Bangkok Pub Fire: थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में रविवार देर रात एक पब में भीषण आग लगने से कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई, जबकि 60 से अधिक लोग घायल हो गए। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में पब के मुख्य प्रवेश द्वार से आग की ऊंची लपटें और घना काला धुआं निकलता दिखाई दे रहा है। कई लोग अपनी जान बचाने के लिए बाहर की ओर भागते नजर आए। आधी रात को लगी आग, तुरंत शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, हादसे की सूचना आधी रात के आसपास मिली। इसके बाद दमकल विभाग और बचाव दल मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। करीब आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक बड़ा नुकसान हो चुका था। 27 लोगों की मौत, 60 से अधिक घायल थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि हादसे में 27 लोगों की मौत हुई है, जबकि कई घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मृतकों में 9 पुरुष और 18 महिलाएं शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, कई लोगों के अब भी लापता होने की आशंका है। बिजली के स्विच के पास लगी थी पहली आग प्रधानमंत्री ने बताया कि घटना के समय पब में प्रस्तुति दे रहे एक संगीतकार से उनकी बातचीत हुई। संगीतकार के अनुसार, सबसे पहले बिजली के कट-आउट स्विच के पास आग लगी। इसके कुछ ही देर बाद तेज धमाके हुए और आग तेजी से पूरे पब में फैल गई। धुएं से बचने के लिए कई लोग पब के पिछले हिस्से और शौचालय की ओर भागे, लेकिन वहीं धुएं में फंस गए। सबसे अधिक शव भी उसी हिस्से से बरामद किए गए। आग लगने के कारणों की जांच जारी प्रशासन ने बताया कि आग लगने की वास्तविक वजह का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। फोरेंसिक विशेषज्ञ घटनास्थल से साक्ष्य जुटा रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हादसा तकनीकी खराबी, शॉर्ट सर्किट या किसी अन्य कारण से हुआ। पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे थाईलैंड में इससे पहले भी नाइट क्लब और पब में आग लगने की कई बड़ी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 2022 में देश के पूर्वी हिस्से के एक म्यूजिक पब में आग लगने से 14 लोगों की मौत हुई थी। 1 जनवरी 2009 को बैंकॉक के सांटिका नाइटक्लब में नए साल के जश्न के दौरान लगी भीषण आग में 66 लोगों की जान गई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। उस हादसे की वजह आतिशबाजी बताई गई थी। इस ताजा हादसे के बाद एक बार फिर थाईलैंड में सार्वजनिक मनोरंजन स्थलों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
दौसा: राजस्थान के दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बुधवार तड़के एक भीषण सड़क हादसा हो गया। उत्तराखंड के ऋषिकेश से मध्य प्रदेश के इंदौर जा रही एक निजी बस आगे चल रहे ट्रक से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों वाहनों में आग लग गई। हादसे में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि कई यात्री घायल हो गए। धनावड़ा के पास हुआ हादसा पुलिस के अनुसार, दुर्घटना कोलवा थाना क्षेत्र के धनावड़ा के पास हुई। दौसा के पुलिस अधीक्षक पीयूष दीक्षित ने बताया कि हादसे में पांच लोगों की जलकर मौत हो गई, जबकि दो अन्य की सिर में गंभीर चोट लगने से जान चली गई। उन्होंने बताया कि हंस ट्रेवल्स की बस ऋषिकेश से इंदौर जा रही थी। इसी दौरान दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बस आगे चल रहे ट्रक से टकरा गई। टक्कर के तुरंत बाद दोनों वाहनों में आग लग गई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया हादसे के बाद स्थानीय लोगों और बचाव दल की मदद से यात्रियों को बस से बाहर निकाला गया। घायलों को तत्काल दौसा जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। दमकल और पुलिस ने संभाला मोर्चा घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया और राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। हादसे का वीडियो आया सामने इस भीषण दुर्घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बस और ट्रक आग की लपटों में घिरे दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में तेज रफ्तार या चालक की लापरवाही की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है, वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
