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Crispy Andhra Dibba Rotti served with coconut chutney and sambar on a traditional plate.
10 मिनट में तैयार करें आंध्र प्रदेश की पारंपरिक डिब्बा रोटी, इडली-डोसा बैटर से बनती है बाहर से कुरकुरी और अंदर से रुई जैसी मुलायम

गिलास वाले अनोखे पारंपरिक तरीके से बनने वाली यह साउथ इंडियन डिश नाश्ते, ब्रंच, शाम के स्नैक या हल्के डिनर के लिए बेहतरीन विकल्प मानी जाती है। अगर आप रोज-रोज इडली, डोसा या उत्तपम खाकर कुछ नया ट्राई करना चाहते हैं, तो आंध्र प्रदेश की पारंपरिक डिब्बा रोटी आपकी किचन के लिए एक शानदार रेसिपी हो सकती है। यह मोटी साउथ इंडियन रोटी बाहर से सुनहरी और कुरकुरी होती है, जबकि अंदर से रुई जैसी मुलायम और स्पंजी रहती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बनाने के लिए आटा गूंथने की जरूरत नहीं होती, बल्कि इडली-डोसा के बैटर से ही आसानी से तैयार किया जाता है। डिब्बा रोटी को खास बनाने वाला इसका पारंपरिक 'गिलास वाला तरीका' है। कड़ाही में मोटी परत में बैटर डालने के बाद उसके बीच में पानी से भरा स्टील या पीतल का गिलास रखा जाता है। इससे रोटी अंदर तक समान रूप से पकती है और बीच में आकर्षक रिंग शेप बन जाती है। धीमी आंच पर पकाने से इसकी बाहरी परत बेहद क्रिस्पी और अंदर का हिस्सा नरम व फ्लफी बनता है। बनाने में कितना समय लगता है? तैयारी का समय: 10 मिनट पकाने का समय: 12–15 मिनट कुल समय: लगभग 25 मिनट आवश्यक सामग्री 2 कप इडली/डोसा बैटर 3–4 बड़े चम्मच तेल 1 छोटा चम्मच जीरा पानी से भरा छोटा स्टील/पीतल का गिलास बनाने की आसान विधि भारी तले की कड़ाही में तेल गर्म करें और धीमी आंच पर मोटी परत में बैटर डालें। बीच में पानी से भरा गिलास रखें और ऊपर से जीरा छिड़क दें। ढक्कन लगाकर 8–10 मिनट पकाएं। जब रोटी ऊपर से सेट हो जाए, तो गिलास निकालकर दूसरी तरफ 2–3 मिनट सेक लें। तैयार डिब्बा रोटी को गरमागरम परोसें। किसके साथ परोसें? नारियल की चटनी टमाटर की चटनी मूंगफली की चटनी सांभर आलू मसाला वेज कुरमा मसालेदार दही ज्यादातर कब खाई जाती है? सुबह का नाश्ता (Breakfast) ब्रंच शाम का स्नैक हल्का लंच हल्का डिनर क्यों करें ट्राई? बिना आटा गूंथे बनने वाली आसान रेसिपी बाहर से सुपर क्रिस्पी, अंदर से मुलायम टेक्सचर इडली-डोसा बैटर का नया और स्वादिष्ट इस्तेमाल परिवार के लिए झटपट बनने वाला साउथ इंडियन विकल्प

anmol जुलाई 17, 2026 0
Homemade raw mango murabba in a glass jar served with fresh raw mangoes and Indian spices
घर पर बनाएं बाजार जैसा आम का मुरब्बा, सिर्फ 30 मिनट में तैयार होगी खट्टा-मीठी स्वादिष्ट रेसिपी

