United States Dollar के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार दबाव में बना हुआ है। मंगलवार को कारोबार शुरू होते ही रुपया डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 96.85 तक पहुंच गया। ट्रेडिंग के दौरान यह और गिरकर 96.93 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। लगातार 13वें कारोबारी दिन रुपये में कमजोरी देखने के बाद बाजार में चिंता बढ़ गई है। पिछले सप्ताह रुपया पहली बार 96 प्रति डॉलर के पार गया था और अब गिरावट का सिलसिला जारी है। जानकारों का मानना है कि मजबूत डॉलर, महंगे कच्चे तेल और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता ने भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ा दिया है। डॉलर इतना मजबूत क्यों हो रहा है? अमेरिका में बॉन्ड यील्ड तेजी से बढ़ रही है, जिससे डॉलर को मजबूती मिल रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार 30 साल के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 5.18% तक पहुंच गई है, जो 2007 की वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद सबसे ऊंचे स्तरों में से एक मानी जा रही है। वहीं 10 साल की बॉन्ड यील्ड भी करीब 4.66% तक पहुंच गई। जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो वैश्विक निवेशक वहां निवेश को ज्यादा सुरक्षित मानते हैं। इसका असर यह होता है कि उभरते बाजारों से पैसा निकलने लगता है और डॉलर मजबूत हो जाता है। इसी वजह से भारतीय रुपये जैसी मुद्राओं पर दबाव बढ़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतें भी बनी बड़ी वजह भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये पर असर डालती है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। तेल महंगा होने पर भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपया कमजोर पड़ता है। महंगे तेल का असर सिर्फ करेंसी तक सीमित नहीं रहता। इससे: ट्रांसपोर्ट महंगा हो सकता है रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है RBI क्या कर रहा है? Reserve Bank of India रुपये की गिरावट को नियंत्रित करने के लिए बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक RBI डॉलर बेचकर रुपये को सपोर्ट देने की कोशिश कर रहा है, ताकि गिरावट बहुत ज्यादा तेज न हो। हालांकि मौजूदा वैश्विक हालात भारतीय मुद्रा के लिए चुनौती बने हुए हैं। अगर: डॉलर मजबूत बना रहता है तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं वैश्विक तनाव बढ़ता है तो आने वाले दिनों में रुपये पर दबाव जारी रह सकता है। आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर? रुपये की कमजोरी का असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। इससे: विदेश यात्रा महंगी हो सकती है आयातित इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट्स के दाम बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है विदेशी शिक्षा और ऑनलाइन सेवाएं महंगी पड़ सकती हैं हालांकि निर्यात करने वाली कंपनियों को कमजोर रुपये से कुछ फायदा भी हो सकता है, क्योंकि उन्हें डॉलर में ज्यादा कमाई होती है।
देश की तेल कंपनियों ने 16 मई 2026 के लिए पेट्रोल और डीजल के ताजा दाम जारी कर दिए हैं। कई बड़े शहरों में आज ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, जबकि कुछ राज्यों के जिलों में हल्का उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। Mumbai और New Delhi जैसे महानगरों में कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। पेट्रोल के ताजा रेट आज Mumbai में पेट्रोल 106.68 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। वहीं Kolkata में पेट्रोल 4 पैसे महंगा हुआ है। Noida में 19 पैसे की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। Patna में पेट्रोल 51 पैसे महंगा हुआ, जबकि Ranchi में 41 पैसे की तेजी देखने को मिली। दूसरी तरफ Lucknow, Bengaluru और Bhopal में हल्की गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख शहरों में पेट्रोल के रेट शहर आज का भाव (₹/लीटर) बदलाव लखनऊ 97.39 -0.16 नोएडा 97.97 +0.19 पटना 109.06 +0.51 रांची 101.25 +0.41 मुंबई 106.68 स्थिर नई दिल्ली 97.77 स्थिर कोलकाता 108.74 +0.04 चेन्नई 103.67 स्थिर बेंगलुरु 106.17 -0.04 भोपाल 109.63 -0.08 डीजल के दामों में कहां हुआ बदलाव? डीजल की कीमतों में भी कुछ शहरों में मामूली बदलाव देखने को मिला है। Noida में डीजल 18 पैसे महंगा हुआ है। Gaya और Patna में 47 पैसे की बढ़त दर्ज की गई है। वहीं Deoghar में डीजल 51 पैसे और Ranchi में 34 पैसे महंगा हुआ है। दूसरी ओर Lucknow और Darbhanga में कीमतों में गिरावट आई है। प्रमुख शहरों में डीजल के रेट शहर आज का भाव (₹/लीटर) बदलाव लखनऊ 90.69 -0.13 नोएडा 91.20 +0.18 पटना 95.10 +0.47 रांची 96.10 +0.34 मुंबई 93.14 स्थिर नई दिल्ली 90.67 स्थिर कोलकाता 95.13 स्थिर चेन्नई 95.25 स्थिर गुरुग्राम 90.89 -0.05 भोपाल 94.82 -0.06 विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और स्थानीय टैक्स के आधार पर आने वाले दिनों में फ्यूल प्राइस में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान पर हमलों के बाद वैश्विक तेल संकट गहराता जा रहा है। होर्मुज खाड़ी में बाधाओं और सप्लाई चेन प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसका असर सबसे ज्यादा दक्षिण एशियाई देशों पर देखने को मिल रहा है, जहां पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालांकि, पड़ोसी देशों की तुलना में India में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी अपेक्षाकृत सीमित रही है। पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल के दाम रिकॉर्ड स्तर पर Pakistan में हालात सबसे ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले तीन महीनों में वहां पेट्रोल करीब 64 प्रतिशत और डीजल 61 प्रतिशत तक महंगा हो चुका है। फिलहाल पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 458.86 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और डीजल 520.42 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। बढ़ती कीमतों के कारण वहां आम लोगों पर भारी आर्थिक दबाव बढ़ गया है। स्थिति को संभालने के लिए पाकिस्तान सरकार ने चार दिन का वर्किंग वीक लागू किया है और कई स्कूलों को भी बंद करना पड़ा है। नेपाल में दक्षिण एशिया का सबसे महंगा पेट्रोल Nepal भी गंभीर ईंधन संकट का सामना कर रहा है। नेपाल अब दक्षिण एशिया में सबसे महंगा पेट्रोल बेचने वाला देश बन गया है। जनवरी 2026 में जहां पेट्रोल 137 नेपाली रुपये प्रति लीटर था, वहीं अब इसकी कीमत बढ़कर 219 नेपाली रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। नेपाल पूरी तरह आयातित तेल पर निर्भर है, जिसके चलते परिवहन और रोजमर्रा के सामान की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। श्रीलंका में लागू हुई ईंधन राशनिंग Sri Lanka में भी हालात सामान्य नहीं हैं। वहां ऑटो डीजल की कीमतों में 26 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार को हालात नियंत्रित करने के लिए ईंधन राशनिंग लागू करनी पड़ी है। कई सार्वजनिक कार्यक्रमों और स्कूल गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं ताकि तेल की खपत कम की जा सके। बांग्लादेश में भी बढ़ा दबाव Bangladesh ने शुरुआत में सब्सिडी के जरिए कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश की, लेकिन लगातार बढ़ते बोझ के बाद सरकार को पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने पड़े। देश में कई जगह पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं और कुछ जिलों में ईंधन की कमी की खबरें भी सामने आई हैं। भारत में सीमित बढ़ोतरी से राहत इन हालातों के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी अपेक्षाकृत कम रही है। 15 मई 2026 तक पेट्रोल में करीब 3.14 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3.11 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है that केंद्र सरकार और सरकारी तेल कंपनियों ने वैश्विक कीमतों के बड़े झटके का असर काफी हद तक खुद संभाला, जिससे आम जनता पर दबाव सीमित रहा। होर्मुज संकट का वैश्विक असर होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में गिना जाता है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। ऐसे में पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर केवल एशिया ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