हल्दिया: पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले स्थित हल्दिया पेट्रोकेमिकल प्लांट में मंगलवार तड़के भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पाइपलाइन से नेफ्था गैस के रिसाव के बाद आग भड़की, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। हादसे में कम से कम 15 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 6 की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद घायलों को हल्दिया उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि गंभीर रूप से झुलसे लोगों को ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से कोलकाता रेफर किया जा रहा है। तड़के लगी आग, कई घंटे चला राहत अभियान जानकारी के मुताबिक, आग सुबह करीब 4 बजे लगी। स्थानीय लोगों ने पहले काला धुआं उठते देखा, जिसके बाद तेज लपटें पूरे इलाके में फैल गईं। आग की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की 6 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। बाद में राहत एवं बचाव कार्य तेज करने के लिए तीन अतिरिक्त दमकल वाहन भी भेजे गए। दमकल कर्मियों ने आग बुझाने के लिए पानी और फोम का इस्तेमाल किया, लेकिन नेफ्था गैस की मौजूदगी के कारण आग पर काबू पाने में काफी समय लगा। नेफ्था गैस रिसाव से भड़की आग प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह नेफ्था गैस का रिसाव बताई जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्हें घटना से एक रात पहले से ही गैस की तेज गंध महसूस हो रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तड़के तेज धमाके की आवाज सुनाई दी, जिसके तुरंत बाद आग की ऊंची लपटें दिखाई देने लगीं। गैस रिसाव के कारण आग तेजी से आसपास के क्षेत्र में फैल गई। कई घर और दुकानें भी चपेट में आईं आग की चपेट में आने से प्लांट के आसपास स्थित कई मकान और दुकानें भी क्षतिग्रस्त हो गईं। कुछ घर पूरी तरह जलकर राख हो गए। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास के इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। 15 लोग घायल, 6 की हालत गंभीर स्थानीय प्रशासन के अनुसार, हादसे में करीब 15 लोग घायल हुए हैं। इनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। सभी घायलों का इलाज जारी है, जबकि गंभीर रूप से झुलसे छह लोगों को बेहतर उपचार के लिए कोलकाता भेजा गया है। रेल सेवाएं भी प्रभावित आग के चलते हल्दिया-पांसकुरा रेल मार्ग पर रेल परिचालन भी प्रभावित हुआ। सुरक्षा कारणों से कुछ समय के लिए ट्रेनों की आवाजाही बाधित रही। स्थानीय लोगों ने लगाए लापरवाही के आरोप स्थानीय निवासियों का आरोप है कि उन्हें पिछले कुछ समय से प्लांट के आसपास गैस रिसाव की गंध महसूस हो रही थी। उनका कहना है कि इस संबंध में फैक्ट्री प्रबंधन को सूचना भी दी गई थी, लेकिन समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए। फिलहाल दमकल विभाग, जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियां आग लगने के कारणों की जांच कर रही हैं। शुरुआती जांच में नेफ्था गैस रिसाव को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है, हालांकि विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। नोएडा के सेक्टर-119 स्थित अरण्या सोसाइटी में सोमवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक फ्लैट में लगे एयर कंडीशनर (AC) में अचानक विस्फोट होने के बाद भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग की लपटों ने पूरे फ्लैट को अपनी चपेट में ले लिया और इमारत से घना काला धुआं उठने लगा। धुएं का गुबार दूर तक दिखाई देने से आसपास के लोगों में दहशत फैल गई और सोसाइटी में हड़कंप मच गया। दमकल विभाग और पुलिस को सूचित किया घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने तुरंत दमकल विभाग और पुलिस को सूचित किया। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की छह गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने के लिए अभियान शुरू किया। दमकल कर्मियों ने तेजी से राहत और बचाव कार्य शुरू करते हुए आग को आसपास के फ्लैटों तक फैलने से रोकने का प्रयास किया। यह घटना सेक्टर-113 थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली अरण्या सोसाइटी में हुई। शुरुआती जांच के अनुसार, फ्लैट में लगी आग की वजह एसी में हुआ विस्फोट बताया जा रहा है। हालांकि, आग लगने के सही कारणों की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी। आग की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि फ्लैट से