डायबिटीज (मधुमेह) आज दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। अक्सर लोग मानते हैं कि केवल मीठा खाने से ही ब्लड शुगर बढ़ता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार कई ऐसी दैनिक आदतें भी हैं जो शुगर लेवल को असंतुलित कर सकती हैं और बीमारी को नियंत्रित करना मुश्किल बना सकती हैं। डायबिटीज को बेहतर तरीके से नियंत्रित रखने के लिए दवाओं के साथ-साथ संतुलित खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी बेहद जरूरी है। सिर्फ चीनी नहीं, फास्ट फूड भी बढ़ा सकता है परेशानी डायबिटीज में केवल मिठाइयों से दूरी बनाना पर्याप्त नहीं होता। कई फास्ट फूड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ भी ब्लड शुगर पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। इनमें शामिल हैं: बर्गर और पिज्जा फ्रेंच फ्राइज पैकेज्ड स्नैक्स प्रोसेस्ड और रिफाइंड फूड इन खाद्य पदार्थों में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, अस्वास्थ्यकर वसा और अतिरिक्त शर्करा अधिक हो सकती है। इनके नियमित सेवन से वजन बढ़ने, इंसुलिन की कार्यक्षमता प्रभावित होने और ब्लड शुगर नियंत्रण में कठिनाई आ सकती है। लंबे समय तक बैठे रहना भी हो सकता है नुकसानदायक शारीरिक निष्क्रियता डायबिटीज के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक मानी जाती है। जब शरीर सक्रिय रहता है, तो मांसपेशियां ग्लूकोज का बेहतर उपयोग करती हैं और इंसुलिन संवेदनशीलता (Insulin Sensitivity) में सुधार होता है। वहीं लंबे समय तक बैठे रहने से ब्लड शुगर नियंत्रित रखना कठिन हो सकता है। विशेषज्ञ आमतौर पर रोज कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि या व्यायाम करने की सलाह देते हैं। अनियमित दिनचर्या बढ़ा सकती है जोखिम समय पर भोजन न करना, देर रात तक जागना और अनियमित दिनचर्या अपनाना भी ब्लड शुगर के स्तर को प्रभावित कर सकता है। इन आदतों से शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी (Body Clock) प्रभावित होती है, जिससे ग्लूकोज नियंत्रण पर असर पड़ सकता है। तनाव को नजरअंदाज न करें लगातार तनाव रहने पर शरीर में ऐसे हार्मोन निकलते हैं जो ब्लड शुगर बढ़ाने का कारण बन सकते हैं। तनाव कम करने के लिए: पर्याप्त नींद लें। योग और ध्यान करें। नियमित व्यायाम करें। परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं। डायबिटीज में अपनाएं ये अच्छी आदतें संतुलित और पौष्टिक भोजन करें। नियमित समय पर खाना खाएं। रोजाना शारीरिक गतिविधि करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं और जांच समय पर कराएं। ब्लड शुगर की नियमित मॉनिटरिंग करें। ध्यान रखें डायबिटीज को नियंत्रित रखने के लिए केवल मीठे से दूरी बनाना काफी नहीं है। स्वस्थ खान-पान, नियमित व्यायाम, तनाव नियंत्रण और अनुशासित जीवनशैली अपनाकर ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित रखा जा सकता है। यदि ब्लड शुगर बार-बार बढ़ रहा हो या कोई असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।
Healthy Chutney Recipes: कम समय, आसान सामग्री और बेहतरीन स्वाद के साथ तैयार करें 10 हेल्दी चटनियां, जानें बनाने की विधि, कुकिंग ट्रिक्स, कैलोरी और हेल्थ बेनिफिट्स मोमोज, इडली, डोसा, उत्तपम, पराठा, चीला या पकौड़े—हर स्नैक का स्वाद एक अच्छी चटनी के बिना अधूरा माना जाता है। हालांकि, बाजार में मिलने वाली तैयार चटनियों में अक्सर अधिक नमक, प्रिजर्वेटिव और अतिरिक्त तेल होता है। ऐसे में घर पर बनी ताजी चटनियां स्वाद के साथ पोषण भी देती हैं। अच्छी बात यह है कि इन 10 हेल्दी चटनियों को सिर्फ 20 मिनट में आसानी से तैयार किया जा सकता है। 