crude oil prices

Crude Oil Price
अमेरिका-ईरान वार्ता में गतिरोध से कच्चा तेल महंगा, ब्रेंट 88 डॉलर के करीब पहुंचा

नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे को लेकर चल रही बातचीत में प्रगति नहीं होने से वैश्विक कच्चे तेल बाजार में चिंता बढ़ गई है। वार्ता में गतिरोध के बीच तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली और ब्रेंट क्रूड 88 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। बाजार में आशंका है कि दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने से तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।   वार्ता में प्रगति नहीं होने से बढ़ी चिंता   अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत लंबे समय से चल रही है। बाजार की उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच किसी समझौते से ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील मिल सकती है और वैश्विक बाजार में ईरानी तेल की आपूर्ति बढ़ सकती है।   हालांकि, वार्ता में अपेक्षित प्रगति नहीं होने से यह संभावना कमजोर हुई है। निवेशकों ने संभावित आपूर्ति जोखिम को देखते हुए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के साथ प्रतिक्रिया दी है।   होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी नजर   तेल बाजार में सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है और खाड़ी क्षेत्र से होने वाले तेल निर्यात के लिए बेहद अहम है।   अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने की स्थिति में इस समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर डाल सकता है। इसी आशंका के कारण बाजार में जोखिम प्रीमियम बढ़ सकता है।   भारत पर पड़ सकता है सीधा असर   कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी भारत के लिए चिंता बढ़ा सकती है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल और डॉलर की मांग बढ़ सकती है।   महंगे कच्चे तेल का असर रुपये पर भी पड़ सकता है। अगर रुपया कमजोर होता है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो घरेलू अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पैदा हो सकता है।   आगे तेल बाजार की दिशा पर नजर   अब बाजार की नजर अमेरिका-ईरान वार्ता की अगली गतिविधियों और पश्चिम एशिया की स्थिति पर है। अगर दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है तो तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है। वहीं बातचीत पूरी तरह विफल होने या क्षेत्रीय तनाव बढ़ने पर कच्चे तेल में और तेजी देखने को मिल सकती है।   भारत समेत दुनिया भर के बाजारों के लिए आने वाले दिनों में ब्रेंट क्रूड, डॉलर की चाल और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रम महत्वपूर्ण संकेतक बने रहेंगे।

anjali kumari अगस्त 11, 2026 0
Indian stock market opens higher as Sensex gains 500 points and Nifty crosses 24,500 amid falling crude oil prices
Share Market Opening: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बाजार में रौनक, सेंसेक्स 500 अंक उछला; निफ्टी 24,500 के पार

नई दिल्ली: अगस्त के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत की। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट के बीच घरेलू बाजार में खरीदारी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 500 अंक से अधिक चढ़ गया, जबकि NSE Nifty 50 ने 24,500 का स्तर पार कर लिया। बाजार में यह लगातार चौथा कारोबारी सत्र है जब प्रमुख सूचकांकों में तेजी देखने को मिली है। निवेशकों के सेंटीमेंट को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और रुपये की मजबूती से भी सहारा मिला। सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार तेजी सुबह करीब 9:25 बजे सेंसेक्स 491.33 अंक यानी 0.63 फीसदी की बढ़त के साथ 78,585.97 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 50 150.40 अंक यानी 0.62 फीसदी चढ़कर 24,534 अंक के आसपास पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स के 30 में से 28 शेयर बढ़त के साथ खुले। इससे बाजार में व्यापक खरीदारी का संकेत मिला। IndiGo समेत इन शेयरों में तेजी शुरुआती कारोबार में IndiGo सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाले सेंसेक्स शेयरों में रहा। इसके अलावा ITC, Tata Steel, TCS, Bajaj Finance, Infosys, Bajaj Finserv, Asian Paints और BEL जैसे प्रमुख शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। दूसरी तरफ Titan और Sun Pharma दबाव में रहे। बाद के शुरुआती कारोबार में Maruti Suzuki और Sun Pharma में भी कमजोरी दर्ज की गई। ITC, Bajaj Finance और IndiGo टॉप गेनर्स में सुबह करीब 9:30 बजे के आंकड़ों के मुताबिक Sensex में ITC करीब 3.88 फीसदी की बढ़त के साथ सबसे आगे था। Bajaj Finance में करीब 2.60 फीसदी, Bajaj Finserv में 2.59 फीसदी और IndiGo में करीब 2.49 फीसदी तेजी रही। TCS, L&T, Asian Paints, Eternal, Infosys और Mahindra & Mahindra समेत कई बड़े शेयर भी हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। वहीं Sun Pharma करीब 2.31 फीसदी और Maruti Suzuki करीब 1.93 फीसदी नीचे था। Broader Market में भी खरीदारी सिर्फ बड़े शेयरों तक ही तेजी सीमित नहीं रही। शुरुआती कारोबार में Nifty Midcap करीब 0.42 फीसदी और Nifty Smallcap करीब 0.54 फीसदी मजबूत रहा। सेक्टर की बात करें तो FMCG और Metal शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जबकि Media सेक्टर का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में निवेशकों की भागीदारी केवल चुनिंदा लार्ज-कैप शेयरों तक सीमित नहीं थी। रुपये को भी मिला सहारा शेयर बाजार की तेजी के साथ भारतीय रुपये में भी मजबूती देखने को मिली। डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 0.25 फीसदी मजबूत होकर 95.1450 के स्तर पर खुला। इससे पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.38 के स्तर पर बंद हुआ था। रुपये की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। कच्चे तेल में करीब 5 फीसदी की गिरावट बाजार की तेजी के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट एक अहम वजह रही। अमेरिका की ओर से ईरान के साथ बातचीत शुरू होने की उम्मीद के बीच तेल बाजार में दबाव देखने को मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, Brent crude करीब 5 फीसदी गिरकर 83.53 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं WTI crude करीब 5.67 फीसदी गिरकर 79.87 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए सकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि इससे आयात बिल, महंगाई और चालू खाते पर दबाव कम होने की संभावना रहती है। निवेशकों की नजर अब आगे के संकेतों पर हालांकि शुरुआती तेजी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन निवेशकों के लिए आगे भी कई वैश्विक और घरेलू कारक महत्वपूर्ण रहेंगे। पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें, रुपये की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कंपनियों के नतीजे बाजार की दिशा प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए शुरुआती तेजी को देखते हुए निवेशकों के लिए बाजार में जल्दबाजी के बजाय जोखिम और अपनी निवेश रणनीति को ध्यान में रखना जरूरी है।  

surbhi अगस्त 3, 2026 0
Crude Oil Prices
कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार, वैश्विक महंगाई और बाजारों पर बढ़ा दबाव

लंदन, एजेंसियां। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, लाल सागर में तेल टैंकरों पर हमलों और वैश्विक आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता और बढ़ सकती है।   मध्य पूर्व संकट से आपूर्ति पर बढ़ा खतरा   यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में सऊदी तेल टैंकरों पर हमले के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता गहरा गई है। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। कई शिपिंग कंपनियां अपने जहाजों के मार्ग बदलने पर विचार कर रही हैं, जिससे परिवहन लागत भी बढ़ने की आशंका है।   महंगाई और शेयर बाजार पर दिख सकता है असर   कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। भारत जैसे तेल आयातक देशों में पेट्रोल-डीजल की लागत बढ़ने, महंगाई पर दबाव आने और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना जताई जा रही है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है, तो केंद्रीय बैंकों के लिए महंगाई पर नियंत्रण रखना और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

anjali kumari जुलाई 24, 2026 0
Oil Price Surge
कच्चे तेल की कीमत 92 डॉलर प्रति बैरल के पार, भारत के आयात बिल और महंगाई पर बढ़ी चिंता

