Defence News India

Lieutenant General N S Raja Subramani and Vice Admiral Krishna Swaminathan appointed to top military posts
लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि बने नए CDS, वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन होंगे नौसेना प्रमुख

भारत सरकार ने सशस्त्र बलों के शीर्ष नेतृत्व में बड़ा बदलाव करते हुए N S Raja Subramani को देश का नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) नियुक्त किया है. वहीं Krishna Swaminathan को भारतीय नौसेना का अगला प्रमुख चुना गया है. दोनों नियुक्तियों को रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. 30 मई के बाद संभालेंगे CDS की जिम्मेदारी सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि मौजूदा CDS Anil Chauhan का कार्यकाल पूरा होने के बाद पद संभालेंगे. जनरल अनिल चौहान 30 मई 2026 को रिटायर हो रहे हैं. CDS बनने के साथ ही एन एस राजा सुब्रमणि सैन्य मामलों के विभाग (Department of Military Affairs) में भारत सरकार के सचिव की जिम्मेदारी भी निभाएंगे. सैन्य नेतृत्व का लंबा अनुभव एन एस राजा सुब्रमणि फिलहाल नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट में मिलिट्री एडवाइजर के रूप में कार्यरत हैं. उन्होंने 1 सितंबर 2025 को यह जिम्मेदारी संभाली थी. इससे पहले वे भारतीय सेना में कई अहम पदों पर रह चुके हैं. जुलाई 2024 से जुलाई 2025 तक उन्होंने आर्मी के वाइस चीफ के रूप में काम किया. वहीं मार्च 2023 से जून 2024 तक वे सेंट्रल कमांड के जीओसी-इन-चीफ रहे. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा सुरक्षा, सामरिक योजना और सैन्य संचालन का उनका अनुभव उन्हें इस पद के लिए मजबूत विकल्प बनाता है. कृष्णा स्वामीनाथन होंगे नए नौसेना प्रमुख सरकार ने वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को भारतीय नौसेना का नया चीफ ऑफ नेवल स्टाफ नियुक्त किया है. वे 31 मई 2026 को अपना नया कार्यभार संभालेंगे. फिलहाल वे मुंबई स्थित वेस्टर्न नेवल कमांड के प्रमुख हैं. उनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2028 तक रहेगा. इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के विशेषज्ञ माने जाते हैं स्वामीनाथन कृष्णा स्वामीनाथन 1 जुलाई 1987 को भारतीय नौसेना में शामिल हुए थे. उन्हें कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर का विशेषज्ञ माना जाता है. उन्होंने National Defence Academy, ब्रिटेन के जॉइंट सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, करंजा के कॉलेज ऑफ नेवल वॉरफेयर और अमेरिका के यूएस नेवल वॉर कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से सैन्य शिक्षा प्राप्त की है. रक्षा नेतृत्व में बड़े बदलाव का संकेत रक्षा मामलों के जानकारों के अनुसार, इन नियुक्तियों से भारत की सैन्य रणनीति और तीनों सेनाओं के संयुक्त संचालन को नई दिशा मिल सकती है. आने वाले समय में सीमा सुरक्षा, समुद्री रणनीति और आधुनिक युद्ध तकनीक पर सरकार का फोकस और मजबूत होने की उम्मीद है.  

surbhi मई 9, 2026 0
Dassault Rafale fighter jet with India France flags highlighting stalled defense deal over technology and Russia concerns
राफेल डील पर ब्रेक क्यों? DAC की मंजूरी के बाद भी फाइल अटकी, रूस बना सबसे बड़ा फैक्टर

