश्वकर्मा (40) के रूप में हुई है, ने बच्चियों को अधिक आम देने का प्रलोभन दिया। वह उन्हें अपनी स्कूटी पर बैठाकर एक सुनसान क्वार्टर में ले गया, जहाँ उसने बड़ी बच्ची के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। बच्ची की बहादुरी और लोगों का गुस्सा बच्ची द्वारा शोर मचाए जाने पर आरोपी घबराकर मौके से फरार हो गया। जैसे ही यह खबर स्थानीय निवासियों तक पहुँची, क्षेत्र में भारी जनाक्रोश फैल गया। न्याय की मांग को लेकर ग्रामीणों ने: शीतलपुर गेट नंबर 3 पर सड़क जाम कर दी। CISF कैंप के बाहर जोरदार प्रदर्शन कर तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। पुलिस की त्वरित कार्रवाई पीड़िता के पिता और स्थानीय प्रतिनिधियों द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने सक्रियता दिखाई। आरोपी जवान को कुछ ही घंटों के भीतर हिरासत में ले लिया गया। पुलिस के अनुसार: आरोपी के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आरोपी चुनाव ड्यूटी पर नहीं, बल्कि कोयला खदानों की सुरक्षा के नियमित कार्य में तैनात था। वर्तमान में स्थिति को देखते हुए पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है और इलाके में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्कता बरती जा रही है।  

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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