NEET UG 2026 की पुनर्परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने परीक्षा की स्कैन की गई OMR उत्तर पुस्तिका (OMR Answer Sheet) और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स जारी कर दिए हैं। अभ्यर्थी अब अपनी OMR शीट का मिलान कर सकते हैं और किसी भी त्रुटि की स्थिति में निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हुई OMR शीट NTA ने NEET UG 2026 की स्कैन की गई OMR उत्तर पुस्तिका और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स को आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर अपलोड कर दिया है। इसके अलावा, OMR शीट की स्कैन कॉपी उम्मीदवारों के पंजीकृत ईमेल आईडी पर भी भेजी गई है। उम्मीदवारों को आवेदन संख्या और पासवर्ड के जरिए लॉगिन करना होगा। सुरक्षा के लिए OTP आधारित टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन भी लागू किया गया है। कब तक कर सकते हैं आपत्ति दर्ज? रिकॉर्डेड OMR रिस्पॉन्स पर आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया 13 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है। आपत्ति दर्ज करने की अंतिम तिथि: 15 जुलाई 2026 प्रति प्रश्न शुल्क: ₹200 भुगतान का माध्यम: डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग निर्धारित समय सीमा के बाद या शुल्क जमा किए बिना भेजी गई किसी भी आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा। किन मामलों में दर्ज कर सकते हैं चुनौती? NTA ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यह सुविधा केवल रिकॉर्डेड OMR रिस्पॉन्स में किसी त्रुटि को चुनौती देने के लिए उपलब्ध है। उत्तर कुंजी (Answer Key) पर आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया पहले ही समाप्त हो चुकी है। इसलिए अब उत्तर कुंजी से संबंधित कोई नया दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे करें OMR रिस्पॉन्स चैलेंज उम्मीदवार नीचे दिए गए चरणों का पालन कर ऑनलाइन आपत्ति दर्ज कर सकते हैं- NTA की आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर जाएं। आवेदन संख्या और पासवर्ड से लॉगिन करें। मोबाइल नंबर या ईमेल पर प्राप्त OTP से सत्यापन पूरा करें। "View/Challenge OMR Sheet & Recorded Responses" विकल्प पर क्लिक करें। स्कैन की गई OMR शीट और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स का मिलान करें। यदि कोई त्रुटि मिले तो संबंधित प्रश्न चुनकर आपत्ति दर्ज करें। प्रत्येक चुनौती के लिए ₹200 का ऑनलाइन शुल्क जमा करें। भुगतान के बाद Submit Challenge पर क्लिक करें। भविष्य के लिए आवेदन की रसीद डाउनलोड कर सुरक्षित रखें। सही आपत्ति होने पर क्या मिलेगा रिफंड? यदि उम्मीदवार द्वारा दर्ज की गई आपत्ति जांच के दौरान सही पाई जाती है, तो संबंधित ₹200 प्रोसेसिंग शुल्क वापस (Refund) कर दिया जाएगा। कब हुई थी NEET UG 2026 की पुनर्परीक्षा? NTA ने NEET UG 2026 Re-Exam का आयोजन 21 जून 2026 को दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:15 बजे तक कराया था। इससे पहले 3 मई 2026 को आयोजित मूल परीक्षा को रद्द कर दिया गया था। पुनर्परीक्षा में 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया।
7 जुलाई रात 11:50 बजे तक मिलेगा मौका, समय रहते पूरी करें प्रक्रिया नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने NEET UG 2026 के उन उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण सूचना जारी की है, जो रिफंड के पात्र हैं। एजेंसी ने कहा है कि जिन अभ्यर्थियों ने अब तक अपने बैंक खाते की जानकारी अपडेट या सत्यापित नहीं की है, वे 7 जुलाई 2026 रात 11:50 बजे तक आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। समय सीमा के भीतर सही बैंक विवरण दर्ज करने से रिफंड मिलने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। NTA ने क्या कहा? NTA ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी सूचना में बताया कि जिन उम्मीदवारों ने पहले ही अपने बैंक खाते की जानकारी की पुष्टि कर दी है, उनके रिफंड की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एजेंसी के अनुसार, अब तक 8,29,510 उम्मीदवार अपने बैंक विवरण को अपडेट या संशोधित कर चुके हैं। बैंक डिटेल कैसे अपडेट करें? रिफंड के लिए उम्मीदवार निम्नलिखित आसान चरणों का पालन कर सकते हैं: NEET UG की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। Application Number और Password या Date of Birth की सहायता से लॉगिन करें। Refund/Bank Details सेक्शन में जाकर अपने बैंक खाते की जानकारी जांचें। यदि कोई त्रुटि हो तो Account Number, IFSC Code और अन्य आवश्यक विवरण सही करें। सभी जानकारी की पुष्टि करने के बाद Submit पर क्लिक करें। भविष्य के संदर्भ के लिए Confirmation Page डाउनलोड या प्रिंट करके सुरक्षित रख लें। NTA की उम्मीदवारों को सलाह एजेंसी ने सभी पात्र अभ्यर्थियों से अपील की है कि यदि उनके बैंक खाते की जानकारी में किसी भी प्रकार की गलती है, तो अंतिम तिथि से पहले उसे अवश्य सुधार लें। गलत बैंक विवरण के कारण रिफंड मिलने में देरी या अन्य तकनीकी समस्याएं आ सकती हैं। NEET UG री-एग्जाम का रिजल्ट कब आएगा? NEET UG 2026 का री-एग्जाम 21 जून 2026 को देशभर के निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर आयोजित किया गया था। परीक्षा की प्रोविजनल आंसर की पहले ही जारी की जा चुकी है। अब उम्मीदवारों को परिणाम का इंतजार है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, NEET UG री-एग्जाम का रिजल्ट 20 जुलाई 2026 तक या उससे पहले घोषित किया जा सकता है।