1. नारियल की चटनी आवश्यक सामग्री ताजा नारियल भुनी चना दाल हरी मिर्च अदरक नमक राई करी पत्ता बनाने की विधि: नारियल, चना दाल, अदरक और मिर्च को पीस लें। ऊपर से राई और करी पत्ते का तड़का लगाएं। कुकिंग ट्रिक: थोड़ा दही मिलाने से चटनी अधिक क्रीमी बनती है। कैलोरी व हेल्थ बेनिफिट्स: लगभग 75 kcal (2 टेबलस्पून) | हेल्दी फैट, फाइबर और मैंगनीज का अच्छा स्रोत। 2. टमाटर-लहसुन चटनी आवश्यक सामग्री टमाटर लहसुन सूखी लाल मिर्च नमक बनाने की विधि: टमाटर और लहसुन को हल्का भूनकर पीस लें। कुकिंग ट्रिक: टमाटर को ज्यादा न पकाएं ताकि ताजगी बनी रहे। कैलोरी व हेल्थ बेनिफिट्स: लगभग 22 kcal | लाइकोपीन और विटामिन C से भरपूर। 3. पुदीना-धनिया चटनी आवश्यक सामग्री पुदीना हरा धनिया अदरक हरी मिर्च नींबू बनाने की विधि: सभी सामग्री को पीसकर ताजी चटनी तैयार करें। कुकिंग ट्रिक: नींबू का रस अंत में डालें ताकि रंग हरा बना रहे। कैलोरी व हेल्थ बेनिफिट्स: लगभग 18 kcal | पाचन में सहायक और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर। 4. मूंगफली चटनी आवश्यक सामग्री भुनी मूंगफली लहसुन लाल मिर्च नमक बनाने की विधि: सभी सामग्री को पीस लें। चाहें तो हल्का तड़का लगाएं। कुकिंग ट्रिक: थोड़ा दही मिलाने से स्वाद और टेक्सचर बेहतर होता है। कैलोरी व हेल्थ बेनिफिट्स: लगभग 95 kcal | प्रोटीन, हेल्दी फैट और विटामिन E का अच्छा स्रोत। 5. तिल-टमाटर चटनी आवश्यक सामग्री सफेद तिल टमाटर लहसुन लाल मिर्च बनाने की विधि: तिल और टमाटर को हल्का भूनकर पीस लें। कुकिंग ट्रिक: तिल को हमेशा धीमी आंच पर भूनें। कैलोरी व हेल्थ बेनिफिट्स: लगभग 65 kcal | कैल्शियम, आयरन और मैग्नीशियम से भरपूर। 6. दही-पुदीना चटनी आवश्यक सामग्री गाढ़ा दही पुदीना हरा धनिया जीरा पाउडर बनाने की विधि: सभी सामग्री को अच्छी तरह फेंटकर मिलाएं। कुकिंग ट्रिक: ठंडा और गाढ़ा दही इस्तेमाल करें। कैलोरी व हेल्थ बेनिफिट्स: लगभग 35 kcal | प्रोबायोटिक्स और कैल्शियम का अच्छा स्रोत। 7. कच्चे आम की चटनी आवश्यक सामग्री कच्चा आम पुदीना हरी मिर्च गुड़ नमक बनाने की विधि: सभी सामग्री को पीस लें। कुकिंग ट्रिक: थोड़ा भुना जीरा डालने से स्वाद बढ़ जाता है। कैलोरी व हेल्थ बेनिफिट्स: लगभग 28 kcal | विटामिन C और फाइबर से भरपूर। 8. चुकंदर-दही चटनी आवश्यक सामग्री उबला चुकंदर दही लहसुन काली मिर्च बनाने की विधि: सभी सामग्री को ब्लेंड कर लें। कुकिंग ट्रिक: चुकंदर पहले से उबालकर ठंडा कर लें। कैलोरी व हेल्थ बेनिफिट्स: लगभग 40 kcal | आयरन, फोलेट और एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत। 9. भुनी शिमला मिर्च चटनी आवश्यक सामग्री लाल शिमला मिर्च टमाटर लहसुन जैतून का तेल बनाने की विधि: शिमला मिर्च और टमाटर को भूनकर पीस लें। कुकिंग ट्रिक: शिमला मिर्च का छिलका हटाने से चटनी ज्यादा स्मूद बनती है। कैलोरी व हेल्थ बेनिफिट्स: लगभग 30 kcal | विटामिन A और विटामिन C से भरपूर। 10. हरी मटर-पुदीना चटनी आवश्यक सामग्री उबली हरी मटर पुदीना हरा धनिया नींबू नमक बनाने की विधि: सभी सामग्री को ब्लेंड करें और तुरंत परोसें। कुकिंग ट्रिक: मटर को ज्यादा न उबालें ताकि रंग और पोषण बना रहे। कैलोरी व हेल्थ बेनिफिट्स: लगभग 48 kcal | प्लांट प्रोटीन, फाइबर और विटामिन K का अच्छा स्रोत। हेल्दी चटनियां क्यों हैं बेहतर? घर पर बनी चटनियां ताजी सामग्री से तैयार होती हैं और इनमें कृत्रिम रंग, प्रिजर्वेटिव, अतिरिक्त नमक और अनावश्यक तेल नहीं होता। नारियल, मूंगफली, तिल, टमाटर, दही और हरी जड़ी-बूटियां शरीर को