Exam Security

रांची में वायु सेना के विमान से पहुंचा NEET 2026 का प्रश्न पत्र

रांची। NEET UG Re-Exam 2026 को लेकर देशभर में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है। पिछले पेपर लीक विवाद के बाद आयोजित हो रही दोबारा परीक्षा के लिए प्रश्न पत्रों की ढुलाई वायुसेना के विशेष विमानों के जरिए की जा रही है। रांची, पटना और छत्तीसगढ़ के जगदलपुर समेत कई शहरों में प्रश्न पत्र कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पहुंचाए गए। रांची एयरपोर्ट पर हाई अलर्ट वायुसेना का विशेष विमान रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर उतरा। विमान से नीट यूजी के प्रश्न पत्र उतारने के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। एयरपोर्ट परिसर में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा गया।  विमान से करीब दर्जनभर ट्रॉलियों के माध्यम से प्रश्न पत्रों को कार्गो क्षेत्र तक पहुंचाया गया। इसके बाद डाक विभाग के विशेष वाहनों से इन्हें विभिन्न परीक्षा केंद्रों के लिए रवाना किया गया। प्रत्येक वाहन के साथ पुलिस की तीन-तीन एस्कॉर्ट गाड़ियां सुरक्षा में तैनात थीं।   21 जून को होगी परीक्षा, रांची में 21 परीक्षा केंद्र 21 जून को आयोजित होने वाली NEET UG Re-Exam के लिए रांची जिले में कुल 21 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। प्रशासन ने परीक्षा के दिन सभी केंद्रों के 200 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू करने का निर्णय लिया है, ताकि परीक्षा निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर एयरपोर्ट से लेकर स्ट्रॉन्ग रूम तक सुरक्षा एजेंसियों की पैनी निगरानी रही। किसी भी अनधिकृत व्यक्ति की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगाई गई और प्रश्न पत्रों को सीधे सुरक्षित स्ट्रॉन्ग रूम में पहुंचाया गया। पूरी प्रक्रिया के दौरान गोपनीयता और सुरक्षा के सभी मानकों का सख्ती से पालन किया गया। पेपर लीक विवाद के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा पिछले पेपर लीक विवाद के बाद इस बार NEET UG Re-Exam की सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व बनाया गया है। प्रश्न पत्रों की ढुलाई से लेकर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की प्रक्रिया पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखना और अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत करना है।

anjali kumari जून 18, 2026 0
NEET 2026 candidates affected as India temporarily restricts Telegram over exam leak concerns
NEET पेपर लीक पर केंद्र का बड़ा एक्शन, 22 जून तक भारत में Telegram पर अस्थायी रोक

मेडिकल प्रवेश परीक्षा में धोखाधड़ी रोकने के लिए सरकार का सख्त कदम राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) 2026 से जुड़े कथित पेपर लीक और नकल रैकेट पर कार्रवाई करते हुए केंद्र सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram की सेवाओं पर अस्थायी रोक लगा दी है। सरकार के अनुसार यह प्रतिबंध 22 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा। शिक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि Telegram का इस्तेमाल संगठित गिरोहों द्वारा मेडिकल प्रवेश परीक्षा के उम्मीदवारों को धोखा देने और परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी फैलाने के लिए किया जा रहा था। इसी वजह से यह फैसला लिया गया है। आईटी कानून के तहत जारी हुआ आदेश सरकार ने Telegram पर यह प्रतिबंध सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कानून के एक विशेष प्रावधान के तहत लगाया है। यह प्रावधान देश की संप्रभुता, अखंडता और सार्वजनिक हित की रक्षा के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक पहुंच सीमित करने की अनुमति देता है। सरकारी बयान के मुताबिक यह कदम सीमित अवधि और विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखकर उठाया गया है। NEET 2026 पेपर लीक के बाद बढ़ी सख्ती पिछले महीने NEET 2026 परीक्षा को रद्द कर दिया गया था, जब जांच एजेंसियों को प्रश्नपत्र लीक होने के संकेत मिले थे। इस घटना के बाद देशभर में छात्रों के विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। अब सरकार ने 21 जून 2026 को पुनर्परीक्षा आयोजित करने का फैसला किया है। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। NTA ने बताया क्यों उठाना पड़ा यह कदम शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाली National Testing Agency (NTA) ने कहा कि Telegram का उपयोग कुछ संगठित नकल गिरोहों द्वारा NEET पुनर्परीक्षा के अभ्यर्थियों को गुमराह करने और धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा था। एजेंसी के अनुसार, प्लेटफॉर्म से आपत्तिजनक सामग्री हटाने के लिए पहले भी प्रयास किए गए थे, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। इसके बाद अस्थायी प्रतिबंध को "अंतिम विकल्प" के रूप में लागू किया गया। लाखों उपयोगकर्ताओं पर पड़ेगा असर भारत Telegram का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है और यहां करोड़ों लोग इस ऐप का उपयोग करते हैं। शिक्षा, व्यवसाय, समाचार, ऑनलाइन समुदाय और व्यक्तिगत संचार के लिए Telegram व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। सरकार ने स्वीकार किया है कि इस कदम से बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं को असुविधा होगी, लेकिन परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह फैसला जरूरी बताया गया है। टेलीकॉम और टेक कंपनियों की प्रतिक्रिया का इंतजार फिलहाल प्रमुख दूरसंचार कंपनियों और टेक प्लेटफॉर्म्स की ओर से इस फैसले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियां जैसे Reliance Jio, Bharti Airtel और Vodafone Idea (Vi) इस आदेश को लागू करने की प्रक्रिया में हैं या नहीं, इस पर भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं Google Play Store और Apple App Store की ओर से भी फिलहाल कोई बयान जारी नहीं किया गया है। 21 जून की परीक्षा पर टिकी निगाहें अब छात्रों और अभिभावकों की नजर 21 जून को होने वाली NEET पुनर्परीक्षा पर है। सरकार का कहना है कि परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। Telegram पर लगाया गया यह अस्थायी प्रतिबंध हाल के वर्षों में किसी बड़े मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के खिलाफ उठाए गए सबसे सख्त कदमों में से एक माना जा रहा है।  

