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India-UK trade officials discuss bilateral economic cooperation as both countries reaffirm that their strategic partnership will remain strong despite possible political changes in the United Kingdom.
ब्रिटेन में नेतृत्व बदलेगा, लेकिन भारत से रिश्ते नहीं; ट्रेड कमिश्नर हरजिंदर कंग का बड़ा भरोसा

India-UK Relations: ब्रिटेन में संभावित राजनीतिक बदलाव के बावजूद भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के संबंध मजबूत बने रहेंगे। दक्षिण एशिया के लिए ब्रिटेन के ट्रेड कमिश्नर और भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के मुख्य वार्ताकार हरजिंदर कंग ने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी किसी एक सरकार या प्रधानमंत्री पर निर्भर नहीं है, बल्कि साझा इतिहास, लोकतांत्रिक मूल्यों और आर्थिक हितों पर आधारित है। नेतृत्व बदलने से नहीं बदलेगा भारत-यूके संबंध न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में हरजिंदर कंग ने कहा कि भारत और ब्रिटेन के रिश्ते केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध रहे हैं। इसके अलावा लोकतांत्रिक व्यवस्था, कानूनी ढांचा, अंग्रेजी भाषा और ब्रिटेन में रह रहे बड़े भारतीय समुदाय ने इन संबंधों को और मजबूत बनाया है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से ब्रिटेन में नेतृत्व परिवर्तन होने पर भी भारत के साथ रणनीतिक और व्यापारिक साझेदारी प्रभावित होने की संभावना नहीं है। एंडी बर्नहैम को बताया भारत का समर्थक हरजिंदर कंग ने कहा कि ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहैम, जिन्हें भविष्य में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद का संभावित दावेदार माना जा रहा है, भारत के साथ मजबूत संबंधों के पक्षधर हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में एंडी बर्नहैम के साथ उनकी बातचीत हुई थी। बर्नहैम भारत का दौरा कर व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने के इच्छुक थे। उनका लक्ष्य ग्रेटर मैनचेस्टर और भारत के बीच आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देना है। भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था पर ब्रिटेन की नजर ट्रेड कमिश्नर ने कहा कि ब्रिटेन के प्रमुख राजनीतिक दल भारत को भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक शक्तियों में से एक मानते हैं। उनका कहना था कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। ऐसे में ब्रिटेन भारत के साथ अपने व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। उन्होंने कहा कि चाहे कीर स्टार्मर हों या ऋषि सुनक, सभी नेताओं की सोच भारत के साथ दीर्घकालिक साझेदारी को लेकर सकारात्मक रही है। वर्षों की बातचीत के बाद हुआ FTA हरजिंदर कंग ने स्पष्ट किया कि भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता (FTA) किसी वैश्विक व्यापारिक तनाव या अमेरिकी टैरिफ के कारण नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यह समझौता कई वर्षों तक चली विस्तृत बातचीत और आपसी सहमति का परिणाम है। उनके मुताबिक, जब दोनों देशों को लगा कि अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, तब इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया। आइसक्रीम खाते हुए बनी अंतिम सहमति कंग ने बातचीत का एक दिलचस्प किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि भारत के केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और उस समय के ब्रिटिश ट्रेड सेक्रेटरी जोनाथन रेनॉल्ड्स ने लंदन के एक पार्क में टहलते हुए और आइसक्रीम खाते-खाते अंतिम मुद्दों पर सहमति बनाई। इसके बाद दोनों नेताओं ने हाथ मिलाकर समझौते को अंतिम रूप दिया। CETA लागू होने से दोनों देशों को होंगे बड़े फायदे भारत और ब्रिटेन के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) 15 जुलाई से लागू हो चुका है। इस समझौते पर जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिटेन यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
High-protein soya stuffed paratha served with yogurt and salad for a healthy weight loss meal.
Weight Loss Diet: प्रोटीन की कमी होगी पूरी, डाइट में शामिल करें हाई-प्रोटीन सोया पराठा, जानें कितनी कैलोरी और हफ्ते में कितनी बार खाएं