विटामिन, मिनरल्स, हेल्दी फैट, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट प्रदान करती हैं। ये चटनियां पाचन सुधारने के साथ भोजन का स्वाद और पोषण दोनों बढ़ाती हैं। जरूरी टिप्स हमेशा ताजी सामग्री का इस्तेमाल करें। चटनियों को एयरटाइट कंटेनर में फ्रिज में स्टोर करें। हरी चटनियां 2–3 दिन और नारियल की चटनी 24 घंटे के भीतर उपयोग करें। जरूरत से ज्यादा पानी न मिलाएं, इससे स्वाद और शेल्फ लाइफ दोनों प्रभावित होती हैं। अगर आप रोज एक जैसी चटनी खाकर बोर हो चुके हैं, तो इन 10 हेल्दी चटनियों को अपनी रसोई में जरूर शामिल करें। ये मोमोज, इडली, डोसा, उत्तपम, पराठा, चीला, सैंडविच और पकौड़ों का स्वाद कई गुना बढ़ा देंगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। डायबिटीज से जूझ रहे लाखों मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। डेनमार्क की दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने भारत में दुनिया का पहला लंबे समय तक असर करने वाला साप्ताहिक बेसल इंसुलिन 'अविक्ली' (इंसुलिन आइकोडेक) लॉन्च किया है। कंपनी का दावा है कि अब कई मरीजों को रोजाना इंसुलिन इंजेक्शन लेने की आवश्यकता नहीं होगी और सप्ताह में केवल एक बार इंजेक्शन लेने से ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। भारत को दुनिया की 'डायबिटीज कैपिटल' कहा जाता है इसका कारण हैं करोड़ों लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं। टाइप-1 और कई टाइप-2 डायबिटीज मरीजों को रोजाना इंसुलिन लेना पड़ता है। गंभीर मामलों में मरीजों को दिन में दो या तीन बार भी इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं। ऐसे में नई साप्ताहिक इंसुलिन थेरेपी मरीजों के जीवन को अधिक सुविधाजनक बना सकती है। कंपनी के अनुसार कंपनी के अनुसार, अविक्ली पहला ऐसा बेसल इंसुलिन है जिसे क्लिनिकल उपयोग के लिए मंजूरी मिली है। इससे सालभर में लगने वाले इंसुलिन इंजेक्शनों की संख्या 365 से घटकर केवल 52 रह जाएगी। यह दवा टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित वयस्क मरीजों के लिए विकसित की गई है। हालांकि, डॉक्टर मरीज की स्वास्थ्य स्थिति, ब्लड शुगर के स्तर और अन्य चिकित्सीय जरूरतों का आकलन करने के बाद ही इसकी सलाह देंगे। नोवो नॉर्डिस्क इंडिया के प्रबंध नोवो नॉर्डिस्क इंडिया के प्रबंध निदेशक विक्रांत श्रोत्रिय के अनुसार, 700 यूनिट वाले 1 एमएल पेन की कीमत 2,611 रुपये और 2,100 यूनिट वाले 3 एमएल पेन की कीमत 7,833 रुपये रखी गई है। कंपनी का कहना है कि इसकी प्रति यूनिट लागत लगभग 3.73 रुपये पड़ती है, जो पारंपरिक दैनिक बेसल इंसुलिन की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत तक किफायती हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नई तकनीक इंसुलिन थेरेपी को अधिक सुविधाजनक बनाएगी, लेकिन मरीजों को बिना चिकित्सकीय सलाह के उपचार में कोई बदलाव नहीं करना चाहिए। डॉक्टर की निगरानी में ही इस नई दवा का उपयोग सुरक्षित और प्रभावी माना जाएगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत में डायबिटीज के इलाज के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। वैश्विक दवा कंपनी Novo Nordisk ने Awiqli नामक दुनिया की पहली सप्ताह में एक बार दी जाने वाली बेसल इंसुलिन भारत में लॉन्च कर दी है। इससे टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों को रोजाना इंसुलिन इंजेक्शन लेने की आवश्यकता नहीं होगी। रोज 365 नहीं, साल में सिर्फ 52 इंजेक्शन अब तक इंसुलिन पर निर्भर मरीजों को हर दिन इंजेक्शन लेना पड़ता था। नई Awiqli इंसुलिन