Homemade Mango Murabba Recipe: कच्चे आम, चीनी और देसी मसालों से तैयार यह रसीला आम का मुरब्बा स्वाद के साथ पोषण का भी बेहतरीन मेल है। सिर्फ 30 मिनट में तैयार होने वाली यह रेसिपी पराठे, पूरी और बच्चों के टिफिन के लिए शानदार विकल्प है। घर पर बनाएं बाजार जैसा रसीला आम का मुरब्बा अगर आपको खट्टा-मीठा स्वाद पसंद है और घर में बनी पारंपरिक रेसिपियां खाना अच्छा लगता है, तो इस बार आम का रसीला मुरब्बा जरूर ट्राई करें। कच्चे आम से तैयार होने वाला यह मुरब्बा स्वाद में लाजवाब होने के साथ लंबे समय तक स्टोर भी किया जा सकता है। इसमें इलायची, दालचीनी और केसर जैसे मसाले स्वाद और खुशबू को कई गुना बढ़ा देते हैं। यह रेसिपी बनाने में आसान है और घर में मौजूद सामान्य सामग्री से लगभग 30 मिनट में तैयार हो जाती है। आम का मुरब्बा बनाने के लिए सामग्री  2–3 मध्यम आकार के कच्चे आम (कद्दूकस किए हुए) 1 छोटा चम्मच देसी घी 1½ कप चीनी ¼ कप पानी ½ छोटा चम्मच इलायची पाउडर ¼ छोटा चम्मच काला नमक ¼ छोटा चम्मच दालचीनी पाउडर ¼ छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर 8–10 केसर के धागे (वैकल्पिक) ऐसे बनाएं स्वादिष्ट आम का मुरब्बा सबसे पहले कच्चे आम को अच्छी तरह धोकर छील लें और कद्दूकस कर लें। अब एक भारी तले की कड़ाही में थोड़ा सा घी गर्म करें और उसमें कद्दूकस किया हुआ आम डालकर 3–4 मिनट तक हल्का पकाएं। ध्यान रखें कि आम पूरी तरह गलने न पाए। इसके बाद इसमें चीनी और थोड़ा पानी डालकर धीमी आंच पर पकाएं। चीनी पिघलने के बाद मिश्रण धीरे-धीरे गाढ़ी चाशनी में बदलने लगेगा। जब चाशनी में हल्के बुलबुले बनने लगें, तब इसमें काला नमक, इलायची पाउडर, दालचीनी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और केसर डालकर अच्छी तरह मिला लें। लगातार चलाते हुए 5–7 मिनट और पकाएं। जब मुरब्बा चमकदार और गाढ़ा दिखाई देने लगे, तब गैस बंद कर दें। ठंडा होने के बाद इसे साफ और सूखे कांच के जार में भरकर स्टोर करें। परफेक्ट आम का मुरब्बा बनाने की कुकिंग टिप्स हल्के खट्टे और सख्त कच्चे आम का इस्तेमाल करें। मुरब्बा बनाते समय हमेशा भारी तले की कड़ाही का उपयोग करें। चाशनी को बहुत ज्यादा गाढ़ा न करें, क्योंकि ठंडा होने पर यह और गाढ़ी हो जाती है। पूरी तरह ठंडा होने के बाद ही एयरटाइट कांच के जार में भरें। हमेशा सूखे और साफ चम्मच से ही मुरब्बा निकालें, इससे इसकी शेल्फ लाइफ बढ़ती है। किसके साथ करें सर्व? गरमागरम पूरी  आलू के पराठे सादा पराठा फुल्का या रोटी मठरी बच्चों के टिफिन में ब्रेड रोल या पराठे के साथ प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण (लगभग 2 टेबलस्पून) कैलोरी: 95–110 kcal कार्बोहाइड्रेट: 25–27 ग्राम प्रोटीन: 0.5 ग्राम फैट: 0.5 ग्राम फाइबर: 1–2 ग्राम आम का मुरब्बा खाने के फायदे कच्चा आम विटामिन C का अच्छा स्रोत है। पाचन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। स्वाद बढ़ाने के साथ भोजन में विविधता लाता है। लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है। बच्चों और बड़ों दोनों को पसंद आने वाली पारंपरिक रेसिपी है। ध्यान दें: इस मुरब्बे में चीनी की मात्रा अधिक होती है। यदि आपको डायबिटीज है या शुगर कंट्रोल में रखनी है, तो इसका सेवन सीमित मात्रा में करें।