देश में पेट्रोल, डीजल और CNG की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद सियासत गरमा गई है। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर निशाना साधते हुए उन्हें “महंगाई मैन मोदी” बताया और कहा कि चुनाव खत्म होते ही जनता से “रिकवरी” शुरू कर दी गई है। कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि विधानसभा चुनाव खत्म होते ही सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाकर लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया। पार्टी ने आरोप लगाया कि पहले से बढ़ती महंगाई के बीच अब ईंधन की कीमतों में इजाफा आम आदमी की मुश्किलें और बढ़ाएगा। कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने चुनावों के दौरान कीमतें नहीं बढ़ाईं, लेकिन नतीजों और राजनीतिक प्रक्रिया पूरी होने के कुछ दिनों बाद ही तेल कंपनियों ने दाम बढ़ा दिए। पार्टी ने इसे “जनता से वसूली” करार दिया। पेट्रोल-डीजल और CNG के दाम बढ़े 15 मई से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी लागू कर दी गई है। वहीं CNG की कीमतों में भी 2 रुपये प्रति किलो तक का इजाफा किया गया है। पिछले चार साल में यह पहली बार है जब पेट्रोल और डीजल के दामों में इतनी बड़ी बढ़ोतरी की गई है। तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही थीं, जिसकी वजह से कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा था। इसी कारण कीमतों में संशोधन करना पड़ा। चुनाव खत्म होने के बाद बढ़े दाम असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव खत्म होने के करीब 16 दिन बाद यह फैसला सामने आया है। विपक्ष इसी मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि चुनावी माहौल में जनता की नाराजगी से बचने के लिए कीमतें रोकी गई थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि वेस्ट एशिया में जारी तनाव और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारत समेत कई देशों पर देखने को मिल रहा है। आने वाले दिनों में महंगाई और परिवहन लागत पर इसका असर पड़ सकता है।
घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार तीसरे कारोबारी दिन तेजी देखने को मिली। रुपये में कमजोरी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और एशियाई बाजारों में गिरावट के बावजूद भारतीय बाजार मजबूती के साथ कारोबार करते नजर आए। सुबह के कारोबार में BSE Sensex 400 अंकों से अधिक उछल गया, जबकि NIFTY 50 में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई। बाजार का हाल सुबह 10 बजे तक: सेंसेक्स 348.65 अंक यानी 0.46% बढ़कर 75,747.37 पर पहुंच गया निफ्टी 102.70 अंक यानी 0.43% चढ़कर 23,792.30 पर ट्रेड करता दिखा पिछले सत्र में भी बाजार में मजबूत तेजी दर्ज की गई थी। किन शेयरों में रही सबसे ज्यादा तेजी? सेंसेक्स में सबसे ज्यादा तेजी इन कंपनियों के शेयरों में देखी गई: Adani Ports and Special Economic Zone Infosys Tata Consultancy Services Power Grid Corporation of India HCL Technologies Tech Mahindra Maruti Suzuki India आईटी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। किन शेयरों में आई गिरावट? दूसरी ओर कुछ दिग्गज कंपनियों के शेयर दबाव में रहे: State Bank of India Asian Paints UltraTech Cement Reliance Industries इनमें करीब 2% तक की गिरावट दर्ज की गई। रुपया फिर कमजोर भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शुरुआती कारोबार में 29 पैसे टूटकर 95.93 तक पहुंच गया। कमजोर रुपये का असर आमतौर पर आयात लागत और विदेशी निवेश धारणा पर पड़ता है। कच्चे तेल में फिर तेजी अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेजी जारी रही। ब्रेंट क्रूड: 107 डॉलर प्रति बैरल तेजी: 1.22% कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय मानी जाती हैं। विदेशी निवेशकों का रुख बदला विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने गुरुवार को: 187 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे यह लगातार सात दिनों की बिकवाली के बाद पहली खरीदारी रही, जिसने बाजार सेंटीमेंट को मजबूत किया। एशियाई बाजारों में दबाव एशियाई बाजारों में गिरावट का माहौल रहा: दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3% से ज्यादा टूटा जापान का निक्केई 1% से ज्यादा गिरा हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग भी लाल निशान में रहा चीन का शंघाई कंपोजिट हल्की बढ़त में दिखा इसके विपरीत अमेरिकी और यूरोपीय बाजार पिछले कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ बंद हुए थे।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर देश में पेट्रोल-डीजल महंगा होने की चर्चा तेज है. इसी बीच केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri ने मंगलवार को बड़ा बयान दिया है. उन्होंने साफ कहा कि फिलहाल देश में ईंधन को लेकर कोई संकट नहीं है, लेकिन यह मान लेना भी सही नहीं होगा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें आगे कभी नहीं बढ़ेंगी. चार साल से नहीं बढ़ीं कीमतें, लेकिन भविष्य हालात पर निर्भर CII Annual Business Summit 2026 में बोलते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार ने पिछले चार साल से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के फैसले पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और आर्थिक हालात पर आधारित होते हैं. उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों को सरकार ने अवसर में बदलने का काम किया है और फिलहाल घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है. देश के पास कितना ईंधन स्टॉक? सरकार के मुताबिक भारत के पास अभी: कच्चे तेल और LNG का करीब 69 दिनों का भंडार LPG का लगभग 45 दिनों का स्टॉक मौजूद है केंद्रीय मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सप्लाई चेन पूरी तरह सामान्य है और देश में ईंधन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी. LPG उत्पादन में बड़ा इजाफा पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए सरकार ने एलपीजी उत्पादन भी बढ़ा दिया है. मंत्री के अनुसार: पहले प्रतिदिन 35-36 हजार टन LPG उत्पादन हो रहा था अब इसे बढ़ाकर 54 हजार टन प्रतिदिन कर दिया गया है सरकार का कहना है कि यह कदम भविष्य की जरूरतों और संभावित दबाव को ध्यान में रखकर उठाया गया है. पीएम मोदी ने लोगों से क्या अपील की? प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में हैदराबाद की रैली में लोगों से ईंधन बचाने की अपील की थी. उन्होंने कहा कि सरकार पश्चिम एशिया संकट का असर कम करने की कोशिश कर रही है, लेकिन लोगों को भी जिम्मेदारी निभानी होगी. पीएम मोदी ने लोगों को सलाह दी कि: पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल कम करें मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा उपयोग करें कारपूलिंग अपनाएं इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ बढ़ें पार्सल के लिए रेलवे का इस्तेमाल करें जरूरत होने पर ‘वर्क फ्रॉम होम’ अपनाएं विदेश यात्राएं और सोने की खरीद फिलहाल टालें प्रधानमंत्री ने कहा कि इन कदमों से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहेगी.
