Devendra Fadnavis

NCP leaders meet Maharashtra Chief Minister Devendra Fadnavis in Mumbai, triggering speculation over Sharad Pawar's next political move amid separate meetings with both NCP factions.
शरद पवार के अगले कदम पर सस्पेंस, फडणवीस से अलग-अलग मुलाकातों ने बढ़ाईं राजनीतिक अटकलें

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के वरिष्ठ नेताओं की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से अलग-अलग मुलाकातों के बाद शरद पवार के अगले राजनीतिक कदम को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि बैठकों में क्या चर्चा हुई, इस पर किसी भी पक्ष ने आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। देर रात हुई अलग-अलग बैठकें मंगलवार देर रात एनसीपी (शरद पवार गुट) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने पहले दक्षिण मुंबई स्थित शरद पवार के आवास 'सिल्वर ओक' पर उनसे मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी बैठक की। वहीं, सत्तारूढ़ एनसीपी (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल ने भी मुख्यमंत्री फडणवीस से अलग से मुलाकात की। इन बैठकों के बाद राज्य की राजनीति में संभावित नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बैठक के एजेंडे पर बनी हुई है चुप्पी बैठकों के बाद न तो किसी नेता ने बातचीत का एजेंडा बताया और न ही मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया। दोनों गुटों के सूत्रों का भी कहना है कि बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है। क्या एनडीए में जाने के पक्ष में हैं शरद गुट के विधायक? सूत्रों के मुताबिक, एनसीपी (शरद पवार गुट) के 10 विधायकों में से करीब आधे विधायक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ जाने के पक्ष में बताए जा रहे हैं। उनका मानना है कि विपक्ष में रहने के कारण अपने विधानसभा क्षेत्रों के विकास कार्यों के लिए आवश्यक मंजूरी और फंड हासिल करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। हाल ही में जयंत पाटिल ने भी पार्टी विधायकों के साथ बैठक में संकेत दिया था कि कई विधायक एनडीए में शामिल होने की इच्छा जता रहे हैं। शरद पवार ने नहीं खोले पत्ते इन तमाम राजनीतिक चर्चाओं के बावजूद शरद पवार ने अब तक इस मुद्दे पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। उन्होंने पार्टी की आगे की रणनीति को लेकर भी कोई संकेत नहीं दिया है, जिससे सस्पेंस और गहरा गया है। विधानसभा और लोकसभा में कितनी है ताकत? महाराष्ट्र विधानसभा में एनसीपी (शरद पवार गुट) के पास फिलहाल 10 विधायक हैं, जबकि लोकसभा में पार्टी के 8 सांसद हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद में भविष्य के महत्वपूर्ण विधेयकों, विशेषकर परिसीमन (डिलिमिटेशन) जैसे मुद्दों पर संख्या मजबूत करने के लिए एनडीए छोटी पार्टियों के समर्थन को अहम मान सकता है। ऐसे में एनसीपी (एसपी) की राजनीतिक भूमिका आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकती है। फिलहाल बढ़ी हैं अटकलें, आधिकारिक पुष्टि नहीं मुख्यमंत्री फडणवीस और एनसीपी नेताओं की बैठकों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चाएं जरूर तेज हुई हैं, लेकिन अभी तक किसी गठबंधन, विलय या राजनीतिक बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में शरद पवार का अगला कदम आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
Congress leaders address a press conference in Mumbai criticizing the Maharashtra government's move to form a committee for drafting a Uniform Civil Code (UCC).
सीएम फडणवीस पर कांग्रेस का हमला, UCC की जगह पुल, सड़क और बाढ़ जैसे मुद्दों पर मांगा जवाब