नीट पेपर लीक मामले के आरोपी यश यादव को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उसे 21 जून को होने वाली दोबारा आयोजित NEET-UG परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही अदालत ने यश यादव को अपनी बहन की शादी में शामिल होने की भी इजाजत प्रदान की है। कोर्ट ने शिक्षा को बताया मौलिक अधिकार मामले की सुनवाई के दौरान राउज एवेन्यू कोर्ट ने कहा कि शिक्षा प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और किसी भी व्यक्ति को इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने यश यादव को परीक्षा देने की अनुमति प्रदान की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यश यादव को पुलिस हिरासत और सुरक्षा निगरानी में परीक्षा केंद्र ले जाया जाएगा। पढ़ाई के लिए किताबें रखने की भी मिली थी अनुमति यश यादव ने इससे पहले अदालत से पढ़ाई के लिए किताबें अपने पास रखने की अनुमति मांगी थी। 2 जून को कोर्ट ने उसकी इस मांग को स्वीकार कर लिया था, ताकि वह आगामी परीक्षा की तैयारी कर सके। यश यादव की वकील अंबिका यादव ने अदालत में कहा था कि वह एक मेधावी छात्र है और उसने 3 मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा दी थी। परीक्षा स्थगित होने के बाद अब 21 जून को दोबारा आयोजित की जा रही है, इसलिए उसे परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाना चाहिए। नीट पेपर लीक मामले में आरोपी है यश यादव यश यादव नीट पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों में से एक है। मामले की जांच अभी जारी है और आरोपी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया भी चल रही है। अदालत ने माना कि आपराधिक मामले में आरोपी होने मात्र से किसी छात्र के शिक्षा के अधिकार को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता।
नई दिल्ली: NEET UG 2026 पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि पेपर लीक में शामिल दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए जो भविष्य में दूसरों के लिए मिसाल बने। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरोपियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाने की सिफारिश की गई है ताकि जल्द फैसला हो सके। 21 जून को होने वाले NEET UG 2026 री-एग्जाम से पहले शिक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) लगातार तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। मंगलवार को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NTA मुख्यालय पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था, परीक्षा संचालन और रिजल्ट प्रक्रिया का जायजा लिया। दोषियों पर होगी सबसे कड़ी कार्रवाई धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पेपर तैयार करने और अनुवाद प्रक्रिया से जुड़े जिन लोगों ने देश के करोड़ों छात्रों का भरोसा तोड़ा है, उनके खिलाफ न केवल आपराधिक कार्रवाई होगी बल्कि नागरिक दायित्व (Civil Liability) के तहत भी कार्रवाई की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सीबीआई को निर्देश दिया गया है कि गिरफ्तार किए गए लोगों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई सुनिश्चित की जाए ताकि जल्द फैसला सामने आ सके। शिक्षा मंत्री ने कहा, "दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए जो आने वाले समय में किसी के लिए भी चेतावनी और मिसाल बने।" PM मोदी भी कर रहे हैं निगरानी धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। केंद्र सरकार की सभी एजेंसियां अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं और छात्रों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि NTA कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले रही है ताकि उन संस्थाओं और व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सके जिन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं किया। री-एग्जाम की तैयारियां अंतिम चरण में NTA पहले ही NEET UG 2026 री-एग्जाम के लिए एग्जाम सिटी स्लिप जारी कर चुका है। अब जल्द ही एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। कुछ छात्रों द्वारा परीक्षा केंद्र बदलने की मांग की गई है, जिस पर एजेंसी विचार कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी फैसले छात्रों के हितों को ध्यान में रखकर लिए जा रहे हैं। संसदीय समिति ने अधिकारियों को तलब किया बुधवार को संसद की स्थायी समिति की महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है, जिसमें शिक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, NTA और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। समिति परीक्षा संचालन, सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य की सुधार योजनाओं पर सवाल-जवाब करेगी। CUET-UG रिजल्ट भी जल्द NTA CUET-UG 2026 का रिजल्ट भी जल्द जारी करने की तैयारी में है। 