surbhi जून 16, 2026 0
NEET-UG 2026
NEET-UG 2026: जमशेदपुर में कड़ी निगरानी के साथ होगी नीट परीक्षा

जमशेदपुर। जमशेदपुर में 21 जून को आयोजित होने वाली NEET-UG 2026 परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। उपायुक्त राजीव रंजन की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में परीक्षा संचालन से जुड़े सभी पहलुओं पर चर्चा की गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा केंद्रों पर केवल सरकारी कर्मियों को ही इनविजिलेटर (वीक्षक) के रूप में नियुक्त किया जाएगा।   पूरी परीक्षा प्रक्रिया की होगी वीडियोग्राफी परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोकने के लिए सभी केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। अभ्यर्थियों की प्रवेश से पहले सघन फ्रिस्किंग की जाएगी और पूरी परीक्षा प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। इसके अलावा परीक्षा से एक दिन पहले सभी परीक्षा केंद्रों को सैनिटाइज कर सील कर दिया जाएगा, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना समाप्त हो सके।   भीड़ नियंत्रण और ट्रैफिक व्यवस्था पर विशेष ध्यान उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि परीक्षा के दिन शहर में सुचारु यातायात और भीड़ प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। प्रमुख चौक-चौराहों तथा परीक्षा केंद्रों के बाहर मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। साथ ही बिजली, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी।   8 केंद्रों पर होगी परीक्षा, 4 हजार से अधिक परीक्षार्थी होंगे शामिल जिले के छह शिक्षण संस्थानों में कुल आठ परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां 4,000 से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। परीक्षा दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:15 बजे तक आयोजित होगी। परीक्षार्थियों को सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक ही प्रवेश मिलेगा। इसके बाद किसी भी परिस्थिति में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।   इन केंद्रों पर आयोजित होगी परीक्षा परीक्षा एलबीएसएम कॉलेज करनडीह, जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज, जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी, द ग्रेजुएट स्कूल कॉलेज फॉर वीमेंस, राजकीय आदिवासी हाई स्कूल सीतारामडेरा और एलबीएसएम कॉलेज गोलमुरी सहित कुल आठ केंद्रों पर आयोजित की जाएगी।   अधिकारियों ने की तैयारियों की समीक्षा बैठक में सिटी एसपी ललित मीणा, एसडीएम धालभूम अर्णव मिश्रा, एएसपी ऋषभ त्रिवेदी, एडीएम लॉ एंड ऑर्डर राहुलजी आनंदजी समेत विभिन्न कॉलेजों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। प्रशासन का लक्ष्य परीक्षा को सुरक्षित, पारदर्शी और कदाचारमुक्त तरीके से संपन्न कराना है।

anjali kumari जून 11, 2026 0
Chinese students attend Gaokao exam as authorities ensure strict security and smooth nationwide arrangements.
चीन ने 1.3 करोड़ छात्रों की ‘गाओकाओ’ परीक्षा कराई सफलतापूर्वक, व्यवस्था देख दुनिया हुई प्रभावित