घरेलू शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट देखने को मिली है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों में घबराहट बढ़ गई है। इसी बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi की अपील ने भी बाजार की चिंता को और बढ़ा दिया। प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया संकट को कोरोना महामारी के बाद सबसे बड़ा वैश्विक संकट बताते हुए लोगों से ईंधन और विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की है। साथ ही उन्होंने वर्क फ्रॉम होम अपनाने की सलाह भी दी है। 24 घंटे में यह उनकी दूसरी ऐसी अपील मानी जा रही है। दो दिन में 2,000 अंक टूटा Sensex मंगलवार को शुरुआती कारोबार में BSE Sensex करीब 850 अंक तक लुढ़क गया, जबकि Nifty 50 में 200 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। सुबह 11 बजे तक सेंसेक्स 860.48 अंक यानी 1.13% गिरकर 75,154.80 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 226.75 अंक यानी 0.95% टूटकर 23,589.10 पर पहुंच गया। सोमवार को भी सेंसेक्स 1312.91 अंक गिरा था। इस तरह दो कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स लगभग 2,000 अंक टूट चुका है। रुपया डॉलर के मुकाबले ऑल टाइम लो पर भारतीय रुपया भी दबाव में दिखाई दिया। डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 0.2 फीसदी टूटकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर खुला। तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाला है। किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट? Infosys में सबसे ज्यादा 2.57% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा: Tech Mahindra Tata Consultancy Services HCL Technologies Asian Paints HDFC Bank Bajaj Finserv Titan Company जैसे शेयरों में भी तेज गिरावट देखी गई। वहीं दूसरी ओर Reliance Industries, State Bank of India, Tata Steel और UltraTech Cement के शेयरों में तेजी रही। निवेशकों को 5 लाख करोड़ का नुकसान लगातार गिरावट के कारण Bombay Stock Exchange में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 5 लाख करोड़ रुपये घटकर 462 लाख करोड़ रुपये रह गया। ब्रॉडर मार्केट में भी बिकवाली का दबाव रहा। निफ्टी मिडकैप 1.03% और स्मॉलकैप इंडेक्स 1.34% टूट गया। कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता अंतरराष्ट्रीय बाजार में Saudi Aramco की चेतावनी के बाद तेल बाजार में चिंता और बढ़ गई है। कंपनी का कहना है कि वैश्विक तेल भंडार तेजी से घट रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण कुवैत और अन्य देशों का तेल निर्यात प्रभावित हुआ है। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया का तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये की कमजोरी भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
भारतीय रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 95.57 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान टूटकर 95.63 के ऑल टाइम लो तक पहुंच गया। यह पिछले बंद भाव की तुलना में 35 पैसे की गिरावट है। सोमवार को भी रुपया 79 पैसे टूटकर 95.28 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। लगातार गिरते रुपये ने निवेशकों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कच्चे तेल में उछाल से बढ़ा दबाव रुपये में कमजोरी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी मानी जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने तेल बाजार को प्रभावित किया है, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। Saudi Aramco ने भी चेतावनी दी है कि वैश्विक स्तर पर तेल का भंडार काफी कम हो रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अप्रैल में OPEC देशों का उत्पादन साल 2000 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। होर्मुज स्ट्रेट संकट का असर Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल सप्लाई पर दिखाई दे रहा है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण कुवैत और इराक जैसे देश तेल निर्यात में दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी रुपये पर दबाव बढ़ा रही है। आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को भारतीय बाजार में करीब 8,437 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। ईरान संकट शुरू होने के बाद से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से 20 अरब डॉलर से अधिक निकाल चुके हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ी और रुपया कमजोर हुआ। शेयर बाजार में भी बड़ी गिरावट कमजोर रुपये और वैश्विक तनाव का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 525 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि NIFTY 50 में भी 164 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। क्यों गिर रहा है रुपया? डॉलर के मुकाबले रुपया 95.63 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के पार विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली शेयर बाजार में कमजोरी और वैश्विक अनिश्चितता आम लोगों पर क्या होगा असर? रुपये में गिरावट का सीधा असर आयात पर पड़ता है। भारत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक सामान, विदेश यात्रा और आयातित वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं।
शुरुआती कारोबार में बाजार में बड़ी बिकवाली सोमवार को घरेलू शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। BSE Sensex शुरुआती कारोबार में 1000 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि Nifty 50 में भी करीब 300 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। सुबह करीब 9:39 बजे Sensex 1016 अंक गिरकर 76,311 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 करीब 23,879 अंक पर पहुंच गया। बाजार में गिरावट की बड़ी वजह क्या है? विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार पर इस समय दो बड़े दबाव बने हुए हैं– पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रिपोर्ट्स के अनुसार Brent Crude Oil की कीमत फिर 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है। इससे भारत के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री Narendra Modi की हालिया अपील ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। प्रधानमंत्री ने लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, गैरजरूरी विदेश यात्रा से बचने और सोना, खाद्य तेल व उर्वरक जैसे आयातित उत्पादों पर निर्भरता घटाने की बात कही थी। बाजार इसे सरकार की आर्थिक चिंता और बढ़ते आयात बिल के संकेत के तौर पर देख रहा है। किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा दबाव? गिरावट का असर कई सेक्टरों में साफ दिखाई दिया। ज्वेलरी और कंजम्प्शन सेक्टर Titan Company के शेयर करीब 5.6 प्रतिशत टूट गए। बाजार को डर है कि सोने की मांग में कमी आने से ज्वेलरी कंपनियों की बिक्री प्रभावित हो सकती है। एविएशन सेक्टर कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से एयरलाइन कंपनियों पर दबाव बढ़ा। InterGlobe Aviation के शेयर 3.5 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए। बैंकिंग सेक्टर बैंकिंग शेयरों में भी कमजोरी रही– State Bank of India करीब 3% टूटा HDFC Bank में 1% से ज्यादा गिरावट ICICI Bank और Axis Bank भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे ऑटो और एनर्जी कंपनियां भी दबाव में Maruti Suzuki, Bajaj Auto और Reliance Industries के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। किन शेयरों में दिखी मजबूती? बाजार की भारी गिरावट के बीच कुछ डिफेंसिव सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली। Tata Consumer Products के शेयरों में तेजी रही। इसके अलावा फार्मा सेक्टर अपेक्षाकृत स्थिर दिखा। Sun Pharmaceutical Industries और Cipla जैसे शेयर बाजार की कमजोरी के बावजूद संभले रहे। आगे बाजार की चाल कैसी रह सकती है? विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहती हैं, तो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों की नजर अब– कच्चे तेल की कीमतों पश्चिम एशिया की स्थिति रुपये की चाल सरकार के अगले आर्थिक संकेतों पर बनी रहेगी।
शुरुआती कारोबार में बाजार में बड़ी बिकवाली सोमवार को घरेलू शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। BSE Sensex शुरुआती कारोबार में 1000 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि Nifty 50 में भी करीब 300 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। सुबह करीब 9:39 बजे Sensex 1016 अंक गिरकर 76,311 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 करीब 23,879 अंक पर पहुंच गया। बाजार में गिरावट की बड़ी वजह क्या है? विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार पर इस समय दो बड़े दबाव बने हुए हैं– पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रिपोर्ट्स के अनुसार Brent Crude Oil की कीमत फिर 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है। इससे भारत के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री Narendra Modi की हालिया अपील ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। प्रधानमंत्री ने लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, गैरजरूरी विदेश यात्रा से बचने और सोना, खाद्य तेल व उर्वरक जैसे आयातित उत्पादों पर निर्भरता घटाने की बात कही थी। बाजार इसे सरकार की आर्थिक चिंता और बढ़ते आयात बिल के संकेत के तौर पर देख रहा है। किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा दबाव? गिरावट का असर कई सेक्टरों में साफ दिखाई दिया। ज्वेलरी और कंजम्प्शन सेक्टर Titan Company के शेयर करीब 5.6 प्रतिशत टूट गए। बाजार को डर है कि सोने की मांग में कमी आने से ज्वेलरी कंपनियों की बिक्री प्रभावित हो सकती है। एविएशन सेक्टर कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से एयरलाइन कंपनियों पर दबाव बढ़ा। InterGlobe Aviation के शेयर 3.5 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए। बैंकिंग सेक्टर बैंकिंग शेयरों में भी कमजोरी रही– State Bank of India करीब 3% टूटा HDFC Bank में 1% से ज्यादा गिरावट ICICI Bank और Axis Bank भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे ऑटो और एनर्जी कंपनियां भी दबाव में Maruti Suzuki, Bajaj Auto और Reliance Industries के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। किन शेयरों में दिखी मजबूती? बाजार की भारी गिरावट के बीच कुछ डिफेंसिव सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली। Tata Consumer Products के शेयरों में तेजी रही। इसके अलावा फार्मा सेक्टर अपेक्षाकृत स्थिर दिखा। Sun Pharmaceutical Industries और Cipla जैसे शेयर बाजार की कमजोरी के बावजूद संभले रहे। आगे बाजार की चाल कैसी रह सकती है? विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहती हैं, तो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों की नजर अब– कच्चे तेल की कीमतों पश्चिम एशिया की स्थिति रुपये की चाल सरकार के अगले आर्थिक संकेतों पर बनी रहेगी।
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन मजबूती देखने को मिली। BSE Sensex और Nifty 50 दोनों बढ़त के साथ खुले। बाजार में आई इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीदें मानी जा रही हैं। वैश्विक बाजार से मिले सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जिसकी वजह से निफ्टी 24,400 के करीब पहुंच गया, जबकि सेंसेक्स 78,300 के पार खुलने में सफल रहा। बाजार में क्यों दिखी हल्की अस्थिरता? शुरुआती तेजी के बाद बाजार में कुछ उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला। GIFT Nifty के संकेतों और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने बाजार पर दबाव बनाया। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली भी चिंता का विषय बनी हुई है। बुधवार को FIIs ने 5,834 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 6,836 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को संभालने की कोशिश की। कच्चे तेल और ग्लोबल मार्केट का असर Brent Crude की कीमतें गिरकर करीब 101 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं। इससे भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों को राहत मिलती है क्योंकि इससे आयात बिल कम होने की संभावना रहती है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों की बात करें तो अमेरिकी बाजारों में भी शानदार तेजी दर्ज की गई। Nasdaq Composite S&P 500 दोनों इंडेक्स मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए। इसका असर एशियाई बाजारों में भी दिखा, जहां Nikkei 225 में 5% से ज्यादा की उछाल दर्ज की गई। डॉलर की मांग में कमी आने से भारतीय रुपये को भी मजबूती मिली है, जिससे बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिला। आगे बाजार की चाल कैसी रह सकती है? मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,500 का स्तर बेहद अहम माना जा रहा है। अगर इंडेक्स इस स्तर के ऊपर टिकने में सफल रहता है, तो बाजार 24,700 की तरफ बढ़ सकता है। हालांकि अगर निफ्टी 24,250 के सपोर्ट लेवल से नीचे फिसलता है, तो बाजार में दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में– बैंकिंग सेक्टर फार्मा सेक्टर कैपिटल मार्केट से जुड़े शेयर इनमें अच्छी गतिविधि देखने को मिल सकती है। अब निवेशकों की नजर पूरी तरह अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता और वैश्विक संकेतों पर बनी हुई है।