भारत की महत्वाकांक्षी राफेल फाइटर जेट डील एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह प्रगति नहीं, बल्कि ठहराव है। 12 फरवरी 2026 को रक्षा मंत्रालय की Defence Acquisition Council (DAC) से मंजूरी मिलने के बाद उम्मीद थी कि प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ेगी, खासकर तब जब 17 फरवरी को Emmanuel Macron भारत दौरे पर आए। माना जा रहा था कि इस दौरान बड़ा ऐलान हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ-और अब करीब दो महीने बाद भी फाइल आगे नहीं बढ़ी है। इस देरी की सबसे बड़ी वजह तकनीकी और रणनीतिक मतभेद बताए जा रहे हैं, जिसमें रूस की भूमिका अहम बनकर उभरी है। भारत के सामने चुनौती स्पष्ट है-वायुसेना के पास मौजूदा समय में केवल 29 स्क्वाड्रन हैं, जबकि न्यूनतम आवश्यकता 42 की है। इस कमी को पूरा करने के लिए भारत 114 नए Dassault Rafale लड़ाकू विमान खरीदने की योजना पर काम कर रहा है। इससे पहले ही भारतीय वायुसेना के पास राफेल के दो स्क्वाड्रन मौजूद हैं और नौसेना के लिए 26 मरीन राफेल की डील भी हो चुकी है। क्या है डील का पूरा ढांचा? प्रस्तावित डील के तहत 114 विमानों में से 18 सीधे फ्रांस से तैयार हालत (फ्लाइ-अवे) में मिलेंगे, जबकि 96 विमानों का निर्माण भारत में होगा। इसमें लोकल मैन्युफैक्चरिंग और “मेक इन इंडिया” को बढ़ावा देने के लिए 50–60 प्रतिशत तक स्वदेशी कंपोनेंट शामिल करने की योजना है। इस डील की अनुमानित लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है, जो भारत के सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी डील में से एक हो सकती है। कहां फंसा है पेंच? असल विवाद “सोर्स कोड” और हथियार एकीकरण (integration) को लेकर है। भारत चाहता है कि वह राफेल में अपनी स्वदेशी मिसाइलें और हथियार बिना किसी अतिरिक्त अनुमति के इस्तेमाल कर सके। इसमें सबसे अहम है BrahMos missile, जो भारत और Russia की संयुक्त परियोजना है। यहीं से फ्रांस की चिंता शुरू होती है। राफेल के सॉफ्टवेयर और सिस्टम में बदलाव के लिए संवेदनशील सोर्स कोड साझा करना पड़ सकता है। फ्रांस को आशंका है कि इस प्रक्रिया में यह तकनीक अप्रत्यक्ष रूप से रूस तक पहुंच सकती है, जो उसके लिए रणनीतिक जोखिम है। खासकर तब, जब रूस और पश्चिमी देशों के बीच Russia-Ukraine War के कारण संबंध पहले से तनावपूर्ण हैं और NATO के सदस्य देश फ्रांस रूस को प्रतिद्वंद्वी मानते हैं। भारत की स्थिति क्या है? भारत का तर्क साफ है-वह अपने हथियारों और मिसाइल सिस्टम को किसी भी प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल करने की स्वतंत्रता चाहता है, ताकि लागत कम रहे और रणनीतिक स्वायत्तता बनी रहे। भारत का यह भी रिकॉर्ड रहा है कि उसने किसी भी रक्षा सौदे में तकनीक लीक नहीं की है। क्या है आगे का रास्ता? यह डील भारत और फ्रांस दोनों के लिए बेहद अहम है। जहां भारत को तत्काल फाइटर जेट्स की जरूरत है, वहीं फ्रांस के लिए यह एक बड़ा रक्षा निर्यात सौदा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि समाधान “विश्वास और संतुलन” के बीच ही निकलेगा-संभवतः फ्रांस सीमित एक्सेस या नियंत्रित तकनीकी साझा करने का विकल्प दे सकता है, जबकि भारत तकनीक की सुरक्षा को लेकर आश्वासन देगा। फिलहाल, राफेल डील सिर्फ एक रक्षा सौदा नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक साझेदारियों के बीच संतुलन की परीक्षा बन चुकी है।  

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
Rajnath Singh addressing public event warning Pakistan amid Iran conflict and rising geopolitical tensions
ईरान युद्ध के बीच राजनाथ सिंह की चेतावनी: “पाकिस्तान ने हरकत की तो मिलेगा करारा जवाब”

नई दिल्ली/केरल: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान युद्ध की आड़ में पाकिस्तान कोई “गलत हरकत” करता है, तो भारत उसे पहले से भी ज्यादा कड़ा और निर्णायक जवाब देगा। “पड़ोसी देश साजिश कर सकता है” केरल में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा: “मौजूदा हालात में हमारा पड़ोसी देश साजिश कर सकता है, लेकिन भारत पूरी तरह तैयार है।” ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की दिलाई याद राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर की याद दिलाते हुए कहा: भारतीय सेना ने सिर्फ 22 मिनट में जवाबी कार्रवाई की थी पाकिस्तान के अंदर घुसकर 9 आतंकी ठिकानों को तबाह किया गया इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान को सीज़फायर की मांग करनी पड़ी यह ऑपरेशन 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले (25 पर्यटकों की मौत) के बाद शुरू हुआ था। ऊर्जा संकट पर भी दिया भरोसा रक्षा मंत्री ने साफ किया कि: देश में ईंधन और गैस की कोई कमी नहीं है भारत किसी भी ऊर्जा संकट से निपटने के लिए तैयार है होर्मुज जलडमरूमध्य पर नजर उन्होंने बताया कि: भारतीय नौसेना होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले टैंकरों की सुरक्षा कर रही है सरकार पश्चिम एशिया की स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है कूटनीतिक मोर्चे पर भी सक्रिय भारत राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने कूटनीतिक प्रयासों के जरिए खाड़ी क्षेत्र में भारत के हितों की रक्षा कर रहे हैं। पाकिस्तान के दावों पर सवाल पाकिस्तान खुद को अमेरिका-ईरान विवाद में मध्यस्थ बता रहा है लेकिन ईरान ने इन दावों को खारिज कर दिया, जिससे पाकिस्तान की स्थिति कमजोर दिख रही है