मुंबई: महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (UCC) का मसौदा तैयार करने के लिए राज्य सरकार द्वारा सात सदस्यीय समिति गठित किए जाने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी सरकार जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए नए राजनीतिक एजेंडे ला रही है। UCC को बताया ध्यान भटकाने की कोशिश कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि महाराष्ट्र में पुल गिरने, खराब सड़कों, बाढ़ और महंगाई जैसे गंभीर मुद्दे लोगों को प्रभावित कर रहे हैं, लेकिन सरकार इन समस्याओं का समाधान करने के बजाय UCC जैसे विषयों को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता के असली सवालों से बचने की कोशिश कर रही है। विधानसभा में भाषा को लेकर भी साधा निशाना सुप्रिया श्रीनेत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर विधानसभा में विपक्ष के नेताओं के प्रति कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवालों का जवाब तथ्यों और तर्कों से दिया जाना चाहिए, न कि अपमानजनक टिप्पणियों से। कांग्रेस ने मांग की कि यदि मुख्यमंत्री ने अनुचित भाषा का प्रयोग किया है तो उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। पुल और सड़कों की स्थिति पर उठाए सवाल कांग्रेस ने राज्य में लगातार सामने आ रहे पुल गिरने और खराब सड़कों से जुड़े मामलों का भी मुद्दा उठाया। पार्टी का कहना है कि सरकार को बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर प्राथमिकता देनी चाहिए। रायगढ़ में बाढ़ और सिलेंडर बहने का मामला भी उठाया कांग्रेस ने रायगढ़ जिले में बाढ़ के दौरान रसोई गैस सिलेंडरों के बह जाने की घटना का भी उल्लेख किया। पार्टी ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि सरकार आपदा प्रबंधन और राहत व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रही है। सरकार पर लगाया जनता को गुमराह करने का आरोप  कांग्रेस का कहना है कि राज्य सरकार विकास, महंगाई, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों पर जवाब देने के बजाय नए राजनीतिक विवाद खड़े कर रही है। पार्टी ने कहा कि जनता अब राजनीतिक बहस नहीं, बल्कि अपनी रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान चाहती है। हालांकि, महाराष्ट्र सरकार की ओर से कांग्रेस के इन आरोपों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

Deepshikha जुलाई 10, 2026 0
BBL
पहली बार भारत में होगा बिग बैश लीग का उद्घाटन मुकाबला, दिसंबर 2026 में चेन्नई बनेगा इतिहास का गवाह

चेन्नई, एजेंसियां। ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित बिग बैश लीग (BBL) के इतिहास में पहली बार उद्घाटन मुकाबला ऑस्ट्रेलिया से बाहर आयोजित किया जाएगा। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने घोषणा की है कि दिसंबर 2026 में बीबीएल के नए सीजन का पहला मैच चेन्नई के एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम (चेपॉक) में खेला जाएगा। इस फैसले को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते क्रिकेट सहयोग की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।   पहली बार ऑस्ट्रेलिया से बाहर होगा BBL का उद्घाटन मैच   अब तक बिग बैश लीग के सभी मुकाबले ऑस्ट्रेलिया में ही खेले जाते रहे हैं। लेकिन इस बार क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने लीग के वैश्विक विस्तार की रणनीति के तहत उद्घाटन मैच भारत में कराने का फैसला लिया है। इससे भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को पहली बार अपने देश में BBL का रोमांच देखने का अवसर मिलेगा।   चेन्नई के चेपॉक स्टेडियम में होगा मुकाबला   उद्घाटन मैच के लिए चेन्नई के एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम को चुना गया है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के अनुसार, भारत में बिग बैश की लोकप्रियता और चेन्नई के समृद्ध क्रिकेट इतिहास को देखते हुए इस शहर का चयन किया गया है। मैच के लिए बीसीसीआई और स्थानीय क्रिकेट संघ के साथ तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।   भारत-ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट संबंधों को मिलेगा नया आयाम   क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन दोनों देशों के क्रिकेट संबंधों को और मजबूत करेगा। भारतीय दर्शकों के बीच बिग बैश लीग की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और भारत में मैच आयोजित होने से लीग को नया वैश्विक दर्शक वर्ग मिलने की उम्मीद है।   दुनिया भर के स्टार खिलाड़ी आएंगे नजर   उद्घाटन मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय स्टार खिलाड़ी मैदान पर उतर सकते हैं। भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को विश्व स्तरीय टी20 खिलाड़ियों का खेल करीब से देखने का मौका मिलेगा, जिससे इस मैच को लेकर उत्साह काफी बढ़ गया है।   क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की वैश्विक रणनीति का हिस्सा   क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि लीग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। यदि भारत में यह आयोजन सफल रहता है, तो भविष्य में अन्य देशों में भी बिग बैश लीग के मुकाबले आयोजित किए जा सकते हैं।