anmol जुलाई 15, 2026 0
Packaged food products with health claims under scrutiny by FSSAI in India.
Food Notice: नाम के कारण FSSAI के निशाने पर आईं 8 कंपनियां, 'Healthy' और 'Vegan' जैसे दावों पर उठे सवाल

नई दिल्ली: अक्सर कहा जाता है कि "नाम में क्या रखा है", लेकिन कई बार यही नाम किसी उत्पाद की सबसे बड़ी पहचान और बिक्री का आधार बन जाता है। यही वजह है कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कुछ कंपनियों के ब्रांड नाम और उनके उत्पादों पर किए गए दावों को लेकर आपत्ति जताई है। खाद्य नियामक FSSAI ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के कथित उल्लंघन के आरोप में आठ कंपनियों को नोटिस जारी किया है। प्राधिकरण का कहना है कि इन कंपनियों के ब्रांड नाम, टैगलाइन या उत्पाद संबंधी दावे उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं। इन कंपनियों को भेजा गया नोटिस FSSAI की ओर से नोटिस पाने वाली कंपनियों में शामिल हैं— Emami Healthy & Tasty Health Aid TruVy The Healthy Factory Healthy Master Healthy Choice Plan B Newherbs नियामक का मानना है कि इन कंपनियों के कुछ नाम और दावे उत्पादों की वास्तविक प्रकृति से अलग संदेश दे सकते हैं। Emami Healthy & Tasty पर क्या है आपत्ति? कोलकाता स्थित इमामी समूह की एडिबल ऑयल यूनिट Emami Healthy & Tasty के नाम पर FSSAI ने सवाल उठाया है। प्राधिकरण का कहना है कि "Healthy & Tasty" जैसा ट्रेड नाम उपभोक्ताओं में यह धारणा बना सकता है कि उत्पाद स्वाभाविक रूप से स्वास्थ्य के लिए बेहतर है, जबकि ऐसे दावों को नियमों के अनुरूप साबित करना आवश्यक होता है। 'Plant Based Vegan' दावे पर Plan B को नोटिस Plan B अपने उत्पादों को "Plant Based Vegan" के रूप में प्रचारित करती है। FSSAI के अनुसार, कंपनी ने आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त किए बिना अपने उत्पादों को वीगन के रूप में पेश किया, जिससे ग्राहकों के बीच गलत धारणा बन सकती है। The Healthy Factory के उत्पाद भी जांच के दायरे में The Healthy Factory के— Zero Maida Whole Wheat Bread Zero Maida Pizza Base जैसे उत्पादों पर किए गए दावों को भी FSSAI ने जांच के दायरे में रखा है। नियामक का कहना है कि ऐसे दावे उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं। TruVy और Newherbs पर भी सवाल TruVy के— Healthy Mix Veggie Chips Healthy Ragi Chips Healthy Moong Dal Chips जैसे उत्पादों में कई अन्य सामग्री शामिल होने के बावजूद "Healthy" शब्द के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई गई है। वहीं Newherbs की "True Vitamin" श्रृंखला को लेकर FSSAI का कहना है कि यह नाम उसके निर्धारित मानकों में परिभाषित नहीं है और इससे उपभोक्ता भ्रमित हो सकते हैं। टैगलाइन और ब्रांडिंग पर भी आपत्ति FSSAI ने Healthy Master की टैगलाइन "Vision to Serve Healthy", Healthy Choice के "Healthy Food for Healthy Life Poha" और Health Aid के ब्रांड नाम पर भी सवाल उठाए हैं। प्राधिकरण का मानना है कि केवल नाम या टैगलाइन देखकर ग्राहक उत्पाद को अधिक स्वास्थ्यवर्धक मान सकते हैं, जबकि वास्तविक पोषण मूल्य अलग हो सकता है। उपभोक्ताओं के लिए क्या है संदेश? विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी खाद्य उत्पाद को खरीदते समय केवल उसके नाम या पैकेजिंग पर भरोसा करने के बजाय— न्यूट्रिशन लेबल पढ़ें, सामग्री (Ingredients) की सूची देखें, और प्रमाणित दावों पर ही भरोसा करें।