High Protein Soya Paratha Recipe: अगर आप वजन घटाने के दौरान ऐसा नाश्ता या मील ढूंढ रहे हैं जो लंबे समय तक पेट भरा रखे और प्रोटीन की जरूरत पूरी करने में मदद करे, तो हाई-प्रोटीन सोया पराठा एक अच्छा विकल्प हो सकता है। सही मात्रा और संतुलित डाइट के साथ इसे वेट लॉस प्लान में शामिल किया जा सकता है। वेट लॉस डाइट में क्यों शामिल करें हाई-प्रोटीन सोया पराठा? वजन घटाने के दौरान अक्सर लोग स्वाद और पोषण के बीच संतुलन नहीं बना पाते। ऐसे में सोया पराठा एक हेल्दी विकल्प बन सकता है। सोया प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत है, जबकि गेहूं का आटा जटिल कार्बोहाइड्रेट (Complex Carbohydrates) प्रदान करता है। यह कॉम्बिनेशन लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद कर सकता है, जिससे बार-बार भूख लगने और अनहेल्दी स्नैकिंग की संभावना कम हो सकती है। आवश्यक सामग्री 1 कप सोया चंक्स (उबले और दरदरे पिसे हुए) 1 कप गेहूं या मल्टीग्रेन आटा 1 छोटा प्याज (बारीक कटा) 1–2 हरी मिर्च 1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट ½ छोटा चम्मच हल्दी ½ छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर ½ छोटा चम्मच गरम मसाला ½ छोटा चम्मच अजवाइन हरा धनिया नमक स्वादानुसार 1–2 छोटा चम्मच तेल या घी (सेकने के लिए) बनाने की विधि सबसे पहले सोया चंक्स को 10 मिनट तक गर्म पानी में भिगोकर उसका अतिरिक्त पानी निचोड़ लें और दरदरा पीस लें। पैन में थोड़ा तेल गर्म करके अजवाइन, अदरक-लहसुन, हरी मिर्च और प्याज भूनें। अब इसमें सोया और सभी मसाले डालकर 3–4 मिनट तक पकाएं और आखिर में हरा धनिया मिलाएं। गेहूं के आटे का नरम आटा गूंथें। लोई बनाकर उसमें तैयार स्टफिंग भरें और हल्के हाथ से पराठा बेल लें। नॉन-स्टिक तवे पर कम तेल या घी में दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेक लें। प्रति पराठा अनुमानित पोषण कैलोरी: 220–260 kcal प्रोटीन: 18–22 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 24–28 ग्राम फैट: 5–7 ग्राम फाइबर: 6–8 ग्राम वजन घटाने में कैसे मदद कर सकता है? हाई प्रोटीन होने के कारण लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद मिल सकती है। फाइबर अनहेल्दी स्नैकिंग और ओवरईटिंग को कम करने में सहायक हो सकता है। प्रोटीन मांसपेशियों को बनाए रखने में मदद करता है, खासकर जब आप कैलोरी नियंत्रित डाइट ले रहे हों। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के साथ यह वजन प्रबंधन में उपयोगी विकल्प बन सकता है। डाइट में कब और कितनी बार खाएं? सबसे अच्छा समय: नाश्ता या दोपहर का भोजन हफ्ते में: 2–4 दिन तक शामिल किया जा सकता है। बेहतर संतुलन के लिए इसे दही, सलाद या हरी चटनी के साथ खाएं। ध्यान दें: केवल एक रेसिपी खाने से वजन कम नहीं होता। बेहतर परिणाम के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और स्वस्थ जीवनशैली जरूरी है। यदि आपको थायरॉयड, किडनी या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो अधिक प्रोटीन वाली डाइट शुरू करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लें।  

anmol जुलाई 15, 2026 0
Healthy high-protein dal tikki served with probiotic yogurt raita for balanced weight loss meal.
वजन घटाने की सोच रहे हैं? सिर्फ 1 महीने तक ट्राई करें ये हेल्दी रेसिपी, फिटनेस जर्नी होगी आसान