उठती ऊंची लपटें और घना काला धुआं काफी दूर से दिखाई दे रहा था। एहतियात के तौर पर सोसाइटी के अन्य निवासियों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई, जबकि कई लोग अपने फ्लैटों से बाहर निकल आए। राहत की बात यह हैं राहत की बात यह है कि शुरुआती जानकारी के अनुसार इस हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है। हालांकि, आग से फ्लैट को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। दमकल विभाग के अधिकारी आग पर पूरी तरह काबू पाने और उसके कारणों की जांच में जुटे हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे गर्मियों के मौसम में एयर कंडीशनर और अन्य विद्युत उपकरणों की नियमित जांच कराएं तथा किसी भी तरह की तकनीकी खराबी को नजरअंदाज न करें, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।
Lucknow Fire Tragedy: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरानिया इलाके में सोमवार को हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। एक कोचिंग सेंटर में लगी आग में कई छात्रों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। इस हृदयविदारक घटना पर अभिनेता सोनू सूद ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि क्लासरूम सपनों को संवारने की जगह होते हैं, न कि बच्चों की जिंदगी का अंतिम पड़ाव। लखनऊ अग्निकांड पर टूटा सोनू सूद का दिल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए सोनू सूद ने लिखा कि यह हादसा बेहद दर्दनाक है और इससे उनका दिल टूट गया है। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों के सपने अभी उड़ान भरने वाले थे, उनकी यात्रा शुरू होने से पहले ही समाप्त हो गई। सोनू सूद ने लिखा कि ये बच्चे भविष्य के अधिकारी, कलाकार, नेता और समाज में बदलाव लाने वाले लोग बन सकते थे, लेकिन एक दुखद हादसे ने उनसे उनका भविष्य छीन लिया। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनके दर्द को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता और उनकी प्रार्थनाएं सभी पीड़ित परिवारों के साथ हैं। सुरक्षा मानकों पर उठाए सवाल अभिनेता ने अपने संदेश में यह भी कहा कि समाज केवल आंसू बहाकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता। उन्होंने कोचिंग संस्थानों और शैक्षणिक भवनों में मजबूत सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि ऐसी त्रासदी दोबारा नहीं होनी चाहिए। आग लगने के बाद मची अफरातफरी सोमवार दोपहर अलीगंज के पुरानिया क्षेत्र में स्थित तीन मंजिला इमारत में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग की लपटें ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गईं और कोचिंग सेंटर में मौजूद छात्र-छात्राओं के बीच अफरातफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की आठ गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। फायर कर्मियों ने इमारत की दीवार तोड़कर 20 से अधिक छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला। जान बचाने के लिए खिड़कियों से कूदे छात्र प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई छात्र धुएं और आग से बचने के लिए ऊंची मंजिलों से कूदने को मजबूर हो गए। एक युवक नीचे लगी लोहे की रेलिंग पर गिर गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के दौरान कई परिवार अपने बच्चों की तलाश में मौके पर रोते-बिलखते दिखाई दिए। इस हादसे ने एक बार फिर कोचिंग संस्थानों, हॉस्टलों और अन्य शैक्षणिक भवनों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लखनऊ: राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। घटना के बाद सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले की गहन जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का भी गठन किया गया है। मुख्यमंत्री ने बुलाई हाईलेवल बैठक, SIT के गठन के निर्देश किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में घायलों का हालचाल जानने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकारी आवास, 5 कालीदास मार्ग पर उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव (पर्यटन, धर्मार्थ एवं संस्कृति विभाग) अमृत अभिजात और अपर पुलिस महानिदेशक (लखनऊ जोन) प्रवीण कुमार के नेतृत्व में दो सदस्यीय एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए। एसआईटी पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। चार आरोपी गिरफ्तार अग्निकांड मामले में पुलिस ने अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं— रामकृष्ण उपाध्याय (निवासी अलीगंज) वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (निवासी बड़ा दुर्गा मंदिर, सीतापुर रोड, लखनऊ) तूशॉक कृष्णा जायसवाल (निवासी बालागंज, लखनऊ) सुरेश कुमार साहू (निवासी मड़ियांव, लखनऊ) पुलिस इन सभी से पूछताछ कर आग लगने के कारणों और संभावित लापरवाही के पहलुओं की जांच कर रही है। चार अधिकारियों पर गिरी गाज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इनमें शामिल हैं— गौरव कुमार, एक्सईएन कलेक्शन, बिजली विभाग, जानकीपुरम कमलेन्द्र कुमार सिंह, प्रभारी FSSO, फायर विभाग, इंदिरा नगर अनिल कुमार, सहायक अभियंता (AE), लखनऊ विकास प्राधिकरण प्रमोद पांडे, जूनियर इंजीनियर (JE), लखनऊ विकास प्राधिकरण सरकार का कहना है कि प्रथम दृष्टया लापरवाही के संकेत मिलने पर यह कार्रवाई की गई है। अलीगढ़ में थे मुख्यमंत्री, तुरंत रद्द किए कार्यक्रम हादसे के समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ दौरे पर थे और एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने मंच से ही अपने शेष कार्यक्रम रद्द करने की घोषणा की और तत्काल लखनऊ रवाना हो गए। इससे पहले उन्होंने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए थे। घटनास्थल और अस्पताल पहुंचे मुख्यमंत्री लखनऊ पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री सबसे पहले अलीगंज स्थित घटनास्थल पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्यों का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज पहुंचकर घायलों से मुलाकात की और डॉक्टरों को बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से घायलों की स्थिति की जानकारी ली और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। मृतकों के परिजनों को 5 लाख, घायलों को 50 हजार की सहायता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अग्निकांड में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं, घायलों को 50-50 हजार रुपये की वित्तीय मदद देने का भी ऐलान किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जाएगी।
नई दिल्ली: दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के तुगलकाबाद इलाके में शुक्रवार तड़के एक बहुमंजिला इमारत में भीषण आग लगने से तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग तथा दमकल कर्मी राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए। दिल्ली फायर सर्विस (DFS) के अनुसार, आग लगने की सूचना रात करीब 2:10 बजे मिली, जिसके बाद दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। राहत अभियान के दौरान पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। आग पर काबू पाने और फंसे लोगों को बचाने के लिए घंटों तक अभियान चलाया गया। स्थानीय लोगों ने दिखाई बहादुरी प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग लगने के बाद इमारत के निचले हिस्से में खड़े वाहनों में विस्फोट होने लगे, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। ऐसे में स्थानीय लोगों ने दमकल कर्मियों के पहुंचने से पहले ही बचाव कार्य शुरू कर दिया। एक स्थानीय महिला ने बताया कि इमारत में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए पीछे की ओर से साड़ियों को बांधकर अस्थायी सहारा बनाया गया। वहीं, कुछ लोगों तक पहुंचने के लिए सुरक्षा ग्रिल काटनी पड़ी, जिसके बाद उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया। कई लोग घायल, जांच शुरू पुलिस के अनुसार, हादसे में तीन लोगों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मृतकों में चौथी मंजिल पर रहने वाले एक व्यक्ति की भी पहचान की गई है। फिलहाल आग पर काबू पा लिया गया है और पुलिस तथा दमकल विभाग आग लगने के कारणों की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे की वजह स्पष्ट हो सकेगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली के मालवीय नगर में बुधवार सुबह फ्लरिश स्टे नाम के होटल में आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में ज्यादातर विदेशी नागरिक हैं। जो सेंट्रल एशिया और अफ्रीकी देशों से हैं। कितने विदेशी नागरिक मारे गए हैं, फिलहाल इसकी सटीक जानकारी सामने नहीं आई है। सुबह 8 बजे लगी आग दिल्ली फायर सर्विस और स्थानीयों लोगों के मुताबिक, मालवीय नगर में मौजूद इस होटल के रेस्टोरेंट में सुबह 8.50 बजे आग लगी। आग ऊपरी मंजिलों पर बने होटल के कमरों और बेसमेंट तक पहुंच गई। तीसरी-चौथी मंजिल से कूदे लोग घटना के वीडियो में कुछ लोग जान बचाने के लिए जलती हुई इमारत की तीसरी-चौथी मंजिल से कूदते नजर आ रहे हैं। इन्हें बचाने के लिए स्थानीय लोगों ने जमीन पर गद्दे भी बिछाए थे। 40 लोग बचाये गये कुल 40 लोगों का रेस्क्यू किया गया। कई लोगों की हालत गंभीर है। वहीं, बेसमेंट से भी 6 से ज्यादा लोगों को निकाला गया। दिल्ली के इस होटल में आग लगने की वजह का अब तक पता नहीं चल पाया है। पिछले 6 महीनों में दिल्ली में आग की अलग-अलग घटनाओं में 66 लोगों की मौत हो चुकी है।