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
Women officers of Indian Armed Forces marching proudly during a ceremonial parade in uniform
भारतीय सशस्त्र बलों में बढ़ रही महिलाओं की ताकत: 2014 में 3 हजार से अब 11 हजार से ज्यादा महिला अधिकारी

  भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। पिछले एक दशक में सेना, नौसेना और वायुसेना में महिला अधिकारियों की संख्या में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014 में जहां महिला अधिकारियों की संख्या लगभग 3,000 थी, वहीं अब यह बढ़कर 11,000 से अधिक हो गई है। रक्षा क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी देश की सुरक्षा में उनके मजबूत योगदान को दर्शाती है। प्रशिक्षण के नए अवसर, नीतिगत बदलाव और अदालतों के फैसलों ने महिलाओं के लिए सशस्त्र बलों में आगे बढ़ने के रास्ते खोले हैं। अब महिलाएं केवल सहायक भूमिकाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नेतृत्व और ऑपरेशनल जिम्मेदारियों में भी अहम भूमिका निभा रही हैं।   NDA में भी बढ़ी महिलाओं की मौजूदगी राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) में महिलाओं को प्रवेश मिलने के बाद उनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। मई 2025 में 17 महिला कैडेट और नवंबर 2025 में 15 महिला कैडेट एनडीए से पास आउट हुईं। साल 2022 में पहली बार महिलाओं को एनडीए में प्रवेश दिया गया था और तब से अब तक 158 महिला कैडेट इस प्रतिष्ठित अकादमी में शामिल हो चुकी हैं। महिलाओं की बढ़ती रुचि को देखते हुए सेना ने वर्ष 2024 में महिला कैडेट के लिए वार्षिक सीटों की संख्या 80 से बढ़ाकर 144 कर दी है।   इन राज्यों से सबसे ज्यादा महिला कैडेट राज्यों के अनुसार देखा जाए तो हरियाणा से सबसे ज्यादा 35 महिला कैडेट एनडीए में हैं। इसके बाद उत्तर प्रदेश से 28 और राजस्थान से 13 महिला कैडेट इस अकादमी का हिस्सा हैं। यह आंकड़े दिखाते हैं कि देश के विभिन्न राज्यों से युवतियां बड़ी संख्या में रक्षा सेवाओं में करियर बनाने के लिए आगे आ रही हैं।   नेतृत्व और ऑपरेशन में भी महिलाएं आगे आज भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाएं कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रही हैं। वे फाइटर पायलट, यूनिट कमांडर और लेफ्टिनेंट जनरल जैसे वरिष्ठ पदों तक पहुंच चुकी हैं। इससे सेना की पेशेवर क्षमता और मजबूती दोनों में वृद्धि हुई है। महिलाओं की भागीदारी से सशस्त्र बलों में विविधता और नेतृत्व की नई ऊर्जा देखने को मिल रही है।   महिलाओं का खास समुद्री अभियान साल 2025 में सेना, नौसेना और वायुसेना की 11 महिला अधिकारियों ने मिलकर एक खास समुद्री अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया। इन अधिकारियों ने स्वदेशी जहाज ‘त्रिवेणी’ के जरिए 1,800 नॉटिकल मील की लंबी यात्रा करते हुए सेशेल्स तक का सफर तय किया। यह मिशन भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती क्षमता और साहस का प्रतीक माना गया।   गणतंत्र दिवस पर भी दिखा महिला शक्ति का दम गणतंत्र दिवस 2025 की परेड में भारतीय वायुसेना की 9 महिला अग्निवीर वायु ने एयरफोर्स बैंड का हिस्सा बनकर इतिहास रचा। वहीं फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता ढांकर ने राष्ट्रपति के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराने का सम्मान हासिल किया।   बदलती तस्वीर आजादी के शुरुआती वर्षों में महिलाओं की भूमिका भारतीय सेना में मुख्य रूप से मेडिकल और नर्सिंग सेवाओं तक सीमित थी। लेकिन समय के साथ नीतियों में बदलाव, न्यायालयों के फैसलों और संस्थागत सुधारों के चलते महिलाओं को सेना के कई नए क्षेत्रों में काम करने का अवसर मिला है। आज भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को समान अवसर, पेशेवर दक्षता और मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।  

surbhi मार्च 9, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0