मुंबई, एजेंसियां। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी जारी है। बुधवार को ब्रेंट क्रूड 92 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिससे भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों की चिंता बढ़ गई है। मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के कारण तेल की कीमतों में यह उछाल देखने को मिला।   भारत के आयात बिल पर बढ़ेगा दबाव   भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इससे चालू खाते के घाटे (CAD) और सरकारी वित्तीय संतुलन पर भी असर पड़ सकता है।   महंगाई और ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है असर   कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और परिवहन लागत पर पड़ सकता है। यदि वैश्विक बाजार में यह तेजी जारी रहती है, तो आने वाले समय में महंगाई बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। इसका प्रभाव खाद्य पदार्थों, लॉजिस्टिक्स और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।   सरकार और बाजार की नजर वैश्विक घटनाक्रम पर   विश्लेषकों के अनुसार, फिलहाल बाजार की नजर मध्य-पूर्व की स्थिति और वैश्विक तेल आपूर्ति पर बनी हुई है। यदि तनाव और बढ़ता है या आपूर्ति प्रभावित होती है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमतों में और उछाल आ सकता है। वहीं, सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर महंगाई के असर को कम करने के लिए कदम उठा सकती है।

anjali kumari जुलाई 22, 2026 0
RBI Intervention
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से रुपया दो महीने के निचले स्तर पर, RBI के हस्तक्षेप की उम्मीद बढ़ी

मुंबई, एजेंसियां। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी और डॉलर की मजबूती के बीच भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब दो महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है। विदेशी मुद्रा बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच निवेशकों की नजर अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पर है, जिससे जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप की उम्मीद जताई जा रही है।    तेल की महंगाई से बढ़ा दबाव   विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगा कच्चा तेल रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है।    डॉलर की मजबूती भी बनी वजह   अमेरिकी डॉलर के वैश्विक स्तर पर मजबूत होने और विदेशी निवेशकों की सतर्कता के कारण उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ा है। इसका असर भारतीय रुपये पर भी देखने को मिला, जिससे कारोबार के दौरान इसकी कीमत दो महीने के न्यूनतम स्तर तक पहुंच गई।    RBI पर टिकी बाजार की नजर   विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि रुपये में कमजोरी का सिलसिला जारी रहता है, तो RBI डॉलर की बिक्री या अन्य उपायों के जरिए बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है। इससे रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।    आगे बाजार पर रहेगा वैश्विक घटनाक्रम का असर   विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिका की मौद्रिक नीति और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां रुपये की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है, तो भारतीय मुद्रा पर दबाव और बढ़ सकता है।

anjali kumari जुलाई 21, 2026 0
Pritam and Pedro
राजकुमार हिरानी के बेटे वीर हिरानी ने किया बॉलीवुड डेब्यू, बोले- अरशद वारसी मेरे सबसे बड़े मार्गदर्शक रहे

मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड के मशहूर निर्देशक राजकुमार हिरानी के बेटे वीर हिरानी ने अभिनय की दुनिया में कदम रख दिया है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वेब सीरीज़ 'प्रीतम एंड पेड्रो' से की है। डेब्यू के बाद वीर ने अपने सह-कलाकार अरशद वारसी का विशेष रूप से धन्यवाद देते हुए कहा कि शूटिंग के दौरान उन्होंने हर कदम पर उनका मार्गदर्शन किया और आत्मविश्वास बढ़ाया।   "अरशद सर ने हर सीन में मेरा साथ दिया"   वीर हिरानी ने कहा कि अभिनय की शुरुआत उनके लिए चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन अरशद वारसी ने उन्हें सहज महसूस कराया। उन्होंने बताया, "अरशद सर लगातार मुझे गाइड करते रहे। हर सीन के बाद समझाते थे कि क्या बेहतर किया जा सकता है। उनके साथ काम करना मेरे लिए किसी अभिनय स्कूल से कम नहीं था।"   राजकुमार हिरानी ने नहीं दिया कोई विशेष फायदा   वीर के डेब्यू को लेकर पहले ही राजकुमार हिरानी स्पष्ट कर चुके थे कि बेटे होने का उन्हें कोई विशेष लाभ नहीं मिला। उन्होंने वीर से दूसरे कलाकारों की तरह ऑडिशन दिलवाया और भूमिका योग्यता के आधार पर ही मिली। वीर ने भी कई ऑडिशन टेप रिकॉर्ड किए और चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही उन्हें यह मौका मिला।   विक्की कौशल ने भी की तारीफ   अभिनेता विक्की कौशल ने भी वीर हिरानी के अभिनय की सराहना की। उन्होंने कहा कि उन्होंने वीर को 'संजू' के सेट पर एक असिस्टेंट के रूप में काम करते देखा था और अब उन्हें मुख्य भूमिका निभाते देखना बेहद खुशी की बात है। विक्की ने कहा कि वीर ने अपने प्रदर्शन से साबित किया है कि उन्होंने मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है।   'प्रीतम एंड पेड्रो' को मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया   राजकुमार हिरानी की पहली OTT सीरीज़ 'प्रीतम एंड पेड्रो' को दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। साइबर क्राइम और कॉमेडी पर आधारित इस सीरीज़ में अरशद वारसी, वीर हिरानी और विक्रांत मैसी अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। दर्शकों और समीक्षकों ने वीर के आत्मविश्वासपूर्ण अभिनय की भी सराहना की है।

abhishek singh जुलाई 14, 2026 0
Indian stock market screen showing Sensex and Nifty decline amid global tensions and investor selling.
शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: सेंसेक्स 600 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी 24,000 के करीब; जानें गिरावट की बड़ी वजहें

सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 600 से अधिक अंक टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी 24,000 के आसपास कारोबार करता नजर आया। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया। क्यों टूटा शेयर बाजार? मंगलवार को बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से महंगाई और आयात बिल बढ़ने की आशंका रहती है, जिसका असर सीधे शेयर बाजार पर देखने को मिलता है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ा दबाव बाजार पर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली का भी असर पड़ा। वैश्विक स्तर पर जोखिम बढ़ने के कारण विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे भारतीय बाजार में दबाव बढ़ा है। वैश्विक बाजारों से भी मिले कमजोर संकेत एशियाई और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कमजोरी का माहौल देखने को मिला। निवेशक फिलहाल वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। इसका असर भारतीय बाजार की कारोबारी शुरुआत से ही दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतें बनी चिंता विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विश्लेषकों के अनुसार, मौजूदा गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक कारकों से प्रभावित है। ऐसे समय में निवेशकों को घबराहट में निर्णय लेने के बजाय बाजार की दिशा और वैश्विक घटनाक्रम पर नजर रखते हुए लंबी अवधि की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
Stock market display showing Sensex and Nifty falling sharply amid global market uncertainty and rising crude oil prices.
Share Market Today: सेंसेक्स 600 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी 24,250 के नीचे; जानिए बाजार में गिरावट की 3 बड़ी वजहें

