Department of Telecommunications

Satellite Phone
BSNL ने लॉन्च किया ₹1.34 लाख का सैटेलाइट फोन, बिना मोबाइल नेटवर्क के भी करेगा काम; जानिए कौन खरीद पाएगा

नई दिल्ली, एजेंसियां। सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड ने ऐसा सैटेलाइट फोन लॉन्च किया है, जो मोबाइल टावर या सामान्य नेटवर्क के बिना भी कॉल और मैसेज की सुविधा देगा। इस फोन की कीमत ₹1,34,166 (टैक्स सहित) रखी गई है। यह खासतौर पर उन इलाकों के लिए तैयार किया गया है जहां मोबाइल नेटवर्क पहुंचना मुश्किल होता है।   सैटेलाइट से सीधे जुड़ेगा फोन   BSNL का यह फोन सामान्य स्मार्टफोन की तरह मोबाइल टावर से कनेक्ट नहीं होता, बल्कि सीधे सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए काम करता है। इसका इस्तेमाल पहाड़ी इलाकों, समुद्री क्षेत्रों, आपदा प्रभावित क्षेत्रों और दूर-दराज के इलाकों में किया जा सकेगा, जहां मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होता।   कौन-कौन खरीद पाएगा?   यह फोन आम ग्राहकों के लिए सामान्य बाजार में उपलब्ध नहीं है। भारत में सैटेलाइट फोन के इस्तेमाल के लिए दूरसंचार विभाग (DoT) की अनुमति जरूरी होती है। इसे मुख्य रूप से सरकारी विभागों, सुरक्षा बलों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों, खनन कंपनियों, समुद्री क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं और दूरदराज क्षेत्रों में काम करने वाले संगठनों के लिए उपलब्ध कराया गया है।   इन क्षेत्रों में होगा ज्यादा उपयोग   सेना और सुरक्षा बल – सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में संपर्क के लिए आपदा प्रबंधन टीम – बाढ़, भूकंप और अन्य आपात स्थितियों में माइनिंग और रिमोट ऑपरेशन – जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंचता समुद्री यात्रा और जहाजों में – समुद्र के बीच संचार के लिए एडवेंचर ट्रैवल – पहाड़ों और जंगलों में यात्रा करने वालों के लिए   क्या इसमें इंटरनेट भी चलेगा?   BSNL के इस सैटेलाइट फोन का मुख्य उद्देश्य वॉयस कॉल और SMS सेवा उपलब्ध कराना है। यह सामान्य स्मार्टफोन की तरह हाई-स्पीड इंटरनेट या ऐप इस्तेमाल के लिए नहीं बनाया गया है।   भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन को मिलेगा बढ़ावा   BSNL का यह कदम देश में आपातकालीन संचार व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर प्राकृतिक आपदाओं और ऐसे क्षेत्रों में जहां मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह विफल हो जाते हैं, वहां यह तकनीक काफी उपयोगी साबित हो सकती है।

abhishek singh जुलाई 10, 2026 0
Crispy homemade spinach pakoras served with green chutney and hot tea, perfect snack for a rainy monsoon evening.
बारिश की शाम को खास बना देंगे क्रिस्पी पालक के पकोड़े, जानें आसान रेसिपी और बाजार जैसा स्वाद पाने के सीक्रेट टिप्स