surbhi जून 15, 2026 0
Cup of hot coffee in summer highlighting health benefits and hydration balance with steam rising
गर्मियों में भी गर्म कॉफी क्यों हो सकती है शरीर के लिए बेहतर? विशेषज्ञों ने बताए चौंकाने वाले फायदे

गर्मियों में ज्यादातर लोग ठंडी कॉफी या आइस्ड कॉफी पीना पसंद करते हैं। तेज गर्मी में बर्फ से भरा कॉफी का गिलास राहत देने वाला लगता है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गर्म मौसम में भी गर्म कॉफी शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकती है। पोषण विशेषज्ञों और डॉक्टरों के मुताबिक, गर्म कॉफी पाचन को बेहतर बनाने, शरीर के तापमान को संतुलित रखने और ऊर्जा को स्थिर बनाए रखने में मदद कर सकती है। वहीं जरूरत से ज्यादा आइस्ड कॉफी शरीर में डिहाइड्रेशन, बेचैनी और अत्यधिक कैफीन सेवन जैसी समस्याएं बढ़ा सकती है। गर्म कॉफी पाचन के लिए क्यों मानी जाती है बेहतर? मुंबई की गट हेल्थ न्यूट्रिशनिस्ट पायल कोठारी के अनुसार, गर्म कॉफी शरीर के प्राकृतिक पाचन तंत्र के साथ बेहतर तालमेल बनाती है। गर्म पेय पदार्थ पाचन क्रिया को सक्रिय रखते हैं और रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इसके विपरीत, बहुत ठंडी कॉफी कुछ लोगों में पाचन को धीमा कर सकती है। खासकर जिन लोगों को पेट फूलना, गैस या संवेदनशील पाचन की समस्या होती है, उनके लिए आइस्ड कॉफी परेशानी बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि गर्म कॉफी धीरे-धीरे पी जाती है, जबकि आइस्ड कॉफी को लोग तेजी से खत्म कर देते हैं। इससे शरीर में कैफीन की मात्रा अचानक बढ़ सकती है। ज्यादा आइस्ड कॉफी क्यों बन सकती है समस्या? इंटीग्रेटिव लाइफस्टाइल विशेषज्ञ ल्यूक कोटिन्हो के मुताबिक, कोल्ड ब्रू कॉफी को लंबे समय तक तैयार किया जाता है, जिसके कारण उसमें कैफीन की मात्रा अधिक हो सकती है। चूंकि इसका स्वाद कम कड़वा और ज्यादा स्मूद होता है, लोग बिना महसूस किए ज्यादा मात्रा में इसे पी लेते हैं। इससे चिंता, घबराहट, एसिडिटी, नींद की समस्या और डिहाइड्रेशन जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्म कॉफी शरीर को अधिक संतुलित और धीरे-धीरे ऊर्जा देती है। इससे शरीर को अचानक झटका महसूस नहीं होता। क्या गर्म कॉफी सच में शरीर को ठंडा करने में मदद करती है? यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार गर्म पेय पदार्थ शरीर को ठंडा करने में भी मदद कर सकते हैं। मुंबई के न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर प्रशांत माखीजा बताते हैं कि जब हम गर्म पेय पीते हैं तो शरीर की रक्त वाहिकाएं फैलती हैं। इससे शरीर की गर्मी त्वचा के जरिए बाहर निकलने लगती है। वहीं न्यूट्रिशनिस्ट नमामी अग्रवाल के मुताबिक, गर्म पेय हल्का पसीना लाने में मदद करते हैं। जब पसीना सूखता है, तो शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडक मिलती है। क्या आइस्ड कॉफी पूरी तरह छोड़ देनी चाहिए? विशेषज्ञों का कहना है कि आइस्ड कॉफी पूरी तरह नुकसानदायक नहीं है। समस्या तब बढ़ती है जब इसमें अत्यधिक चीनी, फ्लेवर्ड सिरप, व्हिप्ड क्रीम और कृत्रिम स्वीटनर मिलाए जाते हैं। साधारण और सीमित मात्रा में पी गई आइस्ड कॉफी संतुलित जीवनशैली का हिस्सा हो सकती है। हालांकि लगातार इसे पानी की तरह पीना शरीर के लिए ठीक नहीं माना जाता। कॉफी पीने का सही तरीका क्या है? विशेषज्ञों के अनुसार कॉफी खाली पेट पीने से बचना चाहिए। सुबह नाश्ते के बाद या मध्य सुबह कॉफी पीना बेहतर माना जाता है। इससे एसिडिटी और कोर्टिसोल बढ़ने की संभावना कम हो सकती है। साथ ही पूरे दिन पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है, ताकि शरीर में डिहाइड्रेशन न हो। संतुलन है सबसे जरूरी स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कॉफी छोड़ने की जरूरत नहीं है, बल्कि इसे सही तरीके और सीमित मात्रा में पीना अधिक जरूरी है। गर्मियों में भी गर्म कॉफी कई लोगों के लिए शरीर को बेहतर महसूस कराने में मदद कर सकती है, बशर्ते कैफीन का सेवन संतुलित रखा जाए।  