  बीजिंग: भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और पेपर लीक को लेकर चल रही बहस के बीच चीन ने दुनिया की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा ‘गाओकाओ’ (Gaokao) का आयोजन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस वर्ष करीब 1.3 करोड़ छात्रों ने परीक्षा में हिस्सा लिया और पूरे आयोजन के दौरान किसी बड़ी गड़बड़ी या सुरक्षा उल्लंघन की खबर सामने नहीं आई। चीन सरकार ने परीक्षा के दौरान छात्रों को बेहतर माहौल उपलब्ध कराने के लिए देशभर में विशेष इंतजाम किए। परीक्षा केंद्रों के आसपास शोर कम करने के लिए कई क्षेत्रों में फैक्ट्रियों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया, जबकि ट्रैफिक प्रतिबंध लागू कर छात्रों की आवाजाही को आसान बनाया गया। छात्रों की सुविधा के लिए पूरे देश ने दिखाई एकजुटता चीन में गाओकाओ केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व का आयोजन माना जाता है। परीक्षा के दौरान प्रशासन, स्थानीय निकायों और आम नागरिकों ने मिलकर ऐसा वातावरण तैयार किया, जिससे छात्र बिना किसी व्यवधान के परीक्षा दे सकें। परीक्षा केंद्रों के आसपास विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई। कई शहरों में वाहनों की आवाजाही सीमित रखी गई और छात्रों के लिए विशेष परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। चीनी दूतावास ने JEE और NEET से की तुलना भारत स्थित चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर गाओकाओ परीक्षा की तुलना भारत की जेईई (JEE) और नीट (NEET) परीक्षाओं से की। उन्होंने कहा कि गाओकाओ दुनिया की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा है, जिसे भारत की JEE और NEET के संयुक्त स्वरूप के समान माना जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि केवल दो दिनों में 1.3 करोड़ छात्रों के लिए परीक्षा का सफल आयोजन चीन की प्रशासनिक क्षमता और समन्वय को दर्शाता है। क्या है गाओकाओ परीक्षा? गाओकाओ चीन की राष्ट्रीय विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा है, जिसका आयोजन चीन का शिक्षा मंत्रालय करता है। देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए यह परीक्षा अनिवार्य मानी जाती है। हर वर्ष करोड़ों छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं और इसके परिणाम छात्रों के शैक्षणिक एवं पेशेवर भविष्य को काफी हद तक निर्धारित करते हैं। यही वजह है कि इसे चीन के सबसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक आयोजनों में गिना जाता है। भारत में NEET विवाद के बीच चर्चा में आया चीन का मॉडल चीन की परीक्षा व्यवस्था उस समय चर्चा में आई है, जब भारत में NEET-UG परीक्षा को लेकर पेपर लीक और परीक्षा प्रबंधन से जुड़े सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में संसदीय समिति की बैठक में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) और अन्य संबंधित संस्थाओं के अधिकारियों से परीक्षा सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर जवाब मांगा गया। समिति के कुछ सदस्यों ने अमेरिका और चीन जैसे देशों का उदाहरण देते हुए सुझाव दिया कि भारत को भी बड़े पैमाने की परीक्षाओं के आयोजन में वैश्विक सर्वोत्तम प्रक्रियाओं (Best Practices) को अपनाने पर विचार करना चाहिए। परीक्षा प्रबंधन का वैश्विक उदाहरण बना गाओकाओ विशेषज्ञों का मानना है कि करोड़ों छात्रों वाली परीक्षा को सीमित समय में व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराना किसी भी देश के लिए बड़ी चुनौती होती है। चीन का गाओकाओ मॉडल एक बार फिर यह दिखाता है कि व्यापक प्रशासनिक समन्वय, तकनीकी निगरानी और सामाजिक सहयोग के माध्यम से बड़े स्तर की परीक्षाओं का सफल आयोजन संभव है।  

Deepshikha जून 11, 2026 0
Security tightened for NEET re-test as Indian Army and Air Force oversee question paper transport
NEET री-टेस्ट के लिए बदली सुरक्षा व्यवस्था, अब सेना और वायुसेना की निगरानी में पहुंचेगा प्रश्नपत्र