Weight Loss Recipe : अगर आप वजन कम करना चाहते हैं लेकिन बार-बार भूख लगने, कमजोरी या सख्त डाइटिंग से बचना चाहते हैं, तो अपनी डेली डाइट में हाई-प्रोटीन और फाइबर से भरपूर दाल टिक्की शामिल कर सकते हैं। मूंग दाल, चना दाल और ताजी सब्जियों से तैयार यह हेल्दी रेसिपी लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद कर सकती है, जिससे अनहेल्दी स्नैकिंग कम हो सकती है। हालांकि, सिर्फ एक डिश खाने से एक महीने में वजन कम होने की गारंटी नहीं दी जा सकती। वजन घटाने के लिए संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त नींद भी जरूरी है। क्यों फायदेमंद है यह हाई-प्रोटीन टिक्की? मूंग दाल और चना दाल प्रोटीन और फाइबर के अच्छे स्रोत माने जाते हैं। इसमें ओट्स, सब्जियां और थोड़ी मात्रा में पनीर मिलाने से इसकी न्यूट्रिशन वैल्यू और बढ़ जाती है। यह कॉम्बिनेशन लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद कर सकता है और कैलोरी कंट्रोल करने में भी सहायक हो सकता है। दाल टिक्की बनाने के लिए सामग्री 1 कप भीगी हुई मूंग दाल ½ कप भीगी हुई चना दाल 2 बड़े चम्मच ओट्स 2 बड़े चम्मच भुनी मूंगफली 1 छोटा प्याज (बारीक कटा) ½ शिमला मिर्च (बारीक कटी) 1 हरी मिर्च 1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट 2–3 बड़े चम्मच कद्दूकस किया पनीर (वैकल्पिक) हरा धनिया हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर, भुना जीरा, काली मिर्च, चाट मसाला और नमक 1 छोटा चम्मच तेल या घी सफेद तिल ऐसे बनाएं भीगी हुई मूंग और चना दाल को ओट्स और मूंगफली के साथ बिना पानी डाले पीस लें। इसमें सभी सब्जियां, मसाले और पनीर मिलाकर मिश्रण तैयार करें। छोटी-छोटी टिक्कियां बनाएं और हल्का तेल लगाकर नॉन-स्टिक पैन में दोनों तरफ से सुनहरा होने तक धीमी आंच पर सेक लें। प्रोबायोटिक रायता 1 कप दही में कद्दूकस किया हुआ खीरा और गाजर मिलाएं। स्वादानुसार नमक डालें। जीरा, हींग, करी पत्ता और हरी मिर्च का हल्का तड़का लगाकर रायते में मिला दें। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण (2 टिक्की + 1 कटोरी रायता) कैलोरी: 300–350 kcal प्रोटीन: 18–22 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 28–35 ग्राम फैट: 10–14 ग्राम फाइबर: 8–10 ग्राम संभावित फायदे हाई प्रोटीन और फाइबर से भरपूर लंबे समय तक पेट भरा रखने में मददगार अनहेल्दी स्नैकिंग कम करने में सहायक पाचन के लिए प्रोबायोटिक दही का लाभ वजन प्रबंधन वाली डाइट में शामिल किया जा सकता है ध्यान दें: किसी भी एक रेसिपी से तेजी से वजन कम होने की गारंटी नहीं होती। बेहतर परिणाम के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। यदि आपको कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो डाइट में बदलाव से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लें।  

anmol जुलाई 13, 2026 0
Chia seeds and sabja seeds in bowls highlighting their health benefits for digestion and weight loss
चिया सीड्स या सब्जा के बीज: एसिडिटी, कब्ज और वजन घटाने के लिए कौन है बेहतर?

आजकल हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने वाले लोगों के बीच चिया सीड्स और सब्जा के बीज (तुलसी के बीज) काफी लोकप्रिय हो चुके हैं। दोनों ही फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, लेकिन इनके फायदे और उपयोग अलग-अलग हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि एसिडिटी, कब्ज, वजन घटाने या फिटनेस के लिए आखिर कौन-सा विकल्प ज्यादा बेहतर है? चिया और सब्जा में क्या है अंतर? चिया सीड्स चिया सीड्स Salvia Hispanica पौधे से प्राप्त होते हैं और इनमें भरपूर मात्रा में: ओमेगा-3 फैटी एसिड प्रोटीन कैल्शियम मैग्नीशियम फाइबर पाया जाता है। ये शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देने और मांसपेशियों व हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। सब्जा सीड्स सब्जा या तुलसी के बीज पारंपरिक भारतीय आहार का हिस्सा रहे हैं। इनमें: भरपूर फाइबर एंटीऑक्सीडेंट कम कैलोरी पाई जाती है। इन्हें विशेष रूप से शरीर को ठंडक पहुंचाने और पाचन तंत्र को बेहतर बनाने के लिए जाना जाता है। एसिडिटी और कब्ज में कौन ज्यादा फायदेमंद? दोनों बीज पानी में भिगोने पर जेल जैसी परत बना लेते हैं, जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करती है। सब्जा सीड्स एसिडिटी, पेट की जलन, गैस और कब्ज से राहत दिलाने के लिए अधिक प्रभावी माने जाते हैं। चिया सीड्स गट हेल्थ सुधारने और पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। अगर आपकी मुख्य समस्या एसिडिटी या कब्ज है, तो सब्जा के बीज बेहतर विकल्प हो सकते हैं। वजन घटाने में कौन मददगार? दोनों ही बीज फाइबर से भरपूर होते हैं, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और बार-बार भूख नहीं लगती। चिया सीड्स में प्रोटीन और हेल्दी फैट अधिक होते हैं, जो लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखते हैं। सब्जा सीड्स कम कैलोरी वाले होते हैं, इसलिए कैलोरी कंट्रोल करने वालों के लिए उपयोगी हैं। वजन घटाने के लिए दोनों अच्छे हैं, लेकिन कम कैलोरी डाइट में सब्जा और हाई-प्रोटीन डाइट में चिया अधिक फायदेमंद हो सकता है। शरीर को ठंडक पहुंचाने में कौन आगे? गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के लिए सब्जा के बीज लंबे समय से इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। शरबत, नींबू पानी और फालूदा में सब्जा का उपयोग आम है। शरीर की गर्मी कम करने और हाइड्रेशन बनाए रखने में सब्जा अधिक प्रभावी माना जाता है। फिटनेस और जिम करने वालों के लिए क्या बेहतर? अगर आपका लक्ष्य फिटनेस, मसल रिकवरी और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखना है, तो: चिया सीड्स में मौजूद प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड अधिक लाभदायक हैं। नियमित एक्सरसाइज करने वालों के लिए चिया बेहतर विकल्प माना जाता है। सेवन का सही तरीका सब्जा सीड्स 5 से 10 मिनट पानी में भिगोएं। शरबत, दूध, फालूदा या नींबू पानी में मिलाकर सेवन करें। चिया सीड्स कम से कम 30 मिनट पानी में भिगोएं। स्मूदी, दही, ओट्स, सलाद या हेल्दी ड्रिंक्स में मिलाएं।