के आने से मरीजों को सप्ताह में केवल एक बार इंजेक्शन लेना होगा। यानी पूरे साल में 365 की जगह केवल 52 इंजेक्शन ही पर्याप्त होंगे। टाइप-1 और टाइप-2 दोनों मरीजों के लिए उपयोगी कंपनी के अनुसार, यह दवा टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज दोनों प्रकार के मरीजों के लिए विकसित की गई है। क्लिनिकल ट्रायल में इसने लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित रखने और HbA1c स्तर में सुधार करने के अच्छे परिणाम दिखाए हैं। मरीजों की जिंदगी होगी आसान विशेषज्ञों का मानना है कि सप्ताह में एक बार इंसुलिन लेने की सुविधा से मरीजों पर रोजाना इंजेक्शन का मानसिक और शारीरिक बोझ कम होगा। साथ ही उपचार का नियमित पालन भी बेहतर होने की उम्मीद है। डॉक्टर की सलाह पर ही करें इस्तेमाल स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यह नई इंसुलिन दवा केवल डॉक्टर की सलाह पर ही इस्तेमाल की जानी चाहिए। मरीजों की स्थिति और ब्लड शुगर के स्तर के अनुसार चिकित्सक ही इसकी सही मात्रा और उपयोग का निर्णय लेंगे।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल सरकार ने महिला सशक्तिकरण और पुलिस व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। करीब 26 साल बाद कोलकाता पुलिस के दो प्रमुख मुख्य पुलिस थानों में महिला अधिकारियों को ऑफिसर-इन-चार्ज (ओसी) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लंबे समय तक महिला अधिकारियों की नियुक्ति मुख्य रूप से महिला पुलिस थानों तक ही सीमित रही, लेकिन अब उन्हें सामान्य पुलिस थानों की कमान भी सौंपी गई है। दो अनुभवी महिला अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी तबादला आदेश के तहत सरशुना पुलिस स्टेशन की नई कार्यवाहक अधिकारी (ओसी) रूपा सिंह को बनाया गया है। इससे पहले वह टॉलीगंज महिला पुलिस स्टेशन की प्रभारी थीं। वहीं, सिंथी पुलिस स्टेशन की कमान चमेली मुखर्जी को सौंपी गई है, जो पहले उल्टोडांगा महिला पुलिस स्टेशन में ओसी के पद पर कार्यरत थीं। कोलकाता पुलिस के 33 पुलिस स्टेशनों में इंस्पेक्टर स्तर पर किए गए इस फेरबदल को पुलिस प्रशासन में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। वर्षों बाद मुख्य थानों में महिला नेतृत्व जानकारी के अनुसार, वाममोर्चा शासनकाल के दौरान वर्ष 2010 में आखिरी बार किसी महिला इंस्पेक्टर को कोलकाता के मुख्य पुलिस स्टेशन का प्रभार मिला था। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में महिला पुलिस थानों का विस्तार तो हुआ, लेकिन मुख्य पुलिस थानों की जिम्मेदारी महिलाओं को नहीं सौंपी गई। अब इस फैसले को पुलिस व्यवस्था में लैंगिक समानता की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है। महिला सुरक्षा को मिलेगी नई मजबूती हाल के वर्षों में कोलकाता पुलिस ने महिला सहायता केंद्रों की स्थापना और महिला अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किए हैं। इन पहलों का उद्देश्य महिलाओं को एक ही स्थान पर बेहतर पुलिस सहायता उपलब्ध कराना और शिकायतों के त्वरित निस्तारण को सुनिश्चित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्य पुलिस थानों में महिला नेतृत्व बढ़ने से महिला सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी तथा पुलिस व्यवस्था में महिलाओं की भूमिका पहले से अधिक प्रभावी होगी।