abhishek singh जुलाई 10, 2026 0
MAHA TET Exam
महाराष्ट्र TET पेपर लीक मामले की SIT जांच के आदेश, 6 लाख से अधिक अभ्यर्थियों की परीक्षा स्थगित

मुंबई, एजेंसियां। महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (MAHA TET) 2026 के कथित पेपर लीक मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पेपर लीक की आशंका के चलते 28 जून को होने वाली परीक्षा स्थगित कर दी गई, जिससे राज्यभर के 6 लाख से अधिक अभ्यर्थी प्रभावित हुए।   मुख्यमंत्री ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश   मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने ठाणे पुलिस के संयुक्त पुलिस आयुक्त के नेतृत्व में SIT गठित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके।   पेपर लीक का कैसे हुआ खुलासा?   पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि परीक्षा से पहले कुछ लोग प्रश्नपत्र बेचने की तैयारी कर रहे हैं। इसके बाद भिवंडी में छापेमारी की गई, जहां से कथित तौर पर मूल प्रश्नपत्रों की प्रतियां बरामद हुईं। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि प्रश्नपत्र को करीब ₹1.5 करोड़ में बेचने की साजिश रची गई थी।   तीन आरोपी हिरासत में, और गिरफ्तारियां संभव   अब तक पुलिस ने तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह एक संगठित गिरोह हो सकता है और आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। SIT पूरे नेटवर्क की जांच करेगी।   नई परीक्षा तिथि जल्द होगी घोषित   महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद (MSCE) ने कहा है कि परीक्षा फिलहाल स्थगित की गई है। अभ्यर्थियों को नई परीक्षा तिथि की जानकारी जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी। परिषद ने छात्रों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचना पर भरोसा करने की अपील की है।   अभ्यर्थियों में नाराजगी   अचानक परीक्षा स्थगित होने से लाखों अभ्यर्थियों में नाराजगी है। कई उम्मीदवारों ने कहा कि वे महीनों से परीक्षा की तैयारी कर रहे थे और अंतिम समय में परीक्षा रद्द होने से उन्हें मानसिक और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। विपक्ष ने भी इस मामले को लेकर राज्य सरकार पर हमला बोला हैं।

abhishek singh जून 28, 2026 0
Maharashtra politics
महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ी हलचल, एक ही फ्लाइट में दिखे देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे

मुंबई, एजेंसियां। महाराष्ट्र की राजनीति में शनिवार को उस समय नई चर्चा शुरू हो गई, जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे मुंबई से नागपुर जाने वाली एक ही फ्लाइट में सफर करते नजर आए। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन किया, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगने लगीं।   एक फ्लाइट, कई राजनीतिक चर्चाएं   फडणवीस और उद्धव ठाकरे का एक ही विमान में सफर करना इसलिए चर्चा का विषय बन गया क्योंकि दोनों लंबे समय से राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। विमान में मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने सामान्य शिष्टाचार निभाया, लेकिन इस तस्वीर ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है।   बीजेपी ने अटकलों को किया खारिज   बीजेपी ने इस घटना को महज संयोग बताते हुए कहा कि दोनों नेता राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं, दुश्मन नहीं। पार्टी नेताओं ने किसी भी तरह की राजनीतिक बातचीत या नए समीकरण बनने की अटकलों को खारिज किया है।   नागपुर दौरे पर उद्धव ठाकरे   उद्धव ठाकरे नागपुर दौरे पर पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात करने पहुंचे हैं। उन्होंने जल्द ही नागपुर में एक बड़ी जनसभा आयोजित करने का भी ऐलान किया है, जिसे आगामी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।   पहले से गरम है महाराष्ट्र की राजनीति   हाल के दिनों में शिवसेना (यूबीटी) के कई नेताओं और सांसदों के दल बदलने की खबरों के बीच महाराष्ट्र की राजनीति पहले से ही गरम है। ऐसे माहौल में फडणवीस और उद्धव ठाकरे की यह मुलाकात राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है।

anjali kumari जून 27, 2026 0
KEM Hospital Mumbai building amid investigation into viral Pranit More controversy involving an MBBS student.
प्राणित मोरे बिरयानी विवाद: KEM अस्पताल की जांच में MBBS छात्रा की टिप्पणी 'असंवेदनशील', कार्रवाई पर विचार

वायरल वीडियो मामले में KEM अस्पताल की प्रारंभिक जांच पूरी, छात्रा ने मांगी लिखित माफी स्टैंड-अप कॉमेडियन प्राणित मोरे से जुड़े चर्चित ‘370 रुपये बिरयानी’ विवाद में नया मोड़ सामने आया है। मुंबई के KEM अस्पताल की प्रारंभिक जांच में MBBS छात्रा सेजल पवार की टिप्पणियों को "आपत्तिजनक और असंवेदनशील" पाया गया है। अस्पताल प्रशासन ने कहा कि छात्रा का व्यवहार एक मेडिकल छात्र से अपेक्षित संवेदनशीलता, गरिमा और पेशेवर जिम्मेदारी के अनुरूप नहीं था। जांच के दौरान सेजल पवार ने लिखित रूप से माफी मांगते हुए स्वीकार किया कि उनकी कुछ टिप्पणियां अनुचित थीं और उनसे लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं। अस्पताल प्रशासन अब मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार कर रहा है, जिसमें अस्थायी निलंबन जैसी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। माता-पिता को बुलाया गया, काउंसलिंग की तैयारी KEM अस्पताल के डीन डॉ. हरीश एम. पाठक ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो को लेकर कई शिकायतें मिलने के बाद एक प्रारंभिक तथ्य-जांच समिति गठित की गई थी। समिति ने वीडियो की समीक्षा करने के साथ छात्रा से बातचीत भी की। अस्पताल प्रशासन ने छात्रा के माता-पिता को भी बुलाया है और उनकी मौजूदगी में काउंसलिंग कराने की तैयारी की जा रही है। साथ ही सोशल मीडिया पर प्रसारित आपत्तिजनक वीडियो क्लिप्स को हटाने के लिए संबंधित एजेंसियों और प्लेटफॉर्म्स से संपर्क करने पर भी विचार किया जा रहा है। महाराष्ट्र साइबर पुलिस की जांच तेज मामले में महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने प्राणित मोरे, सेजल पवार और एक अन्य युवक हिमांशु जांगड़ा के खिलाफ FIR दर्ज की है। जांच एजेंसियां वायरल वीडियो की फोरेंसिक जांच कराने की तैयारी में हैं और जल्द ही संबंधित लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान प्राणित मोरे के पुराने शो और ऑनलाइन कंटेंट की भी समीक्षा की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं पहले भी इसी तरह की विवादित सामग्री तो प्रस्तुत नहीं की गई थी। मुख्यमंत्री फडणवीस बोले- मनोरंजन के नाम पर मर्यादा जरूरी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार स्टैंड-अप कॉमेडी या कलाकारों के खिलाफ नहीं है, लेकिन मनोरंजन के नाम पर सामाजिक मर्यादा और शालीनता की सीमा का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दूसरों की गरिमा और अधिकारों को प्रभावित करने लगती है, तब उस पर सवाल उठना स्वाभाविक है। मेडिकल समुदाय ने भी जताई नाराजगी मामले को लेकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की सार्वजनिक स्वास्थ्य समिति में भी चर्चा हुई। समिति के अध्यक्ष हरीश भंडिग्रे ने कहा कि शरीर और अंगदान जैसे संवेदनशील विषयों पर की गई टिप्पणियां समाज में गलत संदेश देती हैं और जागरूकता अभियानों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। वहीं महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) की KEM इकाई ने स्पष्ट किया कि सेजल पवार संगठन की सदस्य नहीं हैं। संगठन ने उनकी टिप्पणियों को अनुचित बताया, लेकिन साथ ही सोशल मीडिया पर छात्रा के खिलाफ हो रही व्यक्तिगत ट्रोलिंग और अपमानजनक टिप्पणियों का भी विरोध किया। क्या है पूरा विवाद? विवाद उस समय शुरू हुआ जब स्टैंड-अप कॉमेडियन प्राणित मोरे के एक शो के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। एक वीडियो में सेजल पवार कथित तौर पर शवदान करने वाले पुरुषों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करती नजर आईं। वहीं दूसरे वीडियो में हिमांशु जांगड़ा द्वारा डेट पर 370 रुपये की बिरयानी खिलाने के बदले शारीरिक संबंधों को लेकर विवादित टिप्पणी की गई थी। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली, जिसके बाद पुलिस और अस्पताल प्रशासन दोनों ने जांच शुरू कर दी। आगे क्या? फिलहाल KEM अस्पताल की अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट के आधार पर छात्रा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई तय की जाएगी। दूसरी ओर साइबर पुलिस की जांच भी जारी है, जिससे मामले में कानूनी कार्रवाई की दिशा स्पष्ट होगी।  