surbhi जून 5, 2026 0
10 desi superfoods including chicken, paneer, eggs, dals, and fish for building muscles and strength naturally.
10 Desi Superfoods to Build Muscles: देसी खाने से बढ़ाएं मसल्स और ताकत

  अगर आप मसल्स बनाना चाहते हैं तो महंगे सप्लीमेंट और प्रोटीन पाउडर ही जरूरी नहीं हैं। आपके किचन में मौजूद कई देसी फूड्स ही शरीर को भरपूर प्रोटीन, ताकत और रिकवरी दे सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे 10 देसी सुपरफूड्स, जो मसल्स ग्रोथ और रिकवरी के लिए बेहद फायदेमंद हैं।   1.  Chicken Breast चिकन ब्रेस्ट को बॉडीबिल्डिंग में सबसे बेहतरीन प्रोटीन स्रोत माना जाता है। इसमें लीन प्रोटीन और जरूरी अमीनो एसिड होते हैं, जो वर्कआउट के बाद मसल्स रिपेयर और ग्रोथ में मदद करते हैं। 2.  Paneer Tikka पनीर शाकाहारी लोगों के लिए शानदार प्रोटीन सोर्स है। यह मसल्स डेवलपमेंट के साथ कैल्शियम भी देता है, जिससे हड्डियां मजबूत रहती हैं। 3.  Egg Bhurji अंडे को “complete protein” माना जाता है। इसमें मौजूद विटामिन, मिनरल और हेल्दी फैट मसल्स बनाने और शरीर की एनर्जी बढ़ाने में मदद करते हैं। 4.  Moong Dal Khichdi मूंग दाल प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होती है। यह मसल्स रिकवरी, पाचन और एनर्जी लेवल को बेहतर बनाने में मदद करती है। 5.  Tandoori Fish मछली में उच्च गुणवत्ता का प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है, जो मसल्स को मजबूत बनाता है और वर्कआउट के बाद शरीर की रिकवरी तेज करता है। 6.  Quinoa Pulao क्विनोआ एक complete plant protein है। इसमें प्रोटीन, फाइबर और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स होते हैं, जो वर्कआउट के दौरान ऊर्जा बनाए रखते हैं। 7.  Chickpea Curry (चना मसाला) चना प्रोटीन और फाइबर का बेहतरीन स्रोत है। यह मसल्स ग्रोथ, पाचन और लंबे समय तक ऊर्जा देने में मदद करता है। 8.  Soya Chunks Stir-Fry सोया चंक्स शाकाहारी लोगों के लिए सबसे ज्यादा प्रोटीन वाले फूड्स में से एक हैं। यह मसल्स रिपेयर और बॉडी स्ट्रेंथ बढ़ाने में मदद करता है। 9.  Greek Yogurt ग्रीक योगर्ट में सामान्य दही से ज्यादा प्रोटीन होता है। यह वर्कआउट के बाद मसल्स रिकवरी और गट हेल्थ के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। 10. Masoor Dal Soup मसूर दाल में प्रोटीन और आयरन भरपूर होता है। यह मसल्स ग्रोथ के साथ शरीर में ऑक्सीजन फ्लो बेहतर करने में भी मदद करता है।  

surbhi मार्च 16, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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