नई दिल्ली: गर्मियों में घंटों एयर कंडीशनर (AC) में रहने के बाद जब अचानक 40 डिग्री या उससे अधिक तापमान वाली तेज धूप में निकलते हैं, तो शरीर को कुछ ही सेकंड में खुद को नए तापमान के अनुसार ढालना पड़ता है। इस दौरान कई लोगों को सांस फूलना, दिल की धड़कन तेज होना, चक्कर आना, कमजोरी या सीने में बेचैनी जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, स्वस्थ लोगों में यह बदलाव अक्सर कुछ समय के लिए होता है, लेकिन हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, अस्थमा और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे लक्षणों को हल्के में लेना सही नहीं है। AC से निकलते ही दिल पर क्यों बढ़ता है दबाव? जब कोई व्यक्ति 22–24°C तापमान वाले कमरे से निकलकर 40°C या उससे अधिक गर्म वातावरण में पहुंचता है, तो शरीर तुरंत खुद को ठंडा रखने की कोशिश शुरू कर देता है। इस प्रक्रिया में: त्वचा की रक्त वाहिकाएं फैलने लगती हैं। शरीर पसीने के जरिए तापमान कम करने की कोशिश करता है। हृदय को त्वचा तक ज्यादा रक्त पहुंचाने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इससे कुछ समय के लिए हार्ट रेट बढ़ सकती है और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, गर्म मौसम में शरीर को ठंडा रखने के लिए हृदय को सामान्य से ज्यादा काम करना पड़ता है। क्यों फूलने लगती है सांस? तेज गर्मी और उमस में शरीर को ऑक्सीजन की जरूरत बढ़ जाती है। यदि किसी व्यक्ति को पहले से हार्ट डिजीज, अस्थमा, COPD या अन्य श्वसन संबंधी बीमारी है, तो अचानक तापमान बदलने पर सांस लेने में दिक्कत महसूस हो सकती है। ब्लड प्रेशर पर भी पड़ सकता है असर तापमान बदलने से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ने और फैलने लगती हैं। इसका असर ब्लड प्रेशर पर भी पड़ सकता है। कुछ लोगों में इसके कारण: चक्कर आना कमजोरी सिर भारी लगना घबराहट दिल की धड़कन तेज होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। किन लोगों को सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत? इन लोगों में जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है: बुजुर्ग हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हार्ट अटैक या हार्ट फेलियर का इतिहास रखने वाले लोग डायबिटीज के मरीज अस्थमा या फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति खुद को कैसे रखें सुरक्षित? AC से बाहर निकलने से पहले कुछ मिनट सामान्य तापमान वाले स्थान पर रहें। AC का तापमान 24–26°C के बीच रखें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें ताकि शरीर डिहाइड्रेट न हो। धूप में निकलते समय टोपी, छाता और हल्के रंग के कपड़े पहनें। दोपहर की तेज धूप में अनावश्यक बाहर निकलने से बचें। कब तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए? यदि AC से बाहर आने के बाद बार-बार ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें: सीने में दर्द या दबाव लगातार सांस फूलना बहुत तेज या अनियमित धड़कन चक्कर आना या बेहोशी जैसा महसूस होना अत्यधिक कमजोरी या पसीना आना ये लक्षण केवल गर्मी की वजह से ही नहीं, बल्कि किसी गंभीर हृदय समस्या का संकेत भी हो सकते हैं।
आजकल बदलती जीवनशैली, घंटों बैठकर काम करने की आदत और असंतुलित खानपान के कारण डायबिटीज और हाई ब्लड शुगर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, रोजमर्रा की कुछ छोटी आदतें ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। इन्हीं में से एक है खाना खाने के बाद हल्की सैर करना। कानपुर के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल के कंसल्टेंट क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. आशीष मेहरोत्रा के अनुसार, भोजन के बाद 10 से 20 मिनट तक टहलना ब्लड शुगर को नियंत्रित करने और पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है। खाना