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को तेज गिरावट देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 600 अंकों से अधिक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 24,250 के नीचे फिसल गया। हाल के सप्ताहों में आई तेजी के बाद निवेशकों ने एक बार फिर सतर्क रुख अपनाया है। विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में गिरावट की मुख्य वजहें अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली हैं। 1. अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी कच्चे तेल की कीमतें बाजार पर सबसे बड़ा असर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का पड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 2 प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 76 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है, जिसका असर शेयर बाजार पर भी दिखाई देता है। 2. वैश्विक टेक शेयरों में बिकवाली अमेरिकी शेयर बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। Nasdaq Composite में 1.16% की गिरावट S&P 500 में 0.45% की गिरावट Dow Jones में 0.25% की कमजोरी सेमीकंडक्टर और AI से जुड़े शेयरों में बिकवाली का असर एशियाई बाजारों और भारतीय बाजार पर भी पड़ा। 3. AI सेक्टर को लेकर निवेशकों की चिंता दक्षिण कोरिया की Samsung Electronics ने मजबूत तिमाही नतीजों का अनुमान दिया, लेकिन इसके बावजूद निवेशकों ने मुनाफावसूली की। वहीं, चीन के AI स्टार्टअप DeepSeek द्वारा अपना AI चिप विकसित करने की खबर के बाद वैश्विक चिप कंपनियों के भविष्य को लेकर भी नई चिंताएं बढ़ गई हैं। इन घटनाओं ने AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर के शेयरों में दबाव बढ़ाया, जिसका असर वैश्विक निवेशकों की धारणा पर भी पड़ा। FII निवेश बना सकारात्मक संकेत गिरावट के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीदारी भारतीय बाजार के लिए राहत की खबर मानी जा रही है। मंगलवार को: FII ने ₹393.19 करोड़ के शेयर खरीदे। DII ने ₹383.43 करोड़ के शेयर बेचे। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं, तो विदेशी निवेश भारतीय बाजार का समर्थन जारी रख सकते हैं। निवेशकों की नजर किन बातों पर रहेगी? आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में तीन प्रमुख कारक अहम रहेंगे— अमेरिका-ईरान तनाव की आगे की स्थिति कच्चे तेल की कीमतों का रुख जून तिमाही के कॉरपोरेट नतीजे इन कारकों को लेकर स्पष्टता आने तक भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना जताई जा रही है। नोट: शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले वित्तीय सलाहकार से परामर्श करना उचित है।  

surbhi जुलाई 8, 2026 0
Donald Trump
ट्रम्प का तेल कंपनियों पर सख्त रुख, बोले- कच्चा तेल सस्ता हुआ तो पेट्रोल के दाम भी तुरंत घटाएं जाए

वाशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पेट्रोल बेचने वाली तेल कंपनियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट का लाभ तुरंत उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत घटकर करीब 68 डॉलर प्रति बैरल रह गई है, लेकिन इसके बावजूद पेट्रोल की खुदरा कीमतों में अपेक्षित कमी नहीं की गई है।   'लोगों से जरूरत से ज्यादा पैसे वसूले जा रहे' ट्रम्प ने कहा कि जब कच्चा तेल लगातार सस्ता हो रहा है, तब भी आम अमेरिकी उपभोक्ताओं से अधिक कीमत वसूली जा रही है। उन्होंने तेल कंपनियों से पेट्रोल की कीमत लगभग 2.50 डॉलर प्रति गैलन तक लाने की अपील की। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं से अनावश्यक रूप से अधिक पैसे लेना स्वीकार्य नहीं है और इसे गैरकानूनी माना जा सकता है।   तेल कंपनियों को दी सख्त चेतावनी राष्ट्रपति ट्रम्प ने साफ शब्दों में कहा कि यदि कंपनियों ने जल्द कीमतों में कटौती नहीं की, तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी। इससे पहले भी ट्रम्प अमेरिकी न्याय विभाग को बड़ी तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण संबंधी गतिविधियों की जांच के निर्देश दे चुके हैं।   मध्य पूर्व तनाव के बाद बदला बाजार का रुख हाल के दिनों में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया था। हालांकि अब स्थिति कुछ सामान्य होने के साथ तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में अपेक्षित कमी नहीं आने पर ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई है।   ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका में महंगाई और ईंधन की कीमतें आम लोगों के लिए बड़ा मुद्दा बनी हुई हैं। राष्ट्रपति का कहना है कि बाजार में पारदर्शिता और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है।

anjali kumari जून 30, 2026 0
India and Iran energy cooperation discussions during meeting with Iranian oil minister in New Delhi
भारत-ईरान के बीच बढ़ सकता है ऊर्जा सहयोग, दिल्ली पहुंचे ईरानी तेल मंत्री ने दिए बड़ी ट्रेड डील के संकेत

नई दिल्ली: भारत और Iran के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग का नया अध्याय शुरू होने के संकेत मिले हैं। ब्रिक्स देशों की ऊर्जा मंत्रिस्तरीय बैठकों में हिस्सा लेने भारत पहुंचे ईरानी पेट्रोलियम मंत्री Mohsen Paknejad ने कहा है कि ईरान भारत के साथ आर्थिक और ऊर्जा क्षेत्र में संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उनके इस बयान को भारत और ईरान के बीच तेल, गैस और निवेश से जुड़ी संभावित बड़ी साझेदारियों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भारत के साथ सहयोग बढ़ाने को तैयार ईरान नई दिल्ली पहुंचने के बाद मोहसिन पाकनेजाद ने कहा कि भारत और ईरान के संबंध केवल आर्थिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से भी बेहद मजबूत रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। ईरानी मंत्री के अनुसार, ब्रिक्स देशों की बैठकों के साथ-साथ भारत के अधिकारियों के साथ होने वाली द्विपक्षीय वार्ताओं में ऊर्जा, निवेश और व्यापार से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि ईरान भारत के साथ हर संभव आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है, खासकर तेल और गैस क्षेत्र में। तेल और गैस सेक्टर पर रहेगा फोकस ईरानी प्रतिनिधिमंडल की इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है। सूत्रों के अनुसार दोनों देशों के बीच निम्नलिखित मुद्दों पर चर्चा हो सकती है— कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस आपूर्ति को लेकर सहयोग ऊर्जा क्षेत्र में संयुक्त निवेश की संभावनाएं पेट्रोकेमिकल उद्योग में साझेदारी ऊर्जा सुरक्षा और दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते वैश्विक ऊर्जा बाजार की वर्तमान स्थिति पर विचार-विमर्श भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातकों में शामिल है, जबकि ईरान विशाल तेल और गैस भंडार वाला देश है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रतिबंधों और 60 दिन की छूट पर भी चर्चा अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से जुड़े सवाल पर ईरानी तेल मंत्री ने कहा कि वर्तमान में ईरान को 60 दिनों की छूट प्राप्त है और इसी आधार पर आगे की रणनीति तय की जा रही है। उन्होंने संकेत दिया कि इस विषय पर विस्तृत जानकारी बैठकों के समापन के बाद साझा की जा सकती है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि ईरान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद अपने आर्थिक साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह साझेदारी? भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार नए स्रोतों और साझेदारियों की तलाश कर रहा है। यदि भारत और ईरान के बीच ऊर्जा सहयोग मजबूत होता है, तो इससे— भारत को तेल और गैस की आपूर्ति में विविधता मिलेगी। ऊर्जा आयात लागत कम करने में मदद मिल सकती है। दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नया आयाम मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक माहौल में भारत और ईरान के बीच ऊर्जा सहयोग दोनों देशों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी इस बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य होने के बाद बाजार में आपूर्ति संबंधी चिंताएं कम हुई हैं। गुरुवार सुबह अंतरराष्ट्रीय बाजार में: Brent Crude लगभग 72.42 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। WTI Crude लगभग 69.19 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर रहा। तेल कीमतों में यह गिरावट ऊर्जा आयातक देशों के लिए राहत की खबर मानी जा रही है।  

surbhi जून 25, 2026 0
Fuel station display showing updated petrol and diesel prices for June 23, 2026.
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में नहीं हुआ बड़ा बदलाव, जानें 23 जून 2026 के ताजा रेट

