मुजफ्फरपुर। मुजफ्फरपुर में बिहार सरकार के पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता के बेटे कृष्ण मुरारी कुमार से लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगने का मामला सामने आया है। आरोपी ने व्हाट्सएप संदेश के जरिए रुपये नहीं देने पर उन्हें और परिवार को जान से मारने की धमकी दी थी। एसआईटी ने तीन आरोपियों को दबोचा मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। जांच के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों में अमन प्रकाश, पवन सहनी और कन्हाई कुमार शामिल हैं। वहीं, एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है। लॉरेंस गैंग का नाम लेकर फैलाई दहशत पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने खुद को लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सदस्य बताया था और धमकी भरे संदेश भेजकर पैसे की मांग की थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने गैंग के नाम का इस्तेमाल कर लोगों में डर पैदा करने की कोशिश की। चार दिनों में तीन लोगों से मांगी गई दो करोड़ की रंगदारी जांच में पुलिस को पता चला है कि 21 से 24 जुलाई के बीच एक ही मोबाइल नंबर से तीन लोगों को धमकी दी गई। इनमें भाजपा नेता रंजीत सहनी, जिला परिषद सदस्य राजेश सहनी और मंत्री के बेटे कृष्ण मुरारी कुमार शामिल हैं। तीनों से कुल दो करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई थी। मंत्री के बेटे ने दर्ज कराई थी प्राथमिकी कृष्ण मुरारी कुमार ने सदर थाना में अज्ञात मोबाइल नंबर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 24 जुलाई की रात करीब 10:20 बजे उनके व्हाट्सएप पर धमकी भरा संदेश आया, जिसमें 50 लाख रुपये की मांग की गई थी। पुलिस खंगाल रही आरोपियों का नेटवर्क पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जाएगी।
गुरुग्राम: हरियाणा के गुरुग्राम में शुक्रवार को पुलिस और कुख्यात दीपक नंदन गैंग के बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ में चार शूटर मारे गए, जबकि एक गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी SGT यूनिवर्सिटी के संस्थापक के बेटे के घर पर फिरौती के दबाव में फायरिंग करने पहुंचे थे। मुठभेड़ में क्राइम ब्रांच के तीन पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। कंट्रोल रूम की सूचना के बाद शुरू हुई कार्रवाई पुलिस प्रवक्ता के मुताबिक, कंट्रोल रूम को सूचना मिली थी कि एक महिंद्रा स्कॉर्पियो में कुछ हथियारबंद संदिग्ध सवार हैं। सूचना मिलते ही क्राइम ब्रांच की टीम सुशांत लोक इलाके में पहुंची। इसी दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर व्यवसायी के घर के बाहर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस पर भी की फायरिंग पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर आरोपियों को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने पुलिस टीम पर ही गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की। मुठभेड़ में पांचों हमलावर गोली लगने से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने चार को मृत घोषित कर दिया, जबकि एक आरोपी का इलाज जारी है। तीन पुलिसकर्मी भी घायल फायरिंग के दौरान क्राइम ब्रांच के तीन पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। सभी का अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस के अनुसार, उनकी हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है। विदेश से संचालित होता है गैंग प्रारंभिक जांच में पुलिस का कहना है कि मारे गए बदमाश विदेश से संचालित होने वाले कुख्यात दीपक नंदन गैंग से जुड़े थे। शुरुआती जानकारी के अनुसार, गैंग ने कथित तौर पर फिरौती के लिए व्यवसायी को निशाना बनाया था। हालांकि पुलिस अभी पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है और गैंग के अन्य सदस्यों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। एफएसएल टीम जुटा रही साक्ष्य घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस उपायुक्त (अपराध) हितेश यादव और डीसीपी (पूर्व) संदीप कुमार वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे। घटनास्थल को सील कर दिया गया है। फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) और तकनीकी टीम मौके से हथियार, कारतूस और अन्य साक्ष्य जुटाकर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। पुलिस करेगी विस्तृत जांच पुलिस का कहना है कि आरोपियों की पहचान, उनके आपराधिक रिकॉर्ड, फायरिंग की साजिश और गैंग के नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