खाने के बाद शरीर में क्या होता है? भोजन करने के बाद शरीर कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज में बदलता है, जो खून में पहुंचता है। यदि भोजन में कार्बोहाइड्रेट या मीठी चीजें अधिक हों तो ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकती है। ऐसे में हल्की वॉक करने से शरीर की मांसपेशियां सक्रिय हो जाती हैं और वे ग्लूकोज का उपयोग ऊर्जा के रूप में करने लगती हैं। इससे खून में मौजूद अतिरिक्त शुगर कम होने लगती है और ब्लड शुगर का स्तर संतुलित रहता है। खाना खाने के बाद टहलने के फायदे 1. ब्लड शुगर में अचानक बढ़ोतरी को रोकता है भोजन के बाद होने वाले शुगर स्पाइक को कम करने में मदद मिलती है, जो डायबिटीज और प्रीडायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद है। 2. इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार नियमित वॉक करने से शरीर इंसुलिन के प्रति बेहतर प्रतिक्रिया देता है, जिससे ग्लूकोज आसानी से कोशिकाओं तक पहुंच पाता है। 3. पाचन तंत्र को बनाता है मजबूत खाने के बाद टहलने से बाउल मूवमेंट बेहतर होता है और पेट फूलना, भारीपन तथा अपच जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है। 4. वजन नियंत्रित रखने में मददगार हल्की शारीरिक गतिविधि कैलोरी बर्न करने में मदद करती है, जिससे मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा कम हो सकता है। 5. हार्ट और मेटाबॉलिज्म को फायदा ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और शरीर का मेटाबॉलिज्म सक्रिय रहता है, जिससे समग्र स्वास्थ्य को लाभ मिलता है। ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए अपनाएं ये आदतें खाना खाने के बाद 10-20 मिनट तक टहलें। ज्यादा मीठा और ओवरईटिंग से बचें। भोजन में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। शुगरी ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करें। प्रोटीन, हेल्दी फैट और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट वाला संतुलित आहार लें। नियमित व्यायाम करें और वजन नियंत्रित रखें। भोजन के तुरंत बाद लेटने से बचें। यदि डायबिटीज या प्रीडायबिटीज है तो नियमित ब्लड शुगर जांच करवाएं। विशेषज्ञों का मानना है कि खाने के बाद की छोटी-सी सैर लंबे समय में ब्लड शुगर नियंत्रण, बेहतर पाचन और अच्छी नींद जैसी कई स्वास्थ्य समस्याओं में लाभ पहुंचा सकती है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खराब खानपान और धूप से दूरी के कारण विटामिन डी की कमी तेजी से बढ़ रही है। लंबे समय तक इस जरूरी विटामिन की कमी केवल हड्डियों को ही नहीं, बल्कि शरीर के शुगर मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम विटामिन डी स्तर टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है। इंसुलिन के लिए क्यों जरूरी है विटामिन डी? विटामिन डी केवल कैल्शियम के अवशोषण और हड्डियों की मजबूती तक सीमित नहीं है। यह इंसुलिन के उत्पादन और उसके प्रभावी कार्य में भी मदद करता है। इंसुलिन वह हार्मोन है जो रक्त में मौजूद शुगर को नियंत्रित करता है। अध्ययनों के अनुसार, जिन लोगों में विटामिन डी की कमी होती है, उनमें इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में शरीर इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है। डायबिटीज के साथ बढ़ सकता है अन्य बीमारियों का खतरा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को विटामिन डी की कमी और डायबिटीज दोनों हैं, तो माइक्रोवैस्कुलर जटिलताओं का खतरा भी बढ़ सकता है। इसका असर शरीर की छोटी