Petrol Diesel Price Today 23 June 2026: देशभर में आज के लिए पेट्रोल और डीजल के नए दाम जारी कर दिए गए हैं। आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि 23 जून 2026 को ईंधन की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, कुछ शहरों में कुछ पैसों की बढ़ोतरी और गिरावट जरूर दर्ज की गई है। पिछले कुछ समय से अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही थी, लेकिन हालिया कूटनीतिक प्रगति के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में नरमी आई है। इसके बावजूद तेल विपणन कंपनियों ने फिलहाल घरेलू कीमतों को स्थिर बनाए रखा है। पेट्रोल के ताजा रेट राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹102.12 प्रति लीटर पर स्थिर बनी हुई है। पेट्रोल का ताजा भाव (₹ प्रति लीटर) शहर आज का रेट बदलाव लखनऊ ₹101.92 +₹0.03 पटना ₹113.37 -₹0.17 भागलपुर ₹114.78 +₹0.64 दरभंगा ₹113.90 -₹0.17 गया ₹114.40 -₹0.32 मुजफ्फरपुर ₹114.16 +₹0.06 देवघर ₹105.05 +₹0.10 धनबाद ₹105.27 -₹0.21 जमशेदपुर ₹105.22 -₹0.25 रांची ₹105.26 स्थिर दिल्ली ₹102.12 स्थिर कोलकाता ₹113.47 -₹0.04 मुंबई ₹111.21 +₹0.03 चेन्नई ₹107.76 -₹0.11 गुरुग्राम ₹102.97 +₹0.17 नोएडा ₹102.08 -₹0.01 बेंगलुरु ₹111.68 +₹1.07 भोपाल ₹114.65 +₹0.20 डीजल के ताजा रेट दिल्ली में डीजल की कीमत ₹95.20 प्रति लीटर पर स्थिर बनी हुई है। डीजल का ताजा भाव (₹ प्रति लीटर) शहर आज का रेट बदलाव लखनऊ ₹95.41 +₹0.05 पटना ₹99.36 -₹0.18 भागलपुर ₹100.68 +₹0.60 गया ₹100.35 -₹0.30 दरभंगा ₹99.86 -₹0.16 मुजफ्फरपुर ₹100.11 +₹0.06 देवघर ₹100.25 +₹0.10 धनबाद ₹100.49 -₹0.17 जमशेदपुर ₹100.42 -₹0.23 रांची ₹100.49 स्थिर दिल्ली ₹95.20 स्थिर कोलकाता ₹99.82 स्थिर मुंबई ₹97.83 स्थिर चेन्नई ₹99.55 -₹0.10 गुरुग्राम ₹95.64 +₹0.17 नोएडा ₹95.56 +₹0.02 बेंगलुरु ₹99.56 +₹1.02 भोपाल ₹99.74 +₹0.18 क्यों स्थिर हैं ईंधन के दाम? रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका द्वारा ईरान के तेल निर्यात पर अस्थायी छूट दिए जाने और स्विट्जरलैंड में हुई वार्ता के सकारात्मक संकेतों के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद बनी है। ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 78 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। इसके बावजूद तेल कंपनियां फिलहाल घरेलू बाजार में कीमतों में बदलाव करने से बच रही हैं। पेट्रोल-डीजल की कीमतें कैसे तय होती हैं? ईंधन की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं, जिनमें शामिल हैं: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी राज्य सरकारों द्वारा लगाया जाने वाला वैट (VAT)

surbhi जून 23, 2026 0
Oil storage tanks and crude oil facilities symbolize global supply disruptions caused by the Middle East conflict and energy crisis.
ईरान युद्ध से वैश्विक तेल बाजार पर गहरा असर, 115 करोड़ बैरल सप्लाई प्रभावित; रणनीतिक भंडार दशकों के निचले स्तर पर

  नई दिल्ली/वर्साय: ईरान से जुड़े क्षेत्रीय संघर्ष और मध्य-पूर्व में कई महीनों तक बनी अस्थिरता ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को गहरे संकट में डाल दिया है। एनालिटिक्स फर्म केपलर (Kpler) की एक रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के लगभग चार महीनों के दौरान वैश्विक बाजार से करीब 115 करोड़ बैरल (1.15 बिलियन बैरल) तेल की सप्लाई प्रभावित हुई, जिसका असर आने वाले महीनों तक बना रह सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, संघर्ष के दौरान मध्य-पूर्व से तेल आपूर्ति में भारी बाधा आई, जिसके कारण दुनिया भर के रणनीतिक (Strategic) और वाणिज्यिक (Commercial) तेल भंडार तेजी से घटे हैं। पिछले कुछ महीनों में वैश्विक भंडार से करीब 19 करोड़ बैरल तेल निकाला जा चुका है। रणनीतिक तेल भंडार कई दशकों के निचले स्तर पर रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) से जुड़े देशों के रणनीतिक तेल भंडार 1990 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। वहीं, अमेरिका का आपातकालीन तेल भंडार भी कई दशकों के निचले स्तर पर बताया जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वर्साय में आयोजित जी7 बैठक के दौरान कहा कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता, तो अमेरिकी तेल भंडार पर गंभीर दबाव पड़ सकता था। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा परिस्थितियों में भंडार कुछ ही हफ्तों में समाप्त होने की स्थिति तक पहुंच सकते थे। युद्धविराम के बाद कच्चे तेल की कीमतों में राहत अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौते तथा होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) के दोबारा खुलने की खबरों के बाद वैश्विक तेल बाजार को राहत मिली है। युद्ध के दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो अब घटकर 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में गिरावट के बावजूद सप्लाई पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लगेगा। सप्लाई चेन बहाली में लग सकते हैं कई महीने ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने के बाद भी तेल आपूर्ति तुरंत सामान्य नहीं हो सकती। समुद्री मार्गों की सुरक्षा, टैंकरों की उपलब्धता, उत्पादन बढ़ाने और लॉजिस्टिक नेटवर्क को फिर से पटरी पर लाने में कई महीने लग सकते हैं। RBC कैपिटल मार्केट्स की ऊर्जा विशेषज्ञ हेलिमा क्रॉफ्ट का कहना है कि बाजार जरूरत से ज्यादा आशावादी नजर आ रहा है। उनके अनुसार, संकट पूरी तरह समाप्त मान लेना जल्दबाजी होगी क्योंकि तेल आपूर्ति तंत्र के सामने अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं। OPEC उत्पादन बढ़ा सकता है इंफ्रास्ट्रक्चर कैपिटल एडवाइजर्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जे हैटफील्ड का मानना है कि आर्थिक दबाव का सामना कर रहे कई OPEC सदस्य देश उत्पादन बढ़ाने के पक्ष में हो सकते हैं। इससे बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आएगी और कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। मैक्वेरी ग्रुप के ग्लोबल ऑयल एंड गैस रणनीतिकार विकास द्विवेदी का कहना है कि युद्ध से पहले दुनिया के पास पर्याप्त तेल भंडार मौजूद था, जिससे बाजार पूरी तरह अस्थिर नहीं हुआ। उनका मानना है कि युद्ध के दौरान गायब हुई 115 करोड़ बैरल तेल आपूर्ति की भरपाई आसान नहीं होगी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि दुनिया मांग से प्रतिदिन 50 लाख बैरल अधिक तेल का उत्पादन भी करे, तब भी इस कमी को पूरा करने में लगभग एक वर्ष लग सकता है। दुनिया में रोजाना 10.3 करोड़ बैरल तेल उत्पादन अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) और अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में वर्तमान में प्रतिदिन औसतन 10.3 करोड़ बैरल कच्चे तेल का उत्पादन हो रहा है। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है और वैश्विक उत्पादन का लगभग 13 प्रतिशत हिस्सा अकेले देता है। इसके बाद सऊदी अरब, रूस, कनाडा और इराक का स्थान है। ये पांच देश मिलकर दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रमुख उत्पादक देशों में किसी भी प्रकार का युद्ध, प्रतिबंध या उत्पादन संकट सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार और पेट्रोल-डीजल की कीमतों को प्रभावित करता है।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Passenger aircraft at an airport as airlines maintain high ticket prices despite easing oil market concerns.
होर्मुज खुलने के बावजूद अभी सस्ते नहीं होंगे फ्लाइट टिकट, जानिए क्यों नहीं मिलेगा तुरंत राहत का फायदा