बिधाननगर नगर परिषद के मेयर देबराज चक्रवर्ती से जुड़े कथित जबरन वसूली मामले में पुलिस ने दो करीबी सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। दोनों को आज अदालत में पेश किया जाएगा। देबराज चक्रवर्ती मामले में जांच ने पकड़ी रफ्तार पश्चिम बंगाल में बिधाननगर नगर परिषद के मेयर और पूर्व विधायक अदिति मुंशी के पति देबराज चक्रवर्ती से जुड़े कथित जबरन वसूली मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। देबराज चक्रवर्ती की गिरफ्तारी के बाद गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अब उनके दो करीबी सहयोगियों को भी हिरासत में लिया है। पुलिस को उम्मीद है कि इनसे पूछताछ में मामले से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। दो करीबी सहयोगी गिरफ्तार बागुइआटी थाना पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस से जुड़े अमर नस्कर और कल्याण मुखर्जी को गिरफ्तार किया है। दोनों को लंबे समय से देबराज चक्रवर्ती और पार्षद समरेश चक्रवर्ती का करीबी माना जाता है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ जबरन वसूली, धोखाधड़ी, जमीन कब्जाने, जान से मारने की धमकी और अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। दोनों आरोपियों को बुधवार को अदालत में पेश किया जाएगा। जमीन कब्जाने और धमकी देने का आरोप शिकायतकर्ता शुभोजीत नस्कर ने आरोप लगाया है कि रघुनाथपुर इलाके में उनकी 33 कट्ठा जमीन है, जिसके विकास के लिए उन्होंने वर्ष 2022 में एक प्रमोटर के साथ समझौता किया था। आरोप है कि इसके बाद अमर नस्कर, अमित चक्रवर्ती और कल्याण मुखर्जी वहां पहुंचे और निर्माण कार्य रोकने के साथ उन्हें धमकाया। शिकायतकर्ता का कहना है कि उनके साथ मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी भी दी गई। पुलिस पर भी लगाए गंभीर आरोप शुभोजीत नस्कर का आरोप है कि घटना के बाद जब वह शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचे तो उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा उनके खिलाफ ही मामला दर्ज कर लिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें इलाके में निर्माण कार्य करने के लिए एक खास समूह से ही निर्माण सामग्री खरीदने का दबाव बनाया गया। नई शिकायत के बाद हुई कार्रवाई शुभोजीत नस्कर ने हाल ही में बागुइआटी थाने में देबराज चक्रवर्ती, समरेश चक्रवर्ती, अमर नस्कर, अमित चक्रवर्ती और कल्याण मुखर्जी के खिलाफ नई लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की और देर रात अमर नस्कर तथा कल्याण मुखर्जी को गिरफ्तार कर लिया। SIT की जांच पर नजर देबराज चक्रवर्ती की गिरफ्तारी के बाद गठित एसआईटी पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर कथित जबरन वसूली, जमीन कब्जाने और अन्य आरोपों से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है। मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
रांची। रांची में कारोबारियों से गैंगस्टर प्रिंस खान के नाम पर रंगदारी मांगने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा घटना बरियातू थाना क्षेत्र की है, जहां रानी बगान निवासी कारोबारी बिजेंद्र सिंह को व्हाट्सएप पर विदेशी नंबर से मैसेज भेजकर एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई। मैसेज भेजने वाले ने खुद को दुबई में मौजूद गैंगस्टर प्रिंस खान बताया और रकम नहीं देने पर कारोबारी व उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी। परिवार और गाड़ी की जानकारी देकर बढ़ाया डर कारोबारी के अनुसार, मंगलवार सुबह आए मैसेज में उनके परिवार के सदस्यों का जिक्र किया गया था। इतना ही नहीं, उनकी कार का नंबर और रंग भी बताया गया, जिससे यह संकेत मिला कि भेजने वाले के पास उनकी निजी जानकारी मौजूद है। धमकी भरे संदेश में लिखा गया कि यदि जल्द "सेटलमेंट" नहीं किया गया तो उनकी "व्हाइट कार रेड हो जाएगी", यानी जानलेवा हमला किया जा सकता है। इस धमकी के बाद कारोबारी और उनका परिवार दहशत में है। बरियातू थाने में FIR, साइबर टीम कर रही जांच घटना के बाद कारोबारी बिजेंद्र सिंह ने बरियातू थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए टेक्निकल सेल और साइबर टीम को भी जांच में लगाया गया है। पुलिस विदेशी नंबर की लोकेशन, मैसेज भेजने वाले की पहचान और उसके नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रही है। प्रिंस खान के नाम पर लगातार मिल रही धमकियां रांची में पिछले कुछ समय से कई कारोबारियों को प्रिंस खान के नाम पर रंगदारी के कॉल और व्हाट्सएप मैसेज मिल चुके हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि धमकियां वास्तव में गैंगस्टर प्रिंस खान की ओर से भेजी जा रही हैं या फिर कोई अन्य अपराधी उसके नाम का इस्तेमाल कर कारोबारियों को निशाना बना रहा है। पुलिस का मानना है कि स्थानीय स्तर पर सक्रिय गुर्गों के जरिए कारोबारियों की निजी जानकारी जुटाकर उन्हें डराने और रंगदारी वसूलने की कोशिश की जा रही है। इस तरह की लगातार घटनाओं से शहर के कारोबारी वर्ग में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता और फलता विधानसभा सीट से पूर्व उम्मीदवार जहांगीर को भारत-नेपाल सीमा के निकट से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, जहांगीर खान पर जबरन वसूली सहित कई गंभीर आरोप हैं और वह लंबे समय से फरार चल रहे थे। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तारी उत्तरी बंगाल के भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र से की गई। हालांकि सुरक्षा कारणों से गिरफ्तारी की सटीक जगह और ऑपरेशन से जुड़ी अन्य जानकारियां सार्वजनिक नहीं की गई हैं। बताया जा रहा है कि दक्षिण 24 परगना जिले के फलता थाने में उनके खिलाफ सात अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज हैं। हाईकोर्ट से राहत खत्म होने के बाद कार्रवाई मामले में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब Calcutta High Court ने 26 मई को जहांगीर खान को मिली अंतरिम सुरक्षा को रद्द कर दिया। इसके बाद पुलिस की कार्रवाई तेज हुई और उनकी तलाश के लिए कई स्थानों पर छापेमारी की गई। अंततः एसटीएफ ने उन्हें सीमा क्षेत्र से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। चुनावी हिंसा को लेकर भी रहे चर्चा में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान फलता सीट पर मतदान के समय हिंसा और नियमों के उल्लंघन के आरोपों के कारण जहांगीर खान सुर्खियों में रहे थे। चुनाव के दौरान उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा तैनात अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से चुनौती दी थी, जिससे मामला काफी चर्चित हुआ था। विवाद बढ़ने के बाद इस सीट पर दोबारा मतदान भी कराया गया था। पार्टी ने बनाई दूरी चुनाव से पहले जहांगीर खान ने अपना नामांकन वापस ले लिया था। हालांकि उस समय यह स्पष्ट नहीं हुआ था कि यह निर्णय पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर लिया गया था या व्यक्तिगत स्तर पर। बाद में All India Trinamool Congress ने स्पष्ट किया था कि यह उनका निजी फैसला था और पार्टी का इससे कोई संबंध नहीं है। पुलिस अब जहांगीर खान से पूछताछ कर रही है और उनके खिलाफ दर्ज मामलों की जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष Jamal Siddiqui को व्हाट्सएप के जरिए कथित तौर पर जान से मारने की धमकी दी गई है। धमकी देने वाले ने उनसे भारी रकम की फिरौती भी मांगी है। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। व्हाट्सएप संदेशों में मांगी गई फिरौती पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, 25 से 27 मई के बीच एक मोबाइल नंबर से कई धमकी भरे संदेश भेजे गए। इन संदेशों में 50 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक की रकम यूपीआई और बैंक ट्रांसफर के जरिए देने की मांग की गई। संदेश भेजने वाले ने कथित तौर पर चेतावनी दी कि यदि रकम नहीं दी गई तो जमाल सिद्दीकी और उनके परिवार को गंभीर नुकसान पहुंचाया जाएगा। बम धमाकों और टारगेट किलिंग का भी जिक्र एफआईआर के मुताबिक, धमकी भरे संदेशों में बम विस्फोट और राजनीतिक नेताओं की टारगेट किलिंग का भी उल्लेख किया गया है। संदेश भेजने वाले ने दावा किया कि कुछ नेताओं द्वारा उसका अपमान किए जाने के कारण वह इस तरह की घटनाओं को अंजाम देगा। पुलिस ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है और मामले की जांच जारी है। कई बड़े नेताओं के नाम भी शामिल धमकी देने वाले व्यक्ति ने अपने संदेशों में Rahul Gandhi, Priyanka Gandhi Vadra, Sachin Pilot और Mallikarjun Kharge समेत कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के नामों का भी उल्लेख किया है। इस वजह से मामले को सुरक्षा एजेंसियां अतिरिक्त संवेदनशीलता के साथ देख रही हैं। पुलिस ने दर्ज किया मामला जमाल सिद्दीकी ने पुलिस को व्हाट्सएप चैट, स्क्रीनशॉट और अन्य डिजिटल सबूत सौंपे हैं। शिकायत के आधार पर नागपुर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ आपराधिक धमकी, जबरन वसूली और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। साइबर फोरेंसिक जांच शुरू पुलिस अब संबंधित मोबाइल नंबर के स्रोत का पता लगाने में जुटी है। इसके लिए कॉल रिकॉर्ड का विश्लेषण, आईपी एड्रेस ट्रैकिंग और साइबर फोरेंसिक जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीमें जांच में लगाई गई हैं और आरोपी की पहचान करने के प्रयास जारी हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।