Monsoon Special Recipe: पालक, प्याज, आलू और बेसन से तैयार करें कुरकुरे पकोड़े, हर बाइट में मिलेगा लाजवाब स्वाद बारिश का मौसम आते ही गरमा-गरम चाय और कुरकुरे पकोड़ों की चाहत लगभग हर घर में बढ़ जाती है। मॉनसून की ठंडी फुहारों के बीच स्वादिष्ट स्नैक्स का आनंद लेने का अपना ही अलग मजा होता है। यदि आप हर बार आलू या प्याज के पकोड़े बनाकर कुछ नया ट्राई करना चाहते हैं, तो इस बार पालक के पकोड़े एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं। पालक, प्याज, उबले आलू और बेसन के संतुलित मिश्रण से तैयार होने वाले ये पकोड़े बाहर से बेहद कुरकुरे और अंदर से मुलायम होते हैं। सही मसालों और बैटर की कंसिस्टेंसी का ध्यान रखकर आप घर पर ही बाजार जैसा स्वाद आसानी से पा सकते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि यह रेसिपी कम समय में तैयार हो जाती है और इसके लिए घर में मौजूद सामान्य सामग्री ही पर्याप्त होती है। पालक के पकोड़े बनाने के लिए आवश्यक सामग्री 200 ग्राम बारीक कटा हुआ ताजा पालक 2 मध्यम आकार के बारीक कटे प्याज 2 उबले हुए आलू (अच्छी तरह मैश किए हुए) 3 बड़े चम्मच बेसन स्वादानुसार नमक 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर ½ छोटा चम्मच गरम मसाला 1 छोटा चम्मच साबुत धनिया 1 छोटा चम्मच अजवाइन (हल्का मसलकर) आवश्यकता अनुसार कुछ बूंद पानी तलने के लिए तेल परोसने के लिए हरी धनिया की चटनी, इमली की चटनी या टोमैटो सॉस ऐसे करें तैयारी सबसे पहले पालक को अच्छी तरह धोकर बारीक काट लें। इसके बाद प्याज को बारीक काटें और उबले हुए आलू को अच्छी तरह मैश कर लें। अब एक बड़े बर्तन में पालक, प्याज और आलू डालें। इसमें नमक, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, गरम मसाला, साबुत धनिया और हथेलियों के बीच हल्का मसलकर अजवाइन मिलाएं। आखिर में बेसन डालकर सभी सामग्री को अच्छी तरह मिक्स करें ताकि मसाले और बेसन पूरे मिश्रण में समान रूप से मिल जाएं। परफेक्ट बैटर बनाने का तरीका इस रेसिपी की खास बात यह है कि इसमें अधिक पानी डालने की जरूरत नहीं पड़ती। पालक, प्याज और आलू से निकलने वाली प्राकृतिक नमी ही बैटर को बांधने के लिए पर्याप्त होती है। यदि आवश्यकता महसूस हो, तो केवल कुछ बूंद पानी डालें। बैटर न अधिक पतला होना चाहिए और न ही बहुत सख्त। सही कंसिस्टेंसी ही पकोड़ों को बाहर से कुरकुरा और अंदर से मुलायम बनाती है। स्वाद बढ़ाने वाले खास टिप्स पालक के पकोड़ों का स्वाद बढ़ाने में अजवाइन और साबुत धनिया की अहम भूमिका होती है। अजवाइन पाचन में भी मदद करती है और पकोड़ों में हल्की सुगंध जोड़ती है। वहीं साबुत धनिया हर बाइट में हल्का क्रंच और अलग स्वाद देता है। यदि साबुत धनिया उपलब्ध न हो तो इसे छोड़ा भी जा सकता है। ऐसे तलें ताकि पकोड़े बनें कुरकुरे कढ़ाई में पहले तेल को अच्छी तरह गर्म करें। इसके बाद हाथों की सहायता से मिश्रण को छोटे-छोटे हिस्सों में सीधे गर्म तेल में डालें। शुरुआत में आंच मध्यम रखें ताकि पकोड़े अंदर तक अच्छी तरह पक जाएं। जब पकोड़े हल्के सुनहरे होने लगें, तब उन्हें पलटते रहें और गोल्डन ब्राउन होने तक तलें। तेज आंच पर पकोड़े तलने से बाहरी परत जल्दी पक जाती है जबकि अंदर का हिस्सा कच्चा रह सकता है। इसलिए हमेशा मध्यम आंच पर ही तलना बेहतर होता है। ऐसे करें सर्व गरमा-गरम पालक के पकोड़ों को हरी धनिया की चटनी, इमली की चटनी या टोमैटो सॉस के साथ परोसें। अगर साथ में अदरक वाली गर्म चाय मिल जाए तो इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। परिवार और दोस्तों के साथ मॉनसून की शाम में यह स्नैक न केवल स्वाद का आनंद देता है, बल्कि साथ बिताए गए यादगार पलों को भी खास बना देता है। बाजार जैसा स्वाद पाने का आसान सीक्रेट यदि आप चाहते हैं कि पकोड़े लंबे समय तक कुरकुरे बने रहें, तो बैटर में जरूरत से ज्यादा पानी या बेसन न मिलाएं। साथ ही तेल का तापमान संतुलित रखें और पकोड़ों को मध्यम आंच पर तलें। इन आसान टिप्स को अपनाकर आप घर पर ही रेस्टोरेंट और बाजार जैसे स्वादिष्ट, कुरकुरे पालक के पकोड़े आसानी से तैयार कर सकते हैं।  

anmol जुलाई 10, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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इंग्लैंड से सीरीज हार के बाद टीम इंडिया का होगा प्रदर्शन रिव्यू, BCCI करेगा खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का मूल्यांकन

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0