नई दिल्ली, एजेंसियां। ईरान जंग के बीच कंप्रेस्ड नेचुरल गैस यानी CNG के दाम पिछले दो हफ्तों के भीतर चौथी बार बढ़ गए हैं। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने आज मंगलवार 26 मई को CNG ₹2 प्रति किलोग्राम महंगी कर दी है। दिल्ली-NCR सहित कई शहरों में ये दाम बढ़ाए गए हैं। दिल्ली और NCR के शहरों में अब यह होंगे नए रेट्स दिल्ली में CNG ₹81.09 प्रति किलो से बढ़कर अब ₹83.09 प्रति किलो हो गई है। नोएडा, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में CNG के लिए ₹91.70 देने होंगे। गुरुग्राम में CNG की कीमत बढ़कर ₹88.12 प्रति किलोग्राम कर दी गई है। पेट्रोल-डीजल के दाम महीने में चौथी बार बढ़े तेल कंपनियों ने कल पेट्रोल ₹2.61 और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा कर दिया। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में अब पेट्रोल की कीमत ₹102.12 और डीजल की कीमत ₹95.20 हो गई है। पेट्रोल-डीजल और CNG की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी पेट्रोल-डीजल और सीएनजी के दामों बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे, जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रही है तो पेट्रोल-डीजल और CNG की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं। तेल कंपनियों को हर दिन 600 करोड़ का घाटा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि सरकारी तेल कंपनियों को करीब 600 करोड़ रुपए प्रति दिन का घाटा हो रहा है। 15 मई से शुरू हुए कीमतों में बदलाव से पहले पेट्रोल, डीजल और घरेलू रसोई गैस बेचने पर कंपनियों को रोजाना लगभग 1,000 करोड़ रुपए का घाटा हो रहा था।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देशभर में महंगाई के बीच पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले 11 दिनों में पेट्रोल-डीजल के दामों में कुल 7 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है। सोमवार को एक बार फिर ईंधन की कीमतों में इजाफा किया गया, जिससे परिवहन और रोजमर्रा की जरूरतों पर असर पड़ने लगा है। क्यों बढ़ रहे हैं ईंधन के दाम? विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और ईरान संकट के कारण तेल कंपनियों पर भारी दबाव बना हुआ है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर होने वाला कोई भी भू-राजनीतिक तनाव सीधे भारत के आयात बिल और घरेलू ईंधन कीमतों को प्रभावित करता है। 28 फरवरी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं, लेकिन भारत में करीब 74 दिनों तक पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखे गए। इस दौरान सरकारी तेल कंपनियां महंगे दामों पर कच्चा तेल खरीदती रहीं, लेकिन पुराने रेट पर पेट्रोल-डीजल बेचने के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। तेल कंपनियों को हुआ भारी घाटा रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियों का कुल घाटा 1.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि घाटे की भरपाई के लिए अभी भी पेट्रोल-डीजल के दामों में और बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है। आगे क्या होगी स्थिति? हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की खबरों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हल्की गिरावट आई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सप्लाई चेन और वैश्विक जोखिमों के कारण कीमतों में स्थिरता आने में समय लग सकता है। सरकार के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है। एक तरफ आम जनता को महंगाई से राहत देनी है, वहीं दूसरी ओर तेल कंपनियों के बढ़ते घाटे को भी संभालना है। ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
HDFC Bank ने अपने कुछ कर्मचारियों को हफ्ते में दो दिन घर से काम करने की अनुमति दे दी है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है और देश में पेट्रोल-डीजल महंगा हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह व्यवस्था फिलहाल 30 दिनों के लिए लागू की गई है, जिसके बाद इसकी समीक्षा की जाएगी। बैंक ने यह सुविधा मुख्य रूप से बिजनेस एनेबलिंग और कॉरपोरेट एनेबलिंग फंक्शंस से जुड़े कर्मचारियों को दी है। किन कर्मचारियों को मिलेगा Work From Home? HDFC Bank के अनुसार हाइब्रिड मॉडल में शामिल विभागों में: ट्रेजरी ऑपरेशंस क्रेडिट अंडरराइटिंग एंड रिस्क ट्रांजैक्शन बुकिंग डिजिटल बैंकिंग IT सर्विसेज जैसे बिजनेस एनेबलिंग फंक्शंस शामिल हैं। वहीं कॉरपोरेट एनेबलिंग फंक्शंस में: ह्यूमन रिसोर्सेज फाइनेंस एंड अकाउंट्स लीगल एंड कंप्लायंस सेक्रेटेरियल और बोर्ड फंक्शंस को शामिल किया गया है। हालांकि बैंक ने साफ किया है कि उसकी सभी शाखाएं और कस्टमर फेसिंग सर्विसेज पहले की तरह सामान्य रूप से काम करती रहेंगी। पीएम मोदी की अपील के बाद बढ़ा Hybrid Work Model प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में कंपनियों और लोगों से ईंधन बचाने के लिए Work From Home को बढ़ावा देने की अपील की थी। ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 50% तक तेजी आई है। इसका असर: भारत के आयात बिल चालू खाते के घाटे पेट्रोल-डीजल कीमतों और रुपये की स्थिति पर साफ दिखाई दे रहा है। इसी वजह से कई कंपनियां अब हाइब्रिड वर्क मॉडल की तरफ लौट रही हैं। दूसरे बैंक भी अपना रहे Hybrid Model IndusInd Bank ने भी हाल ही में कुछ कर्मचारियों के लिए हाइब्रिड मॉडल लागू किया है। वहीं Axis Bank में 2021 से ही नॉन-कस्टमर फेसिंग कर्मचारियों के लिए Hybrid Work Policy लागू है, जिसके तहत कर्मचारियों को सप्ताह में सिर्फ दो दिन ऑफिस आना पड़ता है। Zoho ने किया Work From Home से इनकार जहां कई कंपनियां WFH को बढ़ावा दे रही हैं, वहीं Zoho Corporation के फाउंडर Sridhar Vembu ने साफ कहा है कि उनकी कंपनी फिलहाल Work From Home लागू नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि कंपनी ने हाल ही में अपनी WFH पॉलिसी की समीक्षा की थी और निष्कर्ष निकाला कि खासकर रिसर्च और एनालिसिस जैसे क्षेत्रों में आमने-सामने बैठकर काम करने से बेहतर नतीजे मिलते हैं। हालांकि ईंधन बचाने के लिए Zoho: इलेक्ट्रिक बस इलेक्ट्रिक कुकिंग और सोलर एनर्जी जैसे विकल्पों पर काम कर रही है। बढ़ती तेल कीमतों का असर कंपनियों की रणनीति पर ईंधन की बढ़ती कीमतों ने अब कंपनियों की वर्क पॉलिसी पर भी असर डालना शुरू कर दिया है। जहां कुछ कंपनियां कर्मचारियों को घर से काम की सुविधा देकर ट्रैवल कम करना चाहती हैं, वहीं कुछ कंपनियां ऑफिस कल्चर को ज्यादा प्रभावी मान रही हैं। आने वाले समय में तेल की कीमतों और आर्थिक हालात के आधार पर Work From Home और Hybrid Work Model को लेकर और बड़े फैसले देखने को मिल सकते हैं।
Kenya में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बाद हिंसक प्रदर्शन भड़क उठे हैं। राजधानी Nairobi समेत कई शहरों में लोगों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। हिंसा और झड़पों में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 30 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल संकट का असर अब अफ्रीकी देशों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। खाड़ी देशों से तेल आयात पर निर्भर केन्या में ईंधन संकट तेजी से गहराता जा रहा है। सड़कों पर उतरे लोग, ट्रांसपोर्ट सिस्टम ठप सोमवार सुबह नैरोबी के बाहरी इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम कर दीं। कई जगहों पर बैरिकेड लगाए गए और टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने कारों और “बोड़ा-बोड़ा” मोटरसाइकिलों को भी रोकने की कोशिश की। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि राजधानी का सार्वजनिक परिवहन लगभग ठप पड़ गया। स्कूल बंद रहे और कई सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द करने पड़े। ईंधन की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी केन्या सरकार ने हाल ही में वैश्विक तेल कीमतों में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए थे। रिपोर्ट्स के अनुसार: पेट्रोल की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है डीजल की कीमतों में लगभग 46 प्रतिशत तक उछाल आया है डीजल की कीमत बढ़ने के बाद परिवहन कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी, जिससे हालात और बिगड़ गए। गृह मंत्री ने की मौतों की पुष्टि केन्या के गृह मंत्री Kipchumba Murkomen ने मीडिया से बातचीत में कहा, “आज की हिंसा में चार केन्याई नागरिकों की मौत हुई है और 30 से अधिक लोग घायल हुए हैं।” उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि सरकार स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य संकट का असर ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़े तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। सप्लाई बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी आई, जिसका असर सीधे केन्या जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ा। सरकार ने राहत पैकेज का किया ऐलान केन्या सरकार ने कहा है कि वह डीजल और मिट्टी तेल की बढ़ती कीमतों से लोगों को राहत देने के लिए लगभग 3 करोड़ 85 लाख डॉलर खर्च कर रही है। इसके अलावा ईंधन सप्लाई बनाए रखने के लिए गुणवत्ता मानकों में अस्थायी छूट भी दी गई है। महंगाई और गरीबी से बढ़ा दबाव पूर्वी अफ्रीका की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने के बावजूद केन्या की बड़ी आबादी अब भी आर्थिक संकट से जूझ रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, देश की लगभग एक-तिहाई आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करती है। अगर तेल संकट और महंगाई पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो आने वाले दिनों में केन्या में सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ सकती है।
रांची। झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स ने राज्य में पेट्रोल-डीजल की किल्लत और बढ़ती कीमतों पर गहरी चिंता जताई है। वैश्विक ईंधन बाजार में अस्थिरता के बीच झारखंड में ईंधन संकट ने आम लोगों के साथ-साथ उद्योग और परिवहन क्षेत्र की परेशानियां बढ़ा दी हैं। इस बीच मंत्री इरफ़ान अंसारी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उद्योग और परिवहन पर सबसे ज्यादा असर चैंबर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने कहा कि राज्य में पेट्रोल-डीजल की कमी से व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। एक ओर ईंधन की किल्लत है, वहीं दूसरी ओर कीमतों में बढ़ोतरी ने बाजार पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। उन्होंने कहा कि डीजल की कमी के कारण फैक्ट्रियों में जनरेटर तक नहीं चल पा रहे हैं, जिससे उद्योग संचालन मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि परिवहन उद्योग पेट्रोल-डीजल पर सबसे अधिक निर्भर है। ऐसे में ईंधन संकट से माल ढुलाई, सप्लाई और बाजार व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। चैंबर ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर झारखंड में ईंधन की समुचित और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। राजधानी में कई पेट्रोल पंप हुए ड्राई रांची सहित राज्य के कई हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें और अव्यवस्था देखी जा रही है। कई पेट्रोल पंपों के ड्राई होने की खबरों के बीच लोगों में चिंता बढ़ गई है। बढ़ती भीड़ के कारण पंपों पर तनावपूर्ण स्थिति बन रही है। मंत्री इरफान अंसारी ने सीएम को लिखा पत्र स्थिति को गंभीर मानते हुए मंत्री इरफान अंसारी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर राज्य में ईंधन संकट पर तुरंत कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने पेट्रोल पंपों पर सुरक्षा बढ़ाने और जिला प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया है। मंत्री ने कहा कि जनता की सुरक्षा और सुविधा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी हाल में लोगों को परेशानी में नहीं छोड़ा जाएगा।
रांची। रांची में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता को लेकर लोगों के बीच बनी चिंता के कारण शहर के कई पेट्रोल पंपों पर भीड़ बढ़ गई है। इसी स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक कर ईंधन आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की। बैठक की अध्यक्षता जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने की। तेल कंपनियों के साथ हुई समीक्षा बैठक बैठक में इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। अधिकारियों ने बताया कि जिले में ईंधन की सप्लाई सामान्य रूप से जारी है और किसी तरह की वास्तविक कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि लोगों के बीच फैली अफवाहों और घबराहट के कारण कई उपभोक्ता जरूरत से अधिक पेट्रोल और डीजल खरीद रहे हैं, जिससे कुछ पेट्रोल पंपों पर दबाव बढ़ गया है। अधिकारियों के अनुसार कई लोग वाहनों के अलावा अतिरिक्त कंटेनरों में भी ईंधन जमा करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे सप्लाई व्यवस्था पर अस्थायी असर पड़ रहा है, जबकि कंपनियां लगातार ईंधन की आपूर्ति बनाए हुए हैं। प्रशासन ने दिए निगरानी के निर्देश उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिले के सभी पेट्रोल पंपों की नियमित निगरानी की जाए और कहीं भी कृत्रिम कमी की स्थिति उत्पन्न न होने दी जाए। उन्होंने तेल कंपनियों से समन्वय बनाकर निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि ईंधन की उपलब्धता पूरी तरह सामान्य है और लोगों को किसी भी अफवाह पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। उपायुक्त ने आम नागरिकों से अपील की कि वे केवल अपनी जरूरत के अनुसार ही पेट्रोल-डीजल खरीदें, ताकि सभी उपभोक्ताओं को आसानी से ईंधन मिल सके। लगातार नजर रख रहा प्रशासन बैठक में जिला आपूर्ति विभाग और तेल कंपनियों के अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने कहा कि जरूरत पड़ने पर आगे भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे ताकि आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
नई दिल्ली, एजेंसियां। पेट्रोल और डीजल 3-3 रुपए प्रति लीटर महंगा हो गया है। रांची में अब पेट्रोल 103 रुपए प्रति लीटर में मिलेगा। डीजल की कीमत करीब 101 रुपए प्रति लीटर हो गई है। नए दाम आज 15 मई से लागू हो गए हैं। करीब 2 साल बाद दामों में ये बढ़ोतरी की गई है। CNG भी ₹2 प्रति किलो तक महंगी पेट्रोल और डीजल की कीमतों के साथ प्रमुख शहरों में CNG भी ₹2 प्रति किलो तक महंगी हो गई हैं। दिल्ली में अब एक किलो CNG के लिए ₹79.09 खर्च करने होंगे। महानगरों में पेट्रोल की नई कीमते शहर पहले अब दिल्ली 94.77 97.77 3.00 मुंबई 103.50 106.68 3.14 कोलकाता 105.45 108.74 3.29 चेन्नई 100.80 103.67 2.87 महानगरों में डीजल की नई कीमतें दिल्ली 87.67 90.67 मुंबई 90.03 93.14 कोलकाता 92.02 95.13 चेन्नई 92.39 95.25 नोट: ये संभावित कीमतें है। अन्य चीजों पर पड़ेगा असर डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर आम आदमी की जेब और किचन पर पड़ता है। मालभाड़ा बढ़ेगा: ट्रक और टेम्पो का किराया बढ़ जाएगा, जिससे दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन महंगे हो जाएंगे। खेती की लागत: ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए किसानों को ज्यादा खर्च करना होगा, जिससे अनाज की लागत बढ़ेगी। बस-ऑटो का किराया: सार्वजनिक परिवहन और स्कूल बसों के किराए में भी इजाफा देखने को मिल सकता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी? इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं। 2024 से दाम नहीं बदले थे, चुनाव से पहले कटौती हुई थी मार्च 2024 से कीमतें स्थिर थी देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें मार्च 2024 से स्थिर बनी हुई थीं। लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले सरकार ने कीमतों में ₹2 प्रति लीटर की कटौती कर जनता को राहत दी थी। हालांकि, तकनीकी रूप से भारत में ईंधन की कीमतें विनियमित हैं और कंपनियां अंतरराष्ट्रीय क्रूड की 15 दिनों की औसत कीमत के आधार पर हर दिन रेट बदल सकती हैं, लेकिन राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण इन्हें लंबे समय तक नहीं बदला गया।
वैश्विक संकट का भारत की अर्थव्यवस्था पर असर मध्य पूर्व में जारी तनाव और तेल आपूर्ति में बाधा का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चेतावनी दी है कि अगर यह संकट लंबे समय तक जारी रहता है तो देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका RBI गवर्नर ने कहा कि अभी तक सरकार ने खुदरा ईंधन कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है, लेकिन स्थिति लगातार बिगड़ती रही तो कीमतों का बोझ आम जनता पर डाला जा सकता है। उनका कहना है कि लंबे समय तक वैश्विक तेल संकट जारी रहने पर कीमतें बढ़ना लगभग तय है। भारत पर तेल संकट का सीधा असर मध्य पूर्व में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम तेल मार्गों में बाधा के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर वैश्विक बाजार के साथ-साथ भारत पर भी पड़ रहा है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। भारत की स्थिति इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि देश खाद्य तेल और उर्वरक के लिए भी विदेशों पर निर्भर रहता है। रुपये में गिरावट से बढ़ी चिंता इसी बीच विदेशी मुद्रा बाजार में भी दबाव देखा जा रहा है। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होकर 95 के स्तर से नीचे कारोबार कर रहा है, जिससे आयात और महंगा हो गया है। सरकार की नीति और कदम सरकार ने अब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखी हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय दबाव रहने पर स्थिति बदल सकती है। प्रधानमंत्री ने भी ईंधन की खपत कम करने और बचत पर जोर देने की अपील की है ताकि विदेशी मुद्रा पर दबाव कम हो सके। वैश्विक हालात और भारत की चुनौती RBI गवर्नर ने स्विट्जरलैंड में एक सम्मेलन के दौरान कहा कि सरकार अब तक वित्तीय अनुशासन की नीति पर चल रही है, लेकिन वैश्विक अस्थिरता के कारण आने वाले समय में महंगाई और ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। मध्य पूर्व संकट यदि लंबे समय तक जारी रहता है तो भारत में ईंधन महंगा होना तय माना जा रहा है। ऐसे में सरकार और आम जनता दोनों के लिए आर्थिक चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।
ट्रोल-डीजल रेट में बदलाव नहीं देश में विधानसभा चुनावों की वोटिंग समाप्त होने से ठीक पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर फैली अटकलों पर केंद्र सरकार ने बड़ा बयान दिया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल ईंधन की कीमतों में किसी तरह की बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव नहीं है। चुनाव के बाद भी दाम बढ़ने की अटकलों पर विराम सरकारी बयान के अनुसार, 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में मतदान समाप्त होने के बाद भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार अस्थिर बनी हुई हैं, जिसके कारण पहले से ही बाजार में चिंता का माहौल है। अफवाहों पर सरकार की चेतावनी पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, कुछ राज्यों में कीमत बढ़ने की अफवाहों के चलते लोगों ने पैनिक बाइंग शुरू कर दी थी। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार– कई पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी गईं कुछ जगहों पर मांग 30% से ज्यादा बढ़ गई सरकार ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की तेल कंपनियों पर बढ़ता आर्थिक दबाव सरकारी तेल कंपनियां मौजूदा दरों पर भारी नुकसान झेल रही हैं। अनुमानित दैनिक घाटा करीब ₹2,400 करोड़ पेट्रोल पर लगभग ₹20 प्रति लीटर का नुकसान डीजल पर करीब ₹100 प्रति लीटर तक का घाटा इसके बावजूद सरकार ने कीमतें स्थिर रखी हैं। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल पिछले दो महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 50% से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य पूर्व में तनाव और सप्लाई बाधाओं के कारण तेल बाजार प्रभावित हुआ है, जिससे कीमतें 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। 2022 से स्थिर हैं खुदरा ईंधन के दाम भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें अप्रैल 2022 से लगभग स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली में पेट्रोल: ₹94.77 प्रति लीटर डीजल: ₹87.67 प्रति लीटर हालांकि अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू रेट के बीच अंतर लगातार बढ़ रहा है। सरकार ने क्या कहा? पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में फिलहाल पर्याप्त ईंधन स्टॉक मौजूद है। पेट्रोल, डीजल और LPG का पर्याप्त भंडार आपूर्ति व्यवस्था सामान्य किसी भी तरह की कमी की स्थिति नहीं सरकार ने फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से इनकार कर दिया है, लेकिन वैश्विक बाजार और तेल कंपनियों के घाटे को देखते हुए आगे स्थिति पर नजर बनी रहेगी। फिलहाल आम जनता को राहत जरूर मिली है, लेकिन तेल बाजार की अस्थिरता चिंता का कारण बनी हुई है।
अमेरिका में बढ़ती महंगाई के बीच अब डाक सेवाओं की कीमतों में भी इजाफा होने जा रहा है। United States Postal Service (USPS) ने ईंधन की बढ़ती लागत के चलते पैकेज डिलीवरी पर 8% सरचार्ज लगाने का ऐलान किया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है, जिसका सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ रहा है। कब से लागू होगा नया शुल्क? USPS के अनुसार, यह नया सरचार्ज 26 अप्रैल 2026 से लागू होगा और 17 जनवरी 2027 तक जारी रहेगा। यह अतिरिक्त शुल्क कई प्रमुख सेवाओं पर लागू होगा, जिनमें शामिल हैं: Priority Mail Express Priority Mail USPS Ground Advantage Parcel Select इसका मतलब है कि अमेरिका में आम उपभोक्ताओं से लेकर छोटे कारोबारियों तक सभी के लिए पार्सल भेजना अब पहले से महंगा हो जाएगा। 