रक्त वाहिकाओं पर पड़ता है, जिससे कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इनमें शामिल हैं: डायबिटिक रेटिनोपैथी (आंखों की बीमारी) डायबिटिक नेफ्रोपैथी (किडनी को नुकसान) डायबिटिक न्यूरोपैथी (नसों की कमजोरी) विटामिन डी की कमी से शरीर में सूजन बढ़ सकती है, जो रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाकर ब्लड फ्लो को प्रभावित कर सकती है। विटामिन डी की कमी के संकेत लगातार थकान और कमजोरी मांसपेशियों में दर्द हड्डियों में दर्द बार-बार बीमार पड़ना ऊर्जा की कमी ब्लड शुगर नियंत्रण में परेशानी विटामिन डी की कमी कैसे दूर करें? विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ आसान उपाय अपनाकर विटामिन डी के स्तर को बेहतर बनाया जा सकता है: रोज सुबह 20 से 30 मिनट धूप में समय बिताएं। आहार में अंडा, मशरूम, फैटी फिश, दूध और दही शामिल करें। नियमित रूप से व्यायाम, योग और वॉक करें। डॉक्टर की सलाह पर विटामिन डी सप्लीमेंट लें। जरूरत पड़ने पर 25(OH)D टेस्ट करवाएं। क्या केवल विटामिन डी की कमी से डायबिटीज होती है? स्वास्थ्य विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि डायबिटीज एक बहु-कारक बीमारी है। केवल विटामिन डी की कमी को इसका एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता। हालांकि, पर्याप्त विटामिन डी स्तर बनाए रखना बेहतर इंसुलिन संवेदनशीलता और समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
नई रिसर्च में सामने आया है कि Type 1 Diabetes से पीड़ित बुजुर्गों में Dementia विकसित होने का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक हो सकता है। साल 2026 की All of Us Cohort Study ने डायबिटीज और डिमेंशिया के बीच गहरे संबंध की ओर संकेत किया है। क्या कहती है रिसर्च शोधकर्ताओं ने All of Us Cohort Study के डेटा का विश्लेषण किया, जिसमें 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लगभग 2.84 लाख लोगों को शामिल किया गया। इन प्रतिभागियों की औसत उम्र करीब 65 वर्ष थी और इन्हें औसतन 2.5 साल तक फॉलो किया गया। इस दौरान 2,300 से अधिक लोगों में डिमेंशिया के मामले सामने आए। इनमें से करीब 5,500 लोग टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित थे। तीन गुना तक बढ़ा जोखिम विश्लेषण में पाया गया कि टाइप 1 डायबिटीज वाले लोगों में डिमेंशिया होने का जोखिम लगभग तीन गुना अधिक था। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि ऐसे मरीजों में डिमेंशिया के करीब 64.5% मामलों के पीछे डायबिटीज एक प्रमुख कारण हो सकता है। वहीं Type 2 Diabetes से पीड़ित लोगों में भी खतरा कम नहीं है-इनमें डिमेंशिया का जोखिम दो गुना से अधिक पाया गया। क्यों बढ़ रहा है खतरा विशेषज्ञों के अनुसार, टाइप 1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की इम्यून सिस्टम इंसुलिन बनाने वाली बीटा कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। यही प्रक्रिया दिमाग पर भी असर डाल सकती है, जिससे याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी माना कि टाइप 1 डायबिटीज के मरीज हेल्थकेयर सिस्टम के संपर्क में ज्यादा रहते हैं, जिससे उनमें डिमेंशिया का जल्दी पता चलने की संभावना भी अधिक हो सकती है। क्या है इसका मतलब इस स्टडी से यह स्पष्ट होता है कि डायबिटीज सिर्फ ब्लड शुगर तक सीमित बीमारी नहीं है, बल्कि यह दिमागी स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस संबंध को और गहराई से समझने और समय रहते रोकथाम के उपाय करने की जरूरत है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।