NEET-UG पेपर लीक विवाद के बीच 21 जून को होने वाले री-टेस्ट को लेकर केंद्र सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रक्रिया में बड़े बदलाव करने का फैसला लिया है। गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर हुई हाईलेवल बैठक में तय किया गया कि अब परीक्षा के प्रश्नपत्रों के परिवहन और सुरक्षा में सेना और भारतीय वायुसेना की मदद ली जाएगी। बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के महानिदेशक अभिषेक सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सरकार का उद्देश्य इस बार परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। यूपीएससी जैसी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की तैयारी बैठक में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तर्ज पर मजबूत बनाने का प्रस्ताव रखा। इसके तहत प्रश्नपत्र तैयार करने, प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्टेशन और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया को मल्टी-लेयर निगरानी में रखा जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने प्रश्नपत्रों के सुरक्षित परिवहन के लिए सेना और वायुसेना की सहायता देने पर सहमति जताई है। अब एयरफोर्स की मदद से प्रश्नपत्रों को संवेदनशील और दूरस्थ परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। शिक्षा मंत्री बोले- छात्रों का भरोसा बहाल करना सबसे बड़ी प्राथमिकता बैठक के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछली परीक्षाओं में डाक विभाग और गृह मंत्रालय की भूमिका प्रमुख थी, लेकिन इस बार सुरक्षा व्यवस्था में कई अहम बदलाव किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता छात्रों और अभिभावकों का भरोसा वापस जीतना है। इसके लिए परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी निगरानी में रखा जाएगा। फीस रिफंड के लिए बैंक डिटेल जमा करने की तारीख बढ़ी NEET री-टेस्ट को लेकर NTA ने छात्रों को राहत देते हुए फीस रिफंड प्रक्रिया की डेडलाइन भी बढ़ा दी है। अब उम्मीदवार 22 जून रात तक अपने बैंक खाते की जानकारी जमा कर सकेंगे। पहले यह अंतिम तिथि 27 मई निर्धारित की गई थी। बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों की मांग के बाद एजेंसी ने समय सीमा बढ़ाने का फैसला लिया। प्रधानमंत्री खुद रख रहे तैयारियों पर नजर सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद NEET री-टेस्ट की तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं। परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचाई जा रही है। सरकार इस बार किसी भी तरह की लापरवाही से बचना चाहती है, क्योंकि पेपर लीक विवाद ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा खड़ा कर दिया है। कोएम्प्ट एजूटेक कंपनी पर भी उठे सवाल विवाद के बीच सीबीएसई की ओर से OSM कॉन्ट्रैक्ट पाने वाली कंपनी Coempt Edutech भी जांच के घेरे में आ गई है। यह कंपनी पहले Globarena नाम से जानी जाती थी और तेलंगाना बोर्ड परीक्षा से जुड़े विवादों में उसका नाम सामने आया था। बताया जा रहा है कि 2019 और 2023 में परीक्षा प्रबंधन से जुड़े विवादों के दौरान कई छात्रों ने आत्महत्या की थी। अब विपक्ष इस कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिए जाने को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। राहुल गांधी ने छात्र के परिवार से मुलाकात कर सरकार पर साधा निशाना कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को NEET की तैयारी कर रहे छात्र प्रदीप मेघवाल के परिवार से मुलाकात की। प्रदीप ने कथित तौर पर परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं और ‘क्वेश्चन बैंक’ लीक की खबरों के बाद आत्महत्या कर ली थी। राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह केवल आत्महत्या नहीं, बल्कि एक भ्रष्ट और टूट चुकी परीक्षा व्यवस्था का परिणाम है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि “मोदी-प्रधान की जोड़ी इस परिवार के सामने जवाबदेह है।” CBI की जांच तेज, अब तक 13 गिरफ्तार NEET पेपर लीक मामले की जांच कर रही CBI ने कार्रवाई तेज कर दी है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरोपी डॉ. मनोज शिरुरे और तेजस हर्षद कुमार शाह को 1 जून तक CBI हिरासत में भेज दिया है। वहीं प्रह्लाद कुलकर्णी और शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को 10 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। CBI ने देशभर में अब तक 49 स्थानों पर छापेमारी की है और कई अहम दस्तावेज, लैपटॉप तथा मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इस मामले में अब तक कुल 13 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। 3 मई को हुई थी परीक्षा, 12 मई को रद्द करना पड़ा NEET-UG परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में करीब 23 लाख छात्र शामिल हुए थे। NTA के अनुसार, 7 मई की शाम परीक्षा में गड़बड़ी की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद मामला केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा गया और 12 मई को परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया। अब 21 जून को री-टेस्ट आयोजित किया जाएगा।  

surbhi मई 29, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0