surbhi जून 13, 2026 0
Helicopter carrying Maharashtra minister Chhagan Bhujbal lands in Pune parking area instead of designated helipad.
पुणे में बड़ी चूक: मंत्री छगन भुजबल का हेलीकॉप्टर हेलीपैड की बजाय कार पार्किंग में उतरा, CM ने दिए जांच के आदेश

महाराष्ट्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। राज्य सरकार के मंत्री छगन भुजबल का हेलीकॉप्टर निर्धारित हेलीपैड की बजाय सीधे कार पार्किंग क्षेत्र में उतार दिया गया। इस घटना ने सुरक्षा प्रोटोकॉल और पायलट की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना पुणे के खानवडी इलाके में उस समय हुई, जब भुजबल नासिक से एक जिला परिषद स्कूल के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। निर्धारित हेलीपैड मौजूद होने के बावजूद पायलट ने हेलीकॉप्टर को पास की पार्किंग में लैंड करा दिया। मौके पर मचा हड़कंप अचानक हुई इस लैंडिंग से कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि मंत्री पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। पायलट की लापरवाही पर उठे सवाल प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह घटना पायलट की बड़ी चूक मानी जा रही है। एविएशन से जुड़े नियमों के तहत हेलीकॉप्टर को केवल अधिकृत हेलीपैड पर ही उतारने की अनुमति होती है, ऐसे में यह लैंडिंग सुरक्षा मानकों का उल्लंघन मानी जा रही है। CM ने दिए जांच के आदेश मामले को गंभीरता से लेते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट कहा है कि इस घटना की विस्तृत जांच कराई जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल यह घटना न सिर्फ पायलट की लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि वीआईपी मूवमेंट के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी चूक भविष्य में बड़े हादसे का कारण बन सकती है, इसलिए जांच के निष्कर्ष बेहद अहम होंगे।  

surbhi अप्रैल 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0