surbhi मई 26, 2026 0
Udaan Cafe in Ranchi
रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट अब मिलेगा सस्ता खाना, शुरू हो रहा ‘उड़ान कैफे’

रांची। झारखंड की राजधानी रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर हवाई यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। जल्द ही यहां ‘उड़ान यात्री कैफे’ की शुरुआत होने जा रही है। इस कैफे में यात्रियों को चाय, नाश्ता और पानी की बोतल जैसी जरूरी चीजें बहुत कम कीमत पर मिलेंगी, जिससे सफर और ज्यादा आसान और किफायती हो जाएगा।   आम यात्रियों को सीधा फायदा एयरपोर्ट निदेशक विनोद कुमार के मुताबिक, यह योजना देश के कई बड़े एयरपोर्ट पर पहले से सफलतापूर्वक चल रही है और अब रांची में भी इसे शुरू करने की तैयारी है। इसके लिए एयरपोर्ट परिसर में जगह भी चिन्हित कर ली गई है। उन्होंने बताया कि इस पहल का मकसद एयरपोर्ट पर मिलने वाले महंगे खाने-पीने से यात्रियों को राहत देना है। खासकर आम और मध्यम वर्ग के लोगों को इससे काफी फायदा होगा, क्योंकि अब उन्हें ज्यादा पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे। कई शहरों में मौजूद है ये सुविधा ‘उड़ान यात्री कैफे’ की शुरुआत देश के कई शहरों में पहले ही हो चुकी है। इनमें जम्मू, चंडीगढ़, अमृतसर, वाराणसी, पटना, कोलकाता, अगरतला, भुवनेश्वर, चेन्नई, पुणे, सूरत और राजकोट जैसे शहर शामिल हैं। इस योजना की शुरुआत केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने की थी। इस कैफे की सबसे खास बात इसकी कीमतें हैं। यहां यात्रियों को सिर्फ 10 रुपये में चाय, 20 रुपये में समोसा और 10 रुपये में पानी की बोतल मिलेगी।

Unknown मई 4, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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