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने और समझौता होने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिल रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य के सामान्य होने से तेल आपूर्ति में सुधार की उम्मीद भी बढ़ी है, लेकिन इसके बावजूद हवाई यात्रियों को अभी सस्ती फ्लाइट टिकट का इंतजार करना पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले तीन से चार महीनों तक विमान किराए में बड़ी राहत मिलने की संभावना बेहद कम है। इस तिमाही में किराया घटने की उम्मीद कम एविएशन सेक्टर के जानकारों के मुताबिक अधिकांश एयरलाइंस आने वाले कुछ महीनों के लिए अपनी ऑपरेशनल लागत पहले ही तय कर चुकी हैं। ऐसे में ईंधन की कीमतों में गिरावट का सीधा असर तुरंत टिकटों पर नहीं दिखाई देगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में 10 प्रतिशत कमी भी आती है, तो इसका मतलब यह नहीं कि विमान किराया भी उतना ही घट जाएगा। अभी भी ऊंचे स्तर पर हैं ATF के दाम इजरायल-ईरान संघर्ष शुरू होने से पहले की तुलना में एयर टर्बाइन फ्यूल की कीमतें अभी भी काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। बढ़ती लागत के कारण दुनिया भर की कई एयरलाइंस को उड़ानों में कटौती करने और किराए बढ़ाने पड़े थे। अब जबकि हालात सामान्य होने की दिशा में बढ़ रहे हैं, तब भी ईंधन की कीमतों को पुराने स्तर तक पहुंचने में समय लगेगा। एयरलाइंस का सबसे बड़ा खर्च है ईंधन एविएशन उद्योग में जेट फ्यूल सबसे बड़ा खर्च माना जाता है। नए विमानों वाली एयरलाइंस के कुल संचालन खर्च का 25 से 35 प्रतिशत हिस्सा ATF पर खर्च होता है। पुराने विमानों का संचालन करने वाली कंपनियों के लिए यह खर्च 40 से 50 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। यही वजह है कि ईंधन की कीमतों में बदलाव का असर एयरलाइन कंपनियों की लागत पर सीधे पड़ता है। अभी टिकट सस्ते करने का दबाव नहीं युद्ध के दौरान बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा एयरलाइंस ने खुद वहन किया, जबकि बाकी भार यात्रियों पर बढ़े हुए किराए के रूप में डाला गया। अब कई एयरलाइंस को टिकट कीमतें घटाने की तत्काल जरूरत महसूस नहीं हो रही है, क्योंकि मौजूदा समय में यात्री ऊंचे किराए पर भी यात्रा करने को तैयार हैं। तेल उत्पादन और सप्लाई चेन को सामान्य होने में लगेगा समय विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध के दौरान खाड़ी क्षेत्र में कई तेल कुओं और संबंधित सुविधाओं को बंद कर दिया गया था। इन्हें दोबारा पूरी क्षमता से शुरू करने, रिफाइनरियों को सक्रिय करने और सप्लाई नेटवर्क को सामान्य बनाने में समय लगेगा। इसके अलावा, सुरक्षा कारणों से दूर चले गए तेल टैंकरों और शिपिंग नेटवर्क को भी पहले जैसी स्थिति में लौटने में कई सप्ताह या महीनों का समय लग सकता है। कब मिल सकती है राहत? अगर वैश्विक हालात स्थिर बने रहते हैं और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट जारी रहती है, तो वर्ष की अगली तिमाही में हवाई किराए में कुछ राहत देखने को मिल सकती है। हालांकि फिलहाल यात्रियों को महंगे टिकट के साथ ही यात्रा करनी पड़ सकती है।  

surbhi जून 19, 2026 0
Government raises windfall tax on diesel and ATF exports amid West Asia tensions
पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला, डीजल और ATF निर्यात पर बढ़ाया विंडफॉल टैक्स

डीजल और विमान ईंधन के निर्यात पर बढ़ी अतिरिक्त उत्पाद शुल्क दर पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) यानी विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स में बढ़ोतरी कर दी है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, डीजल निर्यात पर लगने वाला शुल्क 13.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं ATF निर्यात पर टैक्स 9.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 12.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। नई दरें 16 जून 2026 से लागू हो गई हैं। पेट्रोल निर्यात शुल्क में कोई बदलाव नहीं सरकार ने पेट्रोल निर्यात पर लगने वाले शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया है। पेट्रोल पर पहले की तरह 1.5 रुपये प्रति लीटर की दर से निर्यात शुल्क लागू रहेगा। इस फैसले से संकेत मिलता है कि सरकार फिलहाल डीजल और विमानन ईंधन की घरेलू उपलब्धता को प्राथमिकता देना चाहती है, जबकि पेट्रोल के मामले में मौजूदा व्यवस्था को बरकरार रखा गया है। आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा तत्काल असर सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली मौजूदा उत्पाद शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि इस फैसले का सीधा असर फिलहाल पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले ईंधन की कीमतों पर नहीं पड़ेगा और आम उपभोक्ताओं को तत्काल किसी अतिरिक्त बोझ का सामना नहीं करना होगा। क्यों बढ़ाया गया विंडफॉल टैक्स? सरकार ने मार्च 2026 में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच विंडफॉल टैक्स व्यवस्था को फिर से लागू किया था। उस समय क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया था। सरकार हर पंद्रह दिन में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन की समीक्षा कर निर्यात शुल्क में बदलाव करती रही है। 16 मई 2026 को पेट्रोल निर्यात को भी इस व्यवस्था के दायरे में शामिल किया गया था। घरेलू ईंधन आपूर्ति सुरक्षित रखना है लक्ष्य सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ती हैं, तब रिफाइनरी कंपनियां अधिक मुनाफे के लिए निर्यात बढ़ाने की कोशिश करती हैं। ऐसे में घरेलू आपूर्ति प्रभावित होने का जोखिम रहता है। इसी वजह से सरकार अतिरिक्त शुल्क लगाकर अत्यधिक निर्यात को नियंत्रित करना चाहती है। रिफाइनर कंपनियों की कमाई पर पड़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि डीजल और ATF निर्यात शुल्क बढ़ने से रिफाइनिंग कंपनियों के निर्यात लाभ में कुछ कमी आ सकती है। हालांकि यह कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। भारत दुनिया के प्रमुख रिफाइनिंग केंद्रों में शामिल है और बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करता है। ऐसे में सरकार संतुलन बनाते हुए घरेलू जरूरतों और वैश्विक व्यापार दोनों पर नजर बनाए हुए है। आगे क्या होगा? विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें और संभावित ईरान-अमेरिका समझौते की दिशा आने वाले दिनों में सरकार की कर नीति को प्रभावित कर सकती है। यदि वैश्विक बाजार में अस्थिरता जारी रहती है, तो विंडफॉल टैक्स में आगे भी संशोधन देखने को मिल सकता है।  

surbhi जून 16, 2026 0
Indian stock market rises for third straight day as IT stocks lead gains
ईरान-अमेरिका शांति समझौते से बाजार में जोश, लगातार तीसरे दिन चढ़ा शेयर बाजार; आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी

वैश्विक तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमत घटने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में तेजी देखने को मिली। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ, जिससे बाजार की शुरुआत हरे निशान में हुई। शुरुआती कारोबार में S&P BSE Sensex 306.22 अंक यानी 0.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,570.55 पर पहुंच गया। वहीं Nifty 50 72.95 अंक या 0.31 प्रतिशत चढ़कर 23,926.85 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। ईरान-अमेरिका समझौते से कच्चे तेल में गिरावट बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक शांति समझौते की खबर रही। इससे लंबे समय तक चलने वाले भू-राजनीतिक संघर्ष की आशंकाएं कम हुईं और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड 84 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसलकर 82.99 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड करीब 80.74 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में गिरावट देश के लिए राहत की खबर मानी जा रही है, क्योंकि इससे महंगाई, चालू खाता घाटा और रुपये पर दबाव कम हो सकता है। रुपये में मजबूती से बाजार को मिला सहारा विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में नरमी और रुपये की मजबूती बाजार को समर्थन दे रही है। हाल के दिनों में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.96 के निचले स्तर से सुधरकर 94.71 तक पहुंच गया है। इससे विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली पर भी कुछ हद तक रोक लग सकती है। हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में AI आधारित निवेश थीम की मजबूती के कारण विदेशी निवेश का कुछ हिस्सा भारत से बाहर जा सकता है। आईटी सेक्टर बना बाजार का स्टार सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो आईटी शेयरों में सबसे अधिक खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी आईटी : +1.43% निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स : +0.91% निफ्टी मीडिया : +0.64% निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज : +0.42% वहीं मेटल शेयरों पर दबाव बना रहा और निफ्टी मेटल इंडेक्स 1.52 प्रतिशत की गिरावट के साथ सबसे कमजोर सेक्टर साबित हुआ। इन शेयरों में दिखी सबसे ज्यादा तेजी सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में आईटी कंपनियों ने शानदार प्रदर्शन किया। सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयर: HCLTech (+3.11%) Bajaj Finserv (+1.61%) Bajaj Finance (+1.60%) Hindustan Unilever (+1.55%) Tech Mahindra (+1.46%) Tata Consultancy Services (+1.44%) इसके अलावा Infosys, Bharti Airtel, HDFC Bank और Larsen & Toubro में भी खरीदारी देखने को मिली। इन शेयरों पर रहा दबाव दूसरी ओर कुछ बड़े शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। Axis Bank (-1.10%) UltraTech Cement (-0.56%) Tata Steel (-0.48%) Power Grid Corporation of India (-0.42%) Bharat Electronics Limited (-0.40%) मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बनी रही तेजी बाजार की मजबूती केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। व्यापक बाजार में भी निवेशकों की खरीदारी जारी रही। निफ्टी मिडकैप 50 : +0.35% निफ्टी मिडकैप 100 : +0.31% निफ्टी स्मॉलकैप 100 : +0.42% इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों का भरोसा बाजार के विभिन्न वर्गों में बना हुआ है। आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर? विश्लेषकों के अनुसार, हालिया तेजी को समर्थन जरूर मिला है, लेकिन आने वाले दिनों में बाजार की दिशा कई अहम कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, वैश्विक AI रैली, घरेलू वैल्यूएशन, मानसून की प्रगति और महंगाई के आंकड़े प्रमुख रहेंगे।  

surbhi जून 16, 2026 0
LNG tanker sailing near the Strait of Hormuz amid easing tensions between the US and Iran.
US-Iran Deal: 100 दिनों की खामोशी के बाद होर्मुज की ओर बढ़ा भारतीय LNG टैंकर, संभावित अमेरिका-ईरान समझौते का दिखा असर

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते के संकेतों के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में राहत की उम्मीद बढ़ गई है। इस बीच भारत के लिए भी एक सकारात्मक खबर सामने आई है। पिछले तीन महीनों से अधिक समय से फारस की खाड़ी क्षेत्र में रुका भारतीय एलएनजी (Liquefied Natural Gas) टैंकर 'दिशा' (Disha) अब होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। यदि समझौते के बाद होर्मुज जलमार्ग आधिकारिक रूप से खुलता है, तो यह भारतीय टैंकर इस रणनीतिक मार्ग से गुजरने वाला पहला जहाज बन सकता है। क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से एशिया और यूरोप तक पहुंचता है। फरवरी के अंत में क्षेत्र में बढ़े तनाव और अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद इस मार्ग पर गतिविधियां लगभग ठप हो गई थीं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई और ऊर्जा कीमतों में उछाल देखने को मिला। कहां पहुंच चुका है भारतीय टैंकर? शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, भारत की एक सरकारी आयातक कंपनी द्वारा दीर्घकालिक लीज पर लिया गया एलएनजी टैंकर 'दिशा' इस समय संयुक्त अरब अमीरात के उत्तर में ओमान के करीब पहुंच चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस जहाज ने लगभग 1 मार्च के आसपास कतर के रास लफ्फान एलएनजी टर्मिनल से गैस की खेप लोड की थी। इसके बाद क्षेत्रीय तनाव के कारण इसकी आवाजाही प्रभावित हुई। समझौते से वैश्विक बाजार को राहत यदि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पूरी तरह लागू होता है और दोनों ओर की नाकेबंदी समाप्त होती है, तो इसका सीधा फायदा— भारत सहित ऊर्जा आयात करने वाले देशों, यूरोप और एशिया के गैस बाजार, और वैश्विक तेल व्यापार को मिलेगा। मार्च से एलएनजी सप्लाई में आई कमी के कारण गैस की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई थी। अब सप्लाई सामान्य होने से कीमतों में नरमी आने की संभावना जताई जा रही है। कच्चे तेल की कीमतों पर भी असर होर्मुज के खुलने की उम्मीद के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में शुरुआती कारोबार के दौरान चार प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों का मानना है कि ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने से बाजार में स्थिरता लौट सकती है। अभी भी बनी हुई हैं चुनौतियां विशेषज्ञों के अनुसार, समझौते के बाद भी स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में समय लग सकता है। कई जहाज अपनी वास्तविक लोकेशन छिपाने के लिए ट्रांसपोंडर बंद कर रहे हैं, जिससे समुद्री गतिविधियों की सही तस्वीर सामने आना मुश्किल हो रहा है। इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का रणनीतिक प्रभाव भविष्य में भी इस मार्ग को संवेदनशील बनाए रख सकता है।  

surbhi जून 15, 2026 0
Oil tankers navigating near the Strait of Hormuz amid rising geopolitical tensions and supply disruptions.
LNG Crude Supply to India: होर्मुज संकट के बीच 'डार्क मोड' में चल रहे तेल टैंकर, भारत तक गुप्त रास्तों से पहुंच रही सप्लाई