US Iran War and Insider Trading in Share Market: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अब शेयर और कमोडिटी बाजार में इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या कुछ लोगों को युद्ध और संभावित समझौते से जुड़ी अंदरूनी जानकारी पहले से थी, जिसके आधार पर करोड़ों डॉलर का मुनाफा कमाया गया. 70 मिनट में हुआ बड़ा खेल रिपोर्ट्स के मुताबिक, 6 मई की सुबह अमेरिकी समयानुसार करीब 3:40 बजे अचानक भारी मात्रा में क्रूड ऑयल “शॉर्ट” कॉन्ट्रैक्ट खरीदे गये. “शॉर्ट” ट्रेडिंग का मतलब होता है कि निवेशक यह दांव लगाता है कि किसी वस्तु की कीमत गिरने वाली है. बताया जा रहा है कि करीब 10,000 क्रूड ऑयल शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट खरीदे गये, जिनकी कुल वैल्यू लगभग 920 मिलियन डॉलर यानी हजारों करोड़ रुपये थी. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी ट्रेडिंग सामान्य परिस्थितियों में बेहद असामान्य मानी जाती है. 70 मिनट बाद आयी बड़ी खबर इन सौदों के लगभग 70 मिनट बाद अमेरिकी मीडिया प्लेटफॉर्म Axios की रिपोर्ट सामने आयी, जिसमें दावा किया गया कि अमेरिका और ईरान युद्ध समाप्त करने के लिए 14 सूत्रीय समझौते के करीब पहुंच चुके हैं. इस खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी गिरावट आयी. सुबह 7 बजे तक क्रूड ऑयल की कीमतें 12 प्रतिशत से ज्यादा नीचे चली गयीं. रिपोर्ट के अनुसार, जिन लोगों ने पहले से शॉर्ट पोजिशन ली थी, उन्हें इस गिरावट से लगभग 125 मिलियन डॉलर यानी करीब 1,000 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ. फिर अचानक पलटा बाजार हालांकि मामला यहीं खत्म नहीं हुआ. कुछ ही समय बाद ईरान ने “पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी” से जुड़ा बड़ा कदम उठाया, जिसके बाद तेल की कीमतों में फिर उछाल आ गया. तेल की कीमतें अचानक लगभग 8 प्रतिशत तक चढ़ गयीं. इस तेज उतार-चढ़ाव ने बाजार में और ज्यादा संदेह पैदा कर दिया. इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोप क्यों लग रहे? सोशल मीडिया और वित्तीय जगत में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या कुछ ट्रेडर्स को संभावित डील की जानकारी पहले से थी? क्योंकि जिस समय इतनी बड़ी शॉर्ट ट्रेडिंग की गयी, उस समय तक सार्वजनिक रूप से ऐसी कोई खबर सामने नहीं आयी थी जो तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट का संकेत देती. मार्केट विश्लेषकों का कहना है कि अगर किसी को गोपनीय कूटनीतिक बातचीत या संभावित समझौते की जानकारी पहले से थी और उसी आधार पर ट्रेडिंग की गयी, तो यह इनसाइडर ट्रेडिंग के दायरे में आ सकता है. कोबेसी लेटर ने उठाये सवाल ग्लोबल मार्केट पर नजर रखने वाले प्लेटफॉर्म “कोबेसी लेटर” ने इस पूरे घटनाक्रम को सार्वजनिक किया. उनके अनुसार, इतनी बड़ी मात्रा में अचानक की गयी ट्रेडिंग ने बाजार में गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं. हालांकि अब तक अमेरिकी प्रशासन या नियामक एजेंसियों की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक जांच की घोषणा नहीं की गयी है. युद्ध और बाजार का खतरनाक रिश्ता विशेषज्ञों का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध की स्थिति अक्सर वैश्विक बाजारों को प्रभावित करती है. तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से कुछ निवेशक भारी मुनाफा कमाते हैं, लेकिन अगर इसमें अंदरूनी जानकारी का इस्तेमाल हो, तो यह गंभीर वित्तीय अपराध माना जाता है.
ट्रोल-डीजल रेट में बदलाव नहीं देश में विधानसभा चुनावों की वोटिंग समाप्त होने से ठीक पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर फैली अटकलों पर केंद्र सरकार ने बड़ा बयान दिया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल ईंधन की कीमतों में किसी तरह की बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव नहीं है। चुनाव के बाद भी दाम बढ़ने की अटकलों पर विराम सरकारी बयान के अनुसार, 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में मतदान समाप्त होने के बाद भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार अस्थिर बनी हुई हैं, जिसके कारण पहले से ही बाजार में चिंता का माहौल है। अफवाहों पर सरकार की चेतावनी पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, कुछ राज्यों में कीमत बढ़ने की अफवाहों के चलते लोगों ने पैनिक बाइंग शुरू कर दी थी। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार– कई पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी गईं कुछ जगहों पर मांग 30% से ज्यादा बढ़ गई सरकार ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की तेल कंपनियों पर बढ़ता आर्थिक दबाव सरकारी तेल कंपनियां मौजूदा दरों पर भारी नुकसान झेल रही हैं। अनुमानित दैनिक घाटा करीब ₹2,400 करोड़ पेट्रोल पर लगभग ₹20 प्रति लीटर का नुकसान डीजल पर करीब ₹100 प्रति लीटर तक का घाटा इसके बावजूद सरकार ने कीमतें स्थिर रखी हैं। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल पिछले दो महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 50% से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य पूर्व में तनाव और सप्लाई बाधाओं के कारण तेल बाजार प्रभावित हुआ है, जिससे कीमतें 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। 2022 से स्थिर हैं खुदरा ईंधन के दाम भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें अप्रैल 2022 से लगभग स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली में पेट्रोल: ₹94.77 प्रति लीटर डीजल: ₹87.67 प्रति लीटर हालांकि अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू रेट के बीच अंतर लगातार बढ़ रहा है। सरकार ने क्या कहा? पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में फिलहाल पर्याप्त ईंधन स्टॉक मौजूद है। पेट्रोल, डीजल और LPG का पर्याप्त भंडार आपूर्ति व्यवस्था सामान्य किसी भी तरह की कमी की स्थिति नहीं सरकार ने फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से इनकार कर दिया है, लेकिन वैश्विक बाजार और तेल कंपनियों के घाटे को देखते हुए आगे स्थिति पर नजर बनी रहेगी। फिलहाल आम जनता को राहत जरूर मिली है, लेकिन तेल बाजार की अस्थिरता चिंता का कारण बनी हुई है।