ठाणे रेलवे स्टेशन के पास स्थित गामदेवी मार्केट कॉम्प्लेक्स में गुरुवार तड़के भीषण आग लगने से दो लोगों की मौत हो गई। हादसे में एक फायरमैन और एक सिक्योरिटी गार्ड ने जान गंवा दी, जबकि दो अन्य दमकलकर्मी घायल हो गए हैं। आग इतनी तेजी से फैली कि पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और कई दुकानों को भारी नुकसान पहुंचा। सुबह 3:45 बजे लगी आग अधिकारियों के मुताबिक, आग गुरुवार सुबह करीब 3:45 बजे गामदेवी मार्केट कॉम्प्लेक्स में लगी। आग लगते ही दमकल विभाग ने “ब्रिगेड कॉल” घोषित कर दी, जिसका मतलब है कि हालात पर काबू पाने के लिए विभाग के अधिकतम संसाधनों को मौके पर भेजा गया। मार्केट कॉम्प्लेक्स में कपड़ों की दुकानों के अलावा सब्जी और फल मंडी भी मौजूद थी। आग की ऊंची लपटें और घना धुआं दूर-दूर तक दिखाई दे रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ ही मिनटों में आग ने बाजार के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में दो की मौत, दो घायल प्रशांत रोडे ने बताया कि हादसे में एक फायरमैन और एक सुरक्षा गार्ड की मौत हुई है। वहीं, क्षेत्रीय आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ (RDMC) के प्रमुख यासीन तड़वी के अनुसार, दो अन्य दमकलकर्मी घायल हुए हैं और उनका इलाज जारी है। अधिकारियों ने बताया कि आग “मेजर फायर” श्रेणी की थी, जिसने पूरे बाजार क्षेत्र को प्रभावित किया। कपड़ों की दुकानों से तेजी से फैली आग दमकल विभाग को आग बुझाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बाजार की कई दुकानों में बड़ी मात्रा में कपड़े और अन्य ज्वलनशील सामान रखा हुआ था, जिसकी वजह से आग तेजी से फैलती चली गई। आग की वजह से कई दुकानों का सामान जलकर खाक हो गया। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। राहत और बचाव अभियान जारी दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाने की कोशिश की गई। पुलिस और प्रशासन ने इलाके को घेरकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
नंदिनी लेआउट में देर रात मची अफरा-तफरी कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के नंदिनी लेआउट इलाके में रविवार देर रात भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। आग इतनी तेजी से फैली कि आसपास के लोग दहशत में आ गए। यह आग राजकुमार मेमोरियल के पास स्थित एक LED बैनर गोदाम में लगी, जो देखते ही देखते पास की इमारतों तक पहुंच गई। महिलाओं के PG तक पहुंची आग, मचा कोहराम गोदाम के बगल में स्थित चार मंजिला महिला PG भी आग की चपेट में आ गया। इमारत में रह रही करीब 50 युवतियां अचानक धुएं और लपटों से घिर गईं। बाहर निकलने का रास्ता बंद होता देख कई लड़कियों ने अपनी जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों से छलांग लगा दी। मौके पर मौजूद लोगों और राहतकर्मियों ने तुरंत मदद शुरू की। कई युवतियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। दमकल विभाग ने समय रहते संभाला मोर्चा घटना की सूचना मिलते ही दमकल और आपदा राहत की कई टीमें मौके पर पहुंचीं। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई। सभी महिलाओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है। कई वाहन और आसपास की संपत्तियां क्षतिग्रस्त आग की लपटों ने गोदाम के बाहर खड़े एक मोटरसाइकिल और एक पिकअप वाहन को भी अपनी चपेट में ले लिया। इसके अलावा आसपास के कई घरों को भी नुकसान पहुंचा। तेज गर्मी के कारण कुछ मकानों की दीवारों में दरारें आ गईं, जबकि खिड़कियों के शीशे टूट गए। शॉर्ट सर्किट की आशंका, जांच शुरू पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने की संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि, अधिकारी हर पहलू से मामले की पड़ताल कर रहे हैं। इस हादसे ने एक बार फिर व्यावसायिक इमारतों और रिहायशी परिसरों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।