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद भारत समेत कई एशियाई देशों तक कच्चे तेल और LNG की आपूर्ति पूरी तरह बंद नहीं हुई है, बल्कि अब यह अधिक गोपनीय तरीके से की जा रही है। विश्लेषकों के अनुसार, युद्ध से पहले की तुलना में होर्मुज मार्ग से टैंकर ट्रैफिक 90 से 95 प्रतिशत तक घट चुका है। इसके चलते वैश्विक तेल और गैस सप्लाई को ट्रैक करना पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो गया है। क्या है 'डार्क मोड' रणनीति? शिपिंग डेटा के अनुसार, बड़ी संख्या में तेल टैंकर अब 'डार्क मोड' में संचालन कर रहे हैं। इसका मतलब है कि जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य या फारस की खाड़ी में प्रवेश करते समय अपने AIS (ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) ट्रांसपोंडर बंद कर देते हैं। पहले इस रणनीति का इस्तेमाल मुख्य रूप से प्रतिबंधों से बचने के लिए ईरान से जुड़े जहाज करते थे, लेकिन अब सामान्य वाणिज्यिक जहाज भी सुरक्षा कारणों और परिचालन जोखिमों के चलते ऐसा कर रहे हैं। वोर्टेक्सा (Vortexa) के आंकड़ों के मुताबिक, इस क्षेत्र से गुजरने वाले 57 प्रतिशत जहाजों ने अपने ट्रांसपोंडर बंद रखे, जबकि मई में यह आंकड़ा बढ़कर रिकॉर्ड 65.2 प्रतिशत तक पहुंच गया। भारत, चीन और पाकिस्तान तक जारी है सप्लाई मौजूदा संकट के बावजूद भारत, चीन और पाकिस्तान जैसे देशों को तेल और LNG की आपूर्ति जारी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसके लिए वैकल्पिक समुद्री कॉरिडोर और विशेष मार्गों का उपयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में ईरान का प्रभाव बढ़ने के कारण कई जहाज सुरक्षित मार्गों के जरिए अपनी खेप गंतव्य देशों तक पहुंचा रहे हैं। सामान्य स्थिति लौटने की उम्मीदें कमजोर शुरुआती अनुमान यह था कि युद्ध कुछ महीनों में समाप्त हो जाएगा और जून से होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य गतिविधियां बहाल होने लगेंगी। लेकिन संघर्ष अब चौथे महीने में पहुंच चुका है और स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में किसी समझौते के बाद भी इस मार्ग को पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं माना जा सकेगा, क्योंकि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बदलाव आ चुका है। वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बना रहेगा असर होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां जारी तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार, शिपिंग लागत और ऊर्जा कीमतों पर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है।  

surbhi जून 9, 2026 0
Stock market traders monitor falling Sensex and Nifty amid rising Middle East geopolitical tensions
Share Market Fall: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से शेयर बाजार धड़ाम, निवेशकों के ₹5 लाख करोड़ स्वाहा, सेंसेक्स 800 अंक टूटा

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर सोमवार को वैश्विक और भारतीय शेयर बाजारों पर साफ दिखाई दिया। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसके चलते घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 800 अंक से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 भी 250 अंकों से ज्यादा फिसल गया। सुबह करीब 9:20 बजे सेंसेक्स 784.77 अंक यानी 1.06 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,458.57 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 234.80 अंक यानी 1 प्रतिशत गिरकर 23,131.90 अंक पर पहुंच गया। निवेशकों को ₹5 लाख करोड़ का झटका बाजार में आई इस तेज गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में बड़ा नुकसान हुआ है। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण घटकर लगभग 456 लाख करोड़ रुपये रह गया। शुरुआती कारोबार में ही निवेशकों की करीब 5 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति साफ हो गई। सेंसेक्स के 30 में से 28 शेयर लाल निशान में सेंसेक्स के अधिकांश शेयर दबाव में रहे। सबसे ज्यादा गिरावट एयरलाइन कंपनी इंडिगो के शेयर में दर्ज की गई। इसके अलावा बजाज फाइनेंस, एशियन पेंट्स, टाटा स्टील, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एनटीपीसी, टीसीएस, बीईएल और लार्सन एंड टुब्रो जैसे दिग्गज शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। हालांकि टेक महिंद्रा और सन फार्मा के शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए, जिससे बाजार को सीमित सहारा मिला। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार में भी भारी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 1.51 प्रतिशत की गिरावट निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक में 1.52 प्रतिशत की गिरावट सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो रियल्टी और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी रही। दूसरी ओर फार्मा और हेल्थकेयर क्षेत्र के शेयरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट भारतीय बाजार के साथ-साथ एशियाई शेयर बाजारों में भी हड़कंप देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का बाजार 9 प्रतिशत से अधिक गिर गया, जिसके बाद कुछ समय के लिए कारोबार रोकना पड़ा। जापान का निक्केई सूचकांक लगभग 5 प्रतिशत लुढ़क गया। हांगकांग का हैंग सेंग और चीन का शंघाई कंपोजिट भी 1 प्रतिशत से अधिक टूट गए। क्यों टूटा शेयर बाजार? बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव है। ईरान द्वारा इजरायल पर मिसाइल हमले के बाद क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने की आशंका गहरा गई है। इससे अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति प्रयासों को भी झटका लगा है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिसका सीधा असर शेयर बाजार पर दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतों में भी उछाल तनाव बढ़ने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड करीब 3.37 प्रतिशत बढ़कर 96.23 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इंडियन बास्केट का मूल्य 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। तेल की कीमतों में यह तेजी भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए चिंता का विषय मानी जा रही है, क्योंकि इससे महंगाई और व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ सकता है।  

surbhi जून 8, 2026 0
Investors monitor falling stock market indices amid West Asia tensions and rising crude oil prices.
पश्चिम एशिया संकट का असर: शेयर बाजार में भारी बिकवाली, सेंसेक्स 800 अंक से ज्यादा टूटा, निवेशकों में बढ़ी चिंता

भारत समेत वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर साफ दिखाई देने लगा है। एक दिन की राहत भरी तेजी के बाद बुधवार को घरेलू शेयर बाजार में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। निवेशकों की चिंता बढ़ने से शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 800 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 24,300 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। सुबह के कारोबार में सेंसेक्स 803.13 अंक यानी 1.08 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,846.71 अंक पर कारोबार करता दिखा। वहीं, निफ्टी 209.35 अंक यानी 0.89 प्रतिशत गिरकर 23,274.20 अंक पर पहुंच गया। इससे पहले लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद मंगलवार को बाजार में मामूली रिकवरी देखने को मिली थी, लेकिन वैश्विक तनाव ने फिर से निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया। आईटी शेयरों में सबसे बड़ी गिरावट बाजार की गिरावट में सबसे बड़ा योगदान आईटी सेक्टर का रहा। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 27 लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। आईटी दिग्गज कंपनियों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा। सबसे अधिक गिरावट टीसीएस के शेयर में दर्ज की गई, जो 4 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया। इसके अलावा इन्फोसिस, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, आईटीसी, बजाज फाइनेंस और अन्य बड़े शेयरों में भी बिकवाली का दबाव रहा। हालांकि कुछ शेयरों ने बाजार को सीमित सहारा देने की कोशिश की। भारती एयरटेल, टाटा स्टील और एशियन पेंट्स में मजबूती देखने को मिली, लेकिन यह बढ़त समग्र बाजार की कमजोरी को संतुलित नहीं कर सकी। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में केवल बड़ी कंपनियां ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार में भी कमजोरी का माहौल रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में करीब 0.67 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.48 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टोरल इंडेक्स में आईटी सबसे कमजोर रहा, जहां 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखने को मिली। इसके अलावा रियल्टी और पीएसयू बैंकिंग शेयरों में भी दबाव बना रहा। दूसरी ओर मेटल सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। रुपया भी कमजोर, डॉलर के मुकाबले फिसला शेयर बाजार में गिरावट के साथ-साथ भारतीय मुद्रा पर भी दबाव दिखाई दिया। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोरी के साथ खुला और 95.45 के स्तर पर पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में भी रुपया 17 पैसे की गिरावट के साथ 95.36 पर बंद हुआ था। आखिर बाजार में गिरावट की वजह क्या है? बाजार की इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे प्रमुख कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio के बयान ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है। उनके अनुसार ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के बड़े हिस्से में माइन बिछा दी है और कुछ वाणिज्यिक जहाजों पर फायरिंग की घटनाएं भी सामने आई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। ऐसे में वहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल तनाव बढ़ने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई। ब्रेंट क्रूड लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ 96.90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई, व्यापार घाटे और कॉर्पोरेट मुनाफे पर दबाव बढ़ा सकती हैं। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। आगे निवेशकों की नजर किस पर रहेगी? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों की दिशा और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम बाजार की चाल तय करेंगे। यदि तनाव और बढ़ता है तो शेयर बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। वहीं किसी सकारात्मक कूटनीतिक समाधान की खबर बाजार को राहत दे सकती है।  