7 जून को परीक्षा समाप्त होने के बाद 9 जून को प्रोविजनल आंसर-की जारी कर दी गई थी। छात्र 11 जून तक प्रति प्रश्न 200 रुपये शुल्क देकर आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। इस वर्ष 243 विश्वविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश CUET स्कोर के आधार पर होगा। साइबर सुरक्षा पर विशेष फोकस सरकार ने NTA के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के लिए संयुक्त सचिव और निदेशक स्तर के नए अधिकारियों की नियुक्ति की है। इसके अलावा IB, CBI और साइबर सुरक्षा एजेंसियों को भी सक्रिय किया गया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
रांची। झारखंड में शिक्षक बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर है। झारखण्ड अधिविद्य परिषद् (जैक) ने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) 2026 के ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि को आगे बढ़ा दिया है। अब अभ्यर्थी आगामी 20 जून तक अपना परीक्षा आवेदन प्रपत्र ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। मोबाइल-ईमेल वालों की समस्या का समाधान जैक को यह लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि जिन अभ्यर्थियों ने झारखण्ड शिक्षक पात्रता परीक्षा 2024 के लिए आवेदन किया था, उनके मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें 2026 की परीक्षा का फॉर्म भरने में काफी तकनीकी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। छात्रों ने बोर्ड से वैकल्पिक रास्ता देने की मांग की थी। छात्रों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए जैक ने स्पष्ट किया है कि ऐसे सभी अभ्यर्थियों को, जिनके पास पुराना मोबाइल नंबर या ईमेल नहीं है, ऑनलाइन आवेदन की सामान्य तिथि (20 जून) समाप्त होने के बाद एक विशेष अवसर दिया जाएगा। इस तय विशेष अवधि के दौरान अभ्यर्थी वेबसाइट पर अपनी सामान्य बुनियादी विवरणी दर्ज कर आसानी से अपना आवेदन फॉर्म भर सकेंगे।
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने सोमवार को इंटरमीडिएट (कक्षा 12वीं) परीक्षा 2026 के परिणाम जारी कर दिए। इस वर्ष भी छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन करते हुए परीक्षा में अपना दबदबा कायम रखा। बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार कुल पास प्रतिशत 85.19% रहा। इसमें छात्राओं का प्रदर्शन छात्रों से बेहतर रहा-86.23% लड़कियां सफल रहीं, जबकि 84.09% लड़के परीक्षा में पास हुए। लड़कियों का शानदार प्रदर्शन इस साल टॉपर्स की सूची में भी छात्राओं का दबदबा देखने को मिला। कुल 26 टॉपर्स में से 19 छात्राएं हैं, जो बिहार की शिक्षा व्यवस्था में बढ़ते महिला सशक्तिकरण की झलक पेश करता है। स्ट्रीम वाइज टॉपर्स साइंस: आदित्य प्रकाश अमन (समस्तीपुर) – 481 अंक (96.20%) आर्ट्स: निशु कुमारी (गया) – 489 अंक कॉमर्स: अदिति कुमारी (पटना) – 480 अंक रिकॉर्ड समय में रिजल्ट जारी बिहार बोर्ड ने एक बार फिर रिकॉर्ड कायम करते हुए लगातार 8वीं बार देश में सबसे पहले इंटर का रिजल्ट घोषित किया। इस बार महज 25 दिनों में कॉपियों का मूल्यांकन पूरा कर लिया गया, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। परीक्षा और रिजल्ट से जुड़ी अहम जानकारी करीब 13 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं इस परीक्षा में शामिल हुए थे। परीक्षाएं 1 फरवरी से 15 फरवरी 2026 के बीच आयोजित की गई थीं। जो छात्र अपने परिणाम से संतुष्ट नहीं हैं, वे 25 मार्च से 2 अप्रैल तक स्क्रूटनी या कंपार्टमेंट परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऐसे करें रिजल्ट चेक छात्र अपना रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट्स- interbiharboard.com bsebexam.com पर जाकर देख सकते हैं। इसके अलावा SMS और DigiLocker के माध्यम से भी परिणाम प्राप्त किया जा सकता है। टॉपर्स के लिए इनाम इस वर्ष टॉपर्स के लिए पुरस्कार राशि दोगुनी कर दी गई है- प्रथम स्थान: 2 लाख रुपये, लैपटॉप और किंडल द्वितीय स्थान: 1.5 लाख रुपये और लैपटॉप तृतीय स्थान: 1 लाख रुपये और लैपटॉप
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।