55 साल में पहली बार लिया गया फैसला USPS के इतिहास में यह पहली बार है जब इस तरह का ईंधन-आधारित सरचार्ज लागू किया जा रहा है। पिछले 55 वर्षों में ऐसा कदम नहीं उठाया गया था। यह निर्णय इस बात का संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय संकट किस तरह से घरेलू सेवाओं और रोजमर्रा की लागत को प्रभावित कर रहा है। USPS का पक्ष: प्रतिस्पर्धियों से कम बढ़ोतरी USPS ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि: अन्य निजी कंपनियां पहले ही इससे अधिक सरचार्ज लगा चुकी हैं USPS का यह शुल्क प्रतिस्पर्धियों की तुलना में एक-तिहाई से भी कम है इसके बावजूद उनकी सेवाएं अभी भी दुनिया के विकसित देशों में सबसे किफायती बनी हुई हैं संगठन का कहना है कि यह कदम देशभर में अपनी डिलीवरी नेटवर्क को बनाए रखने के लिए जरूरी है, ताकि सप्ताह में कम से कम छह दिन सेवाएं जारी रखी जा सकें। राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज इस फैसले पर अमेरिकी राजनीति में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। JB Pritzker ने इस बढ़ोतरी की आलोचना करते हुए इसे “ट्रंप मेल टैक्स” करार दिया। वहीं Raphael Warnock ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब डाक सेवाएं भी महंगी हो गई हैं। ईंधन की कीमतों में तेज उछाल पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से अमेरिका में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगभग 1 डॉलर प्रति गैलन तक की वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर सिर्फ शिपिंग लागत ही नहीं, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। तेल आपूर्ति में बाधा और वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका ने चिंता और बढ़ा दी है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर अब भारत के ईंधन बाजार पर साफ दिखने लगा है। सोमवार, 23 मार्च 2026 को देश के कई राज्यों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव देखने को मिला। जहां कुछ राज्यों में तेल महंगा हुआ है, वहीं कुछ जगहों पर मामूली राहत भी मिली है। ग्लोबल मार्केट में Brent Crude Oil $112 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जबकि WTI Crude Oil भी $100 के करीब है। मिडिल ईस्ट तनाव और डोनाल्ड ट्रम्प की चेतावनी के बाद तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है, जिसका सीधा असर भारत में ईंधन कीमतों पर पड़ा है। मेट्रो शहरों में क्या है आज का रेट? देश की तेल कंपनियों ने सुबह 6 बजे नए रेट जारी किए। प्रमुख महानगरों में कीमतें इस प्रकार हैं: दिल्ली: पेट्रोल ₹94.77 | डीजल ₹87.67 प्रति लीटर मुंबई: पेट्रोल ₹103.54 | डीजल ₹90.03 प्रति लीटर कोलकाता: पेट्रोल ₹105.45 | डीजल ₹92.02 प्रति लीटर चेन्नई: पेट्रोल ₹100.84 | डीजल ₹92.39 प्रति लीटर इन शहरों में आज कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। इन राज्यों में बढ़े दाम कई राज्यों में आज ईंधन महंगा हो गया है: बिहार: पेट्रोल ₹106.95, डीजल ₹93.14 उत्तर प्रदेश: पेट्रोल ₹95.00, डीजल ₹88.72 झारखंड: पेट्रोल ₹99.16, डीजल ₹93.89 गोवा: पेट्रोल ₹96.96, डीजल ₹88.71 केरल: पेट्रोल ₹96.96, डीजल ₹96.02 तमिलनाडु: पेट्रोल ₹102.34, डीजल ₹93.89 इसके अलावा हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और मणिपुर में भी मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इन राज्यों में मिली राहत कुछ राज्यों में तेल की कीमतों में गिरावट भी देखी गई: गुजरात: पेट्रोल ₹95.07, डीजल ₹90.77 कर्नाटक: पेट्रोल ₹102.41, डीजल ₹90.48 मध्य प्रदेश: पेट्रोल ₹106.18, डीजल ₹91.56 महाराष्ट्र: पेट्रोल ₹105.43, डीजल ₹91.94 ओडिशा: पेट्रोल ₹102.23, डीजल ₹93.79 उत्तराखंड: पेट्रोल ₹94.51, डीजल ₹89.44 पश्चिम बंगाल: पेट्रोल ₹105.80, डीजल ₹92.37 क्यों बदलते हैं रोज दाम? पेट्रोल-डीजल की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम, डॉलर-रुपया विनिमय दर और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए VAT शामिल हैं। यही वजह है कि हर राज्य और शहर में कीमतें अलग-अलग होती हैं। घर बैठे ऐसे चेक करें रेट आप अपने शहर का ताजा रेट SMS के जरिए भी जान सकते हैं: Indian Oil: RSP <City Code> भेजें 9224992249 पर BPCL: RSP भेजें 9223112222 पर HPCL: HP Price भेजें 9222201122 पर
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।