surbhi जून 3, 2026 0
Industrial facilities and cargo ships symbolize supply chain disruptions affecting Indian corporate profits
पश्चिम एशिया संकट का बड़ा असर! FY27 में कंपनियों का मुनाफा 2% तक घट सकता है, क्रिसिल की चेतावनी

Crisil Report: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारतीय कंपनियों की कमाई पर भी दिखाई देने लगा है। रेटिंग एजेंसी CRISIL की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यदि आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में व्यवधान लंबे समय तक जारी रहता है, तो वित्त वर्ष 2026-27 में भारतीय कंपनियों के परिचालन लाभ (Operating Margin) में करीब 200 बेसिस पॉइंट यानी 2 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती ईंधन लागत, महंगा परिवहन, कमजोर होता रुपया और सप्लाई चेन की समस्याएं कंपनियों की लाभप्रदता पर दबाव बढ़ा रही हैं। 34 प्रमुख सेक्टरों का किया गया अध्ययन क्रिसिल ने 34 ऐसे उद्योग क्षेत्रों का स्ट्रेस टेस्ट किया, जो उसकी रेटेड कॉर्पोरेट ऋण का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा हैं। एजेंसी ने अनुमान लगाया है कि पश्चिम एशिया में संकट की स्थिति पूरे वित्त वर्ष में करीब नौ महीने तक बनी रह सकती है। रिपोर्ट में यह भी माना गया है कि इस दौरान कच्चे तेल की औसत कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल तक रह सकती है, जो पहले के 95 डॉलर प्रति बैरल के अनुमान से काफी अधिक है। कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी लागत नियंत्रण क्रिसिल रेटिंग्स के प्रबंध निदेशक Subodh Rai के अनुसार, कंपनियों के लिए बिक्री बढ़ाने से ज्यादा मुश्किल लागत और मुनाफे को संभालना होगा। उन्होंने कहा कि जिन 34 क्षेत्रों का अध्ययन किया गया, उनमें से 22 सेक्टरों की परिचालन लाभप्रदता में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ सकती है। इसकी मुख्य वजह बढ़ती इन्वेंट्री लागत और उपभोक्ताओं पर पूरा लागत बोझ तुरंत न डाल पाना है। किन कारणों से बढ़ रहा दबाव? पश्चिम एशिया संकट के चलते कई कंपनियों को अपनी सप्लाई चेन में बदलाव करना पड़ रहा है। इसके अलावा उन्हें निम्न चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है- ईंधन और माल ढुलाई लागत में वृद्धि शिपमेंट में देरी कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव रुपये में कमजोरी वैश्विक व्यापार मार्गों में बाधाएं इन कारणों से उत्पादन लागत बढ़ रही है और कंपनियों का मार्जिन प्रभावित हो रहा है। राहत की बात: मजबूत बैलेंस शीट हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय कंपनियों की वित्तीय स्थिति पहले की तुलना में काफी मजबूत है। घरेलू मांग, सरकारी पूंजीगत खर्च (Capex) और बेहतर बैलेंस शीट उन्हें इस संकट से निपटने में मदद कर सकती हैं। पिछले 10 वर्षों में भारत की कंपनियों का औसत कर्ज अनुपात (Gearing Ratio) घटकर 0.5 गुना रह गया है, जबकि ब्याज भुगतान क्षमता (Interest Coverage Ratio) दोगुनी होकर 5 गुना से अधिक हो गई है। केवल कुछ सेक्टरों की क्रेडिट गुणवत्ता पर असर क्रिसिल का अनुमान है कि मौजूदा परिस्थितियों के बावजूद अधिकांश कंपनियां अपने क्रेडिट प्रोफाइल को स्थिर बनाए रखेंगी। एजेंसी के अनुसार केवल 8 सेक्टर, जो कुल रेटेड कॉर्पोरेट ऋण का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा हैं, उनकी क्रेडिट गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। MSME क्षेत्र के लिए राहत रिपोर्ट में सरकार की नई ECLGS 5.0 (Emergency Credit Line Guarantee Scheme) की भी सराहना की गई है। क्रिसिल का मानना है कि यह योजना विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को राहत देने में मदद करेगी, क्योंकि इस वर्ग की कंपनियों के पास बड़े कॉर्पोरेट्स की तुलना में कम वित्तीय सुरक्षा होती है। भारत इंक का आउटलुक स्थिर, लेकिन सतर्क क्रिसिल ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत इंक की समग्र क्रेडिट गुणवत्ता फिलहाल स्थिर बनी हुई है। हालांकि कंपनियों को आने वाले महीनों में लागत प्रबंधन, आपूर्ति श्रृंखला और नकदी प्रवाह पर विशेष ध्यान देना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं और भू-राजनीतिक तनाव जारी रहता है, तो कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।  

surbhi मई 26, 2026 0
Petrol Diesel Prices
क्यों लगातार बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल के दाम? जानिए वजह

नई दिल्ली, एजेंसियां। देशभर में महंगाई के बीच पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले 11 दिनों में पेट्रोल-डीजल के दामों में कुल 7 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है। सोमवार को एक बार फिर ईंधन की कीमतों में इजाफा किया गया, जिससे परिवहन और रोजमर्रा की जरूरतों पर असर पड़ने लगा है।   क्यों बढ़ रहे हैं ईंधन के दाम? विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और ईरान संकट के कारण तेल कंपनियों पर भारी दबाव बना हुआ है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर होने वाला कोई भी भू-राजनीतिक तनाव सीधे भारत के आयात बिल और घरेलू ईंधन कीमतों को प्रभावित करता है।   28 फरवरी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं, लेकिन भारत में करीब 74 दिनों तक पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखे गए। इस दौरान सरकारी तेल कंपनियां महंगे दामों पर कच्चा तेल खरीदती रहीं, लेकिन पुराने रेट पर पेट्रोल-डीजल बेचने के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा।   तेल कंपनियों को हुआ भारी घाटा रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियों का कुल घाटा 1.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि घाटे की भरपाई के लिए अभी भी पेट्रोल-डीजल के दामों में और बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है।   आगे क्या होगी स्थिति? हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की खबरों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हल्की गिरावट आई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सप्लाई चेन और वैश्विक जोखिमों के कारण कीमतों में स्थिरता आने में समय लग सकता है।   सरकार के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है। एक तरफ आम जनता को महंगाई से राहत देनी है, वहीं दूसरी ओर तेल कंपनियों के बढ़ते घाटे को भी संभालना है। ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

Unknown मई 25, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh अगस्त 14, 2026 0