भारत की अर्थव्यवस्था इस समय एक साथ कई मोर्चों पर दबाव झेलती नजर आ रही है। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच अब भीषण गर्मी और कमजोर मानसून के संकेतों ने महंगाई और आर्थिक स्थिरता को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले महीनों में आम लोगों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। महंगे क्रूड से बढ़ा दबाव वैश्विक स्तर पर जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचाई पर बनी हुई हैं। इससे भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर सीधा असर पड़ता है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट और उत्पादन लागत बढ़ती है, जिसका असर हर वस्तु की कीमत पर पड़ता है। भीषण गर्मी ने बढ़ाई बिजली मांग देश के कई हिस्सों में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। गर्मी के कारण एयर कंडीशनर और कूलर के इस्तेमाल में तेज बढ़ोतरी हुई है, जिससे बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। हाल ही में देश में पावर डिमांड 256 गीगावाट तक पहुंच गई, जो एक नया रिकॉर्ड है। कमजोर मानसून से खेती पर खतरा जून से सितंबर के बीच आने वाला मानसून भारत की कृषि व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इस बार सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई जा रही है। अगर ऐसा होता है, तो फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी आ सकती है। महंगाई बढ़ने का खतरा Reserve Bank of India ने जहां महंगाई दर 4.6% रहने का अनुमान जताया था, वहीं अब विशेषज्ञ इसे 5% से ऊपर जाने की आशंका जता रहे हैं। अगर मानसून कमजोर रहता है, तो यह आंकड़ा 5.8% तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो सकती है, बल्कि दरें बढ़ाने का दबाव भी बन सकता है। ‘परफेक्ट स्टॉर्म’ जैसी स्थिति का खतरा ANZ Bank के अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, ऊंची ऊर्जा कीमतें, भीषण गर्मी और कमजोर मानसून मिलकर “परफेक्ट स्टॉर्म” यानी गंभीर आर्थिक संकट जैसी स्थिति पैदा कर सकते हैं। खासकर खाद्य महंगाई सबसे बड़ा जोखिम बनकर उभर रही है। आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा? खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं किसानों की आय पर असर पड़ सकता है ग्रामीण इलाकों में मांग घट सकती है खेती की लागत बढ़ने से महंगाई और तेज हो सकती है कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी करीब 37% है, इसलिए खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर हर घर के बजट पर पड़ेगा। क्या है राहत की उम्मीद? कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति पूरी तरह बिगड़ेगी नहीं। Nomura Holdings के अनुसार, भारत के पास गेहूं और चावल का पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है, जिससे कीमतों को नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही बेहतर सिंचाई और जलवायु-प्रतिरोधी बीजों के कारण खेती पर असर पहले के मुकाबले कुछ कम हो सकता है।
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ नजर आ रहा है। Iran और United States के बीच बढ़ती तनातनी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसके चलते सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को बाजार की शुरुआत सुस्त रही। हालांकि शुरुआती गिरावट के बाद बाजार ने कुछ हद तक संभलने की कोशिश जरूर की। शुरुआती गिरावट के बाद हल्की रिकवरी सुबह कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में खुले, लेकिन धीरे-धीरे रिकवरी देखने को मिली। सुबह 9:23 बजे तक सेंसेक्स करीब 124 अंकों की बढ़त के साथ 78,618 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 24 अंकों की तेजी के साथ 24,377 पर ट्रेड करता दिखा। बाजार में अनिश्चितता का माहौल विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में अस्थिरता की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को लेकर विरोधाभासी संकेत हैं। जहां पहले निवेशकों को समझौते की उम्मीद थी, वहीं अब आरोप-प्रत्यारोप ने स्थिति को जटिल बना दिया है। इस अनिश्चितता के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है, जिसका असर ‘India VIX’ इंडेक्स में 5.82% की तेजी के रूप में देखा गया। कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। तेल की कीमतों में यह उछाल भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है और निवेशकों का भरोसा प्रभावित होता है। किन सेक्टर्स ने दिया सहारा बाजार की सुस्ती के बीच कुछ सेक्टर्स ने मजबूती दिखाई। PSU बैंक, मीडिया और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में खरीदारी देखी गई। इंडिविजुअल शेयरों में Trent, State Bank of India और ICICI Bank ने बाजार को सहारा दिया। वहीं Jio Financial Services, Hindalco Industries और Tata Motors जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। एक्सपर्ट्स की राय मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक सीजफायर डेडलाइन पर स्पष्टता नहीं आती, बाजार में सतर्कता बनी रहेगी। निफ्टी के लिए 24,100 का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 24,700 के स्तर को पार करना बाजार के लिए जरूरी होगा। फिलहाल विदेशी निवेशकों (FIIs) की खरीदारी जारी है, लेकिन घरेलू निवेशकों (DIIs) की बिकवाली से बाजार पर दबाव बना हुआ है।
नई दिल्ली: करीब 45 दिनों के तनाव के बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की अहम धुरी Strait of Hormuz को पूरी तरह जहाजों के लिए खोल दिया गया है। इस फैसले से भारत समेत दुनिया भर के आयातकों को बड़ी राहत मिली है। भारत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल और गैस का इसी मार्ग से आता है, ऐसे में सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है। 41 जहाज भारत आने को तैयार मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, India की ओर बढ़ रहे 41 जहाज इस समय होर्मुज पार करने के लिए तैयार हैं। इनमें: 15 भारतीय जहाज 26 विदेशी जहाज इन जहाजों में कच्चा तेल, LPG, LNG और उर्वरक (फर्टिलाइजर) लदा हुआ है। खास बात यह है कि एक दर्जन से ज्यादा जहाजों में फर्टिलाइजर है, जो आगामी खरीफ सीजन के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है। क्या-क्या आ रहा है भारत? भारतीय जहाजों में: 10 जहाज कच्चा तेल (Crude Oil) 4 जहाज LPG 3 जहाज LNG लेकर आ रहे हैं यह सप्लाई देश में ऊर्जा संकट की आशंका को काफी हद तक कम कर सकती है। क्यों बंद हुआ था होर्मुज? 28 फरवरी को United States और Israel द्वारा Iran पर हमले के बाद ईरान ने इस जलमार्ग को बंद कर दिया था। इससे वैश्विक बाजार में हड़कंप मच गया था, क्योंकि दुनिया का करीब: 20% कच्चा तेल 30% प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से गुजरती है। कीमतों में गिरावट, व्यापार को बढ़ावा Strait of Hormuz के खुलने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि: फ्रेट रेट्स कम होंगे निर्यात-आयात सस्ता होगा सप्लाई चेन सामान्य होगी निर्यातकों को भी राहत निर्यातकों को उम्मीद है कि पश्चिम एशिया में मांग फिर से बढ़ेगी। साथ ही यूरोप तक सामान भेजने का रास्ता भी छोटा और तेज हो जाएगा। इससे भारत के व्यापार को नई गति मिल सकती है। आने वाले दिनों में स्थिति होगी साफ अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले कुछ दिनों में और जहाजों के इस रूट से गुजरने के बाद पूरी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। आमतौर पर होर्मुज पार करने के बाद जहाजों को भारत पहुंचने में 4 से 6 दिन का समय लगता है।
अमेरिका ने फिर बढ़ाई रूस से तेल खरीद की अनुमति वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने एक अहम और चर्चित फैसला लिया है। ट्रंप प्रशासन ने रूस से प्रतिबंधित कच्चे तेल की खरीद पर दी गई अस्थायी छूट को एक बार फिर बढ़ा दिया है। इस निर्णय के तहत कई देश, जिनमें भारत भी शामिल है, सीमित समय के लिए रूस से तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीद सकेंगे। यह छूट अब 16 मई तक प्रभावी रहेगी और इसे ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। किन शर्तों के साथ मिली छूट अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, यह अनुमति केवल उन्हीं तेल शिपमेंट्स पर लागू होगी जो शुक्रवार तक जहाजों में लोड किए जा चुके हैं। इसके अलावा, इस छूट से ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया से जुड़े किसी भी प्रकार के व्यापार को पूरी तरह बाहर रखा गया है। इसका मतलब यह है कि अमेरिका रूस से तेल व्यापार पर पूरी तरह रोक लगाने के बजाय उसे सीमित और नियंत्रित तरीके से जारी रखना चाहता है। ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाने की कोशिश यह फैसला ऐसे समय आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव और मध्य पूर्व में युद्ध जैसे हालात के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिर हो गया है। हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका इस कदम के जरिए वैश्विक तेल आपूर्ति को अचानक झटके से बचाना चाहता है, ताकि कीमतें बहुत अधिक न बढ़ें। एशियाई देशों की मांग का असर रिपोर्ट्स के अनुसार, एशिया के कई देशों ने अमेरिका पर दबाव बनाया था कि उन्हें वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों तक पहुंच दी जाए। भारत जैसे बड़े आयातक देशों ने रूस से सस्ती तेल आपूर्ति को जारी रखने की मांग की थी, ताकि घरेलू ऊर्जा कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सके। इसी दबाव और वैश्विक आपूर्ति संकट को देखते हुए अमेरिका ने यह अस्थायी राहत दी है। पहले के रुख से बदलाव दिलचस्प बात यह है कि सिर्फ दो दिन पहले अमेरिकी ट्रेजरी सचिव ने संकेत दिया था कि यह छूट आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। लेकिन अचानक लिए गए इस फैसले ने अमेरिकी नीति में बदलाव को दर्शाया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। तेल कीमतों में भारी गिरावट इसी बीच, ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को आंशिक रूप से खोलने के बाद वैश्विक तेल बाजार में लगभग 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिरता अस्थायी हो सकती है, क्योंकि क्षेत्र में तनाव अभी भी बना हुआ है। राजनीतिक विवाद भी तेज अमेरिकी संसद के कई सदस्यों ने इस फैसले की आलोचना की है। उनका कहना है कि इससे रूस को आर्थिक रूप से फायदा मिलेगा, जबकि वह यूक्रेन युद्ध में शामिल है। दूसरी ओर, यूरोपीय संघ ने भी प्रतिबंधों में ढील देने का विरोध जताया है। ईरान युद्ध, हॉर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच अमेरिका का यह कदम वैश्विक ऊर्जा नीति को नई दिशा दे सकता है। हालांकि यह फैसला अस्थायी राहत देता है, लेकिन इसके राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव आने वाले समय में और अधिक स्पष्ट हो सकते हैं।
वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका ने रूस और ईरान से तेल खरीदने पर दी गई अस्थायी छूट को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद भारत जैसे बड़े आयातकों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। US वित्त मंत्री का साफ ऐलान अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा: रूस और ईरान के तेल के लिए दिया गया जनरल लाइसेंस रिन्यू नहीं होगा 11 मार्च से पहले जहाजों पर लदा तेल ही बेचने की अनुमति थी वह पुराना स्टॉक अब खत्म हो चुका है उनका साफ संदेश था—“अब और नहीं।” 30 दिन की राहत भी खत्म अमेरिका ने पहले वैश्विक बाजार को स्थिर रखने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दी थी। भारतीय रिफाइनर को पहले से लदे तेल खरीदने की अनुमति सप्लाई चेन को बनाए रखने की कोशिश तेल कीमतों को काबू में रखने का प्रयास अब स्थिति यह है: रूसी तेल पर छूट 11 अप्रैल को खत्म ईरानी तेल पर छूट 19 अप्रैल को समाप्त भारत पर क्या होगा असर? भारत रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी कर रहा था। इस फैसले के बाद: सस्ते तेल की उपलब्धता घट सकती है आयात लागत बढ़ने की आशंका नए सप्लायर की तलाश तेज करनी होगी हालांकि, सरकार का दावा है कि देश के पास पर्याप्त स्टॉक और विकल्प मौजूद हैं। क्यों लिया गया फैसला? डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन अब फिर से “मैक्सिमम प्रेशर” रणनीति पर लौट आया है। ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाना रूस की तेल आय को सीमित करना वैश्विक रणनीतिक संतुलन बनाना तेल बाजार में बढ़ेगी हलचल मिडिल ईस्ट तनाव के चलते पहले ही कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा जा चुका है। फरवरी में कीमतें 100 डॉलर/बैरल के पार सप्लाई घटने से फिर बढ़ोतरी संभव वैश्विक बाजार में अस्थिरता आगे क्या? अमेरिका के इस फैसले से वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति दोनों पर असर पड़ना तय है। अब नजर इस पर होगी कि: भारत अपनी ऊर्जा रणनीति कैसे बदलता है तेल कीमतें किस दिशा में जाती हैं और क्या भविष्य में कोई नई कूटनीतिक राह निकलती है यह फैसला भारत के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका ने रूस और ईरान से तेल खरीदने पर दी गई अस्थायी छूट को आगे न बढ़ाने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद दोनों देशों के तेल पर पाबंदियां फिर से कड़ी हो जाएंगी, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल और भारत जैसे बड़े आयातकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। जनरल लाइसेंस खत्म, सख्त हुए नियम अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि 11 मार्च से पहले समुद्र में मौजूद तेल को निकालने के लिए दिया गया जनरल लाइसेंस अब समाप्त हो चुका है। इसका मतलब है कि अब: रूस और ईरान के तेल पर सख्त प्रतिबंध लागू होंगे इन देशों से तेल खरीदने वाले देशों पर सेकेंडरी सैंक्शंस लग सकते हैं बैंकों और कंपनियों पर भी कार्रवाई का खतरा बढ़ेगा ट्रंप प्रशासन की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एक बार फिर ईरान के खिलाफ “मैक्सिमम प्रेशर” रणनीति अपनाई है। ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करने की कोशिश तेल तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई कई कंपनियों, जहाजों और व्यक्तियों पर नए प्रतिबंध अमेरिका का उद्देश्य ईरान की आय के प्रमुख स्रोतों को सीमित करना है। भारत पर संभावित असर भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है और रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है। इस फैसले का असर: सस्ते तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है वैकल्पिक सप्लायर की तलाश करनी पड़ सकती है हालांकि सरकार का कहना है कि देश के पास पर्याप्त स्टॉक है और सप्लाई के कई विकल्प मौजूद हैं। ईरान पर बढ़ी आर्थिक मार रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी एजेंसी OFAC ने ईरान के तेल तस्करी नेटवर्क पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। इसमें कई कंपनियां, जहाज और व्यक्तियों को निशाना बनाया गया है। अमेरिका का मकसद है कि ईरान के अवैध तेल कारोबार को पूरी तरह खत्म किया जाए। ओमान में वार्ता पर टिकी नजर इस बीच ओमान में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत होने वाली है। समझौते की उम्मीद में तेल कीमतों में हल्की नरमी असफल वार्ता की स्थिति में कीमतों में तेजी संभव व्हाइट हाउस ने संकेत दिए हैं कि वह विवाद का समाधान चाहता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर आर्थिक दबाव और बढ़ाया जाएगा। आगे क्या? अमेरिका के इस फैसले से वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ना तय माना जा रहा है। अगर प्रतिबंध लंबे समय तक जारी रहते हैं, तो: तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है भारत जैसे देशों की आयात लागत बढ़ सकती है भू-राजनीतिक तनाव और गहरा सकता है दुनिया की नजर अमेरिका-ईरान वार्ता और उसके नतीजों पर टिकी है, जो आगे के हालात तय करेंगे।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झकझोर कर रख दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा Strait of Hormuz में नौसैनिक नाकेबंदी की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी कच्चा तेल (WTI) करीब 8 प्रतिशत बढ़कर 104.24 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड लगभग 7 प्रतिशत चढ़कर 102.29 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। इस घटनाक्रम ने न केवल ऊर्जा बाजार बल्कि वैश्विक शेयर बाजारों में भी अस्थिरता बढ़ा दी है। Dow Jones Futures में गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों में चिंता साफ झलक रही है। सप्लाई संकट की आशंका से बढ़ी कीमतें विशेषज्ञों के अनुसार, तेल की कीमतों में अचानक उछाल का सबसे बड़ा कारण सप्लाई बाधित होने का डर है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा Strait of Hormuz से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और अन्य खाड़ी देश इसी समुद्री मार्ग के जरिए बड़े पैमाने पर तेल निर्यात करते हैं। अमेरिकी प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि जब तक ईरान अपनी “आक्रामक गतिविधियों” पर रोक नहीं लगाता, यह नाकेबंदी जारी रहेगी। ऐसे में बाजार में अनिश्चितता और जोखिम की भावना बढ़ गई है। ईरान पर अमेरिका की सख्त कार्रवाई राष्ट्रपति Donald Trump ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी नौसेना उन जहाजों को रोकेगी जो ईरान को कथित तौर पर अवैध टैक्स या टोल का भुगतान कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईरान अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में माइन (समुद्री बम) होने का डर फैलाकर वैश्विक व्यापार को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि यदि किसी शांतिपूर्ण जहाज पर हमला हुआ तो अमेरिका कड़ी सैन्य प्रतिक्रिया देगा। क्या पूरी तरह बंद होगा समुद्री रास्ता? US Central Command के अनुसार, यह नाकेबंदी पूरी तरह से वैश्विक जहाजरानी को रोकने के लिए नहीं है। गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को सीमित अनुमति दी जाएगी। अमेरिका का उद्देश्य ईरान की तेल आय को नियंत्रित करना है, न कि पूरी दुनिया के व्यापार को बाधित करना। हालांकि, बढ़ते सैन्य तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही में पहले ही कमी आने लगी है, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है। आगे क्या? वर्तमान हालात यह संकेत दे रहे हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव जल्द कम होने वाला नहीं है। राष्ट्रपति ट्रंप के “लॉक्ड एंड लोडेड” बयान से यह स्पष्ट है कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए भी तैयार है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजरें अब कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक महंगाई को और बढ़ा सकती हैं, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
नई दिल्ली: 11 अप्रैल 2026 को देशभर में पेट्रोल और डीजल के नए दाम जारी कर दिए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपया विनिमय दर के असर के बीच आज कुछ शहरों में कीमतें स्थिर रहीं, जबकि कई जगह मामूली बदलाव देखने को मिला। राजधानी Mumbai और New Delhi में आज पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रहे, लेकिन Patna, Gaya और Muzaffarpur जैसे शहरों में कीमतों में बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पेट्रोल की कीमतें: कहां बढ़ोतरी, कहां राहत? आज के प्रमुख शहरों में पेट्रोल के रेट इस प्रकार हैं: Mumbai: ₹103.54 (स्थिर) New Delhi: ₹94.77 (स्थिर) Kolkata: ₹105.41 (स्थिर) Chennai: ₹100.90 (↓ ₹0.33) Bengaluru: ₹102.96 (↑ ₹0.04) Gurugram: ₹95.43 (↓ ₹0.22) Noida: ₹94.90 (↑ ₹0.02) बिहार में बढ़ोतरी: Patna: ₹105.74 (↑ ₹0.51) Gaya: ₹106.31 (↑ ₹0.37) Muzaffarpur: ₹106.19 (↑ ₹0.41) डीजल के दाम: बिहार में इजाफा डीजल की कीमतों में भी कई शहरों में हल्का उछाल देखा गया: Mumbai: ₹90.03 (स्थिर) New Delhi: ₹87.67 (स्थिर) Kolkata: ₹92.02 (स्थिर) Chennai: ₹92.48 (↓ ₹0.33) बिहार में बढ़ोतरी: Patna: ₹91.97 (↑ ₹0.48) Gaya: ₹92.50 (↑ ₹0.35) Muzaffarpur: ₹92.37 (↑ ₹0.39) क्यों बदलते हैं फ्यूल के दाम? पेट्रोल-डीजल की कीमतें कई प्रमुख कारणों पर निर्भर करती हैं: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमत डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स (Excise Duty और VAT) परिवहन और डीलर मार्जिन इसी वजह से अलग-अलग राज्यों और शहरों में कीमतों में अंतर देखने को मिलता है। SMS से ऐसे चेक करें अपने शहर का रेट घर बैठे मोबाइल से भी आप ताजा कीमतें जान सकते हैं: Indian Oil: RSP <City Code> भेजें 9224992249 पर BPCL: RSP भेजें 9223112222 पर HPCL: HP Price भेजें 9222201122 पर
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।